बैमा के आ. जा. क. वि. पुर्व माध्यमिक विद्यालय जूंझ रहा अपनी जर्जर हालत से...

बैमा के आ. जा. क. वि. पुर्व माध्यमिक विद्यालय जूंझ रहा अपनी जर्जर हालत से...

25-Jan-2023    9:12:50 am    103   

खड़गवां। जहां एक तरफ़ छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को ले कर शासन प्रशासन बड़े बड़े कवायदें तो कभी बड़े बड़े वादे करती हैं, कहीं शिक्षा स्तर को बेहतर करने के तमाम योजनाओं को पारित करने की बात सामने आती हैं तो कहीं सरकार द्वारा बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ के नव पीढ़ी के लिए छत्तीसगढ़ शासन सदैव तत्पर है।एक बेहद महत्वपूर्ण गौर करने वाली बात और भी है कि, हमारे देश भारत में, 90 प्रतिशत अच्छे खासे पदों में पदस्थ उच्च अधिकारी, जो कि ताल्लुकात गांव से ही रखते हैं, ज़्यादातर देखा गया है कि छोटे से गांव में संघर्षों के कलम से ही क्रांति लिखी गई है, हिन्दुस्तान की धड़कन हिन्दुस्तान के गांवों में धड़कती देखी जा सकती है, जब छोटे छोटे गांव से संघर्ष की राह पर बिना रूके बच्चे अपना सफर तय करते नज़र आए हैं, तब जा कर सबसे ज्यादा शिक्षित एवं उच्च अधिकारी बन कर सफल हुए हैं।


उक्त विद्यालय की बच्ची ने बिना झिझक अपना परिचय दिया अंग्रेजी में!मगर ग्राम पंचायत बैमा में स्थित एक स्कूल की ज़मीनी स्तर से जुड़ी सच्चाई को देखने के बाद, मन मस्तिष्क में मानो दुख एवं पीड़ा से लिप्त भावनाएं उत्पन्न होने लगती हैं, जब एक तरफ़ ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे छोटे मासुम से बच्चों की ज़ुबान से फर्राटेदार अंग्रेजी सुनने मिले मगर दूसरी तरफ़ उनके भविष्य को मात्र एक शिक्षक के भरोसे छोड़ दिया जाए, शिक्षक मात्र एक, और बच्चे करीब 114 से 118।जब विद्यालय के अंदर जा कर वहां की कक्षाओं की स्थिति देखी गई, तब कुछ इस तरह का दृश्य सामने आया, जहां कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों के सर पर छतों की छड़ें नज़र आ रही थीं, दिवारों में ब्लैक बोर्ड में दरारें तो थी हीं, मगर जिस कक्षा में बैठ कर बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे थे वहां की छतों में बड़े बड़े दरार थे, हालत इतनी बद से बद्तर हो चली है कि उन दरारों से झांकती छड़ें, कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती हैं, जहां अपना जान जोखिम में डाल कर बच्चे अपने भविष्य को उज्जवल बनाने के सपने सजाए रहे हैं, शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।ग्राम पंचायत बैमा के विद्यालय की जर्जर हालत का ज़िम्मेदार कौन?हम बात कर रहे हैं, विधानसभा बैकुंठपुर अंतर्गत विकास खंड खड़गवां में स्थित ग्राम पंचायत बैमा की, जहां मौजूद आदिम जाति कल्याण विकास पुर्व माध्यमिक विद्यालय जिसमें शिक्षा ग्रहण करते बच्चों की संख्या क़रीब 114-118 है, मगर उन बच्चों को उचित शिक्षा देने के लिए वहां पदस्थ हैं मात्र एक प्रधान पाठक एवं एक शिक्षक, विभागीय आदेशों के अनुसार उस विद्यालय के प्रधान पाठक को वहां आस पास मौजूद अन्य विद्यालयों में मॉनिटरिंग के लिए जाना पड़ता है, वहीं बात करें वहां पदस्थ शिक्षक की, तो विद्यालय के कार्यालय से संबंधित समस्त लिखा पढ़ी कार्यों के साथ ही साथ बच्चों को शिक्षा देने का सारा जिम्मा उनके मत्थे, अब ऐसे स्थिति में दोषारोपण का जिम्मा तो वहां पदस्थ प्रधान पाठक एवं शिक्षक पर देना अनुचित ही होगा।फिर तो सवालों के घेरे में शासन प्रशासन से ले कर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारीयों को खड़े करना क्या उचित नहीं होगा? इस अव्यवस्था के लिए मुख्य रूप से ज़िम्मेदार आखिर कौन है? बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह का जो खिलवाड़ किया जा रहा इस लापरवाही में मुख्य रूप से दोषी अगर शासन प्रशासन और शिक्षा विभाग से संबंधित समस्त उच्च अधिकारी नहीं हैं, फिर इन सब दुखद दृश्यों के लिए किसे दोषी ठहराना उचित होगा, साथ ही साथ इस विद्यालय से जुड़ी सभी कुव्यवस्थाओं की वजह से आने वाले समय में इन बच्चों के शिक्षा में समस्त त्रुटियों के लिए जवाबदेह कौन होगा?

