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मितानिन कल्याण कोष योजना से 2300 परिवारों को बड़ी राहत, 6.69 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित लंबित 2300 दावा प्रकरणों का हुआ निराकरण, पात्र मितानिनों एवं उनके परिवारों के खातों में पहुंची सहायता राशि
एमसीबी। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी मितानिन कल्याण कोष योजना के तहत लंबे समय से लंबित 2300 दावा प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए पात्र मितानिनों एवं उनके परिवारों को बड़ी राहत प्रदान की गई है। शासन द्वारा कुल 6 करोड़ 69 लाख 42 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित की गई है। इस पहल से हजारों मितानिन परिवारों को आर्थिक संबल मिला है।
भिलाई स्टील प्लांट की सभी खदानों में आयोजित खान सुरक्षा प्रबंधन योजना कार्यशाला अब ऑन साइट कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर गई है।
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएआईएल)-भिलाई स्टील प्लांट के छत्तीसगढ़ समूह की खानों के लिए आयोजित पांच दिवसीय खान सुरक्षा प्रबंधन योजना (एमएसएमपी) - कार्यान्वयन और समीक्षा प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला अपने व्यावहारिक कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुकी है, जो खान सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने और खनन कार्यों में एक सक्रिय सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

21 जुलाई 2026 को शुरू हुई इस कार्यशाला का उद्देश्य खान सुरक्षा प्रबंधन योजना (एमएसएमपी) के कार्यान्वयन को बढ़ाना, वैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना और सुरक्षित, टिकाऊ और दुर्घटना-मुक्त खनन कार्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, कार्यकारी निदेशक (खान) कमल भास्कर और मुख्य महाप्रबंधक (खान) आरबी गहरवार ने इस बात पर जोर दिया कि खान सुरक्षा प्रबंधन योजना का प्रभावी कार्यान्वयन सुरक्षित और कुशल खनन की नींव है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कार्यबल की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सभी खानों में सुरक्षा प्रदर्शन को मजबूत करने के साथ-साथ परिचालन उत्कृष्टता के लिए एक संरचित और सक्रिय सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली आवश्यक है।
पहले दो दिनों के दौरान, दत्ता माइनिंग कंसल्टेंसी के सुरक्षा विशेषज्ञ और खान सुरक्षा के पूर्व उप महानिदेशक एस.के. दत्ता ने राजहारा मशीनीकृत खानों, डल्ली मशीनीकृत खानों, झारंदल्ली खानों, महामाया खानों, हिर्री खानों, कलवार खानों, रौघाट खानों और नंदिनी चूना पत्थर खानों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों और वरिष्ठ पर्यवेक्षकों के लिए व्यापक कक्षा सत्र आयोजित किए।
तकनीकी सत्रों में खान सुरक्षा प्रबंधन योजना के संपूर्ण जीवनचक्र को शामिल किया गया, जिसमें इसकी तैयारी, कार्यान्वयन, समीक्षा और निरंतर सुधार शामिल थे। व्यावहारिक केस स्टडी, संवादात्मक चर्चाओं और अनुभव साझा करने के माध्यम से, प्रतिभागियों ने विभिन्न खनन स्थितियों में सुरक्षा प्रबंधन ढांचे को लागू करने की व्यावहारिक समझ प्राप्त की। परिचालन संबंधी चुनौतियों और क्षेत्र-स्तरीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिससे प्रतिभागियों को अपनी-अपनी खानों में प्रभावी कार्यान्वयन के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने में मदद मिली।
ओडिशा और झारखंड समूह के अंतर्गत आने वाली खानों में हाल ही में हुई विद्युत दुर्घटनाओं को देखते हुए, दूसरे दिन खानों में विद्युत सुरक्षा पर एक विशेष तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। सत्र में विद्युत सुरक्षा के छह स्वर्णिम नियमों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें विद्युत कार्यों के दौरान सुरक्षित कार्यप्रणाली और खनन वातावरण में विद्युत खतरों को कम करने के उपायों पर विशेष बल दिया गया।
प्रतिभागियों ने एस.के. दत्ता द्वारा अपनाए गए व्यावहारिक और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण की सराहना की और सत्रों को अत्यधिक संवादात्मक, अनुप्रयोग-उन्मुख और दिन-प्रतिदिन के खनन कार्यों के लिए प्रासंगिक बताया।
यह कार्यशाला राजहरा स्थित माइन वेस्टिब्यूल ट्रेनिंग सेंटर (एमवीटीसी) द्वारा माइन वेस्टिब्यूल ट्रेनिंग सेंटर के प्रभारी बीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में और रांची स्थित एसएआईएल सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (एसएसओ) के सहयोग से, मुख्य महाप्रबंधक (खान) आरबी गहरवार और कार्यकारी निदेशक (खान) कमल भास्कर के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही है।
यह कार्यक्रम अब 23 से 25 जुलाई 2026 तक अपने क्षेत्रीय कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसके दौरान परिचालन स्थलों पर खान सुरक्षा प्रबंधन योजना के व्यावहारिक कार्यान्वयन और समीक्षा को सुविधाजनक बनाने के लिए डल्ली मशीनीकृत खानों, राजहारा मशीनीकृत खानों और नंदिनी चूना पत्थर खानों में स्थल-आधारित मार्गदर्शन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
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एम्स रायपुर में पेपरलेस लैब जांच प्रणाली शुरू ओपीडी मरीजों को मिलेगी तेज़ और आसान सुविधा
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर ने मरीजों को अधिक सुविधाजनक, त्वरित और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए नवीनीकृत डोम-1 फलेबोटोमी ज़ोन का शुभारंभ किया है। इसके साथ ही बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) के मरीजों के लिए पेपरलेस लैबोरेटरी टेस्ट रिक्विजिशन (प्रयोगशाला जांच अनुरोध) प्रणाली लागू कर दी गई है। इस नई सुविधा का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया।

