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1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा खेत बचाओ अभियान

1 जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा खेत बचाओ अभियान

 खेत बचाओ अभियान" को गांव-गांव तक ले जाने की तैयारी, श्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत से राज्य तक व्यापक समन्वय पर दिया जोरकम खाद, सही खाद, सही सलाह: खेत बचाओ अभियान में संतुलित उर्वरक उपयोग होगा फोकस- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहानमौसम, मिट्टी और बाजार के हिसाब से किसान को मिलेगी सीधी सलाह, खेत बचाओ अभियान बनेगा मार्गदर्शक- श्री शिवराज सिंह चौहान पंचायत, केवीके, आईसीएआर और राज्य सरकारें मिलकर चलाएंगी खेत बचाओ अभियान, योजनाओं का लाभ भी पहुंचेगा साथ-साथ- श्री शिवराज सिंह मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधियों से भागीदारी का करेंगे आग्रह, खेत बचाओ अभियान को मिलेगा राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने तैयारी के संबंध में दिल्ली में ली उच्चस्तरीय बैठक

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है। आज दिल्ली में इस अभियान की तैयारी के संबंध में श्री शिवराज सिंह ने उच्चस्तरीय बैठक लेकर अभियान का फोकस संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, मौसम की चुनौती के मद्देनजर समय पर किसान सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी और योजनाओं के लाभ को सीधे गांव तक पहुंचाने पर रखने की बात कही।

एक जून से शुरू हो रहे महीनेभर चलने वाले “खेत बचाओ अभियान” को प्रभावी और परिणामकारी बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का फोकस खेत को बचाने, लागत को संतुलित करने और किसान को सही समय पर सही मार्गदर्शन देने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे तक नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र तक साझी भागीदारी के मॉडल पर चलेगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में इस बात पर बल दिया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित, संतुलित और सही मात्रा में खाद तथा अन्य कृषि इनपुट के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि आने वाले समय को लेकर जो मौसम संबंधी चिंता जताई जा रही है, उसके मद्देनजर किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि वे क्या करें, क्या न करें, कौन-सी फसल लें, कहाँ फसल विविधीकरण अपनाएं और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत-स्तर पर किसान को स्थिति-विशेष के अनुरूप सलाह देना होगा।

बैठक में यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर इस अभियान को मजबूत आधार दिया जाएगा। पंचायत स्तर पर मैकेनाइजेशन की मशीनों का वितरण, योजनाओं का लाभ और जहां संभव हो वहां सरकारी कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष लाभ भी इसी अभियान के अंतर्गत जोड़ने के लिए शिवराज सिंह ने निर्देशित किया।

श्री चौहान ने यह भी कहा कि अभियान को केवल विभागीय दायरे में सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया जाएगा और मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से भी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा, ताकि यह अभियान एक प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनसहभागिता का मजबूत मॉडल बन सके। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण अभियान को प्रारंभिक दिनों से ही राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय ऊर्जा देगा।

बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए KVKs को सभी सहभागी संस्थानों के लिए प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है, साढ़े 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें KVK, ICAR संस्थान, AICRP केंद्रों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ICAR संस्थानों और KVKs की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से काम करेंगी।

श्री शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को केवल खाद प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान से छूटे लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम, कॉटन मिशन, संतुलित पोषण, मिट्टी स्वास्थ्य, जल-संरक्षण और क्षेत्र-विशेष कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को समन्वित रूप में जोड़ने का दृष्टिकोण अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाएगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बैठक में कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यही है कि संदेश व्यवहारिक हो, जमीन पर दिखे और स्थानीय संरचना उससे जुड़ी हो। इसलिए फर्टिलाइजर के कम और संतुलित उपयोग, मौसम के अनुरूप खेती की सलाह, पंचायत-स्तर की सक्रियता, मशीनरी और योजनाओं के लाभ का समावेश तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी; इन बुनियादी बिंदुओं पर अभियान के दौरान ध्यान रखा जाए। अभियान की दिशा साफ है: खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे, किसान जागरूक बने और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो।

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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने एआई पाठ्यक्रम के पुनर्गठन के मुद्दे पर उद्योग जगत के साथ उच्च स्तरीय बैठक की

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने एआई पाठ्यक्रम के पुनर्गठन के मुद्दे पर उद्योग जगत के साथ उच्च स्तरीय बैठक की

 व्यावहारिक अनुभव बढ़ाने, उद्योग-एकीकृत शिक्षण, संकाय विकास और साझा अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया गया

भारत सरकार उभरते तकनीकी रुझानों के लिए शिक्षार्थियों को बेहतर ढंग से तैयार करने हेतु एआई पाठ्यक्रम के व्यापक पुनर्गठन के लिए उद्योग जगत के साथ सहयोग कर रही है। इस संबंध में, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में एआई पाठ्यक्रम कार्यबल के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

टास्कफोर्स ने भारतीय शिक्षण संस्थानों में मौजूदा बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बी.टेक) कंप्यूटर साइंस और संबद्ध पाठ्यक्रमों का आधारभूत अध्ययन किया। यह अध्ययन उद्योग विशेषज्ञों और नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज (नैसकॉम) के सहयोग से किया गया।

अध्ययन में यह स्वीकार किया गया कि भारतीय पाठ्यक्रम में एआई का दायरा बढ़ा है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी पाई गईं। ये कमियां शिक्षण पद्धति, बुनियादी ढांचे और जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग ऑपरेशंस (एमएलओपी) और मूलभूत मॉडल विकास जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुभव से जुड़ीं थीं।

टास्कफोर्स के फोकस क्षेत्र:

अनुप्रयोग आधारित शिक्षण पद्धति: पहले सेमेस्टर से ही व्याख्यान-आधारित शिक्षण से हटकर वास्तविक उद्योग में उपयोग मामलों पर आधारित शिक्षण की ओर बदलाव।

क्रेडिट-आधारित पाठ्यक्रम एकीकरण: औपचारिक शैक्षणिक क्रेडिट प्रणाली में एआई पाठ्यक्रमों को सेमेस्टर-वार संरचित तरीके से शामिल करना।

उन्नत व्यावहारिक अनुभव: वर्तमान 25-30 प्रतिशत व्यावहारिक अनुभव को बढ़ाकर 40-75 प्रतिशत करना, जो डिग्री की प्रकृति और चयनित विशेषज्ञता पर निर्भर करेगा।

उद्योग-एकीकृत शिक्षण पद्धति: कैपस्टोन परियोजनाओं, संपूर्ण एआई समाधान इंजीनियरिंग और लो-कोड और नो-कोड उपकरणों के उपयोग के ज़रिए पूरे कार्यक्रम में उद्योग जगत का अनुभव प्रदान करना।

निरंतर सूत्र के रूप में जिम्मेदार एआई: जिम्मेदार एआई और एआई गवर्नेंस को अलग-अलग मॉड्यूल के बजाय सभी सेमेस्टर में एकीकृत किया गया है।

 

एक से अधिक प्रवेश-निकास विकल्प: कोर्स खत्म करने के बेहतर विकल्प, जिसमें प्रथम वर्ष के बाद प्रमाणपत्र, द्वितीय वर्ष के बाद डिप्लोमा और तृतीय वर्ष के बाद एडवांस्ड डिप्लोमा प्रदान किया जाता है।

संकाय विकास पर ज़ोर

पाठ्यक्रम सुधार के साथ-साथ संकाय की तैयारी को भी आवश्यक मानते हुए, परामर्श में प्रस्तावित रोडमैप के केंद्र में संकाय क्षमता निर्माण को रखा गया। अनुशंसाओं में शामिल हैं:

  • संरचित ट्रेन-द-ट्रेनर कार्यक्रम,
  • चुनिंदा पाठ्यक्रम सामग्री,
  • मानकीकृत मूल्यांकन ढाँचे, और
  • वर्तमान उद्योग उपकरणों और प्लेटफार्मों के अनुरूप आधुनिक प्रयोगशालाएँ।

अनुभवी उद्योग पेशेवरों को सहायक संकाय के रूप में शामिल करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप की भी अनुशंसा की गई। यह प्रमुख बिजनेस स्कूलों के सिद्ध मॉडल पर आधारित है, ताकि कक्षा में गहन व्यावहारिक विशेषज्ञता लाई जा सके।

साझा अवसंरचना पर मुख्य ज़ोर

प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय स्तर की साझा एआई अवसंरचना के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा। ट्रिपल हेलिक्स मॉडल को उद्योग, सरकार और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संयुक्त रूप से समर्थन दिया जाएगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) कंप्यूट, एज डिवाइस, सॉफ्टवेयर स्टैक और सदस्यता-आधारित प्लेटफार्मों तक समान पहुँच सुनिश्चित होगी।

भविष्य की कार्ययोजना

परामर्श के समापन पर चार तत्काल अगले कदमों पर सहमति बनी:

  • राष्ट्रीय स्तर पर कंप्यूटर, बुनियादी ढांचे, संकाय और शिक्षार्थी संख्या की आवश्यकताओं का आकलन।
  • जारी बैचों के पांचवें से आठवें सेमेस्टर में संशोधित पाठ्यक्रम को औपचारिक रूप से अपनाने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के साथ संपर्क स्थापित करना, साथ ही आगामी बैचों के लिए पूर्ण एकीकरण सुनिश्चित करना।
  • संकाय विकास कार्ययोजना, जिसमें उद्योग-नेतृत्व वाला प्रशिक्षण, अनुभव साझा करना और कॉर्पोरेट पेशेवरों के लिए शिक्षकों के रूप में कार्य करने हेतु एक संरचित मार्ग शामिल है।
  • गैर-स्टेम विषयों के लिए समानांतर पाठ्यक्रम, जिसे एआई जागरूकता, बुनियादी एआई साक्षरता और गैर-तकनीकी भूमिकाओं में एआई के व्यावहारिक उपयोग को कवर करने वाले एक अलग कार्यप्रवाह के रूप में शुरू किया जाएगा।
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शिवराज सिंह चौहान ने पीएमएवाई जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की

शिवराज सिंह चौहान ने पीएमएवाई जी के तहत 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ की मदर सैंक्शन जारी की

 हर गरीब को पक्का घर’ के संकल्प को मिली नई गति, पीएमएवाई-जी के लिए 12 राज्यों को बड़ी वित्तीय सहायताग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भूमिहीन गरीब परिवारों को भी पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए राज्यों से भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया

‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत 12 राज्यों को ₹10,021.42 करोड़ की मदर सैंक्शन केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी की उपस्थिति में जारी की।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य, राजस्थान के मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा, असम के मंत्री श्री अतुल बोरा, झारखंड की मंत्री श्रीमती दीपिका पांडे, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल समेत केंद्र और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जिन राज्यों को मदर सैंक्शन जारी की उसमें- असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

 

इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि देश का कोई भी गरीब कच्चे मकान में न रहे। इसी संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण प्रारंभ की गई थी। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत 4.95 करोड़ घरों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 3.91 करोड़ घरों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा 3.05 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।

श्री चौहान ने कहा कि “यदि घर अच्छा होता है तो जीवन आसान बनता है। हम केवल मकान नहीं बना रहे हैं, बल्कि ऐसे घर बना रहे हैं जहां सड़क, बिजली, पानी, गैस और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हों।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने राज्यों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने हेल्पलाइन, शिकायत निवारण प्रणाली, वर्षा जल संचयन, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन तथा राजमिस्त्री प्रशिक्षण जैसे सराहनीय प्रयास किए हैं, जिनके कारण योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति में तेजी आई है।

महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीएमएवाई-जी के अंतर्गत लगभग 75 प्रतिशत घर महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त स्वामित्व में स्वीकृत किए गए हैं, जिससे महिलाओं का सम्मान, स्वाभिमान एवं सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़ हुई है।

श्री चौहान ने कहा कि कुछ गरीब परिवारों के पास भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण आवास निर्माण कार्य प्रभावित होता है। ऐसे मामलों में राज्यों को भूमि उपलब्ध कराने एवं आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल करनी चाहिए।

उन्होंने राज्यों से लंबित शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, निर्माणाधीन आवासों को शीघ्र पूर्ण करने तथा जारी की गई राशि के त्वरित उपयोग को सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्यों ने अभी तक वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लक्ष्यों के अनुरूप स्वीकृतियां पूर्ण नहीं की हैं, जिन्हें 30 जून 2026 तक पूरा किया जाना चाहिए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय मंत्री ने 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़, माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी एवं पीएमएवाई-जी इकाई से कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान भी किया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्यों का उल्लेखनीय सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹11,121 करोड़ की मदर सैंक्शन पूर्व में जारी की जा चुकी है तथा आज ₹10,021 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त मदर सैंक्शन जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक आवास निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे केंद्र एवं राज्यों के समन्वित प्रयासों से समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

पीएमएवाई-जी ग्रामीण भारत के कायाकल्प की अपनी उल्लेखनीय यात्रा को निरंतर आगे बढ़ा रही है। सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे तथा प्रत्येक परिवार को गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

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आईआईएससी के नेतृत्व में शुरू की गई सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण पहल में संपूर्ण भारत में जनजातीय युवाओं की भागीदारी में अपार वृद्धि दर्ज की गई

आईआईएससी के नेतृत्व में शुरू की गई सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण पहल में संपूर्ण भारत में जनजातीय युवाओं की भागीदारी में अपार वृद्धि दर्ज की गई

 भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु के नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) के सहयोग और युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत एमवाई भारत की सहायता से जनजातीय छात्रों के लिए सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम के 2026 के द्वितीय चरण के कार्यान्वयन के दौरान युवाओं तक पहुंच और भागीदारी में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है।

यह पहल आईआईएससी बेंगलुरु के सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीईएनएसई) के समन्वय से संचालित की जा रही है जिसका उद्देश्य जनजातीय छात्रों और संकाय सदस्यों को सेमीकंडक्टर निर्माण, नैनोइंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और उभरती प्रौद्योगिकियों के संबंध में उच्च-स्तरीय ज्ञान प्रदान करना है। इस कार्यक्रम में अपनी सुविधा और गति के आधार पर पूरा किया जाने वाला ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल, आईआईएससी के विशेषज्ञ संकाय सदस्यों के व्याख्यान और आईआईएससी बेंगलुरु में 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं जिसमें प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क यात्रा, आवास और भोजन की व्यवस्था की गई है।

विभिन्न जागरूकता अभियानों और देश भर में एमवाई भारत के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं, राज्य निदेशकों, जिला युवा अधिकारियों और स्वयंसेवी नेटवर्क की ओर से लोगों को एकत्र करने के लिए किए गए प्रयासों के कारण कार्यक्रम के मौजूदा चरण में भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। एमवाई भारत के युवाओं की ओर से आवेदन पिछले चरण में 992 से बढ़कर वर्तमान चरण में 5,654 हो गए हैं जिससे पता चलता है कि इसमें 518 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह भागीदारी 32 राज्यों से बढ़कर 34 राज्यों तक पहुंच गई है जबकि जिला स्तर पर भागीदारी देश भर में 411 जिलों से बढ़कर 648 जिलों तक पहुंच गई है।

 

इस पहल के परिणामस्वरूप विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) से संबंधित कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अंतर्गत पिछले चरण में 268 आवेदन आए थे। वर्तमान चरण में उनकी संख्या बढ़कर 1,741 हो गई है। यह वृद्धि 549 प्रतिशत से अधिक है और उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में जनजातीय महिलाओं की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।

इस प्रचार अभियान में वर्चुअल ओरिएंटेशन सत्र, तकनीकी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ समन्वय, युवा नेटवर्क को सक्रिय करना और जनजातीय छात्र समुदायों के बीच लक्षित जागरूकता अभियान शामिल थे। इस दौरान, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) जैसे तकनीकी विश्वविद्यालयों ने योग्य जनजातीय छात्रों और संकाय सदस्यों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और फार्मेसी संस्थानों तक प्रचार प्रयासों का विस्तार करने में साझेदारी की।

इस पहल से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम से जनजातीय युवाओं में तकनीकी दक्षता, अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने और उद्योग के लिए तैयारी की तत्परता मजबूत होने की उम्मीद है जिससे भारत में बढ़ते सेमीकंडक्टर के अनुकूल परिवेश और भविष्य के तकनीकी कार्यबल में योगदान मिलेगा। यह पहल उन्नत वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आईआईएससी बेंगलुरु, जनजातीय कार्य मंत्रालय, एमवाई भारत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग के प्रयास को दर्शाती है।

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भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने नई दिल्ली में देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र  इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट आयोजित किया

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने नई दिल्ली में देश का सबसे बड़ा जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट आयोजित किया

 मजबूत विज्ञान-उद्योग साझेदारी के माध्यम से भारत किफायती स्वास्थ्य देखभाल प्रौद्योगिकियों के वैश्विक स्रोत के रूप में उभर रहा है : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधवभारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने पहले इनोवेटर-इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया और उद्योग क्षेत्र को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित कींजैव चिकित्सा अनुसंधान और टीका निर्माण को मजबूत करने के लिए देश में पहली बार निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस बायोमटेरियल उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपा गया हैभारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता है : नीति आयोग सदस्य डॉ. गोबरधन दास मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र स्वदेशी जैव चिकित्सा अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को गति प्रदान करता है : स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य मंत्रालय के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारत के सबसे बड़े जैव चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा कार्यक्रम "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट" का आयोजन किया।

इस अवसर पर आईसीएमआर मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल के तहत जैव चिकित्सा नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए समर्पित देश के पहले संरचित प्लेटफार्म की शुरूआत की गई। इस पहल का उद्देश्य मजबूत उद्योग साझेदारी के माध्यम से स्वदेशी जैव चिकित्सा अनुसंधान को सुलभ, वास्तविक दुनिया के स्वास्थ्य सेवा समाधानों में परिवर्तित करना है।

आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर गोबरधन दास भी उपस्थि‍त थे।