सम्पूर्ण मामले का विवरण कुछ इस प्रकार है:

कुछ विशेष सुत्रों द्वारा जानकारी मिली कि विकासखण्ड खड़गवां के अंतर्गत ग्राम पंचायत बैमा के आ. जा. क. वि. पुर्व माध्यमिक विद्यालय में बच्चों के साथ ही साथ प्रधान पाठक एवं वहां उपस्थित शिक्षक को भी काफ़ी संघर्ष करना पड़ रहा है, एक तरफ़ शिक्षक जो कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए कुशल नेतृत्व निभा रहे हैं, दूसरी ओर वो मासुम बच्चे जो शिक्षा ग्रहण करने के लिए जुझारू एवं ततपर हैं, मगर कहीं ना कहीं वहां से जुड़ी समस्त अव्यवस्थाएं इनके आड़े आ रही हैं, जिसके संबंध में वहां के प्रधान पाठक एवं शिक्षक ने कभी ग्राम पंचायत बैमा के सरपंच के माध्यम से तो कभी उच्च अधिकारीयों से भी इन समस्याओं को ले कर कई बार मदद की गुहार भी लगाई मगर उस विद्यालय की सुनने वाला अब तक कोई नहीं, वहां की जर्जर हालत जस से तस भी है।
जब वहां पढ़ने वाले बच्चों से बातचीत की गई, तब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हुए बच्चों ने अपना परिचय दिया, साथ ही साथ वहां के बच्चों में शिक्षा के प्रति लगाव एवं बड़ों के लिए आदर सत्कार सम्मान एवं अनुशासन भी देखा गया, जिससे यह पता चलता है कि वहां पदस्थ प्रधान पाठक एवं शिक्षक बच्चों के प्रति लगाव, सद्भावना एवं सक्रियता से उन्हें उचित शिक्षा देने के लिए अपने दायित्व का निर्वाहन बड़ी कुशलता से कर रहे हैं, जिसका प्रमाण वहां के बच्चों के शिक्षित तौर तरीके से देखा जा सकता है, सोचने वाली बात यह है कि जब प्रधान पाठक के फील्ड में निकलने के पश्चात एक शिक्षक के कंधों पर सारा बोझ आने के बाद भी बच्चे इतना अच्छा कर रहे हैं, अगर उक्त विद्यालय में शासन प्रशासन की नज़र पड़ जाए और वहां की व्यवस्था को ले कर शासन प्रशासन एवं उच्च अधिकारीयों द्वारा सक्रियता दिखाते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उचित कदम उठाए जाएं, तब ये बच्चे और भी ज़्यादा बेहतर शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही साथ इन बच्चों का ना केवल मानसिक विकास भी बड़ी तेज़ी से होगा, जिसके साथ ये बच्चे सही मार्गदर्शन मिलने पर हमारे देश का नाम भी रौशन करेंगे, राष्ट्र की नींव इन बच्चों को ही बनना है, मगर शासन प्रशासन के सुस्त रवैए से, ये सारी बातें मात्र ख्वाब ही रह जाएंगी और इन बच्चों के भविष्य के साथ ही साथ शासन प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आने वाली पीढ़ी को भी भुगतना पड़ सकता है, साक्षरता का स्तर बढ़ाने के लिए शिक्षा स्तर को मजबूत एवं इन बच्चों के प्रति शासन प्रशासन को इनके हित के लिए सोचना पड़ेगा, मगर ग्राम पंचायत बैमा में मौजूद इस विद्यालय की स्थिति को देखते हुए, इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि अभी तक तो छत्तीसगढ़ प्रदेश की सरकार विफल ही नज़र आ रही है।