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देशव्यापी अभियान में डीआरआई ने सोने की अवैध भट्टी का भंडाफोड़ Also 9 किलो तस्करी का सोना 42 किलो चांदी और 8.5 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा जब्त की
सीमा पार सोने की तस्करी के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई में, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के अधिकारियों ने दिल्ली स्थित एक और सोने की तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह उत्तर पूर्वी क्षेत्र से दिल्ली तक विदेश से सोने की तस्करी में शामिल था और इसके लिए वह कई अलग-अलग ट्रेनों का इस्तेमाल करता था। गिरोह ने पकड़े जाने के जोखिम को कम करने के लिए अलग-अलग समय पर जहाजों से आवाजाही की व्यवस्था की थी। वे दिल्ली के घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र में धातु को पिघलाने वाली एक भट्टी चलाते थे।

26 जून, 2026 को, एक सुनियोजित अभियान में, डीआरआई अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल के न्यू कूच बिहार रेलवे स्टेशन और बिहार के मानसी जंक्शन पर दो वाहकों को रोका। डीआरआई द्वारा पकड़े गए व्यक्तियों के पास लगभग 2 किलोग्राम सोने की छड़ें छिपी हुई थीं। साथ ही, दिल्ली में भी लगभग 1.2 किलोग्राम तस्करी किए गए सोने के साथ दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इन कार्रवाइयों से दिल्ली में सोने को पिघलाने की एक अवैध फैक्ट्री के बारे में पता चला। चारों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
उसी दिन, एक अन्य अभियान में, डीआरआई अधिकारियों ने सैरांग से कोलकाता जा रही एक महिला को रोका और उसके पास से विदेश से तस्करी की गई 20 सोने की छड़ें बरामद कीं, जिन पर विदेशी भाषा में निशान थे और जिनका वजन लगभग 3.3 किलोग्राम था। सोना एक विशेष रूप से निर्मित बेल्ट में छिपाया गया था। यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया।
चेन्नई में भी, डीआरआई ने घरेलू हवाई कार्गो खेपों के माध्यम से विदेशी मुद्रा की अवैध आवाजाही और भारत में सोने-चांदी की संगठित तस्करी के वित्तपोषण में इसके इस्तेमाल से जुड़े एक बड़े तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। डीआरआई अधिकारियों ने चेन्नई एयर कार्गो में खेपों को जब्त किया और 7,58,500 अमेरिकी डॉलर और 35,00,000 थाई विदेशी मुद्रा बरामद की, जिसका मूल्य लगभग 8.15 करोड़ रुपये है। विदेशी मुद्रा के अवैध परिवहन और वितरण में शामिल तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। आगे की जांच में पता चला विदेशी मुद्रा को विभिन्न माध्यमों से भारत से बाहर तस्करी करके ले जाया जा रहा था और इसका इस्तेमाल कीमती धातुओं की वापस भारत में तस्करी के वित्तपोषण के लिए किया जा रहा था।
जांच के दौरान, विदेशी मुद्रा प्राप्त करने वाले एक व्यक्ति को दुबई से लौटते समय बेंगलुरु हवाई अड्डे पर 1.8 किलोग्राम सोने के साथ पकड़ा गया। इसके बाद उसके आवास से लगभग 42 किलोग्राम चांदी, 700 ग्राम सोने के आभूषण और 26.67 लाख रुपये भारतीय मुद्रा बरामद की गई। इससे भारत में विदेशी मुद्रा की अवैध खरीद, विदेशों में इसकी तस्करी और देश में सोने-चांदी की संगठित तस्करी के बीच सीधा संबंध स्थापित होता है।
इन सभी अभियानों में कुल मिलाकर लगभग 9 किलोग्राम विदेश से तस्करी किया हुआ सोना, 42 किलोग्राम चांदी, 8.15 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा और 26.67 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा जब्त की गई है और आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कमी के साथ वीओ चिदंबरनार बंदरगाह हरित समुद्री विकास के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा सरबानंदा सोनोवाल
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) सरबानंदा सोनोवाल ने कहा कि वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण (वीओसीपीए) भारत में सतत समुद्री विकास के लिए एक मॉडल के रूप में उभरा है। उन्होंने बंदरगाह द्वारा कार्बन उत्सर्जन कम करने, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने और हरित अवसंरचना विकास में की गई महत्वपूर्ण प्रगति का हवाला दिया।
वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण में सतत विकास, शिक्षा और नवाचार से जुड़ी कई पहलों को समर्पित करते हुए, सोनोवाल ने बंदरगाह की पहली सतत विकास रिपोर्ट के निष्कर्षों पर प्रकाश डाला, जिसमें पता चला कि नवीकरणीय ऊर्जा अब बंदरगाह की ऊर्जा खपत के लगभग 94 प्रतिशत की भरपाई करती है, जबकि शुद्ध कार्बन उत्सर्जन में लगभग 45 प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले चार वर्षों में प्रति टन माल की कार्बन तीव्रता लगभग आधी हो गई है, जिससे भारत के हरित समुद्री परिवर्तन में वीओ चिदंबरनार बंदरगाह की अग्रणी स्थिति और मजबूत हुई है।
सरबानंदा सोनोवाल ने कहा कि वीओ चिदंबरनार बंदरगाह यह प्रदर्शित कर रहा है कि जब अवसंरचना विकास को स्थिरता, नवाचार और सामुदायिक कल्याण द्वारा निर्देशित किया जाता है तो क्या हासिल किया जा सकता है। बंदरगाह द्वारा शुद्ध कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत की कमी लाना भारत के हरित और अधिक जिम्मेदार समुद्री विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये पहलें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार अवसंरचना के निर्माण के साथ-साथ लोगों, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण में निवेश करने के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण केंद्रीय विद्यालय, वीओ चिदंबरनार बंदरगाह में वर्ष 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए शैक्षणिक गतिविधियों का प्रारंभ था। केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्वीकृति से स्थापित यह संस्थान प्रारंभ में बंदरगाह स्कूल परिसर से संचालित होगा और बंदरगाह कर्मचारियों, केंद्र सरकार के कर्मचारियों और स्थानीय समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण सीबीएसई शिक्षा प्रदान करेगा। इस पहल से तूतीकोरिन में शैक्षिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा तक पहुंच का विस्तार होने की उम्मीद है।
सोनोवाल ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामाजिक परिवर्तन के सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है। वीओ चिदंबरनार बंदरगाह में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से बच्चों को नए अवसर मिलेंगे और दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने आईआईएम कलकत्ता की केस स्टडी, "द हाइड्रोजन पिवट: ऑर्केस्ट्रेटिंग द ग्रीन ट्रांजिशन एट वीओ चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी" का भी विमोचन किया, जो बंदरगाह के एक पारंपरिक कार्गो हब से हरित ऊर्जा और सतत समुद्री केंद्र में परिवर्तन का दस्तावेजीकरण करती है। यह अध्ययन नवीकरणीय ऊर्जा, विद्युतीकरण और हरित हाइड्रोजन विकास में बंदरगाह के अग्रणी प्रयासों पर प्रकाश डालता है, जिसमें भारत की पहली हरित हाइड्रोजन पायलट परियोजना भी शामिल है जिसे एक प्रमुख बंदरगाह पर शुरू किया गया है।
पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, वीओ चिदंबरनार बंदरगाह को स्कोप-2 उत्सर्जन मुक्त बंदरगाह के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है, जो स्वच्छ ऊर्जा और कम कार्बन उत्सर्जन वाले संचालन की दिशा में इसके सफल परिवर्तन को दर्शाता है। यह प्रमाणन बंदरगाह के कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को प्रमाणित करता है और भारत के अग्रणी हरित बंदरगाहों में से एक के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत करता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण ने वडोदरा स्थित गति शक्ति विश्वविद्यालय के साथ अनुसंधान, नवाचार, लॉजिस्टिक्स शिक्षा, कौशल विकास और सतत बंदरगाह संचालन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी से समुद्री लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह प्रबंधन में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना में सहायता मिलने के साथ-साथ उद्योग और शिक्षा जगत के बीच नए सहयोग के अवसर भी उत्पन्न होने की उम्मीद है।
श्री सोनोवाल ने पोर्टजीपीटी मोबाइल एप्लिकेशन भी शुभारंभ किया, जिससे वीओ चिदंबरनार बंदरगाह भारत का पहला प्रमुख बंदरगाह बन गया जिसने एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से एंटरप्राइज-ग्रेड जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म का विस्तार किया है। उम्मीद है कि यह प्लेटफॉर्म परिचालन दक्षता, ज्ञान प्रबंधन और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सुधार करेगा और बंदरगाह के दीर्घकालिक डिजिटल परिवर्तन लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक होगा।
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, वीओ चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण के अध्यक्ष सुसंता कुमार पुरोहित और मंत्रालय एवं सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।




एनसीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा मार्गदर्शन कार्यक्रम प्रोजेक्ट सुपर 50” का आयोजन किया त्रिपुरा के राज्यपाल ने एनसीएससी के "प्रोजेक्ट सुपर 50 के शुभारंभ समारोह में डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विजन का आह्वान किया
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने आज नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय में सिविल सेवा परीक्षा मार्गदर्शन कार्यक्रम "प्रोजेक्ट सुपर 50" का सफलतापूर्वक आयोजन किया। कार्यक्रम का विषय था "मार्गदर्शन • परामर्श • सशक्तिकरण"।
त्रिपुरा के राज्यपाल श्री इंद्रसेना रेड्डी नल्लू कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने सिविल सेवा उम्मीदवारों को संबोधित किया और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कैसे करें, भारत में सिविल सेवा का इतिहास और सफलता के लिए आवश्यक रणनीतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना ने आयोग के गठन, इसके अधिदेश, शक्तियों और अनुसूचित जातियों के सशक्तिकरण में एनसीएससी की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। एनसीएससी के सदस्य डॉ. पार्थ बिस्वास ने युवाओं से डॉ. बी.आर. अंबेडकर के प्रेरणादायक मंत्र "शिक्षित हो, संगठित हो, आंदोलन करो" को अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर सदस्य श्री वड्डेपल्ली रामचंदर भी उपस्थित थे। एनसीएससी के सचिव श्री गुडे श्रीनिवास ने सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों को बहुमूल्य सुझाव दिए।

विशेष रूप से आमंत्रित वरिष्ठ आईएएस और आईआरएस अधिकारियों ने सिविल सेवा उम्मीदवारों के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव, परीक्षा की तैयारी की रणनीतियां और प्रशासनिक जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को साझा किया। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना अनुसूचित जाति के युवाओं को शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिविल सेवा उम्मीदवारों, सेवारत प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया।