राज्य मंत्री श्री जाधव ने कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारी प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी प्रौद्योगिकियों में तब्दील हों जो जन स्वास्थ्य को मजबूत करें और विकसित भारत को आगे बढ़ाएं। भारत स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर किफायती और नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की ओर अग्रसर है,। इसमें आईसीएमआर जैसे संस्थानों और उद्योग क्षेत्र की मजबूत साझेदारी शामिल है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने कहा कि भारत के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार इकोसिस्टम के पास मौजूद है। मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र बौद्धिक संपदा की रक्षा करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाने और स्वदेशी नवाचारों को प्रयोगशालाओं से समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, "मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र आईसीएमआर की अत्याधुनिक अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर उद्योग क्षेत्र की साझेदारी और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस कार्यक्रम के दौरान, 'इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट' और 'टेक्नोलॉजी कंपेंडियम' भी जारी किए गए। यह देश के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईसीएमआर संस्थानों और नवप्रवर्तकों द्वारा उद्योग भागीदारों को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का सौंपा जाना इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा। इससे उनके विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण बढ़ावा मिलेगा। इन प्रौद्योगिकियों में उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर बल देते है। हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट और रिकॉम्बिनेंट टीके, साथ ही जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान निष्क्रिय केएफडी और चांदीपुरा वायरस सहित जैव सामग्री को उद्योग क्षेत्र के भागीदारों को सौंपा गया। इससे देश के जैव चिकित्सा अनुसंधान और विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। इस आयोजन में आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों में 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों को दर्शाया गया। साथ ही नवप्रवर्तकों और उद्योग हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाया गया।

इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री कनेक्ट" पहल मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ विकसित भारत 2047 के लिए भारत के बायोमेडिकल क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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खेत बचाओ अभियान 2.712 करोड़ नागरिकों तक पहुंचा 7.17 लाख किसानों को उर्वरक के संतुलित उपयोग के बारे में जागरूक किया ग

खेत बचाओ अभियान 2.712 करोड़ नागरिकों तक पहुंचा 7.17 लाख किसानों को उर्वरक के संतुलित उपयोग के बारे में जागरूक किया ग

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं जो मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पर केंद्रित है। 'खेत बचाओ अभियान' ने किसानों और हितधारकों को वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न मंचों के माध्यम से देश भर में व्यापक पहुंच स्थापित की है।

इस अभियान में अब तक कुल 12,979 जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए गए हैं। इसमें 7.17 लाख किसानों को प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया है। क्षमता निर्माण के लिए 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें 1,11,509 प्रतिभागियों ने भाग लिया। हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक स्रोतों पर 7,928 क्षेत्र प्रदर्शनों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।

जमीनी स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ 4,916 जनप्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किए गए। उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला की भूमिका को पहचानते हुए, संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उर्वरक डीलरों के साथ 9,609 संवाद आयोजित किए गए।

इस अभियान में किसान संगठनों का भी उपयोग किया गया जिसके अंतर्गत किसान संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान समूह (एफआईजी) के माध्यम से 8,383 किसान सदस्यों को जोड़ा गया। व्यापक प्रचार के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स सहित प्रचार सामग्री को देश भर में 53,616 स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। 944 रेडियो वार्ता और 200 टीवी/डिजिटल कार्यक्रमों सहित 1,144 मीडिया प्रसारणों के माध्यम से संदेश को और अधिक प्रभावी बनाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल प्रचार ने अभियान की पहुंच को 2.712 करोड़ लोगों तक पहुंचाया है।

'खेत बचाओ अभियान' पहल का उद्देश्य मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है जिससे मृदा की उर्वरता की रक्षा हो सके और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

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डाक विभाग और फ्लिपकार्ट ने पूरे भारत में अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

डाक विभाग और फ्लिपकार्ट ने पूरे भारत में अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

 भारत के ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक इकोसिस्टम को मजबूत करने और पूरे देश में अंतिम दूरी तक डिलीवरी क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, डाक विभाग (डीओपी), संचार मंत्रालय और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

आज नई दिल्ली में डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के वाणिज्यिक निदेशक श्री हरविंदर कपूर ने डाक विभाग के पार्सल और सीसीएस निदेशालय के मुख्य महाप्रबंधक श्री अदनान अहमद, फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक (कॉर्पोरेट कार्य) श्री डिप्पी वंकानी और दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए।

(नई दिल्ली में अंतिम दूरी तक पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करते समय डाक विभाग और फ्लिपकार्ट के अधिकारी)

इस साझेदारी का उद्देश्य डाक विभाग की बेजोड़ पहुंच और भरोसेमंद डिलीवरी नेटवर्क के साथ-साथ भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र में फ्लिपकार्ट की मजबूत उपस्थिति का लाभ उठाकर पूरे देश में कुशल, विश्वसनीय और ग्राहक-केंद्रित पार्सल डिलीवरी समाधान प्रदान करना है। समझौते के तहत, डाक विभाग पूरे भारत में फ्लिपकार्ट शिपमेंट के लिए अंतिम दूरी तक डिलीवरी सेवाएं प्रदान करेगा।

समझौते की मुख्य विशेषताएं:

  • देशव्यापी अंतिम दूरी तक पहुंच: फ्लिपकार्ट, दूरस्थ और कम सुविधा वाले क्षेत्रों सहित शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पार्सल डिलीवरी सेवाओं के लिए इंडिया पोस्ट के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करेगा।
  • व्यापक डिलीवरी समाधान: इन सेवाओं में प्रीपेड और कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) पार्सल की डिलीवरी, ओटीपी आधारित डिलीवरी प्रमाणीकरण और तत्क्षण शिपमेंट ट्रैकिंग शामिल हैं।
  • ग्राहक के लिए बेहतर अनुभव: यह समझौता कुशल पार्सल आवागमन और वितरण के लिए तेज डिलीवरी, बेहतर परिचालन समन्वय और निर्बाध प्रौद्योगिकी एकीकरण पर केंद्रित है।
  • ई-कॉमर्स के विकास को समर्थन: इस सहयोग से भारत के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स क्षेत्र को समर्थन देने वाले लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर को और भी अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इस साझेदारी के माध्यम से, फ्लिपकार्ट को डाक विभाग के 1.6 लाख से अधिक डाकघरों के विशाल नेटवर्क और पूरे भारत में अद्वितीय वितरण नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त होगी। इससे बाजार तक व्यापक पहुंच, वितरण दक्षता में सुधार और विशेष रूप से दूरस्थ तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवा प्रदान करने में सहायता मिलेगी।

फ्लिपकार्ट भारत की अग्रणी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है, जो देश भर में लाखों ग्राहकों को उत्पादों और डिजिटल वाणिज्य समाधानों की विस्तृत श्रृंखला के माध्यम से सेवा प्रदान करती है। इस सहयोग से डाक विभाग के पार्सल व्यवसाय को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे उसके वितरण नेटवर्क और लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा। यह साझेदारी डाक विभाग के उन निरंतर प्रयासों के अनुरूप है, जिसके तहत वह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने वाली एक अग्रणी लॉजिस्टिक संस्था के रूप में खुद को विकसित करना चाहता है।

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रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया

रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया

 किसी भी संदिग्ध गतिविधि या उसमें लिप्त व्यक्ति की सूचना हेल्पलाइन नंबर 139 पर दें ताकि रेलवे को निशाना बनाने वाले असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सके

 रेलवे को निशाना बनाने वाली हाल की घटनाओं के मद्देनजर रेल मंत्री ने नई दिल्ली में फील्ड अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक कीआधुनिक तकनीक का उपयोग करके फील्ड से खुफिया जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया में सुधार किया जा रहा है: अश्विनी वैष्णव

 

रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, सीसीटीवी जैसे नवीनतम तकनीकी उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। रेलगाड़ियों, यात्रियों, स्टेशन परिसर और विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीट स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आज नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में रेल मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में देश भर के फील्ड अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। रेल भवन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष भी इस बैठक में उपस्थित थे।

हाल ही में हुई आगजनी की कुछ घटनाओं सहित कई मामलों की प्रारंभिक जांच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता सामने आई है। भारतीय रेलवे ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) इनकी सक्रिय रूप से जांच कर रहा है। कई मामलों में, रेलवे की त्वरित और सक्रिय कार्रवाई से बड़ी दुर्घटनाओं को टालने में मदद मिली है। खुफिया प्रणालियों को मजबूत करने और सूचनाओं को तेजी से संसाधित करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के अलावा, रेलवे मंत्रालय यात्रियों को यात्रा के दौरान और स्टेशन परिसर में प्रतीक्षा करते समय असामाजिक गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया है। रेलवे परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संदिग्ध व्यक्ति को देखने पर तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचना देने को कहा गया है।

सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान हुई चर्चाओं में, बेहतर रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से जमीनी स्तर से खुफिया जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया। प्रौद्योगिकी आधारित सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने, रेलवे नेटवर्क में सीसीटीवी कवरेज का विस्तार करने और रेलवे बोर्ड मुख्यालय तथा फील्ड जोन के बीच परिचालन सुरक्षा तालमेल को सुधारने पर भी बल दिया गया। बैठक में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, कैमरों की विशिष्टताओं को उन्नत करने और एआई-आधारित निगरानी प्रणालियों को तैनात करने पर भी विचार किया गया। बैठक में रेलवे नेटवर्क में अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन के लिए आरपीएफ और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के बीच सूचना साझाकरण तंत्र को बेहतर बनाकर आपसी तालमेल को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

