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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने त्रिपुरा में BSF की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया सीमा प्रहरियों से संवाद कर बढ़ाया जवानों का हौसला

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने त्रिपुरा में BSF की लंकामूरा सीमा चौकी का निरीक्षण किया सीमा प्रहरियों से संवाद कर बढ़ाया जवानों का हौसला

 केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज सीमा सुरक्षा बल (BSF) की लंकामूरा सीमा चौकी (BOP) का निरीक्षण किया और BSF के जवानों के साथ संवाद किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत अगर पौधे का रोपण किया। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, केन्द्रीय गृह सचिव, निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और महानिदेशक, सीमा सुरक्षा बल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज वृक्षारोपण का कार्यक्रम भी यहां हुआ है। 2019 से लेकर आज तक हमारे सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों ने लगभग 7.5 करोड़ से अधिक वृक्ष लगाने का काम किया है। इस वर्ष 40 लाख से 60 लाख वृक्ष लगाएंगे और लगाए हुए वृक्षों में से जो वृक्ष जीवित नहीं रह सके, उन सभी वृक्षों को दोबारा लगाने का काम किया जाएगा। अगले वर्ष CAPFs के जवान 2 करोड़ वृक्ष लगाने का काम करेंगे, जिससे पर्यावरण और देश की सेवा होगी।

श्री अमित शाह ने आज विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण के महत्त्व और उस दिशा में मोदी सरकार के कार्यों पर भी प्रकाश डाला। श्री शाह ने कहा कि ओजोन की परत ही सूर्य की किरणों को मानव और अन्य जीवों के लायक बनाती है। उन्होंने कहा कि इसे बचाने का एकमात्र उपाय वृक्षों की संख्या को बढ़ाना है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई प्रकार के कदम एक साथ उठाए हैं। इस दिशा में एक प्रकार से भारत का मॉडल पेरिस सम्मेलन में आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकारा गया। उन्होंने कहा कि हमने पेरिस घोषणा के हर बिंदु को समयपूर्व पूरा कर ऋग्वेद के पर्यावरण की रक्षा के संदेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को विश्व के सामने साबित किया है। उन्होंने कहा कि CAPFs के सभी जवान बड़े मनोयोग के साथ एक वृक्ष को अपना परिजन मानकर इसकी देखभाल कर रहे हैं। यह सरकारी आदेशों से प्रेरित कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि सहज आदत होनी चाहिए, क्योंकि यही आदत हमें बचा सकती है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज सीमा सुरक्षा बल की 37वीं वाहिनी में जवानों के आवास का ई- लोकार्पण और बीएसएफ 97वीं वाहिनी में क्वार्टर गार्ड परिसर का ई-शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सामीओं की रक्षा करने वाले हमारे जवानों की सुविधा बढ़ाने के लिए कई प्रकार के काम किए हैं। जवानों और उनके परिवार के स्वास्थ्य की चिंता और उनके परिवार के रहने के लिए मकान की चिंता भी की है। उन्होंने कहा कि BSF का नाम लेते ही देशवासियों के मन में सम्मान का भाव आता है और यह बताता है कि आपकी कठिनाइयों को देश की जनता देख रही है, महसूस कर रही है और आपके तप, त्याग और समर्पण को स्वीकृति भी दे रही है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि BSF के पास महत्त्वपूर्ण सीमाओं की सुरक्षा का जिम्मा है। इतने बड़े बॉर्डर पर कहीं हर जगह एक अलग प्रकार की चुनौती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने निर्णय लिया है कि जहां-जहां सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) तैनात हैं, वहां पर स्मार्ट बॉर्डर का निर्माण करेंगे। एक चतुष्कोणीय सुरक्षा रणनीति के तहत, स्थानीय प्रशासन, तकनीक और जवानों के परिश्रम को साथ में लेते हुए सीमाओं को अभेद्य बनाने का लक्ष्य है। श्री शाह ने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर का यह कंसेप्ट अंतिम चरण में है और इसका पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही हम लेकर आएंगे। उन्होंने कहा कि हम एक साथ देश की अलग-अलग सीमाओं पर सात या आठ स्थानों पर इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू करेंगे। पायलट प्रोजेक्ट में जो भी शुरूआती समस्याएं आएंगी उन्हें दूर कर पूरी सीमा को स्मार्ट बॉर्डर बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ेंगे। इस कॉंसेप्ट में डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट, एसपी, गांव के पटवारी और सरपंच की भी भूमिका होगी। जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन को हम इस कॉन्सेप्ट में समाहित नहीं करते, तब तक हम सीमा को अभेद्य नहीं बना सकते। अगर हम आइसोलेशन में सीमा की सुरक्षा की कल्पना करते हैं वो कभी सफल नहीं हो सकती।

श्री अमित शाह ने कहा कि त्रिपुरा फ्रंटियर हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो देश की सीमा की सुरक्षा करता है। उन्होंने कहा कि सीमा पर बाड़ के आधुनिकीकरण के लिए 15 वर्ष से पुरानी लगभग 650 किलोमीटर की बाड़ में से 119 किलोमीटर नई बाड़ को भी हमने मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि जवानों की सुविधाओं के लिए सीमा चौकियों की बिजली आपूर्ति, ग्रीन एनर्जी इनिशिएटिव, जवानों के लिए सुरक्षित पेयजल आदि प्रोजेक्ट न केवल शुरू किए गए बल्कि हमने उन्हें पूरा भी कर दिया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा तीन ओर से सीमाओं से घिरा हुआ संवेदनशील राज्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने हम सबके सामने एक लक्ष्य रखा है कि 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित बनाना है। 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित बनाने के लिए भारत को सबसे पहले सुरक्षित बनाना होगा। हमें देश को स्मगलिंग, मानव तस्करी, देश के युवाओं को नशे, से सुरक्षित करना होगा। हर चीज के लिए सुरक्षा का उपाय हो, ऐसा स्मार्ट सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम भारत सरकार ने हाथ में लिया है। श्री शाह ने कहा कि बाड़ की सुरक्षा के पूरे कंसेप्ट और हमारी कार्य संस्कृति को बदलने की अब जरूरत है। हमारे समाज को प्रभावित करने वाले हर दूषण से देश और सीमाओं की रक्षा करना हमारा दायित्व होगा। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा की स्मार्ट फेंसिंग और चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड के कंसेप्ट को आने वाले दिनों में सीमा की सुरक्षा करने वाले हर केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की कार्य संस्कृति बनाने की शुरुआत की गई है।

वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत आज केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs), असम राइफल्स, राष्ट्रीय सुरक्षा गारद (NSG), दिल्ली पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और अंतर-राज्यीय परिषद सचिवालय (ISCS) सहित गृह मंत्रालय के सभी कार्यालयों ने देशभर में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए।

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भारत फिलीपींस की व्यापार और निवेश पर संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

भारत फिलीपींस की व्यापार और निवेश पर संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

 भारत और फिलीपींस ने ढांचागत क्षेत्र, डिजिटल प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स में सहयोग के नए क्षेत्र की तलाश कीदोनों देशों के बीच आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा और प्राथमिकता व्यापार समझौता माध्यम से व्यापार ढांचे सुदृढ बनाने पर चर्चा हुई

भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक आज 5 जून, 2026 को फिलीपींस के मनीला में आयोजित की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री अमित वर्मा और फिलीपींस के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समूह के व्यापार एवं उद्योग विभाग के अवर सचिव श्री एलन बी. गेप्टी ने की। संबंधित मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें शामिल हुए।

दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में बढोतरी को सराहा जो 2025-26 में 3.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और अच्‍छी प्रगति का संकेतक है। बातचीत में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश रुझान, प्राथमिकता वाले उत्पादों और सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में संवर्धन गतिविधियों और सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक में फिल्म, ऊर्जा, निर्माण और अवसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी/ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी/व्यावसायिक प्रक्रिया प्रबंधन/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औषधि जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। दोनों पक्ष इन क्षेत्रों में गहन सहयोग से दीर्घकालिक लाभ प्राप्‍त करने पर सहमत हुए। उन्‍होंने माना कि इससे दोनों देश अधिक प्रभावी तरीके से अपने विकास लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे और पारस्परिक सहयोग ढांचा मजबूत होगा।

बातचीत में व्यापार सुगमता के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी अन्‍य प्रमुख मुद्दा रहा। सीमा शुल्क सहयोग और इस सुगम बनाने, कृषि क्षेत्र में सहयोग और विशिष्ट उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार जैसे विषय शामिल रहे।

बैठक में आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा शीघ्र संपन्‍न करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय प्राथमिकता व्यापार समझौते पर बातचीत पर भी चर्चा हुई।

बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंध सुदृढ बनाने के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया गया।  दोनों देशों ने अधिक सक्रिय और परस्‍पर लाभकारी साझेदारी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

14वें संयुक्त कार्य समूह की बैठक से इतर दौरान 4 जून, 2026 को फिलीपींस में कार्यगत भारतीय व्यवसायियों के साथ एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहन बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।

भारत-फिलीपींस व्यापार एवं निवेश संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक नई दिल्ली में आयोजित होगी। भारत-फिलीपींस व्यापार और निवेश संयुक्त कार्य समूह माल और सेवा क्षेत्र में व्‍यापार संवर्धन तथा निवेश संबंधों को मजबूत करने पर विशेष बल के साथ ही दोनों देशों के लिए वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय घटनाक्रमों पर विचार साझा करने का मंच भी रहा है।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और थुरिंगिया के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट ने क्वांटम संचार, फोटोनिक्स और उद्योग-नेतृत्व वाली डीप-टेक साझेदारी पर चर्चा की

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और थुरिंगिया के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट ने क्वांटम संचार, फोटोनिक्स और उद्योग-नेतृत्व वाली डीप-टेक साझेदारी पर चर्चा की

