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यातायात जागरूकता पर शोध कर राष्ट्रपति पदक प्राप्त ट्रैफिक मैन डॉ. महेश मिश्रा ने प्राप्त की पीएचडी उपाधि

यातायात जागरूकता पर शोध कर राष्ट्रपति पदक प्राप्त ट्रैफिक मैन डॉ. महेश मिश्रा ने प्राप्त की पीएचडी उपाधि

छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले में यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता पर किए गए महत्वपूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध कार्य के आधार पर ट्रैफिक मैन के नाम से मशहूर राष्ट्रपति पदक प्राप्त हवलदार डॉ.महेश मिश्रा को संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर द्वारा डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई। गौरतलब है कि डॉ.मिश्रा अकादमिक क्षेत्र में एम.ए. संस्कृत, राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा में विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक प्राप्त हैं।

   

डॉ.महेश मिश्रा ने अपना शोध कार्य "यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरूकता का अध्ययन : छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष संदर्भ में" विषय पर पूर्ण किया। यह शोध वर्तमान समय में सड़क सुरक्षा, यातायात अनुशासन एवं जन-जागरूकता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शोध में कोरिया जिले के नागरिकों एवं सड़क उपयोगकर्ताओं के बीच यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, नियमों के पालन की स्थिति, दुर्घटनाओं के कारणों तथा सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक सुझावों का समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विस्तृत अध्ययन किया गया।
         

डॉ.महेश मिश्रा ने वर्ष 2019 में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर द्वारा आयोजित प्री-पीएचडी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात वर्ष 2021-22 में कोर्स वर्क सफलतापूर्वक पूर्ण किया व  वर्ष 2023 में शोध शीर्षक का पंजीयन कराया। दीर्घकालीन अध्ययन, क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं वैज्ञानिक शोध पद्धति के माध्यम से शोध कार्य को पूर्ण करते हुए जून 2026 में अंतिम मौखिक परीक्षा फाइनल वाइवा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
        इस शोध कार्य का निर्देशन डॉ. रवीन्द्र नाथ शर्मा पीएचडी रसायन शास्त्र एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र विभाग, श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर एवं संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर के समाजशास्त्र विषय के अध्ययन बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा किया गया। वहीं शोध के बाह्य परीक्षक के रूप में प्रो.महेश शुक्ला, अध्यक्ष, मध्य भारत सोशियोलॉजी संगठन व अत्यंत ही ख्याति लब्ध विद्वान ने शोध का मूल्यांकन कर अंतिम मौखिक परीक्षा लिया। जिन्होंने डॉ.मिश्रा द्वारा किए गए शोध को समाजोपयोगी बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में यातायात नियमों की जानकारी एक अत्यंत ही आवश्यक पहलू है जिस पर सभी को जागरूक होने की आवश्यकता है। निश्चित रूप से यह शोध मानव समाज के लिए अत्यंत ही लाभकारी होगा।
           शोध कार्य के दौरान डॉ.महेश मिश्रा का शोध केंद्र शासकीय राज मोहिनी देवी कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर रहा, जहाँ उन्होंने शोध के नियम एवं बारीकियों को अच्छी तरह से जाना व आवश्यकतानुसार ग्रंथालय एवं समाजशास्त्र विभाग का पूर्ण सहयोग लिया।
          डॉ.महेश मिश्रा नें शोध के दौरान विगत 7 वर्षों में मिले अतुलनीय सहयोग के लिए अपने माता-पिता, परिवार एवं गुरुजनों के साथ डीआईजी राजेश पाण्डेय, कोरिया जिले की तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, वर्तमान कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक रवि कुमार कुर्रे,संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा अंबिकापुर के कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव डॉ.शारदा प्रसाद त्रिपाठी, शोध समन्वयक डॉ.पीयूष पांडेय, शोध केंद्र के प्राचार्य डॉ.एजेन टोप्पो, शोध समिति प्रमुख डॉ. विश्वासी एक्का, जिला सेनानी संजय गुप्ता, यातायात प्रभारी बीरबल राजवाड़े, शोध के टंकड़ कार्य हेतु मो. आरिफ ढ़ेवर के साथ जनप्रतिनिधि, मीडिया के पदाधिकारी व प्रतिनिधि, प्रशासन, पुलिस एवं नगर सेना के अधिकारी/कर्मचारी, सहकर्मी, जिले के जनता जनार्दन के साथ सड़क उपयोगकर्ताओं व उत्तरदाताओं एवं शोध कार्य के दौरान प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वालों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है।
        गौरतलब है कि डॉ. महेश मिश्रा विगत दो दशकों से यातायात जन जागरूकता अभियान संचालित करने एवं समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर अग्रसर रहने के लिए लिए जाने जाते हैं। इन्होंने स्वयं के व्यय पर 500 से अधिक यातायात जागरूकता शिविरों के माध्यम से 5 लाख से अधिक लोगों को यातायात नियमों, संकेतों एवं चिन्हों की जानकारी प्रदान कर मानव जीवन रक्षा जैसे पुनीत कार्य में निरंतर लगे हैं। वृहद पैमाने पर चलाए गए यातायात जागरूकता अभियान हेतु इनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है। डॉ.मिश्रा की उपलब्धि पर सहकर्मियों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। यह शोध न केवल समाजशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है, बल्कि सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी उपयोगी सिद्ध होगा।
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एनआईटी रायपुर में नेक्स्ट जेन क्वांटम इंटेलिजेंस पर अंतर्राष्ट्रीय स्पार्क प्रायोजित कार्यशाला का उद्घाटन

एनआईटी रायपुर में नेक्स्ट जेन क्वांटम इंटेलिजेंस पर अंतर्राष्ट्रीय स्पार्क प्रायोजित कार्यशाला का उद्घाटन

 राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने आज "नेक्स्ट-जेन क्वांटम इंटेलिजेंस: एआई फॉर नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन एंड एंटैंगलमेंट (NGQI-AINE-26)" विषय पर पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के 'स्कीम फॉर प्रमोशन ऑफ एकेडमिक एंड रिसर्च कोलैबोरेशन' (SPARC) द्वारा प्रायोजित यह कार्यशाला एनआईटी रायपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर जतोथ और द यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया के प्रो. राजकुमार बुय्या के नेतृत्व में एक प्रतिष्ठित सहयोगात्मक अनुसंधान परियोजना के तहत आयोजित की जा रही है। इस उद्घाटन समारोह में आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रो. संजीव पराशर मुख्य अतिथि के रूप में और एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव मुख्य संरक्षक के रूप में उपस्थित रहे। वहीं द यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के रेडमंड बैरी डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर प्रो. राजकुमार बुय्या और आईआईटी खड़गपुर से स्पार्क (SPARC) सदस्य डॉ. तिताश मोंडल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता एनआईटी रायपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सुधाकर पांडेय ने की।

अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. सुधाकर पांडेय ने सुरक्षित, बुद्धिमान और स्केलेबल अगली पीढ़ी के नेटवर्क विकसित करने के लिए क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम कम्युनिकेशन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को एकीकृत करने के महत्वपूर्ण महत्व पर बल दिया। अपने संबोधन के दौरान, गणमान्य अतिथियों ने क्वांटम प्रौद्योगिकियों जैसे उभरते क्षेत्रों को आगे बढ़ाने में अंतर-विषयक अनुसंधान, वैश्विक नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग की बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त पहल उन्नत कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीकों के क्षेत्र में अनुसंधान के प्रति एनआईटी रायपुर के बढ़ते नेतृत्व और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है।