आधारभूत संरचना के उन्नयन, केंद्रीय वातानुकूलन प्रणाली की स्थापना तथा मरीजों की सुविधाओं में विस्तार के बाद फलेबोटोमी ज़ोन को पुनः नवीनीकृत डोम-1 में स्थानांतरित किया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब बाह्य रोगी विभाग के मरीजों को प्रयोगशाला जांच के लिए प्रिंटेड पर्ची लेकर फलेबोटोमी ज़ोन आने की आवश्यकता नहीं होगी। चिकित्सक द्वारा जांच की इलेक्ट्रॉनिक अनुशंसा किए जाने के साथ ही उसकी जानकारी सीधे प्रयोगशाला सूचना प्रणाली (लेबोरेटरी इन्फॉर्मेशन सिस्टम) में दर्ज हो जाएगी। इसके बाद मरीज सीधे फलेबोटोमी काउंटर पर पहुंचकर पंजीकरण करा सकेंगे, जहां कंप्यूटर पर उपलब्ध डिजिटल विवरण के आधार पर बारकोड तैयार कर रक्त अथवा अन्य नमूनों का संग्रह किया जाएगा।

संस्थान के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था से कागजी प्रक्रिया में कमी आएगी, मरीजों का प्रतीक्षा समय घटेगा, जांच पर्ची खोने जैसी समस्याएं समाप्त होंगी तथा परामर्श से लेकर नमूना संग्रह तक की पूरी प्रक्रिया अधिक सरल, सुरक्षित और सुगम बनेगी। साथ ही यह प्रणाली जांच की सटीकता और कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ कागज की खपत कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी।
इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि एम्स रायपुर मरीजों को बेहतर, सरल और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार डिजिटल तकनीकों को अपनाने के साथ अस्पताल की आधारभूत संरचना का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए अस्पताल प्रशासन, इंजीनियरिंग विंग, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) टीम तथा प्रयोगशाला चिकित्सा विभाग के समन्वित प्रयासों की सराहना की।
एम्स रायपुर के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) डी. के. त्रिपाठी ने कहा कि पुनः प्रारंभ किया गया फलेबोटोमी ज़ोन संस्थान की डिजिटल परिवर्तन यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने बताया कि पेपरलेस लैबोरेटरी टेस्ट रिक्विजिशन प्रणाली से प्रतिदिन आने वाले हजारों बाह्य रोगी विभाग के मरीजों को तेज़, सुविधाजनक और परेशानी-मुक्त सेवाएं मिलेंगी, वहीं अस्पताल की कार्यकुशलता और मरीजों की सुरक्षा भी और मजबूत होगी।
उद्घाटन के बाद फलेबोटोमी यूनिट के प्रभारी एवं उप नर्सिंग अधीक्षक जेक्का प्रदीप कुमार ने कार्यपालक निदेशक को नई डिजिटल कार्यप्रणाली, बारकोड जनरेशन काउंटर, रक्त नमूना संग्रह क्षेत्र तथा बच्चों के लिए विकसित बाल-अनुकूल सैंपल कलेक्शन कक्ष का अवलोकन कराया। इस कक्ष में ऑडियो-वीडियो सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि बच्चों को रक्त नमूना देने के दौरान तनावमुक्त और सहज वातावरण मिल सके।
समारोह में उप निदेशक (प्रशासन) लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मवीर सिंह चौहान, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) विराट गल्होत्रा, उप चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर (डॉ.) सबाह सिद्दीकी, प्रोफेसर (डॉ.) मृत्युंजय राठौर, प्रोफेसर (डॉ.) तुषार जगजापे, डॉ. दिबाकर साहू, डॉ. रमेश चंद्राकर सहित संकाय सदस्य, नर्सिंग अधिकारी, प्रयोगशाला कर्मी तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि फलेबोटोमी से संबंधित सभी सेवाएं तत्काल प्रभाव से पुनः प्रारंभ किए गए डोम-1 फलेबोटोमी ज़ोन से संचालित की जाएंगी। प्रयोगशाला जांच कराने वाले बाह्य रोगी विभाग के मरीज अब सीधे डोम-1 स्थित फलेबोटोमी ज़ोन में पहुंचकर अपना नमूना दे सकेंगे। एम्स रायपुर ने कहा है कि संस्थान नवाचार, आधारभूत संरचना के आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से मरीजों को सुलभ, सुविधाजनक और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
कोचरब आश्रम: जहाँ बैरिस्टर मोहनदास से 'महात्मा' बनने की शुरू हुई यात्रा सत्याग्रह, सामाजिक समरसता और
सत्याग्रह, सामाजिक समरसता और आत्मानुशासन की पहली प्रयोगशाला आज भी सहेजे हुए है गांधी के विचारों की विरासत
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें साबरमती आश्रम का उल्लेख अवश्य होगा, लेकिन उससे पहले एक ऐसा आश्रम था जिसने महात्मा गांधी के विचारों, सत्याग्रह और सामुदायिक जीवन की नींव रखी। अहमदाबाद के पालडी क्षेत्र स्थित कोचरब आश्रम वह स्थान है, जहाँ दक्षिण अफ्रीका से लौटे मोहनदास करमचंद गांधी ने पहली बार अपने विचारों को व्यवहार में उतारा और यहीं से एक बैरिस्टर के 'महात्मा' बनने की ऐतिहासिक यात्रा प्रारंभ हुई।

पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर द्वारा आयोजित पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण के दौरान कोचरब आश्रम के प्रबंधक डॉ. प्रसन्ना गांधी ने बताया कि वर्ष 1915 में स्थापित यह आश्रम केवल एक निवास नहीं था, बल्कि सत्याग्रह, आत्मशुद्धि, सामुदायिक जीवन और सामाजिक सुधारों की पहली प्रयोगशाला था। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के फीनिक्स सेटलमेंट और टॉल्स्टॉय फार्म में प्राप्त अनुभवों को गांधीजी ने पहली बार भारत की धरती पर कोचरब आश्रम में साकार किया।