 जर्मनी ने भारत के साथ विस्तारित शोधकर्ता आदान-प्रदान और दोहरी डिग्री साझेदारी का प्रस्ताव रखा चर्चा में क्वांटम संचार, क्वांटम उपग्रह संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन, यूरोओजीएस नेटवर्क, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और अनुसंधान-उद्योग सहयोग जैसे विषय शामिल थे डॉ. जितेंद्र सिंह ने जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के साथ वार्ता के दौरान भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का प्रदर्शन किया थुरिंगिया की फोटोनिक्स विशेषज्ञता ने भारत-जर्मनी प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए नए रास्ते खोले

भारत और जर्मनी ने आज क्वांटम संचार, फोटोनिक्स, क्वांटम उपग्रह संचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और डीप-टेक नवाचार में भविष्योन्मुखी साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाया, जब जर्मनी के थुरिंगिया मुक्त राज्य के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट, जो वर्तमान में भारत दौरे पर हैं, ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की।

इस बैठक में दोनों पक्षों की सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गति देने के लिए रास्ते तलाशे जा सकें।

इस बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव राजेश एस. गोखले, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, अंतरिक्ष विभाग, डीआरडीओ और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। जर्मन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मारियो वोग्ट ने किया और इसमें फाउंडेशन फॉर टेक्नोलॉजी, इनोवेशन एंड रिसर्च थुरिंगिया की कार्यकारी बोर्ड सदस्य क्रिस्टियान किलियन के अलावा सरकार, अनुसंधान संगठनों, उद्योग और प्रौद्योगिकी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित एक मज़बूत साझेदारी है। 2024 में भारत-जर्मनी विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सहयोग द्विपक्षीय संबंधों के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बनकर उभरा है और अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक विकास के अग्रणी क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करता रहता है।

फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और उन्नत विनिर्माण के लिए थुरिंगिया के एक प्रमुख यूरोपीय केंद्र के रूप में उभरने को देखते हुए, दोनों पक्षों ने अग्रणी प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी के अवसरों का पता लगाया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत और जर्मनी की पूरक शक्तियों का लाभ उठाना और सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योग के बीच गहन सहयोग को बढ़ावा देना था ताकि अनुसंधान को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और नवाचार-संचालित उद्यमों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को गति दी जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्योग से जुड़े अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और अन्य उपायों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अकादमिक जगत, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग को जोड़ने वाले मंचों का तेजी से निर्माण कर रहा है, जिससे वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक समाधानों और आर्थिक मूल्य में परिवर्तित किया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम का मेजबान है और जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, जल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि भारत का नवाचार परिदृश्य सार्वजनिक संस्थानों, उद्योग और उद्यमियों के बीच सहयोग से तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

बैठक का मुख्य केंद्र क्वांटम प्रौद्योगिकियों और फोटोनिक्स में सहयोग था, जिन्हें दोनों पक्षों ने भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना। क्वांटम संचार, क्वांटम उपग्रह संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन, क्वांटम नेटवर्क और उन्नत फोटोनिक्स प्रौद्योगिकियों में अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां भारत और थुरिंगिया की पूरक शक्तियां और क्षमताएं मौजूद हैं।

जर्मनी ने क्वांटम संचार अवसंरचना और ऑप्टिकल संचार प्रणालियों से संबंधित चल रही यूरोपीय पहलों का विवरण साझा किया, जिसमें यूरोओजीएस नेटवर्क के तहत विकास भी शामिल है, जिसका उद्देश्य ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन प्रौद्योगिकियों में मानकीकरण और अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा देना है। चर्चा में दोनों पक्षों के अनुसंधान संस्थानों,

प्रौद्योगिकी संगठनों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों को शामिल करते हुए वैज्ञानिक सहयोग, विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

चर्चाओं में क्वांटम प्रौद्योगिकियों को वैश्विक स्तर पर दिए जा रहे बढ़ते रणनीतिक महत्व और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत हासिल की गई प्रगति, जिसमें सुरक्षित क्वांटम संचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों में हुई प्रगति शामिल है, के बारे में जानकारी दी। दोनों पक्षों ने क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार और संबंधित बुनियादी ढांचे में उभरते विकास पर अपने विचार साझा किए और अनुसंधान, मानक विकास, प्रतिभा आदान-प्रदान और प्रौद्योगिकी साझेदारी में गहन सहयोग की संभावनाओं को मान्यता दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, इंडियाएआई मिशन, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और जैव प्रौद्योगिकी पहलों सहित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में भारत के मिशन-मोड कार्यक्रमों के बढ़ते पोर्टफोलियो पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम सहयोगात्मक अनुसंधान, नवाचार-आधारित विकास और प्रौद्योगिकी साझेदारी के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

भविष्य की प्रौद्योगिकी साझेदारियों के संदर्भ में, चर्चाओं में फोटोनिक्स और संबद्ध अग्रणी प्रौद्योगिकियों में मिशन-उन्मुख सहयोग के अवसरों पर भी बात हुई, जिसमें प्रकाशिकी, फोटोनिक्स, क्वांटम प्रौद्योगिकियों और नवाचार-संचालित विनिर्माण में भारत और जर्मनी की पूरक शक्तियों का लाभ उठाया गया।

बैठक में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (डीएलआर) के बीच लंबे समय से चली रही साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं, निजी भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने वाले हालिया नीतिगत सुधारों और देश की विस्तारित अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स के बढ़ते योगदान पर प्रकाश डाला।

केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि भारत ने भारतीय प्रक्षेपण यानों के माध्यम से ग्यारह जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया है और अंतरिक्ष अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। दोनों पक्षों ने उपग्रह संचार, प्रकाशीय संचार, मानव अंतरिक्ष उड़ान, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अनुसंधान, पृथ्वी अवलोकन, ड्रोन प्रौद्योगिकी और भविष्य के अन्वेषण अभियानों में संभावित सहयोग पर चर्चा की।

यह मानते हुए कि भविष्य में तकनीकी नेतृत्व सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी पर अधिकाधिक निर्भर करेगा, दोनों पक्षों ने सार्वजनिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और निजी उद्यमों को एक साथ लाने वाले सहयोगात्मक ढाँचों पर चर्चा की। चर्चाओं में अनुसंधान परिणामों को व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों, विस्तार योग्य उत्पादों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी गहन तकनीकी उद्यमों में परिवर्तित करने के महत्व पर बल दिया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति अकादमिक जगत, अनुसंधान प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और उद्योग जगत की एकीकृत साझेदारियों से प्रेरित हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ऐसे सहयोगों का स्वागत करता है जो शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और डॉक्टरेट शोधार्थियों के आदान-प्रदान को सुगम बनाते हैं और साथ ही संयुक्त प्रौद्योगिकी विकास, औद्योगिक नवाचार और व्यावसायीकरण के मार्ग प्रशस्त करते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) और अन्य द्विपक्षीय तंत्रों के योगदान पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने वर्षों से उद्योग-उन्मुख अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचार साझेदारियों और शोधकर्ता विनिमय कार्यक्रमों को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि भारत-जर्मनी वैज्ञानिक सहयोग का अगला चरण क्वांटम प्रौद्योगिकियों, फोटोनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और डीप-टेक उद्यमिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच घनिष्ठ सहयोग से भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी और नवाचार-आधारित विकास, तकनीकी उन्नति और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

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तस्वीर - जर्मनी के 'फ्री स्टेट ऑफ थुरिंगिया' के मंत्री-प्रमुख मारियो वोग्ट के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात करते हुए

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मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ यह उच्च गति रेल खंड में तीव्र प्रगति का संकेत है

मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए महाराष्ट्र में तीसरी पर्वतीय सुरंग का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ यह उच्च गति रेल खंड में तीव्र प्रगति का संकेत है

 पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, इसे उच्च गति वाली बुलेट ट्रेन के सुचारू रूप से संचालन के लिए उन्नत निगरानी और सुरक्षा प्रणालियों के साथ बनाया गया है पालघर जिले में महज पांच महीनों में तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा होने से देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को और गति मिली है

 

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि के रूप में महाराष्ट्र के पालघर जिले के दहानू तालुका के अंबेसारी गांव में तीसरी पर्वतीय सुरंग (एमटी-07) का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हुआ है।

महाराष्ट्र में पिछले पांच महीनों के भीतर तीन पर्वतीय सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है। यह देश के पहले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सबसे तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण खंडों में से एक में हुई तीव्र प्रगति को दर्शाता है।

 

बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की दोनों ओर की पटरियों के लिए हाल ही में बनकर तैयार हुई एमटी-07 पर्वतीय सुरंग 417 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है। इस सुरंग की खुदाई दोनों सिरों से नियंत्रित ड्रिलिंग और विस्फोट विधि द्वारा की गई। निर्माण के दौरान उन्नत इंजीनियरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया।

 

खुदाई की पूरी प्रक्रिया की अवधि में संरचनात्मक स्थिरता, श्रमिकों की सुरक्षा और सटीक निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों और भू-तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया गया। सरफेस सेटलमेंट पॉइंट्स (एसएसपी), 3डी टारगेट, स्ट्रेन गेज और सिस्मोग्राफ सहित वास्तविक समय की निगरानी व्यवस्थाओं द्वारा कंपन, सुरंग की गतिविधि और आसपास की संरचनाओं पर निरंतर नजर बनाई रखी गई। सुरंग निर्माण कार्यों के दौरान वेंटिलेशन सिस्टम, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, नियंत्रित पहुंच और निरंतर भू-तकनीकी पर्यवेक्षण सहित व्यापक श्रमिक सुरक्षा उपायों में कोई भी ढील नहीं दी गई।