इस पांच दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला को देश भर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें एनआईटी रायपुर, विभिन्न आईआईटी, एसएसआईटी, सीएमआरआईटी और देश के कई अन्य प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और छात्रों सहित 70 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। तकनीकी सत्रों के दौरान, प्रतिभागियों को विशेषज्ञ व्याख्यानों, व्यावहारिक प्रशिक्षण (हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग) सत्रों और तकनीकी चर्चाओं के माध्यम से गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यशाला के पाठ्यक्रम में क्वांटम इंटेलिजेंस के अत्यंत महत्वपूर्ण और उभरते क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम एंटैंगलमेंट, नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन के लिए एआई, ग्राफ न्यूरल नेटवर्क और आईओटी (IoT)-सक्षम क्वांटम नेटवर्क आदि प्रमुख हैं। उद्घाटन समारोह का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया और गणमान्य अतिथियों के साथ सामूहिक चित्र लिया गया।

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वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) का ऐतिहासिक रिकॉर्ड प्रदर्शन

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) का ऐतिहासिक रिकॉर्ड प्रदर्शन

 पहली तिमाही में 44.10 मिलियन टन कोयला उत्पादन, 48.79 मिलियन टन कोयला प्रेषण और 99.36 मिलियन क्यूबिक मीटर ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) के साथ दर्ज किया गया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

कोयला मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी मिनी रत्न कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. कंपनी ने कोयला उत्पादन, प्रेषण (ऑफटेक) तथा ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) – इन तीनों प्रमुख परिचालन मानकों पर अब तक का सर्वश्रेष्ठ और ऐतिहासिक प्रदर्शन दर्ज किया है. चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान एसईसीएल ने 44.10 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.19 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है. इसी प्रकार, समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का कुल कोयला प्रेषण 48.79 मिलियन टन रहा, जिसमें सालाना आधार पर 5.29 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है. इसके अतिरिक्त, ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) के मोर्चे पर भी कंपनी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 99.36 मिलियन घन मीटर ओबीआर दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.62 प्रतिशत अधिक है।

विशेष रूप से जून 2026 का महीना एसईसीएल के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ है. इस माह में कंपनी ने अब तक का सर्वाधिक मासिक कोयला उत्पादन एवं प्रेषण दर्ज किया. इसके साथ ही, कंपनी ने 34.05 मिलियन घन मीटर ओबीआर कर एक नया मासिक रिकॉर्ड स्थापित किया, जो निर्धारित मासिक लक्ष्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक तथा जून 2025 की तुलना में 17.3 प्रतिशत की भारी वृद्धि को प्रदर्शित करता है. ओबीआर का यह बेहतरीन प्रदर्शन आगामी मानसून के महीनों में भी कोयला उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक मजबूत परिचालन आधार प्रदान करेगा.  पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खनन पद्धतियों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, एसईसीएल ने कोयले के मैकेनाइज्ड परिवहन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. पहली तिमाही के दौरान कंपनी ने फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) प्रणाली के माध्यम से 19.58 मिलियन टन कोयले का प्रेषण किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.7 प्रतिशत अधिक है. एफएमसी आधारित साइलो लोडिंग प्रणाली ने देश में तेज, स्वच्छ और पूरी तरह से धूलरहित कोयला परिवहन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है"।


एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने कहा -"कोयला उत्पादन, प्रेषण एवं ओवरबर्डन रिमूवल के क्षेत्र में पहली तिमाही का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हमारे कर्मियों की प्रतिबद्धता और परिचालन उत्कृष्टता के प्रति हमारी सतत प्रतिबद्धता का परिणाम है। एफएमसी आधारित कोयला लोडिंग में उल्लेखनीय वृद्धि दक्ष एवं सतत खनन पद्धतियों को अपनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मानसून को देखते हुए हमारी सभी खदानों में व्यापक तैयारियां पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी हैं और हम निर्बाध कोयला आपूर्ति के माध्यम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं"।

देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में एसईसीएल ने अपनी केंद्रीय भूमिका को और मजबूत किया है. पहली तिमाही के दौरान कंपनी ने देश की विभिन्न विद्युत उत्पादन इकाइयों (पावर प्लांट्स) को 37.79 मिलियन टन कोयले की निर्बाध आपूर्ति की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 5.4 प्रतिशत अधिक है. इसके साथ ही, भूमिगत खनन के क्षेत्र में भी एसईसीएल ने नया इतिहास रचा है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भूमिगत खदानों से 3.17 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 23.35 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्शाता है. यह पिछले छह वर्षों में पहली तिमाही का अब तक का सर्वश्रेष्ठ भूमिगत उत्पादन प्रदर्शन है.  एसईसीएल का यह चौतरफा रिकॉर्ड प्रदर्शन कंपनी की उच्च परिचालन दक्षता, आधुनिक तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन और राष्ट्र के प्रति इसकी जवाबदेही को रेखांकित करता है. यह महत्वपूर्ण उपलब्धि पैरेंट कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के वित्तीय वर्ष 2026-27 के समग्र उत्पादन एवं प्रेषण लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करने में एक मील का पत्थर साबित होगी"।

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चिरमिरी में जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, महापौर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बच्चों को पिलाई दवा

चिरमिरी में जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ, महापौर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बच्चों को पिलाई दवा

29-Jun-2026 93

एमसीबी,चिरमिरी। राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के तहत आज चिरमिरी में जिला स्तरीय कार्यक्रम का  शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो खुराक की "दो बूंद" पिलाकर अभियान की शुरुआत की, कार्यक्रम में मुख्य रूप से चिरमिरी नगर पालिक निगम के महापौर राम नरेश राय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अवनीश खरे, सिविल सर्जन डॉ. राजेंद्र राय  बीएमओ डॉ मनीष सिंह ,जिला कार्यक्रम प्रबंधक शिशिर जायसवाल , आयुष्मान आरोग्य मंदिर नोडल अधिकारी  अवनीश पाण्डेय , बीपीएम राजकुमार रजवाड़े उपस्थित रहे। 

इस गरिमामयी कार्यक्रम में पार्षद मनीष खटिक, नरेंद्र साहू, रीत जैन के साथअस्पताल प्रबंधक विरेन्द्र साव भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
जिले में बनाए गए 542 बूथ, तीन दिवसीय चलेगा अभियान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरे जिले में कुल 542 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। यह अभियान जिले के सभी ब्लॉकों और शहरी क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। 
अभियान के पहले दिन इन निर्धारित बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई जा रही है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को दवा पिलाएंगी ताकि कोई भी बच्चा सुरक्षा चक्र से बाहर न रहे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अवनीश खरे ने कहा, "भारत को पोलियो मुक्त बनाए रखने के लिए यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण है। हमारा मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के शून्य से 5 वर्ष तक के शत-प्रतिशत बच्चों को कवर करना है। 542 बूथों के माध्यम से हम हर इलाके तक पहुंच रहे हैं। पहली खुराक बूथ पर दी जा रही है, लेकिन जो बच्चे आज किसी कारणवश छूट जाएंगे, उनके लिए हमारी टीमें अगले दो दिनों तक घर-घर दस्तक देंगी। उन्होंने सभी पालकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने बच्चों को यह जीवनरक्षक खुराक जरूर दिलाएं।
"महापौर ने की अपील -महापौर राम नरेश राय ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी अभिभावकों से अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी पोलियो बूथ पर ले जाकर दवा जरूर पिलवाने का आग्रह किया।
इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी -कर्मचारी,  मितानीन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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मनेन्द्रगढ़ नर्सिंग महाविद्यालय भवन निर्माण हेतु ₹868.35 लाख की मिली स्वीकृति दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है सरकार का संकल्प: श्याम बिहारी जायसवाल