गोखले की सलाह के बाद चुना अहमदाबाद
9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद गांधीजी ने अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले की सलाह पर देश का व्यापक भ्रमण किया। आश्रम स्थापना के लिए उन्होंने कई स्थानों पर विचार किया, लेकिन अंततः अहमदाबाद का चयन किया। इसके पीछे प्रमुख कारण थे कि यह उनकी मातृभाषा गुजराती का प्रमुख केंद्र था, वस्त्र उद्योग का महत्वपूर्ण नगर था और यहां के उद्योगपतियों एवं व्यापारियों से राष्ट्रीय आंदोलन के लिए सहयोग मिलने की संभावना थी।
150 वर्ष पुराने बंगले से शुरू हुई सत्याग्रह की प्रयोगशाला
कोचरब आश्रम की शुरुआत गांधीजी के मित्र एवं बैरिस्टर जीवनलाल देसाई के लगभग 150 वर्ष पुराने बंगले से हुई। भवन की निचली मंजिल पर आश्रमवासियों का निवास था, जबकि ऊपरी मंजिल पर बैठकें आयोजित होती थीं। यहीं स्वतंत्रता आंदोलन की प्रारंभिक रणनीतियों पर चर्चा होती थी। आज भी यह कक्ष 'सत्याग्रह मेमोरियल हॉल' के रूप में संरक्षित है, जहाँ मूल लकड़ी का फर्श सुरक्षित रखा गया है।
वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित की गई ऐतिहासिक धरोहर
हाल के वर्षों में गुजरात सरकार ने आश्रम का संरक्षण एवं पुनर्विकास कराया। वर्ष 2022-23 में भवन की वैज्ञानिक तकनीकों से मरम्मत की गई। मूल लकड़ी, खिड़कियों, छत और दीवारों को यथासंभव सुरक्षित रखते हुए भवन को संरचनात्मक मजबूती प्रदान की गई। परिसर में आधुनिक संग्रहालय, प्रदर्शनी दीर्घाएं तथा गतिविधि केंद्र विकसित किए गए हैं, जहाँ गांधीजी के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रसंगों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
यहीं शुरू हुई अस्पृश्यता के विरुद्ध सबसे बड़ी सामाजिक लड़ाई
कोचरब आश्रम भारतीय समाज सुधार के इतिहास में भी विशेष महत्व रखता है। आश्रम की स्थापना के कुछ समय बाद गांधीजी ने एक दलित परिवार—दूधाभाई, दानीबेन और उनकी पुत्री लक्ष्मी—को आश्रम में रहने की अनुमति दी। इस निर्णय का आश्रम के कुछ सदस्यों और तत्कालीन समाज के प्रभावशाली वर्ग ने विरोध किया। आर्थिक सहायता भी बंद कर दी गई, जिससे आश्रम के समक्ष गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया।
गांधीजी अपने निर्णय पर अडिग रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आर्थिक सहायता बंद करनी है तो कर दी जाए, लेकिन समानता और मानवता के सिद्धांतों से समझौता नहीं होगा। इसी कठिन समय में उद्योगपति अंबालाल साराभाई ने आर्थिक सहयोग देकर आश्रम को संकट से उबारा।
कस्तूरबा थीं गांधीजी की सबसे बड़ी सहयोगी
डॉ. प्रसन्ना गांधी के अनुसार, आश्रम के अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में कस्तूरबा गांधी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। गांधीजी कई विषयों पर उनकी सलाह लेते थे और सामुदायिक जीवन के संचालन में उनके सुझावों का सम्मान करते थे। आश्रम में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग आवास तथा सामूहिक रसोई की व्यवस्था थी।
यहीं बने गांधीजी के 11 जीवन-व्रत
कोचरब आश्रम में गांधीजी ने आत्मशुद्धि और समाज निर्माण के लिए 11 व्रतों की व्यवस्था विकसित की। इनमें सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अस्तेय, अपरिग्रह, अस्वाद, शारीरिक श्रम, स्वदेशी, अभय, अस्पृश्यता निवारण और सर्वधर्म समभाव प्रमुख हैं। उनका मानना था कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण से ही समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है।
प्लेग के कारण साबरमती आश्रम में हुआ स्थानांतरण
वर्ष 1917 में कोचरब क्षेत्र में प्लेग फैलने के बाद गांधीजी ने आश्रम को साबरमती नदी के किनारे स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। उनका विचार था कि आश्रम ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहाँ एक ओर जेल और दूसरी ओर श्मशान हो, ताकि सत्याग्रही हर परिस्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार रहे। यही विचार आगे चलकर साबरमती आश्रम की स्थापना का आधार बना।
विचारों की विरासत से परिचित कराता संग्रहालय
आश्रम में आज भी गांधीजी के आध्यात्मिक गुरु श्रीमद राजचंद्र, राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले तथा उनके प्रेरणास्रोत लियो टॉल्स्टॉय, जॉन रस्किन और हेनरी डेविड थोरो के चित्र एवं विचार प्रदर्शित किए गए हैं। दक्षिण अफ्रीका के फीनिक्स सेटलमेंट और टॉल्स्टॉय फार्म से जुड़ी जानकारी भी संग्रहालय का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आधुनिक स्वरूप, लेकिन मूल भावना बरकरार रखने की चुनौती
पुनर्विकास के बाद कोचरब आश्रम आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हो गया है। संग्रहालय, गतिविधि केंद्र और आगंतुक सुविधाओं के माध्यम से नई पीढ़ी को गांधीजी के विचारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि हाल के दिनों में आश्रम परिसर में आयोजित एक सामाजिक समारोह को लेकर उठे विवाद ने यह प्रश्न भी खड़ा किया कि आधुनिक उपयोग और गांधीवादी सादगी के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।
आज भी उतना ही प्रासंगिक है कोचरब आश्रम
कोचरब आश्रम केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक पुनर्जागरण, सत्याग्रह और नैतिक नेतृत्व का जीवंत प्रतीक है। यदि साबरमती आश्रम ने स्वतंत्रता आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप दिया, तो उसकी वैचारिक और नैतिक नींव कोचरब आश्रम में रखी गई थी। यही कारण है कि आज भी यह आश्रम इतिहास के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
एम्स रायपुर में 59 वर्षीय व्यक्ति का अंगदान छत्तीसगढ़ के सबसे अधिक आयु के मृतक अंगदाता बने अश्विन कुमार राठौर
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर ने मृतक अंगदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 59 वर्षीय व्यक्ति के सफल अंगदान एवं प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की है। इस मानवीय पहल से एक मरीज को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है, जबकि दो अन्य मरीजों की दृष्टि बहाल करने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि रायपुर निवासी अश्विन कुमार राठौर छत्तीसगढ़ के सबसे अधिक आयु के मृतक अंगदाता बन गए हैं।
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देवेंद्र नगर निवासी अश्विन कुमार राठौर को गंभीर स्वास्थ्य समस्या के बाद एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया था। ट्रॉमा, गहन चिकित्सा इकाई (इंटेंसिव केयर यूनिट-आईसीयू) तथा न्यूरोसर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम द्वारा सभी आवश्यक उपचार किए गए, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद निर्धारित कानूनी एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं का पालन करने के उपरांत उन्हें ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत्यु) घोषित किया गया।
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इस कठिन समय में एम्स रायपुर के ट्रांसप्लांट समन्वयक विषोक एन. अम्बे पटेल एवं विनीता पटेल ने परिजनों को मृतक अंगदान के महत्व से अवगत कराया। गहरे शोक के बीच परिवार ने दोनों किडनी तथा दोनों कॉर्निया (नेत्र) दान करने का प्रेरणादायी निर्णय लिया। परिजनों ने बताया कि अश्विन कुमार राठौर ने कुछ वर्ष पहले ही परिवार के समक्ष अपनी मृत्यु के बाद अंगदान करने की इच्छा व्यक्त की थी।
अंग निकासी (ऑर्गन रिट्रीवल) के बाद चिकित्सकीय परीक्षण में एक किडनी प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं पाई गई, जबकि दूसरी किडनी का सफल प्रत्यारोपण दुर्ग निवासी 70 वर्षीय मरीज में किया गया, जो पिछले पांच वर्षों से डायलिसिस पर थे। प्रत्यारोपण के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उन्हें एम्स रायपुर के ट्रांसप्लांट आईसीयू में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। वहीं, दान किए गए दोनों कॉर्निया सुरक्षित संरक्षित कर लिए गए हैं, जिनका उपयोग राज्य की प्रतीक्षा सूची में शामिल पात्र मरीजों की दृष्टि बहाल करने के लिए किया जाएगा।
यह एम्स रायपुर में अब तक का नौवां मृतक अंगदान (डीसीज्ड ऑर्गन डोनेशन) है। संस्थान में अब तक 104 किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं, जिनमें 15 प्रत्यारोपण मृतक अंगदाताओं से प्राप्त अंगों के माध्यम से संभव हुए हैं।
एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने अंगदाता के परिजनों के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। उन्होंने कहा कि राठौर परिवार का यह निस्वार्थ निर्णय समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आने के लिए प्रेरित होंगे।
नेफ्रोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनय राठौर तथा यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अमित आर. शर्मा ने कहा कि अधिक आयु के मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सकीय एवं शल्य चिकित्सा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यह सफल प्रत्यारोपण इस तथ्य का प्रमाण है कि जीवन बचाने में आयु बाधा नहीं बनती।
पूरी प्रत्यारोपण प्रक्रिया को यूरोलॉजी विभाग, नेफ्रोलॉजी विभाग तथा एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस अभियान में ट्रॉमा आईसीयू, आपातकालीन चिकित्सा, न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग विभाग, नर्सिंग सेवाओं तथा राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन-एसओटीटीओ), छत्तीसगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगठन ने राज्य की प्रतीक्षा सूची के अनुसार अंग आवंटन की पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया।
भिलाई इस्पात संयंत्र में प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) द्वारा विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से अलंकृत लोककला की अप्रतिम साधिका तथा संयंत्र की पूर्व कर्मी तीजन बाई की स्मृति में इस्पात भवन के सभागार में एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी सभा में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दिवंगत लोक कलाकार को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए भारतीय लोकसंस्कृति तथा पंडवानी परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान को अत्यंत आदर के साथ स्मरण किया। इस शोक सभा में मुख्य रूप से कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार, महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) श्री अमूल्य प्रियदर्शी, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) श्री संजय द्विवेदी सहित क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं, संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क तथा मानव संसाधन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, ओजस्वी प्रस्तुति और विशिष्ट पंडवानी शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को अपनी जीवंत कला से प्रस्तुत करने वाली तीजन बाई की कला सदैव अमर रहेगी और उनका अवसान भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वहीं महाप्रबंधक प्रभारी (संपर्क, प्रशासन एवं जनसंपर्क) श्री अमूल्य प्रियदर्शी ने उनके जीवन को कला-साधना, संघर्ष और समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में मुंबई के एक फिल्मकार द्वारा उनके जीवन और कृतित्व पर एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री बनाई जा रही है, जो इस बात का जीवंत प्रमाण है कि उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी निरंतर प्रेरित करती रहेगी।

