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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर जयपुर से शुरू हुआ कृषि सुधारों का नया अध्याय
जयपुर में आज पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से कृषि सुधारों के नए युग की मजबूत शुरुआत हुई, जहाँ केंद्र–राज्य साझेदारी, किसानों की आय वृद्धि, फूड व न्यूट्रीशन सिक्योरिटी, फार्मर आईडी आधारित डिजिटल कृषि और लचीली योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ रोडमैप रखा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस की यह नई श्रंखला केंद्र और राज्यों के लिए साझा ‘एक्शन-प्लेटफ़ॉर्म’ के रूप में सामने आई हैं।
जोनल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समग्र कृषि विकास का नया ढांचा
जयपुर के होटल मैरियट में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक दिन की औपचारिक रबी–खरीफ मीटिंग की जगह अब अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन के लिए गंभीर, विषय-आधारित क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं। सम्मेलन की इस नई श्रृंखला की शुरुआत राजस्थान की धरती से होना उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया, जहाँ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे, वहीं उद्घाटन सत्र में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि यह केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी क्षेत्र की कृषि पर संपूर्णता से मंथन का प्रयास है, जिसमें पूरे दिन प्रजेंटेशन, वीडियो और विषयवार चर्चा के बाद ठोस निष्कर्ष और ‘टू-डू लिस्ट’ के साथ राज्यों को आगे बढ़ने का रोडमैप तय किया जाएगा।
तीन प्रमुख लक्ष्य: फूड सिक्योरिटी से पोषण सुरक्षा तक
श्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि के लिए तीन मुख्य लक्ष्य रेखांकित किए– देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल में भारत के भंडार इतने हैं कि रखने की जगह तक की चुनौती है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी हासिल करनी है ताकि खाद्य सुरक्षा पूरी तरह देश की अपनी उत्पादन क्षमता पर आधारित हो सके और आयात पर निर्भरता खत्म हो। उन्होंने दोहराया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा हैं, इसलिए किसानों की आय बढ़ाना, जीवन स्तर सुधारना और खेती को आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता है, साथ ही जनता को पोषक आहार उपलब्ध कराने के लिए पोषण सुरक्षा को नीति का अनिवार्य अंग बताया।
फार्मर आईडी और डिजिटल एग्रीकल्चर की बड़ी झलक
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने फार्मर आईडी को आने वाले समय की सबसे उपयोगी व्यवस्था बताते हुए कहा कि एक प्रमाणित डिजिटल प्रोफ़ाइल के आधार पर बैंक लोन से लेकर सरकारी मदद तक सब कुछ तेज़ और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुँचेगा। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों में फार्मर आईडी के माध्यम से कुछ ही दिनों में हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं और आगे खाद वितरण जैसी संवेदनशील व्यवस्था भी किसान की भूमि और बोई गई फसल के आधार पर फार्मर आईडी से ही लिंक की जाएगी, ताकि सस्ता खाद डायवर्जन रोका जा सके।
उन्होंने पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट की परिस्थितियों के संदर्भ में वैश्विक अनिश्चितताओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसे संकट के दौर में डिजिटल और डेटा आधारित कृषि प्रशासन के माध्यम से ही देश और किसानों को सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए सभी राज्यों को फार्मर आईडी के काम को मिशन मोड में 100 प्रतिशत पूरा करने का आग्रह किया गया।
MSP, खरीद, PM-AASHA और MIS पर स्पष्ट संदेश
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दलहन और तिलहन की खरीद PM-AASHA के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा और गेहूं–चावल की खरीद खाद्य
विभाग द्वारा की जा रही है तथा राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के अनुरूप ही खरीद की स्वीकृति दी गई है, लेकिन समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चने, मसूर और तुअर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी और जहाँ फिजिकल खरीद संभव नहीं है, वहाँ मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मॉडल पर सरसों और सोयाबीन में भावांतर भुगतान के माध्यम से MSP और बाजार भाव के अंतर की भरपाई किसानों के खातों में सीधे की जा सकती है।
उन्होंने आलू, प्याज, टमाटर जैसी फसलों में अंतरराष्ट्रीय कारणों से गिरती कीमतों की चुनौती का उल्लेख करते हुए MIS व्यवस्था की उपयोगिता समझाई, जिसमें मॉडल रेट और बाजार भाव के अंतर का भुगतान सीधा किसान को किया जा सकता है, जिसमें 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, साथ ही जिन राज्यों की एजेंसियाँ किसानों की उपज को उत्पादन क्षेत्र से बड़े शहरों तक ले जाना चाहेंगी, उनके लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी देने का निर्णय भी साझा किया।
विकसित कृषि संकल्प अभियान और एग्रीकल्चर रोडमैप
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने सभी राज्यों से कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान अब एक साथ पूरे देश में न करके राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा और जो भी राज्य समय-सारिणी और कार्यक्रम भेजेंगे, वहाँ भारत सरकार वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की टीम भेजकर अभियान को गति देगी। राजस्थान के संदर्भ में उन्होंने ICAR के वैज्ञानिकों की विशेष टीम भेजने की घोषणा की, जो राज्य के तय कार्यक्रम में खेत स्तर पर वैज्ञानिक सलाह और नवाचारों का विस्तार करेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि आज से राज्यों के कृषि रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया को भी संस्थागत सहयोग मिलेगा; राजस्थान ने कृषि रोडमैप में भारत सरकार की साझेदारी की पहल की है और इसके लिए आईसीएआर के वैज्ञानिकों और मंत्रालय के नोडल अधिकारी की संयुक्त टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगी, जबकि अन्य राज्यों को भी उनके कृषि रोडमैप के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा।
नीतियों में लचीलापन और बजट के समयबद्ध उपयोग पर जोर
श्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 अप्रैल से लागू नए बजट को तुरंत राज्यों को रिलीज़ करने और वर्ष की शुरुआत से ही योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन पर फोकस करने की अपील की, ताकि साल के अंत में बजट बचने और जल्दबाजी में खर्च की स्थिति न बने। उन्होंने बताया कि राज्यों की मांग पर इस बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्र कोई योजना ऊपर से थोपेगा नहीं, बल्कि योजनाओं में से राज्य अपनी ज़रूरत के मुताबिक प्राथमिकता चुनेंगे– चाहे बात तारबाड़बंदी की हो या ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की।
उन्होंने ‘टीम एग्रीकल्चर’ की अवधारणा रखते हुए कहा कि नीतियाँ और कार्यक्रम केंद्र बनाएगा, लेकिन असली क्रियान्वयन राज्यों के हाथ में है, इसलिए जितनी गंभीरता और प्राथमिकता से राज्य सरकारें काम करेंगी, उतनी ही सफलता किसानों तक योजनाओं के लाभ पहुँचाने में मिलेगी।
आपदा प्रबंधन, फसल बीमा और स्वास्थ्य का संदेश
हाल के मौसमीय असंतुलन और नुकसान का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने राज्यों से नुकसान के सही आकलन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया, ताकि प्रभावित किसानों को पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि ज़मीन पर सक्रिय भूमिका राज्यों की होगी और केंद्र की ओर से किसानों को भरपूर सहयोग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वस्थ भारत के संदेश का हवाला देते हुए अपील की कि तेल और भोजन की मात्रा में संयम के साथ सभी अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है और कृषि नेतृत्व को भी फिट रहकर किसानों की सेवा में जुटे रहने की प्रेरणा दी।

