बी.टी. एक्ट 1949 को निरस्त करने की मांग को लेकर बौद्ध समाज ने महारैली का आयोजन किया
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में आज बौद्ध समाज ने एक विशाल महारैली निकालकर बोधगया के ऐतिहासिक महाबोधि महाविहार की मुक्ति और बी.टी. एक्ट 1949 को निरस्त करने की पुरज़ोर माँग की। इस शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली आंदोलन ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा।।

दुर्ग की सड़कों पर आज इतिहास की पुकार गूंज उठी।सफेद वस्त्रों में शांतिपूर्वक रैली निकालते ये लोग कोई आम प्रदर्शनकारी नहीं ये हैं बौद्ध समाज के वो जागरूक नागरिक,जो अब अपने अधिकारों और धार्मिक सम्मान के लिए एकजुट होकर आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। बैनरों और पंचशील ध्वज के साथ रैली दुर्ग के प्रमुख चौक-चौराहों से होती हुई कलेक्ट्रेट पहुँची,जहाँ समाज के प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। और कहाकि बोधगया का महाबोधि महाविहार बौद्धों को सौंपा जाए, क्योंकि यह बुद्ध भूमि है, बौद्धों की आस्था का केंद्र है। बी.टी. एक्ट 1949 अन्यायपूर्ण है और इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए। इस महारैली का आयोजन ऑल इंडिया बुद्धिस्ट फोरम छत्तीसगढ़ और दुर्ग, भिलाई, कुम्हारी, चरोदा समेत समस्त बौद्ध संगठनों ने मिलकर किया।सभी का कहना है की केंद्र और राज्य सरकारें बौद्धों की न्यायोचित मांगों की अनदेखी कर रही हैं, इसलिए देशभर में आंदोलन तेज़ किए जा रहे हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि बौद्धों को उनका धार्मिक अधिकार दिया जाए और जो लोग बौद्ध समाज पर अत्याचार करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।।

















