वन परीक्षेत्र खड़गवां अंतर्गत छोटे बड़े पेड़ो की हो रही अंधा धुन कटाई ,वन अधिकारी बे खबर..
एक स्वस्थ पेड़ हर दिन करीब 230 लीटर ऑक्सीजन छोड़ता है, यही ऑक्सीजन पृथ्वी में जीवन को संतुलित रखने एवं जीवित रखने का मूल आधार के रूप में भी देखा जा सकता है।

मगर इन दिनों वन मंडल बैकुंठपुर के वन परिक्षेत्र खड़गवां में अंधाधुंध कटाई देखी जा रही है, जहां पर मनमौजी ढंग से पेड़ों की अवैध कटाई जारी है, जहां एक नहीं दो नहीं करीबन दर्जन भर पेड़ों को काटा गया, जिस पर वन परिक्षेत्र खड़गवां के वन परिक्षेत्राधिकारी की नज़र या तो इन पेड़ों, वनस्पतियों की अवैध कटाई पर पड़ नहीं रही है या फिर ऐसा माना जा सकता है कि वन परिक्षेत्राधिकारी, खड़गवां को इसकी कोई खबर ही नहीं कि उनके ही रेंज में ये अवैध कारनामें किए जा रहे हैं, जिस पर उनका इस तरह मौन रहना उनकी बड़ी लापरवाही को दर्शाता नज़र आ रहा है, अगर वन परिक्षेत्र खड़गवां इन अवैद्य कारनामों में शामिल नहीं, फ़िर क्यों खड़गवां वन परिक्षेत्राधिकारी ऐसी दुर्दशा पर अब तक मौन हैं।

पेड़ पौधों की महत्वत्ता की बात की जाए तो इनका संरक्षण बेहद ज़रूरी है, पेड़-पौधे वर्षा का कारण बन कर तो पर्यावरण की रक्षा करते ही हैं, इनमें कार्बनडाई ऑक्साइड जैसी विषैली, स्वास्थ्य विरोधी और घातक कही जाने वाली प्राकृतिक गैसों का पोषण और शोषण करने की भी बहुत अधिक शक्ति रहा करती है। स्पष्ट है कि ऐसा करने पर भी वे हमारी धरती पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहायता ही पहुँचाया करते हैं।

एक मुख्य प्रश्न ऐसे नज़ारों को देखने के बाद यह पता चलता है कि वन विभाग की गैरज़िम्मेदाराना हरकतों की वजह क्या है, साथ ही साथ इन वनस्पतियों का दुरुपयोग करने का साहस अवैध कारोबारियों को किनकी वजह से मिल रहा है, क्या वन विभाग खड़गवां अपने ही क्षेत्र के वनस्पतियों को संरक्षित करने का सामर्थ्य नहीं रखता और अगर वन परिक्षेत्राधिकारी, खड़गवां की पैनी नज़र अपने क्षेत्र में बनी है फिर इस तरह की अवैध कटाई को किस तरह अंजाम दिया जा रहा है।
उनके सभी तरह के अभावों को दूर करने के साधन भी है। पेड़-पौधे और वनस्पतियाँ हमें फल-फूल, औषधियाँ, एवं अनन्त विश्राम तो प्रदान किया ही करते हैं, वे उस प्राणवायु (ऑक्सीजन) का अक्षय भण्डार भी हैं की जिसके अभाव में किसी प्राणी का एक पल के लिए जीवित रह पाना भी असंभव है, मगर दुर्भाग्यपूर्ण इन वनस्पतियों को संरक्षित करने में वन परिक्षेत्र खड़गवां कमज़ोर नज़र आ रहा है।

