श्रद्धांजलि सभा के दौरान ओलंपियन एवं उप महाप्रबंधक (क्रीड़ा, सांस्कृतिक एवं नागरिक सुविधाएं) श्री राजेन्द्र प्रसाद ने भिलाई इस्पात संयंत्र में तीजन बाई के कार्यकाल के दौरान की पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने उनके अत्यंत सरल व्यक्तित्व, कला के प्रति अटूट निष्ठा तथा संयंत्र परिवार से उनके गहरे व आत्मीय जुड़ाव को याद किया। कार्यक्रम का संचालन श्री सुप्रियो सेन द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने तीजन बाई के जीवन वृत्त और उनकी कला यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। सभा के अंत में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दिवंगत पुण्यात्मा को विनम्र विदाई देते हुए उनके सम्मान में दो मिनट का मौन धारण किया और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
रावघाट रेलखंड पर तकनीकी ट्रायल शुरू यात्री ट्रेन संचालन की दिशा में बड़ा कदम
दल्लीराजहरा - रावघाट रेल परियोजना ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। रावघाट रेलखंड पर 17 जून 2026 को नियंत्रित गति और सीमित भार के साथ तकनीकी ट्रायल शुरू किया गया। परीक्षण के दौरान 58 बॉक्स एन (बीओएक्सएन) वैगनों वाली मालगाड़ी रेक का उपयोग किया गया। यह ट्रायल आगामी दिनों में विभिन्न चरणों में जारी रहेगा, जिसके माध्यम से रेल लाइन की परिचालन क्षमता, संरचनात्मक सुरक्षा तथा तकनीकी मानकों का आकलन किया जाएगा। इस प्रगति के साथ बहुप्रतीक्षित रावघाट रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।