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केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने जनसुविधाओं एवं समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए  सामुदायिक भवन हेतु राशि की घोषणा की

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने जनसुविधाओं एवं समावेशी विकास को प्राथमिकता देते हुए सामुदायिक भवन हेतु राशि की घोषणा की

आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री एवं बिलासपुर लोकसभा सांसद श्री तोखन साहू ने ग्राम लारीपारा, विकासखंड कोटा, जिला बिलासपुर में आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रम में सहभागिता कर क्षेत्रवासियों से आत्मीय भेंट की तथा स्थानीय समस्याओं एवं विकास संबंधी आवश्यकताओं पर चर्चा की।
 
इस दौरान क्षेत्रवासियों की मांग को ध्यान में रखते हुए मंत्री श्री साहू ने सामुदायिक भवन निर्माण हेतु ₹10 लाख की राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और सामाजिक अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
इसके पश्चात मंत्री श्री साहू ने माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी की मंशानुरूप कोटा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानाबेल में आयोजित “सुशासन तिहार” कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान आमजन से प्राप्त मांग एवं शिकायत संबंधी आवेदनों की समीक्षा कर अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए। साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को चेक एवं कार्ड वितरित किए गए।
 
शिविर में कुल 169 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 152 मांग संबंधी एवं 17 शिकायत संबंधी प्रकरण शामिल रहे। इनमें से मांग संबंधी 17 प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण किया गया, जबकि शेष प्रकरणों के समाधान हेतु समय-सीमा निर्धारित की गई।
 
मंत्री श्री साहू ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित रूप से पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव में समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नागरिकों को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
 
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीब, किसान, महिला, युवा एवं बुजुर्ग सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। खाद्यान्न सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए देश के 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराया जा रहा है तथा आगामी वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए तीन माह का राशन अग्रिम रूप से उपलब्ध कराया गया है।
 
महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मंत्री श्री साहू ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता महिलाओं को सम्मान एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसी सोच के तहत घर-घर शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन तथा अन्य जनहितकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया गया है।
 
मंत्री श्री साहू ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूल मंत्र के साथ जनकल्याण एवं समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
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अंतरिक्ष यान मिशन संचालन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एसएमओपीएस 2026

अंतरिक्ष यान मिशन संचालन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन एसएमओपीएस 2026

अंतरिक्ष यान मिशन संचालन: एसएमओपीएस- 2026” पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा संस्करण, जिसकी थीम “स्मार्ट और सतत अंतरिक्ष मिशन प्रबंधन के लिए अभिनव संचालन - अगली पीढ़ी” है, 8-10 अप्रैल, 2026 के दौरान बेंगलुरु, भारत में आयोजित किया जा रहा है। यह कॉन्फ्रेंस, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई) और इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ़ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) ने मिलकर आयोजित किया है, इसका मकसद मिशन ऑपरेशन मैनेजमेंट, एडवांस्ड मिशन डिज़ाइन, ऑटोमेशन, बड़े सैटेलाइट समूहों का मैनेजमेंट, मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन, स्पेस रोबोटिक्स, अंतरिक्ष नीति, चंद्रमा और ग्रहों के बीच खोज, अंतरिक्ष प्रणालियों में साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्राउंड स्टेशन ऑपरेशन में मौजूदा और भविष्य के रुझान आदि से जुड़े विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करना है; साथ ही इसमें अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों ही क्षेत्रों में भविष्य की तकनीकों पर भी चर्चा की जाएगी। एसएमओपीएस के एक हिस्से के तौर पर, 10 तारीख को छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए एक विशेष वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया था।

इस सम्मेलन का उद्घाटन 8 अप्रैल को इसरो के पूर्व अध्यक्ष/डीओएस सचिव, श्री ए. एस. किरण कुमार ने किया। इस अवसर पर इसरो के अध्यक्ष/डीओएस सचिव डॉ. वी. नारायणन, यूआरएससी के निदेशक श्री एम. शंकरन, आईएए के महासचिव डॉ. जीन मिशेल कॉन्टेंट और आईएसटीआरएसी के निदेशक डॉ. ए. के. अनिल कुमार भी उपस्थित थे।

भारत में अपनी तरह के इस अनूठे सम्मेलन में शामिल प्रमुख विषयों में ये शामिल हैं:

- मिशन संचालन: डिजाइन को उपलब्धि में बदलना

- वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं का मार्गदर्शन करना

- मिशन डिजाइन और संचालन

- मिशन संचालन रणनीति और भविष्य की कार्ययोजना

- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रोबोटिक्स

- ग्राउंड सेगमेंट और तारामंडल

- मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम, अंतरग्रहीय मिशन और भू-खंड

- अवसरों की कक्षाएँ: नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में योगदान

- मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की चुनौतियाँ

- आईएसएस पर रोबोटिक मिशन संचालन

- अंतरिक्ष क्षेत्र जागरूकता: अवधारणाएं, क्षमताएं और अनुप्रयोग

अंतरिक्ष अनुप्रयोगों का लाभ उठाना

120 मौखिक और 88 पोस्टर प्रस्तुतियों के अलावा, ईएसए, सीएनईएस, डीएलआर, आईबीएमपी और आईकेआई रूस, नासा, जेएक्सए, सेलेस्ट्राक, यूमेटसैट, यूटेलसैट, टीयू डेल्फ़्ट, कनाडा के प्रमुख विशेषज्ञ मुख्य वक्ता और पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। यह सम्मेलन एक अद्वितीय नेटवर्किंग मंच के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ भाग लेने वाली अंतरिक्ष एजेंसियों, स्टार्टअप्स, उद्योग और शिक्षा जगत ने अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों पर अपने विचार साझा किए और तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष परिदृश्य में उभरती चुनौतियों का समाधान किया। सम्मेलन के अंतिम दिन आयोजित कार्यशाला में आईएसएस पर रोबोटिक मिशन संचालन, अंतरिक्ष क्षेत्र जागरूकता, अंतरिक्ष अनुप्रयोग, मानव अंतरिक्ष मिशन और अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण पर आमंत्रित वार्ताएँ हुईं, जिसमें भारी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।

अपने उद्घाटन भाषण में, इसरो अध्यक्ष ने अंतरिक्ष अभियानों की सफलता के लिए अंतरिक्ष यान मिशन संचालन की सटीक योजना और त्रुटिहीन निष्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में उभरती चुनौतियों के नवीन समाधान खोजने के लिए भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने की आवश्यकता को दोहराया।

इसके मुख्य विषयों में से एक था - विविध और वितरित मिशन संचालन अवधारणाओं की बढ़ती जटिलता से उत्पन्न होने वाली मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों का सामना करना; ये चुनौतियाँ विघटनकारी तकनीकी नवाचार, बड़े उपग्रह समूहों के आगमन, अंतरिक्ष में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पृथ्वी की सीमा से परे अधिक महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष अन्वेषणों के कारण पैदा हो रही हैं, और इनका संबंध तकनीकी तथा नीतिगत, दोनों ही पहलुओं से है। सत्रों के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया, जो मानव-मशीन समन्वय के साथ अधिक स्वायत्त और कुशल मिशन संचालन को सक्षम बनाती है।

आईएसटीआरएसी - जो आर्यभट्ट उपग्रह से लेकर निसार तक, सभी निम्न पृथ्वी कक्षा और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के अंतरिक्ष यान संचालन का केंद्र है- के नाम कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज हैं। इनमें ऐतिहासिक मंगलयान मिशन, चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग, सूर्य के चारों ओर लैग्रेंजियन पॉइंट में आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान की स्थापना और स्पैडेक्स मिशन में डॉकिंग प्रयोग शामिल हैं; साथ ही, एसएमओपी के आयोजन में भी इसने अग्रणी भूमिका निभाई। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के खुलने और इसरो द्वारा मानव अंतरिक्ष मिशन शुरू किए जाने की पृष्ठभूमि में, एसएमओपी विभिन्न विषयों के विचारों का एक समृद्ध संगम साबित हुआ; इसने वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के बीच सहयोग, तालमेल और साझेदारी को बढ़ावा दिया, ताकि भविष्य के अंतरिक्ष मिशन कार्यों के लिए एक सुरक्षित, टिकाऊ और स्मार्ट रूपरेखा तैयार की जा सके।

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दोस्तों ने किशोर की हत्या कर शव दफनाया बोरी में बंद कर पशु बाड़े में छिपाया

दोस्तों ने किशोर की हत्या कर शव दफनाया बोरी में बंद कर पशु बाड़े में छिपाया

माधौगढ़(जालौन) माधौगढ़ कोतवाली क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां दो दोस्तों ने मिलकर अपने ही दोस्त की हत्या कर दी और शव को बोरी में बंद कर पशु बाड़े में दफना दिया। 17 वर्षीय कमल प्रताप सिंह, निवासी रुदपुरा गांव, 25 मार्च से लापता था। वह अपने दोस्तों तेज प्रताप और रोहित के पास जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल डिटेल खंगाली। इसमें आखिरी बातचीत दोस्तों से होने की पुष्टि हुई। शक के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की, जिसमें उन्होंने हत्या की बात कबूल कर ली।आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस रोहित के घर पहुंची, जहां पशु बाड़े में मिट्टी हटाने पर बोरी में बंद शव बरामद हुआ। मौके पर अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतक के परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, वे शांत नहीं बैठेंगे