महाराष्ट्र में पहले हुए सुरंग निर्माण कार्य

यह सफलता परियोजना के महाराष्ट्र खंड में पहले हासिल की गई उपलब्धियों पर आधारित है। 1.5 किलोमीटर लंबी पहली पर्वतीय सुरंग (एमटी-05) का निर्माण 2 जनवरी 2026 को पालघर जिले के सफाले के पास पूरा हुआ। यह उपलब्धि महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली सफल पर्वतीय सुरंग निर्माण के रूप में सामने आई। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को दूसरी सुरंग (एमटी-06) का निर्माण हुआ, इसमें न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके 454 मीटर लंबी सुरंग खोदी गई। इस तरह पालघर जिले में लगभग एक महीने के भीतर दो सफल निर्माण पूरे हुए।

महाराष्ट्र में निर्माणाधीन सात पर्वतीय सुरंगों में से, एमटी-05, एमटी-06 और एमटी-07 में अब तक खुदाई का काम पूरा हो चुका है। एमटी-08 (350 मीटर) में 5 अक्टूबर 2023 को खुदाई का काम पूरा हो गया था, एमटी-03 की खुदाई 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी है, एमटी-04 लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि एमटी-01 और एमटी-02 में काम लगातार जारी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की कुल आठ पर्वतीय सुरंगों में से सात महाराष्ट्र के पालघर जिले के अंतर्गत आती हैं और एक गुजरात के वलसाड जिले में है और उस सुरंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

वापी और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच तीनों पर्वतीय सुरंगों की खुदाई सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर महाराष्ट्र के बोइसर और गुजरात के वापी के बीच एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र से होकर गुजरता है। वहां के निर्माण कार्य तेजी से प्रगति हो रही है। इन दोनों शहरों के बीच के मार्ग में तीन (03) पर्वतीय सुरंगें (एमटी 08, एमटी -07 और एमटी-06) शामिल हैं।

 

 

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना उन्नत सुरंग, निगरानी और निर्माण प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा दे रही है। सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य के लिए रेल परिवहन की नींव रखे जाने से देश की हाई-स्पीड रेल अवसंरचना में क्षमताएं मजबूत हो रही हैं।

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विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक सम्‍पन्‍न

विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक सम्‍पन्‍न

 समिति ने एक वर्ष में रिकॉर्ड 50 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने के साथ-सा‍थ विश्वसनीय, अनुकूल और मजबूत ग्रिड के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की

विद्युत मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक आज चंडीगढ़ में सम्‍पन्‍न हुई। केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने 'ग्रिड स्थिरता' विषय पर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक, सलाहकार समिति के सदस्य सांसद, विद्युत मंत्रालय के सचिव और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड और सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सहित प्रमुख विद्युत क्षेत्र संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

समिति ने भारत में बिजली की बढ़ती मांग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को जोड़ने और इन्वर्टर-आधारित उत्पादन संसाधनों के साथ-सा‍थ भारी मांग की बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए ग्रिड स्थिरता की उभरती आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में सुरक्षित नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, ट्रांसमिशन सुदृढ़ीकरण, ऊर्जा भंडारण, मजबूत प्रतिक्रियाशील विद्युत सहायता, ग्रिड अनुकूलन, तकनीकी मानकों का अनुपालन, पूर्वानुमान, विद्युत गुणवत्ता और ग्रिड की मजबूती जैसे विषय शामिल थे।

यह बात सामने आई कि ग्रिड की स्थिरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय महत्व रखती है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को एक विश्वसनीय, अनुकूल और मजबूत विद्युत ग्रिड द्वारा समर्थित होना चाहिए।

सदस्यों ने पर्याप्त संसाधन की उपलब्‍धता, सहायक सेवाओं, ऊर्जा भंडारण प्रोत्साहन, एसटीएटीकॉम और सिंक्रोनस कंडेंसर की तैनाती, पीएमयू-आधारित निगरानी, ​​ब्लैक-स्टार्ट मॉक ड्रिल और तकनीकी मानकों को सुदृढ़ करने सहित पहले से ही की जा रही पहलों की सराहना की। समिति ने एक वर्ष में 50 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के रिकॉर्ड एकीकरण की भी सराहना की।

इनवर्टर आधारित उत्पादन संसाधनों और भारी मात्रा में मांग की व्यापक पैठ वाले भारतीय ग्रिड में ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कार्यों की सराहना की गई:

  1. बिजली कटौती से बचने के लिए ट्रांसमिशन लाइनों और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं के चालू होने के बीच बेमेल से बचना।
  2. संसाधनों की पर्याप्तता सुनिश्चित करने और जड़त्वीय समर्थन प्रदान करने के लिए दीर्घकालिक भंडारण हेतु पंप स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देना।
  3. उपयुक्त थोक उपभोक्ताओं को बड़े नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परिसरों के करीब लाने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि ट्रांसमिशन निवेश को अनुकूलित किया जा सके।
  4. वोल्टेज स्थिरता और सिस्टम की मजबूती को बनाए रखने के लिए एसटीएटीकॉम और सिंक्रोनस कंडेंसर जैसे उपकरणों की योजना बनाना और उन्हें काम में लगाना।
  5. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों और भंडारण प्रणालियों से लचीली सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उपयुक्त नियामक और वाणिज्यिक प्रणाली स्थापित करना।
  6. बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, ग्रिड-फॉर्मिंग इनवर्टर, इलेक्ट्रोलाइजर और डेटा सेंटर लोड जैसी नई प्रौद्योगिकियों के लिए तकनीकी मानकों की आवधिक और समयबद्ध समीक्षा।
  7. ग्रिड से जुड़े संस्थानों द्वारा आवधिक स्व-लेखापरीक्षा और अनुपालन रिपोर्टिंग के माध्यम से अनुपालन निगरानी को मजबूत करना।
  8. बेहतर मौसम डेटा, मौसम स्टेशनों के अंशांकन और रखरखाव के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों में स्वचालित मौसम स्टेशनों की स्थापना के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा पूर्वानुमान में सुधार करना।
  9. मौसम की मार झेलने वाले क्षेत्रों में पारेषण और वितरण अवसंरचना को मजबूत करके, आपातकालीन बहाली प्रणालियों को बनाए रखकर और तेजी से बहाली के लिए ब्लैक-स्टार्ट क्षमता को बढ़ाकर ग्रिड के अनुकूलन को बढ़ाना।
  10. इन्वर्टर-आधारित संसाधनों की बढ़ती पैठ को देखते हुए विद्युत गुणवत्ता और हार्मोनिक्स आकलन के लिए एक उपयुक्त ढांचा विकसित करना।

बैठक का समापन स्वच्छ, विश्वसनीय, अनुकूल, सुरक्षित और सुदृढ़ भारतीय ग्रिड की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के संकल्प के साथ हुआ।

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भारत 11-12 जून 2026 को नई दिल्ली में 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी करेगा लोगों के लिए शहर समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग

भारत 11-12 जून 2026 को नई दिल्ली में 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी करेगा लोगों के लिए शहर समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग

 केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल ने आज आयोजन से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि भारत 11-12 जून 2026 को नई दिल्ली में 13 वें ब्रिक्स शहरीकरण फोरम की मेजबानी कर रहा है।

 यह फोरम 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत एक महत्वपूर्ण मंत्रिस्तरीय कार्यक्रम है, जो प्रधानमंत्री के 'मानवता सर्वोपरि' के दृष्टिकोण और अध्यक्षता के विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' द्वारा निर्देशित है।

 शहरीकरण मंच का आयोजन 'जनता के लिए शहर: समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग' विषय के अंतर्गत किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विषय भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जो शहरों की योजना, शासन और विकास में जनता को केंद्रीय महत्व देता है।

 भारत की विरासत और निरंतर नेतृत्व

ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी पहली बार भारत ने 2013 में नई दिल्ली में की थी, जिससे शहरीकरण को औपचारिक रूप से ब्रिक्स सहयोग एजेंडा में शामिल किया गया। भारत ने 2016 में विशाखापत्तनम में इस मंच की पुनः मेजबानी की, जिसमें सतत शहरी विकास, स्मार्ट शहरों और शहरी लचीलेपन पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत ने 2021 में वैश्विक महामारी के बाद शहरी पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मंच की वर्चुअल रूप से मेजबानी की।

 2026 में आयोजित होने वाले 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच की मेजबानी भारत चौथी बार कर रहा है। अपनी स्थापना के बाद से, यह मंच ब्रिक्स देशों के लिए शहरी नीति संबंधी अनुभवों का आदान-प्रदान करने, साझा प्राथमिकताओं की पहचान करने और व्यापक ब्रिक्स प्रक्रिया में शहरी संबंधी सुझाव देने के लिए एक समर्पित मंत्रिस्तरीय मंच के रूप में कार्य करता रहा है।

ब्रिक्स देशों में साझा शहरी प्राथमिकताएँ

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स शहरीकरण मंच एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित किया जा रहा है, क्योंकि कई ब्रिक्स राष्ट्र आवास, गतिशीलता, जलवायु जोखिम, नगरपालिका क्षमता, शहरी वित्त और सेवा वितरण की सामान्य चुनौतियों का सामना करते हुए तेजी से शहरी विकास का अनुभव कर रहे हैं।

 

 

यह फोरम कुछ व्यापक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करेगा: समावेशी शहरी विकास, जलवायु और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा, मजबूत नगरपालिका संस्थान और बेहतर शहरी शासन के लिए डिजिटल नवाचार।

निर्धारित कार्यक्रम और अपेक्षित परिणाम

दो दिवसीय 13वें ब्रिक्स शहरीकरण मंच में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, शहरी विकास विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे। सभी ग्यारह ब्रिक्स सदस्य देशों को मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

