बस्तर में बड़ी सफलता: बीजापुर में 81 लाख के इनामी समेत 30 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, CM साय बोले- पुनर्वास नीति और नेल्ला नार योजना का असर

बस्तर में बड़ी सफलता: बीजापुर में 81 लाख के इनामी समेत 30 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, CM साय बोले- पुनर्वास नीति और नेल्ला नार योजना का असर

27-Aug-2025    10:11:04 pm    63    Anita nishad

 रायपुर/बीजापुर:

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से नक्सल मोर्चे पर बड़ी खबर सामने आई है। सुरक्षा बलों और राज्य सरकार की रणनीति को बड़ी कामयाबी मिली है, जहां बुधवार को 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 20 इनामी नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर कुल 81 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

मुख्यधारा में लौटे हथियारबंद माओवादी:
बीजापुर के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलियों ने औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने सरकार की पुनर्वास नीतियों, विकास योजनाओं और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई को आत्मसमर्पण का प्रमुख कारण बताया।

सीएम साय ने बताया बड़ी सफलता:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस घटनाक्रम को बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा:

नवीन पुनर्वास नीतिनियद नेल्ला नार योजना और सुरक्षा बलों की सटीक कार्रवाई का ही परिणाम है कि अब नक्सली हथियार छोड़कर विकास की राह पर लौट रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सरकार ने बस्तर के लोगों का विश्वास जीता है।”

नक्सल संगठन कमजोर, बस्तर की तस्वीर बदल रही:
सीएम साय ने यह भी दावा किया कि राज्य में नक्सल संगठन अब लगातार कमजोर हो रहे हैं और बस्तर अब शांति और विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र की "डबल इंजन सरकार" का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाए।


क्या है ‘नियद नेल्ला नार’ योजना?

इस योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास, रोजगार, और सुरक्षा प्रदान की जाती है, जिससे वे सामान्य जीवन में लौट सकें। सरकार की यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास की बहाली की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।


सुरक्षा बलों की रणनीति रंग ला रही

बीते कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ी हैं। इससे संकेत मिलता है कि माओवादी संगठनों का मनोबल टूट रहा है और वे अब सरकार की योजनाओं पर भरोसा जताने लगे हैं।


यह आत्मसमर्पण सिर्फ 30 लोगों का नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद का संकेत है। यह स्पष्ट संदेश है कि बंदूक की जगह अब विकास और भरोसे की भाषा सुनी जा रही है।