जीएसटी तर्कसंगतता मिजोरम में विकास की वृद्धि समृद्धि का निर्माण
पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग ने जूस और कॉन्सन्ट्रेट उत्पादन में उद्यमशीलता के नए अवसर पैदा किए हैं। इससे किसानों और महिला समूहों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो रहे हैं।
प्रसंस्कृत फल उत्पादों पर जीएसटी को 12-18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से पैशन फ्रूट जूस और संबद्ध उत्पाद अधिक किफायती और विपणन योग्य हो जाएंगे। इस सुधार से छोटे पैमाने पर प्रसंस्करण इकाइयों के विकास को प्रोत्साहित करने, स्थानीय नौकरियां पैदा करने और मिजोरम को स्वास्थ्य-उन्मुख फल पेय पदार्थों की बढ़ती राष्ट्रीय मांग को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बांस और बेंत शिल्प
बांस मिजोरम की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्य का लगभग 51 प्रतिशत भूमि क्षेत्र बांस से ढका हुआ है। यह राज्य के हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों की रीढ़ है। फर्नीचर और घरेलू सजावट से लेकर टोकरियों और उपयोगी उत्पादों तक, बांस और बेंत के शिल्प मिजो कारीगरों की रचनात्मकता और स्थिरता दोनों को दर्शाते हैं।
ये शिल्प ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और राज्य भर में युवाओं के रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र को डिजाइन, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन में सुधार के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के तहत समर्थन प्राप्त हो रहा है। इससे कारीगरों को व्यापक घरेलू और निर्यात बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।
जीएसटी के नए ढांचे के तहत बांस के फर्नीचर और सभी बांस या बेंत हस्तशिल्प उत्पादों पर अब 5 प्रतिशत की एक समान दर से कर लगाया जाता है, जो पहले के उच्च स्लैब से कम है। कम दर बांस उत्पादों को अधिक किफायती बनाएगी, घरेलू मांग को प्रोत्साहित करेगी और राष्ट्रीय हस्तशिल्प बाजार में मिजोरम की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी। भारत के बांस उद्योग का मूल्य लगभग 24,000 करोड़ रुपये (2019 में) है। यह सुधार मिजोरम के कारीगरों के लिए नए अवसर खोलता है, हरित आजीविका और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देता है।
पर्यटन और आतिथ्य
पर्यटन का क्षेत्र मिजोरम में विकास और रोजगार के एक प्रमुख इंजन के रूप में तेजी से उभर रहा है। सुंदर पहाड़ियों, हरे-भरे जंगलों और एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध यह राज्य खुद को इको-टूरिज्म और साहसिक यात्रा के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है। मिजो संस्कृति की गर्मजोशी और आतिथ्य को दर्शाते शांत परिदृश्यों, पारंपरिक त्योहारों और समुदाय-आधारित होमस्टे की ओर आगंतुक काफी आकर्षित होते हैं।
वर्ष 2014-15 के एक सरकारी सर्वेक्षण में राज्य में 161 आवास इकाइयों में काम करने वाले 4,038 कर्मचारियों की पहचान की गई, जो आजीविका के स्रोत के रूप में पर्यटन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। वर्ष 2023-24 में मिजोरम में 2,15,265 घरेलू और 3,884 विदेशी पर्यटक आए थे। यह क्षेत्र होटल, टूर ऑपरेशन, हस्तशिल्प, खाद्य सेवाओं और परिवहन के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से रोजगार पैदा करता है।
होटलों में 7,500 रुपये तक के कमरों पर अब केवल 5 प्रतिशत कर लगाया गया है। यह कर सुधार सेवा प्रदाताओं के लिए कम इनपुट लागत के साथ ही आगंतुकों के लिए मिजोरम की यात्रा को और अधिक किफायती बना देंगे। इस कदम से पर्यटन को प्रोत्साहित करने, आतिथ्य क्षेत्र में स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण और शहरी केंद्रों में युवाओं के लिए समान रूप से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
जीएसटी सुधार मिजोरम की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ प्रदान करते हैं। इसमें जीआई-टैग वाली मिजो मिर्च और मसालों की खेती करने वाले किसानों से लेकर बांस के फर्नीचर बनाने वाले कारीगरों और पर्यटन क्षेत्र के उद्यमी शामिल हैं। कम कर दरों से लागत कम होगी, घरेलू खपत को बढ़ावा मिलेगा और व्यापक बाजारों में मिजोरम के प्राकृतिक और हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।
ये सुधार कृषि-प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और इको-टूरिज्म में नए अवसरों के साथ पारंपरिक शक्तियों को जोड़कर आजीविका को बनाए रखने, मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने और समावेशी और सतत विकास की दिशा में मिजोरम का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

