फोरम के पहले दिन उद्घाटन सत्र और ब्रिक्स की साझा शहरी प्राथमिकताओं पर एक उच्च स्तरीय पूर्ण सत्र आयोजित किया जाएगा। प्रतिनिधियों को भारत के शहरी परिवर्तन से परिचित कराने के लिए नई दिल्ली के चुनिंदा स्थलों का भ्रमण भी कराया जाएगा।

दूसरे दिन मंच के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विषयगत पैनल चर्चाएँ होंगी। सदस्य देश अपने-अपने देशों के अनुभव साझा करने के लिए पैनल चर्चाओं में भाग लेंगे। इसके अलावा, देशों के बीच द्विपक्षीय चर्चाएँ भी होंगी।

इन विचार-विमर्शों से शहरीकरण की चुनौतियों पर साझा नीतिगत समाधानों को समर्थन मिलने और समावेशी, लचीले और जन-केंद्रित शहरों के निर्माण पर ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ब्रिक्स परिवार के सभी प्रतिनिधियों का नई दिल्ली में स्वागत करने और लोगों के लिए सही मायने में बने शहरों पर मिलकर काम करने के लिए उत्सुक है।

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विश्व के सबसे बड़े आबाद नदी द्वीप का 4000 वर्षों के जलवायु इतिहास से अनुकूलन संबंधी जानकारी

विश्व के सबसे बड़े आबाद नदी द्वीप का 4000 वर्षों के जलवायु इतिहास से अनुकूलन संबंधी जानकारी

 एक नए अध्ययन ने असम के माजुली द्वीप के लगभग 4,000 वर्षों के जलवायु और वनस्पति इतिहास को पुनर्परिभाषित किया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा आबाद नदी द्वीप है। यह कई जनजातियों की बस्ती और नव-वैष्णव संस्कृति यानी सुधारवादी वैष्णववाद के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ एक बदलाव का प्रतीक भी है।

यह अध्ययन माजुली द्वीप पर जलवायु परिवर्तनशीलता, वनस्पति परिवर्तन और बाढ़ की स्थिति पर एक दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है और बाढ़ से प्रभावित समुदायों के लिए अनुकूलन संबंधी रणनीतियों को आकार दे सकता है।

दक्षिण और पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी, पश्चिम में सुबनसिरी नदी और उत्तर में ब्रह्मपुत्र की एक शाखा के बीच स्थित माजुली द्वीप, बार-बार आने वाली बाढ़ और नदी के किनारों के तीव्र कटाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सांस्कृतिक महत्व के लिए यूनेस्को की ओर से इसे दर्जे में शामिल होने की संभावना के बावजूद, इस क्षेत्र में एकीकृत आधुनिक और जीवाश्म पराग अभिलेखों पर आधारित परागकण संबंधी साक्ष्यों के आधार पर कोई व्यापक दीर्घकालिक पुरापारिस्थितिकीय पुनर्निर्माण नहीं किया गया है। पराग अतीत की पर्यावरणीय स्थितियों के सबसे विश्वसनीय संकेतकों में से एक है, क्योंकि ये टिकाऊ होते हैं और हजारों से लाखों वर्षों तक तलछट में संरक्षित रह सकते हैं।

चित्र 1. अध्ययन क्षेत्रों को दर्शाने वाला स्थानीय मानचित्र।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, लखनऊ स्थित बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों ने माजुली द्वीप पर एक अभूतपूर्व पुरातात्विक अध्ययन किया है, जो गंभीर भूमि क्षरण का शिकार हुआ है और वनों की कटाई, शहरीकरण और बार-बार आने वाली बाढ़ से अत्यधिक प्रभावित भी है।

उन्होंने माजुली द्वीप पर स्थित सकाली आर्द्रभूमि से 150 सेंटीमीटर गहरा तलछट कोर एकत्र किया और इसका उपयोग पराग कणों के विश्लेषण (अतीत की वनस्पति का पुनर्निर्माण करने के लिए) और कण आकार के अध्ययन (नदी की गतिशीलता और बाढ़ की तीव्रता को समझने के लिए) को संयोजित करने के लिए किया। इससे द्वीप के लिए पहला व्यापक पर्यावरणीय रिकॉर्ड तैयार हुआ। यह अध्ययन मध्य-उत्तर होलोसीन काल के पर्यावरणीय परिवर्तनों का पुनर्निर्माण करता है, जिससे ऊपरी ब्रह्मपुत्र घाटी में क्षेत्रीय जलवायु, वनस्पति और आर्द्रभूमि की गतिशीलता को समझने में एक महत्वपूर्ण कमी पूरी होती है।

आधुनिक परागकण सादृश्यों और परागकण आधारित मात्रात्मक पुरा-जलवायु पुनर्निर्माण पद्धति के समर्थन से किए गए इस अनुसंधान में 4040 से 500 कैलिब्रेटेड वर्ष बीपी के दौरान औसत वार्षिक तापमान (एमएटी) और औसत वार्षिक वर्षा (एमएपी) का अनुमान लगाया गया है, जिसे सह-अस्तित्व दृष्टिकोण कहा जाता है। इसके नतीजे एक प्रारंभिक गर्म और आर्द्र चरण (4040-2260 कैलिब्रेटेड वर्ष बीपी) को दर्शाते हैं, जिसमें घने वन आवरण थे और जो 4.2 हजार वर्ष के दौरान शुष्क जलवायु की स्थिति में सशक्‍तता का संकेत देते हैं। इसके बाद मानसून की तीव्रता और बाढ़ की तीव्रता में उतार-चढ़ाव वाले चरण आए, जिसमें 1100-500 कैलिब्रेटेड वर्ष बीपी के दौरान अपेक्षाकृत आर्द्र अवधि भी शामिल है, जो मध्यकालीन जलवायु विसंगति के अनुरूप है। पिछले लगभग 500 वर्षों में तापमान और वर्षा में गिरावट देखी गई है, जो लघु हिमयुग के अनुरूप है, साथ ही मानवजनित प्रभाव में वृद्धि और बिखरी हुई वनस्पति के विस्तार को भी दर्शाती है।

चित्र 2. असम के माजुली द्वीप के तलछट से प्राप्त परागकोष

  1. ब्यूटिया मोनोस्पर्मा, 2. बबूल निलोटिका, 3. श्लीचेरा, 4. सिजिजियम, 5. लेगरस्ट्रोमिया, 6. बॉम्बैक्स सीबा, 7. टर्मिनलिया, 8. एम्ब्लिका, 9. सैपोटेसी, 10. एस्टेरसिया, 11 और 12. फैबेसी, 13. मेलास्टोमा, 14. चेनोपोडियासी, 15. सिम्प्लोकोस, 16. लेम्ना, 17. ओनाग्रेसी, 18. टाइफा, 19. निम्फिया, 20. निम्फोइड्स, 21. ब्रैसिका, 22. नॉन-सीरियल, 23.सीरियल, 24. साइपेरेसी, 25. धनिया, 26. एलनस, 27. पाइनस, 28. मोनोलेट, 29. डिग्रेडेड ट्राइलेट।

बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी), लखनऊ की सुश्री आर्य पांडे (डीएसटी-इंस्पायर एसआरएफ) और डॉ. स्वाति त्रिपाठी, वैज्ञानिक-ई (पर्यवेक्षक) के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में डॉ. साधन कुमार बसुमतारी (बीएसआईपी), डॉ. सलमान खान (जर्मनी), डॉ. हेमा सिंह (बीएचयू), डॉ. बिस्वजीत ठाकुर (बीएसआईपी) और डॉ. अनुपम शर्मा (बीएसआईपी) का सहयोग लिया गया है। यह अध्ययन माजुली के आसपास ब्रह्मपुत्र और उससे जुड़ी नदी प्रणालियों की जलीय प्रक्रियाओं की भूमिका का मूल्यांकन करता है, जो द्वीप पर निक्षेपण पर्यावरण को आकार देने और पारिस्थितिक गतिशीलता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अनाज के आकार के आंकड़े कम ऊर्जा से उच्च ऊर्जा वाली नदीय स्थितियों में बदलाव का संकेत देते हैं, जो समय के साथ बढ़ती जलगतिकीय अस्थिरता को दर्शाते हैं और नदी द्वीप पारिस्थितिक तंत्र में जलवायु-वनस्पति-नदी अंतःक्रियाओं की समझ को आगे बढ़ाते हैं।

परागकण और अनाज के आकार के विश्लेषणों का एकीकरण अतीत में आई बाढ़ की तीव्रता, तलछट परिवहन और कटाव प्रक्रियाओं की बेहतर समझ प्रदान करता है, जो ब्रह्मपुत्र बेसिन में नदी प्रबंधन और आपदा शमन के लिए महत्वपूर्ण है।

इन परिणामों से स्थानीय वनस्पति गतिशीलता और प्रमुख वैश्विक जलवायु घटनाओं के बीच स्पष्ट समकालिकता प्रदर्शित होती है, जो व्यापक जलवायु परिवर्तन के प्रति इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर करती है। ये निष्कर्ष पारिस्थितिक अनुकूलन और भेद्यता के चरणों की भी पहचान करते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि पुनर्स्थापन और टिकाऊ भूमि उपयोग नियोजन के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हैं।

पैलियोबोटनी और पैलिनोलॉजी की समीक्षा (एल्सवियर) में प्रकाशित यह अध्ययन, माजुली द्वीप पर दीर्घकालिक जलवायु-वनस्पति गतिशीलता और नदी प्रक्रियाओं का पहला व्यापक बहु-प्रतिनिधि (पराग और अनाज के आकार) पुनर्निर्धारण प्रस्तुत करता है और नीति निर्माण और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को सूचित कर सकता है, जिससे बार-बार आने वाली बाढ़ और भूमि के नुकसान से प्रभावित समुदायों को लाभ होगा।

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मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान

 रायसेन से श्री शिवराज सिंह चौहान का देशभर को संदेश: स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारतकेंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह बोले- मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा संतुलित खाद, सॉयल हेल्थ कार्ड और वैज्ञानिक खेती पर श्री शिवराज सिंह का जोर “धरती हमारी मां है”: मिट्टी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का श्री शिवराज सिंह ने किया आह्वान गांव-गांव पहुंचेंगे वैज्ञानिक, किसानों को देंगे खेती की नई तकनीक महिला सशक्तिकरण, युवा मार्गदर्शन और खेती सुधार को साथ लेकर आगे बढ़ेगा अभियान- श्री शिवराज सिंह

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के ग्राम रमासिया से राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियानका शुभारंभ करते हुए किसानों को साफ संदेश दिया कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

 

1 से 30 जून तक देशभर में चलने वाले इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती हमारी माता है और इसकी सेहत बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियानकेवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प है। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हर किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खाद का उपयोग करे। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है। सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।

 

श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए क्षेत्र में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक और पानी बचाने वाली खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

 

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने महिला सशक्तिकरण को भी अभियान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, आयवर्धन और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय बढ़ा सकें।

युवाओं को लेकर भी श्री चौहान ने विशेष बात कही और कहा कि उनके लिए मार्गदर्शन और तैयारी के अवसर बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल सड़क, मकान और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गांवों में पहुंचें, किसानों को तकनीकी सहायता दें और खेती को बचाने के इस संकल्प को जमीन पर उतारें। उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे विकास अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही समृद्ध गांव, सशक्त किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बहुत विज़नरी हैं, बहुत पहले बहुत दूर का सोचते हैं। ये धरती माता केवल हमारे लिए नहीं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। तो इसकी हालत ऐसी ना हो जाए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्न उत्पादित करने से इंकार कर दे, इसलिए माटी बची रहे, इसलिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, धरती के तत्वों की आवश्यकता देखते हुए करने की बात करेंगे। केवल इतना ही नहीं, नकली पेस्टीसाइड और खाद उसके खिलाफ भी अभियान चलेगा। हम इस दौरान किसानों को वहाँ की एग्रो-क्लाइमैटिक कंडीशन के हिसाब से कौन सी फसल और कौन से बीज ठीक रहेंगे, कृषि प्रणाली कैसी होनी चाहिए, बीजों का उपचार और बाकी चीजें, वो भी बताएँगे। धरती को बचाने के लिए हरित खाद भी जरूरी है, उसके बारे में भी जानकारी देंगे और विभिन्न योजनाओं का केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में दिया जाएगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कुपोषित बच्चों को पोषण किट भी वितरित की गई।

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1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा खेत बचाओ अभियान

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा खेत बचाओ अभियान

 खेत बचाओ अभियान" को गांव-गांव तक ले जाने की तैयारी, श्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत से राज्य तक व्यापक समन्वय पर दिया जोरकम खाद, सही खाद, सही सलाह: खेत बचाओ अभियान में संतुलित उर्वरक उपयोग होगा फोकस- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहानमौसम, मिट्टी और बाजार के हिसाब से किसान को मिलेगी सीधी सलाह, खेत बचाओ अभियान बनेगा मार्गदर्शक- श्री शिवराज सिंह चौहान पंचायत, केवीके, आईसीएआर और राज्य सरकारें मिलकर चलाएंगी खेत बचाओ अभियान, योजनाओं का लाभ भी पहुंचेगा साथ-साथ- श्री शिवराज सिंह मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधियों से भागीदारी का करेंगे आग्रह, खेत बचाओ अभियान को मिलेगा राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने तैयारी के संबंध में दिल्ली में ली उच्चस्तरीय बैठक

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है। आज दिल्ली में इस अभियान की तैयारी के संबंध में श्री शिवराज सिंह ने उच्चस्तरीय बैठक लेकर अभियान का फोकस संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, मौसम की चुनौती के मद्देनजर समय पर किसान सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी और योजनाओं के लाभ को सीधे गांव तक पहुंचाने पर रखने की बात कही।

एक जून से शुरू हो रहे महीनेभर चलने वाले “खेत बचाओ अभियान” को प्रभावी और परिणामकारी बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का फोकस खेत को बचाने, लागत को संतुलित करने और किसान को सही समय पर सही मार्गदर्शन देने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे तक नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र तक साझी भागीदारी के मॉडल पर चलेगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में इस बात पर बल दिया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित, संतुलित और सही मात्रा में खाद तथा अन्य कृषि इनपुट के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि आने वाले समय को लेकर जो मौसम संबंधी चिंता जताई जा रही है, उसके मद्देनजर किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि वे क्या करें, क्या न करें, कौन-सी फसल लें, कहाँ फसल विविधीकरण अपनाएं और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत-स्तर पर किसान को स्थिति-विशेष के अनुरूप सलाह देना होगा।

बैठक में यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर इस अभियान को मजबूत आधार दिया जाएगा। पंचायत स्तर पर मैकेनाइजेशन की मशीनों का वितरण, योजनाओं का लाभ और जहां संभव हो वहां सरकारी कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष लाभ भी इसी अभियान के अंतर्गत जोड़ने के लिए शिवराज सिंह ने निर्देशित किया।

श्री चौहान ने यह भी कहा कि अभियान को केवल विभागीय दायरे में सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया जाएगा और मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से भी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा, ताकि यह अभियान एक प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनसहभागिता का मजबूत मॉडल बन सके। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण अभियान को प्रारंभिक दिनों से ही राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय ऊर्जा देगा।

बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए KVKs को सभी सहभागी संस्थानों के लिए प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है, साढ़े 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें KVK, ICAR संस्थान, AICRP केंद्रों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ICAR संस्थानों और KVKs की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से काम करेंगी।

श्री शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को केवल खाद प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान से छूटे लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम, कॉटन मिशन, संतुलित पोषण, मिट्टी स्वास्थ्य, जल-संरक्षण और क्षेत्र-विशेष कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को समन्वित रूप में जोड़ने का दृष्टिकोण अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाएगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बैठक में कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यही है कि संदेश व्यवहारिक हो, जमीन पर दिखे और स्थानीय संरचना उससे जुड़ी हो। इसलिए फर्टिलाइजर के कम और संतुलित उपयोग, मौसम के अनुरूप खेती की सलाह, पंचायत-स्तर की सक्रियता, मशीनरी और योजनाओं के लाभ का समावेश तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी; इन बुनियादी बिंदुओं पर अभियान के दौरान ध्यान रखा जाए। अभियान की दिशा साफ है: खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे, किसान जागरूक बने और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो।

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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने एआई पाठ्यक्रम के पुनर्गठन के मुद्दे पर उद्योग जगत के साथ उच्च स्तरीय बैठक की

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने एआई पाठ्यक्रम के पुनर्गठन के मुद्दे पर उद्योग जगत के साथ उच्च स्तरीय बैठक की

 व्यावहारिक अनुभव बढ़ाने, उद्योग-एकीकृत शिक्षण, संकाय विकास और साझा अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया गया

भारत सरकार उभरते तकनीकी रुझानों के लिए शिक्षार्थियों को बेहतर ढंग से तैयार करने हेतु एआई पाठ्यक्रम के व्यापक पुनर्गठन के लिए उद्योग जगत के साथ सहयोग कर रही है। इस संबंध में, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में एआई पाठ्यक्रम कार्यबल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

टास्कफोर्स ने भारतीय शिक्षण संस्थानों में मौजूदा बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बी.टेक) कंप्यूटर साइंस और संबद्ध पाठ्यक्रमों का आधारभूत अध्ययन किया। यह अध्ययन उद्योग विशेषज्ञों और नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) के सहयोग से किया गया।

अध्ययन में यह स्वीकार किया गया कि भारतीय पाठ्यक्रम में एआई का दायरा बढ़ा है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी पाई गईं। ये कमियां शिक्षण पद्धति, बुनियादी ढांचे और जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग ऑपरेशंस (एमएलओपी) और मूलभूत मॉडल विकास जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव से जुड़ीं थीं।

टास्कफोर्स के फोकस क्षेत्र:

अनुप्रयोग आधारित शिक्षण पद्धति: पहले सेमेस्टर से ही व्याख्यान-आधारित शिक्षण से हटकर वास्तविक उद्योग में उपयोग मामलों पर आधारित शिक्षण की ओर बदलाव।

क्रेडिट-आधारित पाठ्यक्रम एकीकरण: औपचारिक शैक्षणिक क्रेडिट प्रणाली में एआई पाठ्यक्रमों को सेमेस्टर-वार संरचित तरीके से शामिल करना।

उन्नत व्यावहारिक अनुभव: वर्तमान 25-30 प्रतिशत व्यावहारिक अनुभव को बढ़ाकर 40-75 प्रतिशत करना, जो डिग्री की प्रकृति और चयनित विशेषज्ञता पर निर्भर करेगा।

उद्योग-एकीकृत शिक्षण पद्धति: कैपस्टोन परियोजनाओं, संपूर्ण एआई समाधान इंजीनियरिंग और लो-कोड और नो-कोड उपकरणों के उपयोग के ज़रिए पूरे कार्यक्रम में उद्योग जगत का अनुभव प्रदान करना।

निरंतर सूत्र के रूप में जिम्मेदार एआई: जिम्मेदार एआई और एआई गवर्नेंस को अलग-अलग मॉड्यूल के बजाय सभी सेमेस्टर में एकीकृत किया गया है।

 

एक से अधिक प्रवेश-निकास विकल्प: कोर्स खत्म करने के बेहतर विकल्प, जिसमें प्रथम वर्ष के बाद प्रमाणपत्र, द्वितीय वर्ष के बाद डिप्लोमा और तृतीय वर्ष के बाद एडवांस्ड डिप्लोमा प्रदान किया जाता है।