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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने तीन नई पहलों का अनावरण किया सुलभ प्रौद्योगिकी और मजबूत डिजिटल सामग्री परितंत्र के लिए सरकार के प्रयासों पर जोर दिया
सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज भारत के मीडिया, प्रसारण और डिजिटल क्षेत्र को मजबूत करने और सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन प्रमुख पहलों का शुभारम्भ किया। ये तीन पहलें हैं- गूगल और यूट्यूब के साथ साझेदारी में भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के माध्यम से राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल; वेव्स ओटीटी पर नागरिक रचनाकार मंच मायवेव्स; और डीडी फ्री डिश सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए टेलीविजन सेटों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (ईपीजी) और अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर की शुरुआत शामिल हैं। इन पहलों को 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बढ़ावा देने, सार्वजनिक प्रसारण को मजबूत करने और मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र में एआई कुशल कार्यबल का निर्माण करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम में मीडिया एवं प्रसारण उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों, यूट्यूब इंडिया के प्रमुख और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सभी के लिए किफायती तकनीक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबके लिए प्रौद्योगिकी को उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ऐसी पहलों से प्रौद्योगिकी अधिक किफायती और सुलभ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर और उन्नत प्रोग्राम गाइड की मदद से नागरिक अब अतिरिक्त उपकरणों के बिना आसानी से सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।

दूसरी पहल के बारे में बात करते हुए, श्री वैष्णव ने मायवेव्स को कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक शक्तिशाली मंच बताया। मायवेव्स कंटेंट क्रिएटर्स को कंटेंट बनाने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाता है, जिससे देश के डिजिटल प्रणाली को मजबूती मिलती है। केंद्रीय बजट की घोषणाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बढ़ावा देने और सृजनात्मक क्षेत्र को समर्थन देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री श्री वैष्णव ने बताया कि यूट्यूब के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही राष्ट्रीय एआई कौशल पहल के तहत लगभग 15,000 युवाओं को बिना किसी शुल्क के प्रशिक्षित किया जाएगा।
श्री वैष्णव ने 'क्रिएटर्स कॉर्नर' पहल के बारे में भी बात की और इसकी बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र किया, जिसके तहत कुछ कंटेंट को पहले ही 30 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। उन्होंने देश भर के रचनाकारों से आग्रह किया कि वे दूरदर्शन और मायवेव्स जैसे प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से उपयोग करके देश की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय विविधता को प्रदर्शित करें।
रचनाकारों से इन प्लेटफार्मों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए, श्री वैष्णव ने उन्हें अपने क्षेत्रों की कहानियों को प्रस्तुत करने और एक जीवंत तथा समावेशी मीडिया परिदृश्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
रचनाकारों को सशक्त बनाना, पहुंच का विस्तार करना
श्री संजय जाजू ने राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल, मायवेव्स प्लेटफॉर्म और टेलीविजन सेटों में अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर की शुरुआत के साथ-साथ उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कार्यक्रम गाइड के बारे में बताते हुए कहा कि ये तीनों पहलें एक समान नीतिगत दिशा को दर्शाती हैं। इन पहलों का उद्देश्य सृजनात्मक लोगों के लिए एक मजबूत परितंत्र का निर्माण करना और गुणवत्तापूर्ण प्रसारण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना है।
राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल सृजनशील लोगों को बदलती डिजिटल दुनिया में अपनी क्षमताएं विकसित करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी। मायवेव्स एक जीवंत डिजिटल परितंत्र के निर्माण में सहयोग देगा, जिससे नागरिक सामग्री बना सकेंगे, अपलोड कर सकेंगे और साझा कर सकेंगे। तीसरी पहल, जो डीडी फ्री डिश से संबंधित है, नागरिकों को सेट-टॉप बॉक्स की आवश्यकता के बिना सामग्री तक पहुंच प्रदान करके महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाती है, जिससे विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंच में सुधार होता है।
संक्षेप में, पहली पहल लोगों को सक्षम बनाएगी, दूसरी पहल अवसरों के विस्तार को सक्षम बनाएगी और तीसरी पहल सभी के लिए सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करेगी।
एआई के जरिए सृजनात्मक लोगों को सशक्त बनाना
सृजनशील लोगों पर इस साझेदारी के प्रभाव के बारे
में बात करते हुए यूट्यूब, भारत की प्रबंध निदेशक गुंजन सोनी ने कहा, "हमारा मानना है कि एआई में भारत की गतिशील सृजनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए उल्लेखनीय अवसर खोलने की क्षमता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के साथ अपने सहयोग के माध्यम से, हमारा लक्ष्य सृजनशील लोगों और पेशेवरों को भविष्य के उपकरणों में महारत हासिल करने, एआई का लाभ उठाकर अधिक आकर्षक कहानियां सुनाने, नए दर्शकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने और मीडिया के भविष्य को आकार देने में भूमिका निभाने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करना है। यह पहल 'डिजिटल इंडिया' के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां प्रौद्योगिकी सभी के लिए एक सहायक के रूप में कार्य करती है।"

राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गूगल और यूट्यूब के साथ साझेदारी में रचनात्मक एवं मीडिया क्षेत्रों के 15,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय एआई कौशल प्रशिक्षण पहल की घोषणा की है। यह पहल भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है और इसका उद्देश्य एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स (एवीजीसी) और मीडिया प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में एआई क्षमताओं को मजबूत करना है।
एआई कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण, 23 मार्च से 30 जून, 2026 तक चलेगी, जिसमें गूगल करियर सर्टिफिकेट और गूगल क्लाउड जनरेटिव एआई लर्निंग पाथ के माध्यम से बुनियादी एआई प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रतिभागियों को एआई एसेंशियल्स, प्रॉम्प्टिंग एसेंशियल्स, इंट्रोडक्शन टू जनरेटिव एआई और जनरेटिव एआई लीडर पाथ जैसे पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। इस चरण को सफलतापूर्वक पूरा करना अगले चरण में प्रवेश के लिए अनिवार्य होगा।

