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युवा संगम चरण VI के तहत छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली के लिए रवाना यह कार्यक्रम पांच स्तंभों पर आधारित है पर्यटन परंपरा प्रगति प्रौद्योगिकी और परस्पर संपर्क
भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने, सांस्कृतिक समझ को गहरा करने और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की महत्वाकांक्षी "एक भारत श्रेष्ठ भारत" पहल के तहत शुरू किए गए प्रतिष्ठित युवा संगम चरण-VI कार्यक्रम के उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) और आधिकारिक फ्लैग-ऑफ समारोह में भाग लेने के लिए आज पूरे छत्तीसगढ़ से आए छात्र और युवा प्रतिनिधि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई में एकत्र हुए।

छत्तीसगढ़ का यह प्रतिनिधिमंडल 7 जून से 13 जून 2026 तक दिल्ली का दौरा करेगा, जहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली इस राष्ट्रव्यापी युवा विनिमय कार्यक्रम के तहत एक सप्ताह तक उनकी मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य देश के विकास और परंपराओं का गहन अनुभव प्रदान करना है। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम और औपचारिक फ्लैग-ऑफ समारोह का आयोजन श्री अभिजीत सिंह, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, दुर्ग और राजीव प्रकाश, निदेशक, आईआईटी भिलाई की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया, जिन्होंने प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और उन्हें इस यात्रा के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक संवाद और व्यावहारिक शिक्षण में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।

युवा संगम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसे देश भर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं, विकास पहलों, तकनीकी प्रगति और लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव (पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट) का व्यापक अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पांच थीम आधारित स्तंभों के इर्द-गिर्द संरचित है, जिनमें पर्यटन (Tourism), परंपरा (Traditions & Culture), प्रगति (Development & Governance), प्रौद्योगिकी (Technology & Innovation) और परस्पर संपर्क (People-to-People Connect) शामिल हैं।

युवा संगम के चरण-VI के तहत, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के बीच इस आदान-प्रदान के लिए आईआईटी दिल्ली और आईआईटी भिलाई को एक साथ जोड़ा (पेयर) गया है, जिससे प्रतिनिधियों को विविधता में एकता को बढ़ावा देने और भारत की प्रगति तथा समृद्ध विरासत की गहरी समझ विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक गतिविधियों का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम का समापन बेहद उत्साह और देशभक्ति की भावना के बीच आईआईटी भिलाई परिसर से प्रतिनिधियों को आधिकारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के साथ हुआ।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन रायपुर ने आयोजित की साइकिल रैली स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा विश्व साइकल दिवस के उपलक्ष्य में साइकल रैली का आयोजनकर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation-EPFO) के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर आयोजित साइकिल रैली में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा रविवार को आयोजित यह कार्यक्रम केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री श्री मनसुख मंडाविया की पहल ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान के अंतर्गत संपन्न हुआ। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को नियमित साइकिलिंग के प्रति प्रेरित करना तथा स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

साइकिल रैली में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-द्वितीय श्री गौरव डोगरा एवं सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री विकास शुक्ल सहित कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम में ‘टूर-द-रायपुर’ समूह के सक्रिय सदस्य श्री अनिमेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को साइकिलिंग के स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विश्व पर्यावरण दिवस के तहत कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया तथा स्वच्छता गतिविधियों में भी भाग लिया। इस अवसर पर श्री गौरव डोगरा ने कहा कि साइकिलिंग ईंधन बचत के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम है और इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री विकास शुक्ल ने सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों एवं स्टाफ रिक्रिएशन क्लब की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने की बात कही।
एसईसीएल मुख्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत किया गया पौधरोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएसएफ छत्तीसगढ़ का हरित संकल्प 5000 से अधिक पौधों का वृक्षारोपण
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामरिक मुख्यालय (विशेष-संक्रिया) सीमा सुरक्षा बल छत्तीसगढ़ द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत सामरिक मुख्यालय (विशेष-संक्रिया) बी०एस०एफ छत्तीसगढ़, भिलाई तथा अधीनस्थ वाहिनियों एवं इकाइयों में 5000 से अधिक छायादार, औषधीय, फलदार एवं सजावटी पौधों का रोपण किया गया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गिरधारी लाल मीणा, उप महानिरीक्षक, सामरिक मुख्यालय (विशेष-संक्रिया) बी.एस.एफ छत्तीसगढ़, द्वारा पौधारोपण कर किया गया। इस अवसर पर उप महानिरीक्षक महोदय ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी कार्मिकों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण सुनिश्चित करने का आव्हान किया।

बीएसएफ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रत्येक वर्ष मानसून अवधि के दौरान व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाता है तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस वर्ष भी बी०एस०एफ सामरिक मुख्यालय से लेकर वाहिनी एवं कम्पनी स्तर तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। इस अवसर पर बीएसएफ के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामूहिक जिम्मेदारी का निर्वाहन किया।

कार्यक्रम के अंत में बीएसएफ परिवार की ओर से सभी देशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया गया। यह वृक्षारोपण अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, जन-जागरूकता एवं सतत विकास के प्रति बी०एस०एफ की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण है।
राजहरा माइंस हॉस्पिटल में 24वें मेगा मेडिकल कैंप का सफल आयोजन; 650 से अधिक मरीज हुए लाभान्वित
सामुदायिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) - भिलाई इस्पात संयंत्र के राजहरा माइंस हॉस्पिटल में 24वें मेगा मेडिकल कैंप का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) शिविर का मुख्य उद्देश्य राजहरा एवं इसके आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श, व्यापक स्वास्थ्य जांच तथा आवश्यक उपचार सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना था।