मनेन्द्रगढ़ नर्सिंग महाविद्यालय भवन निर्माण हेतु ₹868.35 लाख की मिली स्वीकृति दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है सरकार का संकल्प: श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर, 24 जून 2026/ छत्तीसगढ़ शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ (जिला मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी) के भवन निर्माण के लिए 868.35 लाख रुपए  की राशि स्वीकृत की है। इस राशि में मनेंद्रगढ़ में नर्सिंग की बुनियादी पाठ्यक्रम से लेकर लोक स्वास्थ्य एकीकरण के तहत भवन मद शामिल है।


 स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि "नर्सिंग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इस महाविद्यालय के भवन निर्माण से मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिले के स्थानीय युवाओं को उच्च गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा घर के पास ही मिल सकेगी। इससे न केवल अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे। हमारी सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित की जाए।" उन्होंने कहा कि यह स्वीकृति क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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भिलाई इस्पात संयंत्र का अतिक्रमण पर सख्त प्रहार अवैध कब्जे हटाए बिजली कनेक्शन भी काटे

भिलाई इस्पात संयंत्र का अतिक्रमण पर सख्त प्रहार अवैध कब्जे हटाए बिजली कनेक्शन भी काटे

 भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रवर्तन विभाग द्वारा टाउनशिप क्षेत्र में अनाधिकृत कब्जों एवं सड़क अतिक्रमण के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर विभिन्न स्थानों पर प्रभावी कार्रवाई की गई। अभियान के तहत सेक्टर-6 मार्केट चौक तथा आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर सड़क किनारे सामग्री फैलाकर व्यवसाय संचालित करने वाले व्यक्तियों द्वारा किए गए अतिक्रमण हटवाए गए। इस दौरान छह अस्थायी शेड भी हटाए गए। संबंधित व्यक्तियों को भविष्य में सार्वजनिक मार्गों पर सामग्री न फैलाने तथा यातायात में बाधा उत्पन्न न करने की सख्त चेतावनी दी गई।

कार्रवाई के दौरान स्ट्रीट एवेन्यू ‘सी’ स्थित अनफिट ब्लॉक में अवैध रूप से कब्जा कर रहने वाले व्यक्तियों के कारण मार्ग संकरा होने की स्थिति का संज्ञान लिया गया। पूर्व में जारी निर्देशों और समझाइश के बावजूद कब्जा नहीं हटाए जाने पर नगर विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के सहयोग से संबंधित परिसर की अवैध विद्युत आपूर्ति विच्छेदित कर दी गई। कब्जाधारियों को पुनः निर्देशित किया गया कि वे शीघ्र स्वेच्छा से परिसर खाली करें। साथ ही प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्य के संबंध में संबंधित कार्यदल को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।

अभियान के अंतर्गत सेंट्रल एवेन्यू से सेक्टर-6 मार्केट जाने वाले मार्ग तथा चौक क्षेत्र में दिन के समय सार्वजनिक मार्गों पर खड़े छोड़े गए ठेलों को भी हटवाया गया। संबंधित व्यक्तियों को चेतावनी दी गई कि भविष्य में ऐसी स्थिति पाए जाने पर संपदा न्यायालय के माध्यम से ठेलों की जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।

 

प्रवर्तन विभाग ने स्पष्ट किया है कि टाउनशिप के अन्य प्रमुख चौकों, बाजार क्षेत्रों और मुख्य मार्गों पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। नागरिकों से अपील की गई है कि वे सार्वजनिक स्थलों, चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों पर किए गए अतिक्रमण तथा अनाधिकृत रूप से रखे गए ठेले स्वेच्छा से हटा लें और स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित टाउनशिप के निर्माण में सहयोग करें।

यह विशेष अभियान भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के मार्गदर्शन में सहायक महाप्रबंधक (प्रवर्तन विभाग) श्री रेमी थॉमस के नेतृत्व में संचालित किया गया। अभियान में उप प्रबंधक श्री मुकुंद दास मानिकपुरी, सहायक प्रबंधक श्री देवानंद चौहान, संपदा निरीक्षक श्री अजय मिश्रा, श्री राममूर्ति, श्री भगवान तथा श्री राम सहित महिला एवं पुरुष सुरक्षा कर्मियों की टीम सक्रिय रूप से शामिल रही।

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एसईसीएल योग महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन योग स्वस्थ, संतुलित एवं सक्रिय जीवन का आधार है : हरीश दुहन

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एसईसीएल योग महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन योग स्वस्थ, संतुलित एवं सक्रिय जीवन का आधार है : हरीश दुहन

बिलासपुर, 21 जून 2026। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा "एसईसीएल योग महोत्सव 2026" के अंतर्गत वसंत क्लब, वसंत विहार कॉलोनी, बिलासपुर में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) के अनुरूप आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन, एसईसीएल परिवार की प्रथम महिला एवं श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती शशि दुहन, निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास, निदेशक (वित्त) श्री दारला सुनील कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी-योजना/परियोजना) श्री रमेश चन्द्र महापात्र, श्रद्धा महिला मंडल की उपाध्यक्षा श्रीमती इप्सिता दास एवं श्रीमती हसीना कुमार सहित विभागाध्यक्ष, अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन एवं योग प्रशिक्षण ब्रह्मकुमारी गायत्री देवी द्वारा प्रदान किया गया। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास कराया। इस अवसर पर कोलकाता में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के राष्ट्रीय समारोह का सीधा प्रसारण भी प्रदर्शित किया गया।

आयुष मंत्रालय द्वारा निर्धारित कॉमन योगा प्रोटोकॉल के अनुसार आयोजित योगाभ्यास के दौरान योग के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक लाभों पर प्रकाश डाला गया।

इस अवसर पर अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने कहा कि, "योग स्वस्थ शरीर, शांत मन और सकारात्मक जीवनशैली का आधार है। नियमित योगाभ्यास हमें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाता है तथा बेहतर जीवन गुणवत्ता की ओर अग्रसर करता है।" उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों से योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने नियमित योगाभ्यास अपनाने तथा स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। साथ ही समाज को नशामुक्त बनाने एवं स्वयं को नशे से दूर रखने के उद्देश्य से नशा मुक्ति की शपथ भी ग्रहण की गई।

उल्लेखनीय है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एसईसीएल के मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों एवं इकाइयों में भी योग संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों ने सहभागिता की।

 
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बिजली दरों में बढ़ोतरी और बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ कांग्रेस का हमला, भाजपा सरकार जनता को लूटने में लगी – गुलाब कमरो

बिजली दरों में बढ़ोतरी और बढ़े हुए बिजली बिलों के खिलाफ कांग्रेस का हमला, भाजपा सरकार जनता को लूटने में लगी – गुलाब कमरो

मनेंद्रगढ़, 18 जून 2026। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार बढ़ती बिजली दरों, बढ़े हुए बिजली बिलों एवं स्मार्ट मीटरों से जुड़ी शिकायतों के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर द्वारा आज पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, मनेंद्रगढ़ में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त प्रभारी एवं पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार की बिजली नीति को जनविरोधी बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता को सुनियोजित तरीके से आर्थिक बोझ तले दबाया जा रहा है।

