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सखी महिला समूह द्वारा सावन पर्व का उत्साहपूर्ण आयोजन
जिले में 9 से 17 अगस्त तक चलेगा ‘हर घर तिरंगा अभियान’ तथा 15 अगस्त तक होंगे ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान का शुभारंभ
मनेन्द्रगढ़/एमसीबी, 06 अगस्त 2026। पुरानी बस्ती स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में "नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान" का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में *कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े (IAS) तथा पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह (IPS)* विशेष रूप से उपस्थित रहीं। यह अभियान 06 अगस्त से 20 अगस्त 2026 तक संचालित किया जाएगा।

एसईसीएल दीपका क्षेत्र में सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन
एसईसीएल दीपका क्षेत्र के ऑफिसर्स क्लब में दिनांक 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुल 16 कर्मचारी/अधिकारी को उनकी दीर्घकालीन, समर्पित एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।

भिलाई इस्पात संयंत्र ने दो गांवों में लगाए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर 90 ग्रामीणों को मिला उपचार एवं परामर्श
भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुदृढ़ करने की दिशा में दुर्ग जिला चिकित्सालय के सहयोग से दुर्ग जिले के गोढ़ी और खोपली गांवों में निःशुल्क चिकित्सा जांच एवं स्वास्थ्य परामर्श शिविर आयोजित किए। शिविरों में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया तथा आवश्यक दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया गया।

20 जुलाई 2026 को धमधा विकासखंड के ग्राम गोढ़ी में आयोजित शिविर में जिला चिकित्सालय, दुर्ग की चिकित्सा अधिकारी डॉ. गायत्री श्याम, फार्मासिस्ट जान्हवी, नर्सिंग स्टाफ तृप्ति कुमारी, पंजीयन सहयोगी राकेश कुमार तथा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर-सीएचओ) गुलेश्वरी साहू ने सेवाएं प्रदान कीं। शिविर में 40 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें 12 पुरुष और 28 महिलाएं शामिल थीं। सभी हितग्राहियों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श के साथ निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

इसी क्रम में 21 जुलाई 2026 को निकुम विकासखंड के ग्राम खोपली में आयोजित चिकित्सा शिविर में चिकित्सा अधिकारी डॉ. गायत्री श्याम, फार्मासिस्ट मनीष देशमुख, नर्सिंग स्टाफ रेणुका वर्मा तथा पंजीयन सहयोगी विवेक ध्रुव ने सेवाएं दीं। इस शिविर में 50 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें 28 पुरुष और 22 महिलाएं शामिल थीं। परीक्षण के उपरांत सभी ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श तथा निःशुल्क औषधियां वितरित की गईं।

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित इन दोनों चिकित्सा शिविरों का सफल संचालन दुर्ग जिला चिकित्सालय के सक्रिय सहयोग से किया गया। संयंत्र द्वारा निगमित सामाजिक दायित्व के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उनके गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रकार के जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।
भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों के बीच सुरक्षा जागरूकता सुदृढ़ करने हेतु लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन (एलजीआई) कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित
भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में औद्योगिक सुरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों पर लगातार लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन (एलजीआई) कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई), सेफ्टी सर्किल, फायर सेफ्टी तथा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन- पेसो) से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देकर सुरक्षित कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसी क्रम में 15 जुलाई 2026 को मानव संसाधन विकास केंद्र में "सेफ्टी सर्किल" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी, सुरक्षित कार्य व्यवहार को बढ़ावा देने तथा व्यावसायिक सुरक्षा में सतत सुधार के लिए सेफ्टी सर्किल की अवधारणा और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। महाप्रबंधक (सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग) पुष्पा एम्ब्रोस तथा इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग के विजेंद्र सिंह ने प्रस्तुतियों और संवादात्मक सत्र के माध्यम से प्रभावी सुरक्षा उपायों की जानकारी साझा की।

इसके बाद 18 जुलाई 2026 को अधिकारियों के लिए "पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई)" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 17 अधिकारियों ने सहभागिता की। सहायक प्रबंधक (एसएमएस-2) सुमित कुमार ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के सही चयन, उनके प्रभावी उपयोग तथा नियमित रखरखाव के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।