लगभग 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना का विकास भारतीय रेलवे और सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के संयुक्त प्रयासों से किया जा रहा है। वर्ष 2008 में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद प्रारंभ हुई यह परियोजना केवल लौह अयस्क परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना के रूप में उभरी है। परियोजना के तहत सेल द्वारा अब तक रेल लाइन निर्माण पर लगभग 1,800 करोड़ रुपये तथा रावघाट परियोजना के समग्र विकास पर करीब 2,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। नक्सल प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों से होकर गुजरने के कारण इस परियोजना का निर्माण चुनौतीपूर्ण रहा है।

परियोजना के अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। वर्तमान में रावघाट स्टेशन भवन, यात्री सुविधाओं तथा सिग्नलिंग एवं दूरसंचार प्रणाली से संबंधित कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2026 के अंत तक स्टेशन परिसर के शेष कार्य भी पूरे होने की संभावना है। इसके बाद रेल संरक्षा आयुक्त (कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) द्वारा निरीक्षण एवं सुरक्षा स्वीकृति की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार तकनीकी ट्रायल का उद्देश्य रेलखंड की परिचालन तैयारियों का परीक्षण करना है। विभिन्न गति और भार परिस्थितियों में परीक्षण सफल रहने तथा आवश्यक अनुमतियां प्राप्त होने के बाद रेल संरक्षा आयुक्त की स्वीकृति ली जाएगी। इसके उपरांत इस रेलखंड पर यात्री ट्रेन संचालन का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा, जिसका बस्तर क्षेत्र के लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
परियोजना का सकारात्मक प्रभाव पहले ही दिखाई देने लगा है। वर्ष 2022 में दल्लीराजहरा से तरोकी तक यात्री रेल सेवा शुरू होने के बाद क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के बेहतर अवसर उपलब्ध हुए हैं। रावघाट तक रेल संपर्क स्थापित होने के बाद इन सुविधाओं का दायरा और विस्तृत होगा तथा बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों की पहुंच राज्य और देश के प्रमुख शहरों तक अधिक सुगम एवं तेज हो सकेगी।
भिलाई इस्पात संयंत्र में महिला संविदा कर्मियों के लिए नई चेतना कार्यशाला स्वास्थ्य सुरक्षा और अधिकारों पर दिया गया प्रशिक्षण
भिलाई इस्पात संयंत्र के नगर सेवाएं विभाग द्वारा महिला संविदा कर्मियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा, कल्याण और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को टाउनशिप सर्विसेज विभाग के कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘नई चेतना’ जागरूकता एवं सशक्तिकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाप्रबंधक प्रभारी (टाउनशिप सर्विसेज विभाग एवं कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) श्री ए. बी. श्रीनिवास ने किया।
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अपने संबोधन में श्री श्रीनिवास ने महिला संविदा कर्मियों द्वारा भिलाई टाउनशिप की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण में निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि कार्य के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है तथा सभी कर्मियों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए।
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कार्यशाला में महिला स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, कानूनी अधिकार, उचित मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम) से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) सुश्री शुभश्री प्रशांत ने महिला स्वास्थ्य, संतुलित पोषण और व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, उप प्रबंधक (जनसंपर्क) सुश्री शालिनी चौरसिया ने पॉश अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों और कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों की जानकारी दी। श्री राजेश मौर्य ने संविदा कर्मियों के कानूनी अधिकारों, उचित पारिश्रमिक और श्रम संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के समापन सत्र में महाप्रबंधक (टाउनशिप सर्विसेज विभाग-लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी) सुश्री के. सुपर्णा ने योग एवं ध्यान सत्र का संचालन किया, जिसमें महिला कर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यशाला का संचालन उप प्रबंधक (मानव संसाधन, टाउनशिप सर्विसेज विभाग) सुश्री के. संगीता ने किया।कार्यशाला का उद्देश्य महिला संविदा कर्मियों को स्वास्थ्य, सुरक्षा और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाकर उनके आत्मविश्वास एवं कार्यस्थल पर सशक्त सहभागिता को बढ़ावा देना था।
युवा संगम के प्रतिनिधियों से मिले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान युवाओं से जॉब क्रिएटर बनने का किया आह्वान
एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित ‘युवा संगम’ फेज़-6 के तहत छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस पहल का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, राष्ट्रीय एकता और आपसी समझ को सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री विनीत जोशी भी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए युवाओं को ज्ञान, नवाचार और नेतृत्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य तथा राज्य गीत ‘अरपा पैरी के धार’ की प्रस्तुति देकर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को उपस्थित गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों ने सराहा।