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विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा 2026 में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सक्रिय भागीदारी

विभाग में स्वच्छता पखवाड़ा 2026 में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण सक्रिय भागीदारी

विधि और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इसके तहत स्वच्छता, साफ-सफाई और अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच जागरूकता संबंधी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

स्वच्छता पखवाड़ा 1 अप्रैल, 2026 को विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को स्वच्छता शपथ दिलाने के साथ आरंभ हुआ। न्याय विभाग सचिव श्री नीरज वर्मा ने सबको शपथ दिलाई और स्वच्छ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके बाद जैसलमेर हाउस परिसर में स्वैच्छिक श्रमदान आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रियता से भाग लेकर स्वच्छ भारत अभियान के प्रति अपना समर्थन/प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही, जिससे कार्यस्थलों और आसपास साफ-सफाई रखने की सामूहिक दायित्व की भावना मजबूत हुई।

न्याय विभाग में स्वच्छता पखवाड़े के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, जिनमें योग सत्र, स्वच्छता पर कार्यशाला, स्वच्छता पर निबंध लेखन और चित्रकला प्रतियोगिता और बेकार वस्तुओं को छांटकर अलग करना और उनकी नीलामी शामिल है।

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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर जयपुर से शुरू हुआ कृषि सुधारों का नया अध्याय

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर जयपुर से शुरू हुआ कृषि सुधारों का नया अध्याय

 जयपुर में आज पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से कृषि सुधारों के नए युग की मजबूत शुरुआत हुईजहाँ केंद्रराज्य साझेदारीकिसानों की आय वृद्धिफूड व न्यूट्रीशन सिक्योरिटीफार्मर आईडी आधारित डिजिटल कृषि और लचीली योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ रोडमैप रखा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त किसानसमृद्ध भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस की यह नई श्रंखला केंद्र और राज्यों के लिए साझा एक्शन-प्लेटफ़ॉर्म’ के रूप में सामने आई हैं।

जोनल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समग्र कृषि विकास का नया ढांचा

जयपुर के होटल मैरियट में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक दिन की औपचारिक रबीखरीफ मीटिंग की जगह अब अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन के लिए गंभीरविषय-आधारित क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं। सम्मेलन की इस नई श्रृंखला की शुरुआत राजस्थान की धरती से होना उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बतायाजहाँ राजस्थानगुजरातमहाराष्ट्रमध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्रीवरिष्ठ अधिकारीवैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटेवहीं उद्घाटन सत्र में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि यह केवल कर्मकांड नहींबल्कि पूरे पश्चिमी क्षेत्र की कृषि पर संपूर्णता से मंथन का प्रयास हैजिसमें पूरे दिन प्रजेंटेशनवीडियो और विषयवार चर्चा के बाद ठोस निष्कर्ष और टू-डू लिस्ट’ के साथ राज्यों को आगे बढ़ने का रोडमैप तय किया जाएगा।

तीन प्रमुख लक्ष्य: फूड सिक्योरिटी से पोषण सुरक्षा तक

श्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि के लिए तीन मुख्य लक्ष्य रेखांकित किए– देश की खाद्य सुरक्षाकिसानों की आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल में भारत के भंडार इतने हैं कि रखने की जगह तक की चुनौती हैलेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी हासिल करनी है ताकि खाद्य सुरक्षा पूरी तरह देश की अपनी उत्पादन क्षमता पर आधारित हो सके और आयात पर निर्भरता खत्म हो। उन्होंने दोहराया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा हैंइसलिए किसानों की आय बढ़ानाजीवन स्तर सुधारना और खेती को आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता हैसाथ ही जनता को पोषक आहार उपलब्ध कराने के लिए पोषण सुरक्षा को नीति का अनिवार्य अंग बताया।

फार्मर आईडी और डिजिटल एग्रीकल्चर की बड़ी झलक

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने फार्मर आईडी को आने वाले समय की सबसे उपयोगी व्यवस्था बताते हुए कहा कि एक प्रमाणित डिजिटल प्रोफ़ाइल के आधार पर बैंक लोन से लेकर सरकारी मदद तक सब कुछ तेज़ और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुँचेगा। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों में फार्मर आईडी के माध्यम से कुछ ही दिनों में हजारों करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं और आगे खाद वितरण जैसी संवेदनशील व्यवस्था भी किसान की भूमि और बोई गई फसल के आधार पर फार्मर आईडी से ही लिंक की जाएगीताकि सस्ता खाद डायवर्जन रोका जा सके।

उन्होंने पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट की परिस्थितियों के संदर्भ में वैश्विक अनिश्चितताओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसे संकट के दौर में डिजिटल और डेटा आधारित कृषि प्रशासन के माध्यम से ही देश और किसानों को सुरक्षित रखा जा सकता हैइसलिए सभी राज्यों को फार्मर आईडी के काम को मिशन मोड में 100 प्रतिशत पूरा करने का आग्रह किया गया।

MSP, खरीद, PM-AASHA और MIS पर स्पष्ट संदेश

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दलहन और तिलहन की खरीद PM-AASHA के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा और गेहूंचावल की खरीद खाद्य

विभाग द्वारा की जा रही है तथा राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के अनुरूप ही खरीद की स्वीकृति दी गई हैलेकिन समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चनेमसूर और तुअर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी और जहाँ फिजिकल खरीद संभव नहीं हैवहाँ मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मॉडल पर सरसों और सोयाबीन में भावांतर भुगतान के माध्यम से MSP और बाजार भाव के अंतर की भरपाई किसानों के खातों में सीधे की जा सकती है।

उन्होंने आलूप्याजटमाटर जैसी फसलों में अंतरराष्ट्रीय कारणों से गिरती कीमतों की चुनौती का उल्लेख करते हुए MIS व्यवस्था की उपयोगिता समझाईजिसमें मॉडल रेट और बाजार भाव के अंतर का भुगतान सीधा किसान को किया जा सकता हैजिसमें 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगीसाथ ही जिन राज्यों की एजेंसियाँ किसानों की उपज को उत्पादन क्षेत्र से बड़े शहरों तक ले जाना चाहेंगीउनके लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी देने का निर्णय भी साझा किया।

विकसित कृषि संकल्प अभियान और एग्रीकल्चर रोडमैप

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने सभी राज्यों से कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान अब एक साथ पूरे देश में न करके राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा और जो भी राज्य समय-सारिणी और कार्यक्रम भेजेंगेवहाँ भारत सरकार वैज्ञानिकोंविशेषज्ञोंअधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की टीम भेजकर अभियान को गति देगी। राजस्थान के संदर्भ में उन्होंने ICAR के वैज्ञानिकों की विशेष टीम भेजने की घोषणा कीजो राज्य के तय कार्यक्रम में खेत स्तर पर वैज्ञानिक सलाह और नवाचारों का विस्तार करेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि आज से राज्यों के कृषि रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया को भी संस्थागत सहयोग मिलेगाराजस्थान ने कृषि रोडमैप में भारत सरकार की साझेदारी की पहल की है और इसके लिए आईसीएआर के वैज्ञानिकों और मंत्रालय के नोडल अधिकारी की संयुक्त टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगीजबकि अन्य राज्यों को भी उनके कृषि रोडमैप के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा।

नीतियों में लचीलापन और बजट के समयबद्ध उपयोग पर जोर

श्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 अप्रैल से लागू नए बजट को तुरंत राज्यों को रिलीज़ करने और वर्ष की शुरुआत से ही योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन पर फोकस करने की अपील कीताकि साल के अंत में बजट बचने और जल्दबाजी में खर्च की स्थिति न बने। उन्होंने बताया कि राज्यों की मांग पर इस बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्र कोई योजना ऊपर से थोपेगा नहींबल्कि योजनाओं में से राज्य अपनी ज़रूरत के मुताबिक प्राथमिकता चुनेंगे– चाहे बात तारबाड़बंदी की हो या पर ड्रॉपमोर क्रॉप’ के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की।

उन्होंने टीम एग्रीकल्चर’ की अवधारणा रखते हुए कहा कि नीतियाँ और कार्यक्रम केंद्र बनाएगालेकिन असली क्रियान्वयन राज्यों के हाथ में हैइसलिए जितनी गंभीरता और प्राथमिकता से राज्य सरकारें काम करेंगीउतनी ही सफलता किसानों तक योजनाओं के लाभ पहुँचाने में मिलेगी।

आपदा प्रबंधनफसल बीमा और स्वास्थ्य का संदेश

हाल के मौसमीय असंतुलन और नुकसान का ज़िक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने राज्यों से नुकसान के सही आकलन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दियाताकि प्रभावित किसानों को पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि ज़मीन पर सक्रिय भूमिका राज्यों की होगी और केंद्र की ओर से किसानों को भरपूर सहयोग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

विश्व स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वस्थ भारत के संदेश का हवाला देते हुए अपील की कि तेल और भोजन की मात्रा में संयम के साथ सभी अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देंक्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है और कृषि नेतृत्व को भी फिट रहकर किसानों की सेवा में जुटे रहने की प्रेरणा दी।