टिकाऊ और किफायती जलीय बैटरियों के लिए इलेक्ट्रोलाइट अभियांत्रिकी को उन्नत बनाना
हाल ही में विकसित एक नया इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव, सुरक्षित, ज़्यादा चलने वाली और ज़्यादा किफायती रिचार्जेबल ज़िंक बैटरियों के विकास में योगदान दे सकता है।
जलीय जिंक-आयन बैटरियां (एज़ीआईबी) लिथियम-आयन बैटरी के कम लागत वाले, सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प के तौर पर उभर रही हैं। हालांकि, जिंक डेंड्राइट वृद्धि, हाइड्रोजन उत्क्रमण अभिक्रिया (एचईआर), जंग तथा खराब साइकलिंग स्टेबिलिटी जैसी समस्याएं इनके व्यावसायीकरण में प्रमुख बाधाएं हैं। यह अध्ययन महंगे सामग्री-पुनःडिजाइन के बजाय इंटरफेस अभियांत्रिकी के माध्यम से इन महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है। यह कार्य बैटरी की सुरक्षा और कम लागत को बनाए रखते हुए उसकी आयु बढ़ाने के लिए एक व्यावहारिक तथा बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली रणनीति प्रदान करता है, जो बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण अनुप्रयोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है
शोधकर्ता जिंक एनोड की स्थिरता बढ़ाने के विभिन्न उपायों और इलेक्ट्रिक डबल लेयर के महत्व और इनर हेल्महोल्ट्ज़ प्लेन की भूमिका पर काम कर रहे हैं, जहाँ असल में इलेक्ट्रोकेमिकल रिएक्शन होते हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों ने 1,3-बिस (1,3-डाइकार्बोक्सीप्रोपाइल)-1एच-इमिडाज़ोल-3-आयम क्लोराइड (बीडीआईएम) नामक एक इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव विकसित किया है। जो ज़िंक मेटल की सतहों पर चयनात्मक रूप से अवशोषित होकर जलीय जिंक-आयन बैटरियों (एज़ीआईबी) की इनर हेल्महोल्ट्ज़ प्लेन (आईएचपी) को नियंत्रित करता है।
उन्होंने ग्लूटामिक एसिड को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और पानी में घोला, जिसके बाद उसमें ग्लाइऑक्सल, फॉर्मल्डिहाइड तथा एसीटिक एसिड मिलाया गया। इस मिश्रण को नाइट्रोजन वातावरण में 70°C तापमान पर 24 घंटे तक गर्म किया गया। इसके पश्चात मिश्रण का निष्कर्षण और लायोफिलाइज़ेशन किया गया, जिससे बीडीआईएम का एक क्रिस्टलीय पाउडर प्राप्त हुआ।

(बाएँ) : एसीएस इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री में स्वीकृत शोधकार्य का कवर इमेज, जिसमें दर्शाया गया है कि इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव जिंक की सतह को किस प्रकार नियंत्रित करता है। (दाएँ) हाइड्रोजन उत्क्रमण अभिक्रिया (एचईआर) को दबाने में जिंक एनोड की सतह पर बीडीआईएम एडिटिव के प्रभाव की तुलना।
बीडीआईएम एडिटिव में अनेक ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन डोनर साइट होती हैं, जो जिंक धातु के साथ प्रबल अंतःक्रिया करती हैं। बैटरी के संचालन के दौरान, बीडीआईएम नेगेटिवली पोलराइज्ड जिंक पर प्राथमिकता से अवशोषित होकर इनर हेल्महोल्ट्ज़ प्लेन पर स्थान ग्रहण करता है। यह अवशोषण इंटरफेस से जल अणुओं को हटा देता है, जिससे पानी से होने वाले साइड रिएक्शन जैसे हाइड्रोजन उत्क्रमण और जंग कम हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, हाइड्रोजन उत्क्रमण, जंग तथा डेंड्राइट का निर्माण प्रभावी रूप से दब जाता है।
जिंक निक्षेपण की प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए प्रयोगशाला में निर्मित एक सूक्ष्म इलेक्ट्रोड, जिसे अल्ट्रामाइक्रोइलेक्ट्रोड (यूएमई) कहा जाता है, को फास्ट-स्कैन साइक्लिक वोल्टैमेट्री (एफएससीवी) तकनीक के साथ संयोजित किया गया।
यूएमई का आकार लगभग 50 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। इसके अत्यंत छोटे आकार के कारण इसमें डिफ्यूजन बिहेवियर लीनियर से रेडियल या हेमिस्फेरिकल में बदल जाता है। यह विशेषता हाई स्कैन रेट पर और हाई स्कैन रेट पाने में मदद करती है, जबकि एफएससीवी चार्ज-ट्रांसफर रिजीम में बदलाव को विज़ुअलाइज़ करने में मदद करता है ताकि एडिटिव मिलाने पर स्कैन रेट कम हो सकें। इससे उन्हें सीधे इंटरफेशियल चार्ज-ट्रांसफर और मास-ट्रांसफर काइनेटिक्स की जांच करने में मदद मिली, जिससेzजिंक-डिपॉजिशन मैकेनिज्म की नई समझ मिली।
आईएनएसटी मोहाली के वैज्ञानिक ई, डॉ. रामेंद्र सुंदर डे के नेतृत्व में किया गया यह शोध एसीएस इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है। इसे प्रत्यक्ष / परोक्ष रूप से जलीय जिंक-आयन बैटरियों (एज़ीआईबी), ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण, तथा बैटरी सुरक्षा और जीवनकाल बढ़ाने वाली तकनीकों में लागू किया जा सकता है।
यह तकनीक सुरक्षित, ज़्यादा चलने वाली और ज़्यादा किफायती रिचार्जेबल बैटरियों के विकास में योगदान दे सकती है। उन्नत जिंक-आयन बैटरियों का उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण, बैकअप पावर सिस्टम तथा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण में किया जा सकता है। बैटरी के जीवनकाल को बढ़ाकर और प्रदर्शन में होने वाली गिरावट को कम करके, यह तकनीक रखरखाव लागत को घटाने तथा सतत ऊर्जा अवसंरचना की विश्वसनीयता को बढ़ाने में सहायता कर सकती है।
विश्व बैंक की सहायता से नवाचारी विकास (रिवार्ड) कार्यक्रम के माध्यम से कृषि लचीलापन के लिए जलसंभरों के पुनरुद्धार के अंतर्गत उन्नत जलसंभर प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों (एनटीजी) पर दूसरी राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) के ज्ञान भागीदार, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) ने विश्व बैंक समर्थित नवोन्मेषी विकास के माध्यम से कृषि लचीलेपन के लिए जलसंभरों का पुनरुद्धार (रिवार्ड) कार्यक्रम के अंतर्गत उन्नत जलसंभर प्रबंधन के लिए मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (एनटीजी) पर दूसरी राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक का आयोजन 17-18 जून 2026 को एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया।

