7 सितंबर से खुलेंगे पितरों के द्वार: पितृपक्ष में अगर की ये गलतियाँ, तो मिल सकती है पीढ़ियों तक की सजा!
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष 2025 (Pitru Paksha 2025) इस बार 7 सितंबर से शुरू हो रहा है और 21 सितंबर को समाप्त होगा। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण व श्राद्ध की अपेक्षा करती हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा से उनका स्मरण करते हैं, उन्हें पितरों की कृपा प्राप्त होती है, लेकिन जो इस दौरान नियमों की अनदेखी करते हैं, उन्हें कठिन दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
आइए जानें, इस पावन काल में क्या करें और क्या नहीं – ताकि पितरों का आशीर्वाद बना रहे, और अनजाने में कोई भूल न हो।
पितृपक्ष में क्या करें?
✔️ प्रतिदिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख कर जल अर्पण करें
✔️ पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराना अत्यंत शुभ माना जाता है
✔️ तर्पण करते समय काले तिल, जौ और जल का प्रयोग करें
✔️ गायत्री मंत्र या पितृ मंत्र का जाप करें
✔️ यदि ब्राह्मण उपलब्ध न हों, तो जरूरतमंद या गौ सेवा करें
✔️ सात्विक भोजन का दान करें — बिना लहसुन-प्याज वाला
✔️ अन्न, वस्त्र, छाता, जूते आदि का दान अत्यंत पुण्यदायक होता है
पितृपक्ष में क्या न करें?
???? मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें
???? विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय न शुरू करें
???? बाल और नाखून न काटें – यह अपशकुन माना जाता है
???? नई वस्तुएं, कपड़े या गहने खरीदने से परहेज करें
???? लहसुन-प्याज का प्रयोग, लड़ाई-झगड़ा और गाली-गलौच से बचें
पितृपक्ष का महत्व क्यों है?
ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृलोक से आत्माएं पृथ्वी पर आती हैं। अगर उन्हें सम्मान और श्रद्धा से तर्पण नहीं दिया जाए, तो वे अप्रसन्न होकर वंशजों को पीड़ा दे सकती हैं। लेकिन यदि श्रद्धा से किया गया श्राद्ध उन्हें तृप्त कर दे, तो वे पुत्र-पौत्र, स्वास्थ्य, धन और सफलता का आशीर्वाद दे जाती हैं।

