इस चिकित्सा शिविर में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखी गई, जिसके तहत क्षेत्र के 650 से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा मार्गदर्शन प्रदान किया गया। शिविर के दौरान हृदय रोग, मेडिसिन, अस्थि रोग, बाल रोग, प्रसूति एवं स्त्री रोग, नेत्र रोग, कान-नाक-गला (ईएनटी), त्वचा रोग, दंत चिकित्सा, सामान्य शल्य चिकित्सा तथा दर्द प्रबंधन सहित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में विशेषज्ञ परामर्श और उपचार सेवाएं दी गईं। ऑन-साइट चिकित्सा हस्तक्षेप के उच्च स्तर का प्रदर्शन करते हुए, क्लिनिकल टीम ने जोड़ों में दर्द से पीड़ित मरीजों को 25 इंट्रा-आर्टिकुलर इंजेक्शन लगाए और ऑर्थोपेडिक सहायता की आवश्यकता वाले 6 मरीजों को मौके पर ही प्लास्टर की सुविधा भी उपलब्ध कराई।

इस मेगा मेडिकल कैंप का आयोजन जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी के कुशल नेतृत्व में किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों, डीएनबी रेजिडेंट्स, पैरामेडिकल कर्मियों एवं सहयोगी स्टाफ की एक अत्यंत योग्य बहु-विषयक टीम ने शिविर में सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दीं। विशेषज्ञ चिकित्सा दल में डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर (सर्जिकल ट्रॉमा), डॉ. चंदन दास (हृदय रोग), डॉ. प्रमोद बिनयके (मेडिसिन), डॉ. इमैनुअल मैसी (अस्थि रोग), डॉ. कौशिक किशोर (बाल रोग), डॉ. प्रभदीप कौर (प्रसूति एवं स्त्री रोग), डॉ. वनिता शर्मा (दंत चिकित्सा), डॉ. धीरज शर्मा (सामान्य शल्य चिकित्सा), डॉ. शिखा अग्रवाल (दर्द प्रबंधन), डॉ. शशांक अग्रवाल (त्वचा रोग), डॉ. प्रियंका शिवप्पा (ईएनटी) तथा डॉ. आरती जैन (नेत्र रोग) जैसे प्रमुख चिकित्सक शामिल थे। इसके अतिरिक्त डीएनबी रेजिडेंट्स डॉ. शुभम, डॉ. शालिनी, डॉ. श्रेयस व डॉ. पूर्णिमा के साथ-साथ सहायक प्रबंधक श्रीमती देवकी साहू, मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट श्री कल्लोल मैती और फिजियोथेरेपिस्ट श्री दिग्विजय ने भी मरीजों की सुचारू देखभाल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस शिविर का सफल निष्पादन संयंत्र के चिकित्सा, नर्सिंग, प्रशासनिक और सहायक विंग के बीच आपसी सहयोग और बेहतर समन्वय के कारण संभव हो सका। कार्यक्रम के सफल संचालन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (आईओसी राजहरा) श्री आर. बी. गहरवार तथा सहायक महाप्रबंधक (मानव संसाधन-आईओसी राजहरा) श्री तुषार राय चौधरी द्वारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक व प्रबंधकीय सहयोग प्रदान किया गया। सेल का राजहरा माइंस हॉस्पिटल अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के तहत नियमित रूप से ऐसे बड़े पैमाने के चिकित्सा शिविरों का आयोजन करता आ रहा है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाना और खनन व उसके परिधीय क्षेत्रों की आबादी तक उच्च स्तरीय, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।
भिलाई स्टील प्लांट ने सुरक्षित बैंक खाता परिवर्तन के लिए मेकर चेकर सिस्टम शुरू किया
डिजिटल गवर्नेंस, वित्तीय सुरक्षा और प्रक्रिया पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएआईएल)-भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) ने अपने केंद्रीकृत पेरोल और पारिश्रमिक प्रणाली (सीपीआरएस) और बीएसपी-एसएपी प्लेटफॉर्म के लिए एक नया 'बैंक खाता परिवर्तन के लिए मेकर-चेकर प्रावधान' सिस्टम शुरू किया है।

इस्पात भवन स्थित वित्त एवं लेखा सभागार में कार्यकारी निदेशक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रवीण निगम और कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार द्वारा मुख्य महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रमोद कुमार चोखानी, वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय प्रमुखों की उपस्थिति में इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