उद्घाटन सत्र में भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण और एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर कुमार के साथ-साथ डीओएलआर और एनआरएए के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस परामर्श बैठक में जलसंभर विकास और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया, जिनमें भूमि संसाधन विभाग, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण, विश्व बैंक, रिवार्ड राज्यों (कर्नाटक और ओडिशा), एनआरएए के कंसोर्टियम पार्टनर, नाबार्ड, आईसीएआर संस्थानों और अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण के विश्व दिवस के अवसर पर , श्री नरेंद्र भूषण ने हमारी मिट्टी की रक्षा करने, खराब हो चुके भूदृश्यों को पुनर्स्थापित करने, हमारे वर्षा आधारित क्षेत्रों में सुधार करने और जलसंभर विकास के माध्यम से एक स्थायी भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से "मेरी मिट्टी, मेरा फर्ज" नामक एक लघु फिल्म का शुभारंभ किया ।
कृषि विभाग के सचिव ने इस बात पर बल दिया कि जलसंभर प्रबंधन विज्ञान, सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक सरलता पर आधारित होना चाहिए, जिसमें किसानों और स्थानीय जलसंभर संस्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने दिशा-निर्देश तैयार करते समय वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास, कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल सघनता बढ़ाने, जल सुरक्षा और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन विकसित करने और जलसंभर संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय विकास योजना (एनटीजी) में सुझाए गए उपाय लागू करने योग्य होने चाहिए।
एनआरएए के सीईओ ने एनटीजी मसौदे पर पहली राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक के लिए पूर्व में हुई चर्चा के सुझावों को याद करते हुए कहा कि इसमें निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, डेटा-आधारित दृष्टिकोण, समन्वय, पीआरआई की भागीदारी और परियोजना के बाद की स्थिरता जैसे बिंदुओं पर जोर दिया गया था। इसके अलावा, उन्होंने चैटबॉट के साथ सक्षम अनुप्रयोगों के एकीकरण, प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी और मूल्यांकन प्रणालियों के उपयोग, मजबूत डीएसएस के विकास और राष्ट्रीय वेब पोर्टल प्रणालियों पर बल दिया, जो भविष्य के जलसंभर कार्यक्रमों के लिए सार्थक परिणाम प्राप्त कर सकें।
कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएम) ने योजना बनाने के लिए उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजरी प्राप्त करने हेतु ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग, एलआरआई और हाइड्रोलॉजी-लाइट दृष्टिकोणों को अपनाने, प्रभावी जलसंभर कार्यान्वयन के लिए राज्यों में संस्थागत और कार्यान्वयन तंत्रों में सुधार करने और तकनीकी सेवा प्रदाताओं, संस्थानों/एनजीओ की भागीदारी के माध्यम से जलसंभर संपत्तियों के परियोजना-पश्चात रखरखाव और स्थिरता के लिए तंत्रों का पता लगाने पर विचार-विमर्श करने का सुझाव दिया।
इस परामर्श का उद्देश्य राष्ट्रीय तकनीकी दिशा-निर्देशों के मसौदे पर विचार-विमर्श करना और देश भर में जलसंभर नियोजन, कार्यान्वयन, निगरानी और स्थिरता को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करना है। उम्मीद है कि ये विचार-विमर्श वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलसंभर शासन में सुधार और जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
भूमि संसाधन सूचीकरण (एलआरआई), जल विज्ञान, निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस), प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी और मूल्यांकन, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक लामबंदी, आजीविका संवर्धन, जलसंभर स्थिरता और रिमोट सेंसिंग और जीआईएस-आधारित वेब पोर्टल विकास जैसे प्रमुख विषयगत क्षेत्रों को कवर करने वाले तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला की योजना बनाई गई है ।
इस आयोजन में राज्यों और प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 विशेषज्ञों और अभ्यासकर्ताओं ने भाग लिया जो देश में वैज्ञानिक और बजबूत जलसंभर प्रबंधन प्रथाओं को आगे बढ़ाने के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
योग पार्क पोर्टल सार्वजनिक स्थानों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बदल रहा है
योग पार्क स्वास्थ्य और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए सामुदायिक केंद्र के रूप में कार्य करेंगे
भारत के सामुदायिक स्थल, शहरी क्षेत्र और पार्क लंबे समय से लोगों को एक साथ लाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का काम करते आ रहे हैं। शहरी जीवन की रफ्तार लगातार तेज होने के साथ-साथ ये सार्वजनिक स्थल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में और भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। इनकी क्षमता को पहचानते हुए आयुष मंत्रालय ने योग पार्क पोर्टल का शुभारंभ किया है ताकि देश भर के मौजूदा पार्कों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में परिवर्तित किया जा सके जहां योग, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली दैनिक जीवन का हिस्सा बने।
मध्य प्रदेश के खजुराहो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 25-दिवसीय पूर्वापेक्षा कार्यक्रम के दौरान आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने योग पार्क पोर्टल का शुभारंभ किया। पुनः आरंभ किए गए योग संगम पोर्टल के साथ ही इसका शुभारंभ किया गया। यह प्लेटफॉर्म योग की जमीनी पहुंच को गहरा करने और देश भर में स्थायी स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा तैयार करने की दिशा में मंत्रालय की प्रमुख पहलों में से एक है।
योग पार्क पहल का उद्देश्य मूल रूप से पार्कों को केवल मनोरंजन स्थल के रूप में नहीं बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रूप में बदलना है। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायती राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, निवासी कल्याण संघ, गैर-सरकारी संगठन, कॉर्पोरेट संस्थाएं और अन्य संस्थान मौजूदा पार्कों को योग पार्कों में विकसित करने में भाग ले सकते हैं जो नियमित योग अभ्यास, ध्यान, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
श्री प्रतापराव जाधव ने इस पहल के महत्व पर कहा कि योग पार्क स्थायी सामुदायिक संपत्तियों के रूप में काम करेंगे जो स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देंगे और भारत के निवारक स्वास्थ्य देखभाल तंत्र को मजबूत करेंगे। यह पहल योग को दैनिक जीवन में एकीकृत करने और देश भर के मोहल्लों और समुदायों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पारंपरिक अवसंरचना परियोजनाओं के विपरीत जो केवल भौतिक विकास पर केंद्रित होती हैं, योग पार्क में स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक भागीदारी का समावेश है। इस पहल का उद्देश्य मौजूदा सार्वजनिक पार्कों को योग अभ्यास, ध्यान और सामुदायिक स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए सुसज्जित स्वागत योग्य स्थानों में बदलना है। यहां योग के लिए समर्पित चबूतरे, ध्यान क्षेत्र, हरे-भरे क्षेत्र, जागरूकता केंद्र और सामूहिक सत्रों के लिए खुले स्थान विकसित किए जा सकते हैं, ताकि सभी आयु वर्ग के लोगों की नियमित भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके।
इस पहल की एक खास विशेषता इसका सहयोगात्मक कार्यान्वयन मॉडल है। स्थानीय अधिकारियों और सामुदायिक संगठनों से उपयुक्त पार्कों की पहचान और रखरखाव में अग्रणी भूमिका निभाने की अपेक्षा की जाती है, जबकि योग संस्थान जागरूकता कार्यक्रमों और नियमित योग सत्रों में सहयोग कर सकते हैं। यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से भागीदारी को भी प्रोत्साहित करती है, जिससे कंपनियां स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे सकें और स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ पहुंचा सकें।
मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि सीएसआर समर्थित योग पार्क दैनिक योग अभ्यास, स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों और सामुदायिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए सुलभ स्थान उपलब्ध कराकर एक स्थायी सार्वजनिक स्वास्थ्य विरासत का निर्माण कर सकते हैं। भाग लेने वाली कंपनियों को सामाजिक कल्याण में उनके योगदान के लिए उचित मान्यता भी मिल सकती है, जिससे निवारक स्वास्थ्य देखभाल और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने में निजी क्षेत्र की भूमिका को बल मिलेगा।
योग पार्क पोर्टल बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा राष्ट्रव्यापी भागीदारी के लिए एक डिजिटल ढांचा प्रस्तुत करता है। यह प्लेटफॉर्म हितधारकों को इस पहल में शामिल होने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश, अवधारणा नोट्स, पंजीकरण तंत्र और संसाधन उपलब्ध कराता है। सरकारी संस्थानों, स्थानीय निकायों, सामुदायिक संगठनों और कॉर्पोरेट भागीदारों को एक ही पोर्टल के माध्यम से एकजुट करके, मंत्रालय का उद्देश्य स्वास्थ्य और कल्याण पर केंद्रित एक समन्वित राष्ट्रीय आंदोलन का निर्माण करना है।
यह पहल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के विषय "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" से भी पूरी तरह मेल खाती है। दुनिया भर में बढ़ती जीवनशैली संबंधी समस्याओं, तनाव और उम्र से संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए, सुलभ सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र नियमित शारीरिक गतिविधि, ध्यान और सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। योग पार्कों की परिकल्पना ऐसे समावेशी वातावरण के रूप में की गई है जहां बच्चे, युवा, कामकाजी पेशेवर और वरिष्ठ नागरिक सभी अपने दैनिक जीवन में योग के अभ्यास से लाभ उठा सकें।
महत्वपूर्ण बात यह है कि योग पार्क का उद्देश्य एक ऐसी स्थायी विरासत का निर्माण करना है जो अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के वार्षिक आयोजन से कहीं आगे तक फैले। हालांकि सामूहिक योग प्रदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रम जागरूकता पैदा करते हैं वहीं समर्पित स्वास्थ्य केंद्र बनाकर एक स्थायी सामुदायिक संसाधन उपलब्ध कराया जा सकता है जो नागरिकों को पूरे वर्ष सेवा प्रदान करता रहेगा। इस अर्थ में, यह पहल आयोजन-आधारित भागीदारी से हटकर सतत स्वास्थ्य गतिविधियों की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पिछले एक दशक में विश्व के सबसे बड़े जन कल्याण आंदोलनों में से एक बन गया है। योग पार्क पोर्टल जागरूकता को बुनियादी ढांचे में और भागीदारी को दीर्घकालिक सामुदायिक लाभ में परिवर्तित करके इस गति को आगे बढ़ाता है। जैसे-जैसे भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अधिक से अधिक पार्क इस पहल में शामिल होते जाएंगे, योग पार्क में निवारक स्वास्थ्य देखभाल, पर्यावरणीय सामंजस्य और समग्र कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का एक स्थायी प्रतीक बनने की क्षमता है।

शहरी सड़कों का कायापलट सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी ने टिकाऊ सड़क पुनर्निर्माण और गड्ढों की त्वरित मरम्मत के लिए रणनीतिक साझेदारी की
सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के बीच 10 जून 2026 को सड़कों के कार्यात्मक और संरचनात्मक मूल्यांकन, निर्माण गुणवत्ता पर्यवेक्षण और एमसीडी के इंजीनियरों तथा कर्मचारियों की क्षमता निर्माण के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर, सीएसआईआर-सीआरआरआई द्वारा विकसित लौह और इस्पात स्लैग समुच्चय आधारित त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक - इकोफिक्स के कार्यान्वयन के लिए एक द्विपक्षीय प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इस साझेदारी का उद्देश्य वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता आश्वासन और नवीन रखरखाव प्रौद्योगिकियों को अपनाते हुए दिल्ली के सड़क बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, स्थायित्व और निरंतरता को बढ़ाना है।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए एमसीडी आयुक्त श्री संजीव खीरवार, आईएएस ने शहरी सड़क नियोजन और रखरखाव में प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोणों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग एमसीडी की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करेगा और साथ ही इकोफिक्स जैसी तकनीकों के माध्यम से त्वरित और अधिक टिकाऊ मरम्मत को सक्षम बनाएगा।

सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी के अधिकृत प्रतिनिधियों के बीच एमसीडी सड़कों के संरचनात्मक मूल्यांकन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान

सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी के अधिकृत प्रतिनिधियों के बीच इकोफिक्स तकनीक का उपयोग करके तत्काल गड्ढों की मरम्मत के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान
सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. चौधरी रवि शेखर ने अतिथिगणों का स्वागत करते हुए सड़क क्षेत्र में संस्थान के सात दशकों के योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि यह साझेदारी एमसीडी को सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों के कार्यान्वयन में तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने आगे कहा कि स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी- इकोफिक्स, रेजुपेव और एमएसएस+ जैसी प्रौद्योगिकियां संसाधन संरक्षण, चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों और कार्बन उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देती हैं।
इस पहल का नेतृत्व सीएसआईआर-सीआरआरआई के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड और इकोफिक्स तकनीक के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को सहयोग के उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक सड़क मूल्यांकन, गुणवत्ता पर्यवेक्षण और उन्नत रखरखाव तकनीकों को अपनाने से सड़क की उपयोगिता, टिकाऊपन और जीवनचक्र प्रदर्शन में सुधार होगा, साथ ही रखरखाव संबंधी व्यवधानों को भी कम किया जा सकेगा।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण इकोफिक्स के उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी प्रबंधन समझौते पर हस्ताक्षर करना था। इकोफिक्स एक त्वरित और टिकाऊ गड्ढा मरम्मत तकनीक है जिसे संसाधित लोहे और इस्पात स्लैग एग्रीगेट का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह तकनीक औद्योगिक उप-उत्पादों का उपयोग करके टिकाऊ सड़क रखरखाव के माध्यम से अपशिष्ट से धन-संपन्नता के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का समर्थन करती है, जिससे स्थायित्व में सुधार होता है और वायु प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय प्रभावों को कम किया जा सकता है। बेहतर सड़क स्थिति और समय पर रखरखाव से सड़क पर धूल का उत्पादन कम होने की उम्मीद है, जबकि इस्पात स्लैग और पुनर्चक्रण-आधारित तकनीकों का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं का समर्थन करता है।
इस कार्यक्रम में सीएसआईआर-सीआरआरआई और एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें एमसीडी के अपर आयुक्त श्री एल.डी. मेघवाल; एमसीडी में इंजीनियर-इन-चीफ श्री प्रेम चंद मीना; एमसीडी में मुख्य अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण) श्री बृजेश कुमार; मुख्य अभियंता (भंडार) श्री संदीप मल्होत्रा, और एमसीडी में सलाहकार (योजना) तथा पूर्व मुख्य अभियंता श्री मनीष रस्तोगी; मुख्य वैज्ञानिक और पीएमई प्रमुख डॉ. विनोद करार; सीएसआईआर-सीसीआरआई में मुख्य वैज्ञानिक और आईएलटी डिवीजन प्रमुख डॉ. के. रविंदर शामिल थे। इनके साथ ही शहरी अवसंरचना क्षेत्र के वैज्ञानिक, अभियंता और अन्य हितधारक भी मौजूद थे।
यह पहल राष्ट्रीय राजधानी के लिए सुदृढ़, टिकाऊ और नागरिक-केंद्रित सड़क अवसंरचना विकसित करने की दिशा में साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत की अध्यक्षता में 13वें ब्रिक्स शहरीकरण फोरम का नई दिल्ली में शुभारंभ समावेशी एवं लचीले शहरी भविष्य पर ब्रिक्स मंत्रियों ने किया विचार विमर्श
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित 13वें ब्रिक्स शहरीकरण फोरम का आज नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने औपचारिक उद्घाटन किया।
दो दिवसीय इस फोरम में ब्राज़ील, रूस, इंडोनेशिया, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और शहरी विकास विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस फोरम में शहरी विकास से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा रहा है।
भारत इससे पूर्व वर्ष 2013 में नई दिल्ली, वर्ष 2016 में विशाखापत्तनम तथा वर्ष 2021 में वर्चुअल माध्यम से आयोजित संस्करणों सहित चौथी बार ब्रिक्स शहरीकरण फोरम की मेजबानी कर रहा है।
इस वर्ष फोरम का विषय ‘जन-केंद्रित शहर: समावेशी एवं लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग’ है। मंच का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा, “भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत यह फोरम शहरी विकास के एजेंडे को वैश्विक विकास विमर्श में और अधिक सशक्त रूप से स्थान देने का अवसर प्रदान करता है।” उन्होंने समावेशी शहरी विकास, जलवायु एवं आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना, संस्थागत सुदृढ़ीकरण तथा डिजिटल नवाचार को भारत की विकास यात्रा के प्रमुख आधार स्तंभ बताया।

