भगवान कृष्ण को बेहद प्रिय है धनिया पंजीरी, ऐसे मिनटों में बनाएं स्वादिष्ट प्रसाद
जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का विशेष महत्व:
जन्माष्टमी के व्रत में अन्न का सेवन वर्जित होता है, लेकिन धनिया पंजीरी व्रत में फलाहार की श्रेणी में आती है। इसे सात्त्विक, सुपाच्य और पौष्टिक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण को गुड़, धनिया, मिश्री, माखन और दूध के भोग अति प्रिय हैं, इसलिए धनिया पंजीरी का भोग इस त्योहार पर विशेष शुभ माना जाता है।
धनिया पंजीरी बनाने की सामग्री:
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सूखा धनिया पाउडर – 1 कप
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देसी घी – ½ कप
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बूरा / पिसी मिश्री – ¾ कप
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मखाना (भुना और कुटा हुआ) – ½ कप
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सूखे मेवे (बादाम, काजू, किसमिस, पिस्ता - कटे हुए)
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नारियल का बूरा – 2 बड़े चम्मच (वैकल्पिक)
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इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
बनाने की विधि:
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कढ़ाई में घी गरम करें।
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घी में मखाना डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें, ठंडा होने पर दरदरा तोड़ लें।
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अब उसी घी में सूखा धनिया पाउडर डालकर धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक सुगंध न आने लगे।
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इसमें कटे मेवे, नारियल बूरा और इलायची पाउडर डालकर मिलाएं।
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आंच से उतारकर ठंडा करें और फिर मिश्री या बूरा डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
अब आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक धनिया पंजीरी तैयार है!
इसे भगवान कृष्ण को भोग लगाएं और परिवार तथा भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटें। यह पारंपरिक प्रसाद व्रत को पूर्णता प्रदान करता है और जन्माष्टमी की खुशी को और बढ़ाता है।

