नव कार्यान्वित मेकर-चेकर तंत्र को एक मजबूत बहुस्तरीय सत्यापन और अनुमोदन ढांचा पेश करके बैंक खाता संशोधन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली किसी भी बैंक खाता परिवर्तन अनुरोध को संसाधित करने से पहले सत्यापन की एक अतिरिक्त परत जोड़ती है, जिससे डेटा सटीकता, जवाबदेही और परिचालन विश्वसनीयता के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को नई प्रणाली के परिचालन ढांचे, सुरक्षा सुविधाओं और कार्यान्वयन पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल से संयंत्र के मानव संसाधन और वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों में डिजिटल प्रक्रियाओं को और मजबूत करने तथा बेहतर नियंत्रण तंत्र स्थापित करने की उम्मीद है।
इस नई व्यवस्था से कर्मचारियों को वेतन संबंधी बैंक खातों में बदलाव की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाकर महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सत्यापन प्रोटोकॉल से खातों में गलत जानकारी दर्ज करने, अनधिकृत संशोधनों और प्रसंस्करण त्रुटियों की संभावना कम होगी, जिससे कर्मचारियों की वित्तीय जानकारी सुरक्षित रहेगी और वेतन एवं संबंधित भुगतानों का समय पर वितरण सुनिश्चित होगा।
मानव संसाधन विभाग, नियंत्रण एवं सूचना प्रौद्योगिकी (सी एंड आईटी) विभाग और वित्त एवं लेखा विभाग के समन्वित प्रयासों से इस प्रणाली का सफल कार्यान्वयन संभव हो पाया। अधिकारियों ने इस पहल को भिलाई इस्पात संयंत्र में वेतन प्रबंधन को आधुनिक बनाने और सुरक्षित डिजिटल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
छत्तीसगढ़ में आर्थिक और कृषि गतिविधियों में तेजी ईंधन की रिकॉर्ड मांग के बीच तेल कंपनियों ने सुनिश्चित की निर्बाध आपूर्ति
ग्रामीण और शहरी अंचलों में सुचारू उत्पाद आवाजाही के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैनात
देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल हैं—ने छत्तीसगढ़ राज्य में ईंधन की मांग में आए भारी उछाल के बीच अपने परिचालन और लॉजिस्टिक्स तालमेल को मजबूत किया है। इंडियन ऑयल के रायपुर मंडल कार्यालय के डिविजनल रिटेल सेल्स हेड (DRSH) एवं छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय समन्वयक श्री नितिन चव्हाण द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 मई से 28 मई 2026 की अवधि के दौरान राज्य में हाई-स्पीड डीजल (HSD) की खुदरा बिक्री में व्यापक विकास देखा गया है, जिसमें विशेष रूप से 4 प्रमुख जिलों—बालोद (40.6%), बस्तर (35.2%), कोरिया (34.0%) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (30.3%)—ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की शानदार विकास दर हासिल की है। इसके साथ ही, 7 अन्य जिलों, जिनमें सक्ती (29%), राजनांदगांव (26.9%), सूरजपुर (23.5%), दुर्ग (23.5%), रायपुर (22.6%), कोंडागांव (20.9%) और कांकेर (20.3%) शामिल हैं, ने डीजल की बिक्री में 20 से 30 प्रतिशत के बीच जोरदार वृद्धि दर्ज की है, जबकि महासमुंद, बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बीजापुर, सुकमा, सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर और धमतरी सहित 11 जिलों में यह वृद्धि 10 से 20 प्रतिशत के दायरे में रही है; वहीं जांजगीर (13.1%), कांकेर (12.8%) और रायपुर (12.1%) जैसे जिलों में पेट्रोल की खुदरा बिक्री में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
ईंधन की मांग में इस निरंतर वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें मुख्य रूप से ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में चल रही सीजन की चरम जुताई, बुवाई और कटाई से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) और अन्य निजी तेल आपूर्तिकर्ताओं के बीच कीमतों में मौजूद स्पष्ट अंतर की वजह से भारी वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं का रुझान बड़े पैमाने पर पीएसयू (PSU) आउटलेट्स की तरफ हुआ है, जिसने खुदरा मांग को नई ऊंचाई दी है। पेट्रोलियम उत्पादों के इस उच्च उठाव के बावजूद, बिक्री के ये मजबूत आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि बिना किसी बड़े व्यवधान या स्थानीय किल्लत के पूरे छत्तीसगढ़ संभाग में ऑटोमोटिव ईंधन की निरंतर और निर्बाध आपूर्ति सफलतापूर्वक कायम रखी गई है।
इस भारी लॉजिस्टिक्स आवश्यकता को पूरा करने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां टर्मिनलों, डिपो, पाइपलाइनों, एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों और खुदरा काउंटरों के अपने व्यापक देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से निरंतर आपूर्ति चक्र चला रही हैं। बाजारों में उत्पादों की सुचारू आवाजाही और समय पर पुनः आपूर्ति (रेपलीनिशमेंट) सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों की समर्पित आपूर्ति टीमें, परिवहन नेटवर्क और terminal संचालन इकाइयां चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के साथ मिलकर चौबीसों घंटे (24x7) काम कर रही हैं। तेल उद्योग इस संबंध में राज्य प्रशासन के साथ निरंतर सीधा और कड़ा समन्वय बनाए हुए है। तेल उद्योग के नेतृत्व ने समस्त उपभोक्ताओं को पुनः आश्वस्त किया है कि देश और राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देते हुए अपना सामान्य खरीदारी व्यवहार बनाए रखें, घबराहट में आकर अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें और सटीक जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों व तेल कंपनियों के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।
छत्तीसगढ़ की बढ़ती ऊर्जा मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर रही हैं सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का अहम योगदान
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल हैं—ने क्षेत्रीय ईंधन की मांग में आए अभूतपूर्व उछाल को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ में व्यापक लॉजिस्टिक्स परिचालन को सफलतापूर्वक सुव्यवस्थित किया है। इंडियन ऑयल के रायपुर मंडल कार्यालय के डिविजनल रिटेल सेल्स हेड (DRSH) एवं छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय समन्वयक श्री नितिन चव्हाण के अनुसार, राज्य में हाई-स्पीड डीजल (HSD) की खुदरा बिक्री में व्यापक वृद्धि देखी गई है, जिसमें 4 जिलों—बालोद, बस्तर, कोरिया और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी—ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30% से अधिक की असाधारण वृद्धि दर्ज की है। श्री चव्हाण ने आगे रेखांकित किया कि 7 जिलों, जिनमें सक्ती, राजनांदगांव, सूरजपुर, दुर्ग, रायपुर, कोंडागांव और कांकेर शामिल हैं, में 20% से 30% के बीच मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि 11 जिलों—महासमुंद, बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बीजापुर, सुकमा,सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर और धमतरी—में ईंधन की खपत 10% से 20% के बीच बढ़ी है। इस महत्वपूर्ण प्रगति के पीछे सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (PSU OMCs) की चौबीसों घंटे की निरंतर सक्रियता है, जो राज्य के प्रत्येक उपभोक्ता के लिए पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की दैनिक उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए पूर्ण ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी देती है।
छत्तीसगढ़ के इन 22 जिलों में ईंधन की इस बढ़ी हुई मांग के पीछे विभिन्न मौसमी और आर्थिक कारक हैं, जिनमें मुख्य रूप से ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में सीजन की चरम जुताई और कटाई की गतिविधियां शामिल हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) और अन्य वैकल्पिक निजी आपूर्तिकर्ताओं के बीच कीमतों में स्पष्ट अंतर होने की वजह से भारी संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का रुख सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रों की तरफ तेजी से बढ़ा है, जिससे खुदरा नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव आया है। पेट्रोलियम उत्पादों के इस अचानक और काफी अधिक उठाव (ऑफटेक) के बावजूद, बिक्री और वितरण के आंकड़े पुष्टि करते हैं कि बिना किसी बड़े व्यवधान या कमी के पूरे क्षेत्र में ऑटोमोटिव ईंधन की निरंतर आपूर्ति सफलतापूर्वक बनाए रखी गई है।
इस भारी मांग को निरंतर पूरा करने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अपने टर्मिनलों, डिपो, पाइपलाइनों और एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों के व्यापक देशव्यापी नेटवर्क को पूरी क्षमता के साथ संचालित कर रही हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में उत्पादों की सुचारू आवाजाही और समय पर पुनः आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के साथ-साथ आपूर्ति टीमें, परिवहन नेटवर्क और टर्मिनल परिचालन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। तेल उद्योग, छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासन के साथ कड़े समन्वय में, उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से आश्वस्त करता है कि देश के ग्रिड में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त बफर स्टॉक सुरक्षित रूप से वितरित और उपलब्ध है। नागरिकों को दृढ़ता से सलाह दी जाती है कि वे अपने सामान्य खरीदारी व्यवहार को जारी रखें, अनावश्यक घबराहट में आकर खरीदारी (पैनिक बाइंग) करने से बचें और ईंधन की सटीक उपलब्धता की जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।
नायब तहसीलदार से कथित मारपीट मामला गरमाया: विधायक व समर्थकों पर FIR दर्ज
अबिकापुर/सीतापुर। सरगुजा जिले के राजापुर तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ कथित मारपीट और अभद्र व्यवहार का मामला अब और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के विरोध में कनिष्ठ प्रशासनिक संघ जिला सरगुजा खुलकर सामने आ गया है। संघ ने सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर के तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एसडीएम, राजस्व निरीक्षक और पटवारी हड़ताल पर चले जाएंगे।