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केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने तीन नई पहलों का अनावरण किया सुलभ प्रौद्योगिकी और मजबूत डिजिटल सामग्री परितंत्र के लिए सरकार के प्रयासों पर जोर दिया

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने तीन नई पहलों का अनावरण किया सुलभ प्रौद्योगिकी और मजबूत डिजिटल सामग्री परितंत्र के लिए सरकार के प्रयासों पर जोर दिया

 सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज भारत के मीडिया, प्रसारण और डिजिटल क्षेत्र को मजबूत करने और सृजनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तीन प्रमुख पहलों का शुभारम्भ किया। ये तीन पहलें हैं- गूगल और यूट्यूब के साथ साझेदारी में भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के माध्यम से राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल; वेव्स ओटीटी पर नागरिक रचनाकार मंच मायवेव्सऔर डीडी फ्री डिश सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए टेलीविजन सेटों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम गाइड (ईपीजी) और अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर की शुरुआत शामिल हैं। इन पहलों को 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बढ़ावा देने, सार्वजनिक प्रसारण को मजबूत करने और मीडिया एवं मनोरंजन क्षेत्र में एआई कुशल कार्यबल का निर्माण करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम में मीडिया एवं प्रसारण उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों, यूट्यूब इंडिया के प्रमुख और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सभी के लिए किफायती तकनीक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबके लिए प्रौद्योगिकी को उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ऐसी पहलों से प्रौद्योगिकी अधिक किफायती और सुलभ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर और उन्नत प्रोग्राम गाइड की मदद से नागरिक अब अतिरिक्त उपकरणों के बिना आसानी से सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।

 

दूसरी पहल के बारे में बात करते हुए, श्री वैष्णव ने मायवेव्स को कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक शक्तिशाली मंच बताया। मायवेव्स कंटेंट क्रिएटर्स को कंटेंट बनाने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाता है, जिससे देश के डिजिटल प्रणाली को मजबूती मिलती है। केंद्रीय बजट की घोषणाओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बढ़ावा देने और सृजनात्मक क्षेत्र को समर्थन देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री श्री वैष्णव ने बताया कि यूट्यूब के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही राष्ट्रीय एआई कौशल पहल के तहत लगभग 15,000 युवाओं को बिना किसी शुल्क के प्रशिक्षित किया जाएगा।

श्री वैष्णव ने 'क्रिएटर्स कॉर्नर' पहल के बारे में भी बात की और इसकी बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र किया, जिसके तहत कुछ कंटेंट को पहले ही 30 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। उन्होंने देश भर के रचनाकारों से आग्रह किया कि वे दूरदर्शन और मायवेव्स जैसे प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से उपयोग करके देश की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय विविधता को प्रदर्शित करें।

रचनाकारों से इन प्लेटफार्मों का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए, श्री वैष्णव ने उन्हें अपने क्षेत्रों की कहानियों को प्रस्तुत करने और एक जीवंत तथा समावेशी मीडिया परिदृश्य में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

रचनाकारों को सशक्त बनानापहुंच का विस्तार करना

श्री संजय जाजू ने राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल, मायवेव्स प्लेटफॉर्म और टेलीविजन सेटों में अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर की शुरुआत के साथ-साथ उन्नत इलेक्ट्रॉनिक कार्यक्रम गाइड के बारे में बताते हुए कहा कि ये तीनों पहलें एक समान नीतिगत दिशा को दर्शाती हैं। इन पहलों का उद्देश्य सृजनात्मक लोगों के लिए एक मजबूत परितंत्र का निर्माण करना और गुणवत्तापूर्ण प्रसारण तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल सृजनशील लोगों को बदलती डिजिटल दुनिया में अपनी क्षमताएं विकसित करने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी। मायवेव्स एक जीवंत डिजिटल परितंत्र के निर्माण में सहयोग देगा, जिससे नागरिक सामग्री बना सकेंगे, अपलोड कर सकेंगे और साझा कर सकेंगे। तीसरी पहल, जो डीडी फ्री डिश से संबंधित है, नागरिकों को सेट-टॉप बॉक्स की आवश्यकता के बिना सामग्री तक पहुंच प्रदान करके महत्वपूर्ण लाभ पहुंचाती है, जिससे विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंच में सुधार होता है।

संक्षेप में, पहली पहल लोगों को सक्षम बनाएगी, दूसरी पहल अवसरों के विस्तार को सक्षम बनाएगी और तीसरी पहल सभी के लिए सामग्री तक पहुंच सुनिश्चित करेगी।

एआई के जरिए सृजनात्मक लोगों को सशक्त बनाना

सृजनशील लोगों पर इस साझेदारी के प्रभाव के बारे

में बात करते हुए यूट्यूब, भारत की प्रबंध निदेशक गुंजन सोनी ने कहा, "हमारा मानना ​​है कि एआई में भारत की गतिशील सृजनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए उल्लेखनीय अवसर खोलने की क्षमता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के साथ अपने सहयोग के माध्यम से, हमारा लक्ष्य सृजनशील लोगों और पेशेवरों को भविष्य के उपकरणों में महारत हासिल करने, एआई का लाभ उठाकर अधिक आकर्षक कहानियां सुनाने, नए दर्शकों तक अपनी पहुंच बढ़ाने और मीडिया के भविष्य को आकार देने में भूमिका निभाने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करना है। यह पहल 'डिजिटल इंडिया' के प्रति हमारी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां प्रौद्योगिकी सभी के लिए एक सहायक के रूप में कार्य करती है।"

राष्ट्रीय एआई कौशल विकास पहल

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गूगल और यूट्यूब के साथ साझेदारी में रचनात्मक एवं मीडिया क्षेत्रों के 15,000 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय एआई कौशल प्रशिक्षण पहल की घोषणा की है। यह पहल भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है और इसका उद्देश्य एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स (एवीजीसी) और मीडिया प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में एआई क्षमताओं को मजबूत करना है।

एआई कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण, 23 मार्च से 30 जून, 2026 तक चलेगी, जिसमें गूगल करियर सर्टिफिकेट और गूगल क्लाउड जनरेटिव एआई लर्निंग पाथ के माध्यम से बुनियादी एआई प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। प्रतिभागियों को एआई एसेंशियल्स, प्रॉम्प्टिंग एसेंशियल्स, इंट्रोडक्शन टू जनरेटिव एआई और जनरेटिव एआई लीडर पाथ जैसे पाठ्यक्रम पूरे करने होंगे। इस चरण को सफलतापूर्वक पूरा करना अगले चरण में प्रवेश के लिए अनिवार्य होगा।

एआई कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा चरण जुलाई से दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा जो रचनात्मक उद्योग के लिए उन्नत, व्यावहारिक और परियोजना-आधारित विशेषज्ञता पर केंद्रित होगा। पाठ्यक्रम में कहानी कहने की कला, यू-ट्यूब के सर्वोत्तम तरीकों और जेमिनी 3, नैनो बनाना, वीओ और वर्टेक्स एआई जैसे एआई उपकरणों के उपयोग पर उन्नत प्रशिक्षण शामिल होगा। यह प्रशिक्षण देश भर के प्रमुख शहरों में आयोजित किया जाएगा।

यह पहल सृजनशील लोगों, मीडिया पेशेवरों, छात्रों और डेवलपर्स को भविष्य के लिए तैयार कौशल विकसित करने में सहायता करेगी और भारत को डिजिटल सामग्री तथा नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में योगदान देगी।

मायवेव्स – वेव्स ओटीटी के अंतर्गत नागरिक निर्माता मंच

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म के अंतर्गत एक नई सुविधा मायवेव्स की भी घोषणा की, जो नागरिकों को सामग्री बनाने, अपलोड करने और साझा करने में सक्षम बनाएगी। मायवेव्स को उपयोगकर्ता द्वारा निर्मित सामग्री (यूजीसी) के लिए एक संरचित मंच के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जो 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज' जैसी राष्ट्रीय पहलों में भागीदारी को भी बढ़ावा देगा।

यह प्लेटफॉर्म कंटेंट देखने से हटकर कंटेंट में सक्रिय भागीदारी की ओर एक बदलाव का प्रतीक है, जिससे वेव्स ओटीटी न केवल देखने का बल्कि कंटेंट बनाने का भी एक मंच बन जाता है। मायवेव्स शॉर्ट वीडियो, वर्टिकल वीडियो और एपिसोडिक कंटेंट सहित कई फॉर्मेट को सपोर्ट करेगा और भारतीय भाषाओं में बहुभाषी इंटरफेस प्रदान करेगा। उम्मीद है कि मायवेव्स देश भर के उभरते रचनाकारों और कहानीकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।