संकाय विकास पर ज़ोर

पाठ्यक्रम सुधार के साथ-साथ संकाय की तैयारी को भी आवश्यक मानते हुए, परामर्श में प्रस्तावित रोडमैप के केंद्र में संकाय क्षमता निर्माण को रखा गया। अनुशंसाओं में शामिल हैं:

  • संरचित ट्रेन-द-ट्रेनर कार्यक्रम,
  • चुनिंदा पाठ्यक्रम सामग्री,
  • मानकीकृत मूल्यांकन ढाँचे, और
  • वर्तमान उद्योग उपकरणों और प्लेटफार्मों के अनुरूप आधुनिक प्रयोगशालाएँ।

अनुभवी उद्योग पेशेवरों को सहायक संकाय के रूप में शामिल करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप की भी अनुशंसा की गई। यह प्रमुख बिजनेस स्कूलों के सिद्ध मॉडल पर आधारित है, ताकि कक्षा में गहन व्यावहारिक विशेषज्ञता लाई जा सके।

साझा अवसंरचना पर मुख्य ज़ोर

प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय स्तर की साझा एआई अवसंरचना के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा। ट्रिपल हेलिक्स मॉडल को उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से समर्थन दिया जाएगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) कंप्यूट, एज डिवाइस, सॉफ्टवेयर स्टैक और सदस्यता-आधारित प्लेटफार्मों तक समान पहुँच सुनिश्चित होगी।

भविष्य की कार्ययोजना

परामर्श के समापन पर चार तत्काल अगले कदमों पर सहमति बनी:

  • राष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर, बुनियादी ढांचे, संकाय और शिक्षार्थी संख्या की आवश्यकताओं का आकलन।
  • जारी बैचों के पांचवें से आठवें सेमेस्टर में संशोधित पाठ्यक्रम को औपचारिक रूप से अपनाने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के साथ संपर्क स्थापित करना, साथ ही आगामी बैचों के लिए पूर्ण एकीकरण सुनिश्चित करना।
  • संकाय विकास कार्ययोजना, जिसमें उद्योग-नेतृत्व वाला प्रशिक्षण, अनुभव साझा करना और कॉर्पोरेट पेशेवरों के लिए शिक्षकों के रूप में कार्य करने हेतु एक संरचित मार्ग शामिल है।
  • गैर-स्टेम विषयों के लिए समानांतर पाठ्यक्रम, जिसे एआई जागरूकता, बुनियादी एआई साक्षरता और गैर-तकनीकी भूमिकाओं में एआई के व्यावहारिक उपयोग को कवर करने वाले एक अलग कार्यप्रवाह के रूप में शुरू किया जाएगा।
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शिवराज सिंह चौहान ने पीएमएवाई जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की

शिवराज सिंह चौहान ने पीएमएवाई जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की

 हर गरीब को पक्का घर’ के संकल्प को मिली नई गति, पीएमएवाई-जी के लिए 12 राज्यों को बड़ी वित्तीय सहायताग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भूमिहीन गरीब परिवारों को भी पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए राज्यों से भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया

‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत 12 राज्यों को ₹10,021.42 करोड़ की मदर सैंक्शन केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी की उपस्थिति में जारी की।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, राजस्थान के मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, असम के मंत्री श्री अतुल बोरा, झारखंड की मंत्री श्रीमती दीपिका पांडे, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल समेत केंद्र और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जिन राज्यों को मदर सैंक्शन जारी की उसमें- असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

 

इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि देश का कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे। इसी संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रारंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 3.91 करोड़ घरों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा 3.05 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

श्री चौहान ने कहा कि “यदि घर अच्छा होता है तो जीवन आसान बनता है। हम केवल मकान नहीं बना रहे हैं, बल्कि ऐसे घर बना रहे हैं जहां सड़क, बिजली, पानी, गैस और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हों।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने राज्यों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने हेल्पलाइन, शिकायत निवारण प्रणाली, वर्षा जल संचयन, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन तथा राजमिस्त्री प्रशिक्षण जैसे सराहनीय प्रयास किए हैं, जिनके कारण योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आई है।

महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएमएवाई-जी के अंतर्गत लगभग 75 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त स्वामित्व में स्वीकृत किए गए हैं, जिससे महिलाओं का सम्मान, स्वाभिमान एवं सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़ हुई है।

श्री चौहान ने कहा कि कुछ गरीब परिवारों के पास भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण आवास निर्माण कार्य प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में राज्यों को भूमि उपलब्ध कराने एवं आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल करनी चाहिए।

उन्होंने राज्यों से लंबित शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने तथा जारी की गई राशि के त्वरित उपयोग को सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लक्ष्यों के अनुरूप स्वीकृतियां पूर्ण नहीं की हैं, जिन्हें 30 जून 2026 तक पूरा किया जाना चाहिए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़, माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी एवं पीएमएवाई-जी इकाई से कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान भी किया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्यों का उल्लेखनीय सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹11,121 करोड़ की मदर सैंक्शन पूर्व में जारी की जा चुकी है तथा आज ₹10,021 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त मदर सैंक्शन जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक आवास निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे केंद्र एवं राज्यों के समन्वित प्रयासों से समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

पीएमएवाई-जी ग्रामीण भारत के कायाकल्प की अपनी उल्लेखनीय यात्रा को निरंतर आगे बढ़ा रही है। सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे तथा प्रत्येक परिवार को गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

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आईआईएससी के नेतृत्व में शुरू की गई सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण पहल में संपूर्ण भारत में जनजातीय युवाओं की भागीदारी में अपार वृद्धि दर्ज की गई

आईआईएससी के नेतृत्व में शुरू की गई सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण पहल में संपूर्ण भारत में जनजातीय युवाओं की भागीदारी में अपार वृद्धि दर्ज की गई

 भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) के सहयोग और युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत एमवाई भारत की सहायता से जनजातीय छात्रों के लिए सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम के 2026 के द्वितीय चरण के कार्यान्वयन के दौरान युवाओं तक पहुंच और भागीदारी में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है।

यह पहल आईआईएससी बेंगलुरु के सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीईएनएसई) के समन्वय से संचालित की जा रही है जिसका उद्देश्य जनजातीय छात्रों और संकाय सदस्यों को सेमीकंडक्टर निर्माण, नैनोइंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और उभरती प्रौद्योगिकियों के संबंध में उच्च-स्तरीय ज्ञान प्रदान करना है। इस कार्यक्रम में अपनी सुविधा और गति के आधार पर पूरा किया जाने वाला ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल, आईआईएससी के विशेषज्ञ संकाय सदस्यों के व्याख्यान और आईआईएससी बेंगलुरु में 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं जिसमें प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क यात्रा, आवास और भोजन की व्यवस्था की गई है।

विभिन्न जागरूकता अभियानों और देश भर में एमवाई भारत के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं, राज्य निदेशकों, जिला युवा अधिकारियों और स्वयंसेवी नेटवर्क की ओर से लोगों को एकत्र करने के लिए किए गए प्रयासों के कारण कार्यक्रम के मौजूदा चरण में भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। एमवाई भारत के युवाओं की ओर से आवेदन पिछले चरण में 992 से बढ़कर वर्तमान चरण में 5,654 हो गए हैं जिससे पता चलता है कि इसमें 518 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह भागीदारी 32 राज्यों से बढ़कर 34 राज्यों तक पहुंच गई है जबकि जिला स्तर पर भागीदारी देश भर में 411 जिलों से बढ़कर 648 जिलों तक पहुंच गई है।

 

इस पहल के परिणामस्वरूप विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) से संबंधित कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अंतर्गत पिछले चरण में 268 आवेदन आए थे। वर्तमान चरण में उनकी संख्या बढ़कर 1,741 हो गई है। यह वृद्धि 549 प्रतिशत से अधिक है और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में जनजातीय महिलाओं की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।

इस प्रचार अभियान में वर्चुअल ओरिएंटेशन सत्र, तकनीकी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ समन्वय, युवा नेटवर्क को सक्रिय करना और जनजातीय छात्र समुदायों के बीच लक्षित जागरूकता अभियान शामिल थे। इस दौरान, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) जैसे तकनीकी विश्वविद्यालयों ने योग्य जनजातीय छात्रों और संकाय सदस्यों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और फार्मेसी संस्थानों तक प्रचार प्रयासों का विस्तार करने में साझेदारी की।

इस पहल से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम से जनजातीय युवाओं में तकनीकी दक्षता, अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने और उद्योग के लिए तैयारी की तत्परता मजबूत होने की उम्मीद है जिससे भारत में बढ़ते सेमीकंडक्टर के अनुकूल परिवेश और भविष्य के तकनीकी कार्यबल में योगदान मिलेगा। यह पहल उन्नत वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आईआईएससी बेंगलुरु, जनजातीय कार्य मंत्रालय, एमवाई भारत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग के प्रयास को दर्शाती है।

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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने नई दिल्ली में देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र  इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट आयोजित किया

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने नई दिल्ली में देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट आयोजित किया

 मजबूत विज्ञान-उद्योग साझेदारी के माध्यम से भारत किफायती स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों के वैश्विक स्रोत के रूप में उभर रहा है : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधवभारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने पहले इनोवेटर-इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया और उद्योग क्षेत्र को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित कींजैव चिकित्सा अनुसंधान और टीका निर्माण को मजबूत करने के लिए देश में पहली बार निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस बायोमटेरियल उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपा गया हैभारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता है : नीति आयोग सदस्य डॉ. गोबरधन दास मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र स्वदेशी जैव चिकित्सा अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है : स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारत के सबसे बड़े जैव चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट" का आयोजन किया।