एआई कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण जुलाई से दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा जो रचनात्मक उद्योग के लिए उन्नत, व्यावहारिक और परियोजना-आधारित विशेषज्ञता पर केंद्रित होगा। पाठ्यक्रम में कहानी कहने की कला, यू-ट्यूब के सर्वोत्तम तरीकों और जेमिनी 3, नैनो बनाना, वीओ और वर्टेक्स एआई जैसे एआई उपकरणों के उपयोग पर उन्नत प्रशिक्षण शामिल होगा। यह प्रशिक्षण देश भर के प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा।
यह पहल सृजनशील लोगों, मीडिया पेशेवरों, छात्रों और डेवलपर्स को भविष्य के लिए तैयार कौशल विकसित करने में सहायता करेगी और भारत को डिजिटल सामग्री तथा नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में योगदान देगी।
मायवेव्स – वेव्स ओटीटी के अंतर्गत नागरिक निर्माता मंच
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म के अंतर्गत एक नई सुविधा मायवेव्स की भी घोषणा की, जो नागरिकों को सामग्री बनाने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाएगी। मायवेव्स को उपयोगकर्ता द्वारा निर्मित सामग्री (यूजीसी) के लिए एक संरचित मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज' जैसी राष्ट्रीय पहलों में भागीदारी को भी बढ़ावा देगा।
यह प्लेटफॉर्म कंटेंट देखने से हटकर कंटेंट में सक्रिय भागीदारी की ओर एक बदलाव का प्रतीक है, जिससे वेव्स ओटीटी न केवल देखने का बल्कि कंटेंट बनाने का भी एक मंच बन जाता है। मायवेव्स शॉर्ट वीडियो, वर्टिकल वीडियो और एपिसोडिक कंटेंट सहित कई फॉर्मेट को सपोर्ट करेगा और भारतीय भाषाओं में बहुभाषी इंटरफेस प्रदान करेगा। उम्मीद है कि मायवेव्स देश भर के उभरते रचनाकारों और कहानीकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
टेलीविजन सेटों में उन्नत ईपीजी और अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर
टेलीविजन देखना आसान और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बिल्ट-इन सैटेलाइट ट्यूनर वाले टेलीविजन सेट और एक नया, उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रोग्राम गाइड (ईपीजी) पेश किया है। इस पहल से दर्शक अलग से सेट-टॉप बॉक्स की आवश्यकता के बिना सीधे अपने टेलीविजन पर डीडी फ्री डिश चैनल देख सकेंगे, जिससे अतिरिक्त खर्च, तार लगाने (वायरिंग) का खर्च और कई रिमोट के झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही, नया उन्नत प्रोग्राम गाइड उपयोगकर्ताओं को एक सरल और सहज इंटरफ़ेस के माध्यम से एक ही स्थान पर चैनलों और प्रोग्राम शेड्यूल को आसानी से ब्राउज़ करने की सुविधा देगा, जिससे देश भर के घरों के लिए समग्र देखने का अनुभव अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बढ़ावा देने, सार्वजनिक प्रसारण को सशक्त बनाने के साथ-साथ इसकी सुलभता में सुधार करने और सूचना एवं प्रसारण क्षेत्र के लिए एआई-कुशल, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत इन प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। प्रसार भारती सार्वजनिक प्रसारण में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, वहीं आईआईसीटी रचनात्मक क्षेत्र के लिए एआई कौशल कार्यक्रम का संचालन करेगा और वेव्स ओटीटी 'क्रिएट इन इंडिया' चुनौती के समन्वय सहित नागरिक भागीदारी और सामग्री निर्माण के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
राष्ट्रपति ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर रामलला के दर्शन किये
श्री राम यंत्र स्थापना करने से, राम राज्य के आदर्शों का पालन करते हुए, हम नैतिकता और धार्मिक आचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 मार्च, 2026) उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर राम लला के दर्शन किये। उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के भीतर विभिन्न स्थानों पर दर्शन एवं आरती की और श्री राम यंत्र स्थापना और पूजन भी किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना ही उनका परम सौभाग्य है, यह वही पवित्र नगरी है जहां प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के प्रारंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए वास्तव में एक सौभाग्य है।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस अत्यंत पवित्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजन, यहां राम लला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण के दिन हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से हम इन लक्ष्यों को 2047 तक, शायद उससे भी पहले, प्राप्त कर लेंगे। 21वीं सदी में, हमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि राम-राज्य में न कोई दुखी है, न निर्धन है, न परावलंबी है, न बुद्धिहीन है और न ही कोई संस्कारहीन है।
राष्ट्रपति ने कहा कि राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। प्रभु श्री राम के जीवन के अनेक उदाहरण सर्वव्यापी और समावेशी जीवन दर्शन के आदर्श को दर्शाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समकालीन संदर्भ में सामाजिक समावेश और आर्थिक न्याय सहित राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और उन्हें क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राम राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश का पुनर्जागरण आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी आयामों में हो रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों को एकता की भावना से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के प्रति भक्ति के पवित्र बंधन से एकजुट होकर और सभी के प्रति आत्मीयता की भावना रखते हुए, हमें राष्ट्र निर्माण में संलग्न होना चाहिए।
वस्त्र मंत्रालय ने मुंबई में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम पर क्षेत्रीय हितधारक परामर्श आयोजित किया
परामर्श सत्रों में केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं पर चर्चा हुईउद्योग ने वस्त्र-केंद्रित बजट का स्वागत किया और निवेश एवं विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
वस्त्र मंत्रालय ने क्षेत्रीय परामर्शों की एक श्रृंखला शुरू की है, जिसमें पहला परामर्श मुंबई में आयोजित किया गया। यह परामर्श वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणाओं के बाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विनिर्माण विस्तार, फाइबर की उपलब्धता, रोजगार सृजन और स्थिरता पर केंद्रित व्यापक उपायों के माध्यम से श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करना है।

इस परामर्श बैठक में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान की राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, उद्योग संघों और क्लस्टर प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों, विकास भागीदारों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। बैठक में भारत के वस्त्र इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रमुख पहलों के लिए कार्यान्वयन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने अपने संबोधन में विकास और रोजगार के प्रमुख चालक के रूप में वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता में सुधार करने और वस्त्र क्षेत्र में भारत को एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करने के महत्व पर बल दिया।
वस्त्र मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री रोहित कंसल ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने प्रस्तावित एकीकृत वस्त्र क्षेत्र कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने नीतिगत उद्देश्यों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने के लिए सरकार और उद्योग के बीच निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया और वस्त्र मूल्य श्रृंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए निवेश, बुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन को समन्वित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस परामर्श सत्र में वस्त्र क्षेत्र के एकीकृत कार्यक्रम के अंतर्गत कई प्रमुख पहलों पर समानांतर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें राष्ट्रीय फाइबर योजना, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार (टीईईएम) योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स इको पहल, समर्थ 2.0 और मेगा टेक्सटाइल पार्क शामिल हैं। ये पहलें फाइबर से लेकर तैयार उत्पादों तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को समर्थन देने के प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं।
संवादात्मक चर्चा सत्र में हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कार्यक्रम की रूपरेखा, वित्तपोषण तंत्र, प्रौद्योगिकी अपनाने और क्लस्टर स्तर की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाने, बुनियादी ढांचे तक पहुंच में सुधार करने और प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने के महत्व पर बल दिया।
क्षेत्रीय हितधारक परामर्श, मंत्रालय के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य उद्योग और राज्य सरकारों के साथ संरचित जुड़ाव को मजबूत करना और भारत के वस्त्र क्षेत्र के विकास, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक समन्वित रोडमैप को आगे बढ़ाना है।
केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी की समीक्षा के लिए संसदीय परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की
आवास और शहरी कार्य तथा विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने कल आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (मोहुआ) की संसदीय परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कार्यकलाप तथा उनके चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।
बैठक में मोहुआ के सचिव श्री श्रीनिवास कटिकीथाला, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्यसभा और लोकसभा के सांसद उपस्थित थे।
बैठक के दौरान सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं में वर्तमान में तैनात आधुनिक निर्माण तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। चर्चा में उन्नत निर्माण तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला गया, जो तेज परियोजना निष्पादन, बेहतर संरचनात्मक गुणवत्ता और सार्वजनिक अवसंरचना विकास में उन्नत दक्षता प्रदान कर रहे हैं।