इससे पूर्व 30 जून 2026 को गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के लिए "फायर सेफ्टी" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 31 कर्मचारियों ने भाग लिया। अतिरिक्त मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजय धवस तथा फायर ऑफिसर अभिषेक कुमार ने अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षित कार्य पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी देते हुए अग्नि जोखिमों को न्यूनतम करने के उपायों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

इसी श्रृंखला के अंतर्गत 21 जुलाई 2026 को अधिकारियों के लिए "पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन- पेसो)" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर ए. नागेंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों एवं विस्फोटकों के सुरक्षित भंडारण, संचालन और उपयोग से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, नियामकीय मानकों तथा औद्योगिक सुरक्षा की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी।
भिलाई इस्पात संयंत्र में इस प्रकार के लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों को औद्योगिक सुरक्षा के विभिन्न आयामों से निरंतर अवगत कराया जा सके तथा संयंत्र में सुरक्षित, जागरूक और उत्तरदायी कार्य संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।
कोल इंडिया के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अभियान के तहत एसईसीएल ने बिलासपुर में एक ही दिन में 15 हजार पौधों का वृहद् वृक्षारोपण

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत भिलाई इस्पात संयंत्र में 40 प्रशिक्षुओं का औद्योगिक प्रशिक्षण शुरू
ओरिएंटेशन, संयंत्र भ्रमण और उत्पादन प्रक्रियाओं के व्यावहारिक प्रशिक्षण से उद्योग की कार्यप्रणाली से कराया गया परिचित

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दो दिवसीय ओरिएंटेशन सत्र से हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं को भिलाई इस्पात संयंत्र की कार्यप्रणाली, एकीकृत इस्पात संयंत्र की उत्पादन प्रक्रिया, औद्योगिक सुरक्षा मानकों, कार्यस्थल अनुशासन तथा संगठनात्मक संस्कृति की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद दो दिवसीय संयंत्र भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने प्रमुख उत्पादन इकाइयों का अवलोकन किया और आधुनिक इस्पात उत्पादन प्रणालियों तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं को निकट से समझा।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को औपचारिक शिक्षा के साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना, शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना तथा उनकी रोजगार क्षमता को सुदृढ़ बनाना है। यह योजना युवाओं को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) संजीव कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में उप प्रबंधक (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) सुष्मिता पाटला, सेक्शन अधिकारी (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) स्वतंत्र कुमार तथा टेक्निकल एसोसिएट (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) मनीष कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पर्यावरण संरक्षण एवं हरित पहल के लिए एसईसीएल को मिला ‘ग्रीन ट्रांज़िशन लीडरशिप अवॉर्ड’

विलंबित मानसून धान किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान की वैज्ञानिक सलाह जारी
पर्याप्त वर्षा मिलते ही रोपाई पूरी करें, अधिक देरी होने पर कम अवधि वाली धान किस्में एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह
दक्षिण-पश्चिम मानसून में विलंब तथा छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में वर्षा की अनिश्चितता के मद्देनजर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर ने प्रदेश के धान किसानों के लिए विशेष वैज्ञानिक कृषि परामर्श जारी किया है। संस्थान ने खरीफ मौसम में फसल की सफल स्थापना सुनिश्चित करने तथा संभावित उत्पादन हानि को न्यूनतम रखने के लिए किसानों से मौसम की स्थिति के अनुरूप समयबद्ध वैज्ञानिक एवं आकस्मिक कृषि प्रबंधन उपाय अपनाने का आग्रह किया है।