संवाद सत्र के दौरान दिल्ली और छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी यात्राओं के अनुभव साझा किए। दिल्ली के प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ भ्रमण के दौरान राजभवन, भोरमदेव मंदिर, सिरपुर, राजिम, भिलाई इस्पात संयंत्र तथा अन्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए राज्य की समृद्ध परंपराओं, आतिथ्य और विकासात्मक उपलब्धियों की प्रशंसा की।
वहीं, छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने दिल्ली प्रवास के दौरान उपराज्यपाल कार्यालय में हुई मुलाकातों तथा राष्ट्रपति संग्रहालय, इंडिया गेट, कर्तव्य पथ, अक्षरधाम मंदिर, राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र और दिल्ली हाट के भ्रमण को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया। प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर सहित विभिन्न प्रेरक व्यक्तित्वों से हुई मुलाकातों को भी अपने अनुभवों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
युवा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने युवाओं से केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उद्यमिता, नवाचार और नेतृत्व 21वीं सदी के भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए ऐसे उत्पाद और सेवाएं विकसित करनी चाहिए, जो भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उपयोगी साबित हों। उन्होंने नवाचार, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग करने, नवाचार को अपनाने तथा ज्ञान, प्रौद्योगिकी और सतत विकास के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के उपनिदेशक (ऑपरेशंस) प्रोफेसर अरविंद के. नेमा, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव श्री श्रेयांश मोहन, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) के विनियमन ब्यूरो के निदेशक श्री नरेश कुमार ग्रोवर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सलाहकार श्री सुरेंद्र नाइक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली की प्रोफेसर यामा दीक्षित, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के नोडल अधिकारी डॉ. कृष्ण मुरारी तथा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल से जुड़े अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
‘युवा संगम’ कार्यक्रम देश के युवाओं के बीच सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रभावी मंच बनकर उभर रहा है।
ईपीएफओ की छत्तीसगढ़ क्षेत्र की क्षेत्रीय समिति की 27वीं बैठक रायपुर में संपन्न हुई
उद्योगों में आकस्मिक मृत्यु के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने और निष्क्रिय खातों के लाभार्थियों की पहचान करके समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। जिला स्तर पर 'निधि आपके निकट' कार्यक्रम के विस्तार पर जोर दिया गया है।

बैठक के दौरान, छत्तीसगढ़ ईपीएफओ के कामकाज, पीएफ ग्राहकों और सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा लाभों की उपलब्धता, साथ ही रायपुर कार्यालय द्वारा राज्य भर में पीएफ अधिनियम के अनुपालन को सुनिश्चित करने में प्राप्त उपलब्धियों और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त-द्वितीय श्री गौरव डोगरा ने उपस्थित सदस्यों के समक्ष संगठन की हालिया प्रगति और रणनीतिक पहलों को उजागर करते हुए एक व्यापक पावरपॉइंट प्रस्तुति दी।

उद्योगों में होने वाली आकस्मिक मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए श्रम सचिव श्री हिम शिखर गुप्ता ने निर्देश दिया कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के समन्वय से ऐसे मामलों में तत्काल प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ईपीएफओ के निष्क्रिय खातों के संबंध में सख्त निर्देश जारी किए और इस बात पर जोर दिया कि इन खातों के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जानी चाहिए ताकि उनके भुगतान शीघ्रता से किए जा सकें। छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में हर महीने की 27 तारीख को आयोजित होने वाले 'निधि आपके निकट' कार्यक्रम की पहुंच बढ़ाने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि जिला कलेक्टर, ईएसआईसी, सहायक श्रम आयुक्त (एएलसी), केंद्रीय श्रम आयुक्त (सीएलसी) और संबंधित राज्य सरकारी विभागों को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।
क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त-I और सदस्य सचिव श्री जयवदन इंगले ने समिति को भविष्य निधि कवरेज की प्रगति, अदालती मामलों के त्वरित निपटारे और भारत सरकार की प्रशंसित 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' के कार्यान्वयन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कर्मचारी पंजीकरण योजना 2025, प्रयास, तत्पर, अभिसरण बैठकें और नई साइट परियोजना जैसी अन्य महत्वपूर्ण पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित नियोक्ता और कर्मचारी प्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में पीएफ सदस्यों और नियोक्ताओं को इन कल्याणकारी कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की ताकि उनकी शिकायतों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बैठक के दौरान हुई त्रिपक्षीय चर्चा छत्तीसगढ़ में पात्र श्रमिकों और श्रमिकों को सशक्त सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय श्रम उप आयुक्त श्री बिधान चंद्र नायक और ईएसआईसी के उप निदेशक श्री एन.के. पटनायक और श्री रत्नेश राजन्या उपस्थित थे। नियोक्ता प्रतिनिधियों में छत्तीसगढ़ उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री महेश कक्कड़ और उर्ला उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री अश्विन गर्ग शामिल थे। कर्मचारियों के हितों का प्रतिनिधित्व श्री राधेश्याम जायसवाल, श्री ईश्वर चंदेल, श्री शंखध्वनि सिंह और श्री एच.एस. मिश्रा ने किया। ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की ओर से क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त-प्रथम श्री जयवदन इंगले के साथ क्षेत्रीय पीएफ आयुक्त-द्वितीय श्री गौरव डोगरा और श्री देबाशीष चंद तथा सहायक पीएफ आयुक्त श्री आकाश अग्रवाल भी उपस्थित थे।
भिलाई इस्पात संयंत्र में अत्याधुनिक एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल लैब का शुभारंभ तकनीकी दक्षता बढ़ाने फर्स्ट पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
भिलाई इस्पात संयंत्र के मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास केंद्र में स्थापित अत्याधुनिक एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल लैब में प्रशिक्षण गतिविधियों का औपचारिक शुभारंभ “इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रिकल फंडामेंटल्स” विषय पर आयोजित प्रथम पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ किया गया। यह पहल संयंत्र में व्यावहारिक तकनीकी प्रशिक्षण को नई दिशा देने तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और कार्यकुशलता को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विभिन्न विभागों के कर्मियों की तकनीकी क्षमता, परिचालन उत्कृष्टता तथा कार्य दक्षता को और अधिक विकसित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित विशेष प्रशिक्षण श्रृंखला के तहत यह पहला पायलट कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) श्री प्रबीर कुमार सरकार विशेष रूप से उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल लैब की स्थापना उनके मार्गदर्शन में की गई है। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षण संकाय सदस्य तथा प्रतिभागी भी मौजूद रहे।