समिति ने सामान्य पूल आवासीय आवास (जीपीआरए) कॉलोनियों तथा अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए लागू की जा रही नवीन पुनर्विकास मॉडलों की भी समीक्षा की। ये पुनर्विकास पहलें मूल्यवान शहरी भूमि का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने, आधुनिक एवं सतत आवासीय अवसंरचना प्रदान करने तथा सरकारी कर्मचारियों के रहन-सहन की स्थितियों में सुधार लाने का लक्ष्य रखती हैं।अपने उद्गारों में श्री मनोहर लाल ने कुशल निर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने तथा गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध परियोजना पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों तथा बेहतर परियोजना प्रबंधन प्रक्रियाओं का उपयोग देशभर में सार्वजनिक अवसंरचना की डिलीवरी को बदलने में सहायक हो रहा है।परामर्शी समिति के सदस्यों ने निर्माण प्रक्रियाओं को मजबूत करने, परियोजना निगरानी तंत्र में सुधार लाने तथा सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता और सततता को और बढ़ाने पर अपने विचार एवं सुझाव साझा किए।
केंद्रीय मंत्री ने सांसदों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत किया तथा आश्वासन दिया कि उनके मूल्यवान सुझावों को एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी के कार्यकलाप में सुधार लाने तथा देशभर में अवसंरचना विकास को और मजबूत करने के लिए उचित रूप से ध्यान में रखा जाएगा।
रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा निर्देश नियमावली 2026 जारी की
रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने 9 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में आयोजित एक समारोह में रक्षा मंत्रालय के सुरक्षा निर्देश नई नियमावली 2026 का विमोचन किया। यह नियमावली सुरक्षा दिशानिर्देशों की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाला एक व्यापक दस्तावेज है, जिसे बदलते सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा।
रक्षा सचिव ने अपने संबोधन में उभरते खतरों और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सुरक्षा अनुशासन का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना चाहिए।
श्री राजेश कुमार सिंह ने इन विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देशों को तैयार करने में मंत्रालय के सुरक्षा कार्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों से इनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का आग्रह किया और कहा कि यह नियमावली मंत्रालय के भीतर एक सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में सहायक होगी।

बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया के विकसित हो रहे समुद्री परिदृश्य के बीच निगरानी और तैयारियों को मजबूत किया
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे युद्ध घटनाक्रम से बदल रहे समुद्री परिदृश्य के मद्देनजर निगरानी और तैयारी उपायों को मजबूत किया है। इसमें भारतीय समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भारतीय जहाजों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता बनाए रखना मुख्य फोकस है।
एमओपीएसडब्ल्यू के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विकसित हो रही स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें विदेश मंत्रालय (MEA), महानिदेशक, विदेश व्यापार, (DGFT) और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) शामिल थे। इसमे शिपिंग उद्योग और व्यापार संगठनों जैसे RIL, INSA, CSLA और FIEO के हितधारकों ने भी भाग लिया।
यह समीक्षा माननीय केंद्रीय पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज मंत्री श्री सरबानंद सोनोवाल द्वारा पहले से बदल रहे समुद्री परिदृश्य की समीक्षा बैठक की अगली कड़ी थी।
मंत्रालय ने सभी हितधारकों को भारत सरकार द्वारा, विशेष रूप से मोपीएसडब्ल्यू द्वारा, मध्य पूर्व में विकसित हो रही स्थिति के बाद उठाए जा रहे कदमों से अवगत कराया। एमओपीएसडब्ल्यू शिपिंग उद्योग के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) में 24 घंटे हेल्पलाइन स्थापित की गई है ताकि समुद्री यात्रियों के लिए समन्वय और समर्थन सुगम हो।
एमओपीएसडब्ल्यू में माहौल को लगातार ट्रैक करने के लिए निगरानी तंत्र भी स्थापित किया गया है।भारतीय समुद्री यात्रियों, भारतीय ध्वज वाले जहाजों और समुद्री व्यापार संचालन की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने के उपायों का सलाह जारी किया गया है, जो DGS सर्कुलर नंबर 08 ऑफ 2026 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें सभी भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय समुद्री यात्रियों को उन्नत सुरक्षा उपाय अपनाने और DGS सर्कुलर 08 ऑफ 2024 के तहत रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, DGS सर्कुलर नंबर 09 ऑफ 2026 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से क्रू सेफ्टी एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें भारतीय समुद्री यात्रियों और शिपिंग हितधारकों को तत्काल निर्देश दिए गए हैं। इनमें भारत के तेहरान दूतावास में पंजीकरण और डायरेक्टोरेट को क्रू विवरण जमा करना शामिल हैं।
भारतीय ध्वज वाले जहाज सुरक्षित बने हुए हैं और भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ किसी भी पुष्ट हिरासत, चढ़ाई या हादसे की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। फारस की खाड़ी क्षेत्र (होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 24 और पूर्व में 11, जिसमें ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र शामिल) में मौजूद सभी 35 भारतीय ध्वज वाले जहाजों और एडेन की खाड़ी में 03 जहाजों को LRIT नेशनल डेटा सेंटर के माध्यम से प्रति घंटा अंतराल पर लगातार ट्रैक किया जा रहा है, इन्हें नियमित SITREPs जारी किए जा रहे हैं।
मंत्रालय डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के माध्यम से स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है, जिसमें प्रमुख भारतीय बंदरगाहों, समुद्री अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय है। भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ भारतीय समुद्री यात्रियों वाले विदेशी ध्वज वाले जहाजों के लिए उन्नत निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र सक्रिय किए गए हैं ताकि निरंतर स्थितिजन्य जागरूकता और परिचालन तैयारी सुनिश्चित हो।
शिपिंग कंपनियों, जहाज संचालकों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंसियों (RPSLs) को संवेदनशील क्षेत्रों में क्रू तैनाती में सावधानी बरतने, यात्रा-विशिष्ट जोखिम मूल्यांकन करने और समुद्री यात्रियों तथा उनके परिवारों के साथ नियमित संचार बनाए रखने की सलाह दी गई है।
भारतीय समुद्री यात्रियों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित समन्वय तंत्र भी स्थापित किए गए हैं।
मंत्रालय ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और पश्चिम एशियाई गंतव्यों के लिए जा रहे जहाजों और कार्गो की स्थिति की भी समीक्षा की।
कुल मिलाकर भारत भर के बंदरगाह संचालन स्थिर बने हुए हैं। बंदरगाहों को निर्यातकों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने और EXIM व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
मेजर पोर्ट्स ने जहाजों की गतिविधियों पर शिपिंग लाइनों और जहाज एजेंटों के साथ समन्वय में निरंतर निगरानी, क्षेत्र में विकासों का रीयल-टाइम मूल्यांकन और जहाज तथा कार्गो स्थिति की नियमित रिपोर्टिंग सहित परिचालन उपाय लागू किए हैं। जहां आवश्यक हो, अतिरिक्त भंडारण स्थान की व्यवस्था की गई है, जबकि रेफ्रिजरेटेड और नाशवान कार्गो consignments पर करीबी निगरानी की जा रही है ताकि आवश्यकता पर प्राथमिकता से हैंडलिंग सुनिश्चित हो।
मंत्रालय भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय में सभी घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए रख रहा है ताकि भारतीय समुद्री हितों की रक्षा हो, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और समुद्री व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स संचालन सुचारू रूप से चले।



