रात्रि बसों की मनमानी से यात्री परेशान, धोखे में रख गंतब्य के नाम से काटा जा रहा टिकट, पलटी देने की कार्यप्रणाली से दो चार होते यात्री

रात्रि बसों की मनमानी से यात्री परेशान, धोखे में रख गंतब्य के नाम से काटा जा रहा टिकट, पलटी देने की कार्यप्रणाली से दो चार होते यात्री

04-Sep-2021    8:26:21 pm    174    Sawankumar

कोरिया:- मामला बेहद संगीन कहा जा सकता है। रात्रि में चलने वाली बस संचालको की लिए परिवहन नियम के मुताबिक यात्रियों के सभी सुविधाओं को ध्यान में रख परिचालन करने की अनुमति दी जाती है मगर बस संचालक नियम के विरुद्ध परिचालन ही नही करते बल्कि यात्रियों से पूरे पैसे लेने के बाद यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं से भी मोहताज रखा जाता है यही नही रात्रि में यात्रियों को एक बस उतारकर दूसरे बस में पलटी देने का काम भी बड़ी तेजी से हो रहा जिससे ना सिर्फ यात्री परेशान होते है बल्कि उनके साथ सफर करने वाले छोटे - छोटे बच्चे, बृद्ध को होने वाली मुश्किलों को शब्दों में बयान नही किया जा सकता इसके साथ ही समान का बोझ और भी मुशीबत बनकर खड़ा रहता है किंतु बस संचालकों को इससे क्या लेना देना, उन्हें तो सिर्फ पैसा चाहिए। कुंछ इसी तरह का मामला वर्तमान में कोरिया जिले में देखा जा रहा है। बस संचालको के कम्पटीशन का शिकार यात्री रोज हो रहे है। दरअसल बीते एक माह से इस तरह का खेल खेला जा रहा है। हुआ यूं कि प्रयाग राज से अंबिकापुर की तरफ जाने के लिए निकली प्रयाग बस 2 सितंबर भोर में लगभग 20 से 25 यात्रियों को मनेंद्रगढ़ स्टैंड में उतार दी जिसके बाद काफी विवाद हुआ है। बताया जा रहा है कि बस में सवार यात्रियों को इलाहाबाद से अंबिकापुर विश्रामपुर सूरजपुर बैकुंठपुर तक पहुंचाने के लिए टिकट बनाया गया था जिसमे महिलाएं और बच्चे भी मौजूद थे। बताया गया कि यात्रियों के पास काफी संख्या में सामान भी मौजूद रहे।  प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले तो बस कंडक्टर का कहीं पता नही चल रहा था बाद में पता चला कि कंडक्टर दूसरी यात्री बस में घुसकर सो रहा था। यात्रियों ने खोज कर उसे निकाला  फिर बस कंडक्टर और यात्रियों के बीच घंटों चले विवाद में स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया गया।  बस कंडक्टर यात्रियों को पूरा किराया भी वापस नहीं दिया है ।बताया जाता है कि यह बस संचालक फर्जी तरीके से यात्रियों को गुमराह करने का काम पिछले 1 माह से कर रहे है और आए दिन यात्रियों को दूसरी बसों में पलटी करने का काम कर रहे थे। आपको बता दे कि बस संचालक के बस का परमिट मनेन्द्रगढ़ तक का है लेकिन यात्रियों को यह बता कर बैठाया जाता है कि आपको गंतब्य तक पहुचाया जाएगा लेकिन आधे रास्ते मे उतारकर बस के कर्मचारी बहाना बनाने लगते है कि हमने कहा था क्या की आपको आपके गंतब्य तक पहुचायेंगे। दरअसल होता ये है कि टिकट काटने का काम एजेंट करते है जो बस छूटने के बाद दूसरे लहजे में यात्रियों से बात करने लगते है। आपको बता दे कि यह पूरा मामला रात के अंधेरे में किया जाता है। मजबूर यात्री अंधेरे में बेबस होते है और लिहाज चुपचाप  प्रताड़ना को स्वीकार कर लेते है।

अंबिकापुर तरफ से आने पर भी शहडोल कोतमा कभी मनेंद्रगढ़ में भी दूसरी बस में यात्रियों को बैठाकर ले जाने का काम किया जाता है। समस्या यही पर खत्म नहीं होती, यात्रियों को जो सीट नंबर पहले दिया जाता है उन्हें वो सीट ना उपलब्ध कराकर पीछे या केबिन में बैठा दिया जाता है । पूर्व संचालित बसों में पहले से भीड़ रहती है बेबस और मजबूर यात्री मजबूरी में इनकी दी जा रही यातनाओं को सह लेते है  जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश आने जाने वाले यात्रियों में काफी आक्रोश पनप रहा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले 1 माह से अंबिकापुर रीवा जाने वाली प्रयाग एवं पक्षीराज बस का आपसी विवाद अभी तक खत्म नहीं हुआ है। जब से बस का संचालन प्रारंभ हुआ है तब से बस संचालक और इनके बस स्टैंड में बैठे एजेंट, यात्रियों से लगातार धोखा देने का काम कर रहे है । बताया जाता है कि अंबिकापुर से रीवा तक यात्री बस के संचालन का परमिट है किंतु अंबिकापुर, विश्रामपुर सूरजपुर , पटना बैकुंठपुर में बैठे एजेंट यात्रियों से झूठ बोलकर उन्हें अपने कमीशन के लिए बहला फुसला कर प्रयागराज, सैनी, खागा के नाम पर टिकट काटकर मनेंद्रगढ़ कोतमा शहडोल में अन्य यात्री बसों में पलटने का काम जारी है । उप संचालित यात्री बसों की अन्य बसें राजनगर से इलाहाबाद तक चलती हैं उनमें यात्रियों को बैठा दिया जाता है, वही इलाहाबाद से भी यात्रियों को अंबिकापुर विश्रामपुर बैकुंठपुर के नाम पर भर के लाया जाता है और अन्य लोकल चलने वाली बसों में बैठा कर उन्हें भेजा जाता  है, जिससे आए दिन विवाद की स्थिति निर्मित होती है । यात्री पुलिस थानों में भी शिकायत के लिए जाते हैं किन्तु इन बसों के संचालक पुलिस थानों को चढ़ावा देते है लिहाजा उनकी शिकायत की कोई सुनवाई नही होती है। फिलहाल मौके पर मौजूद पत्रकारों से यात्रियों ने शासन प्रशासन से इन बस संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने की मांग की है ताकि प्रतिदिन जो यात्री अपने परिवार  छोटे-छोटे बच्चों के साथ प्रताड़ित हो रहे हैं उस पर प्रतिबंध लग सके।