संस्थान के अनुसार, पर्याप्त वर्षा होने पर किसान 20 से 25 दिन पुराने स्वस्थ पौधों की अनुशंसित दूरी पर शीघ्र रोपाई पूरी करें। यदि रोपाई में अधिक विलंब हो, तो कम से मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों का चयन किया जाए। जिन क्षेत्रों में रोपाई संभव न हो, वहां अंकुरित बीजों का उपयोग करते हुए ड्रम सीडर अथवा छिड़काव विधि से धान की सीधी बुवाई की जा सकती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने कहा कि बदलती जलवायु और अनिश्चित वर्षा की परिस्थितियों में समय पर वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा आकस्मिक कृषि योजना अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विज्ञान केंद्रों तथा कृषि विशेषज्ञों के नियमित संपर्क में रहकर वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की।
संस्थान ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए फास्फोरस एवं पोटाश की अनुशंसित मात्रा आधार खाद के रूप में देने तथा नत्रजन उर्वरक का प्रयोग फसल की आवश्यकता के अनुसार विभाजित मात्रा में करने की सलाह दी है। साथ ही भारी वर्षा की संभावना से ठीक पहले यूरिया का प्रयोग नहीं करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पोषक तत्वों के बहाव से होने वाली हानि को रोका जा सके।
किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण, खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने तथा जलभराव की स्थिति में प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही तना छेदक, पत्ती लपेटक जैसे प्रमुख कीटों तथा ब्लास्ट एवं जीवाणुजनित पत्ती झुलसा जैसे रोगों की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक अनुशंसाओं पर आधारित पौध संरक्षण उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।
संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि विलंबित मानसून की स्थिति में फसल की प्रारंभिक अवस्था सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। किसानों को खेत संबंधी कार्यों में अनावश्यक विलंब से बचते हुए संतुलित पोषण, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।
संस्थान ने यह भी सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक वर्षा का अभाव बना रहने से धान की खेती प्रभावित होने की आशंका है, वहां स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मक्का, अरहर, उड़द, मूंग, तिल तथा मोटे अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार किया जा सकता है। संस्थान ने किसानों से मौसम आधारित कृषि परामर्श और वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन कर खरीफ फसलों को सुरक्षित एवं उत्पादक बनाने की अपील की है।
भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप 3 में मशीनीकृत हाउसकीपिंग लागू सुरक्षा और कार्यकुशलता को नई मजबूती
आधुनिक मशीनों से होगी सफाई, जनशक्ति व लागत में कमी के साथ कार्यस्थल की स्वच्छता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार

संयंत्र के अनुसार, स्टील मेल्टिंग शॉप-3 का विस्तृत कार्यक्षेत्र और चुनौतीपूर्ण औद्योगिक वातावरण हाउसकीपिंग कार्य को अत्यंत श्रम-प्रधान बनाता है। पूर्व व्यवस्था में अधिकांश सफाई कार्य मैन्युअल रूप से किए जाते थे तथा मशीनीकृत सफाई के लिए केवल एक बैकहो लोडर (जेसीबी) उपलब्ध था। सीमित संसाधनों के कारण अपेक्षित स्तर की स्वच्छता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था। वहीं, कर्मचारियों को हॉट मेटल क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर कार्य करना पड़ता था, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बने रहते थे। इसके अलावा संयंत्र के परिधीय मार्ग, हॉट मेटल डीसल्फराइजेशन स्टेशन (हॉट मेटल डीसल्फराइजेशन स्टेशन-एचएमडीएस) क्षेत्र तथा कास्टर सीवी-2 के आसपास की सफाई पूर्व अनुबंध के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं थी।