सीएसआईआर एनआईएससीपीआर और आईएनएसए ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विज्ञान संचार के रचनात्मक तरीको पर कार्यशाला का आयोजन किया
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह 2026 के हिस्से के रूप में विज्ञान भवन नई दिल्ली में "विज्ञान संचार के रचनात्मक तरीको" पर एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए) ने संयुक्त रूप से किया था।


कार्यशाला का उद्घाटन आईएनएसए के अध्यक्ष प्रो. शेखर सी. मांडे ने किया। उन्होंने अनुसंधान और समाज के बीच की खाई को पाटने और समावेशी वैज्ञानिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान संचार को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने अपने स्वागत भाषण में विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में संस्थान की भूमिका का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिक ज्ञान को अधिक सुलभ और प्रभावशाली बनाने के लिए रचनात्मक और बहुभाषी दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
तकनीकी सत्रों में प्रख्यात वक्ताओं ने विज्ञान संचार के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। हैदराबाद विश्वविद्यालय की प्रो. शर्मिष्ठा बनर्जी ने विज्ञान संचार अंतर को दूर करने के लिए कहानी कहने और दर्शक-केंद्रित संचार के महत्व पर बल दिया। गुब्बी लैब्स की डॉ. एच. एस. सुधीरा ने लोकप्रिय विज्ञान लेखन और जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल के उपयोग पर बात की।
सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष मोहन गोरे ने लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं, पुस्तकों, शोध पत्रिकाओं और क्षेत्रीय आउटरीच पहलों के माध्यम से सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के योगदान का उल्लेख करते हुए विज्ञान संचार की प्रक्रिया और मीडिया प्रारूपों के बारे में विस्तार से बताया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परमानंद बर्मन ने विज्ञान के साथ सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ाने में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर चर्चा की। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के डॉ. मेहर वान ने विज्ञान संचार में क्या करें और क्या न करें पर एक व्याख्यान दिया, जो व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और प्रतिभागियों को चिंतनशील सीखने में शामिल करता है।
प्रतिभागियों के दृष्टिकोण और अपेक्षाओं का आकलन करने के लिए एक कार्यशाला पूर्व सर्वेक्षण और इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 150 छात्र कार्यशाला में शामिल हुए। यह विज्ञान संचार कौशल को मजबूत करने में मजबूत शैक्षणिक जुड़ाव और रुचि को दर्शाता है। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को समकालीन उपकरणों, डिजिटल रणनीतियों और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि से लैस करना है ताकि विविध दर्शकों के बीच विज्ञान को प्रभावी ढंग से संवाद किया जा सके। इससे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत के विज्ञान संचार इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके।
सीएसआईआर और इसकी प्रयोगशालाओं ने देश भर में व्याख्यानों प्रदर्शनों और जन जागरूकता कार्यक्रमों के साथ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 मनाया
नई दिल्ली: वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और उसकी प्रयोगशालाओं ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 को राष्ट्रव्यापी स्तर पर व्याख्यानों, छात्र भ्रमण, प्रदर्शनों और जन जागरूकता कार्यक्रमों सहित कई आकर्षक गतिविधियों के माध्यम से मनाया, जिनका उद्देश्य युवा मन और आम जनता के बीच वैज्ञानिक जागरूकता और जिज्ञासा को बढ़ावा देना था।
इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस "विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत को उत्प्रेरित करना" विषय के तहत मनाया गया, जिसमें वैज्ञानिक नवाचार को आगे बढ़ाने और एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत को आकार देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित समारोहों के एक भाग के रूप में, सीएसआईआर-
स्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (सीएसआईआर-
ईजीआईबी) और विज्ञान संचार और प्रसार निदेशालय (एससीडीडी), सीएसआईआर मुख्यालय ने नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन के जीवन और विरासत तथा उनके द्वारा की गई रमन प्रभाव की अभूतपूर्व खोज को स्मरण करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।
डॉ. सीवी रमन मार्ग पर सर सीवी रमन के जीवन, वैज्ञानिक यात्रा और अग्रणी योगदान को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने आम जनता को आकर्षित किया और भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत के बारे में जागरूकता पैदा की।

इस समारोह में एक सशक्त अनुभवात्मक आयाम जोड़ते हुए, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) के वैज्ञानिकों, डॉ. सुबाशिस पांजा, डॉ. शिबू साहा और डॉ. विद्यानंद सिंह, तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) के डॉ. सौमिक सिद्धांत और श्री हिमांशु यादव (पीएच.डी. छात्र) ने रमन प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया।
इस प्रदर्शन ने प्रतिभागियों को उस घटना को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर प्रदान किया जिसने आधुनिक स्पेक्ट्रोस्कोपी में क्रांति ला दी और जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति का आधार बनी हुई है।

इसके बाद सीएसआईआर-एनपीएल और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से एक रोचक व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें रमन प्रभाव, इसका वैज्ञानिक महत्व और पदार्थ विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इसके व्यापक अनुप्रयोगों के बारे में बताया गया। इस सत्र में जामिया हमदर्द के उत्साही स्कूली छात्रों और स्नातक छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की।
इसके अतिरिक्त, भाग लेने वाले छात्रों को सीएसआईआर-आईजीआईबी की विभिन्न प्रयोगशालाओं का निर्देशित दौरा कराया गया, जहां उन्हें चल रही अनुसंधान गतिविधियों और अत्याधुनिक सुविधाओं से परिचित कराया गया, जिससे समकालीन वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति उनका ज्ञान और भी समृद्ध हुआ।
इस अवसर को चिह्नित करने के लिए एक विशेष जनसंपर्क पहल के तहत, विज्ञान संचार एवं प्रसार निदेशालय, सीएसआईआर मुख्यालय ने संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से, शाम को प्रतिष्ठित कुतुब मीनार को रोशन किया । राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के बारे में जागरूकता फैलाने और समाज में विज्ञान की परिवर्तनकारी भूमिका का जश्न मनाने के लिए स्मारक को विशेष रूप से रोशन किया गया था।
इन राष्ट्रव्यापी गतिविधियों के माध्यम से, सीएसआईआर ने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, युवा शिक्षार्थियों को प्रेरित करने और विज्ञान को सार्थक और आकर्षक तरीकों से समाज के करीब लाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो विज्ञान-आधारित विकसित भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप है।
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आज मुंबई में जियो पारसी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक आयोजित की
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमार की अध्यक्षता में आज मुंबई में जियो पारसी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, महाराष्ट्र और गुजरात के अल्पसंख्यक कल्याण विभागों के प्रतिनिधियों, मुंबई और गुजरात की पारसी पंचायतों के सदस्यों और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान, पारसी जनसंख्या में गिरावट के कारणों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिनमें जनसांख्यिकीय रुझान, देर से विवाह, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ और बदलते सामाजिक स्वरूप शामिल थे। हितधारकों ने समन्वित नीतिगत समर्थन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इन मुद्दों के समाधान के लिए सुझाव साझा किए।