सत्ता की हनक या दफ्तरशाही का घमंड? सरगुजा में 'खादी' और 'अधिकारी' के बीच हाई-वोल्टेज दंगल!... FIR दर्ज...
सरगुजा। जिले में सत्ता के रौब और अफसरशाही की लालफीताशाही के बीच एक ऐसा संग्राम छिड़ा है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सीतापुर से BJP विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों पर राजापुर उप-तहसील के नायब तहसीलदार तुषार मानिक को सरेआम पीटने और कपड़े फाड़ने का गंभीर आरोप लगा है। मामला इतना गरमाया कि पुलिस को दोनों पक्षों की तरफ से काउंटर FIR दर्ज करनी पड़ी है।
एसईसीएल एवं सीडब्ल्यूसी के बीच रणनीतिक एमओयू, कोयला परिवहन एवं रेल लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बल
पत्रकारों की समस्याओं के समाधान को लेकर माधौगढ़ तहसील परिसर में बैठक संपन्न

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रदर्शन के नए आयाम स्थापित किए
खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 1.87 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया।• केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े जारी करते हुए क्षेत्र की रिकॉर्ड प्रगति को रेखांकित किया।• पिछले 12 वर्षों में उत्पादन में 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह क्षेत्र लगभग पांच गुना विस्तारित हुआ, जबकि बिक्री में 501 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई।• रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति करते हुए पिछले 12 वर्षों में 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे अब 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध हो रहा है।• अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केवीआईसी की योजनाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।

केवीआईसी ने जारी किए वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े
नई दिल्ली के गांधी दर्शन, राजघाट स्थित कार्यालय में वित्त वर्ष 2025-26 के अनंतिम आंकड़े (Provisional Data) जारी करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि आयोग ने उत्पादन, बिक्री और रोजगार सृजन के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 की तुलना में पिछले 12 वर्षों में बिक्री में 501 प्रतिशत, उत्पादन में 380 प्रतिशत और रोजगार सृजन में 56 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पूर्व वर्षों की प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 447 प्रतिशत और उत्पादन में 347 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में वर्ष 2013-14 की तुलना में बिक्री में 400 प्रतिशत और उत्पादन में 315 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी।

खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये के पार
अध्यक्ष श्री मनोज कुमार ने कहा कि केवीआईसी का यह सशक्त प्रदर्शन ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को गति प्रदान करने के साथ-साथ भारत को विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रभावी मार्गदर्शन, महात्मा गांधी की प्रेरणा तथा देश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत करोड़ों कारीगरों की मेहनत को दिया। अध्यक्ष केवीआईसी ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन जहां 26109 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब पांच गुना बढ़कर 380 प्रतिशत के उछाल के साथ 125296 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में बिक्री जहां 31154 करोड़ रुपये थी, वहीं करीब छह गुना बढ़कर 501 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि के साथ यह वित्त वर्ष 2025-26 में 187105 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कि अब तक की सर्वाधिक बिक्री है।