प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री श्रीनिवास काटिकिथला ने फोरम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए कहा, “वर्षों से यह फोरम सदस्य देशों को श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान, एक-दूसरे की व्यवस्थाओं की बेहतर समझ विकसित करने तथा दीर्घकालिक सहयोग के लिए आवश्यक विश्वास निर्माण का अवसर प्रदान करता रहा है।”

उद्घाटन सत्र के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने ‘इंडियाज अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन: स्टोरीज़ ऑफ चेंज’ नामक प्रकाशन का विमोचन किया। इस प्रकाशन में मंच के चार प्राथमिकता क्षेत्रों के अंतर्गत राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत चयनित शहरी पहलों और अनुभवों को संकलित किया गया है।
उद्घाटन सत्र के पश्चात एक उच्चस्तरीय पूर्णाधिवेशन आयोजित किया गया। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र ने सदस्य देशों को अपने-अपने देशों के वक्तव्यों के माध्यम से साझा शहरी चुनौतियों, संभावनाओं तथा भविष्य की आकांक्षाओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया।
ब्रिक्स शहरीकरण मंच के इतर भारत और रूसी संघ के बीच एक द्विपक्षीय बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार में आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा रूसी संघ के निर्माण, आवास एवं उपयोगिता उपमंत्री श्री यूरी मुत्सेनेक ने की। बैठक में सतत शहरी विकास के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ बनाने के संबंध में सार्थक और भविष्य उन्मुख चर्चा हुई।
दोनों पक्षों ने सतत शहरी विकास पर प्रस्तावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) से संबंधित विचार-विमर्श की प्रगति की समीक्षा की तथा इसके शीघ्र अंतिम रूप एवं निष्पादन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। चर्चा में शहरी नियोजन, किफायती आवास, नगर अवसंरचना, सतत निर्माण प्रौद्योगिकियां, क्षमता निर्माण तथा शहरी शासन की श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान जैसे विषय शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त ईरान और रूस, ईरान और चीन तथा रूस और संयुक्त अरब अमीरात के बीच भी द्विपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं।
इसके उपरांत प्रतिनिधिमंडलों ने नई दिल्ली तथा उसके आसपास विकसित चयनित शहरी पहलों का स्थलीय भ्रमण किया, जिससे उन्हें भारत के शहरी परिवर्तन की प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हुई। इस भ्रमण में नया संसद परिसर तथा इंडिया गेट–कर्तव्य पथ क्षेत्र भी शामिल थे।
दिन का समापन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सहभागी रात्रिभोज के साथ हुआ।
मंत्रिमंडल ने आंध्र प्रदेश की नई कैपिटल सिटी अमरावती में नए केंद्रीय सरकारी जनरल पूल कार्यालय के निर्माण को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने आंध्र प्रदेश की न्यू कैपिटल सिटी अमरावती में केंद्रीय सरकारी जनरल पूल ऑफिस अकोमोडेशन (सीजीजीपीओए) के निर्माण को आज मंजूरी दी है।
यह परियोजना अमरावती के नए ग्रीनफील्ड शहर में एक ऐतिहासिक पहल है, जिसे विश्वस्तरीय शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य विभिन्न केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के लिए ऑफिस अकोमोडेशन की बढ़ती मांग को पूरा करना है, ताकि उन्हें एक ही छत के नीचे लाया जा सके। इस एकीकरण से अंतर-विभागीय समन्वय बढ़ेगा और आंध्र प्रदेश राज्य को केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की दक्षता और प्रभावशीलता में सुधार होगा।
आंध्र प्रदेश की न्यू कैपिटल सिटी में केंद्रीय सरकारी सामान्य पूल ऑफिस अकोमोडेशन (सीजीजीपीओए) 5.53 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। सीजीजीपीओए में दो ब्लॉक हैं- एक ब्लॉक प्लॉट सी-9 पर है जिसमें भूतल के साथ 13 मंजिलें हैं (भूतल, सेवाओं के लिए, तीन मंजिलें पोडियम पार्किंग के लिए और दस मंजिलें कार्यालय के लिए) और दूसरा ब्लॉक प्लॉट सी-8 पर है जिसमें भूतल के साथ 10 मंजिलें हैं (भूतल, सेवाओं के लिए, तीन मंजिलें पोडियम पार्किंग के लिए और सात मंजिलें कार्यालय के लिए)। इस सुविधा में लगभग 8,000 अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए जगह होगी। लगभग 1,800 समतुल्य कार पार्किंग स्थानों (ईसीएस) के लिए पोडियम पार्किंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। परियोजना का कुल निर्मित क्षेत्र 23,25,000 वर्ग फुट (2,16,032 वर्ग मीटर) है।
विश्वभर में पर्यावरण के अनुकूल और संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने वाली निर्माण पद्धतियों पर जोर बढ़ता जा रहा है। आंध्र प्रदेश की न्यू कैपिटल सिटी में इसी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए प्रस्तावित केंद्रीय सरकारी सामान्य पूल ऑफिस अकोमोडेशन (सीजीजीपीओए) की योजना और डिजाइन भारत में प्रचलित उच्चतम हरित भवन मानकों के अनुरूप तैयार की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य सतत् स्थल नियोजन, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि, जल संरक्षण, स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों के उपयोग और निवासियों के स्वास्थ्य और आराम में सुधार के माध्यम से पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है। परिसर को न्यूनतम जीआरआईएचए 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए डिजाइन, निर्माण और पंजीकृत किया जाएगा और यह ऊर्जा संरक्षण और सतत् भवन संहिता (ईसीएसबीसी) 2024 के नवीनतम प्रावधानों का अनुपालन करेगा।
आंध्र प्रदेश की न्यू कैपिटल सिटी में केंद्रीय सरकारी जनरल पूल ऑफिस अकोमोडेशन (सीजीजीपीओए) में आवश्यक नागरिक और सामुदायिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें एटीएम युक्त बैंक, डाकघर, शिशुगृह, मनोरंजन कक्ष, महिला कक्ष, 100 लोगों की बैठने की क्षमता वाला सम्मेलन कक्ष, 500 लोगों की बैठने की क्षमता वाला मल्टीपर्पज हॉल और कर्मचारियों और आगंतुकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए चार कैंटीन शामिल हैं।
परिसर में बाधा-मुक्त निर्मित वातावरण को शामिल किया जाएगा ताकि मानदंडों और मानकों के अनुपालन में दिव्यांगजनों के लिए पहुंच, सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित की जा सके।
इस परियोजना से कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है। निर्माण चरण के दौरान प्रति वर्ष लगभग 7,00,000 मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जबकि परिचालन चरण में प्रति वर्ष लगभग 50,000 मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
परियोजना की लागत और वित्तपोषण
इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,299.08 करोड़ रुपए है, जिसका वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा बजटीय सहायता के माध्यम से लेखा मद संख्या 4059 (लोक निर्माण पर पूंजीगत व्यय) के अंतर्गत किया जाएगा।
परियोजना-पूर्व गतिविधियां
इस परियोजना का क्रियान्वयन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के माध्यम से किया जाएगा। निविदा पूर्व प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और निविदा दस्तावेज तैयार करने का कार्य जारी है।
आंध्र प्रदेश के अमरावती स्थित न्यू कैपिटल सिटी में प्रस्तावित केंद्रीय सरकारी सामान्य पूल कार्यालय आवास (सीजीजीपीओए)


कैबिनेट ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण 2ए (कोटेश्वर मार्ग से एयरपोर्ट गलियारे) को स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण 2(ए) को स्वीकृति दे दी है। इस गलियारे की लंबाई 6.032 किलोमीटर है और इसमें 5 स्टेशन (4 एलिवेटेड और 1 अंडरग्राउंड) शामिल हैं। चरण 2(ए) के कार्यान्वित होने पर अहमदाबाद-गांधीनगर गलियारे में 77.63 किलोमीटर का सक्रिय मेट्रो रेल नेटवर्क हो जाएगा। चरण 2(ए) कॉरिडोर में स्थित स्टेशनों के नाम हैं- आश्रम रोड, कोटेश्वर प्राचीन मंदिर, साबरमती नदी, सरदार नगर और एयरपोर्ट।
इस परियोजना की कुल लागत, जिसमें निर्माण के दौरान ब्याज (आईडीसी) भी शामिल है, 2,169.04 करोड़ रुपये होगी।
लाभ और विकास को बढ़ावा देना:
अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना का चरण 2(ए) शहर के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। चरण 2(ए) शहर में मेट्रो रेल नेटवर्क का एक बड़ा विस्तार है।
बेहतर सम्पर्क:
अहमदाबाद मेट्रो परियोजना के चरण 2(ए) में लगभग 6.032 किलोमीटर के नए मेट्रो कॉरिडोर के विकास की परिकल्पना की गई है, जिसका उद्देश्य हवाई अड्डे से निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करके और उन प्रमुख आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों को जोड़कर सार्वजनिक परिवहन को काफी हद तक बढ़ाना है, जिनमें वर्तमान में कुशल ट्रांजिट पहुंच का अभाव है।
इस चरण का उद्देश्य आवासीय और वाणिज्यिक केंद्रों सहित प्रमुख क्षेत्रों को अहमदाबाद-गांधीनगर गलियारे के साथ सुचारू रूप से एकीकृत करना है। इसके अलावा, 2029 के विश्व पुलिस खेलों और 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों के लिए आसपास के क्षेत्र में खेल सुविधाओं को बढ़ाने की भी संभावना है।
इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़कर, चरण 2(ए) न केवल कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधि, पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और निवासियों और आगंतुकों दोनों के लिए शहरी आवागमन को आसान बनाएगा।
- यातायात जाम में कमी : मेट्रो रेल एक कुशल वैकल्पिक सड़क परिवहन के रूप में, और चरण 2(ए) के अंतर्गत हवाई अड्डे तक मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार से अहमदाबाद के भीतर विशेष रूप से प्रभाव पड़ेगा। सड़क यातायात में कमी से वाहनों की सुगम आवाजाही, यात्रा समय में कमी, समग्र सड़क सुरक्षा में वृद्धि आदि संभव हो सकेगी।
- पर्यावरण संबंधी लाभ : अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण 2(ए) के जुड़ने और अहमदाबाद और गांधीनगर शहरों में समग्र मेट्रो रेल नेटवर्क में वृद्धि के साथ, पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित परिवहन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
- आर्थिक विकास : यात्रा में लगने वाला समय कम होने और हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और बस डिपो जैसे शहर के विभिन्न हिस्सों तक बेहतर पहुंच से उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि इससे लोग अपने कार्यस्थलों और गंतव्यों तक अधिक कुशलता से पहुंच सकेंगे। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा दे सकती है, खासकर नए मेट्रो स्टेशनों के आसपास के क्षेत्रों में, जिससे पहले कम पहुंच वाले क्षेत्रों में भी निवेश और विकास आकर्षित हो सकता है।
- सामाजिक प्रभाव : अहमदाबाद में चरण 2(ए) मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार से सार्वजनिक परिवहन तक अधिक समान पहुंच मिलेगी, जिससे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों को लाभ होगा और परिवहन असमानताओं में कमी आएगी, जो आवागमन के समय को कम करके और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में सुधार करके जीवन की उच्च गुणवत्ता में योगदान देगी।
अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना का चरण 2(ए) शहर के लिए एक क्रांतिकारी विकास सिद्ध होगा। यह बेहतर सम्पर्क, यातायात जाम में कमी, पर्यावरणीय लाभ, आर्थिक विकास और जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने का आश्वासन देता है। प्रमुख शहरी चुनौतियों का समाधान करते हुए और भविष्य के विस्तार के लिए आधार प्रदान करते हुए, चरण 2(ए) शहर के विकास पथ और स्थिरता को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अहमदाबाद मेट्रो के चरण 2ए से निर्माण कार्य के चरम समय के दौरान लगभग 2,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और सिस्टम के संचालन एवं रखरखाव के दौरान 500 लोगों के काम करने की संभावना है।
मार्ग मानचित्र :

