यह दूसरा ऐसा मामला है, जब किसी मुस्लिम व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज को किडनी दान करने का प्रस्ताव दिया है। इससे पहले नर्मदापुरम के आरिफ खान चिश्ती ने भी इसी तरह का प्रस्ताव दिया था, जिसे महाराज ने स्वीकार नहीं किया था।
प्रेमानंद महाराज की बीमारी और भक्तों का प्रेम
प्रेमानंद महाराज पिछले कई सालों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी दोनों किडनी फेल हैं और वे डायलिसिस के सहारे जीवन जी रहे हैं। मेहनाज खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से महाराज की बीमारी के बारे में जाना और उनके जीवन से प्रभावित होकर यह बड़ा फैसला लिया।
मेहनाज ने क्यों लिया यह फैसला?
मेहनाज खान ने बताया कि प्रेमानंद महाराज के प्रवचन और उनका जीवन लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने कहा, "आज के समय में ऐसे साधु-संतों की बहुत जरूरत है, जिनका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा हो। मैं ऐसे महापुरुष की जिंदगी बचाने के लिए कुछ भी कर सकती हूं।" उन्होंने खुद को भाग्यशाली बताया कि वे महाराज के काम आ सकती हैं।
कलेक्टर को दिया गया पत्र
मेहनाज ने अपनी इस इच्छा को लेकर नरसिंहपुर के कलेक्टर कार्यालय में एक लिखित पत्र दिया। उन्होंने कलेक्टर शीतला पटले से अपील की कि उनका यह पत्र प्रेमानंद महाराज तक पहुंचाया जाए। पत्र में उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि अगर उनकी एक किडनी से महाराज की जिंदगी बचती है, तो वे खुद को बहुत खुशनसीब महसूस करेंगी।
आरिफ चिश्ती का प्रस्ताव भी ठुकरा चुके हैं महाराज
मेहनाज से पहले, नर्मदापुरम के आरिफ चिश्ती ने भी प्रेमानंद महाराज को किडनी दान करने का ऑफर दिया था। महाराज को जब उनकी चिट्ठी मिली, तो वे बहुत खुश हुए और उन्होंने आरिफ की प्रशंसा भी की। हालांकि, महाराज ने उनके किडनी दान के प्रस्ताव को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया और आरिफ को जल्द ही वृंदावन में बुलाकर सम्मानित करने की बात कही थी।