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सीएसआईआर और इसकी प्रयोगशालाओं ने देश भर में व्याख्यानों प्रदर्शनों और जन जागरूकता कार्यक्रमों के साथ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 मनाया

सीएसआईआर और इसकी प्रयोगशालाओं ने देश भर में व्याख्यानों प्रदर्शनों और जन जागरूकता कार्यक्रमों के साथ राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 मनाया

नई दिल्ली: वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और उसकी प्रयोगशालाओं ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 को राष्ट्रव्यापी स्तर पर व्याख्यानों, छात्र भ्रमण, प्रदर्शनों और जन जागरूकता कार्यक्रमों सहित कई आकर्षक गतिविधियों के माध्यम से मनाया, जिनका उद्देश्य युवा मन और आम जनता के बीच वैज्ञानिक जागरूकता और जिज्ञासा को बढ़ावा देना था।

इस वर्ष का राष्ट्रीय विज्ञान दिवस "विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत को उत्प्रेरित करना" विषय के तहत मनाया गया, जिसमें वैज्ञानिक नवाचार को आगे बढ़ाने और एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत को आकार देने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित समारोहों के एक भाग के रूप में, सीएसआईआर-

स्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (सीएसआईआर-

ईजीआईबी) और विज्ञान संचार और प्रसार निदेशालय (एससीडीडी), सीएसआईआर मुख्यालय ने नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन के जीवन और विरासत तथा उनके द्वारा की गई रमन प्रभाव की अभूतपूर्व खोज को स्मरण करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।

डॉ. सीवी रमन मार्ग पर सर सीवी रमन के जीवन, वैज्ञानिक यात्रा और अग्रणी योगदान को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने आम जनता को आकर्षित किया और भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत के बारे में जागरूकता पैदा की।

इस समारोह में एक सशक्त अनुभवात्मक आयाम जोड़ते हुए, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) के वैज्ञानिकों, डॉ. सुबाशिस पांजा, डॉ. शिबू साहा और डॉ. विद्यानंद सिंह, तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) के डॉ. सौमिक सिद्धांत और श्री हिमांशु यादव (पीएच.डी. छात्र) ने रमन प्रभाव का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन ने प्रतिभागियों को उस घटना को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर प्रदान किया जिसने आधुनिक स्पेक्ट्रोस्कोपी में क्रांति ला दी और जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति का आधार बनी हुई है।

 

एक व्यक्ति माइक्रोफोन में बोल रहा है और उसके आसपास लोगों का एक समूह है। एआई द्वारा उत्पन्न सामग्री गलत हो सकती है।

इसके बाद सीएसआईआर-एनपीएल और आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से एक रोचक व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें रमन प्रभाव, इसका वैज्ञानिक महत्व और पदार्थ विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में इसके व्यापक अनुप्रयोगों के बारे में बताया गया। इस सत्र में जामिया हमदर्द के उत्साही स्कूली छात्रों और स्नातक छात्रों ने भाग लिया, जिन्होंने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की।

इसके अतिरिक्त, भाग लेने वाले छात्रों को सीएसआईआर-आईजीआईबी की विभिन्न प्रयोगशालाओं का निर्देशित दौरा कराया गया, जहां उन्हें चल रही अनुसंधान गतिविधियों और अत्याधुनिक सुविधाओं से परिचित कराया गया, जिससे समकालीन वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति उनका ज्ञान और भी समृद्ध हुआ।

इस अवसर को चिह्नित करने के लिए एक विशेष जनसंपर्क पहल के तहत, विज्ञान संचार एवं प्रसार निदेशालय, सीएसआईआर मुख्यालय ने संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से, शाम को प्रतिष्ठित कुतुब मीनार को रोशन किया । राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के बारे में जागरूकता फैलाने और समाज में विज्ञान की परिवर्तनकारी भूमिका का जश्न मनाने के लिए स्मारक को विशेष रूप से रोशन किया गया था।  

रात में जगमगाता एक ऊंचा टावर। एआई-जनरेटेड कंटेंट गलत हो सकता है। 

इन राष्ट्रव्यापी गतिविधियों के माध्यम से, सीएसआईआर ने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, युवा शिक्षार्थियों को प्रेरित करने और विज्ञान को सार्थक और आकर्षक तरीकों से समाज के करीब लाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो विज्ञान-आधारित विकसित भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप है।

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अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आज मुंबई में जियो पारसी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक आयोजित की

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने आज मुंबई में जियो पारसी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक आयोजित की

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमार की अध्यक्षता में आज मुंबई में जियो पारसी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियोंमहाराष्ट्र और गुजरात के अल्पसंख्यक कल्याण विभागों के प्रतिनिधियोंमुंबई और गुजरात की पारसी पंचायतों के सदस्यों और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया।

बैठक के दौरानपारसी जनसंख्‍या में गिरावट के कारणों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गयाजिनमें जनसांख्यिकीय रुझानदेर से विवाहसामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ और बदलते सामाजिक स्वरूप शामिल थे। हितधारकों ने समन्वित नीतिगत समर्थन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इन मुद्दों के समाधान के लिए सुझाव साझा किए।

समिति ने पारसी समुदाय में समय पर और शीघ्र विवाह को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा की। इनमें जागरूकता अभियान को मजबूत करनापरामर्श और विवाह संबंधी सहायता प्रणालियों का विस्तार करनापंचायतों और संस्थानों के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर भागीदारी को प्रोत्साहित करना और पारसी युवाओं तथा परिवारों के बीच संपर्क प्रयासों को बढ़ाना शामिल था।

सचिव ने दीर्घकालिक सामुदायिक स्थिरता सुनिश्चित करने में आर्थिक सशक्तिकरण के महत्व का उल्‍लेख किया। उन्होंने पारसी समुदाय के सदस्योंविशेषकर युवाओं और महिलाओं को एनएमडीएफसी द्वारा स्टार्टअपस्वरोजगार और कौशल-आधारित उद्यमों के लिए प्रदान किए जाने वाले रियायती ऋणों और उद्यमिता सहायता का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

बैठक में जियो पारसी योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गईजो पारसी समुदाय की जनसंख्या को बढाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अनूठी केंद्रीय क्षेत्र योजना है। यह योजना प्रजनन उपचारों से संबंधित चिकित्सा सहायताबाल देखभाल सहायताजागरूकता कार्यक्रमों तथा परिवार निर्माण और जनसंख्या स्थिरीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई की गई सामुदायिक पहलों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

इन चर्चाओं में भारत सरकार की इस प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई कि वह लक्षित समाधानों और हितधारकों के साथ निरंतर सहयोग के माध्यम से पारसी समुदाय की समृद्ध विरासतजनसांख्यिकीय जीवंतता और सामाजिक-आर्थिक कल्याण को संरक्षित और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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भारत ब्रिटेन गृह मामलों की छठी वार्ता नई दिल्ली में आयोजित की गई