इस अवसर पर आईसीएमआर मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल के तहत जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए समर्पित देश के पहले संरचित प्लेटफार्म की शुरूआत की गई। इस पहल का उद्देश्य मजबूत उद्योग साझेदारी के माध्यम से स्वदेशी जैव चिकित्सा अनुसंधान को सुलभ, वास्तविक दुनिया के स्वास्थ्य सेवा समाधानों में परिवर्तित करना है।

आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोबरधन दास भी उपस्थि‍त थे।

राज्य मंत्री श्री जाधव ने कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारी प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी प्रौद्योगिकियों में तब्दील हों जो जन स्वास्थ्य को मजबूत करें और विकसित भारत को आगे बढ़ाएं। भारत स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर किफायती और नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की ओर अग्रसर है,। इसमें आईसीएमआर जैसे संस्थानों और उद्योग क्षेत्र की मजबूत साझेदारी शामिल है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार इकोसिस्टम के पास मौजूद है। मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र बौद्धिक संपदा की रक्षा करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाने और स्वदेशी नवाचारों को प्रयोगशालाओं से समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र आईसीएमआर की अत्याधुनिक अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर उद्योग क्षेत्र की साझेदारी और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम के दौरान, 'इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट' और 'टेक्नोलॉजी कंपेंडियम' भी जारी किए गए। यह देश के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईसीएमआर संस्थानों और नवप्रवर्तकों द्वारा उद्योग भागीदारों को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का सौंपा जाना इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा। इससे उनके विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण बढ़ावा मिलेगा। इन प्रौद्योगिकियों में उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर बल देते है। हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट और रिकॉम्बिनेंट टीके, साथ ही जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस सहित जैव सामग्री को उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपा गया। इससे देश के जैव चिकित्सा अनुसंधान और विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। इस आयोजन में आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों में 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों को दर्शाया गया। साथ ही नवप्रवर्तकों और उद्योग हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाया गया।

इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट" पहल मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ विकसित भारत 2047 के लिए भारत के बायोमेडिकल क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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खेत बचाओ अभियान 2.712 करोड़ नागरिकों तक पहुंचा 7.17 लाख किसानों को उर्वरक के संतुलित उपयोग के बारे में जागरूक किया ग

खेत बचाओ अभियान 2.712 करोड़ नागरिकों तक पहुंचा 7.17 लाख किसानों को उर्वरक के संतुलित उपयोग के बारे में जागरूक किया ग

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं जो मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पर केंद्रित है। 'खेत बचाओ अभियान' ने किसानों और हितधारकों को वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न मंचों के माध्यम से देश भर में व्यापक पहुंच स्थापित की है।

इस अभियान में अब तक कुल 12,979 जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए गए हैं। इसमें 7.17 लाख किसानों को प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया है। क्षमता निर्माण के लिए 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें 1,11,509 प्रतिभागियों ने भाग लिया। हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक स्रोतों पर 7,928 क्षेत्र प्रदर्शनों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।

जमीनी स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ 4,916 जनप्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किए गए। उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला की भूमिका को पहचानते हुए, संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उर्वरक डीलरों के साथ 9,609 संवाद आयोजित किए गए।

इस अभियान में किसान संगठनों का भी उपयोग किया गया जिसके अंतर्गत किसान संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान समूह (एफआईजी) के माध्यम से 8,383 किसान सदस्यों को जोड़ा गया। व्यापक प्रचार के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स सहित प्रचार सामग्री को देश भर में 53,616 स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। 944 रेडियो वार्ता और 200 टीवी/डिजिटल कार्यक्रमों सहित 1,144 मीडिया प्रसारणों के माध्यम से संदेश को और अधिक प्रभावी बनाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल प्रचार ने अभियान की पहुंच को 2.712 करोड़ लोगों तक पहुंचाया है।

'खेत बचाओ अभियान' पहल का उद्देश्य मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है जिससे मृदा की उर्वरता की रक्षा हो सके और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

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डाक विभाग और फ्लिपकार्ट ने पूरे भारत में अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

डाक विभाग और फ्लिपकार्ट ने पूरे भारत में अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

 भारत के ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक इकोसिस्टम को मजबूत करने और पूरे देश में अंतिम दूरी तक डिलीवरी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, डाक विभाग (डीओपी), संचार मंत्रालय और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आज नई दिल्ली में डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वाणिज्यिक निदेशक श्री हरविंदर कपूर ने डाक विभाग के पार्सल और सीसीएस निदेशालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री अदनान अहमद, फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक (कॉर्पोरेट कार्य) श्री डिप्पी वंकानी और दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए।

(नई दिल्ली में अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करते समय डाक विभाग और फ्लिपकार्ट के अधिकारी)

इस साझेदारी का उद्देश्य डाक विभाग की बेजोड़ पहुंच और भरोसेमंद डिलीवरी नेटवर्क के साथ-साथ भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र में फ्लिपकार्ट की मजबूत उपस्थिति का लाभ उठाकर पूरे देश में कुशल, विश्वसनीय और ग्राहक-केंद्रित पार्सल डिलीवरी समाधान प्रदान करना है। समझौते के तहत, डाक विभाग पूरे भारत में फ्लिपकार्ट शिपमेंट के लिए अंतिम दूरी तक डिलीवरी सेवाएं प्रदान करेगा।

समझौते की मुख्य विशेषताएं:

  • देशव्यापी अंतिम दूरी तक पहुंच: फ्लिपकार्ट, दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों सहित शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए इंडिया पोस्ट के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करेगा।
  • व्यापक डिलीवरी समाधान: इन सेवाओं में प्रीपेड और कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) पार्सल की डिलीवरी, ओटीपी आधारित डिलीवरी प्रमाणीकरण और तत्क्षण शिपमेंट ट्रैकिंग शामिल हैं।
  • ग्राहक के लिए बेहतर अनुभव: यह समझौता कुशल पार्सल आवागमन और वितरण के लिए तेज डिलीवरी, बेहतर परिचालन समन्वय और निर्बाध प्रौद्योगिकी एकीकरण पर केंद्रित है।
  • ई-कॉमर्स के विकास को समर्थन: इस सहयोग से भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स क्षेत्र को समर्थन देने वाले लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को और भी अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इस साझेदारी के माध्यम से, फ्लिपकार्ट को डाक विभाग के 1.6 लाख से अधिक डाकघरों के विशाल नेटवर्क और पूरे भारत में अद्वितीय वितरण नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त होगी। इससे बाजार तक व्यापक पहुंच, वितरण दक्षता में सुधार और विशेष रूप से दूरस्थ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवा प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

फ्लिपकार्ट भारत की अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है, जो देश भर में लाखों ग्राहकों को उत्पादों और डिजिटल वाणिज्य समाधानों की विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से सेवा प्रदान करती है। इस सहयोग से डाक विभाग के पार्सल व्यवसाय को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे उसके वितरण नेटवर्क और लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह साझेदारी डाक विभाग के उन निरंतर प्रयासों के अनुरूप है, जिसके तहत वह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाली एक अग्रणी लॉजिस्टिक संस्था के रूप में खुद को विकसित करना चाहता है।

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रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया

रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया

 किसी भी संदिग्ध गतिविधि या उसमें लिप्त व्यक्ति की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें ताकि रेलवे को निशाना बनाने वाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके

 रेलवे को निशाना बनाने वाली हाल की घटनाओं के मद्देनजर रेल मंत्री ने नई दिल्ली में फील्ड अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक कीआधुनिक तकनीक का उपयोग करके फील्ड से खुफिया जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया में सुधार किया जा रहा है: अश्विनी वैष्णव

 

रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, सीसीटीवी जैसे नवीनतम तकनीकी उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। रेलगाड़ियों, यात्रियों, स्टेशन परिसर और विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीट स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आज नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में रेल मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में देश भर के फील्ड अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। रेल भवन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष भी इस बैठक में उपस्थित थे।

हाल ही में हुई आगजनी की कुछ घटनाओं सहित कई मामलों की प्रारंभिक जांच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता सामने आई है। भारतीय रेलवे ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) इनकी सक्रिय रूप से जांच कर रहा है। कई मामलों में, रेलवे की त्वरित और सक्रिय कार्रवाई से बड़ी दुर्घटनाओं को टालने में मदद मिली है। खुफिया प्रणालियों को मजबूत करने और सूचनाओं को तेजी से संसाधित करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के अलावा, रेलवे मंत्रालय यात्रियों को यात्रा के दौरान और स्टेशन परिसर में प्रतीक्षा करते समय असामाजिक गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया है। रेलवे परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संदिग्ध व्यक्ति को देखने पर तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचना देने को कहा गया है।

सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान हुई चर्चाओं में, बेहतर रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से जमीनी स्तर से खुफिया जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया। प्रौद्योगिकी आधारित सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने, रेलवे नेटवर्क में सीसीटीवी कवरेज का विस्तार करने और रेलवे बोर्ड मुख्यालय तथा फील्ड जोन के बीच परिचालन सुरक्षा तालमेल को सुधारने पर भी बल दिया गया। बैठक में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, कैमरों की विशिष्टताओं को उन्नत करने और एआई-आधारित निगरानी प्रणालियों को तैनात करने पर भी विचार किया गया। बैठक में रेलवे नेटवर्क में अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन के लिए आरपीएफ और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के बीच सूचना साझाकरण तंत्र को बेहतर बनाकर आपसी तालमेल को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

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केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने जनसुविधाओं एवं समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए  सामुदायिक भवन हेतु राशि की घोषणा की

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने जनसुविधाओं एवं समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए सामुदायिक भवन हेतु राशि की घोषणा की

आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री एवं बिलासपुर लोकसभा सांसद श्री तोखन साहू ने ग्राम लारीपारा, विकासखंड कोटा, जिला बिलासपुर में आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रम में सहभागिता कर क्षेत्रवासियों से आत्मीय भेंट की तथा स्थानीय समस्याओं एवं विकास संबंधी आवश्यकताओं पर चर्चा की।
 
इस दौरान क्षेत्रवासियों की मांग को ध्यान में रखते हुए मंत्री श्री साहू ने सामुदायिक भवन निर्माण हेतु ₹10 लाख की राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सामाजिक अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
इसके पश्चात मंत्री श्री साहू ने माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी की मंशानुरूप कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानाबेल में आयोजित “सुशासन तिहार” कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान आमजन से प्राप्त मांग एवं शिकायत संबंधी आवेदनों की समीक्षा कर अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए। साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को चेक एवं कार्ड वितरित किए गए।
 
शिविर में कुल 169 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 152 मांग संबंधी एवं 17 शिकायत संबंधी प्रकरण शामिल रहे। इनमें से मांग संबंधी 17 प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष प्रकरणों के समाधान हेतु समय-सीमा निर्धारित की गई।
 
मंत्री श्री साहू ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नागरिकों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीब, किसान, महिला, युवा एवं बुजुर्ग सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। खाद्यान्न सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए देश के 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है तथा आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए तीन माह का राशन अग्रिम रूप से उपलब्ध कराया गया है।
 
महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मंत्री श्री साहू ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता महिलाओं को सम्मान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी सोच के तहत घर-घर शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन तथा अन्य जनहितकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया गया है।
 
मंत्री श्री साहू ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूल मंत्र के साथ जनकल्याण एवं समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
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अंतरिक्ष यान मिशन संचालन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एसएमओपीएस 2026

अंतरिक्ष यान मिशन संचालन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एसएमओपीएस 2026

अंतरिक्ष यान मिशन संचालन: एसएमओपीएस- 2026” पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा संस्करण, जिसकी थीम “स्मार्ट और सतत अंतरिक्ष मिशन प्रबंधन के लिए अभिनव संचालन - अगली पीढ़ी” है, 8-10 अप्रैल, 2026 के दौरान बेंगलुरु, भारत में आयोजित किया जा रहा है। यह कॉन्फ्रेंस, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई) और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ़ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) ने मिलकर आयोजित किया है, इसका मकसद मिशन ऑपरेशन मैनेजमेंट, एडवांस्ड मिशन डिज़ाइन, ऑटोमेशन, बड़े सैटेलाइट समूहों का मैनेजमेंट, मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, स्पेस रोबोटिक्स, अंतरिक्ष नीति, चंद्रमा और ग्रहों के बीच खोज, अंतरिक्ष प्रणालियों में साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्राउंड स्टेशन ऑपरेशन में मौजूदा और भविष्य के रुझान आदि से जुड़े विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करना है; साथ ही इसमें अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों ही क्षेत्रों में भविष्य की तकनीकों पर भी चर्चा की जाएगी। एसएमओपीएस के एक हिस्से के तौर पर, 10 तारीख को छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए एक विशेष वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया था।

इस सम्मेलन का उद्घाटन 8 अप्रैल को इसरो के पूर्व अध्यक्ष/डीओएस सचिव, श्री ए. एस. किरण कुमार ने किया। इस अवसर पर इसरो के अध्यक्ष/डीओएस सचिव डॉ. वी. नारायणन, यूआरएससी के निदेशक श्री एम. शंकरन, आईएए के महासचिव डॉ. जीन मिशेल कॉन्टेंट और आईएसटीआरएसी के निदेशक डॉ. ए. के. अनिल कुमार भी उपस्थित थे।

भारत में अपनी तरह के इस अनूठे सम्मेलन में शामिल प्रमुख विषयों में ये शामिल हैं:

- मिशन संचालन: डिजाइन को उपलब्धि में बदलना

- वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं का मार्गदर्शन करना

- मिशन डिजाइन और संचालन

- मिशन संचालन रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना

- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स

- ग्राउंड सेगमेंट और तारामंडल

- मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम, अंतरग्रहीय मिशन और भू-खंड

- अवसरों की कक्षाएँ: नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में योगदान

- मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की चुनौतियाँ

- आईएसएस पर रोबोटिक मिशन संचालन

- अंतरिक्ष क्षेत्र जागरूकता: अवधारणाएं, क्षमताएं और अनुप्रयोग

अंतरिक्ष अनुप्रयोगों का लाभ उठाना

120 मौखिक और 88 पोस्टर प्रस्तुतियों के अलावा, ईएसए, सीएनईएस, डीएलआर, आईबीएमपी और आईकेआई रूस, नासा, जेएक्सए, सेलेस्ट्राक, यूमेटसैट, यूटेलसैट, टीयू डेल्फ़्ट, कनाडा के प्रमुख विशेषज्ञ मुख्य वक्ता और पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। यह सम्मेलन एक अद्वितीय नेटवर्किंग मंच के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ भाग लेने वाली अंतरिक्ष एजेंसियों, स्टार्टअप्स, उद्योग और शिक्षा जगत ने अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर अपने विचार साझा किए और तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष परिदृश्य में उभरती चुनौतियों का समाधान किया। सम्मेलन के अंतिम दिन आयोजित कार्यशाला में आईएसएस पर रोबोटिक मिशन संचालन, अंतरिक्ष क्षेत्र जागरूकता, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, मानव अंतरिक्ष मिशन और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पर आमंत्रित वार्ताएँ हुईं, जिसमें भारी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।

अपने उद्घाटन भाषण में, इसरो अध्यक्ष ने अंतरिक्ष अभियानों की सफलता के लिए अंतरिक्ष यान मिशन संचालन की सटीक योजना और त्रुटिहीन निष्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के नवीन समाधान खोजने के लिए भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की आवश्यकता को दोहराया।

इसके मुख्य विषयों में से एक था - विविध और वितरित मिशन संचालन अवधारणाओं की बढ़ती जटिलता से उत्पन्न होने वाली मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों का सामना करना; ये चुनौतियाँ विघटनकारी तकनीकी नवाचार, बड़े उपग्रह समूहों के आगमन, अंतरिक्ष में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पृथ्वी की सीमा से परे अधिक महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष अन्वेषणों के कारण पैदा हो रही हैं, और इनका संबंध तकनीकी तथा नीतिगत, दोनों ही पहलुओं से है। सत्रों के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया, जो मानव-मशीन समन्वय के साथ अधिक स्वायत्त और कुशल मिशन संचालन को सक्षम बनाती है।

आईएसटीआरएसी - जो आर्यभट्ट उपग्रह से लेकर निसार तक, सभी निम्न पृथ्वी कक्षा और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के अंतरिक्ष यान संचालन का केंद्र है- के नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज हैं। इनमें ऐतिहासिक मंगलयान मिशन, चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग, सूर्य के चारों ओर लैग्रेंजियन पॉइंट में आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान की स्थापना और स्पैडेक्स मिशन में डॉकिंग प्रयोग शामिल हैं; साथ ही, एसएमओपी के आयोजन में भी इसने अग्रणी भूमिका निभाई। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के खुलने और इसरो द्वारा मानव अंतरिक्ष मिशन शुरू किए जाने की पृष्ठभूमि में, एसएमओपी विभिन्न विषयों के विचारों का एक समृद्ध संगम साबित हुआ; इसने वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के बीच सहयोग, तालमेल और साझेदारी को बढ़ावा दिया, ताकि भविष्य के अंतरिक्ष मिशन कार्यों के लिए एक सुरक्षित, टिकाऊ और स्मार्ट रूपरेखा तैयार की जा सके।

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दोस्तों ने किशोर की हत्या कर शव दफनाया बोरी में बंद कर पशु बाड़े में छिपाया

दोस्तों ने किशोर की हत्या कर शव दफनाया बोरी में बंद कर पशु बाड़े में छिपाया

माधौगढ़(जालौन) माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां दो दोस्तों ने मिलकर अपने ही दोस्त की हत्या कर दी और शव को बोरी में बंद कर पशु बाड़े में दफना दिया। 17 वर्षीय कमल प्रताप सिंह, निवासी रुदपुरा गांव, 25 मार्च से लापता था। वह अपने दोस्तों तेज प्रताप और रोहित के पास जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल डिटेल खंगाली। इसमें आखिरी बातचीत दोस्तों से होने की पुष्टि हुई। शक के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने हत्या की बात कबूल कर ली।आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस रोहित के घर पहुंची, जहां पशु बाड़े में मिट्टी हटाने पर बोरी में बंद शव बरामद हुआ। मौके पर अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे शांत नहीं बैठेंगे

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विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा 2026 में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सक्रिय भागीदारी

विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा 2026 में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सक्रिय भागीदारी

विधि और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इसके तहत स्वच्छता, साफ-सफाई और अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

स्वच्छता पखवाड़ा 1 अप्रैल, 2026 को विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को स्वच्छता शपथ दिलाने के साथ आरंभ हुआ। न्याय विभाग सचिव श्री नीरज वर्मा ने सबको शपथ दिलाई और स्वच्छ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके बाद जैसलमेर हाउस परिसर में स्वैच्छिक श्रमदान आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रियता से भाग लेकर स्वच्छ भारत अभियान के प्रति अपना समर्थन/प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिससे कार्यस्थलों और आसपास साफ-सफाई रखने की सामूहिक दायित्व की भावना मजबूत हुई।

न्याय विभाग में स्वच्छता पखवाड़े के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, जिनमें योग सत्र, स्वच्छता पर कार्यशाला, स्वच्छता पर निबंध लेखन और चित्रकला प्रतियोगिता और बेकार वस्तुओं को छांटकर अलग करना और उनकी नीलामी शामिल है।

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