टेलीविजन सेटों में उन्नत ईपीजी और अंतर्निर्मित सैटेलाइट ट्यूनर

टेलीविजन देखना आसान और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बिल्ट-इन सैटेलाइट ट्यूनर वाले टेलीविजन सेट और एक नया, उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रोग्राम गाइड (ईपीजी) पेश किया है। इस पहल से दर्शक अलग से सेट-टॉप बॉक्स की आवश्यकता के बिना सीधे अपने टेलीविजन पर डीडी फ्री डिश चैनल देख सकेंगे, जिससे अतिरिक्त खर्च, तार लगाने (वायरिंग) का खर्च और कई रिमोट के झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही, नया उन्नत प्रोग्राम गाइड उपयोगकर्ताओं को एक सरल और सहज इंटरफ़ेस के माध्यम से एक ही स्थान पर चैनलों और प्रोग्राम शेड्यूल को आसानी से ब्राउज़ करने की सुविधा देगा, जिससे देश भर के घरों के लिए समग्र देखने का अनुभव अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय 'ऑरेंज इकोनॉमी' को बढ़ावा देने, सार्वजनिक प्रसारण को सशक्त बनाने के साथ-साथ इसकी सुलभता में सुधार करने और सूचना एवं प्रसारण क्षेत्र के लिए एआई-कुशल, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत इन प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। प्रसार भारती सार्वजनिक प्रसारण में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, वहीं आईआईसीटी रचनात्मक क्षेत्र के लिए एआई कौशल कार्यक्रम का संचालन करेगा और वेव्स ओटीटी 'क्रिएट इन इंडिया' चुनौती के समन्वय सहित नागरिक भागीदारी और सामग्री निर्माण के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

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राष्ट्रपति ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर रामलला के दर्शन किये

राष्ट्रपति ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर रामलला के दर्शन किये

 श्री राम यंत्र स्थापना करने से, राम राज्य के आदर्शों का पालन करते हुए, हम नैतिकता और धार्मिक आचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 मार्च, 2026) उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर जाकर राम लला के दर्शन किये। उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर के भीतर विभिन्न स्थानों पर दर्शन एवं आरती की और श्री राम यंत्र स्थापना और पूजन भी किया।

 

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना ही उनका परम सौभाग्य हैयह वही पवित्र नगरी है जहां प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के प्रारंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए वास्तव में एक सौभाग्य है।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि इस अत्यंत पवित्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भूमि पूजनयहां राम लला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठाराम दरबार का भक्तजनों के लिए खोला जाना तथा मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण के दिन हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से हम इन लक्ष्यों को 2047 तकशायद उससे भी पहलेप्राप्त कर लेंगे। 21वीं सदी मेंहमारे समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र की परिकल्पना राम राज्य के वर्णन में प्राप्त होती है। गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि राम-राज्य में न कोई दुखी हैन निर्धन है न परावलंबी हैन बुद्धिहीन है और न ही कोई संस्कारहीन है।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि राम राज्य का आदर्श आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के उच्चतम मानकों को प्रस्तुत करता है। प्रभु श्री राम के जीवन के अनेक उदाहरण सर्वव्यापी और समावेशी जीवन दर्शन के आदर्श को दर्शाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समकालीन संदर्भ में सामाजिक समावेश और आर्थिक न्याय सहित राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं और उन्हें क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राम राज्य के आदर्शों पर चलते हुए हम सब नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकेंगे।

 

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश का पुनर्जागरण आर्थिकसामाजिकराजनीतिक और सांस्कृतिक सभी आयामों में हो रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों को एकता की भावना से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के प्रति भक्ति के पवित्र बंधन से एकजुट होकर और सभी के प्रति आत्मीयता की भावना रखते हुएहमें राष्ट्र निर्माण में संलग्न होना चाहिए।

 

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वस्त्र मंत्रालय ने मुंबई में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम पर क्षेत्रीय हितधारक परामर्श आयोजित किया

वस्त्र मंत्रालय ने मुंबई में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम पर क्षेत्रीय हितधारक परामर्श आयोजित किया

 परामर्श सत्रों में केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं पर चर्चा हुईउद्योग ने वस्त्र-केंद्रित बजट का स्वागत किया और निवेश एवं विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
वस्त्र मंत्रालय ने क्षेत्रीय परामर्शों की एक श्रृंखला शुरू की है, जिसमें पहला परामर्श मुंबई में आयोजित किया गया। यह परामर्श वित्त मंत्री द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम की घोषणाओं के बाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विनिर्माण विस्तार, फाइबर की उपलब्धता, रोजगार सृजन और स्थिरता पर केंद्रित व्यापक उपायों के माध्यम से श्रम-प्रधान वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करना है।

इस परामर्श बैठक में वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, महाराष्ट्र और राजस्थान की राज्य सरकारों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, उद्योग संघों और क्लस्टर प्रतिनिधियों, वित्तीय संस्थानों, विकास भागीदारों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया। बैठक में भारत के वस्त्र इकोसिस्‍टम को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रमुख पहलों के लिए कार्यान्वयन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने अपने संबोधन में विकास और रोजगार के प्रमुख चालक के रूप में वस्त्र क्षेत्र को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने उत्पादन बढ़ानेउत्पादकता में सुधार करने और वस्त्र क्षेत्र में भारत को एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में स्थापित करने के महत्व पर बल दिया।

वस्त्र मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री रोहित कंसल ने स्वागत भाषण दिया। उन्‍होंने प्रस्तावित एकीकृत वस्त्र क्षेत्र कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने नीतिगत उद्देश्यों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने के लिए सरकार और उद्योग के बीच निरंतर संवाद के महत्व पर बल दिया और वस्त्र मूल्य श्रृंखला में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिए निवेशबुनियादी ढांचे और नीतिगत समर्थन को समन्वित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

इस परामर्श सत्र में वस्त्र क्षेत्र के एकीकृत कार्यक्रम के अंतर्गत कई प्रमुख पहलों पर समानांतर सत्र आयोजित किए गएजिनमें राष्ट्रीय फाइबर योजनावस्त्र विस्तार एवं रोजगार (टीईईएम) योजनाराष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रमटेक्स इको पहलसमर्थ 2.0 और मेगा टेक्सटाइल पार्क शामिल हैं। ये पहलें फाइबर से लेकर तैयार उत्पादों तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को समर्थन देने के प्रयासों पर प्रकाश डालती हैं।

संवादात्मक चर्चा सत्र में हितधारकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कार्यक्रम की रूपरेखावित्तपोषण तंत्रप्रौद्योगिकी अपनाने और क्लस्टर स्तर की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता बढ़ाने के लिए लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनानेबुनियादी ढांचे तक पहुंच में सुधार करने और प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने के महत्व पर बल दिया।

क्षेत्रीय हितधारक परामर्श, मंत्रालय के उन निरंतर प्रयासों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य उद्योग और राज्य सरकारों के साथ संरचित जुड़ाव को मजबूत करना और भारत के वस्त्र क्षेत्र के विकासस्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए एक समन्वित रोडमैप को आगे बढ़ाना है।

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केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी की समीक्षा के लिए संसदीय परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी की समीक्षा के लिए संसदीय परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की

 आवास और शहरी कार्य तथा विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने कल आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (मोहुआ) की संसदीय परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के कार्यकलाप तथा उनके चल रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।

बैठक में मोहुआ के सचिव श्री श्रीनिवास कटिकीथाला, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्यसभा और लोकसभा के सांसद उपस्थित थे।

बैठक के दौरान सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं में वर्तमान में तैनात आधुनिक निर्माण तकनीकों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। चर्चा में उन्नत निर्माण तकनीकों के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला गया, जो तेज परियोजना निष्पादन, बेहतर संरचनात्मक गुणवत्ता और सार्वजनिक अवसंरचना विकास में उन्नत दक्षता प्रदान कर रहे हैं।

 

समिति ने सामान्य पूल आवासीय आवास (जीपीआरए) कॉलोनियों तथा अन्य सार्वजनिक भवनों के लिए लागू की जा रही नवीन पुनर्विकास मॉडलों की भी समीक्षा की। ये पुनर्विकास पहलें मूल्यवान शहरी भूमि का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करने, आधुनिक एवं सतत आवासीय अवसंरचना प्रदान करने तथा सरकारी कर्मचारियों के रहन-सहन की स्थितियों में सुधार लाने का लक्ष्य रखती हैं।अपने उद्गारों में श्री मनोहर लाल ने कुशल निर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने तथा गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध परियोजना पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों तथा बेहतर परियोजना प्रबंधन प्रक्रियाओं का उपयोग देशभर में सार्वजनिक अवसंरचना की डिलीवरी को बदलने में सहायक हो रहा है।परामर्शी समिति के सदस्यों ने निर्माण प्रक्रियाओं को मजबूत करने, परियोजना निगरानी तंत्र में सुधार लाने तथा सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता और सततता को और बढ़ाने पर अपने विचार एवं सुझाव साझा किए।

केंद्रीय मंत्री ने सांसदों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत किया तथा आश्वासन दिया कि उनके मूल्यवान सुझावों को एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी के कार्यकलाप में सुधार लाने तथा देशभर में अवसंरचना विकास को और मजबूत करने के लिए उचित रूप से ध्यान में रखा जाएगा।

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रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा निर्देश नियमावली 2026 जारी की

रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा निर्देश नियमावली 2026 जारी की

 रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने 9 मार्च, 2026 को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में आयोजित एक समारोह में रक्षा मंत्रालय के सुरक्षा निर्देश नई नियमावली 2026 का विमोचन किया। यह नियमावली सुरक्षा दिशानिर्देशों की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाला एक व्यापक दस्तावेज है, जिसे बदलते सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा।