खादी वस्त्रों के उत्पादन और बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि
खादी वस्त्रों के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में 811 करोड़ रुपये का उत्पादन बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 390 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3,974 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं बिक्री 1,081 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 628 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7,869 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री द्वारा खादी के सतत प्रचार-प्रसार का सकारात्मक प्रभाव इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और बाजार विस्तार में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन और बिक्री का नया रिकॉर्ड
ग्रामोद्योग क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां ग्रामोद्योग उत्पादों का उत्पादन 25,298 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 380 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह बढ़कर 1,21,322 करोड़ रुपये हो गया है। इसी प्रकार बिक्री 30,073 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 496 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,79,236 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी ग्रामोद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2013-14 में जहां इस क्षेत्र में 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.99 करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र
मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘घर-घर स्वदेशी’ जैसे अभियानों के प्रभाव से ग्रामोद्योग उत्पादों की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीण उद्योगों के विस्तार, बाजार सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा है।
रोजगार सृजन के क्षेत्र में केवीआईसी की ऐतिहासिक उपलब्धि
रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी केवीआईसी ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2013-14 में जहां खादी और ग्रामोद्योग से जुड़ी गतिविधियों में संचयी रोजगार (Cumulative Employment) 1.30 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह 56 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 2.04 करोड़ हो गया है, जो ग्रामीण आजीविका सृजन में केवीआईसी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
पीएमईजीपी से स्वरोजगार एवं उद्यमिता को नई गति
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के अंतर्गत वित्त वर्ष 2025-26 में 66,494 नई इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके लिए 7,375 करोड़ रुपये के ऋण के विरुद्ध 2,457 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी वितरित की गई। इन इकाइयों के माध्यम से 7,31,434 लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 10,84,679 इकाइयों की स्थापना की जा चुकी है, जिनके लिए 80,705 करोड़ रुपये के ऋण के सापेक्ष 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी संवितरित की गई है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है।
ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत टूलकिट वितरण से कारीगरों को सशक्तिकरण
ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत अभी तक 51,230 विद्युत चालित चाक, 2,46,099 बी-बॉक्स एवं बी-कालोनी, 2,674 ऑटोमैटिक एवं पैडल चालित अगरबत्ती निर्माण मशीन, 7,669 फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग एवं रिपेयरिंग टूलकिट, 836 पेपर प्लेट एवं दोना निर्माण मशीन, 7,571 एसी, मोबाइल, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन एवं प्लंबर टूलकिट, 5,138 टर्नवुड, वेस्टवुड क्रॉफ्ट एवं लकड़ी के खिलौने बनाने की मशीन तथा 1,789 पामगुड़, तेल घानी एवं इमली प्रसंस्करण मशीनों का वितरण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत 37,769 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। यदि पिछले चार वर्षों पर दृष्टि डालें तो वर्ष 2022-23 में 21,874, वित्त वर्ष 2023-24 में 29,540, वित्त वर्ष 2024-25 में 38,904 तथा वित्त वर्ष 2025-26 में 37,769 मशीनों एवं उपकरणों का वितरण किया गया है। इस प्रकार ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत केवीआईसी ने अभी तक कुल 3,23,006 मशीन, टूलकिट एवं उपकरणों का वितरण कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
केवीआईसी के प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी केवीआईसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केवीआईसी के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के अंतर्गत 79,682 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनमें 47,382 महिलाएं शामिल हैं, जो कुल का लगभग 59 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त, पीएमईजीपी के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 28,180 महिला उद्यमियों द्वारा इकाइयों की स्थापना की गई, जिनके माध्यम से 3,09,980 महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। खादी क्षेत्र में लगभग 5 लाख कारीगरों में 80 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी इस क्षेत्र को महिला नेतृत्व आधारित आर्थिक सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनाती है।
कारीगरों के पारिश्रमिक में 275 प्रतिशत तक की वृद्धि
कारीगरों के पारिश्रमिक में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जो वर्ष 2013-14 में 4 रुपये प्रति हैंक से बढ़कर वर्तमान में 15 रुपये प्रति हैंक हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 275 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकारी आपूर्ति, प्रदर्शनी बिक्री और राष्ट्रीय ध्वज की मांग में वृद्धि
इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की सरकारी आपूर्ति बढ़कर 92.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती स्वीकार्यता और संस्थागत मांग को दर्शाती है। इसी क्रम में खादी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं विपणन गतिविधियों के माध्यम से 30.83 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई है, जो बाजार विस्तार और उपभोक्ता जुड़ाव को सुदृढ़ करती है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ध्वज की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2013-14 में 0.87 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि देश में ‘हर घर तिरंगा’ जैसे जन-अभियानों के प्रभाव और खादी के प्रति बढ़ती जनभागीदारी को रेखांकित करती है।
आईसीएआर एनआईबीएसएम ने सतत कृषि और मृदा संरक्षण के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग पर दी जानकारी
मेरा गांव मेरा गौरव’ अभियान के तहत किसानों को हरी खाद और समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन पर दिया जोरभारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान द्वारा सोमवार को बेलटुकरी गांव में ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करते हुए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और फसल उत्पादकता में वृद्धि को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने तथा समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर डॉ. के.सी. शर्मा तथा डॉ. एल.एल. खरबीकर ने संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और हरी खाद फसलों की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाकर किसान उत्पादन लागत में कमी लाने के साथ दीर्घकालीन टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं।
‘मेरा गांव मेरा गौरव’ कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से खेती की लागत कम होगी तथा किसानों की आय और लाभप्रदता में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ संवाद कर विभिन्न फसल प्रणालियों में समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की। किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए उर्वरक उपयोग और हरी खाद फसलों से संबंधित प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए।
कार्यक्रम में 30 किसानों, जिनमें 20 पुरुष एवं 10 महिला किसान शामिल थीं, ने भाग लिया और विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त किया।
गंभीर रूप से झुलसे मासूम को मिली नई जिंदगी मौत से जंग जीतकर मुस्कुराया मासूम भिलाई के बर्न यूनिट ने लौटाई जिंदगी 50 प्रतिशत तक झुलसे बच्चे को मिला नया जीवन अस्पताल में मनाया गया जन्मदिन
भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड का जवाहरलाल नेहरू अस्पताल और अनुसंधान केंद्र स्थित एडवांस बर्न केयर यूनिट ने गंभीर रूप से झुलसे एक बाल मरीज का सफल उपचार कर संवेदनशील और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। आधुनिक सुविधाओं, प्रशिक्षित चिकित्सकीय टीम और मानवीय देखभाल के समन्वय से यह यूनिट प्रदेश में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है।

