बचाव दल और स्थानीय लोग जुटे
पुलिस, SDRF और स्थानीय लोग रातभर राहत व बचाव कार्य में लगे रहे। कठुआ के डिप्टी कमिश्नर राजेश शर्मा ने बताया कि इलाके में पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं, इसलिए कोशिश है कि हेलिकॉप्टर से जरूरी सामान भेजा जाए। भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है और उज्ह नदी खतरे के निशान के पास बह रही है।
किस्तवाड़ त्रासदी पर आक्रोश
कठुआ की इस नई आपदा के बीच किस्तवाड़ में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। मृतकों के परिजन आरोप लगा रहे हैं कि चेतावनी के बावजूद स्थानीय यात्रा को मंजूरी दी गई, जिससे जान-माल का नुकसान और बढ़ा। इसके अलावा लोग धीमे बचाव कार्य और वीआईपी दौरे के कारण राहत कार्य प्रभावित होने से नाराज हैं। किस्तवाड़ में अब तक 61 शव मिल चुके हैं और 70 से 80 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
116 लोगों को बचाया गया
किश्तवाड़ में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ पर, जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा, "...इस घटना में 61 लोगों की जान चली गई है। सुरक्षा बलों और विभिन्न एजेंसियों ने सामूहिक खोज और बचाव अभियान शुरू किया है, जिसके परिणामस्वरूप 116 लोगों को बचाया गया है..." कठुआ में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन पर, उन्होंने कहा, "...इस घटना में सात लोगों की जान चली गई है। छह घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है..."
सरकार की राहत घोषणाएं
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कठुआ हादसे पर तुरंत राहत और बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को एक लाख और सामान्य रूप से घायल लोगों को 50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। इसके अलावा पूरी तरह टूटे मकानों के लिए एक लाख रुपये, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 50 हजार और हल्के नुकसान पर 25 हजार रुपये की मदद दी जाएगी।
केंद्र से सहयोग का भरोसा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को हालात की जानकारी दी है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस राहत कार्य में जुटी है। शाह ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि केंद्र सरकार हर संभव मदद देगी। वहीं केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन दोनों आपदाओं से जम्मू क्षेत्र में रेलवे ट्रैक, राष्ट्रीय राजमार्ग और कठुआ का एक थाना भी क्षतिग्रस्त हुआ है।