नई व्यवस्था के अंतर्गत व्यापक स्तर पर मशीनीकृत सफाई प्रणाली विकसित की गई है। इसके लिए डम्पर एवं ट्रक, बैकहो लोडर (जेसीबी), व्हील्ड स्किड स्टीयर लोडर (बॉबकैट), बैटरी संचालित राइड-ऑन स्वीपर, इलेक्ट्रिक एवं बैटरी संचालित स्क्रबर ड्रायर, ग्लास क्लीनिंग किट सहित अन्य आधुनिक उपकरणों की तैनाती की गई है। इन संसाधनों के उपयोग से सफाई कार्य अब अधिक तेज, प्रभावी और सुरक्षित ढंग से किए जा रहे हैं।
नई हाउसकीपिंग व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव संसाधन प्रबंधन पर भी दिखाई दिया है। हाउसकीपिंग कार्य के लिए आवश्यक कुल जनशक्ति 69 से घटकर 44 रह गई है, जबकि कार्य का दायरा और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनुबंध की कुल लागत भी लगभग 6.37 करोड़ रुपये से घटकर 5.55 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे संसाधनों के अधिक प्रभावी और किफायती उपयोग को बढ़ावा मिला है।
संयंत्र प्रबंधन के अनुसार मशीनीकृत सफाई व्यवस्था लागू होने से जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में मैन्युअल कार्य में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हुआ है। इसके साथ ही संयंत्र परिसर की स्वच्छता, औद्योगिक अपशिष्ट एवं मलबे का वैज्ञानिक निष्पादन, परिधीय क्षेत्रों और सड़कों का नियमित रखरखाव तथा समग्र औद्योगिक वातावरण में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह पहल सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक कार्यसंस्कृति विकसित करने की दिशा में भिलाई इस्पात संयंत्र का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित होने वाली पहली कोल पीएसयू सीएसआर योजना बनी एसईसीएल के सुश्रुत
राम मंदिर चंदा घोटाले के विरोध में कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन
चिरमिरी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार जिला /ब्लॉक कांग्रेस कमेटी चिरमिरी के नेतृत्व में डोमन हिल बाजार में राम मंदिर निर्माण हेतु एकत्रित चंदे में कथित अनियमितताओं एवं घोटाले के विरोध में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत भिलाई में प्रमुख वृक्षारोपण अभियान शुरू किया
स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), उप-क्षेत्रीय कार्यालय, दुर्ग ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को भिलाई में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया।

यह वृक्षारोपण कार्यक्रम भिलाई के सेक्टर-9 में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएआईएल) के भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के बागवानी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया था। यह पहल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने और एक हरित एवं स्वच्छ भारत के निर्माण में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है।

सभा को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक अभिषेक शुक्ला ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वृक्षारोपण को राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में बदलने के आह्वान के अनुरूप है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए वृक्षारोपण और उनका पालन-पोषण करना आवश्यक है।