बर्न विभागाध्यक्ष एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. उदय धाबर्डे ने बताया कि अमेरिकन बर्न एसोसिएशन के मानकों के अनुसार बच्चों में 20 प्रतिशत से अधिक तथा वयस्कों में 40 प्रतिशत से अधिक जलना अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। संबंधित बाल मरीज लगभग 50 प्रतिशत तक झुलस गया था और कई दिनों तक अन्य अस्पतालों में उपचार के बाद सेप्टीसीमिया की अवस्था में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय लाया गया। मरीज के शरीर के साथ मलद्वार और मूत्रमार्ग के आसपास का हिस्सा भी गंभीर रूप से प्रभावित था, जिससे संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ था।
ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में बर्न यूनिट की टीम ने मरीज के उपचार के साथ उसके शारीरिक और मानसिक पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया। बार-बार ड्रेसिंग और असहनीय पीड़ा के बीच बच्चे को हाई प्रोटीन एवं हाई फाइबर आहार दिया गया, वहीं नसों के माध्यम से पैरेंट्रल न्यूट्रिशन उपलब्ध कराया गया ताकि रिकवरी प्रक्रिया को गति मिल सके। ड्रेसिंग के दौरान दर्द कम करने के लिए विशेष एनाल्जेसिक इंजेक्शन दिए जाते रहे।
मरीज के मानसिक तनाव को कम करने के लिए यूनिट में मानवीय वातावरण विकसित किया गया। प्ले हाउस में खिलौने, कार और मनोरंजन की व्यवस्था की गई तथा टीवी पर कार्टून फिल्में दिखाकर बच्चे का ध्यान दर्द से हटाने का प्रयास किया गया। चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ नियमित रूप से आत्मीय संवाद करते हुए बच्चे का मनोबल बढ़ाते रहे।
इलाज के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब बच्चे की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। शरीर में सूजन बढ़ गई थी और सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। इसी दौरान बच्चे का जन्मदिन आया, जिसे बर्न यूनिट की टीम ने अस्पताल परिसर में ही केक, बैलून और सजावट के साथ मनाया। बच्चे ने मोमबत्ती बुझाकर केक काटा और लंबे समय बाद उसके चेहरे पर मुस्कान लौट आई। यह भावुक क्षण चिकित्सकीय टीम और परिजनों दोनों के लिए यादगार बन गया।
अस्पताल से छुट्टी के समय बच्चे के माता-पिता ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने बच्चे के बचने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय का बर्न यूनिट उनके लिए संजीवनी साबित हुआ।
पूरे उपचार के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी का विभाग को निरंतर मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर ने कहा कि एडवांस बर्न केयर यूनिट अस्पताल का अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो गंभीर मरीजों के उपचार में पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है।
इस सफल उपचार में अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. अनिरुद्ध मेने, जूनियर ऑफिसर सुनीता साहु, वार्ड इंचार्ज शोभा सिस्टर सहित नर्सिंग स्टाफ, ड्रेसर, सेनेटरी वर्कर और अटेंडेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आकाशवाणी रायपुर में स्वरोत्सव का आयोजन संगीत साधकों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
आकाशवाणी की गौरवशाली 90 वर्ष की यात्रा के उपलक्ष्य में आकाशवाणी रायपुर द्वारा उपशास्त्रीय एवं सुगम संगीत समारोह “स्वरोत्सव” का आयोजन किया गया। स्थानीय विनायरा ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही तथा देर तक सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध कलाकार श्वेता शिवाले एवं उर्मी दुबे की युगल प्रस्तुति से हुई। दोनों कलाकारों ने दादरा, मिर्जापुरी कजरी, सावनी नगमा तथा विभिन्न गीतों की मनोहारी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। “आन मिलो सजना” और “मिर्जापुर कजरी” जैसी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने विशेष सराहना दी। इसके पश्चात प्रसिद्ध गायक पद्मश्री मदन चौहान ने सुगम संगीत की प्रस्तुति दी। कबीर भजन, गजल तथा सूफियाना कलाम की उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक और संगीतमय वातावरण से भर दिया।