गुलाब कमरो ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लगातार पांचवीं बार बिजली दरों में वृद्धि की गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तथा गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। वहीं किसानों के कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि कर दी गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जनता को राहत देने के लिए बिजली बिल हाफ योजना लागू की गई थी, जबकि भाजपा सरकार ने उस योजना को बंद कर अब लगातार बिजली दरें बढ़ाने का काम किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं को मनमाने और भारी-भरकम बिजली बिल भेज रहा है। कई उपभोक्ताओं को उनकी सामान्य खपत से तीन से चार गुना अधिक बिल प्राप्त हो रहे हैं। एक ही माह में ऑनलाइन और ऑफलाइन अलग-अलग बिल जारी किए जा रहे हैं तथा उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना उनका लोड बढ़ाकर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है। स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बिजली खपत और बिलों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है।

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि भाजपा सरकार महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। बिजली दरों में वृद्धि, बिजली बिल हाफ योजना की समाप्ति तथा स्मार्ट मीटरों की कथित अनियमितताओं ने आम उपभोक्ता की परेशानी और बढ़ा दी है। सरकार को तत्काल बिजली दर वृद्धि वापस लेकर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करनी चाहिए।

जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों का सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। एक ओर बिजली कटौती से लोग परेशान हैं, दूसरी ओर बढ़े हुए बिजली बिल भेजकर जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। यह दोहरी मार अब प्रदेश की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।

जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री रफीक मेमन ने कहा कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। बिजली दरों में लगातार वृद्धि और बिलिंग में गड़बड़ियों के कारण उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। सरकार को जनता की आवाज सुननी चाहिए और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने कहा कि भाजपा सरकार ने चुनाव के दौरान जनता से राहत देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आते ही जनता पर नए-नए आर्थिक बोझ डालने का काम किया जा रहा है। बढ़े हुए बिजली बिलों और स्मार्ट मीटरों को लेकर आम नागरिक लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस पार्टी जनता के हितों की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ती रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि बिजली दरों में की गई वृद्धि वापस नहीं ली गई तथा उपभोक्ताओं को राहत नहीं दी गई तो कांग्रेस पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन को और उग्र रूप देगी।

प्रेसवार्ता में कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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एसईसीएल दीपका क्षेत्र में स्वच्छता पखवाड़ा-(16  जून 2026  से 30 जून 2026 तक) का शुभारंभ

एसईसीएल दीपका क्षेत्र में स्वच्छता पखवाड़ा-(16 जून 2026 से 30 जून 2026 तक) का शुभारंभ

श्री अशोक कुमार, क्षेत्रीय महाप्रबंधक, एसईसीएल दीपका क्षेत्र के मार्गदर्शन में दीपका क्षेत्र में स्वच्छता पखवाड़ा (16 जून 2026 से 30 जून 2026 तक) का सफल शुभारंभ किया गया।


इस अवसर पर स्वच्छता पखवाड़ा के बैनर क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालय, दीपका विस्तार परियोजना कार्यालय, प्रगति नगर चिकित्सालय तथा क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए, जिससे स्वच्छता संबंधी जागरूकता का व्यापक प्रसार किया जा सके।

स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित स्वच्छता शपथ ग्रहण कार्यक्रम में श्री अशोक कुमार, क्षेत्रीय महाप्रबंधक, एसईसीएल दीपका क्षेत्र ने क्षेत्रीय महाप्रबंधक कार्यालय में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता शपथ दिलाई। उन्होंने स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान आयोजित किए जाने वाले 15 दिवसीय विभिन्न स्वच्छता एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए सामूहिक सहभागिता के महत्व पर विशेष बल दिया।

यह शपथ ग्रहण कार्यक्रम एकल-उपयोग प्लास्टिक (सिंगल यूज़ प्लास्टिक) को “ना” कहने, स्वच्छता, स्वास्थ्यकर जीवनशैली तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
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दल्ली सिलिका रिडक्शन प्लांट ने रचा नया कीर्तिमान 20 लाख टन संचयी उत्पादन का आंकड़ा पार

दल्ली सिलिका रिडक्शन प्लांट ने रचा नया कीर्तिमान 20 लाख टन संचयी उत्पादन का आंकड़ा पार

 स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र अंतर्गत संचालित दल्ली मैकेनाइज्ड माइंस के सिलिका रिडक्शन प्लांट ने 4 जून 2026 को 20 लाख टन संचयी उत्पादन का महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल कर लिया है। लौह अयस्क संसाधनों के अधिकतम एवं दक्ष उपयोग की दिशा में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

सिलिका रिडक्शन प्लांट का उद्घाटन 23 जून 2023 को किया गया था तथा इसका वाणिज्यिक उत्पादन अक्टूबर 2023 से प्रारंभ हुआ। संयंत्र ने संचालन शुरू होने के 563 दिनों के भीतर 7 मई 2025 को 10 लाख टन उत्पादन का आंकड़ा छू लिया था। इसके बाद अगले 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य मात्र 393 दिनों में प्राप्त कर संयंत्र ने अपनी बढ़ती उत्पादकता और परिचालन दक्षता का परिचय दिया है।

सिलिका रिडक्शन प्लांट, जिसे बेनीफिशिएशन प्लांट भी कहा जाता है, की स्थापना उच्च सिलिका युक्त एक मिलीमीटर से कम आकार के लौह अयस्क फाइंस के उन्नयन के लिए की गई है। अत्याधुनिक बेनीफिशिएशन तकनीक से सुसज्जित यह संयंत्र लौह अयस्क में मौजूद सिलिका की मात्रा को कम कर भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क उपलब्ध करा रहा है।

यह परियोजना सेल की उस दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत निम्न श्रेणी के लौह अयस्क संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। छह दशक से अधिक पुराने दल्ली-राजहरा खदान क्षेत्र में लौह अयस्क की गुणवत्ता में क्रमिक गिरावट को देखते हुए एक मिलीमीटर से कम आकार के लौह अयस्क फाइंस का बेनीफिशिएशन आवश्यक हो गया था, ताकि ब्लास्ट फर्नेस संचालन के लिए अपेक्षित गुणवत्ता का अयस्क उपलब्ध कराया जा सके।

उन्नत गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की उपलब्धता से भिलाई इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेसों में हॉट मेटल उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कोक की खपत में कमी, फर्नेस दक्षता में वृद्धि तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी यह संयंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सिलिका रिडक्शन प्लांट की यह उपलब्धि न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि का संकेत है, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत इस्पात उत्पादन के प्रति सेल की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

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आईआईटी भिलाई और आईएमटी नॉर्ड यूरोप के बीच डुअल डिग्री समझौता छात्रों को मिलेंगे वैश्विक अवसर

आईआईटी भिलाई और आईएमटी नॉर्ड यूरोप के बीच डुअल डिग्री समझौता छात्रों को मिलेंगे वैश्विक अवसर

 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (आईआईटी भिलाई) और फ्रांस के इंस्टीट्यूट माइन्स-टेलीकॉम नॉर्ड यूरोप (आईएमटी नॉर्ड यूरोप) ने शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए डुअल/जॉइंट डिग्री समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता फ्रांस के नीस शहर में 14 से 16 जून 2026 तक आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ (भारतीय शिक्षा इकोसिस्टम के लिए ग्लोबल एक्सेलरेशन) कार्यक्रम के दौरान संपन्न हुआ। यह समझौता 4 जुलाई 2025 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई और इंस्टीट्यूट माइन्स-टेलीकॉम नॉर्ड यूरोप के बीच हुए सहयोग समझौते की अगली महत्वपूर्ण कड़ी है, जो दोनों संस्थानों के बीच बढ़ते शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को और सुदृढ़ करेगा।

