BJP Chief 2025: भाजपा का नया अध्यक्ष कौन? शिवराज-खट्टर में असली टक्कर या कोई तीसरा नाम आएगा सामने?
BJP Chief 2025: भाजपा (BJP) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार पार्टी किसी बड़े सरप्राइज नाम पर दांव नहीं लगाएगी, बल्कि उन्हीं चेहरों में से किसी एक को अध्यक्ष बनाएगी, जिनके नाम पहले से चर्चा में हैं।
कौन-कौन हैं रेस में?
सूत्रों का दावा है कि भाजपा ने 6 नामों की पैनल तैयार कर ली है। इनमें प्रमुख हैं:
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शिवराज सिंह चौहान – चार बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और लंबे अनुभव वाले नेता।
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मनोहर लाल खट्टर – हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और पीएम मोदी के करीबी।
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धर्मेंद्र प्रधान – शिक्षा मंत्री और संगठन में मजबूत पकड़।
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भूपेंद्र यादव – केंद्रीय मंत्री और संगठनात्मक अनुभव वाले।
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सुनील बंसल – संगठन के रणनीतिकार, यूपी चुनाव में जीत का श्रेय इन्हें भी जाता है।
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विनोद तावड़े – महाराष्ट्र से आने वाले वरिष्ठ नेता।
हालांकि सूत्रों का कहना है कि असल मुकाबला शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल खट्टर के बीच है।
BJP Chief 2025: सरप्राइज क्यों नहीं देगा BJP?
इस बार भाजपा ने साफ संकेत दिए हैं कि किसी अनजान या चौंकाने वाले चेहरे को आगे नहीं लाया जाएगा। पार्टी चाहती है कि अध्यक्ष ऐसा चेहरा हो, जो पहले से जनता और संगठन दोनों में परिचित और स्वीकार्य हो। यानी इस बार का चुनाव क्लियर कट और प्रेडिक्टेबल होगा।
BJP Chief 2025: देरी क्यों हो रही है?
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा में देरी की कई वजहें हैं:
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पार्टी ने इस बार 88 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं से राय-मशविरा किया है।
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संगठन और आरएसएस का मानना है कि निर्णय सर्वसम्मति और संतुलन के साथ होना चाहिए।
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इसके अलावा, पितृ पक्ष की अवधि (1-2 सितंबर से) के दौरान भाजपा कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहती।
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अगर बिहार चुनाव से पहले नाम तय नहीं हुआ, तो अध्यक्ष का ऐलान चुनाव के बाद ही होगा।
कब होगा ऐलान?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद सलाह-मशविरा तेज होगा। इसके बाद अध्यक्ष का कार्यक्रम तय किया जाएगा।
BJP Chief 2025: कौन है सबसे मजबूत दावेदार?
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शिवराज सिंह चौहान: अनुभव और लोकप्रियता का फायदा।
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मनोहर लाल खट्टर: पीएम मोदी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक।
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धर्मेंद्र प्रधान और सुनील बंसल: संगठनात्मक रणनीति और जातीय-सामाजिक संतुलन को साधने की क्षमता।
अब देखना यह होगा कि भाजपा किसे चुनती है – शिवराज का अनुभव, खट्टर का भरोसा, या किसी और का रणनीतिक संतुलन।

















