महिला दिवस पर भी धरने पर बैठीं लिंगियाडीह की महिलाएं बोलीं घर बचाना ही हमारे सम्मान की लड़ाई

महिला दिवस पर भी धरने पर बैठीं लिंगियाडीह की महिलाएं बोलीं घर बचाना ही हमारे सम्मान की लड़ाई

09-Mar-2026    6:45:07 pm    22    सावन कुमार- संपादक

बिलासपुर। एक ओर जहां पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाकर महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात की जा रही है, वहीं लिंगियाडीह की महिलाएं अपने मकानों को बचाने की मांग को लेकर पिछले 108 दिनों से धरना आंदोलन पर बैठी हैं। महिला दिवस के दिन भी उन्होंने धरना स्थल पर ही अपनी आवाज बुलंद की।
धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि महिला दिवस का सही मायने तभी होगा। जब सरकार धरने पर बैठी महिलाओं को उनके अधिकार देगी, गरीबों के मकान नहीं तोड़े जाएंगे और महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि जब अपने घर को बचाने के लिए ही महिलाओं को सड़क पर बैठना पड़े, तो ऐसे में महिला दिवस मनाने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। महिलाओं ने कहा कि यदि सरकार सच में महिलाओं का सम्मान करना चाहती है तो सबसे पहले लिंगियाडीह की महिलाओं को उनका अधिकार देकर उनके घरों को बचाने का निर्णय लेना चाहिए।
धरना आंदोलन में प्रमुख रूप से यशोदा पाटिल, कुंती तिवारी, डॉ. रघु साहू, साखन दरवे, भोला राम साहू, प्रशांत मिश्रा, श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव, सिद्धार्थ भारती, आदर्श सिद्धार्थ, दिनेश घोरे, डॉ. अशोक शर्मा, रूपेश साहू, ओंकार साहू, गोपी देवांगन, गोलू देवांगन, अग्नू साहू और सलीम मेमन सहित कई नागरिक मौजूद रहे।
वहीं बड़ी संख्या में मातृशक्ति भी आंदोलन में शामिल रही, जिनमें रामबाई, राधा साहू, रामौतिन, सूरजबाई, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुल बाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटील, उर्मिला पाटिल और लीला पाटिल सहित अन्य महिलाएं शामिल थीं।