कोरिया जिले में प्रभारी रेंजरों का दबदबा बरकरार, मनेद्रगढ़ वनमण्डल की भी हालत नाजुक
कोरिया / छत्तीसगढ़
आपको बता दे बिहारपुर प्रभारी रेंजर जिनका नौकरी सिर्फ 3 साल बचा हुआ है अगर देखा जाए तो वो अपने नौकरी के दौरान रेंजर नही बन सकते हैं लेकिन भगवान की ऐसी असीम कृपा है कि सिस्टम को दरकिनार करते हुए उन्हे प्रभारी रेंजर बिहारपुर के रुप में बैठा दिया गया है। कहते हैं पढ़ाई से ज्यादा लड़ाई में वो एक्सपर्ट हैं। आखिर ऐसी कौन सी जड़ी बूटी है प्रभारियों के पास जिसने शासन को भी पंगु बना दिया है। प्रभारी रेंजर का कहना है कि मीडिया और पेपर में लिखने से क्या होगा छापते रहो, हम वही करेंगे जो करने के लिए बैठाया गया है। और वैसा ही हो रहा है पेपर में तो छप रहा लेकिन अधिकारियों और शासन को कोई फर्क नहीं पड़ता है जो गरीब मजदूरों के खाता में जाना चाहिए उन्हे प्रभारियों द्वारा अपनी कमाई कर गरीब मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। जो जॉच का विषय है। एक उदाहरण बिहारपुर रेंज में तालाब निर्माण का बोर्ड कार्यस्थल पर लगाया गया लेकीन चुंकी प्रभारी रेंजर हैं और वो अपनी लढाई पद्धति से बोर्ड पर स्वीकृति राशि, व्यय राशि तथा शेष राशि का जिक्र नहीं किए। यही खेल मनेंद्रगढ़ वनमण्डल में खेलकर गरीब मजदूरों के हक पर खुलेआम डकैती डाला जा रहा है।

