भारत ब्रिटेन गृह मामलों की छठी वार्ता नई दिल्ली में आयोजित की गई

भारत-ब्रिटेन गृह मामलों पर छठी वार्ता (एचएडी) आज नई दिल्ली में आयोजित की गई। सीमा प्रबंधन सचिव डॉ. राजेंद्र कुमार ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का और ब्रिटेन प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह कार्यालय के द्वितीय स्थायी सचिव श्री साइमन रिडले ने किया। बैठक में दोनों देशों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने मौजूदा सहयोग का आकलन किया। इसके साथ ही खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों और ब्रिटेन में भारत विरोधी समूहों की गतिविधियांमादक पदार्थों की तस्करीप्रवासनआपराधिक न्याय और कानून प्रवर्तन सहयोगसाइबर सुरक्षा सहित आतंकवाद और संगठित अपराधों आदि के खिलाफ सक्रिय सहयोग हेतु पारस्परिक हितों और तालमेल के अन्य क्षेत्रों की पहचान की। ब्रिटेन में भारतीय गणमान्य व्यक्तियों और राजनयिक मिशनों की सुरक्षा में सेंधमारी को लेकर भारत की चिंताओं पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया।

बैठक का समापन दोनों देशों की मौजूदा सहयोग स्तर पर पारस्परिक संतुष्टि और दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने की गति को बनाए रखते हुए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति के साथ हुआ।

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राष्ट्रपति ने जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी

राष्ट्रपति ने जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी

प्रचंड में भरी गई उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मुराष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (27 फरवरी, 2026) राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरी। इससे पहले, उन्होंने क्रमशः 2023 और 2025 में सुखोई 30 एमकेआई और राफेल में उड़ानें भरी थीं।

यह मिशन दो विमानों के एलसीएच फॉर्मेशन के रूप में क्रियान्वित किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ पहले विमान में उड़ान भरी, जबकि वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए महेंद्र दूसरे विमान में नंबर 2 के रूप में सवार थे। लगभग 25 मिनट के इस मिशन के दौरान, उन्होंने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी और एक टैंक लक्ष्य पर हमला किया।

बाद में आगंतुक पुस्तिका में, राष्ट्रपति ने एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा, भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।

शाम को राष्ट्रपति जैसलमेर में भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का अवलोकन करेंगी।

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न्यायधानी को जाम से मुक्ति दिलाने केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू की बड़ी पहल: रिंग रोड परियोजना को केंद्र से हरी झंडी; हवाई अड्डा, औद्योगिक क्षेत्र और नेशनल हाईवे को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

न्यायधानी को जाम से मुक्ति दिलाने केन्द्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू की बड़ी पहल: रिंग रोड परियोजना को केंद्र से हरी झंडी; हवाई अड्डा, औद्योगिक क्षेत्र और नेशनल हाईवे को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी

​बिलासपुर संसदीय क्षेत्र के शहरी नियोजित विकास और यातायात सुगमता की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त हुई है। आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री एवं बिलासपुर लोकसभा के सांसद श्री तोखन साहू के दूरदर्शी प्रस्ताव और निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री माननीय श्री नितिन गडकरी जी ने 32 किलोमीटर लंबी 'बिलासपुर रिंग रोड' परियोजना को अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
​माननीय मंत्री जी ने सांसद श्री तोखन साहू को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है कि परियोजना की व्यापक उपयोगिता एवं बिलासपुर की भविष्य की प्रशासनिक एवं औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इस मार्ग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) तैयार करने की अनुशंसा कर दी गई है।
 
*​परियोजना की प्रमुख विशेषताएं एवं व्यापक प्रभाव*
​रणनीतिक मार्ग: लगभग 32 कि.मी. लंबी यह रिंग रोड बोदरी (छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समीप) से प्रारंभ होकर सेंदरी गांव (NH-130) तक निर्मित होगी। यह मार्ग उच्च न्यायालय और बिलासपुर हवाई अड्डे को कोरबा, कटघोरा और सीपत जैसे प्रमुख औद्योगिक नगरों से सीधा संपर्क प्रदान करेगा।
​यातायात का स्थायी समाधान: शहर के मध्य से गुजरने वाले NH-49 और NH-130 के भारी वाहनों को अब शहर के बाहर से ही सुगम 'बायपास' प्राप्त होगा। इससे बिलासपुर के मुख्य बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में भारी वाहनों के दबाव से नागरिकों को स्थाई राहत मिलेगी।
​आर्थिक एवं औद्योगिक गलियारा: यह रिंग रोड सिरगिट्टी और लालखदान जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को NH-130A (रायपुर-धनबाद एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर) से सीधे जोड़ेगी। इससे मालवाहन के समय और ईंधन की बचत होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और रसद (Logistics) तंत्र सुदृढ़ होगा।
​नियोजित विस्तार एवं रोजगार: बिलासपुर चूँकि SECR (रेलवे जोन) और SECL का मुख्यालय है, अतः इस रिंग रोड के निर्माण से ट्रांसपोर्ट नगर और लॉजिस्टिक पार्क का सुनियोजित विकास सुनिश्चित होगा, जो भविष्य में क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा।
केन्द्रीय राज्यमंत्री सह बिलासपुर ​सांसद श्री तोखन साहू के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की त्वरित सहमति ने बिलासपुर के आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण को नई गति प्रदान की है।
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सरकार स्थानीय उत्पादन और निर्यात के लिए स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है इस लक्ष्य को साकार करने में भारतीय राजनयिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है रक्षा मंत्री का भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधन

सरकार स्थानीय उत्पादन और निर्यात के लिए स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है इस लक्ष्य को साकार करने में भारतीय राजनयिकों की भूमिका महत्वपूर्ण है रक्षा मंत्री का भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधन

भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने 25 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। अधिकारियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमता को स्थानीय उत्पादन और निर्यात दोनों के लिए विस्तारित करने के भारत सरकार के दृढ़ संकल्प और इस परिकल्पना को साकार करने में भारतीय राजनयिकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। रक्षा क्षेत्र में विशिष्ट प्रौद्योगिकियों को आत्मसात करने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत रक्षा उपकरणों के प्रमुख आयातक से लेकर सभी क्षेत्रों में प्लेटफार्मों के निर्माता और निर्यातक बनने तक का लंबा सफर तय कर चुका है।

 

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समुदाय भारत की विकास गाथा पर बारीकी से नजर रख रहा है और उसकी नेतृत्वकारी भूमिका की सराहना कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि भारत की सकारात्मक छवि को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने उनसे कहा कि विदेश में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय वे हमेशा याद रखें कि वे 1.बिलियन भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने उनसे हर संस्कृति के नए विचारोंलोगों और दृष्टिकोणों के प्रति खुले रहने और भारत की सभ्यतागत ज्ञान के मूल्यों को अपने साथ रखने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिष्ठित भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के लिए किए गए उनके परिश्रम के लिए उन्हें बधाई दी।

इस संवाद से पहलेप्रशिक्षु अधिकारियों को रक्षा मंत्रालय के विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा रक्षा कूटनीति की विभिन्न पहलोंरक्षा बजटत्रि-सेवा एकीकरण और रक्षा संबंधी खरीद के बारे में जानकारी दी गई। इस बैच में 55 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल थेजिनमें 53 भारतीय प्रशिक्षु और भूटान के प्रशिक्षु थे।

 

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रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने सिकंदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में मित्रा विषय पर आयोजित वार्षिक संगोष्ठी को संबोधित किया

रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने सिकंदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय में मित्रा विषय पर आयोजित वार्षिक संगोष्ठी को संबोधित किया

रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने 24 फरवरी, 2026 को सिकंदराबाद स्थित रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय (सीडीएम) में अपने संबोधन में कहा कि जैसे-जैसे युद्ध भौतिक से कृत्रिम और संज्ञानात्मक क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहा है, भारतीय सशस्त्र बलों को नेट-केंद्रित अभियानों से हटकर बुद्धिमान युद्ध की ओर अग्रसर होना चाहिए और बहु-क्षेत्रीय अभियानों (एमडीओ) से आगे बढ़कर सर्वक्षेत्रीय सर्वक्षेत्रीय अभियानों (एआरएडीओ) की ओर बढ़ना चाहिए। 'बहु-क्षेत्रीय एकीकृत तकनीकी रूप से सशक्त लचीली सशस्त्र सेना मित्रा विषय पर आयोजित वार्षिक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए, रक्षा प्रमुख ने 'सैन्य मामलों में तीसरी क्रांति' पर प्रकाश डाला, जिसकी विशेषता अभिसारी युद्ध है जो संघर्ष के सभी स्तरों पर संपर्क और गैर-संपर्क, गतिज और गैर-गतिज, और पुराने और नए क्षेत्रों को एकीकृत करता है। उन्होंने परमाणु-रहित रणनीतिक प्रतिरोध स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे संघर्ष के हर स्तर पर जीत हासिल करने की क्षमता सुनिश्चित हो सके।

रक्षा प्रमुख ने 24-25 फरवरी, 2026 को हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के साथ 'नॉलेज पार्टनर' के रूप में वार्षिक सेमिनार का आयोजन किया। इस वर्ष का विषय 'मित्रा' तेजी से जटिल होते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य में सैन्य और युद्ध रणनीतियों की बदलती भूमिका को रेखांकित करता है।

 

 

यह संगोष्ठी भारत के विशिष्ट परिचालन परिवेश के साथ समकालीन संघर्षों से प्राप्त सबकों को संरेखित करने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करती है, जिसका केंद्र बिंदु आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक सुधार है। इसका उद्देश्य एक ऐसी मित्रा सशस्त्र सेना विकसित करना है जो बहुआयामी दृष्टि, एकीकृत कार्यप्रणाली, प्रौद्योगिकी-सशक्त क्रियान्वयन और दृढ़ उद्देश्यों वाली हो। वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों, विद्वानों, उद्योग भागीदारों और विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट वार्षिक संगोष्ठी 2026 मित्रा के अंतर्गत व्यापक राष्ट्रीय शक्ति के विकास के लिए बौद्धिक विमर्श और रणनीतिक दूरदर्शिता को बढ़ावा देती है, ताकि भविष्य के संघर्षों के प्रशासन और प्रबंधन के साथ-साथ एक दृढ़ भारत का निर्माण किया जा सके।

दिसंबर 1970 में स्थापित, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट एक प्रमुख त्रि-सेवा संस्थान रहा है जो सैन्य नेतृत्व को समकालीन प्रबंधन विचारों, अवधारणाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं से लैस करने के लिए समर्पित है। वर्षों से, इसके वार्षिक सेमिनारों में रणनीतिक चुनौतियों और आत्मनिर्भरता से लेकर भू-राजनीतिक शक्ति परिवर्तन और नेतृत्व रूपांतरण तक के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है, जिससे भविष्य के संघर्षों के प्रशासन और प्रबंधन तथा एक लचीले भारत के निर्माण में भारत के सैन्य भविष्य को आकार देने में कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की भूमिका मजबूत हुई है।

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एवं कृषि उन्नति योजनाओं की समीक्षा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एवं कृषि उन्नति योजनाओं की समीक्षा

 किसानों को MSP का लाभ सुनिश्चित करने हेतु मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात एवं महाराष्ट्र को चना, मसूर व सरसों की खरीद की मंजूरीकेंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने 12 सफदरजंग रोड स्थित आवास पर 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल माध्यम से विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस दौरान राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) एवं कृषि उन्नति योजना (KY) के अंतर्गत राज्यों में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा इन दोनों योजनाओं में जारी धनराशि के प्रभावीपारदर्शी एवं समयबद्ध उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजटीय व्यय करना नहींबल्कि जमीनी स्तर पर किसानों की आय में ठोस वृद्धि सुनिश्चित करना है।

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श्री चौहान ने राज्यों से आग्रह किया कि उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोग 31 मार्च 2026 तक पूर्ण रूप से सुनिश्चित किया जाएताकि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि समयबद्ध व्यय के साथ-साथ गुणवत्तापारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है।

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बैठक में कृषि अवसंरचना सुदृढ़ीकरणतकनीकी नवाचारप्राकृतिक खेती को प्रोत्साहनबीज वितरणफसल विविधीकरण तथा मूल्य संवर्धन जैसी पहलों पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से कहा कि वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करें तथा नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्राथमिकता देंजिससे किसानों की लागत घटे और उत्पादकता में वृद्धि हो।

बैठक के दौरान रबी विपणन सत्र के अंतर्गत विभिन्न राज्यों द्वारा फसलों की खरीद के संबंध में प्रस्तुत प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए निम्नलिखित स्वीकृतियाँ प्रदान की गईं जिसमें मध्य प्रदेश को चना एवं मसूर की खरीद की स्वीकृतिराजस्थान एवं गुजरात को चना एवं सरसों की खरीद की स्वीकृतिमहाराष्ट्र को चना की खरीद की स्वीकृति शामिल हैं।

इन स्वीकृतियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अनुरूप प्राप्त हो सके तथा बाजार में मूल्य स्थिरता बनी रहे।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि खरीद प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण की जाएताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि खरीद केंद्र पर्याप्त मात्रा में होंतौलभंडारण एवं भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शिता एवं ईमानदारी से संचालित हो तथा किसानों को न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

श्री चौहान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से ही कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने राज्यों से अपेक्षा की कि वे योजनाओं के क्रियान्वयन में नवाचारतकनीक और पारदर्शिता को प्राथमिकता देंजिससे किसानों का विश्वास और सुदृढ़ हो।

बैठक के अंत में राज्यों के प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि वे योजनाओं के अंतर्गत धनराशि के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग के लिए तेजी से कार्य करेंगे तथा किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ेंगे।

बैठक में गुजरात के कृषि मंत्री श्री जीतूभाईअसम के श्री अतुल बोराबिहार के श्री रामकृपाल यादवमहाराष्ट्र के श्री दत्तात्रेय भरणेउत्तराखंड के श्री गणेश जोशीराजस्थान के श्री किरोड़ी लाल मीणाहरियाणा के श्री श्याम सिंह राणाकेरल के श्री पी. प्रसाद तथा मध्य प्रदेश के श्री ऐदल सिंहकृषि मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, सिक्किम राष्ट्र के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से एकीकृत महसूस करता है: मुख्यमंत्री सिक्किम प्रेम सिंह तामांग - गोले

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, सिक्किम राष्ट्र के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से एकीकृत महसूस करता है: मुख्यमंत्री सिक्किम प्रेम सिंह तामांग - गोले