ओमान के पास एक व्यापारिक पोत पर हुए हमले के बाद भारतीय तटरक्षक बल और ओमान के अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया
भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) मुंबई को 8 जून, 2026 को लगभग 14:20 बजे ओमान के मसिराह तट के पास लंगर डाले हुए पलाऊ ध्वज वाले टैंकर एमटी मारिवेक्स पर मिसाइल हमले की सूचना मिली। इस टैंकर में 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। इसके बाद समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र (ओएमएससी) से संपर्क स्थापित किया और स्थिति पर नजर रखने और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा। लगभग 17:00 बजे, ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र ओमान ने पुष्टि की कि ओमान नौसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए सभी लोग सुरक्षित हैं और किसी को कोई नुकसान नही हुआ। जहाज अभी भी ओमान के मसिराह तट के पास लंगर डाले हुए है।
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इस सफल बचाव अभियान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग की प्रभावशीलता और क्षेत्र में समुद्री बचाव अधिकारियों के बीच मजबूत समन्वय तंत्र का पता चलता है। यह भारतीय तटरक्षक बल की भारतीय नाविकों की सुरक्षा और समुद्री आपात स्थितियों के दौरान समय पर सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।
ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक पहल 1.25 लाख करोड़ रु का प्रावधान 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री
विकसित भारत जी राम जी" पर अमल के संबंध में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ली राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों की बैठक 95,692 करोड़ रु. का अंतरिम आवंटन राज्यों को जारी, पंचायतों को मिलेगा सीधा लाभ- श्री चौहान 30,000 करोड़ रु. पहले ही मनरेगा के तहत आवंटित; ट्रांजिशन में एक भी मजदूर बेरोजगार न रहे- केन्द्रीय मंत्री डीबीटी, ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन में राज्यों की तेज प्रगति, बैठक में श्री शिवराज सिंह ने दिए दिशा-निर्देश 26 राज्यों ने बजट में किया प्रावधान, 4 राज्यों से जल्द निर्णय का केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने किया आग्रह पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों को गति देने पर श्री शिवराज सिंह चौहान का जोर 28-29 जून को दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन आयोजित होगा- केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि यह केवल एक योजना का परिवर्तन नहीं है, बल्कि करोड़ों मजदूरों के जीवन और आजीविका से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “एक दिन भी कोई मजदूर बिना काम के न रहे” और रोजगार, मजदूरी भुगतान तथा वैधानिक अधिकारों की गारंटी में किसी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं होगी।

उन्होंने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने पहले ही मनरेगा के तहत 30 हजार करोड़ रु. आवंटित कर दिए हैं। इसके अतिरिक्त आज 95,692 करोड़ रु. का इंटरिम अलोकेशन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी किया गया। इस प्रकार कुल राशि 1.25 लाख करोड़ रु. से अधिक हो जाएगी।
श्री चौहान ने कहा कि यह राशि देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी जिससे प्रत्येक पंचायत को लाखों रुपये का फंड उपलब्ध होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस धनराशि का उपयोग अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार चिन्हित विकास कार्यों में किया जाए जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केवल धन उपलब्ध नहीं करा रही है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि समय पर मजदूरी भुगतान हो, श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और विकास कार्यों में कोई व्यवधान न आए। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे पर्याप्त मात्रा में कार्यों को पूर्व स्वीकृति दें ताकि 1 जुलाई से ही काम तेजी से शुरू हो सके।
डिजिटल और प्रशासनिक तैयारियों पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि DBT, SMS आधारित सूचना प्रणाली, e-KYC और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी प्रक्रियाओं में कई राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है जो नई व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन का संकेत है।
उन्होंने बताया कि 26 राज्यों ने “विकसित भारत-ग्रामीण भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपने बजट में वित्तीय प्रावधान कर लिए हैं जबकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम को जल्द से जल्द यह प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है। उन्होंने स्वयं इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने की बात भी कही।
राज्यों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि वे शीघ्र राज्य स्तरीय अधिसूचना जारी करें। मिजोरम, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने की सराहना करते हुए उन्होंने अन्य राज्यों से भी तेजी से कार्रवाई करने को कहा। साथ ही कृषि के पीक सीजन को अधिसूचित करने, 100 प्रतिशत e-KYC सुनिश्चित करने और जिला व ब्लॉक स्तर पर क्षमता निर्माण तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि ग्राम पंचायत और ग्राम सभा के माध्यम से ही कार्यों का चयन किया जाएगा और इन्हीं प्रस्तावों के आधार पर कार्यों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि 1 जुलाई तक मनरेगा के तहत रोजगार और मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की कमी या व्यवधान न आए।
बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों के लिए इंटरिम अलोकेशन की घोषणा केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा की गई। आवंटन इस प्रकार हैं- आंध्र प्रदेश 7,707.21 करोड़ रु., अरुणाचल प्रदेश 560.70 करोड़ रु., असम 1,929.24 करोड़ रु., बिहार 6,715.83 करोड़ रु., छत्तीसगढ़ 3,354.85 करोड़ रु., गोवा 3.70 करोड़ रु., गुजरात 1,540.54 करोड़ रु., हरियाणा को 590.23 करोड़ रु., हिमाचल प्रदेश 1,201.78 करोड़ रु., झारखंड 2,705.64 करोड़ रु., कर्नाटक 5,709.09 करोड़ रु., केरल 3,136.44 करोड़ रु., मध्य प्रदेश 6,252.03 करोड़ रु., महाराष्ट्र 4,420.32 करोड़ रु., मणिपुर 581.99 करोड़ रु., मेघालय 1,155.09 करोड़ रु., मिजोरम 611.65 करोड़ रु., नागालैंड 287.85 करोड़ रु., ओडिशा 3,763.80 करोड़ रु. और पंजाब 1,331.61 करोड़ रु.।
इसी प्रकार राजस्थान के लिए 7,581.87 करोड़ रुपये, सिक्किम के लिए 97.57 करोड़ रुपये, तमिलनाडु के लिए 7,957.57 करोड़ रुपये, तेलंगाना के लिए 4,229.74 करोड़ रुपये, त्रिपुरा के लिए 1,041.07 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश के लिए 12,221.48 करोड़ रुपये, उत्तराखंड के लिए 626.43 करोड़ रुपये और पश्चिम बंगाल के लिए 8,508.00 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है जिससे राज्यों को कुल 92,550.17 करोड़ रुपये मिलेंगे। केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी को 40.56 करोड़ रुपये, जम्मू-कश्मीर को 1,151.02 करोड़ रुपये, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को 4.44 करोड़ रुपये, लद्दाख को 85.98 करोड़ रुपये, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव को 9.02 करोड़ रुपये तथा लक्षद्वीप को 0.32 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिससे यूटीज़ को कुल 1,291.32 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के इस कुल प्रावधान के अलावा केंद्रीय प्रशासन और सोशल ऑडिट के लिए 1,850.62 करोड़ रु. रखे गए हैं जिससे इंटरिम अलोकेशन की कुल राशि 95,692.31 करोड़ रु. पर पहुंचती है। इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि “विकसित भारत” के लक्ष्य की दिशा में “विकसित गांव” बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसकी सफलता राज्यों की प्रतिबद्धता, तैयारी और सक्रिय सहभागिता पर निर्भर करेगी।
उन्होंने सभी राज्यों को 28 और 29 जून को दिल्ली के पूसा संस्थान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया जहां इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
श्री शिवराज सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों के सहयोग से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और करोड़ों मजदूरों को स्थायी रोजगार और बेहतर जीवन उपलब्ध कराएगी।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने त्रिपुरा में BSF की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया सीमा प्रहरियों से संवाद कर बढ़ाया जवानों का हौसला
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज सीमा सुरक्षा बल (BSF) की लंकामूरा सीमा चौकी (BOP) का निरीक्षण किया और BSF के जवानों के साथ संवाद किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत अगर पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज वृक्षारोपण का कार्यक्रम भी यहां हुआ है। 2019 से लेकर आज तक हमारे सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों ने लगभग 7.5 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का काम किया है। इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख वृक्ष लगाएंगे और लगाए हुए वृक्षों में से जो वृक्ष जीवित नहीं रह सके, उन सभी वृक्षों को दोबारा लगाने का काम किया जाएगा। अगले वर्ष CAPFs के जवान 2 करोड़ वृक्ष लगाने का काम करेंगे, जिससे पर्यावरण और देश की सेवा होगी।
श्री अमित शाह ने आज विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के महत्त्व और उस दिशा में मोदी सरकार के कार्यों पर भी प्रकाश डाला। श्री शाह ने कहा कि ओजोन की परत ही सूर्य की किरणों को मानव और अन्य जीवों के लायक बनाती है। उन्होंने कहा कि इसे बचाने का एकमात्र उपाय वृक्षों की संख्या को बढ़ाना है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रकार के कदम एक साथ उठाए हैं। इस दिशा में एक प्रकार से भारत का मॉडल पेरिस सम्मेलन में आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकारा गया। उन्होंने कहा कि हमने पेरिस घोषणा के हर बिंदु को समयपूर्व पूरा कर ऋग्वेद के पर्यावरण की रक्षा के संदेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को विश्व के सामने साबित किया है। उन्होंने कहा कि CAPFs के सभी जवान बड़े मनोयोग के साथ एक वृक्ष को अपना परिजन मानकर इसकी देखभाल कर रहे हैं। यह सरकारी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि सहज आदत होनी चाहिए, क्योंकि यही आदत हमें बचा सकती है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा बल की 37वीं वाहिनी में जवानों के आवास का ई- लोकार्पण और बीएसएफ 97वीं वाहिनी में क्वार्टर गार्ड परिसर का ई-शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सामीओं की रक्षा करने वाले हमारे जवानों की सुविधा बढ़ाने के लिए कई प्रकार के काम किए हैं। जवानों और उनके परिवार के स्वास्थ्य की चिंता और उनके परिवार के रहने के लिए मकान की चिंता भी की है। उन्होंने कहा कि BSF का नाम लेते ही देशवासियों के मन में सम्मान का भाव आता है और यह बताता है कि आपकी कठिनाइयों को देश की जनता देख रही है, महसूस कर रही है और आपके तप, त्याग और समर्पण को स्वीकृति भी दे रही है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि BSF के पास महत्त्वपूर्ण सीमाओं की सुरक्षा का जिम्मा है। इतने बड़े बॉर्डर पर कहीं हर जगह एक अलग प्रकार की चुनौती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने निर्णय लिया है कि जहां-जहां सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) तैनात हैं, वहां पर स्मार्ट बॉर्डर का निर्माण करेंगे। एक चतुष्कोणीय सुरक्षा रणनीति के तहत, स्थानीय प्रशासन, तकनीक और जवानों के परिश्रम को साथ में लेते हुए सीमाओं को अभेद्य बनाने का लक्ष्य है। श्री शाह ने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर का यह कंसेप्ट अंतिम चरण में है और इसका पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही हम लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि हम एक साथ देश की अलग-अलग सीमाओं पर सात या आठ स्थानों पर इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करेंगे। पायलट प्रोजेक्ट में जो भी शुरूआती समस्याएं आएंगी उन्हें दूर कर पूरी सीमा को स्मार्ट बॉर्डर बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ेंगे। इस कॉंसेप्ट में डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट, एसपी, गांव के पटवारी और सरपंच की भी भूमिका होगी। जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन को हम इस कॉन्सेप्ट में समाहित नहीं करते, तब तक हम सीमा को अभेद्य नहीं बना सकते। अगर हम आइसोलेशन में सीमा की सुरक्षा की कल्पना करते हैं वो कभी सफल नहीं हो सकती।

