आदिवासी परिवार ने 06 सदस्यों के साथ आत्महत्या कर लेने की अनुमति मांगा परिक्षेत्र अधिकारी दहिकोंगा को लिखित आवेदन देकर

आदिवासी परिवार ने 06 सदस्यों के साथ आत्महत्या कर लेने की अनुमति मांगा परिक्षेत्र अधिकारी दहिकोंगा को लिखित आवेदन देकर

07-Jul-2025    5:55:26 pm    29    सावन कुमार- संपादक

कोण्डागांव मे  एक आदिवासी परिवार के द्वारा  कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी दहिकोंगा , कोण्डागांव वनमंडल कोण्डागांव, को मुझ आदिवासी  कुल 06 सदस्यों के साथ आत्महत्या कर लेने की अनुमति प्रदान करने के बाद ही निर्माणाधीन भवन को हटाने की कार्यवाही करने बाबत्। विषयक लिखित आवेदन को दिए जाने का मामला सामने आया है। लिखित आवेदन में आवेदक ने लेख किया है कि मैं पीलाराम पिता स्व.चैतुराम, 41 वर्श, जाति मुरिया, ग्राम चिखलपुटी प्लॉटपारा, तहसील व जिला कोण्डागांव, का निवासी हूं। उपरोक्त पते पर निवासरत हूं और पट्टे की राजस्व जमीन नहीं होने से वन भूमि पर खेती किसानी का कार्य करके अपना एवं अपने पर आश्रित 05 परिजनों का जीवनयापन षांतिपुर्वक करता आ रहा हूं। जिस वन भूमि पर काबिज कास्त था, उस वन भूमि का वनाधिकार प्रपत्र प्राप्त हो चुका है। वन भूमि पर ही रहकर खेती बाड़ी करने में सहुलियत होने को ध्यान में रखकर और षासन से प्रधान मंत्री आवास स्वीकृत होने पर मेरे द्वारा स्वयं को प्राप्त वनाधिकार प्रपत्र वाली भूमि के कुछ डिसमिल क्षेत्र में प्रधान मंत्री आवास का निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही मुझे प्राप्त वनाधिकार पट्टा वाली वन भूमि के समीप वन भूमि पर बस स्टैंड़ का संचालन होने से आवास के साथ दुकान का भी निर्माण कराया जा रहा है। ताकि मैं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी सुधार सकूं। मुझ आदिवासी को दहीकोंगा परिक्षेत्र अधिकारी के द्वारा दिनांक 01/07/2025 को जारी सूचना पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें मुझे भवन का निर्माण नहीं करने का निर्देष दिया गया है। निर्देष का पालन नहीं करने पर लेख किया गया है कि आपके द्वारा निर्माण कराए जा रहे भवन को उक्त वनभूमि से दिनांक 07/07/2025 तक हटाएं अन्यथा आपके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही किया जावेगा।  

जिस दिन से मुझे, सूचना पत्र प्राप्त हुआ है, मुझ सहित मेरे परिवार के सभी सदस्य मानसिक रुप से बहुत अधिक परेषान हैं। मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझ सहित मेरे परिवार के कुल 06 सदस्य आपके साथ-साथ अन्य उच्चाधिकारियों से हांथ जोड़कर जितना भी निवेदन कर लें, हमारे निवेदन को नहीं सुना जाएगा, क्योंकि हम आदिवासी वर्ग के हैं।

मुझे ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि वन परिक्षेत्र दहिकोंगा के जिस वन भूमि पर मेरे द्वारा भवन का निर्माण आज कराया जा रहा है, उसी वन भूमि में पूर्व के वर्शों में बस स्टैण्ड के लिए बड़ा भारी भवन बनाया जा चुका है। वहीं चौवन सोनवानी, इंग्लेष लहरे, भगत सोनवानी, लक्ष्मीनाथ सोनवानी, भुवनलाल मारकंडे, कमलू कुर्रे, संत कुमार सोनवानी, उत्तरा लहरे, महेंद्र लहरे, अनुरचंद लहरे आदि के द्वारा घर और दुकान आदि के लिए भवन का निर्माण कराया जा चुका है। इसके साथ ही उसी वन भूमि में ही डामर प्लांट भी चलाया जा रहा है। उन सभी पर कार्यवाही नहीं करके केवल मुझ आदिवासी परिवार पर कार्यवाही किए जाने से मैं और मेरे परिजन स्वयं को बहुत अधिक प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं और आत्महत्या करके अपनी जान दे देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।    

यह लिखित पत्र देकर आवेदक हांथ जोड़कर यह निवेदन करने को बाध्य हो रहा है कि मेरे द्वारा वन भूमि में कराए जा रहे भवन निर्माण को हटाने के पूर्व मुझ आदिवासी परिवार के कुल 06 सदस्यों को आत्महत्या कर लेने की लिखित अनुमति प्रदान करें और हम सभी आदिवासियों के आत्महत्या कर लेने के बाद ही, आवेदक द्वारा किए जा रहे भवन निर्माण को हटाने के साथ-साथ मुझे प्राप्त वनाधिकार प्रपत्र वाली पूरी वन भूमि को वन विभाग की भूमि में वापस षामिल करें। आवेदक ने आवेदन पत्र की प्रतिलिपि जिला कोण्डागांव के कलेक्टर, वन मण्डलाधिकारी एवं उप वनमण्डलाधिकारी पूर्व कोण्डागांव को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्यवाही हेतु भी दे दिया है।
सवाल- अब देखने वाली बात यह होगी कि आदिवासी आवेदक के द्वारा दिए गए आवेदन को सम्बन्धित अधिकारी सहित उच्चाधिकारीगण कितनी गम्भीरतापुर्वक लेते हैं ? और क्या आवेदक की मांग अनुसार आदिवासी परिवार के कुल 06 सदस्यों को आत्महत्या कर लेने की अनुमति देने के बाद आदिवासी परिवार द्वारा कराए जा रहे भवन निर्माण को हटाते हैं या फिर बलपुर्वक आदिवासी परिवार द्वारा कराए जा रहे भवन निर्माण को ध्वस्त करके षासन द्वारा दिए गए वनाधिकार प्रपत्र को निरस्त करते हैं ? वन विभाग द्वारा बलपुर्वक कार्यवाही किए जाने पर, क्या आदिवासी परिवार आत्महत्या कर लेगा ? यह सब देखने वाली बात होगी।