घनघोर नींद में व्यस्त वन परिक्षेत्र सोनहत... सक्षम अधिकारी सवालों से अक्सर मुंह फेरते आए नज़र...
पेड़ों का कत्लेआम चरम सीमा पर... वनस्पतियों के संरक्षण में की जा रही भारी चूक...
वन विभागों पर डाला जा रहा क्या किसी तरह का राजनैतिक दबाव या वन विभाग के सक्षम अधिकारी खुद इन अवैद्य कृत्यों में शामिल ?
कोरिया/ छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भुपेश बघेल जहां इन दिनों राज्य के समस्त विधानसभाओं के दौरे में हैं और जिला कोरिया में उनके आगमन के मात्र कुछ ही दिन शेष हैं, वहीं दूसरी तरफ़ वन विभाग का मनमौजी रवैया थमने का नाम नहीं ले रहा, साथ ही साथ वन परिक्षेत्रों में चल रहे अवैद्य उत्खनन एवं अन्य अवैद्य कारोबारों पर पूर्ण विराम लगाने में वन विभाग असक्षम नज़र आ रहा है।
मामला वन मंडल बैकुंठपुर अंतर्गत वन परिक्षेत्र सोनहत के ग्राम कछाड़ी का है, जहां इन दिनों सोनहत के जंगलों में वृक्षों की कटाई चरम सीमा पर है, कटाई के नए नए तकनीकों को देखते हुए इस बात का अंदेशा लगाया जा सकता है कि अवैद्य कारोबारियों को भरपूर समय मिल जाता है वन वृक्षों एवं वनस्पतियों को हानि पहुंचाने जैसे कारनामों को अंजाम देने के लिए, वन विभाग के आँखों में धूल झोंकना अवैद्य कारोबारियों के लिए क्या इतना आसान हो गया है, यह एक मुख्य प्रश्न उठता है वन मंडल बैकुंठपुर पर।
जहां लंबे समय से वन परिक्षेत्र सोनहत के वन परिक्षेत्र अधिकारी सुर्खियों में चले आ रहे हैं अपने क्रोधित तेवर एवं लापरवाही के लिए, उनके परिक्षेत्र से जुड़े सवालों को पुछने पर उनके द्वारा ज़्यादातर नकारात्मक प्रतिक्रिया ही सुनने को मिलती है, इस बात का प्रमाण वे खुद एक नहीं कई दफा देते आए हैं, साथ ही साथ यह भी कहना बिल्कुल उचित होगा कि वन परिक्षेत्र सोनहत के जंगलों से संबंधित अनियमित कारनामों एवं जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही सोनहत के वन परिक्षेत्र अधिकारी अक्सर सवालों से भागते नज़र आते हैं और तो और कार्यालय में भी अक्सर अनुपस्थिति नज़र आते हैं।
वन विभाग के इस रवैए को निडरता का नाम देना सही होगा या फिर अवैद्य कारोबारियों को संरक्षण देना, इस बात का जवाब भी वन परिक्षेत्र सोनहत के परिक्षेत्र अधिकारी देने से कतराते ही दिखे हैं, कोएला उत्खनन से ले कर रेत के अवैद्य उत्खनन साथ ही साथ पेड़ों की अवैद्य कटाई, जंगल के कोने कोने तक पेड़ों की निर्मम तरीके से हत्या, इन सभी मामलों के रचयिता अगर वन परिक्षेत्र सोनहत के वन परिक्षेत्र अधिकारी खुद नहीं है, या तो यूं कहें कि अगर इन सभी काले बाजारी एवं अवैद्य कारोबार में वे खुद सम्मिलित नहीं हैं, फिर उन्हें उचित एवं ठोस कार्यवाही करने से कौन रोक रहा है, अवैद्य कारोबारियों को संरक्षण वन विभाग दे रहा है या फिर वन विभाग के सक्षम अधिकारियों पर किसी तरह का राजनैतिक दबाव बनाया जा रहा है, इन सभी सवालों के लिए अगर वन परिक्षेत्र सोनहत के परिक्षेत्र अधिकारी जवाबदेही नहीं हैं तो कौन हैं, और तो और इन काले कारनामों पर प्रतिबंध कब तक लगाया जाएगा या फिर प्रकृति के साथ इस प्रकार दुर्व्यवहार आगे भी किया जाएगा?
इन सारे सवालों के जवाब वन परिक्षेत्र सोनहत के परिक्षेत्र अधिकारी ना पहले देते नज़र आए ना ही उनके द्वारा किसी तरह की सख़्त कार्यवाही की गई जिसका खामियाजा वनस्पतियों को भुगतना पड़ रहा है और यह खबर तक चलेगा यह भी अपने आप में ही एक उलझा हुआ सवाल मन कर रहा गया है, जिस पर शासन प्रशासन को गंभीरता से विचार कर जंगलों के संरक्षण के लिए उचित कदम लेने की अब अति आवश्यकता है, अगर ऐसा नहीं हुआ तो काफ़ी जल्द ही वन परिक्षेत्र सोनहत बंजर बीघड़ों में तब्दील होता हुआ नज़र आएगा।

