श्री अमित शाह ने कहा कि त्रिपुरा फ्रंटियर हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो देश की सीमा की सुरक्षा करता है। उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़ के आधुनिकीकरण के लिए 15 वर्ष से पुरानी लगभग 650 किलोमीटर की बाड़ में से 119 किलोमीटर नई बाड़ को भी हमने मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि जवानों की सुविधाओं के लिए सीमा चौकियों की बिजली आपूर्ति, ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव, जवानों के लिए सुरक्षित पेयजल आदि प्रोजेक्ट न केवल शुरू किए गए बल्कि हमने उन्हें पूरा भी कर दिया है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा तीन ओर से सीमाओं से घिरा हुआ संवेदनशील राज्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने हम सबके सामने एक लक्ष्य रखा है कि 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित बनाना है। 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित बनाने के लिए भारत को सबसे पहले सुरक्षित बनाना होगा। हमें देश को स्मगलिंग, मानव तस्करी, देश के युवाओं को नशे, से सुरक्षित करना होगा। हर चीज के लिए सुरक्षा का उपाय हो, ऐसा स्मार्ट सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम भारत सरकार ने हाथ में लिया है। श्री शाह ने कहा कि बाड़ की सुरक्षा के पूरे कंसेप्ट और हमारी कार्य संस्कृति को बदलने की अब जरूरत है। हमारे समाज को प्रभावित करने वाले हर दूषण से देश और सीमाओं की रक्षा करना हमारा दायित्व होगा। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा की स्मार्ट फेंसिंग और चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड के कंसेप्ट को आने वाले दिनों में सीमा की सुरक्षा करने वाले हर केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की कार्य संस्कृति बनाने की शुरुआत की गई है।

वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत आज केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (NSG), दिल्ली पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और अंतर-राज्यीय परिषद सचिवालय (ISCS) सहित गृह मंत्रालय के सभी कार्यालयों ने देशभर में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए।
भारत फिलीपींस की व्यापार और निवेश पर संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित
भारत और फिलीपींस ने ढांचागत क्षेत्र, डिजिटल प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स में सहयोग के नए क्षेत्र की तलाश कीदोनों देशों के बीच आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा और प्राथमिकता व्यापार समझौता माध्यम से व्यापार ढांचे सुदृढ बनाने पर चर्चा हुई
भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक आज 5 जून, 2026 को फिलीपींस के मनीला में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री अमित वर्मा और फिलीपींस के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समूह के व्यापार एवं उद्योग विभाग के अवर सचिव श्री एलन बी. गेप्टी ने की। संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें शामिल हुए।
दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बढोतरी को सराहा जो 2025-26 में 3.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और अच्छी प्रगति का संकेतक है। बातचीत में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश रुझान, प्राथमिकता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में संवर्धन गतिविधियों और सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक में फिल्म, ऊर्जा, निर्माण और अवसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी/ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी/व्यावसायिक प्रक्रिया प्रबंधन/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औषधि जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष इन क्षेत्रों में गहन सहयोग से दीर्घकालिक लाभ प्राप्त करने पर सहमत हुए। उन्होंने माना कि इससे दोनों देश अधिक प्रभावी तरीके से अपने विकास लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे और पारस्परिक सहयोग ढांचा मजबूत होगा।
बातचीत में व्यापार सुगमता के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी अन्य प्रमुख मुद्दा रहा। सीमा शुल्क सहयोग और इस सुगम बनाने, कृषि क्षेत्र में सहयोग और विशिष्ट उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार जैसे विषय शामिल रहे।
बैठक में आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा शीघ्र संपन्न करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय प्राथमिकता व्यापार समझौते पर बातचीत पर भी चर्चा हुई।
बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंध सुदृढ बनाने के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया गया। दोनों देशों ने अधिक सक्रिय और परस्पर लाभकारी साझेदारी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
14वें संयुक्त कार्य समूह की बैठक से इतर दौरान 4 जून, 2026 को फिलीपींस में कार्यगत भारतीय व्यवसायियों के साथ एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहन बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।
भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक नई दिल्ली में आयोजित होगी। भारत-फिलीपींस व्यापार और निवेश संयुक्त कार्य समूह माल और सेवा क्षेत्र में व्यापार संवर्धन तथा निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विशेष बल के साथ ही दोनों देशों के लिए वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय घटनाक्रमों पर विचार साझा करने का मंच भी रहा है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और थुरिंगिया के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट ने क्वांटम संचार, फोटोनिक्स और उद्योग-नेतृत्व वाली डीप-टेक साझेदारी पर चर्चा की
जर्मनी ने भारत के साथ विस्तारित शोधकर्ता आदान-प्रदान और दोहरी डिग्री साझेदारी का प्रस्ताव रखा चर्चा में क्वांटम संचार, क्वांटम उपग्रह संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन, यूरोओजीएस नेटवर्क, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और अनुसंधान-उद्योग सहयोग जैसे विषय शामिल थे डॉ. जितेंद्र सिंह ने जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के साथ वार्ता के दौरान भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन किया थुरिंगिया की फोटोनिक्स विशेषज्ञता ने भारत-जर्मनी प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए नए रास्ते खोले
भारत और जर्मनी ने आज क्वांटम संचार, फोटोनिक्स, क्वांटम उपग्रह संचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और डीप-टेक नवाचार में भविष्योन्मुखी साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाया, जब जर्मनी के थुरिंगिया मुक्त राज्य के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट, जो वर्तमान में भारत दौरे पर हैं, ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की।
इस बैठक में दोनों पक्षों की सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गति देने के लिए रास्ते तलाशे जा सकें।
इस बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव राजेश एस. गोखले, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग, डीआरडीओ और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। जर्मन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मारियो वोग्ट ने किया और इसमें फाउंडेशन फॉर टेक्नोलॉजी, इनोवेशन एंड रिसर्च थुरिंगिया की कार्यकारी बोर्ड सदस्य क्रिस्टियान किलियन के अलावा सरकार, अनुसंधान संगठनों, उद्योग और प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित एक मज़बूत साझेदारी है। 2024 में भारत-जर्मनी विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सहयोग द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनकर उभरा है और अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक विकास के अग्रणी क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करता रहता है।
फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण के लिए थुरिंगिया के एक प्रमुख यूरोपीय केंद्र के रूप में उभरने को देखते हुए, दोनों पक्षों ने अग्रणी प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी के अवसरों का पता लगाया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत और जर्मनी की पूरक शक्तियों का लाभ उठाना और सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देना था ताकि अनुसंधान को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और नवाचार-संचालित उद्यमों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को गति दी जा सके।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्योग से जुड़े अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और अन्य उपायों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अकादमिक जगत, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग को जोड़ने वाले मंचों का तेजी से निर्माण कर रहा है, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों और आर्थिक मूल्य में परिवर्तित किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम का मेजबान है और जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, जल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत का नवाचार परिदृश्य सार्वजनिक संस्थानों, उद्योग और उद्यमियों के बीच सहयोग से तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
बैठक का मुख्य केंद्र क्वांटम प्रौद्योगिकियों और फोटोनिक्स में सहयोग था, जिन्हें दोनों पक्षों ने भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना। क्वांटम संचार, क्वांटम उपग्रह संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन, क्वांटम नेटवर्क और उन्नत फोटोनिक्स प्रौद्योगिकियों में अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां भारत और थुरिंगिया की पूरक शक्तियां और क्षमताएं मौजूद हैं।
जर्मनी ने क्वांटम संचार अवसंरचना और ऑप्टिकल संचार प्रणालियों से संबंधित चल रही यूरोपीय पहलों का विवरण साझा किया, जिसमें यूरोओजीएस नेटवर्क के तहत विकास भी शामिल है, जिसका उद्देश्य ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन प्रौद्योगिकियों में मानकीकरण और अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा देना है। चर्चा में दोनों पक्षों के अनुसंधान संस्थानों,
प्रौद्योगिकी संगठनों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों को शामिल करते हुए वैज्ञानिक सहयोग, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
चर्चाओं में क्वांटम प्रौद्योगिकियों को वैश्विक स्तर पर दिए जा रहे बढ़ते रणनीतिक महत्व और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत हासिल की गई प्रगति, जिसमें सुरक्षित क्वांटम संचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति शामिल है, के बारे में जानकारी दी। दोनों पक्षों ने क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और संबंधित बुनियादी ढांचे में उभरते विकास पर अपने विचार साझा किए और अनुसंधान, मानक विकास, प्रतिभा आदान-प्रदान और प्रौद्योगिकी साझेदारी में गहन सहयोग की संभावनाओं को मान्यता दी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, इंडियाएआई मिशन, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और जैव प्रौद्योगिकी पहलों सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में भारत के मिशन-मोड कार्यक्रमों के बढ़ते पोर्टफोलियो पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम सहयोगात्मक अनुसंधान, नवाचार-आधारित विकास और प्रौद्योगिकी साझेदारी के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
भविष्य की प्रौद्योगिकी साझेदारियों के संदर्भ में, चर्चाओं में फोटोनिक्स और संबद्ध अग्रणी प्रौद्योगिकियों में मिशन-उन्मुख सहयोग के अवसरों पर भी बात हुई, जिसमें प्रकाशिकी, फोटोनिक्स, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और नवाचार-संचालित विनिर्माण में भारत और जर्मनी की पूरक शक्तियों का लाभ उठाया गया।
बैठक में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (डीएलआर) के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं, निजी भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने वाले हालिया नीतिगत सुधारों और देश की विस्तारित अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स के बढ़ते योगदान पर प्रकाश डाला।
केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि भारत ने भारतीय प्रक्षेपण यानों के माध्यम से ग्यारह जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है और अंतरिक्ष अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों पक्षों ने उपग्रह संचार, प्रकाशीय संचार, मानव अंतरिक्ष उड़ान, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन, ड्रोन प्रौद्योगिकी और भविष्य के अन्वेषण अभियानों में संभावित सहयोग पर चर्चा की।
यह मानते हुए कि भविष्य में तकनीकी नेतृत्व सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी पर अधिकाधिक निर्भर करेगा, दोनों पक्षों ने सार्वजनिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और निजी उद्यमों को एक साथ लाने वाले सहयोगात्मक ढाँचों पर चर्चा की। चर्चाओं में अनुसंधान परिणामों को व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों, विस्तार योग्य उत्पादों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गहन तकनीकी उद्यमों में परिवर्तित करने के महत्व पर बल दिया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति अकादमिक जगत, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और उद्योग जगत की एकीकृत साझेदारियों से प्रेरित हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ऐसे सहयोगों का स्वागत करता है जो शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और डॉक्टरेट शोधार्थियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाते हैं और साथ ही संयुक्त प्रौद्योगिकी विकास, औद्योगिक नवाचार और व्यावसायीकरण के मार्ग प्रशस्त करते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों के योगदान पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने वर्षों से उद्योग-उन्मुख अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचार साझेदारियों और शोधकर्ता विनिमय कार्यक्रमों को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि भारत-जर्मनी वैज्ञानिक सहयोग का अगला चरण क्वांटम प्रौद्योगिकियों, फोटोनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और डीप-टेक उद्यमिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच घनिष्ठ सहयोग से भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी और नवाचार-आधारित विकास, तकनीकी उन्नति और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

