Afghanistan Earthquake: भूकंप के झटकों से थर्राई धरती; अब तक 600 से अधिक लोगों की मौत, 1500 से अधिक घायल
Afghanistan Earthquake: अफगानिस्तान में सोमवार तड़के तेज भूकंप आया जिसने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। स्थानीय मीडिया और समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अफगान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, इस आपदा में अब तक 622 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई और इसका केंद्र नांगरहार प्रांत में बताया गया है। चूंकि भूकंप की गहराई सिर्फ 8 किलोमीटर थी, इसलिए इसका असर बहुत ज्यादा देखने को मिला।
कुनार प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित
भूकंप का सबसे ज्यादा असर कुनार प्रांत में देखने को मिला। यहां कई गांव पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। नूर गुल, सोकी, वटपुर, मनोगी और चापदारे इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सिर्फ कुनार गांव में ही करीब 20 लोगों की मौत और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई जगह घर मलबे में तब्दील हो गए और सड़कें भी खराब हो गई।
बचाव और राहत अभियान जारी
तालिबान प्रशासन ने तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया है। स्थानीय अधिकारी, सेना और आम लोग मिलकर घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। घायलों को हेलीकॉप्टर के जरिए राजधानी काबुल और नजदीकी जिलों के अस्पतालों में पहुंचाया जा रहा है। राहत दलों को मलबा हटाने और घायलों को निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राकृतिक बाधाओं से बढ़ी मुश्किल
भूकंप के झटकों के बाद भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं ने राहत कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई पहाड़ी रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे बचाव टीमों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां राहत दल नहीं पहुंच पाए हैं और लोग खुद ही मलबा हटाकर अपनों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
तालिबान सरकार ने इस आपदा को देखते हुए दुनिया भर से मदद मांगी है। हालांकि अब तक किसी भी विदेशी सरकार ने आधिकारिक रूप से सहायता भेजने की घोषणा नहीं की है। मिट्टी और पत्थरों से बने घरों के ढहने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। बड़ी संख्या में लोग बेघर हो चुके हैं और खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं।
बढ़ सकती है मौतों की संख्या
राहत और बचाव दलों का मानना है कि मलबे में अभी भी कई लोग दबे हो सकते हैं। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और वहां इलाज की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है।

