आकाशवाणी रायपुर के उपमहानिदेशक एवं क्लस्टर प्रमुख श्री वी. राजेश्वर ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कहा कि “स्वरोत्सव” आकाशवाणी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकसेवा प्रसारण की परंपरा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता पूर्व से लेकर आज तक आकाशवाणी ने समाज को जागरूक करने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बदलते समय के साथ भी आकाशवाणी अपने ध्येय वाक्य “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के सिद्धांत पर निरंतर कार्य कर रही है।

आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम प्रमुख एवं सहायक निदेशक (कार्यक्रम) श्री पंकज मेश्राम ने कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं और कलाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि “स्वरोत्सव” जैसे आयोजनों का उद्देश्य श्रोताओं को उनकी पसंदीदा प्रस्तुतियों और कलाकारों से सीधे जोड़ना है, जिससे भारतीय संगीत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
संगीत और सुरों से सजे “स्वरोत्सव” का यह आयोजन उपस्थित श्रोताओं के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा।
दंतेवाड़ा में जिला स्तरीय प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम पंजीयन शिविर का सफल आयोजन

इस वृहद पंजीकरण शिविर में न केवल दंतेवाड़ा, बल्कि पड़ोसी जिलों यथा बीजापुर, सुकमा एवं बस्तर से भी 450 से अधिक ऊर्जावान युवाओं ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर के दौरान युवाओं ने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) की किरंदुल एवं बचेली परियोजनाओं में उपलब्ध कुल 142 प्रतिष्ठित इंटर्नशिप पदों के लिए अपनी योग्यता के अनुसार डिजिटल और भौतिक माध्यम से आवेदन जमा किए।

उल्लेखनीय है कि यह गरिमामयी आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य में जिला प्रशासन एवं माई भारत की केंद्रीय टीम के आपसी समन्वय द्वारा किसी भी जिले में आयोजित किया गया सबसे पहला 'जिला स्तरीय पंजीयन शिविर' है। इस ऐतिहासिक पहल के माध्यम से बस्तर संभाग के दूरस्थ अंचलों के स्थानीय युवाओं को एनएमडीसी जैसी नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की किरंदुल एवं बचेली परियोजनाओं में आधुनिक उद्योग का जीवंत व व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का सीधा स्वर्णिम अवसर हासिल होगा।

शिविर की नियमावली के अनुसार, अंतिम रूप से चयनित युवाओं को एनएमडीसी में कुल 9 माह की सशुल्क इंटर्नशिप करने का विशेष अवसर प्राप्त होगा। इसके अंतर्गत चयनित प्रशिक्षुओं को वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में ₹6 हजार का एकमुश्त जॉइनिंग बोनस तथा ₹9 हजार प्रतिमाह का आकर्षक स्टाइपेंड (मानदेय) प्रदान किया जाएगा। यह दूरदर्शी पहल क्षेत्र के युवाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं भविष्य की स्थाई रोजगार संभावनाओं को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
20 जिलों में ईंधन मांग में तेज बढ़ोतरी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने आपूर्ति रखी सुचारु
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 20 जिलों में पेट्रोल और डीजल की खपत में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य में ईंधन की मांग में आई इस उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड - पेट्रोल, डीजल और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समन्वित स्तर पर लगातार कार्य कर रही हैं।