तस्वीर - जर्मनी के 'फ्री स्टेट ऑफ थुरिंगिया' के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात करते हुए



मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ यह उच्च गति रेल खंड में तीव्र प्रगति का संकेत है
पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, इसे उच्च गति वाली बुलेट ट्रेन के सुचारू रूप से संचालन के लिए उन्नत निगरानी और सुरक्षा प्रणालियों के साथ बनाया गया है पालघर जिले में महज पांच महीनों में तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा होने से देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को और गति मिली है
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि के रूप में महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका के अंबेसारी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।

महाराष्ट्र में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है। यह देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सबसे तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंडों में से एक में हुई तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों ओर की पटरियों के लिए हाल ही में बनकर तैयार हुई एमटी-07 पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि द्वारा की गई। निर्माण के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

खुदाई की पूरी प्रक्रिया की अवधि में संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और सटीक निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों और भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ सहित वास्तविक समय की निगरानी व्यवस्थाओं द्वारा कंपन, सुरंग की गतिविधि और आसपास की संरचनाओं पर निरंतर नजर बनाई रखी गई। सुरंग निर्माण कार्यों के दौरान वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित पहुंच और निरंतर भू-तकनीकी पर्यवेक्षण सहित व्यापक श्रमिक सुरक्षा उपायों में कोई भी ढील नहीं दी गई।
महाराष्ट्र में पहले हुए सुरंग निर्माण कार्य
यह सफलता परियोजना के महाराष्ट्र खंड में पहले हासिल की गई उपलब्धियों पर आधारित है। 1.5 किलोमीटर लंबी पहली पर्वतीय सुरंग (एमटी-05) का निर्माण 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले के पास पूरा हुआ। यह उपलब्धि महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली सफल पर्वतीय सुरंग निर्माण के रूप में सामने आई। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को दूसरी सुरंग (एमटी-06) का निर्माण हुआ, इसमें न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके 454 मीटर लंबी सुरंग खोदी गई। इस तरह पालघर जिले में लगभग एक महीने के भीतर दो सफल निर्माण पूरे हुए।

महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से, एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 में अब तक खुदाई का काम पूरा हो चुका है। एमटी-08 (350 मीटर) में 5 अक्टूबर 2023 को खुदाई का काम पूरा हो गया था, एमटी-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी है, एमटी-04 लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि एमटी-01 और एमटी-02 में काम लगातार जारी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की कुल आठ पर्वतीय सुरंगों में से सात महाराष्ट्र के पालघर जिले के अंतर्गत आती हैं और एक गुजरात के वलसाड जिले में है और उस सुरंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।
वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच तीनों पर्वतीय सुरंगों की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। वहां के निर्माण कार्य तेजी से प्रगति हो रही है। इन दोनों शहरों के बीच के मार्ग में तीन (03) पर्वतीय सुरंगें (एमटी 08, एमटी -07 और एमटी-06) शामिल हैं।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना उन्नत सुरंग, निगरानी और निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे रही है। सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य के लिए रेल परिवहन की नींव रखे जाने से देश की हाई-स्पीड रेल अवसंरचना में क्षमताएं मजबूत हो रही हैं।
विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न
समिति ने एक वर्ष में रिकॉर्ड 50 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने के साथ-साथ विश्वसनीय, अनुकूल और मजबूत ग्रिड के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की
इस बैठक में विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक, सलाहकार समिति के सदस्य सांसद, विद्युत मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड और सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सहित प्रमुख विद्युत क्षेत्र संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

समिति ने भारत में बिजली की बढ़ती मांग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने और इन्वर्टर-आधारित उत्पादन संसाधनों के साथ-साथ भारी मांग की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए ग्रिड स्थिरता की उभरती आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में सुरक्षित नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, ट्रांसमिशन सुदृढ़ीकरण, ऊर्जा भंडारण, मजबूत प्रतिक्रियाशील विद्युत सहायता, ग्रिड अनुकूलन, तकनीकी मानकों का अनुपालन, पूर्वानुमान, विद्युत गुणवत्ता और ग्रिड की मजबूती जैसे विषय शामिल थे।
यह बात सामने आई कि ग्रिड की स्थिरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को एक विश्वसनीय, अनुकूल और मजबूत विद्युत ग्रिड द्वारा समर्थित होना चाहिए।
सदस्यों ने पर्याप्त संसाधन की उपलब्धता, सहायक सेवाओं, ऊर्जा भंडारण प्रोत्साहन, एसटीएटीकॉम और सिंक्रोनस कंडेंसर की तैनाती, पीएमयू-आधारित निगरानी, ब्लैक-स्टार्ट मॉक ड्रिल और तकनीकी मानकों को सुदृढ़ करने सहित पहले से ही की जा रही पहलों की सराहना की। समिति ने एक वर्ष में 50 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के रिकॉर्ड एकीकरण की भी सराहना की।
इनवर्टर आधारित उत्पादन संसाधनों और भारी मात्रा में मांग की व्यापक पैठ वाले भारतीय ग्रिड में ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कार्यों की सराहना की गई:
- बिजली कटौती से बचने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं के चालू होने के बीच बेमेल से बचना।
- संसाधनों की पर्याप्तता सुनिश्चित करने और जड़त्वीय समर्थन प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक भंडारण हेतु पंप स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देना।
- उपयुक्त थोक उपभोक्ताओं को बड़े नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परिसरों के करीब लाने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि ट्रांसमिशन निवेश को अनुकूलित किया जा सके।
- वोल्टेज स्थिरता और सिस्टम की मजबूती को बनाए रखने के लिए एसटीएटीकॉम और सिंक्रोनस कंडेंसर जैसे उपकरणों की योजना बनाना और उन्हें काम में लगाना।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और भंडारण प्रणालियों से लचीली सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उपयुक्त नियामक और वाणिज्यिक प्रणाली स्थापित करना।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, ग्रिड-फॉर्मिंग इनवर्टर, इलेक्ट्रोलाइजर और डेटा सेंटर लोड जैसी नई प्रौद्योगिकियों के लिए तकनीकी मानकों की आवधिक और समयबद्ध समीक्षा।
- ग्रिड से जुड़े संस्थानों द्वारा आवधिक स्व-लेखापरीक्षा और अनुपालन रिपोर्टिंग के माध्यम से अनुपालन निगरानी को मजबूत करना।
- बेहतर मौसम डेटा, मौसम स्टेशनों के अंशांकन और रखरखाव के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों में स्वचालित मौसम स्टेशनों की स्थापना के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा पूर्वानुमान में सुधार करना।
- मौसम की मार झेलने वाले क्षेत्रों में पारेषण और वितरण अवसंरचना को मजबूत करके, आपातकालीन बहाली प्रणालियों को बनाए रखकर और तेजी से बहाली के लिए ब्लैक-स्टार्ट क्षमता को बढ़ाकर ग्रिड के अनुकूलन को बढ़ाना।
- इन्वर्टर-आधारित संसाधनों की बढ़ती पैठ को देखते हुए विद्युत गुणवत्ता और हार्मोनिक्स आकलन के लिए एक उपयुक्त ढांचा विकसित करना।
बैठक का समापन स्वच्छ, विश्वसनीय, अनुकूल, सुरक्षित और सुदृढ़ भारतीय ग्रिड की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के संकल्प के साथ हुआ।
भारत 11-12 जून 2026 को नई दिल्ली में 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी करेगा लोगों के लिए शहर समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल ने आज आयोजन से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि भारत 11-12 जून 2026 को नई दिल्ली में 13 वें ब्रिक्स शहरीकरण फोरम की मेजबानी कर रहा है।
यह फोरम 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत एक महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय कार्यक्रम है, जो प्रधानमंत्री के 'मानवता सर्वोपरि' के दृष्टिकोण और अध्यक्षता के विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' द्वारा निर्देशित है।
शहरीकरण मंच का आयोजन 'जनता के लिए शहर: समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग' विषय के अंतर्गत किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विषय भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जो शहरों की योजना, शासन और विकास में जनता को केंद्रीय महत्व देता है।
भारत की विरासत और निरंतर नेतृत्व
ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी पहली बार भारत ने 2013 में नई दिल्ली में की थी, जिससे शहरीकरण को औपचारिक रूप से ब्रिक्स सहयोग एजेंडा में शामिल किया गया। भारत ने 2016 में विशाखापत्तनम में इस मंच की पुनः मेजबानी की, जिसमें सतत शहरी विकास, स्मार्ट शहरों और शहरी लचीलेपन पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत ने 2021 में वैश्विक महामारी के बाद शहरी पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मंच की वर्चुअल रूप से मेजबानी की।
2026 में आयोजित होने वाले 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी भारत चौथी बार कर रहा है। अपनी स्थापना के बाद से, यह मंच ब्रिक्स देशों के लिए शहरी नीति संबंधी अनुभवों का आदान-प्रदान करने, साझा प्राथमिकताओं की पहचान करने और व्यापक ब्रिक्स प्रक्रिया में शहरी संबंधी सुझाव देने के लिए एक समर्पित मंत्रिस्तरीय मंच के रूप में कार्य करता रहा है।
ब्रिक्स देशों में साझा शहरी प्राथमिकताएँ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स शहरीकरण मंच एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित किया जा रहा है, क्योंकि कई ब्रिक्स राष्ट्र आवास, गतिशीलता, जलवायु जोखिम, नगरपालिका क्षमता, शहरी वित्त और सेवा वितरण की सामान्य चुनौतियों का सामना करते हुए तेजी से शहरी विकास का अनुभव कर रहे हैं।

