यह बिल खास इसलिए है क्योंकि इसमें 350 से अधिक बदलाव शामिल किए गए हैं। इसके लागू होने के बाद व्यापारियों को कई छोटे-छोटे अपराधों के लिए अब जेल नहीं जाना पड़ेगा।
छोटे अपराधों पर खत्म होगी जेल की सजा
केंद्र सरकार का मानना है कि कई पुराने कानून ऐसे हैं जिनमें मामूली गलती या छोटे अपराध पर भी जेल की सजा का प्रावधान है। इससे व्यापारियों को गैरजरूरी कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नए संशोधन बिल के बाद ऐसी स्थितियों को खत्म किया जाएगा और इन मामलों को केवल जुर्माना या चेतावनी तक ही सीमित कर दिया जाएगा।
व्यापार जगत को मिलेगा सीधा फायदा
इस कदम का सबसे बड़ा असर कारोबारियों पर पड़ेगा। सरकार पहले ही 183 अपराधों को अपराधमुक्त कर चुकी है। अब इस संशोधन से और भी प्रावधान आसान किए जाएंगे। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बिजनेस करना आसान होगा और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
सरकार का टारगेट आसान और सुरक्षित कारोबारी माहौल
एक अधिकारी के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य देश में ऐसा माहौल बनाना है जहां व्यापारी और निवेशक बिना किसी डर के कारोबार कर सकें। छोटे अपराधों में सजा हटाने से "ईज ऑफ डूइंग बिजनेस" रैंकिंग पर भी अच्छा असर पड़ सकता है। इसके अलावा यह कदम नागरिकों को भी बेवजह की कानूनी झंझटों से बचाने में मदद करेगा।
2023 में भी हुए थे ऐसे बदलाव
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ऐसे कदम उठाए हों। साल 2023 में जनविश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम लाया गया था। उस समय 19 मंत्रालयों और विभागों के अधीन आने वाले 42 कानूनों में से 183 प्रावधानों को बदलकर अपराधमुक्त किया गया था। कई मामलों में जेल की सजा हटाकर केवल जुर्माने का विकल्प रखा गया था।
पीएम मोदी ने लाल किले से किया था ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में भी इस विषय का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि कई पुराने कानून ऐसे हैं जिनमें सामान्य सी गलती पर भी जेल का प्रावधान है, जो सही नहीं है। पीएम ने साफ किया था कि उनकी सरकार ऐसे नियम खत्म करने के लिए पूरी तरह मजबूत है।
जनविश्वास विधेयक 2.0 लागू होने के बाद व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए बड़ा बदलाव आएगा। छोटे अपराधों में जेल की सजा खत्म होने से व्यापार करना आसान होगा और कारोबारी माहौल और ज्यादा बेहतर बनेगा।