डुअल/जॉइंट डिग्री समझौते के तहत दोनों संस्थानों के विद्यार्थियों को एकीकृत शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत और फ्रांस में अध्ययन का अवसर मिलेगा। छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई तथा इंस्टीट्यूट माइन्स-टेलीकॉम नॉर्ड यूरोप दोनों द्वारा मान्यता प्राप्त डिग्रियां अर्जित कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, वैश्विक शैक्षणिक अनुभव और बहुसांस्कृतिक वातावरण में सीखने का अवसर प्राप्त होगा।

संस्थानों के अधिकारियों के अनुसार यह समझौता नवाचार आधारित शिक्षा, वैश्विक शैक्षणिक आदान-प्रदान और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से छात्र एवं संकाय विनिमय, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं तथा उन्नत शैक्षणिक कार्यक्रमों के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम के दौरान हुए इस समझौते को भारत और फ्रांस के बीच उच्च शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। यह पहल भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के वैश्वीकरण और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।

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नवा रायपुर में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन कुष्ठ रोग मुक्त भारत के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मैदानी रणनीतियों को दी मजबूती

नवा रायपुर में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन कुष्ठ रोग मुक्त भारत के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मैदानी रणनीतियों को दी मजबूती

 देश के शेष स्थानिक (endemic) क्षेत्रों से कुष्ठ रोग के उन्मूलन में तेजी लाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में 'कुष्ठ रोग के शून्य संचरण को प्राप्त करने के लिए कार्यक्रम प्रदर्शन की समीक्षा और केंद्रित रणनीतिक कार्रवाई' पर दो दिवसीय उच्च स्तरीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

जनस्वास्थ्य प्रशासकों और विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन निदेशक, श्रीमती आराधना पटनायक ने साल 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में कुष्ठ रोग उन्मूलन हासिल करने की भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रकाश डाला। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि विशिष्ट स्थानिक जिलों और स्थानीय हॉटस्पॉट में अभी भी संक्रमण का बना रहना चिंता का विषय है, जिसके लिए संचरण की कड़ी को पूरी तरह से तोड़ने के लिए तत्काल, आक्रामक और अत्यधिक लक्षित जमीनी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

जल्दी पहचान और त्वरित इलाज के महत्व को रेखांकित करते हुए, श्रीमती पटनायक ने राज्यों से कुष्ठ प्रभावित क्षेत्रों में समय-समय पर कुष्ठ रोग मामला पहचान अभियान (LCDC) चलाने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ संपर्कों (contacts)—विशेष रूप से संवेदनशील और दुर्गम आबादी के बीच—सिंगल-डोज रिफैम्पिसिन (SDR) के माध्यम से पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) के कवरेज को बढ़ाना संक्रमण चक्र को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।

अतिरिक्त सचिव ने राज्य और जिला कुष्ठ अधिकारियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उपलब्ध फ्लेक्सी-पूल वित्तीय संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रम के कार्यान्वयन में आने वाली अड़चनों को तेजी से दूर करने के लिए जवाबदेही, त्वरित स्थानीय निर्णय लेने और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।


शुरुआती जांच क्षमताओं को बढ़ाने के लिए, मंत्रालय ने राज्यों को मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य मंचों का आक्रामक रूप से लाभ उठाने का निर्देश दिया। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों और किशोरों में शुरुआती लक्षणों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के सक्रिय स्क्रीनिंग नेटवर्क के साथ-साथ कम्युनिटी-बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट (CBAC) का व्यवस्थित रूप से उपयोग करेंगे।


महामारी विज्ञान के परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए, श्रीमती पटनायक ने कार्यशाला को सूचित किया कि पांच उच्च-प्राथमिकता वाले राज्य—छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश—मिलकर भारत के कुल कुष्ठ रोग के बोझ का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा साझा करते हैं। इन राज्यों में प्रति 10,000 जनसंख्या पर 1 से अधिक मामले की व्यापकता दर (prevalence rate) वाले जिलों की संख्या काफी अधिक है। इसमें छत्तीसगढ़ के 23 जिले, झारखंड के 21, महाराष्ट्र और ओडिशा के 18-18 जिले और मध्य प्रदेश के 10 जिले शामिल हैं।

जबकि अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उप-राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग उन्मूलन की स्थिति को सफलतापूर्वक बनाए रखा है, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ अभी भी स्थानीय स्तर पर इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर पाए हैं, जिसके लिए मजबूत अंतर-राज्यीय सहयोग और गहन निगरानी की आवश्यकता है।


नवीनतम डेटा प्रस्तुत करते हुए, उप महानिदेशक (कुष्ठ रोग) डॉ. सुनील वी. गिट्टे ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान पूरे भारत में कुष्ठ रोग के 91,783 नए मामलों का पता चला है, जो 0.56 प्रति 10,000 जनसंख्या की राष्ट्रीय व्यापकता दर को दर्शाता है। इन नए निदान किए गए व्यक्तियों में से 4.18 प्रतिशत बच्चे थे, और 2.12 प्रतिशत मरीजों में निदान के समय ही ग्रेड-2 विकलांगता (G2D) देखी गई, जो शुरुआती क्लीनिकल हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है।


राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत विकलांगता रोकथाम और चिकित्सा पुनर्वास के प्रयासों का विवरण देते हुए, डॉ. गिट्टे ने बताया कि शारीरिक अक्षमताओं को ठीक करने के लिए पिछले वर्ष के दौरान 1,591 पुनर्रचनात्मक सर्जरी (reconstructive surgeries) की गईं। इसके अतिरिक्त, प्रभावित व्यक्तियों के दैनिक जीवन की गुणवत्ता और स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा 1.03 लाख से अधिक जोड़ी माइक्रो सेलुलर रबर (MCR) सुरक्षात्मक जूते और 1.25 लाख से अधिक विशेष स्व-देखभाल (self-care) किट वितरित किए गए।

 

गहन तकनीकी सत्रों के समापन पर भागीदार राज्यों ने अपनी विस्तृत प्रदर्शन समीक्षा प्रस्तुत की। इसमें नए मामलों का पता लगाने की प्रवृत्ति, उपचार की निरंतरता, और बीमारी से जुड़े गहरे सामाजिक कलंक (stigma) तथा भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से की गई सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन संचार पहलों को शामिल किया गया।


नवा रायपुर में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का समापन अत्यधिक व्यावहारिक, डेटा-संचालित और राज्य-विशिष्ट कार्ययोजनाओं को तैयार करने के साथ हुआ। भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, पांच उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों के प्रतिनिधियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञों और प्रमुख विकास भागीदारों—जिनमें इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एंटी-लेप्रोसी एसोसिएशन्स (ILEP) और सासाकावा-इंडिया लेप्रोसी फाउंडेशन (SILF) शामिल हैं—ने भारत को कुष्ठ-मुक्त, संक्रमण-मुक्त और विकलांगता-मुक्त बनाने के साझा विजन की ओर बढ़ने की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराया।