यह फोरम कुछ व्यापक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करेगा: समावेशी शहरी विकास, जलवायु और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा, मजबूत नगरपालिका संस्थान और बेहतर शहरी शासन के लिए डिजिटल नवाचार।
निर्धारित कार्यक्रम और अपेक्षित परिणाम
दो दिवसीय 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, शहरी विकास विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे। सभी ग्यारह ब्रिक्स सदस्य देशों को मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
फोरम के पहले दिन उद्घाटन सत्र और ब्रिक्स की साझा शहरी प्राथमिकताओं पर एक उच्च स्तरीय पूर्ण सत्र आयोजित किया जाएगा। प्रतिनिधियों को भारत के शहरी परिवर्तन से परिचित कराने के लिए नई दिल्ली के चुनिंदा स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा।
दूसरे दिन मंच के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विषयगत पैनल चर्चाएँ होंगी। सदस्य देश अपने-अपने देशों के अनुभव साझा करने के लिए पैनल चर्चाओं में भाग लेंगे। इसके अलावा, देशों के बीच द्विपक्षीय चर्चाएँ भी होंगी।
इन विचार-विमर्शों से शहरीकरण की चुनौतियों पर साझा नीतिगत समाधानों को समर्थन मिलने और समावेशी, लचीले और जन-केंद्रित शहरों के निर्माण पर ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की उम्मीद है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ब्रिक्स परिवार के सभी प्रतिनिधियों का नई दिल्ली में स्वागत करने और लोगों के लिए सही मायने में बने शहरों पर मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है।
विश्व के सबसे बड़े आबाद नदी द्वीप का 4000 वर्षों के जलवायु इतिहास से अनुकूलन संबंधी जानकारी
एक नए अध्ययन ने असम के माजुली द्वीप के लगभग 4,000 वर्षों के जलवायु और वनस्पति इतिहास को पुनर्परिभाषित किया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा आबाद नदी द्वीप है। यह कई जनजातियों की बस्ती और नव-वैष्णव संस्कृति यानी सुधारवादी वैष्णववाद के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ एक बदलाव का प्रतीक भी है।
यह अध्ययन माजुली द्वीप पर जलवायु परिवर्तनशीलता, वनस्पति परिवर्तन और बाढ़ की स्थिति पर एक दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है और बाढ़ से प्रभावित समुदायों के लिए अनुकूलन संबंधी रणनीतियों को आकार दे सकता है।
दक्षिण और पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी, पश्चिम में सुबनसिरी नदी और उत्तर में ब्रह्मपुत्र की एक शाखा के बीच स्थित माजुली द्वीप, बार-बार आने वाली बाढ़ और नदी के किनारों के तीव्र कटाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सांस्कृतिक महत्व के लिए यूनेस्को की ओर से इसे दर्जे में शामिल होने की संभावना के बावजूद, इस क्षेत्र में एकीकृत आधुनिक और जीवाश्म पराग अभिलेखों पर आधारित परागकण संबंधी साक्ष्यों के आधार पर कोई व्यापक दीर्घकालिक पुरापारिस्थितिकीय पुनर्निर्माण नहीं किया गया है। पराग अतीत की पर्यावरणीय स्थितियों के सबसे विश्वसनीय संकेतकों में से एक है, क्योंकि ये टिकाऊ होते हैं और हजारों से लाखों वर्षों तक तलछट में संरक्षित रह सकते हैं।

चित्र 1. अध्ययन क्षेत्रों को दर्शाने वाला स्थानीय मानचित्र।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, लखनऊ स्थित बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों ने माजुली द्वीप पर एक अभूतपूर्व पुरातात्विक अध्ययन किया है, जो गंभीर भूमि क्षरण का शिकार हुआ है और वनों की कटाई, शहरीकरण और बार-बार आने वाली बाढ़ से अत्यधिक प्रभावित भी है।
उन्होंने माजुली द्वीप पर स्थित सकाली आर्द्रभूमि से 150 सेंटीमीटर गहरा तलछट कोर एकत्र किया और इसका उपयोग पराग कणों के विश्लेषण (अतीत की वनस्पति का पुनर्निर्माण करने के लिए) और कण आकार के अध्ययन (नदी की गतिशीलता और बाढ़ की तीव्रता को समझने के लिए) को संयोजित करने के लिए किया। इससे द्वीप के लिए पहला व्यापक पर्यावरणीय रिकॉर्ड तैयार हुआ। यह अध्ययन मध्य-उत्तर होलोसीन काल के पर्यावरणीय परिवर्तनों का पुनर्निर्माण करता है, जिससे ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी में क्षेत्रीय जलवायु, वनस्पति और आर्द्रभूमि की गतिशीलता को समझने में एक महत्वपूर्ण कमी पूरी होती है।
आधुनिक परागकण सादृश्यों और परागकण आधारित मात्रात्मक पुरा-जलवायु पुनर्निर्माण पद्धति के समर्थन से किए गए इस अनुसंधान में 4040 से 500 कैलिब्रेटेड वर्ष बीपी के दौरान औसत वार्षिक तापमान (एमएटी) और औसत वार्षिक वर्षा (एमएपी) का अनुमान लगाया गया है, जिसे सह-अस्तित्व दृष्टिकोण कहा जाता है। इसके नतीजे एक प्रारंभिक गर्म और आर्द्र चरण (4040-2260 कैलिब्रेटेड वर्ष बीपी) को दर्शाते हैं, जिसमें घने वन आवरण थे और जो 4.2 हजार वर्ष के दौरान शुष्क जलवायु की स्थिति में सशक्तता का संकेत देते हैं। इसके बाद मानसून की तीव्रता और बाढ़ की तीव्रता में उतार-चढ़ाव वाले चरण आए, जिसमें 1100-500 कैलिब्रेटेड वर्ष बीपी के दौरान अपेक्षाकृत आर्द्र अवधि भी शामिल है, जो मध्यकालीन जलवायु विसंगति के अनुरूप है। पिछले लगभग 500 वर्षों में तापमान और वर्षा में गिरावट देखी गई है, जो लघु हिमयुग के अनुरूप है, साथ ही मानवजनित प्रभाव में वृद्धि और बिखरी हुई वनस्पति के विस्तार को भी दर्शाती है।

चित्र 2. असम के माजुली द्वीप के तलछट से प्राप्त परागकोष।
- ब्यूटिया मोनोस्पर्मा, 2. बबूल निलोटिका, 3. श्लीचेरा, 4. सिजिजियम, 5. लेगरस्ट्रोमिया, 6. बॉम्बैक्स सीबा, 7. टर्मिनलिया, 8. एम्ब्लिका, 9. सैपोटेसी, 10. एस्टेरसिया, 11 और 12. फैबेसी, 13. मेलास्टोमा, 14. चेनोपोडियासी, 15. सिम्प्लोकोस, 16. लेम्ना, 17. ओनाग्रेसी, 18. टाइफा, 19. निम्फिया, 20. निम्फोइड्स, 21. ब्रैसिका, 22. नॉन-सीरियल, 23.सीरियल, 24. साइपेरेसी, 25. धनिया, 26. एलनस, 27. पाइनस, 28. मोनोलेट, 29. डिग्रेडेड ट्राइलेट।
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी), लखनऊ की सुश्री आर्य पांडे (डीएसटी-इंस्पायर एसआरएफ) और डॉ. स्वाति त्रिपाठी, वैज्ञानिक-ई (पर्यवेक्षक) के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में डॉ. साधन कुमार बसुमतारी (बीएसआईपी), डॉ. सलमान खान (जर्मनी), डॉ. हेमा सिंह (बीएचयू), डॉ. बिस्वजीत ठाकुर (बीएसआईपी) और डॉ. अनुपम शर्मा (बीएसआईपी) का सहयोग लिया गया है। यह अध्ययन माजुली के आसपास ब्रह्मपुत्र और उससे जुड़ी नदी प्रणालियों की जलीय प्रक्रियाओं की भूमिका का मूल्यांकन करता है, जो द्वीप पर निक्षेपण पर्यावरण को आकार देने और पारिस्थितिक गतिशीलता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अनाज के आकार के आंकड़े कम ऊर्जा से उच्च ऊर्जा वाली नदीय स्थितियों में बदलाव का संकेत देते हैं, जो समय के साथ बढ़ती जलगतिकीय अस्थिरता को दर्शाते हैं और नदी द्वीप पारिस्थितिक तंत्र में जलवायु-वनस्पति-नदी अंतःक्रियाओं की समझ को आगे बढ़ाते हैं।
परागकण और अनाज के आकार के विश्लेषणों का एकीकरण अतीत में आई बाढ़ की तीव्रता, तलछट परिवहन और कटाव प्रक्रियाओं की बेहतर समझ प्रदान करता है, जो ब्रह्मपुत्र बेसिन में नदी प्रबंधन और आपदा शमन के लिए महत्वपूर्ण है।
इन परिणामों से स्थानीय वनस्पति गतिशीलता और प्रमुख वैश्विक जलवायु घटनाओं के बीच स्पष्ट समकालिकता प्रदर्शित होती है, जो व्यापक जलवायु परिवर्तन के प्रति इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर करती है। ये निष्कर्ष पारिस्थितिक अनुकूलन और भेद्यता के चरणों की भी पहचान करते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन और टिकाऊ भूमि उपयोग नियोजन के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हैं।
पैलियोबोटनी और पैलिनोलॉजी की समीक्षा (एल्सवियर) में प्रकाशित यह अध्ययन, माजुली द्वीप पर दीर्घकालिक जलवायु-वनस्पति गतिशीलता और नदी प्रक्रियाओं का पहला व्यापक बहु-प्रतिनिधि (पराग और अनाज के आकार) पुनर्निर्धारण प्रस्तुत करता है और नीति निर्माण और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को सूचित कर सकता है, जिससे बार-बार आने वाली बाढ़ और भूमि के नुकसान से प्रभावित समुदायों को लाभ होगा।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान
रायसेन से श्री शिवराज सिंह चौहान का देशभर को संदेश: स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारतकेंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह बोले- मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा संतुलित खाद, सॉयल हेल्थ कार्ड और वैज्ञानिक खेती पर श्री शिवराज सिंह का जोर “धरती हमारी मां है”: मिट्टी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का श्री शिवराज सिंह ने किया आह्वान गांव-गांव पहुंचेंगे वैज्ञानिक, किसानों को देंगे खेती की नई तकनीक महिला सशक्तिकरण, युवा मार्गदर्शन और खेती सुधार को साथ लेकर आगे बढ़ेगा अभियान- श्री शिवराज सिंह

1 से 30 जून तक देशभर में चलने वाले इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती हमारी माता है और इसकी सेहत बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प है। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि हर किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खाद का उपयोग करे। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है। सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।

श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए क्षेत्र में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक और पानी बचाने वाली खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने महिला सशक्तिकरण को भी अभियान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, आयवर्धन और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय बढ़ा सकें।

युवाओं को लेकर भी श्री चौहान ने विशेष बात कही और कहा कि उनके लिए मार्गदर्शन और तैयारी के अवसर बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल सड़क, मकान और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गांवों में पहुंचें, किसानों को तकनीकी सहायता दें और खेती को बचाने के इस संकल्प को जमीन पर उतारें। उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे विकास अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही समृद्ध गांव, सशक्त किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बहुत विज़नरी हैं, बहुत पहले बहुत दूर का सोचते हैं। ये धरती माता केवल हमारे लिए नहीं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। तो इसकी हालत ऐसी ना हो जाए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्न उत्पादित करने से इंकार कर दे, इसलिए माटी बची रहे, इसलिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, धरती के तत्वों की आवश्यकता देखते हुए करने की बात करेंगे। केवल इतना ही नहीं, नकली पेस्टीसाइड और खाद उसके खिलाफ भी अभियान चलेगा। हम इस दौरान किसानों को वहाँ की एग्रो-क्लाइमैटिक कंडीशन के हिसाब से कौन सी फसल और कौन से बीज ठीक रहेंगे, कृषि प्रणाली कैसी होनी चाहिए, बीजों का उपचार और बाकी चीजें, वो भी बताएँगे। धरती को बचाने के लिए हरित खाद भी जरूरी है, उसके बारे में भी जानकारी देंगे और विभिन्न योजनाओं का केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में दिया जाएगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कुपोषित बच्चों को पोषण किट भी वितरित की गई।