समिति ने पारसी समुदाय में समय पर और शीघ्र विवाह को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा की। इनमें जागरूकता अभियान को मजबूत करना, परामर्श और विवाह संबंधी सहायता प्रणालियों का विस्तार करना, पंचायतों और संस्थानों के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर भागीदारी को प्रोत्साहित करना और पारसी युवाओं तथा परिवारों के बीच संपर्क प्रयासों को बढ़ाना शामिल था।
सचिव ने दीर्घकालिक सामुदायिक स्थिरता सुनिश्चित करने में आर्थिक सशक्तिकरण के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने पारसी समुदाय के सदस्यों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को एनएमडीएफसी द्वारा स्टार्टअप, स्वरोजगार और कौशल-आधारित उद्यमों के लिए प्रदान किए जाने वाले रियायती ऋणों और उद्यमिता सहायता का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

बैठक में जियो पारसी योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जो पारसी समुदाय की जनसंख्या को बढाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अनूठी केंद्रीय क्षेत्र योजना है। यह योजना प्रजनन उपचारों से संबंधित चिकित्सा सहायता, बाल देखभाल सहायता, जागरूकता कार्यक्रमों तथा परिवार निर्माण और जनसंख्या स्थिरीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई की गई सामुदायिक पहलों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
इन चर्चाओं में भारत सरकार की इस प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई कि वह लक्षित समाधानों और हितधारकों के साथ निरंतर सहयोग के माध्यम से पारसी समुदाय की समृद्ध विरासत, जनसांख्यिकीय जीवंतता और सामाजिक-आर्थिक कल्याण को संरक्षित और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत ब्रिटेन गृह मामलों की छठी वार्ता नई दिल्ली में आयोजित की गई
भारत-ब्रिटेन गृह मामलों पर छठी वार्ता (एचएडी) आज नई दिल्ली में आयोजित की गई। सीमा प्रबंधन सचिव डॉ. राजेंद्र कुमार ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का और ब्रिटेन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह कार्यालय के द्वितीय स्थायी सचिव श्री साइमन रिडले ने किया। बैठक में दोनों देशों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने मौजूदा सहयोग का आकलन किया। इसके साथ ही खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों और ब्रिटेन में भारत विरोधी समूहों की गतिविधियां, मादक पदार्थों की तस्करी, प्रवासन, आपराधिक न्याय और कानून प्रवर्तन सहयोग, साइबर सुरक्षा सहित आतंकवाद और संगठित अपराधों आदि के खिलाफ सक्रिय सहयोग हेतु पारस्परिक हितों और तालमेल के अन्य क्षेत्रों की पहचान की। ब्रिटेन में भारतीय गणमान्य व्यक्तियों और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा में सेंधमारी को लेकर भारत की चिंताओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

बैठक का समापन दोनों देशों की मौजूदा सहयोग स्तर पर पारस्परिक संतुष्टि और दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने की गति को बनाए रखते हुए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति के साथ हुआ।



राष्ट्रपति ने जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी
प्रचंड में भरी गई उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मुराष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (27 फरवरी, 2026) राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी। इससे पहले, उन्होंने क्रमशः 2023 और 2025 में सुखोई 30 एमकेआई और राफेल में उड़ानें भरी थीं।

यह मिशन दो विमानों के एलसीएच फॉर्मेशन के रूप में क्रियान्वित किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ पहले विमान में उड़ान भरी, जबकि वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए महेंद्र दूसरे विमान में नंबर 2 के रूप में सवार थे। लगभग 25 मिनट के इस मिशन के दौरान, उन्होंने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी और एक टैंक लक्ष्य पर हमला किया।
बाद में आगंतुक पुस्तिका में, राष्ट्रपति ने एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा, “भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।”
शाम को राष्ट्रपति जैसलमेर में भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का अवलोकन करेंगी।
न्यायधानी को जाम से मुक्ति दिलाने केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू की बड़ी पहल: रिंग रोड परियोजना को केंद्र से हरी झंडी; हवाई अड्डा, औद्योगिक क्षेत्र और नेशनल हाईवे को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
सरकार स्थानीय उत्पादन और निर्यात के लिए स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है इस लक्ष्य को साकार करने में भारतीय राजनयिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है रक्षा मंत्री का भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधन
भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने 25 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता को स्थानीय उत्पादन और निर्यात दोनों के लिए विस्तारित करने के भारत सरकार के दृढ़ संकल्प और इस परिकल्पना को साकार करने में भारतीय राजनयिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। रक्षा क्षेत्र में विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को आत्मसात करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत रक्षा उपकरणों के प्रमुख आयातक से लेकर सभी क्षेत्रों में प्लेटफार्मों के निर्माता और निर्यातक बनने तक का लंबा सफर तय कर चुका है।

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समुदाय भारत की विकास गाथा पर बारीकी से नजर रख रहा है और उसकी नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि भारत की सकारात्मक छवि को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने उनसे कहा कि विदेश में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय वे हमेशा याद रखें कि वे 1.4 बिलियन भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने उनसे हर संस्कृति के नए विचारों, लोगों और दृष्टिकोणों के प्रति खुले रहने और भारत की सभ्यतागत ज्ञान के मूल्यों को अपने साथ रखने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के लिए किए गए उनके परिश्रम के लिए उन्हें बधाई दी।
इस संवाद से पहले, प्रशिक्षु अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा रक्षा कूटनीति की विभिन्न पहलों, रक्षा बजट, त्रि-सेवा एकीकरण और रक्षा संबंधी खरीद के बारे में जानकारी दी गई। इस बैच में 55 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थे, जिनमें 53 भारतीय प्रशिक्षु और भूटान के 2 प्रशिक्षु थे।