कार्यशाला में श्री अमित कटारिया, सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, छत्तीसगढ़ सरकार); श्री संजीव कुमार झा, मिशन निदेशक (NHM छत्तीसगढ़); श्री निखिल गजराज, संयुक्त सचिव (MoHFW) के साथ-साथ केंद्रीय और क्षेत्रीय कुष्ठ प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों के निदेशकों सहित लगभग 200 राज्य और जिला कुष्ठ अधिकारियों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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भाकृअनुप एनआईबीएसएम द्वारा 170 से अधिक अनुसूचित जाति के किसानों को उच्च उपज धान के बीजों का वितरण

भाकृअनुप एनआईबीएसएम द्वारा 170 से अधिक अनुसूचित जाति के किसानों को उच्च उपज धान के बीजों का वितरण

 भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) मुंबई को 8 जून, 2026 को लगभग 14:20 बजे ओमान के मसिराह तट के पास लंगर डाले हुए पलाऊ ध्वज वाले टैंकर एमटी मारिवेक्स पर मिसाइल हमले की सूचना मिली। इस टैंकर में 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। इसके बाद समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र (ओएमएससी) से संपर्क स्थापित किया और स्थिति पर नजर रखने और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखा। लगभग 17:00 बजे, ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र ओमान ने पुष्टि की कि ओमान नौसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए सभी लोग सुरक्षित हैं और किसी को कोई नुकसान नही हुआ। जहाज अभी भी ओमान के मसिराह तट के पास लंगर डाले हुए है।

इस सफल बचाव अभियान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सहयोग की प्रभावशीलता और क्षेत्र में समुद्री बचाव अधिकारियों के बीच मजबूत समन्वय तंत्र का पता चलता है। यह भारतीय तटरक्षक बल की भारतीय नाविकों की सुरक्षा और समुद्री आपात स्थितियों के दौरान समय पर सहायता प्रदान करने की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।

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युवा संगम चरण VI के तहत छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली के लिए रवाना यह कार्यक्रम पांच स्तंभों पर आधारित है पर्यटन परंपरा प्रगति प्रौद्योगिकी और परस्पर संपर्क

युवा संगम चरण VI के तहत छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली के लिए रवाना यह कार्यक्रम पांच स्तंभों पर आधारित है पर्यटन परंपरा प्रगति प्रौद्योगिकी और परस्पर संपर्क

 भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने, सांस्कृतिक समझ को गहरा करने और राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की महत्वाकांक्षी "एक भारत श्रेष्ठ भारत" पहल के तहत शुरू किए गए प्रतिष्ठित युवा संगम चरण-VI कार्यक्रम के उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) और आधिकारिक फ्लैग-ऑफ समारोह में भाग लेने के लिए आज पूरे छत्तीसगढ़ से आए छात्र और युवा प्रतिनिधि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई में एकत्र हुए।

छत्तीसगढ़ का यह प्रतिनिधिमंडल 7 जून से 13 जून 2026 तक दिल्ली का दौरा करेगा, जहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली इस राष्ट्रव्यापी युवा विनिमय कार्यक्रम के तहत एक सप्ताह तक उनकी मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य देश के विकास और परंपराओं का गहन अनुभव प्रदान करना है। इस उन्मुखीकरण कार्यक्रम और औपचारिक फ्लैग-ऑफ समारोह का आयोजन श्री अभिजीत सिंह, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, दुर्ग और राजीव प्रकाश, निदेशक, आईआईटी भिलाई की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया, जिन्होंने प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की और उन्हें इस यात्रा के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शैक्षणिक संवाद और व्यावहारिक शिक्षण में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया।

युवा संगम भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसे देश भर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं, विकास पहलों, तकनीकी प्रगति और लोगों से लोगों के बीच जुड़ाव (पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट) का व्यापक अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से पांच थीम आधारित स्तंभों के इर्द-गिर्द संरचित है, जिनमें पर्यटन (Tourism), परंपरा (Traditions & Culture), प्रगति (Development & Governance), प्रौद्योगिकी (Technology & Innovation) और परस्पर संपर्क (People-to-People Connect) शामिल हैं।

युवा संगम के चरण-VI के तहत, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के बीच इस आदान-प्रदान के लिए आईआईटी दिल्ली और आईआईटी भिलाई को एक साथ जोड़ा (पेयर) गया है, जिससे प्रतिनिधियों को विविधता में एकता को बढ़ावा देने और भारत की प्रगति तथा समृद्ध विरासत की गहरी समझ विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक गतिविधियों का अनुभव करने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम का समापन बेहद उत्साह और देशभक्ति की भावना के बीच आईआईटी भिलाई परिसर से प्रतिनिधियों को आधिकारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के साथ हुआ।

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कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन रायपुर ने आयोजित की साइकिल रैली स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन रायपुर ने आयोजित की साइकिल रैली स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

 ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा विश्‍व साइकल दिवस के उपलक्ष्‍य में साइकल रैली का आयोजनकर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation-EPFO) के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर आयोजित साइकिल रैली में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा रविवार को आयोजित यह कार्यक्रम केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री श्री मनसुख मंडाविया की पहल ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान के अंतर्गत संपन्न हुआ। अभियान का उद्देश्य नागरिकों को नियमित साइकिलिंग के प्रति प्रेरित करना तथा स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

साइकिल रैली में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-द्वितीय श्री गौरव डोगरा एवं सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री विकास शुक्ल सहित कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम में ‘टूर-द-रायपुर’ समूह के सक्रिय सदस्य श्री अनिमेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों को साइकिलिंग के स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने विश्व पर्यावरण दिवस के तहत कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया तथा स्वच्छता गतिविधियों में भी भाग लिया। इस अवसर पर श्री गौरव डोगरा ने कहा कि साइकिलिंग ईंधन बचत के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम है और इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री विकास शुक्ल ने सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों एवं स्टाफ रिक्रिएशन क्लब की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने की बात कही।

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एसईसीएल मुख्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत किया गया पौधरोपण

एसईसीएल मुख्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत किया गया पौधरोपण

एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में आज दिनांक 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस उत्साह, जागरूकता एवं पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ गरिमामय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति एसईसीएल की प्रतिबद्धता को विभिन्न गतिविधियों द्वारा प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन द्वारा पर्यावरण ध्वज फहराकर किया गया। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास, मुख्य सतर्कता अधिकारी श्री हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) श्री रमेश चन्द्र महापात्र, श्रद्धा महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमती शशि दुहन, उपाध्यक्षागण श्रीमती अनीता फ्रैंकलिन, श्रीमती इप्सिता दास, श्रीमती विनिता जैन एवं श्रीमती शुभश्री महापात्र सहित विभागाध्यक्ष, अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन के नेतृत्व में सभी निदेशगण एवं सीवीओ तथा श्रद्धा महिला मण्डल अध्यक्षा, उपाध्यक्षागण , सदस्याएं ,एवं विभिन्न विभागाध्यक्षगण ,नेहरु सताब्दी नगर कॉलोनी में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत विभिन्न फलदार एवं औषधि युक्त पोधो का पौधरोपण किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी जनों ने हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण हेतु अपना संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम के दौरान एसईसीएल की वार्षिक पर्यावरण पत्रिका "पर्यावरण दर्पण" का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया। साथ ही एसईसीएल की पर्यावरणीय पहलों, हरित परियोजनाओं एवं सतत खनन प्रथाओं पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।


अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने कहा कि एसईसीएल देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पर्यावरणीय दायित्वों के निर्वहन के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान निदेशक (मानव संसाधन) श्री बिरंची दास ने सभी उपस्थितजनों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। शपथ के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, वृक्षारोपण, जल बचत एवं पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने का संकल्प लिया गया।


इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) श्री रमेश चन्द्र महापात्र ने कहा कि सतत विकास की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब औद्योगिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जाए। उन्होंने कहा कि एसईसीएल पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप जिम्मेदार एवं सतत खनन के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के आरंभिक सत्र में डीएवी विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति संवर्धन पर आधारित स्वागत गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित जनों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया ।
इस अवसर पर कुसमुंडा एवं हसदेव क्षेत्र द्वारा पर्यावरण सरंक्षण विषयक संदश परत नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया जिसे उपस्थितों ने अत्यंत सराहा ।
महाप्रबंधक (पर्यावरण) श्री बी. राणा प्रताप ने स्वागत भाषण में विश्व पर्यावरण दिवस की थीम तथा एसईसीएल द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रमुख कार्यों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष का विश्व पर्यावरण दिवस संदेश भी पढ़कर सुनाया गया।
इस अवसर पर मुख्यालय स्तर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता, तत्क्षण भाषण प्रतियोगिता एवं कवि सम्मेलन के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को मंचासीन अतिथियों द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री शेख जाकिर हुसैन, मुख्य प्रबंधक (पर्यावरण) ने किया तथा अंत में डॉ. एम.एस. प्रियंका ने आभार व्यक्त किया।

जनसम्पर्क अधिकारी 
एसईसीएल बिलासपुर
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विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएसएफ छत्तीसगढ़ का हरित संकल्प  5000 से अधिक पौधों का वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर बीएसएफ छत्तीसगढ़ का हरित संकल्प 5000 से अधिक पौधों का वृक्षारोपण

 विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर  सामरिक मुख्यालय (विशेष-संक्रिया) सीमा सुरक्षा बल छत्तीसगढ़ द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए व्यापक वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत सामरिक मुख्यालय (विशेष-संक्रिया) बी०एस०एफ छत्तीसगढ़, भिलाई तथा अधीनस्थ वाहिनियों एवं इकाइयों में 5000 से अधिक छायादार, औषधीय, फलदार एवं सजावटी पौधों का रोपण किया गया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गिरधारी लाल मीणा, उप महानिरीक्षक, सामरिक मुख्यालय (विशेष-संक्रिया) बी.एस.एफ छत्तीसगढ़, द्वारा पौधारोपण कर किया गया।  इस अवसर पर उप महानिरीक्षक महोदय ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी कार्मिकों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण सुनिश्चित करने का आव्हान किया। 

बीएसएफ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रत्येक वर्ष मानसून अवधि के दौरान व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाता है तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस वर्ष भी बी०एस०एफ सामरिक मुख्यालय से लेकर वाहिनी एवं कम्पनी स्तर तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। इस अवसर पर बीएसएफ के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सामूहिक जिम्मेदारी का निर्वाहन किया।

कार्यक्रम के अंत में बीएसएफ परिवार की ओर से सभी देशवासियों को विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण एवं जनभागीदारी का संदेश दिया गया। यह वृक्षारोपण अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, जन-जागरूकता एवं सतत विकास के प्रति बी०एस०एफ की प्रतिबद्धता का भी सशक्त उदाहरण है।

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राजहरा माइंस हॉस्पिटल में 24वें मेगा मेडिकल कैंप का सफल आयोजन; 650 से अधिक मरीज हुए लाभान्वित

राजहरा माइंस हॉस्पिटल में 24वें मेगा मेडिकल कैंप का सफल आयोजन; 650 से अधिक मरीज हुए लाभान्वित

 सामुदायिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और जमीनी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) - भिलाई इस्पात संयंत्र के राजहरा माइंस हॉस्पिटल में 24वें मेगा मेडिकल कैंप का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) शिविर का मुख्य उद्देश्य राजहरा एवं इसके आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श, व्यापक स्वास्थ्य जांच तथा आवश्यक उपचार सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना था।

इस चिकित्सा शिविर में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखी गई, जिसके तहत क्षेत्र के 650 से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा मार्गदर्शन प्रदान किया गया। शिविर के दौरान हृदय रोग, मेडिसिन, अस्थि रोग, बाल रोग, प्रसूति एवं स्त्री रोग, नेत्र रोग, कान-नाक-गला (ईएनटी), त्वचा रोग, दंत चिकित्सा, सामान्य शल्य चिकित्सा तथा दर्द प्रबंधन सहित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में विशेषज्ञ परामर्श और उपचार सेवाएं दी गईं। ऑन-साइट चिकित्सा हस्तक्षेप के उच्च स्तर का प्रदर्शन करते हुए, क्लिनिकल टीम ने जोड़ों में दर्द से पीड़ित मरीजों को 25 इंट्रा-आर्टिकुलर इंजेक्शन लगाए और ऑर्थोपेडिक सहायता की आवश्यकता वाले 6 मरीजों को मौके पर ही प्लास्टर की सुविधा भी उपलब्ध कराई।

इस मेगा मेडिकल कैंप का आयोजन जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. विनीता द्विवेदी के कुशल नेतृत्व में किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों, डीएनबी रेजिडेंट्स, पैरामेडिकल कर्मियों एवं सहयोगी स्टाफ की एक अत्यंत योग्य बहु-विषयक टीम ने शिविर में सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दीं। विशेषज्ञ चिकित्सा दल में डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर (सर्जिकल ट्रॉमा), डॉ. चंदन दास (हृदय रोग), डॉ. प्रमोद बिनयके (मेडिसिन), डॉ. इमैनुअल मैसी (अस्थि रोग), डॉ. कौशिक किशोर (बाल रोग), डॉ. प्रभदीप कौर (प्रसूति एवं स्त्री रोग), डॉ. वनिता शर्मा (दंत चिकित्सा), डॉ. धीरज शर्मा (सामान्य शल्य चिकित्सा), डॉ. शिखा अग्रवाल (दर्द प्रबंधन), डॉ. शशांक अग्रवाल (त्वचा रोग), डॉ. प्रियंका शिवप्पा (ईएनटी) तथा डॉ. आरती जैन (नेत्र रोग) जैसे प्रमुख चिकित्सक शामिल थे। इसके अतिरिक्त डीएनबी रेजिडेंट्स डॉ. शुभम, डॉ. शालिनी, डॉ. श्रेयस व डॉ. पूर्णिमा के साथ-साथ सहायक प्रबंधक श्रीमती देवकी साहू, मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट श्री कल्लोल मैती और फिजियोथेरेपिस्ट श्री दिग्विजय ने भी मरीजों की सुचारू देखभाल सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस शिविर का सफल निष्पादन संयंत्र के चिकित्सा, नर्सिंग, प्रशासनिक और सहायक विंग के बीच आपसी सहयोग और बेहतर समन्वय के कारण संभव हो सका। कार्यक्रम के सफल संचालन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार, मुख्य महाप्रबंधक (आईओसी राजहरा) श्री आर. बी. गहरवार तथा सहायक महाप्रबंधक (मानव संसाधन-आईओसी राजहरा) श्री तुषार राय चौधरी द्वारा महत्वपूर्ण प्रशासनिक व प्रबंधकीय सहयोग प्रदान किया गया। सेल का राजहरा माइंस हॉस्पिटल अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता के तहत नियमित रूप से ऐसे बड़े पैमाने के चिकित्सा शिविरों का आयोजन करता आ रहा है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ाना और खनन व उसके परिधीय क्षेत्रों की आबादी तक उच्च स्तरीय, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है।