रक्षा सचिव ने अपने संबोधन में उभरते खतरों और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सुरक्षा अनुशासन का कड़ाई से पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना चाहिए।

श्री राजेश कुमार सिंह ने इन विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देशों को तैयार करने में मंत्रालय के सुरक्षा कार्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों से इनके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने का आग्रह किया और कहा कि यह नियमावली मंत्रालय के भीतर एक सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में सहायक होगी।

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बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया के विकसित हो रहे समुद्री परिदृश्य के बीच निगरानी और तैयारियों को मजबूत किया

बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने पश्चिम एशिया के विकसित हो रहे समुद्री परिदृश्य के बीच निगरानी और तैयारियों को मजबूत किया

 बंदरगाहजहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय  (एमओपीएसडब्ल्यूने पश्चिम एशिया क्षेत्र में हो रहे युद्ध घटनाक्रम से बदल रहे समुद्री परिदृश्य के मद्देनजर निगरानी और तैयारी उपायों को मजबूत किया है। इसमें भारतीय समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनाभारतीय जहाजों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता बनाए रखना मुख्य फोकस है।

एमओपीएसडब्ल्यू के सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समीक्षा बैठक आयोजित की गईजिसमें विकसित हो रही स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लियाजिनमें विदेश मंत्रालय (MEA), महानिदेशकविदेश व्यापार(DGFT) और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) शामिल थे। इसमे शिपिंग उद्योग और व्यापार संगठनों जैसे RIL, INSA, CSLA और FIEO के हितधारकों ने भी भाग लिया।

यह समीक्षा माननीय केंद्रीय पोर्ट्सशिपिंग एंड वाटरवेज मंत्री श्री सरबानंद सोनोवाल द्वारा पहले से बदल रहे समुद्री परिदृश्य की समीक्षा बैठक की अगली कड़ी थी।

मंत्रालय ने सभी  हितधारकों को भारत सरकार द्वाराविशेष रूप से मोपीएसडब्ल्यू द्वारामध्य पूर्व में विकसित हो रही स्थिति के बाद उठाए जा रहे कदमों से अवगत कराया। एमओपीएसडब्ल्यू शिपिंग उद्योग के साथ सक्रिय रूप से समन्वय कर रहा है।  डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) में 24 घंटे हेल्पलाइन स्थापित की गई है ताकि समुद्री यात्रियों के लिए समन्वय और समर्थन सुगम हो।

एमओपीएसडब्ल्यू में माहौल को लगातार ट्रैक करने के लिए निगरानी तंत्र भी स्थापित किया गया है।भारतीय समुद्री यात्रियोंभारतीय ध्वज वाले जहाजों और समुद्री व्यापार संचालन की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने के उपायों का सलाह जारी किया गया हैजो DGS सर्कुलर नंबर 08 ऑफ 2026 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से जारी किया गया है। इसमें सभी भारतीय ध्वज वाले जहाजों और भारतीय समुद्री यात्रियों को उन्नत सुरक्षा उपाय अपनाने और DGS सर्कुलर 08 ऑफ 2024 के तहत रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावाDGS सर्कुलर नंबर 09 ऑफ 2026 दिनांक 28 फरवरी 2026 के माध्यम से क्रू सेफ्टी एडवाइजरी जारी की गई हैजिसमें भारतीय समुद्री यात्रियों और शिपिंग हितधारकों को तत्काल निर्देश दिए गए हैं। इनमें भारत के तेहरान दूतावास में पंजीकरण और डायरेक्टोरेट को क्रू विवरण जमा करना शामिल हैं।

भारतीय ध्वज वाले जहाज सुरक्षित बने हुए हैं और भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ किसी भी पुष्ट हिरासतचढ़ाई या हादसे की कोई रिपोर्ट नहीं आई है। फारस की खाड़ी क्षेत्र (होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 24 और पूर्व में 11जिसमें ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्र शामिलमें मौजूद सभी 35 भारतीय ध्वज वाले जहाजों और एडेन की खाड़ी में 03 जहाजों को LRIT नेशनल डेटा सेंटर के माध्यम से प्रति घंटा अंतराल पर लगातार ट्रैक किया जा रहा हैइन्हें नियमित SITREPs जारी किए जा रहे हैं।

मंत्रालय डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के माध्यम से स्थिति पर करीब से नजर रख रहा हैजिसमें प्रमुख भारतीय बंदरगाहोंसमुद्री अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय है। भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ भारतीय समुद्री यात्रियों वाले विदेशी ध्वज वाले जहाजों के लिए उन्नत निगरानी और रिपोर्टिंग तंत्र सक्रिय किए गए हैं ताकि निरंतर स्थितिजन्य जागरूकता और परिचालन तैयारी सुनिश्चित हो।

शिपिंग कंपनियोंजहाज संचालकों और रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंसियों (RPSLs) को संवेदनशील क्षेत्रों में क्रू तैनाती में सावधानी बरतनेयात्रा-विशिष्ट जोखिम मूल्यांकन करने और समुद्री यात्रियों तथा उनके परिवारों के साथ नियमित संचार बनाए रखने की सलाह दी गई है।

भारतीय समुद्री यात्रियों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित समन्वय तंत्र भी स्थापित किए गए हैं।

मंत्रालय ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) और पश्चिम एशियाई गंतव्यों के लिए जा रहे जहाजों और कार्गो की स्थिति की भी समीक्षा की।

 कुल मिलाकर भारत भर के बंदरगाह संचालन स्थिर बने हुए हैं। बंदरगाहों को निर्यातकों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने और EXIM व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

मेजर पोर्ट्स ने जहाजों की गतिविधियों पर शिपिंग लाइनों और जहाज एजेंटों के साथ समन्वय में निरंतर निगरानीक्षेत्र में विकासों का रीयल-टाइम मूल्यांकन और जहाज तथा कार्गो स्थिति की नियमित रिपोर्टिंग सहित परिचालन उपाय लागू किए हैं। जहां आवश्यक होअतिरिक्त भंडारण स्थान की व्यवस्था की गई हैजबकि रेफ्रिजरेटेड और नाशवान कार्गो consignments पर करीबी निगरानी की जा रही है ताकि आवश्यकता पर प्राथमिकता से हैंडलिंग सुनिश्चित हो।

मंत्रालय भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों और समुद्री हितधारकों के साथ समन्वय में सभी घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए रख रहा है ताकि भारतीय समुद्री हितों की रक्षा होसमुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और समुद्री व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स संचालन सुचारू रूप से चले।

 


 

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सीएसआईआर एनआईएससीपीआर और आईएनएसए ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विज्ञान संचार के रचनात्मक तरीको  पर कार्यशाला का आयोजन किया

सीएसआईआर एनआईएससीपीआर और आईएनएसए ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विज्ञान संचार के रचनात्मक तरीको पर कार्यशाला का आयोजन किया

 राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह 2026 के हिस्से के रूप में विज्ञान भवन नई दिल्ली में "विज्ञान संचार के रचनात्मक तरीकोपर एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआरऔर भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसएने संयुक्त रूप से किया था।

कार्यशाला का उद्घाटन आईएनएसए के अध्यक्ष प्रो. शेखर सी. मांडे ने किया। उन्होंने अनुसंधान और समाज के बीच की खाई को पाटने और समावेशी वैज्ञानिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान संचार को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया।

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने अपने स्वागत भाषण में विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में संस्थान की भूमिका का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिक ज्ञान को अधिक सुलभ और प्रभावशाली बनाने के लिए रचनात्मक और बहुभाषी दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया।

तकनीकी सत्रों में प्रख्यात वक्ताओं ने विज्ञान संचार के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। हैदराबाद विश्वविद्यालय की प्रो. शर्मिष्ठा बनर्जी ने विज्ञान संचार अंतर को दूर करने के लिए कहानी कहने और दर्शक-केंद्रित संचार के महत्व पर बल दिया। गुब्बी लैब्स की डॉ. एच. एस. सुधीरा ने लोकप्रिय विज्ञान लेखन और जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल के उपयोग पर बात की।

सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनीष मोहन गोरे ने लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं, पुस्तकों, शोध पत्रिकाओं और क्षेत्रीय आउटरीच पहलों के माध्यम से सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के योगदान का उल्लेख करते हुए विज्ञान संचार की प्रक्रिया और मीडिया प्रारूपों के बारे में विस्तार से बताया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. परमानंद बर्मन ने विज्ञान के साथ सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ाने में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका पर चर्चा की। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के डॉ. मेहर वान ने विज्ञान संचार में क्या करें और क्या न करें पर एक व्याख्यान दिया, जो व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और प्रतिभागियों को चिंतनशील सीखने में शामिल करता है।

प्रतिभागियों के दृष्टिकोण और अपेक्षाओं का आकलन करने के लिए एक कार्यशाला पूर्व सर्वेक्षण और इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 150 छात्र कार्यशाला में शामिल हुए। यह विज्ञान संचार कौशल को मजबूत करने में मजबूत शैक्षणिक जुड़ाव और रुचि को दर्शाता है। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को समकालीन उपकरणों, डिजिटल रणनीतियों और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि से लैस करना है ताकि विविध दर्शकों के बीच विज्ञान को प्रभावी ढंग से संवाद किया जा सके। इससे विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत के विज्ञान संचार इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके।

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