औद्योगिक विद्युत प्रणालियों की मजबूत आधारभूत समझ विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को विद्युत शक्ति के मूल सिद्धांत, मोटर नियंत्रण तकनीक, विद्युत मापन उपकरणों तथा ट्रबलशूटिंग प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में विद्युत सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल मल्टीमीटर, क्लैम्प मीटर, डायोड, थाइरिस्टर, इंसुलेटेड गेट बाइपोलर ट्रांजिस्टर, इंडक्शन मोटर, स्टार-डेल्टा स्टार्टर तथा वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक विषयों को शामिल किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषता इसका व्यापक प्रायोगिक सत्र रहा, जिसमें प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक प्रशिक्षण उपकरणों पर प्रत्यक्ष अभ्यास का अवसर प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वोल्टेज एवं करंट मापन, डायोड और थाइरिस्टर परीक्षण, मोटर स्टार्टिंग डायनेमिक्स के अध्ययन तथा वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव नियंत्रित मोटर प्रणालियों के संचालन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। इस प्रयोगात्मक प्रशिक्षण ने सैद्धांतिक ज्ञान और वास्तविक औद्योगिक अनुप्रयोगों के बीच की दूरी को कम करते हुए सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन-ज्ञानार्जन एवं विकास) श्री संजीव कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि एडवांस्ड इलेक्ट्रिकल लैब भविष्य में संयंत्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए तकनीकी कौशल विकास का महत्वपूर्ण केंद्र सिद्ध होगी तथा आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
संतुलित उर्वरक उपयोग और जैव संसाधन केंद्रों से टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा आईसीएआर एनआईबीएसएम
संतुलित उर्वरक उपयोग और जैव-संसाधन केंद्रों के माध्यम से टिकाऊ खेती पर जोरआईसीएआर-एनआईबीएसएम संस्थान में किसान उत्पादक संगठन सदस्यों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन (प्रदान) के सहयोग से गुरुवार को संस्थान परिसर में “किसान उत्पादक संगठन सदस्यों के लिए उर्वरकों के दक्ष उपयोग एवं जैव-संसाधन केंद्रों के प्रोत्साहन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) सदस्यों को संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था, ताकि मृदा स्वास्थ्य में सुधार के साथ फसल उत्पादकता को बढ़ाया जा सके।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोटा एवं तिल्दा विकासखंडों के लगभग 30 किसान उत्पादक संगठन सदस्यों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी. के. राय ने टिकाऊ कृषि विकास के लिए उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, पर्यावरण अनुकूल तकनीकों तथा वैज्ञानिक मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व पर बल दिया।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय फैलोशिप एवं ग्रामोदय मिशन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी ने कार्यक्रम का समन्वय किया, जबकि सह-समन्वयक के रूप में डॉ. प्रियंका मीणा ने सहयोग प्रदान किया।
तकनीकी सत्रों में विभिन्न कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने जैव उर्वरकों, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा पोषक तत्व प्रबंधन की प्रभावी तकनीकों पर व्याख्यान दिए। इनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान के डॉ. अनिल गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रिसैट) के डॉ. पुरुषोत्तम, राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (एनआईपीएचएम), हैदराबाद की डॉ. श्रीलता, विश्वभारती विश्वविद्यालय के डॉ. एस. के. शर्मा तथा डॉ. अर्का प्रवा शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में जैव-संसाधन केंद्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर पोषक तत्व प्रबंधन एवं मृदा उर्वरता से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की।
व्यावहारिक प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को संस्थान के कृषि फार्म स्थित मूंग फसल क्षेत्र का भ्रमण कराया गया, जहां वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इस भ्रमण में किसान उत्पादक संगठन सदस्यों ने विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम का समापन सहभागियों से प्राप्त सुझावों एवं प्रशिक्षण सामग्री वितरण के साथ हुआ।
भिलाई इस्पात संयंत्र ने आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करने के लिए कोक ओवन गैस रिसाव पर सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा विगत दिनों में रोल टर्निंग शॉप (RTS) विभाग के फोर्जिंग एवं ब्रेजिंग सेक्शन में संभावित कोक ओवन गैस रिसाव आपदा की स्थिति से निपटने हेतु सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में संयंत्र के कर्मियों की त्वरित एवं सुरक्षित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना तथा विभागीय आपदा प्रबंधन तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।

मॉक ड्रिल के दौरान महाप्रबंधक (RTS) श्री एस. के. गुप्ता ने मुख्य नियंत्रक के रूप में संपूर्ण अभ्यास का नेतृत्व एवं पर्यवेक्षण किया। अभ्यास के अंतर्गत कोक ओवन गैस रिसाव की एक काल्पनिक आपात स्थिति निर्मित की गई थी, जिसके माध्यम से कर्मचारियों एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों ने नियंत्रित परिस्थितियों में समन्वित बचाव एवं सुरक्षा उपायों का सफलतापूर्वक अभ्यास किया।