आंकड़ों के अनुसार, बस्तर जिले में सर्वाधिक 22.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बालोद में 18.8 प्रतिशत और रायपुर में 15.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। इसके अलावा दुर्ग, सूरजपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, बिलासपुर और महासमुंद जिलों में भी ईंधन की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ईंधन उपभोग बढ़ने के संकेत मिले हैं।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के रायपुर मंडल कार्यालय के मंडलीय खुदरा विक्रय प्रमुख एवं छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय समन्वयक नितिन चव्हाण ने कहा कि राज्य में पेट्रोल, डीजल और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है तथा सभी जिलों में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
तेल कंपनियों के अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में मौसमी जुताई और फसल कटाई गतिविधियों के कारण ईंधन की मांग में तेजी आई है। निजी कंपनियों की तुलना में मूल्य अंतर के चलते उपभोक्ताओं का रुझान सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों की ओर बढ़ा है, जिससे बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा नेटवर्क के माध्यम से ईंधन की खरीद बढ़ने से अतिरिक्त मांग उत्पन्न हुई है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने बताया कि उनके टर्मिनल, डिपो, पाइपलाइन, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस बॉटलिंग संयंत्र और खुदरा बिक्री केंद्रों का व्यापक नेटवर्क पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रहा है। ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए परिवहन नेटवर्क, टर्मिनल संचालन इकाइयां और चयनित खुदरा केंद्र चौबीसों घंटे कार्य कर रहे हैं।
कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी जिलों में समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन के साथ सतत समन्वय किया जा रहा है। तेल कंपनियों ने नागरिकों से अनावश्यक ईंधन खरीद और अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि देशभर में पेट्रोल, डीजल और द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस की उपलब्धता पूरी तरह स्थिर और पर्याप्त है। उपभोक्ताओं से केवल अधिकृत एजेंसियों और तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया गया है।
हिंदी में कार्यालयीन कार्य बढ़ाने पर जोर भिलाई इस्पात संयंत्र में राजभाषा कार्यशाला आयोजित
भिलाई इस्पात संयंत्र के वित्त एवं लेखा विभाग में शुक्रवार को राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हिंदी में कार्यालयीन कार्यों के प्रभावी निष्पादन, राजभाषा प्रावधानों तथा ऑनलाइन हिंदी नोटशीट प्रणाली की जानकारी दी गई।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रवीन निगम ने कहा कि राजभाषा कार्यशालाएँ हिंदी में कार्य करने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से विभागीय नोटशीट, पत्राचार तथा अन्य कार्यालयीन कार्यों में अधिकाधिक हिंदी के प्रयोग का आह्वान करते हुए कहा कि हिंदी में कार्य करना राष्ट्रीय दायित्व के साथ-साथ कार्यदक्षता बढ़ाने का भी माध्यम है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र हिंदी भाषी क्षेत्र में स्थित है और अधिकांश कर्मचारी हिंदी में संवाद करते हैं, इसलिए कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का उपयोग स्वाभाविक रूप से कार्यकुशलता को बढ़ाता है।
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विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रमोद कुमार चोखानी की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में महाप्रबंधक (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क तथा प्रभारी राजभाषा) श्री राजीव कुमार ने कहा कि राजभाषा विभाग हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा कर्मचारियों की भाषाई समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने वित्त एवं लेखा विभाग की सक्रिय सहभागिता की सराहना की।
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कार्यशाला में उप प्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन-राजभाषा) श्री जितेन्द्र दास मानिकपुरी ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हिंदी में कार्यालयीन कार्य करने की शपथ दिलाई तथा राजभाषा संबंधी सांविधिक प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन वॉइस टायपिंग तथा ऑनलाइन नोटशीट प्रणाली ‘सिस्टम एप्लीकेशंस एंड प्रोडक्ट्स (सैप)’ में हिंदी नोटशीट तैयार करने का सजीव प्रदर्शन भी किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सुश्री आयुषी पुरोहित एवं सुश्री निकिता केशवानी ने कविता पाठ प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर हिंदी वर्तनी एवं विलोम शब्द लेखन पर आधारित प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सुश्री पूजा सिंह, द्वितीय स्थान श्री अरुण कुमार बंसल तथा तृतीय स्थान सुश्री खोमेश्वरी गंजीर ने प्राप्त किया। प्रोत्साहन पुरस्कार श्री प्रतीक देशलहरा, श्री आनंद कुमार तिवारी एवं सुश्री अमृता गंगराडे को प्रदान किए गए।
विभागीय स्तर पर हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को तिमाही पुरस्कार भी प्रदान किए गए। इस क्रम में श्री प्रकाश कोलकोंडी, सुश्री आयुषी पुरोहित तथा सुश्री निकिता केशवानी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) एवं विभागीय हिंदी समन्वय अधिकारी सुश्री स्मिता जैन ने विभागीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि विभाग में हिंदी पत्राचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं तथा विभागीय कर्मचारियों की रचनाएँ संयंत्र की पत्रिका ‘भिलाई भाषा भारती’ एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग की पत्रिका ‘महानदी’ में नियमित रूप से प्रकाशित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि संयंत्र एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति स्तर की प्रतियोगिताओं में विभागीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ भी दर्ज की जा रही हैं।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन अनुभाग अधिकारी श्री सुनील कुमार शर्मा ने किया। समारोह में महाप्रबंधक श्री रजत रंजन जाना, श्री प्रकाश कोलकोंडी सहित विभाग के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
माय भारत और जिला प्रशासन दंतेवाड़ा ने मेगा पंजीकरण अभियान के लिए मिलाया हाथस्थानीय प्रतिभाओं के लिए एनएमडीसी (NMDC) में खुले सुनहरे अवसर युवा प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना से करियर में भरेंगे नई उड़ान
इस योजना के अंतर्गत चयनित होने वाले प्रशिक्षुओं को प्रति माह ₹9,000 (नौ हजार रुपये) का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, युवाओं को वित्तीय प्रोत्साहन के रूप में ₹6,000 (छह हजार रुपये) का एकमुश्त कार्यग्रहण बोनस (ज्वाइनिंग बोनस) भी देय होगा। यह पंजीकरण शिविर 23 मई 2026 (शनिवार) को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक एनएमडीसी डीएवी पॉलिटेक्निक कॉलेज जवांगा, दंतेवाड़ा में आयोजित किया जाएगा।
आवेदकों के लिए निर्धारित आयु सीमा 18 से 25 वर्ष है (आधिकारिक सरकारी पहचान दस्तावेजों में दर्ज जन्म तिथि के अनुसार)। पात्रता के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं में वेल्डर, फिटर, कोपा (COPA), मैकेनिक डीजल, मैकेनिक मोटर, इलेक्ट्रिकल और मशीनिस्ट ट्रेड में आईटीआई (ITI) उत्तीर्ण, या मैकेनिकल, माइनिंग, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा उत्तीर्ण होना शामिल है। जिन उम्मीदवारों ने बी.टेक / बी.ई. (बीटेक / बीई) उत्तीर्ण कर लिया है या जो इसके अंतिम वर्ष में अध्ययनरत हैं (ईईई, सिविल, मैकेनिकल, केमिकल, माइनिंग और कंप्यूटर साइंस में) या जो स्नातक युवा बी.फार्मा या बीबीए की डिग्री रखते हैं, वे भी आवेदन करने के पात्र हैं।
जिला प्रशासन ने दंतेवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों के सभी योग्य, इच्छुक और अर्हताधारी युवाओं से इस शिविर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। आवेदकों को निर्देशित किया गया है कि वे नियत समय पर अपने सभी आवश्यक मूल शैक्षणिक दस्तावेजों, प्रमाणपत्रों, सामान्य पहचान पत्रों, पासपोर्ट आकार के फोटो और अद्यतित बायोडाटा (रिज्यूमे) के साथ पंजीकरण स्थल पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें। शिविर और पंजीकरण प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी या सहायता के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक संपर्क नंबर 8770017721 पर संपर्क कर सकते हैं।