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रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने सिकंदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में मित्रा विषय पर आयोजित वार्षिक संगोष्ठी को संबोधित किया
रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने 24 फरवरी, 2026 को सिकंदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय (सीडीएम) में अपने संबोधन में कहा कि जैसे-जैसे युद्ध भौतिक से कृत्रिम और संज्ञानात्मक क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहा है, भारतीय सशस्त्र बलों को नेट-केंद्रित अभियानों से हटकर बुद्धिमान युद्ध की ओर अग्रसर होना चाहिए और बहु-क्षेत्रीय अभियानों (एमडीओ) से आगे बढ़कर सर्वक्षेत्रीय सर्वक्षेत्रीय अभियानों (एआरएडीओ) की ओर बढ़ना चाहिए। 'बहु-क्षेत्रीय एकीकृत तकनीकी रूप से सशक्त लचीली सशस्त्र सेना मित्रा विषय पर आयोजित वार्षिक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए, रक्षा प्रमुख ने 'सैन्य मामलों में तीसरी क्रांति' पर प्रकाश डाला, जिसकी विशेषता अभिसारी युद्ध है जो संघर्ष के सभी स्तरों पर संपर्क और गैर-संपर्क, गतिज और गैर-गतिज, और पुराने और नए क्षेत्रों को एकीकृत करता है। उन्होंने परमाणु-रहित रणनीतिक प्रतिरोध स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे संघर्ष के हर स्तर पर जीत हासिल करने की क्षमता सुनिश्चित हो सके।
रक्षा प्रमुख ने 24-25 फरवरी, 2026 को हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के साथ 'नॉलेज पार्टनर' के रूप में वार्षिक सेमिनार का आयोजन किया। इस वर्ष का विषय 'मित्रा' तेजी से जटिल होते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य में सैन्य और युद्ध रणनीतियों की बदलती भूमिका को रेखांकित करता है।
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यह संगोष्ठी भारत के विशिष्ट परिचालन परिवेश के साथ समकालीन संघर्षों से प्राप्त सबकों को संरेखित करने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करती है, जिसका केंद्र बिंदु आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक सुधार है। इसका उद्देश्य एक ऐसी मित्रा सशस्त्र सेना विकसित करना है जो बहुआयामी दृष्टि, एकीकृत कार्यप्रणाली, प्रौद्योगिकी-सशक्त क्रियान्वयन और दृढ़ उद्देश्यों वाली हो। वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों, विद्वानों, उद्योग भागीदारों और विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट वार्षिक संगोष्ठी 2026 मित्रा के अंतर्गत व्यापक राष्ट्रीय शक्ति के विकास के लिए बौद्धिक विमर्श और रणनीतिक दूरदर्शिता को बढ़ावा देती है, ताकि भविष्य के संघर्षों के प्रशासन और प्रबंधन के साथ-साथ एक दृढ़ भारत का निर्माण किया जा सके।
दिसंबर 1970 में स्थापित, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट एक प्रमुख त्रि-सेवा संस्थान रहा है जो सैन्य नेतृत्व को समकालीन प्रबंधन विचारों, अवधारणाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं से लैस करने के लिए समर्पित है। वर्षों से, इसके वार्षिक सेमिनारों में रणनीतिक चुनौतियों और आत्मनिर्भरता से लेकर भू-राजनीतिक शक्ति परिवर्तन और नेतृत्व रूपांतरण तक के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है, जिससे भविष्य के संघर्षों के प्रशासन और प्रबंधन तथा एक लचीले भारत के निर्माण में भारत के सैन्य भविष्य को आकार देने में कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की भूमिका मजबूत हुई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एवं कृषि उन्नति योजनाओं की समीक्षा
किसानों को MSP का लाभ सुनिश्चित करने हेतु मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात एवं महाराष्ट्र को चना, मसूर व सरसों की खरीद की मंजूरीकेंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने 12 सफदरजंग रोड स्थित आवास पर 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल माध्यम से विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एवं कृषि उन्नति योजना (KY) के अंतर्गत राज्यों में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा इन दोनों योजनाओं में जारी धनराशि के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजटीय व्यय करना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किसानों की आय में ठोस वृद्धि सुनिश्चित करना है।

श्री चौहान ने राज्यों से आग्रह किया कि उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोग 31 मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि समयबद्ध व्यय के साथ-साथ गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है।

बैठक में कृषि अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, तकनीकी नवाचार, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, बीज वितरण, फसल विविधीकरण तथा मूल्य संवर्धन जैसी पहलों पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से कहा कि वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करें तथा नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता दें, जिससे किसानों की लागत घटे और उत्पादकता में वृद्धि हो।
बैठक के दौरान रबी विपणन सत्र के अंतर्गत विभिन्न राज्यों द्वारा फसलों की खरीद के संबंध में प्रस्तुत प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए निम्नलिखित स्वीकृतियाँ प्रदान की गईं जिसमें मध्य प्रदेश को चना एवं मसूर की खरीद की स्वीकृति, राजस्थान एवं गुजरात को चना एवं सरसों की खरीद की स्वीकृति, महाराष्ट्र को चना की खरीद की स्वीकृति शामिल हैं।
इन स्वीकृतियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुरूप प्राप्त हो सके तथा बाजार में मूल्य स्थिरता बनी रहे।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि खरीद प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण की जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि खरीद केंद्र पर्याप्त मात्रा में हों, तौल, भंडारण एवं भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शिता एवं ईमानदारी से संचालित हो तथा किसानों को न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
श्री चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने राज्यों से अपेक्षा की कि वे योजनाओं के क्रियान्वयन में नवाचार, तकनीक और पारदर्शिता को प्राथमिकता दें, जिससे किसानों का विश्वास और सुदृढ़ हो।
बैठक के अंत में राज्यों के प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि वे योजनाओं के अंतर्गत धनराशि के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग के लिए तेजी से कार्य करेंगे तथा किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेंगे।
बैठक में गुजरात के कृषि मंत्री श्री जीतूभाई, असम के श्री अतुल बोरा, बिहार के श्री रामकृपाल यादव, महाराष्ट्र के श्री दत्तात्रेय भरणे, उत्तराखंड के श्री गणेश जोशी, राजस्थान के श्री किरोड़ी लाल मीणा, हरियाणा के श्री श्याम सिंह राणा, केरल के श्री पी. प्रसाद तथा मध्य प्रदेश के श्री ऐदल सिंह, कृषि मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, सिक्किम राष्ट्र के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से एकीकृत महसूस करता है: मुख्यमंत्री सिक्किम प्रेम सिंह तामांग - गोले
छत्तीसगढ़ प्रेस बिरादरी के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज मिन्तोकगांग में मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तामांग से शिष्टाचार भेंट की। बातचीत के दौरान, मुख्यमंत्री ने सिक्किम सरकार द्वारा की गई विभिन्न विकासात्मक पहलों और प्रगतिशील नीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने राज्य की शांत पारिस्थितिकी और चीन, नेपाल तथा भूटान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करने वाले एक रणनीतिक सीमावर्ती राज्य के रूप में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। सतत विकास पर जोर देते हुए, उन्होंने सिक्किम में जारी जैविक खेती (Organic Farming) प्रथाओं और राज्य की अर्थव्यवस्था पर उनके सफल प्रभाव के बारे में बात की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के उपायों और व्यापक वन क्षेत्र के महत्व को भी रेखांकित किया, जिसने सामूहिक रूप से राष्ट्र के 'हरित राज्य' के रूप में सिक्किम की पहचान को मजबूत किया है।

