नेपाल में नारी शक्ति का उदय सख़्त फैसलों वाली पूर्व जज बनीं PM क्या भ्रष्टाचार का पहाड़ सच में दरकेगा?
शुक्रवार की शाम नेपाल की धरती पर इतिहास रच दिया गया। देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की, जिनके नाम से लोग न्यायपालिका में सख़्त फैसलों और ईमानदारी को याद करते हैं। अब सवाल यही है—क्या मातृ शक्ति की कमान नेपाल को भ्रष्टाचार-मुक्त भविष्य दिला पाएगी?
काठमांडू। नेपाल में शुक्रवार की देर शाम बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। सेवानिवृत्त प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की को देश का अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। इस फैसले ने पूरे देश में एक नई उम्मीद जगा दी है। लोग इसे मातृ शक्ति और शुभता का प्रतीक मान रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर लगाम की उम्मीद
कार्की न्यायाधीश रहते कई सख़्त और ऐतिहासिक फैसलों के लिए जानी जाती रही हैं। यही वजह है कि आम जनता का मानना है कि उनके नेतृत्व में नेपाल से भ्रष्टाचार का अंत होगा। लोग कहते हैं—“जब मातृ शक्ति की छाया शासन पर पड़ती है, तो समाज पुष्पित और पल्वित होता है।”
महिलाओं में उत्साह
हेथौड़ा की निवासी मीना उपाध्याय ने कहा—“नेपाल के इतिहास में पहली बार किसी मजबूत महिला के हाथ में देश की कमान आई है। काशी से शिक्षा ग्रहण करने वाली कार्की गंगा के जल की तरह देश से भ्रष्टाचार को बहाकर ले जाएंगी।”
वहीं, युवतियां राम्या और प्रीति ने कहा—“जब मां के हाथ में नेतृत्व होता है, तो वह पहाड़ की तरह देश की सुरक्षा करती है।”
सीमाई इलाकों में भी जश्न
विराटनगर की सामाजिक कार्यकर्ता रीता साह ने उम्मीद जताई कि कार्की का नेतृत्व संविधान की मर्यादाओं की रक्षा करेगा और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगा। यही नहीं, भारत-नेपाल सीमा पर बसे भारतीय इलाकों में भी हर्ष का माहौल है। भारतीय महिलाओं ने कहा कि अब नेपाल में “तबाही के दाग मिट जाएंगे।”

