मुख्य अतिथि, भिलाई स्टील प्लांट के महाप्रबंधक (बागवानी) एन.के. जैन ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा की गई पहल की सराहना करते हुए कहा कि सतत वृक्षारोपण अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर वृक्षारोपण प्रयासों से हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता का संरक्षण करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री एन.के. जैन, महाप्रबंधक (बागवानी), भिलाई इस्पात संयंत्र, श्री विक्रांत सरन, उप महाप्रबंधक, श्री राजेश कुमार शर्मा और श्री शंकर अग्रवाल थे। कार्यक्रम के अतिथि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, उप-क्षेत्रीय कार्यालय, दुर्ग के सहायक निदेशक अभिषेक शुक्ला भी उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों ने पौध रोपण किया और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। यह वृक्षारोपण अभियान स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और संस्थागत सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
रामानुजगंज कांवरिया सेवा समिति ने शुरू की सावन की तैयारियां, 11 जुलाई को होगी योजना बैठक
एम सी बी / भगवान शिव की आराधना का पवित्र माह सावन इस वर्ष 29 से प्रारंभ हो रहा है। सावन माह के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इन श्रद्धालुओं की अनेक टोलियां प्रतिवर्ष बलरामपुर जिले के रामानुजगंज नगर से होकर गुजरती हैं।
रामानुजगंज कांवरिया सेवा समिति ने शुरू की सावन की तैयारियां, 11 जुलाई को होगी योजना बैठक
एम सी बी / भगवान शिव की आराधना का पवित्र माह सावन इस वर्ष 29 से प्रारंभ हो रहा है। सावन माह के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इन श्रद्धालुओं की अनेक टोलियां प्रतिवर्ष बलरामपुर जिले के रामानुजगंज नगर से होकर गुजरती हैं।
एसईसीएल की पाँच खदानों को मिला 5-स्टार दर्जा, उत्कृष्ट खनन का राष्ट्रीय सम्मान बंगवार, खैराहा, बेहराबांध, विजय वेस्ट एवं जगन्नाथपुर परियोजना को कोयला मंत्रालय की प्रतिष्ठित 5-स्टार रेटिंग
चिरमिरी के युवा कांग्रेस नेता राहुल मलिक संगठन में निभा रहे सक्रिय भूमिका चिरमिरी
एमसीबी)। चिरमिरी के युवा कांग्रेस नेता राहुल मलिक संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका जन्म 3 जनवरी 1994 को चिरमिरी में हुआ। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक गतिविधियों एवं युवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं।
राहुल मलिक ने अपनी राजनीतिक यात्रा एनएसयूआई (NSUI) से शुरू की। संगठन में उन्होंने चिरमिरी ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद कांग्रेस संगठन में उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली।
वर्तमान में राहुल मलिक ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, वे युवाओं को संगठन से जोड़ने और पार्टी की गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राहुल मलिक का कहना है कि उनका उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं की समस्याओं को संगठन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाना है।
भिलाई स्टील प्लांट ने उन्नत औद्योगिक हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया इंजीनियरों और रखरखाव कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने की पहल
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत संचालित एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग के सहयोग से तीन दिवसीय 'एडवांस्ड इंडस्ट्रियल हाइड्रॉलिक्स' प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संयंत्र के अभियंताओं एवं अनुरक्षण कार्मिकों की तकनीकी दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही, उन्हें आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों, अत्याधुनिक अनुरक्षण तकनीकों और प्रभावी समस्या-निवारण (ट्रबलशूटिंग) पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना भी इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों के संचालन, अनुरक्षण एवं समस्या-विश्लेषण से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक, दोनों प्रकार का गहन प्रशिक्षण दिया गया। कक्षा आधारित तकनीकी सत्रों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने का अमूल्य व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। यह अनूठा अनुभव उन्हें आधुनिक हाइड्रॉलिक अनुप्रयोगों की बेहतर समझ विकसित करने, कार्यस्थल पर त्वरित समस्या-समाधान क्षमता बढ़ाने तथा संयंत्र के उपकरणों की विश्वसनीयता एवं परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में औद्योगिक सुरक्षा, व्यवस्थित अनुरक्षण प्रणाली तथा तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों को अपनाने के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य व्यवहार, निवारक अनुरक्षण (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) तथा नवीनतम औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के सहयोग से नियमित रूप से ऐसे उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे संयंत्र के ज्ञानार्जन एवं विकास तंत्र को निरंतर सुदृढ़ और अद्यतन बनाने में मदद मिल रही है।
भिलाई स्टील प्लांट ने उन्नत औद्योगिक हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया इंजीनियरों और रखरखाव कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने की पहल
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत संचालित एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग के सहयोग से तीन दिवसीय 'एडवांस्ड इंडस्ट्रियल हाइड्रॉलिक्स' प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संयंत्र के अभियंताओं एवं अनुरक्षण कार्मिकों की तकनीकी दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही, उन्हें आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों, अत्याधुनिक अनुरक्षण तकनीकों और प्रभावी समस्या-निवारण (ट्रबलशूटिंग) पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना भी इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों के संचालन, अनुरक्षण एवं समस्या-विश्लेषण से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक, दोनों प्रकार का गहन प्रशिक्षण दिया गया। कक्षा आधारित तकनीकी सत्रों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने का अमूल्य व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। यह अनूठा अनुभव उन्हें आधुनिक हाइड्रॉलिक अनुप्रयोगों की बेहतर समझ विकसित करने, कार्यस्थल पर त्वरित समस्या-समाधान क्षमता बढ़ाने तथा संयंत्र के उपकरणों की विश्वसनीयता एवं परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में औद्योगिक सुरक्षा, व्यवस्थित अनुरक्षण प्रणाली तथा तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों को अपनाने के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य व्यवहार, निवारक अनुरक्षण (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) तथा नवीनतम औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के सहयोग से नियमित रूप से ऐसे उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे संयंत्र के ज्ञानार्जन एवं विकास तंत्र को निरंतर सुदृढ़ और अद्यतन बनाने में मदद मिल रही है।











