वस्त्र मंत्रालय ने मुंबई में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम पर क्षेत्रीय हितधारक परामर्श आयोजित किया
परामर्श सत्रों में केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं पर चर्चा हुईउद्योग ने वस्त्र-केंद्रित बजट का स्वागत किया और निवेश एवं विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
वस्त्र मंत्रालय ने क्षेत्रीय परामर्शों की एक श्रृंखला शुरू की है, जिसमें पहला परामर्श मुंबई में आयोजित किया गया। यह परामर्श वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणाओं के बाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विनिर्माण विस्तार, फाइबर की उपलब्धता, रोजगार सृजन और स्थिरता पर केंद्रित व्यापक उपायों के माध्यम से श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करना है।

इस परामर्श बैठक में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान की राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, उद्योग संघों और क्लस्टर प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों, विकास भागीदारों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। बैठक में भारत के वस्त्र इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रमुख पहलों के लिए कार्यान्वयन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने अपने संबोधन में विकास और रोजगार के प्रमुख चालक के रूप में वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने और वस्त्र क्षेत्र में भारत को एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करने के महत्व पर बल दिया।
वस्त्र मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री रोहित कंसल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने प्रस्तावित एकीकृत वस्त्र क्षेत्र कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने नीतिगत उद्देश्यों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने के लिए सरकार और उद्योग के बीच निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया और वस्त्र मूल्य श्रृंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए निवेश, बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन को समन्वित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस परामर्श सत्र में वस्त्र क्षेत्र के एकीकृत कार्यक्रम के अंतर्गत कई प्रमुख पहलों पर समानांतर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें राष्ट्रीय फाइबर योजना, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार (टीईईएम) योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स इको पहल, समर्थ 2.0 और मेगा टेक्सटाइल पार्क शामिल हैं। ये पहलें फाइबर से लेकर तैयार उत्पादों तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को समर्थन देने के प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं।
संवादात्मक चर्चा सत्र में हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कार्यक्रम की रूपरेखा, वित्तपोषण तंत्र, प्रौद्योगिकी अपनाने और क्लस्टर स्तर की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाने, बुनियादी ढांचे तक पहुंच में सुधार करने और प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने के महत्व पर बल दिया।
क्षेत्रीय हितधारक परामर्श, मंत्रालय के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य उद्योग और राज्य सरकारों के साथ संरचित जुड़ाव को मजबूत करना और भारत के वस्त्र क्षेत्र के विकास, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक समन्वित रोडमैप को आगे बढ़ाना है।
















