महामहिम से गुहार, किसान पहुंचे राज्यपाल के द्वार सुतिया पाठ बांध, कुआं किसी का पानी कोई पिए
प्रहलाद साहू / कबीरधाम
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां कुल आबादी का 70% जनसंख्या कृषि कार्य करती है।अगर यूं कहा जाए कि भारत की जनसंख्या कृषि पर आश्रित है तो यह गलत नहीं होगा। कृषि के लिए कहा जाता है "बिन पानी सब सून।"अर्थात किसान आश्रित है कृषि पर और कृषि आश्रित है वर्षा पर। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए सन 1968 से लोहारा ब्लॉक के किसान क्षेत्र में बांध की मांग करते आ रहे हैं। किसानों की मांग 2003 में मौजूदा मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी की कांग्रेस सरकार ने सुनी और सुतिया पाठ बांध का निर्माण शुरू कराया जो सन 2008 में मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह भाजपा सरकार मे पूर्ण हुआ। बांध निर्माण से क्षेत्र के किसान फूले नहीं समा रहे थे।किसानों ने सोचा कि सिंचाई और जलस्तर में कमी की समस्या अब क्षेत्र से पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। लेकिन मौजूदा सरकार ने किसानों के साथ एक बड़ा धोखा किया सुतिया पाठ जलाशय जो बना तो लोहारा ब्लॉक में है लेकिन इसका पानी क्षेत्रीय लोगों को ना देकर अन्य क्षेत्र को दे दिया गया।
किसानों ने बार-बार सरकार के समक्ष गुहार लगाई कि बांध का पानी प्राथमिकता के आधार पर पहले नजदीकी गांव को दिया जाए और जो पानी बच जाए जाए उसे अन्य क्षेत्रों को दिया जाए इस मांग को लेकर किसान लगातार धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन करते रहें है।
क्षेत्र में जल समस्या को देखते हुए पिछले 5 वर्षों में यह आंदोलन भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में और तेज होता गया। सन 2018 में मौजूदा सरकार ने आचार संहिता लगने के 4 घंटा पहले किसानों की मांग को मानते हुए क्षेत्र के 26 गांव में सुतिया पाठ जलाशय से नाहर विस्तार की स्वीकृति दी और 16.50लाख की राशि भी स्वीकृत की। लेकिन उसके बाद चुनाव में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई जिनके प्रत्याशियों का भी पहला वादा चुनाव जीतने के बाद नहर विस्तार कराना था।आज चुनाव को ढाई साल से ज्यादा हो जाने के बाद भी वर्तमान सरकार सुतिया पाठ नाहर विस्तार की बात तो दूर मुड़ कर भी नहीं देख रही है।
किसानों को किया गया वादा केवल चुनावी।
किसानों द्वारा इस विषय को बार-बार मौजूदा विधायक प्रभारी मंत्री सिंचाई मंत्री आदि को याद दिलाया गया। नाहर विस्तार की मांग को लेकर क्षेत्र के किसानों द्वारा तहसील कार्यालय में धरना प्रदर्शन, ग्राम में जनप्रतिनिधि बहिष्कार जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च एवं अन्य बड़े बड़े आंदोलन किए गए जिसमें क्षेत्र के किसान अपने बच्चे और महिलाओं के साथ शामिल हुए। इतना होने के बाद भी अब तक क्षेत्र के विधायक प्रभारी मंत्री विभाग के अधिकारी और सिंचाई और कृषि मंत्री के द्वारा किसानों को कोई भी मदद या आश्वासन नहीं दिया गया।
कुछ गड़बड़ तो जरूर है।