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भिलाई स्टील प्लांट ने सुरक्षित बैंक खाता परिवर्तन के लिए मेकर चेकर सिस्टम शुरू किया

भिलाई स्टील प्लांट ने सुरक्षित बैंक खाता परिवर्तन के लिए मेकर चेकर सिस्टम शुरू किया

 डिजिटल गवर्नेंस, वित्तीय सुरक्षा और प्रक्रिया पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएआईएल)-भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) ने अपने केंद्रीकृत पेरोल और पारिश्रमिक प्रणाली (सीपीआरएस) और बीएसपी-एसएपी प्लेटफॉर्म के लिए एक नया 'बैंक खाता परिवर्तन के लिए मेकर-चेकर प्रावधान' सिस्टम शुरू किया है।

इस्पात भवन स्थित वित्त एवं लेखा सभागार में कार्यकारी निदेशक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रवीण निगम और कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार द्वारा मुख्य महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) श्री प्रमोद कुमार चोखानी, वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय प्रमुखों की उपस्थिति में इस प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

नव कार्यान्वित मेकर-चेकर तंत्र को एक मजबूत बहुस्तरीय सत्यापन और अनुमोदन ढांचा पेश करके बैंक खाता संशोधन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली किसी भी बैंक खाता परिवर्तन अनुरोध को संसाधित करने से पहले सत्यापन की एक अतिरिक्त परत जोड़ती है, जिससे डेटा सटीकता, जवाबदेही और परिचालन विश्वसनीयता के उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों को नई प्रणाली के परिचालन ढांचे, सुरक्षा सुविधाओं और कार्यान्वयन पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल से संयंत्र के मानव संसाधन और वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों में डिजिटल प्रक्रियाओं को और मजबूत करने तथा बेहतर नियंत्रण तंत्र स्थापित करने की उम्मीद है।

इस नई व्यवस्था से कर्मचारियों को वेतन संबंधी बैंक खातों में बदलाव की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाकर महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सत्यापन प्रोटोकॉल से खातों में गलत जानकारी दर्ज करने, अनधिकृत संशोधनों और प्रसंस्करण त्रुटियों की संभावना कम होगी, जिससे कर्मचारियों की वित्तीय जानकारी सुरक्षित रहेगी और वेतन एवं संबंधित भुगतानों का समय पर वितरण सुनिश्चित होगा।

मानव संसाधन विभाग, नियंत्रण एवं सूचना प्रौद्योगिकी (सी एंड आईटी) विभाग और वित्त एवं लेखा विभाग के समन्वित प्रयासों से इस प्रणाली का सफल कार्यान्वयन संभव हो पाया। अधिकारियों ने इस पहल को भिलाई इस्पात संयंत्र में वेतन प्रबंधन को आधुनिक बनाने और सुरक्षित डिजिटल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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छत्तीसगढ़ में आर्थिक और कृषि गतिविधियों में तेजी ईंधन की रिकॉर्ड मांग के बीच तेल कंपनियों ने सुनिश्चित की निर्बाध आपूर्ति

छत्तीसगढ़ में आर्थिक और कृषि गतिविधियों में तेजी ईंधन की रिकॉर्ड मांग के बीच तेल कंपनियों ने सुनिश्चित की निर्बाध आपूर्ति

 ग्रामीण और शहरी अंचलों में सुचारू उत्पाद आवाजाही के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तैनात

देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs)—जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल हैं—ने छत्तीसगढ़ राज्य में ईंधन की मांग में आए भारी उछाल के बीच अपने परिचालन और लॉजिस्टिक्स तालमेल को मजबूत किया है। इंडियन ऑयल के रायपुर मंडल कार्यालय के डिविजनल रिटेल सेल्स हेड (DRSH) एवं छत्तीसगढ़ के राज्य स्तरीय समन्वयक श्री नितिन चव्हाण द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 मई से 28 मई 2026 की अवधि के दौरान राज्य में हाई-स्पीड डीजल (HSD) की खुदरा बिक्री में व्यापक विकास देखा गया है, जिसमें विशेष रूप से 4 प्रमुख जिलों—बालोद (40.6%), बस्तर (35.2%), कोरिया (34.0%) और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (30.3%)—ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की शानदार विकास दर हासिल की है। इसके साथ ही, 7 अन्य जिलों, जिनमें सक्ती (29%), राजनांदगांव (26.9%), सूरजपुर (23.5%), दुर्ग (23.5%), रायपुर (22.6%), कोंडागांव (20.9%) और कांकेर (20.3%) शामिल हैं, ने डीजल की बिक्री में 20 से 30 प्रतिशत के बीच जोरदार वृद्धि दर्ज की है, जबकि महासमुंद, बलौदाबाजार, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बीजापुर, सुकमा, सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर और धमतरी सहित 11 जिलों में यह वृद्धि 10 से 20 प्रतिशत के दायरे में रही है; वहीं जांजगीर (13.1%), कांकेर (12.8%) और रायपुर (12.1%) जैसे जिलों में पेट्रोल की खुदरा बिक्री में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।

ईंधन की मांग में इस निरंतर वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण स्थानीय और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं, जिनमें मुख्य रूप से ग्रामीण कृषि क्षेत्रों में चल रही सीजन की चरम जुताई, बुवाई और कटाई से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स (पेट्रोल पंपों) और अन्य निजी तेल आपूर्तिकर्ताओं के बीच कीमतों में मौजूद स्पष्ट अंतर की वजह से भारी वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं का रुझान बड़े पैमाने पर पीएसयू (PSU) आउटलेट्स की तरफ हुआ है, जिसने खुदरा मांग को नई ऊंचाई दी है। पेट्रोलियम उत्पादों के इस उच्च उठाव के बावजूद, बिक्री के ये मजबूत आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि बिना किसी बड़े व्यवधान या स्थानीय किल्लत के पूरे छत्तीसगढ़ संभाग में ऑटोमोटिव ईंधन की निरंतर और निर्बाध आपूर्ति सफलतापूर्वक कायम रखी गई है।

इस भारी लॉजिस्टिक्स आवश्यकता को पूरा करने के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां टर्मिनलों, डिपो, पाइपलाइनों, एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों और खुदरा काउंटरों के अपने व्यापक देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से निरंतर आपूर्ति चक्र चला रही हैं। बाजारों में उत्पादों की सुचारू आवाजाही और समय पर पुनः आपूर्ति (रेपलीनिशमेंट) सुनिश्चित करने के लिए तेल कंपनियों की समर्पित आपूर्ति टीमें, परिवहन नेटवर्क और terminal संचालन इकाइयां चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स के साथ मिलकर चौबीसों घंटे (24x7) काम कर रही हैं। तेल उद्योग इस संबंध में राज्य प्रशासन के साथ निरंतर सीधा और कड़ा समन्वय बनाए हुए है। तेल उद्योग के नेतृत्व ने समस्त उपभोक्ताओं को पुनः आश्वस्त किया है कि देश और राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देते हुए अपना सामान्य खरीदारी व्यवहार बनाए रखें, घबराहट में आकर अनावश्यक भंडारण (पैनिक बाइंग) से बचें और सटीक जानकारी के लिए केवल अधिकृत एजेंसियों व तेल कंपनियों के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।

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dpboss