इस मॉक ड्रिल के सफल संचालन में विभिन्न विभागों एवं सुरक्षा एजेंसियों की सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग महत्वपूर्ण रहा। इस कार्यक्रम में अग्निशमन सेवा विभाग से अतिरिक्त मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री संजय धवस, गैस सेफ्टी विभाग से श्री विजय देवांगन, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) से श्री एस. के. पाण्डेय, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग से श्री के. आर. साहू, सहायक महाप्रबंधक एवं विभागीय सुरक्षा अधिकारी (RSM) श्री सुनील शुक्ला, मानव संसाधन (मिल्स जोन-2) से सुश्री अनुराधा साहा, सिविल डिफेंस से श्री स्वतंत्र कुमार सहित आरटीएस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
मॉक ड्रिल के उपरांत एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय तथा अपनाई गई सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों द्वारा कार्यस्थल सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भविष्य में और अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव एवं अवलोकन भी साझा किए गए। यह मॉक ड्रिल भिलाई इस्पात संयंत्र की कार्यस्थल सुरक्षा, आपदा प्रबंधन क्षमता एवं सतत सुरक्षा सुधार के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने बिलासपुर में रोजगार मेला कार्यक्रम में की सहभागिता एवं मोबाइल फोरेंसिक वैन-सीन ऑफ क्राइम मोबाइल यूनिट का शुभारंभ
रोजगार सृजन एवं आधुनिक पुलिस व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार प्रतिबद्ध : श्री तोखन साहू*


एचएनएलयू ने शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ताइवान के नेशनल ची नान यूनिवर्सिटी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU), रायपुर ने ताइवान के नेशनल ची नान यूनिवर्सिटी (NCNU) के साथ एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर का उद्देश्य दोनों अग्रणी संस्थानों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना है। इस समझौते को ताइवान में एनसीएनयू (NCNU) परिसर में निष्पादित और हस्ताक्षरित किया गया, जो सीमा पार शैक्षणिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक क्षण है।
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इस ऐतिहासिक अवसर पर बोलते हुए, एचएनएलयू के कुलपति प्रो. विवेकानंदन ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन विभिन्न अंतर-विषयक क्षेत्रों (interdisciplinary areas) में दोनों संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग को प्रभावी ढंग से सुगम बनाएगा। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि यह संयुक्त साझेदारी भारत और ताइवान के बीच समग्र शैक्षणिक और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस सहयोग पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, नेशनल ची नान यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. डोंग-सिंग वू ने इस समझौते के अनूठे तालमेल पर प्रकाश डाला। पृष्ठभूमि से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर होने के नाते, डॉ. वू ने भारत के एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (National Law University) के साथ एक शैक्षणिक समझौते पर हस्ताक्षर करने पर गहरी खुशी व्यक्त की और अपनी आशावादिता साझा की कि यह साझेदारी विशेष रूप से कानून और आधुनिक तकनीक को जोड़ने वाले क्षेत्रों व विषयों में अधिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।
यह नवनिर्मित संस्थागत ढांचे के तहत निरंतर शैक्षणिक विनिमय कार्यक्रमों के साथ-साथ सहयोगात्मक अनुसंधान पहलों को व्यवस्थित रूप से सुगम बनाने का प्रयास करता है। यह संयुक्त सम्मेलनों, सेमिनारों और विशेष तकनीकी कार्यशालाओं को संचालित करने के लिए संस्थागत सहयोग को भी रेखांकित करता है। इसके अलावा, यह समझौता संकाय (फैकल्टी) और छात्र गतिशीलता कार्यक्रमों, सीमा पार शैक्षणिक साझेदारियों और तुलनात्मक अनुसंधान के लिए मजबूत अवसरों के संरचनात्मक विकास को सुनिश्चित करता है। यह अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन एचएनएलयू के अपने वैश्विक शैक्षणिक पदचिह्न को व्यापक रूप से विस्तारित करने के चल रहे संस्थागत प्रयासों में एक और प्रगतिशील कदम है। इस सहयोग के माध्यम से, विश्वविद्यालय सार्थक अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों का निर्माण करना जारी रखे हुए है जो समकालीन अनुसंधान गतिशीलता और वैश्विक शैक्षिक प्राथमिकताओं के सीधे अनुरूप हैं।
चिरमिरी में राममय हुआ वातावरण, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रीराम कथा में लिया आशीर्वाद जगदगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज से छत्तीसगढ़ की खुशहाली और विकास की कामना की
एमसीबी, 21 मई 2026/* मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज एमसीबी जिले के चिरमिरी में आयोजित नव दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रख्यात संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और विकास के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।


पश्चिम बंगाल में विकास के नए युग की शुरुआत: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने श्री सुवेंदु अधिकारी को दी बधाई एवं शुभकामनाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कोलकाता में शपथ ग्रहण समारोह में हुए शामिल
रायपुर 9 मई 2026/ पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब श्री सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लंबे समय से परिवर्तन की प्रतीक्षा कर रही जनता की आशाओं को नई दिशा मिली और पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का सपना साकार हुआ।
एमसीबी जिले में 56 सड़कों के लिए 236.61 करोड़ स्वीकृत, 264.63 किमी सड़क निर्माण से बदलेगी तस्वीर
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले सहित पूरे राज्य में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेज–04 के अंतर्गत सड़कों के निर्माण कार्यों का शिलान्यास एवं शुभारंभ कार्यक्रम 17 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस योजना के तहत राज्य में कुल 774 सड़कों को स्वीकृति मिली है, जिनकी कुल लंबाई 2,426.875 किलोमीटर है। इन कार्यों के लिए 2,225.44 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे

ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा मजबूत होगी और विकास को गति मिलेगी। वहीं, जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के अंतर्गत 56 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिनकी कुल लंबाई 264.63 किलोमीटर है। इन परियोजनाओं के लिए 236.61 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह कार्यक्रम 17 अप्रैल 2026 को प्रातः 11 बजे स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय ऑडिटोरियम, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित होगा, जहां जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में विकास कार्यों की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही, स्थानीय लोगों को आवागमन में होने वाली समस्याओं से भी राहत मिलेगी।
भीषण गर्मी का असर — स्कूल बंद करने का बड़ा फैसला! छत्तीसगढ़ सरकार का आदेश अब 20 अप्रैल से ही स्कूलों में छुट्टी
रायपुर, 16 अप्रैल 2026:छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू को देखते हुए बड़ा फैसला लिया है। जारी आदेश के अनुसार अब प्रदेश के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश पहले से तय समय से पहले लागू किया जाएगा।