इस बात से ऐसा प्रतीत होता है कि क्षेत्र के राजनीति में कोई बड़ा घोटाला जरूर रहा है जिसके कारण 15 साल तक सरकार में रही भाजपा के मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह के गृहग्राम होते हुए भी मुख्यमंत्री नाहर विस्तार का कार्य नहीं करा पाए और अपने क्षेत्र को छोड़कर मौजूदा सिंचाई मंत्री जो उस समय विपक्ष में थे उनके क्षेत्र में पानी को जाने दिया गया ठीक उसी प्रकार आज जिले का प्रभारी मंत्री जो सुतिया पाठ नाहर विस्तार कराने की कसमें खा खा कर प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीत कर आया है वो आज किसानों को सिंचाई मंत्री रविंद्र चौबे से मिलने भेज देते हैं और मेरे हाथ में कुछ नहीं बोलकर किसानों से माफी मांगते हैं। पूर्व की सरकार जो 15 साल तक सत्ता में रही थी उसके नेता इस विषय पर आज पूरी तरह मौन है।
*महामहिम से गुहार अब आप ही सुनो पुकार।*
अंततः बांध बनने के 12 साल पूरे होने तक किसानों ने पक्ष और विपक्ष दोनों के सामने अपनी समस्याओं को रखा लेकिन दोनों पर निराशा मिलने के बाद गुरुवार 19/8/2021 को किसानों द्वारा चुना गया भारतीय किसान संघ का 6 सदस्यों वाली प्रतिनिधिमंडल जिसमें प्रदेश कार्यालय मंत्री एवं प्रचार प्रभारी श्री नवीन शेष जिला मंत्री श्री डोमन चंद्रवंशी लोहारा ब्लॉक अध्यक्ष संजय साहू,उपाध्यक्ष मूलचंद साहू,शिवकुमार वर्मा,एवं सहमंत्री प्रहलाद पटेल को माननीय महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके से मिलने भेजा।
प्रतिनिधिमंडल ने सुतिया पाठ से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी महामहिम राज्यपाल महोदया के समक्ष रखी। जिसमें सुतिया पाठ बांध निर्माण से लेकर सुतिया पाठ बांध की सिंचाई क्षमता जो लगभग 7000 हेक्टेयर है और वर्तमान में सिंचाई हेतु दिए जा रहे हैं गांव की जानकारी एवं पानी की मात्रा इसके अलावा प्रस्तावित विस्तार 26 गांव में होना है जिसमें 3160 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए उपलब्ध होना है। इसके अलावा जो सिंचाई विभाग द्वारा बांध से नहर विस्तार में लगभग 47 करोड़ की अनुमानित लागत बताई जा रही है उसे भी महामहिम राज्यपाल महोदय को अवगत कराया गया। प्रथमतः महामहिम राज्यपाल महोदया इस बात से आश्चर्यचकित रह गई कि ऐसा कैसे संभव है कुआंआपके घर में हो और पानी कोई दूसरा पी रहा हो और अगर ऐसा हुआ भी है तो बांध निर्माण को 12 साल पूर्ण होने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को अब तक पानी क्यों नहीं दिया गया पूरी बात सुनने और समझने के बाद महामहिम राज्यपाल महोदया ने प्रतिनिधिमंडल को यह आश्वस्त किया कि तीन-चार दिनों के भीतर महोदया के द्वारा सिंचाई मंत्री को बुलाकर इस विषय में सारी जानकारी लिया जाएगा और किसानों की समस्या को देखते हुए किसानों की इस मांग को पूर्ण कराने के लिए हर संभव प्रयास राजभवन के द्वारा किया जाएगा। महामहिम राज्यपाल महोदया ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जब सिंचाई विभाग के अनुसार बांध की लागत 47 करोड़ है जोकि बहुत बड़ी राशि नहीं है और इस नहर विस्तार से 26 गांव में सिंचाई सुविधा विकसित होगा और जल स्तर भी सुधरेगा। इसलिए इस नहर विस्तार को कराने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा।
सफल होने तक जारी रहेगी लड़ाई।
भारतीय किसान संघ लोहारा के अध्यक्ष संजय साहू ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल बैठकों के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदया द्वारा दिए गए आश्वाशन को किसानों को बताएंगेऔर किसानों द्वारा जो भी निर्णय किया जाएगा उसके अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।

