हाफिजपुर पुलिस ने मुठभेड़ में इनामी गैंगस्टर को लंगड़ा कर की नए साल की शुरुआत
हापुड़- रिपोर्ट हरेन्द्र शर्मा , यूपी के हापुड़ जिले में चेकिंग के अभियान के दौरान हाफिजपुर पुलिस की 20 हजार के इनामी गैंगस्टर से मुठभेड़ हुई है। पुलिस के रुकने पर इनामी बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग की पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश को गोली लगी पुलिस ने घायल अवस्था में शातिर बदमाश को गिरफ्तार किया है । इनामी बदमाश गौरव गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित चल रहा था , जिसको पुलिस ने मुठभेड़ के बाद धर दबोचा है। बदमाश के कब्जे से बाइक, तमंचा व कारतूस बरामद किया गया है। गैंगस्टर बदमाश गौरव पर लूट व चोरी के आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं।
भारत सरकार ने भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत तीन वैश्विक इम्पैक्ट चुनौतियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जिनकी कुल पुरस्कार राशि 5.85 करोड़ रुपये है आवेदन 31 अक्टूबर 2025 तक खुले हैं
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा सितंबर 2025 में घोषित तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए आवेदन अब खुल चुके हैं और इसके अंतर्गत कुल 5.85 करोड़ रूपए मूल्य के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। तीन पहलों, एआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज, एआई बाय एचईआर: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज, और वाईयूवीएआई: ग्लोबल यूथ चैलेंज, का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक प्रभाव की उच्च क्षमता वाले परिवर्तनकारी एआई-संचालित समाधानों की पहचान, पोषण और प्रदर्शन करना है। ये कार्यक्रम नवप्रवर्तकों को मार्गदर्शन, निवेशकों तक पहुंच और अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेंगे। ये चुनौतियां आधिकारिक शिखर सम्मेलन वेबसाइट: https://impact.indiaai.gov.in/ पर लाइव हैं।
वैश्विक प्रभाव चुनौतियां समावेशी, ज़िम्मेदार और मापनीय एआई नवाचार को गति देने के लिए तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता में ऐसे अभूतपूर्व विचारों को प्रेरित और समर्थन देना है जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को गति प्रदान कर सकें। चयनित नवाचारों को 19-20 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 में प्रदर्शित किया जाएगा।
तीन प्रमुख वैश्विक प्रभाव चुनौतियां क्या हैं?
1) सभी के लिए एआई: वैश्विक प्रभाव चुनौती
एआई नवाचारों के लिए एक वैश्विक आह्वान जो व्यापक स्तर पर उच्च संभावित मूल्य प्रदर्शित करते हैं और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। यह चुनौती कृषि, जलवायु एवं स्थिरता, शिक्षा, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, शहरी अवसंरचना एवं गतिशीलता, और वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन ट्रैक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्यान्वित करने योग्य एआई समाधानों को आमंत्रित करती है।
पुरस्कार एवं समर्थन:
- शीर्ष 10 विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
- 20 फाइनलिस्ट (प्रत्येक में अधिकतम दो सदस्य) को भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए यात्रा सहायता मिलेगी।
- मेंटरशिप, निवेशक संपर्क, कंप्यूट/क्लाउड क्रेडिट और शिखर सम्मेलन के पश्चात त्वरित मार्गों तक पहुंच।
पात्रता: यह अवसर वैश्विक स्तर पर छात्रों, शोधकर्ताओं, कार्यरत पेशेवरों, कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खुला है जिनके पास पायलट स्तर पर या व्यापक स्तर पर उपयोग के लिए तैयार एआई समाधान हैं।
2) एआई बाय एचईआर: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज
नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपी) द्वारा अन्य ज्ञान साझेदारों के सहयोग से आयोजित, महिलाओं के नेतृत्व वाले एआई नवाचारों की श्रृंखला को मज़बूत करने के लिए एक समर्पित चुनौती। आवेदकों को कृषि, साइबर सुरक्षा और डिजिटल कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और जलवायु, तथा वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में ठोस सामाजिक प्रभाव पैदा करने वाले एआई समाधान प्रस्तावित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
पुरस्कार एवं समर्थन:
- शीर्ष 10 विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
- शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 30 फाइनलिस्ट (प्रत्येक में अधिकतम दो सदस्य) को यात्रा सहायता दी जाएगी।
- उत्तरदायी एआई, निवेशक तत्परता और कहानी कहने पर वर्चुअल बूटकैम्प।
- 30 उच्च-संभावित टीमों के लिए निवेशक संलग्नताएं तैयार की गईं।
पात्रता: महिलाओं के नेतृत्व वाली टीमों, छात्र टीमों, या महिलाओं के नेतृत्व वाली संस्थाओं के लिए, जिनके पास एक कार्यशील प्रोटोटाइप या परिपक्व एआई समाधान हो, विश्व स्तर पर खुला है।
यहां आवेदन करें
3) वाईयूवीएआई: वैश्विक युवा चुनौती
13-21 वर्ष की आयु के युवा नवप्रवर्तकों (व्यक्तिगत या अधिकतम दो लोगों की टीम) को जनहित के लिए एआई समाधान विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करने हेतु डिज़ाइन की गई एक युवा-प्रथम पहल। इसके सांकेतिक विषयों में लोगों और समुदायों को सशक्त बनाना, प्रमुख क्षेत्रों में बदलाव लाना और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे और स्मार्ट इकोसिस्टम के निर्माण के साथ ही एक वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन श्रेणी शामिल है।
पुरस्कार एवं समर्थन:
- कुल 85 लाख रुपये के पुरस्कार, जिनमें शामिल हैं:
- शीर्ष 3 विजेताओं में से प्रत्येक को 15 लाख रुपये
- अगले 3 विजेताओं में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये
- 5 लाख रुपये प्रत्येक के 2 विशेष मान्यता पुरस्कार
- शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शीर्ष 20 प्रतिभागियों को यात्रा सहायता दी जाएगी।
- 10-दिवसीय वर्चुअल बूटकैम्प, निवेशक प्रदर्शन के अवसर, तथा एक स्थायी ऑनलाइन शोकेस और संग्रह प्रकाशन।
पात्रता: 13-21 वर्ष की आयु के युवा नवप्रवर्तकों के लिए, जिनके पास कार्यशील प्रोटोटाइप, पीओसी या परिनियोजन योग्य समाधान हों, विश्व स्तर पर खुला है।
समयसीमा और प्रमुख तिथियां
- आवेदन खुलने की तिथि: 10 अक्टूबर, 2025
- आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर, 2025
- वर्चुअल बूटकैंप: नवंबर 2025
- फाइनलिस्ट की घोषणा: 31 दिसंबर, 2025 तक
- भव्य प्रदर्शन: भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 (16-20 फरवरी, 2026, नई दिल्ली)
आवेदन कैसे करें
तीनों ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए आवेदन आधिकारिक पोर्टल www.impact.indiaai.gov.in के माध्यम से प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
प्रत्येक चुनौती पृष्ठ पर पात्रता मानदंड, समय-सीमा, सबमिशन दिशानिर्देश, सहमति प्रपत्र और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है । आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे सभी निर्देशों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें और शॉर्टलिस्टिंग और भागीदारी से संबंधित अपडेट और घोषणाओं के लिए नियमित रूप से वेबसाइट देखें।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पीएमजेवीके के तहत विरासत और शास्त्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के अंतर्गत विरासत और शास्त्रीय भाषाओं के संवर्धन और संरक्षण हेतु उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए देश भर के विश्वविद्यालयों को सहायता प्रदान कर रहा है।

इसी पहल के एक भाग के रूप में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में पीएमजेवीके के तहत 27.16 करोड़ रुपये की लागत से जैन अध्ययन केंद्र की शुरूआत की। इस अवसर पर “जैन धर्म और भारतीय ज्ञान प्रणाली” पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्रशेखर कुमार तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राम सिंह भी उपस्थित थे।


डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और संकाय सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने विश्वविद्यालय से जैन अध्ययन केंद्र को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने और अनुसंधान, दस्तावेज़ीकरण और प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों को एकीकृत करने का आग्रह किया। डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने प्रौद्योगिकी की भूमिका पर ज़ोर देते हुए व्यापक शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए विरासती भाषाओं के संरक्षण, डिजिटलीकरण और संवर्धन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की क्षमता पर प्रकाश डाला।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने मुंबई विश्वविद्यालय में पाली, प्राकृत और अवेस्ता पहलवी और गुजरात विश्वविद्यालय में प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं । इन केंद्रों का उद्देश्य उन्नत अनुसंधान, अनुवाद, पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षाशास्त्र के साथ एकीकृत करना है। मंत्रालय की ओर से इन उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना भाषाई और दार्शनिक विरासत की रक्षा और देश के विविध समुदायों की बौद्धिक परंपराओं को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।












