आगामी समय में शिक्षकों को एआई से बेहतर समझाने की कला सीखनी होगी: प्रो. एस. के. पांडेय
रायपुर, 23 फरवरी 2026।शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में रूसा 2.0 (प्रिपरेटरी ग्रांट) के अंतर्गत रायपुर संभाग के विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों हेतु “कम्प्यूटर आधारित मटेरियल/नैनोमटेरियल नवाचार” विषय पर आयोजित एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ उत्साहपूर्वक हुआ। आयोजन समिति सदस्य डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि यह प्रशिक्षण 23 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा राज्य परियोजना कार्यालय, रूसा, छत्तीसगढ़ के सहयोग से किया जा रहा है। रायपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों से भौतिकी, रसायन, गणित एवं अन्य विज्ञान विषयों के प्राध्यापक इस प्रशिक्षण में सहभागिता कर रहे हैं।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. एस. के. पांडेय, पूर्व कुलपति पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने अपने संबोधन में कहा कि उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं चैट जीपीटी जैसी आधुनिक तकनीकों से भी बेहतर विषय को सरल, प्रभावी और मानवीय तरीके से समझाने की कला विकसित करनी होगी। उनके अनुसार तकनीक सहायक हो सकती है, परंतु शिक्षक की सृजनात्मकता और संवाद कौशल ही शिक्षा को जीवंत बनाते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. तपेश चन्द्र गुप्ता ने की। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय सदैव शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को समृद्ध करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से शिक्षकों को न केवल विषयवस्तु की गहरी समझ मिलती है, बल्कि वे नवीन तकनीकों और शोधोन्मुखी दृष्टिकोण से भी परिचित होते हैं। प्राचार्य ने रुसा 2.0 और उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और समर्थन से ही महाविद्यालय में इस तरह के उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम संभव हो पाए हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस अवसर का पूर्ण लाभ उठाएँ और सीखने की प्रक्रिया को अपने संस्थानों तक प्रभावशाली तरीके से पहुँचाएँ।
विशिष्ट अतिथि डॉ. एम. एस. गुप्ता, संयुक्त संचालक, रूसा छत्तीसगढ़ ने कहा कि रूसा 2.0 का उद्देश्य संस्थानों में अधोसंरचना एवं अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है तथा यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया।
नोडल अधिकारी डॉ. मोहन लाल वर्मा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, अनुप्रयुक्त भौतिकी विभाग, श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैंपस, भिलाई ने बताया कि कम्प्यूटर आधारित शोध और सिमुलेशन आधुनिक विज्ञान का आधार बन चुके हैं।
कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. अखिलेश जाधव ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि आगामी दिनों में मटेरियल साइंस एवं नैनोमटेरियल से संबंधित विभिन्न तकनीकी सत्र, कार्यशालाएँ एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।

आयोजन समिति सदस्य डॉ. लखपति पटेल नेे कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रशिक्षण में विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन सत्र भी शामिल किए गए हैं, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।
उद्घाटन सत्र के पश्चात प्रथम तकनीकी सत्र डॉ. मोहन लाल वर्मा द्वारा आयोजित किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र के चेयरपर्सन डॉ. कविता ठाकुर और रिपोर्टर डॉ. प्रतिभा साहू रहे। उन्होंने डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी आधारित सिएस्ता सॉफ्टवेयर के माध्यम से मटेरियल अध्ययन” विषय पर व्याख्यान दिया। अपने प्रस्तुतीकरण में उन्होंने बताया कि सिएस्ता सॉफ्टवेयर पैकेज किस प्रकार डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी का उपयोग कर ऊर्जा पदार्थों का अध्ययन करता है। उन्होंने डेंसिटी फंक्शनल थ्योरी की मूलभूत अवधारणाओं तथा उसके विभिन्न अनुप्रयोगों को सरल भाषा में समझाया। डॉ. वर्मा ने नैनोमटेरियल के अध्ययन में सिएस्ता की उपयोगिता जैसे कम्प्यूटेशनल दक्षता एवं आयामी लचीलापन पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने ज्योमेट्री ऑप्टिमाइजेशन, संरचना पूर्वानुमान तथा प्रकाशीय गुणोंकृजैसे डाइलेक्ट्रिक फंक्शन, ऑप्टिकल एब्जॉर्प्शन एवं अपवर्तनांककृके निर्धारण की प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया। प्रतिभागियों ने सत्र में गहरी रुचि दिखाई और विषय से संबंधित प्रश्नों पर विस्तृत चर्चा की।
प्रायोगिक सत्र में डॉ. मोहन लाल वर्मा एवं डॉ. रश्मि किरण टोप्पो द्वारा “लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम का परिचय” विषय पर दो घंटे का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रायोगिक (हैंड्स-ऑन) सत्र के चेयरपर्सन डॉ. आशीष असतकर और रिपोर्टर डॉ. जयेश करंजगांवकर रहे। इस सत्र में प्रतिभागियों को उबुन्टू लिनक्स के प्रमुख गुणों, ओपन सोर्स प्रकृति, स्थिरता, सुरक्षा एवं कस्टमाइजेशन के बारे में जानकारी दी गई और विंडोज के साथ तुलना समझाई गई। प्रतिभागियों ने फाइल और डायरेक्टरी निर्माण, डायरेक्टरी प्रबंधन और फाइल संचालन जैसे कमांड्स का व्यावहारिक अभ्यास किया। दोनों प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों के सवालों का धैर्यपूर्वक उत्तर देकर जटिल अवधारणाओं को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाया। उद्घाटन समारोह का मंच संचालन डॉ. अनिल रामटेके ने किया।
धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. परमिता दुबे ने प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने आयोजकों, विशेषज्ञों और सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम की सफलता में योगदान के लिए सराहा और धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रथम दिवस का समापन उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं ज्ञानवर्धक चर्चा के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने लिनक्स की मूलभूत जानकारी प्राप्त कर स्वतंत्र रूप से उबुन्टू पर कार्य करने का आत्मविश्वास विकसित किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम निश्चित रूप से विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों के शैक्षणिक एवं अनुसंधान कौशल को नई दिशा प्रदान करेगा।

















