प्रतापपुर विधानसभा की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते एक बार फिर विवादों में हैं इस बार मामला उनके जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है
प्रतापपुर विधानसभा की विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार मामला उनके जाति प्रमाण पत्र से जुड़ा है। पूर्व शिक्षा मंत्री और आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने विधायक के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी बताते हुए खुलकर मोर्चा खोल दिया है।पूर्व मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र प्रथम दृष्टया ही फर्जी प्रतीत होता है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रमाण पत्र में पिता के नाम की जगह पति का नाम लिखा गया है, जो कानूनी रूप से गलत है।

डॉ. टेकाम ने यह भी दावा किया कि विधायक मूल रूप से उत्तर प्रदेश की निवासी हैं, इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (ST) का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और अगर आरोप सही पाए जाएँ तो विधायक के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
यह मामला बहुत गंभीर है। अगर कोई व्यक्ति फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव जीतता है, तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि आदिवासी समाज का अपमान भी है। आदिवासी समाज इस पूरे मामले की जांच कराएगा, और यदि प्रमाण पत्र गलत पाया गया तो FIR दर्ज कराई जाएगी।”इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। डॉ. टेकाम ने यह बयान आदिवासी समाज की सभा के दौरान दिया, जहाँ बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद थे।उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज इस प्रकरण की जांच के लिए एक खोजबीन समिति गठित करेगा, जो सभी दस्तावेज़ों की जांच कर प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने भी मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की है , फिलहाल वाड्रफनगर से उठी यह राजनीतिक हलचल अब प्रतापपुर तक पहुँच चुकी है। जहां एक ओर पूर्व मंत्री ने FIR दर्ज करने की मांग की है, वहीं अब सबकी नज़र प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है कि क्या विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के खिलाफ कोई कदम उठाया जाएगा या नहीं।”

