छत्तीसगढ़ प्रेस बिरादरी के 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज मिन्तोकगांग में मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तामांग से शिष्टाचार भेंट की। बातचीत के दौरान, मुख्यमंत्री ने सिक्किम सरकार द्वारा की गई विभिन्न विकासात्मक पहलों और प्रगतिशील नीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने राज्य की शांत पारिस्थितिकी और चीन, नेपाल तथा भूटान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करने वाले एक रणनीतिक सीमावर्ती राज्य के रूप में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। सतत विकास पर जोर देते हुए, उन्होंने सिक्किम में जारी जैविक खेती (Organic Farming) प्रथाओं और राज्य की अर्थव्यवस्था पर उनके सफल प्रभाव के बारे में बात की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के उपायों और व्यापक वन क्षेत्र के महत्व को भी रेखांकित किया, जिसने सामूहिक रूप से राष्ट्र के 'हरित राज्य' के रूप में सिक्किम की पहचान को मजबूत किया है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, सिक्किम देश के बाकी हिस्सों के साथ पहले से कहीं अधिक गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करता है। केंद्र सरकार के केंद्रित ध्यान और समावेशी दृष्टिकोण ने हमारी अपनेपन की भावना को मजबूत किया है और उन बंधनों को सुदृढ़ किया है जो हमें एक राष्ट्र के रूप में जोड़ते हैं।
 
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 'हर घर तिरंगा' और 'वंदे मातरम' जैसी पहल महज कार्यक्रम होने से कहीं आगे निकल गई हैं; वे एकता, गौरव और साझा राष्ट्रीय पहचान के शक्तिशाली प्रतीक बन गए हैं। इन प्रयासों ने पूरे देश के साथ और एक-दूसरे के साथ हमारे भावनात्मक जुड़ाव को गहरा किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में भाईचारे और देशभक्ति की एक नई भावना पैदा हुई है। आज, हम न केवल भौगोलिक रूप से भारत का हिस्सा महसूस करते हैं, बल्कि पूरे राष्ट्र के साथ भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से एकीकृत महसूस करते हैं।
 
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में लागू की गई प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। राज्य की पहलों के साथ समन्वय में भारत सरकार की केंद्र प्रायोजित योजनाओं और प्रमुख कार्यक्रमों के सफल कार्यान्वयन पर विशेष जोर दिया गया
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हाफिजपुर पुलिस ने मुठभेड़ में इनामी गैंगस्टर को लंगड़ा कर की नए साल की शुरुआत

हाफिजपुर पुलिस ने मुठभेड़ में इनामी गैंगस्टर को लंगड़ा कर की नए साल की शुरुआत

02-Jan-2026 195

हापुड़- रिपोर्ट हरेन्द्र शर्मा , यूपी के हापुड़ जिले में चेकिंग के अभियान के दौरान हाफिजपुर पुलिस की 20 हजार के इनामी गैंगस्टर से मुठभेड़ हुई है। पुलिस के रुकने पर इनामी बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग की पुलिस की जवाबी कार्रवाई में बदमाश को गोली लगी पुलिस ने घायल अवस्था में शातिर बदमाश को गिरफ्तार किया है । इनामी बदमाश गौरव गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित चल रहा था , जिसको पुलिस ने मुठभेड़ के बाद धर दबोचा है। बदमाश के कब्जे से बाइक, तमंचा व कारतूस बरामद किया गया है। गैंगस्टर बदमाश गौरव पर लूट व चोरी के आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं।

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भारत सरकार ने भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत तीन वैश्विक इम्पैक्ट चुनौतियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जिनकी कुल पुरस्कार राशि 5.85 करोड़ रुपये है आवेदन 31 अक्टूबर 2025 तक खुले हैं

भारत सरकार ने भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत तीन वैश्विक इम्पैक्ट चुनौतियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए जिनकी कुल पुरस्कार राशि 5.85 करोड़ रुपये है आवेदन 31 अक्टूबर 2025 तक खुले हैं

 इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा सितंबर 2025 में घोषित तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए आवेदन अब खुल चुके हैं और इसके अंतर्गत कुल 5.85 करोड़ रूपए मूल्य के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। तीन पहलोंएआई फॉर ऑल: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंजएआई बाय एचईआर: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंजऔर वाईयूवीएआई: ग्लोबल यूथ चैलेंजका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक प्रभाव की उच्च क्षमता वाले परिवर्तनकारी एआई-संचालित समाधानों की पहचानपोषण और प्रदर्शन करना है। ये कार्यक्रम नवप्रवर्तकों को मार्गदर्शननिवेशकों तक पहुंच और अपने विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेंगे। ये चुनौतियां आधिकारिक शिखर सम्मेलन वेबसाइट: https://impact.indiaai.gov.in/ पर लाइव हैं।

वैश्विक प्रभाव चुनौतियां समावेशीज़िम्मेदार और मापनीय एआई नवाचार को गति देने के लिए तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता में ऐसे अभूतपूर्व विचारों को प्रेरित और समर्थन देना है जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन को गति प्रदान कर सकें। चयनित नवाचारों को 19-20 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 में प्रदर्शित किया जाएगा।

तीन प्रमुख वैश्विक प्रभाव चुनौतियां क्या हैं?

1) सभी के लिए एआई: वैश्विक प्रभाव चुनौती

एआई नवाचारों के लिए एक वैश्विक आह्वान जो व्यापक स्तर पर उच्च संभावित मूल्य प्रदर्शित करते हैं और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। यह चुनौती कृषिजलवायु एवं स्थिरताशिक्षावित्तीय समावेशनस्वास्थ्य सेवाविनिर्माणशहरी अवसंरचना एवं गतिशीलताऔर वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन ट्रैक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्यान्वित करने योग्य एआई समाधानों को आमंत्रित करती है।

पुरस्कार एवं समर्थन:

  • शीर्ष 10 विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
  • 20 फाइनलिस्ट (प्रत्येक में अधिकतम दो सदस्य) को भारत-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए यात्रा सहायता मिलेगी।
  • मेंटरशिपनिवेशक संपर्ककंप्यूट/क्लाउड क्रेडिट और शिखर सम्मेलन के पश्चात त्वरित मार्गों तक पहुंच।

पात्रता: यह अवसर वैश्विक स्तर पर छात्रोंशोधकर्ताओंकार्यरत पेशेवरोंकंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खुला है जिनके पास पायलट स्तर पर या व्यापक स्तर पर उपयोग के लिए तैयार एआई समाधान हैं।

यहाँ आवेदन करें

2) एआई बाय एचईआर: ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज

नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच (डब्ल्यूईपीद्वारा अन्य ज्ञान साझेदारों के सहयोग से आयोजितमहिलाओं के नेतृत्व वाले एआई नवाचारों की श्रृंखला को मज़बूत करने के लिए एक समर्पित चुनौती। आवेदकों को कृषिसाइबर सुरक्षा और डिजिटल कल्याणशिक्षास्वास्थ्य सेवाऊर्जा और जलवायुतथा वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में ठोस सामाजिक प्रभाव पैदा करने वाले एआई समाधान प्रस्तावित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

पुरस्कार एवं समर्थन:

  • शीर्ष 10 विजेताओं को 2.5 करोड़ रुपये तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
  • शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 30 फाइनलिस्ट (प्रत्येक में अधिकतम दो सदस्य) को यात्रा सहायता दी जाएगी।
  • उत्तरदायी एआईनिवेशक तत्परता और कहानी कहने पर वर्चुअल बूटकैम्प।
  • 30 उच्च-संभावित टीमों के लिए निवेशक संलग्नताएं तैयार की गईं।

पात्रता: महिलाओं के नेतृत्व वाली टीमोंछात्र टीमोंया महिलाओं के नेतृत्व वाली संस्थाओं के लिएजिनके पास एक कार्यशील प्रोटोटाइप या परिपक्व एआई समाधान होविश्व स्तर पर खुला है।
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3) वाईयूवीएआई: वैश्विक युवा चुनौती

13-21 वर्ष की आयु के युवा नवप्रवर्तकों (व्यक्तिगत या अधिकतम दो लोगों की टीम) को जनहित के लिए एआई समाधान विकसित करने हेतु प्रोत्साहित करने हेतु डिज़ाइन की गई एक युवा-प्रथम पहल। इसके सांकेतिक विषयों में लोगों और समुदायों को सशक्त बनानाप्रमुख क्षेत्रों में बदलाव लाना और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचे और स्मार्ट इकोसिस्टम के निर्माण के साथ ही एक वाइल्डकार्ड/ओपन इनोवेशन श्रेणी शामिल है।

पुरस्कार एवं समर्थन:

  • कुल 85 लाख रुपये के पुरस्कारजिनमें शामिल हैं:
  • शीर्ष विजेताओं में से प्रत्येक को 15 लाख रुपये
  • अगले विजेताओं में से प्रत्येक को 10 लाख रुपये
  • लाख रुपये प्रत्येक के विशेष मान्यता पुरस्कार
  • शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शीर्ष 20 प्रतिभागियों को यात्रा सहायता दी जाएगी।
  • 10-दिवसीय वर्चुअल बूटकैम्पनिवेशक प्रदर्शन के अवसरतथा एक स्थायी ऑनलाइन शोकेस और संग्रह प्रकाशन।

पात्रता: 13-21 वर्ष की आयु के युवा नवप्रवर्तकों के लिएजिनके पास कार्यशील प्रोटोटाइपपीओसी या परिनियोजन योग्य समाधान होंविश्व स्तर पर खुला है।


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समयसीमा और प्रमुख तिथियां

  • आवेदन खुलने की तिथि: 10 अक्टूबर, 2025
  • आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर, 2025
  • वर्चुअल बूटकैंप: नवंबर 2025
  • फाइनलिस्ट की घोषणा: 31 दिसंबर, 2025 तक
  • भव्य प्रदर्शन: भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 (16-20 फरवरी, 2026, नई दिल्ली)

आवेदन कैसे करें

तीनों ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज के लिए आवेदन आधिकारिक पोर्टल www.impact.indiaai.gov.in के माध्यम से प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

प्रत्येक चुनौती पृष्ठ पर पात्रता मानदंडसमय-सीमासबमिशन दिशानिर्देशसहमति प्रपत्र और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है । आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे सभी निर्देशों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें और शॉर्टलिस्टिंग और भागीदारी से संबंधित अपडेट और घोषणाओं के लिए नियमित रूप से वेबसाइट देखें।

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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पीएमजेवीके के तहत विरासत और शास्त्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पीएमजेवीके के तहत विरासत और शास्त्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए

 अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालयप्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के अंतर्गत विरासत और शास्त्रीय भाषाओं के संवर्धन और संरक्षण हेतु उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए देश भर के विश्वविद्यालयों को सहायता प्रदान कर रहा है।

इसी पहल के एक भाग के रूप में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने  इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में पीएमजेवीके के तहत 27.16 करोड़ रुपये की लागत से जैन अध्ययन केंद्र की शुरूआत की। इस अवसर पर जैन धर्म और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्रशेखर कुमार तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राम सिंह भी उपस्थित थे।

 डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया और संकाय सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने विश्वविद्यालय से जैन अध्ययन केंद्र को वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने और अनुसंधानदस्तावेज़ीकरण और प्रसार के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों को एकीकृत करने का आग्रह किया। डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने प्रौद्योगिकी की भूमिका पर ज़ोर देते हुए व्यापक शैक्षणिक और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए विरासती भाषाओं के संरक्षणडिजिटलीकरण और संवर्धन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की क्षमता पर प्रकाश डाला।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने मुंबई विश्वविद्यालय में पालीप्राकृत और अवेस्ता पहलवी और गुजरात विश्वविद्यालय में प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं । इन केंद्रों का उद्देश्य उन्नत अनुसंधानअनुवादपांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षाशास्त्र के साथ एकीकृत करना है। मंत्रालय की ओर से इन उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना भाषाई और दार्शनिक विरासत की रक्षा और देश के विविध समुदायों की बौद्धिक परंपराओं को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय बैठक में की कृषि क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उच्चस्तरीय बैठक में की कृषि क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा

 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज एक उच्चस्तरीय बैठक में कृषि क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में देशभर में खरीफ फसल की स्थितिरबी फसल की बुवाईबाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसलों की स्थितिमूल्य स्थितिउर्वरक उपलब्धताजलाशयों की स्थिति सहित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने इस दौरान विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने खरीफ की बुवाई के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि खरीफ फसलों के अंतर्गत कुल क्षेत्रफल कवरेज पिछले वर्ष की तुलना में 6.51 लाख हेक्टेयर अधिक है। कुल बुवाई क्षेत्र 1121.46 लाख हेक्टेयर हैजबकि गत वर्ष यह 1114.95 लाख हेक्टेयर था। गेहूंधानमक्कागन्ना और दलहन की बुवाई भी वर्ष 2024-25 की तुलना में अधिक हुई है। बैठक में उड़द बुवाई क्षेत्रफल में वृद्धि की भी जानकारी देते हुए बताया गया कि उड़द के क्षेत्रफल में 1.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में उड़द का बुवाई क्षेत्रफल 22.87 लाख हेक्टेयर थाजो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24.37 लाख हेक्टेयर हो गया है।

बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने जानकारी लीउन्होंने पिछले दिनों बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित कुछ राज्यों के जिलों का दौरा भी किया था। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण कुछ प्रदेशों में फसलें प्रभावित हैंलेकिन यह भी बताया कि अन्य प्रदेशों में अच्छे मानसून के कारण फसल काफी अच्छी हैजिसका प्रभाव रबी बुवाई और उत्पादन में वृद्धि के रूप में देखने को मिलेगा।

बैठक में बताया गया कि टमाटर और प्याज की बुवाई सुचारू रूप से चल  रही है। वर्ष 2024-25 की तुलना में प्याज का बुवाई क्षेत्रफल 3.62 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.91 लाख हेक्टेयर हो गया हैवहीं आलू का क्षेत्रफल 0.35 लाख हेक्टेयर की तुलना में 0.43 लाख हेक्टेयर हो गया है। टमाटर का बुवाई क्षेत्रफल पिछले वर्ष समान अवधि में 1.86 लाख हेक्टेयर थाजो इस वर्ष बढ़कर 2.37 लाख हेक्टेयर हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि आलूप्याजटमाटर में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप अच्छी वृद्धि हुई है। बैठक में बताया गया कि चावल और गेहूं के वास्तविक स्टॉक बफर मानक के मुकाबले ज्यादा हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह को अधिकारियों ने देश में जलाशयों की स्थिति से भी अवगत कराते हुए बताया कि पूरे देश में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में कुल संग्रहण स्थिति बेहतर है और इसी अवधि के दौरान सामान्य संग्रहण से भी बेहतर है। 161 जलाशयों में उपलब्ध संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के संग्रहण का 103.51 प्रतिशत और पिछले दस वर्षों के औसत संग्रहण का 115 प्रतिशत है।

बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने उर्वरक उपलब्धता की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेने के साथ ही आगामी दिनों में सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर दिशा-निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से इस संबंध में उर्वरक मंत्रालय से सतत संपर्क में रहने और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि आगामी सीजन में उर्वरकों की आवश्यकता को लेकर राज्यों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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जीएसटी तर्कसंगतता मिजोरम में विकास की वृद्धि समृद्धि का निर्माण

जीएसटी तर्कसंगतता मिजोरम में विकास की वृद्धि समृद्धि का निर्माण

 पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग ने जूस और कॉन्सन्ट्रेट उत्पादन में उद्यमशीलता के नए अवसर पैदा किए हैं। इससे किसानों और महिला समूहों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा हो रहे हैं।

प्रसंस्कृत फल उत्पादों पर जीएसटी को 12-18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने से पैशन फ्रूट जूस और संबद्ध उत्पाद अधिक किफायती और विपणन योग्य हो जाएंगे। इस सुधार से छोटे पैमाने पर प्रसंस्करण इकाइयों के विकास को प्रोत्साहित करने, स्थानीय नौकरियां पैदा करने और मिजोरम को स्वास्थ्य-उन्मुख फल पेय पदार्थों की बढ़ती राष्ट्रीय मांग को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बांस और बेंत शिल्प

बांस मिजोरम की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्य का लगभग 51 प्रतिशत भूमि क्षेत्र बांस से ढका हुआ है। यह राज्य के हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों की रीढ़ है। फर्नीचर और घरेलू सजावट से लेकर टोकरियों और उपयोगी उत्पादों तक, बांस और बेंत के शिल्प मिजो कारीगरों की रचनात्मकता और स्थिरता दोनों को दर्शाते हैं।

ये शिल्प ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं और राज्य भर में युवाओं के रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र को डिजाइन, कौशल विकास और मूल्य संवर्धन में सुधार के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के तहत समर्थन प्राप्त हो रहा है। इससे कारीगरों को व्यापक घरेलू और निर्यात बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।

जीएसटी के नए ढांचे के तहत बांस के फर्नीचर और सभी बांस या बेंत हस्तशिल्प उत्पादों पर अब 5 प्रतिशत की एक समान दर से कर लगाया जाता है, जो पहले के उच्च स्लैब से कम है। कम दर बांस उत्पादों को अधिक किफायती बनाएगी, घरेलू मांग को प्रोत्साहित करेगी और राष्ट्रीय हस्तशिल्प बाजार में मिजोरम की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी। भारत के बांस उद्योग का मूल्य लगभग 24,000 करोड़ रुपये (2019 में) है। यह सुधार मिजोरम के कारीगरों के लिए नए अवसर खोलता है, हरित आजीविका और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देता है।

पर्यटन और आतिथ्य

पर्यटन का क्षेत्र मिजोरम में विकास और रोजगार के एक प्रमुख इंजन के रूप में तेजी से उभर रहा है। सुंदर पहाड़ियों, हरे-भरे जंगलों और एक जीवंत सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध यह राज्य खुद को इको-टूरिज्म और साहसिक यात्रा के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है। मिजो संस्कृति की गर्मजोशी और आतिथ्य को दर्शाते शांत परिदृश्यों, पारंपरिक त्योहारों और समुदाय-आधारित होमस्टे की ओर आगंतुक काफी आकर्षित होते हैं।

वर्ष 2014-15 के एक सरकारी सर्वेक्षण में राज्य में 161 आवास इकाइयों में काम करने वाले 4,038 कर्मचारियों की पहचान की गई, जो आजीविका के स्रोत के रूप में पर्यटन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। वर्ष 2023-24 में मिजोरम में 2,15,265 घरेलू और 3,884 विदेशी पर्यटक आए थे। यह क्षेत्र होटल, टूर ऑपरेशन, हस्तशिल्प, खाद्य सेवाओं और परिवहन के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से रोजगार पैदा करता है।

होटलों में 7,500 रुपये तक के कमरों पर अब केवल 5 प्रतिशत कर लगाया गया है। यह कर सुधार सेवा प्रदाताओं के लिए कम इनपुट लागत के साथ ही आगंतुकों के लिए मिजोरम की यात्रा को और अधिक किफायती बना देंगे। इस कदम से पर्यटन को प्रोत्साहित करने, आतिथ्य क्षेत्र में स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण और शहरी केंद्रों में युवाओं के लिए समान रूप से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

निष्कर्ष

जीएसटी सुधार मिजोरम की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ प्रदान करते हैं। इसमें जीआई-टैग वाली मिजो मिर्च और मसालों की खेती करने वाले किसानों से लेकर बांस के फर्नीचर बनाने वाले कारीगरों और पर्यटन क्षेत्र के उद्यमी शामिल हैं। कम कर दरों से लागत कम होगी, घरेलू खपत को बढ़ावा मिलेगा और व्यापक बाजारों में मिजोरम के प्राकृतिक और हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी।

ये सुधार कृषि-प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और इको-टूरिज्म में नए अवसरों के साथ पारंपरिक शक्तियों को जोड़कर आजीविका को बनाए रखने, मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने और समावेशी और सतत विकास की दिशा में मिजोरम का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मुख्यालय में बहु आपदा पूर्व चेतावनी डीएसएस और मौसमग्राम की समीक्षा की

केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) मुख्यालय में बहु आपदा पूर्व चेतावनी डीएसएस और मौसमग्राम की समीक्षा की

 केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकीपृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का दौरा किया और आईएमडी द्वारा विकसित वेब-जीआईएस आधारित बहु-आपदा पूर्व चेतावनी निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) की समीक्षा की।

मंत्री महोदय ने स्वदेशी, तकनीक-संचालित और नागरिक-केंद्रित मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के विकास की दिशा में विभाग द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की जो देश भर में आपदा तैयारियों को मज़बूत करती हैं और जन सुरक्षा को बढ़ाती हैं। माननीय मंत्री महोदय ने विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता समाप्त करके और ₹5.5 करोड़ की वार्षिक रखरखाव लागत से बचकर ₹250 करोड़ की अनुमानित लागत बचत करने और इस प्रकार "आत्मनिर्भर भारत" पहल के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए डीएसएस की सराहना की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने "मौसमग्राम" (हर हर मौसम, हर घर मौसम) की भी समीक्षा की, जो नागरिक-केंद्रित प्लेटफ़ॉर्म है जो गाँव स्तर तक अति-स्थानीय, स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करता है। यह प्रणाली अगले 36 घंटों के लिए प्रति घंटे, अगले पाँच दिनों के लिए तीन घंटे और अधिकतम दस दिनों के लिए छह घंटे का पूर्वानुमान करेगी। नागरिक पिन कोड, स्थान के नाम या अपने राज्य, ज़िले, ब्लॉक और ग्राम पंचायत का चयन करके आसानी से मौसम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सभी आधिकारिक भारतीय भाषाओं में उपलब्ध, "मौसमग्राम" यह सुनिश्चित करता है कि संपूर्ण भारत में उपयोगकर्ताओं को उनके क्षेत्र से संबंधित सही और समय पर मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त हों।

आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान और चेतावनी निर्माण प्रक्रिया को पूरी तरह से पुनः तैयार किया है इससे वास्तविक समय पर अलर्ट प्राप्त करना संभव हो गया है और पूर्वानुमान क्षमताओं में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है - लीड अवधि को 5 दिनों से बढ़ाकर 7 दिन कर दिया गया है, पूर्वानुमान तैयार करने का समय लगभग 3 घंटे कम कर दिया गया है, और सटीकता में 15-20% तक सुधार किया गया है।

आईएमडी अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने "मौसमग्राम" को और भी अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल एवं सुलभ बनाने के लिए इसमें एआई-संचालित तंत्रों को शामिल करने का सुझाव दिया। उन्होंने बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि नागरिकों को स्पष्ट और कार्रवाई योग्य चेतावनियाँ प्राप्त हों जो आपदाओं को रोकने में मदद करें और तैयारी एवं सुरक्षा के लिए पर्याप्त समय प्रदान करें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विशाखापत्तनम में आयोजित ई-गवर्नेंस पर 28वें राष्ट्रीय सम्मेलन में ई-गवर्नेंस 2025 के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने पर आईएमडी टीम को बधाई दी। इस पुरस्कार के लिए बहु-आपदा पूर्व चेतावनी डीएसएस के माध्यम से सार्वजनिक सेवा वितरण हेतु डिजिटल तकनीक का लाभ उठाने में विभाग के अनुकरणीय प्रयासों को मान्यता दी गई। उन्होंने विशेष स्वच्छता कार्यक्रम के तहत विभाग की उपलब्धियों की भी सराहना की जिसमें पुरानी फाइलों और ई-कचरे का निपटान शामिल है, जिससे 30 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ और 600 वर्ग मीटर कार्यालय स्थान खाली हुआ।

इससे पहले, मंत्री ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा नई दिल्ली मुख्यालय परिसर "मौसम भवन" में आयोजित विशेष स्वच्छता कार्यक्रम 5.0 में भाग लिया।

“एक पेड़ माँ के नाम” पहल के अंतर्गत डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईएमडी परिसर में एक पौधा लगाया और 50 “सफाई मित्रों” को स्वच्छता और रखरखाव गतिविधियों में उनके समर्पित योगदान के लिए सम्मानित किया।

मिशन मौसम के  कार्यान्वयन, जिसमें उन्नत मौसम संबंधी उपकरणों की स्थापना और कमीशनिंग शामिल है, जिससे 2030 तक आईएमडी की पूर्वानुमान क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी,  5x5 किलोमीटर के पैमाने पर गंभीर मौसम संबंधी आपदाओं का पूर्वानुमान, गतिशील प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और सभी के लिए जोखिम-आधारित पूर्व चेतावनी संभव होगी। इस पहल का उद्देश्य 2030 तक हर घर तक पूर्व चेतावनी पहुँचाने के लिए अंतिम-मील कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है, जिससे "हर हर मौसम, हर घर मौसम" का लक्ष्य प्राप्त होगा।

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 15 सितंबर से लौटेगा मानसून! लेकिन पीछे छोड़ जाएगा 7% ज्यादा बारिश और अनगिनत सवाल…

15 सितंबर से लौटेगा मानसून! लेकिन पीछे छोड़ जाएगा 7% ज्यादा बारिश और अनगिनत सवाल…

Anita nishad 13-Sep-2025 55

 15 सितंबर से लौटेगा मानसून! लेकिन पीछे छोड़ जाएगा 7% ज्यादा बारिश और अनगिनत सवाल…

 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ऐलान किया है कि 15 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की विदाई शुरू हो जाएगी। लेकिन इस बार की विदाई सामान्य नहीं है—क्योंकि मानसून ने देश को 7% ज्यादा बारिश देकर कई रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं।

 

नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिमी राजस्थान से 15 सितंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होगी। धीरे-धीरे यह प्रक्रिया पूरे उत्तर-पश्चिम भारत और फिर पूरे देश तक फैलेगी।

जल्दी आया, देर से जाएगा

आमतौर पर मानसून 1 जून को केरल पहुंचता है और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। वापसी 17 सितंबर के आसपास शुरू होकर 15 अक्टूबर तक पूरी होती है। लेकिन इस साल मौसम के खेल ने चौंका दिया—

  • मानसून 24 मई को ही केरल पहुंच गया, जो 2009 के बाद सबसे जल्दी था।

  • पूरे देश को कवर करने में भी यह 9 दिन पहले यानी 30 जून तक सफल हो गया।

  • 2020 के बाद यह सबसे जल्दी पूरे भारत तक पहुंचने वाला मानसून रहा।

बारिश का रिकॉर्ड

अब तक देश में 836.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 778.6 मिमी होती है। यानी इस बार 7% अधिक
आईएमडी ने पहले ही अनुमान जताया था कि जून-सितंबर के दौरान भारत को औसत से ज्यादा (106%) बारिश मिलेगी।

महत्व क्यों है?

भारत का कृषि क्षेत्र, जो देश की 42% आबादी की रोज़ी-रोटी और जीडीपी का 18.2% योगदान देता है, पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। यही बारिश पेयजल, बिजली उत्पादन और जलाशयों को भरने में भी अहम भूमिका निभाती है।

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 BJP President की रेस में सरप्राइज एंट्री! कौन है ये धाकड़ वक्ता, जिसने विपक्ष की नींदें उड़ाकर खेला बड़ा दांव?

BJP President की रेस में सरप्राइज एंट्री! कौन है ये धाकड़ वक्ता, जिसने विपक्ष की नींदें उड़ाकर खेला बड़ा दांव?

Anita nishad 13-Sep-2025 30

 

भारतीय जनता पार्टी में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश तेज हो गई है। कई नामों की चर्चा के बीच अब एक ऐसा नाम सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। यह नेता अपनी धारदार जुबान, आक्रामक शैली और संगठन के अनुभव के दम पर अचानक ही रेस का मजबूत खिलाड़ी बन गया है। सवाल यही है—क्या ये धाकड़ वक्ता भाजपा का नया चेहरा बनने जा रहे हैं?


नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से भाजपा अध्यक्ष पद खाली है। लंबे इंतज़ार के बाद अब रेस में एक
 सरप्राइज एंट्री ने सबका ध्यान खींचा है। यह नाम है—वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी को लेकर कहा जा रहा है कि उनकी 4 खूबियों ने उन्हें सीधे अध्यक्ष पद की दौड़ में ला खड़ा किया है—

1️⃣ बोलने की दमदार कला – संसद से लेकर टीवी डिबेट तक, त्रिवेदी विपक्ष को अपने तार्किक और तेज़ जवाबों से घेरते रहे हैं। उनकी जुबान की धार और तथ्यात्मक शैली ने उन्हें जनता और मीडिया दोनों में लोकप्रिय चेहरा बनाया।

2️⃣ संगठन का गहरा अनुभव – एबीवीपी और आरएसएस से जुड़े रहने के बाद भाजपा संगठन में लंबे समय तक काम किया। राष्ट्रीय प्रवक्ता से लेकर राज्यसभा सांसद बनने तक का उनका सफर संगठन और विचारधारा से उनकी नज़दीकी दिखाता है।

3️⃣ जाति और क्षेत्रीय समीकरण – उत्तर प्रदेश से आने वाले ब्राह्मण नेता होने के नाते त्रिवेदी भाजपा और संघ दोनों के समीकरण में फिट बैठते हैं। यूपी भाजपा की राजनीति में अहम कड़ी है, और यह फैक्टर उनके पक्ष में जाता है।

4️⃣ विपक्ष पर आक्रामक रुख – महंगाई, राष्ट्रहित और विकास जैसे मुद्दों पर वे विपक्ष को घेरने में माहिर हैं। उनका यह आक्रामक लेकिन संतुलित रुख उन्हें एक प्रभावशाली नेता के रूप में सामने लाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा अध्यक्ष पद के लिए त्रिवेदी का नाम आगे बढ़ता है, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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मिजोरम के लिए बड़ा दिनः थोड़ी देर में पहुंचेंगे PM मोदी, देंगे 9000 करोड़ की सौगात; रुक-रुक कर हो रही बारिश

मिजोरम के लिए बड़ा दिनः थोड़ी देर में पहुंचेंगे PM मोदी, देंगे 9000 करोड़ की सौगात; रुक-रुक कर हो रही बारिश

Anita nishad 13-Sep-2025 32

 मिजोरम की धरती पर आज इतिहास लिखा जाने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ ही देर में ऐसी परियोजना का उद्घाटन करने जा रहे हैं, जिसके पीछे छिपा है अंधेरी सुरंगों, खतरनाक पुलों और सीटी बजाती रेल का सफर। लेकिन सवाल यही है—क्या ये सीटी विकास की है… या डरावनी चुनौतियों की?



आइजोल। रातभर की बारिश के बीच मिजोरम की राजधानी आइजोल में ऐतिहासिक दिन का सवेरा हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बहुप्रतीक्षित
 बैराबी–सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन करेंगे। आज़ादी के 78 साल और भारतीय रेल के 172 साल बाद पहली बार मिजोरम देश की राजधानी से रेल मार्ग द्वारा जुड़ने जा रहा है।

यह परियोजना सिर्फ एक रेल लाइन नहीं, बल्कि मानो लोहे और कंक्रीट की भूलभुलैया है—51.38 किलोमीटर लंबा ट्रैक, 48 सुरंगें और 142 पुलों से होकर गुजरता है। इनमें सबसे खतरनाक और रोमांचक है पुल संख्या 196, जिसकी ऊंचाई 104 मीटर (कुतुब मीनार से भी ज्यादा) है। यही वजह है कि लोग इसे ‘मौत का पुल’ कहकर भी फुसफुसाते हैं।

पीएम मोदी इस मौके पर 9,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी करेंगे। इसमें सड़कें, ऊर्जा, शिक्षा और खेल से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

  • तीन नई ट्रेनों को हरी झंडी मिलेगी—सैरांग-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस।

  • आइजोल बाईपास रोड, थेंजावल-सियलसुक रोड और नदी पर नए पुल से सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी बदलेगी।

  • खेलो इंडिया मल्टीपर्पज हॉल, एलपीजी बॉटलिंग प्लांट और नए रेजिडेंशियल स्कूल मिजोरम की नई पहचान बनेंगे।

यह रेल लाइन भविष्य में म्यांमार की सीमा तक बढ़ाई जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ेगा।

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BREAKING : जुलूस में घुसा ट्रक, 8 श्रद्धालुओं को रौंदा, 22 लोग हुए घायल

BREAKING : जुलूस में घुसा ट्रक, 8 श्रद्धालुओं को रौंदा, 22 लोग हुए घायल

Anita nishad 13-Sep-2025 34

 कर्नाटक के हासन में शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक अनियंत्रित ट्रक जुलूस में आ गया। ट्रक ने कई लोगों को टक्कर मारी। इसमें से 8 की मौत हो गई।

 
वहीं करीब 22 लोग घायल हो गए। हसन की डिप्टी कमिश्नर केएस लता कुमारी ने बताया कि घायलों का इलाज एचआईएमएस अस्पताल में चल रहा है। एक की हालत गंभीर है। इसके अलावा 7 लोगों का इलाज हो रहा है और उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया। साथ ही प्रत्येक मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया।
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मध्य प्रदेश: ढाबे पर 10 हजार की नौकरी करने वाले कुक के खाते से 46 करोड़ का लेन-देन, इनकम टैक्स ने किया खुलासा

मध्य प्रदेश: ढाबे पर 10 हजार की नौकरी करने वाले कुक के खाते से 46 करोड़ का लेन-देन, इनकम टैक्स ने किया खुलासा

Anita nishad 10-Sep-2025 46

 

ग्वालियर/भिंड। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ढाबे पर महज 10 हजार रुपये की नौकरी करने वाले कुक रविंद्र सिंह चौहान के बैंक खाते से 46 करोड़ 18 लाख रुपये का लेन-देन होने का मामला सामने आया। खुद रविंद्र को इसकी जानकारी तब हुई, जब इनकम टैक्स विभाग ने उनके घर पर नोटिस भेजा।


???? मामला कैसे सामने आया

  • रविंद्र सिंह चौहान साल 2017 में मेहरा टोल प्लाजा पर काम करते थे।

  • इसी दौरान शशि भूषण राय नामक सुपरवाइजर ने उनका बैंक खाता दिल्ली में खुलवाया, यह कहते हुए कि उनका पीएफ इसी खाते में आएगा।

  • रविंद्र ग्वालियर लौट गए और बाद में पुणे में नौकरी करने लगे।


???? इनकम टैक्स नोटिस से खुला राज़

  • अप्रैल 2025 में इनकम टैक्स विभाग ने रविंद्र के घर भिंड में नोटिस भेजा।

  • नोटिस अंग्रेजी में था, इसलिए परिवार इसे नहीं समझ सका।

  • जुलाई में दूसरा नोटिस आया, जिसके बाद रविंद्र ने वकील से संपर्क किया।

वकील प्रद्युम्न सिंह ने बताया:

"रविंद्र के खाते में 46 करोड़ 18 लाख रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ है। रविंद्र को जब यह पता चला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।"


???? पुलिस और कानूनी कार्रवाई

  • रविंद्र ने थाने जाकर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की

  • पुलिस का कहना था कि मामले की जांच दिल्ली में खुले खाते के माध्यम से करनी होगी।

  • अब मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है और वकील ने इनकम टैक्स से सटीक जानकारी लेने की प्रक्रिया शुरू की है।


???? क्या कहा इनकम टैक्स विभाग ने

विभाग का कहना है कि नोटिस सटीक जानकारी के आधार पर जारी किया गया है। रविंद्र ने किसी भी तरह के अवैध लेन-देन में भागीदारी होने से इंकार किया है।

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