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सखी महिला समूह द्वारा सावन पर्व का उत्साहपूर्ण आयोजन

सखी महिला समूह द्वारा सावन पर्व का उत्साहपूर्ण आयोजन

सखी महिला समूह, एस.ई.सी.एल, नर्मदा क्लब, वसंत विहार द्वारा दिनांक 06 अगस्त 2026 को सावन पर्व बड़े ही हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समूह की सभी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई तथा गुलाबी रंग की साड़ी धारण कर पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। महिलाओं ने एक-दूसरे को हरी चूड़ियां पहनाकर पारंपरिक सौहार्द का परिचय दिया एवं सुहाग सामग्री का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न मनोरंजक खेलों का आयोजन किया गया, साथ ही संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया। सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं नेतृत्व समूह की सचिव श्रीमती खुशी क्षत्रिय , उप सचिव श्रीमती  मोना कामले , कोषाध्यक्ष श्रीमती बिन्नी  कुर्रे तथा सांस्कृतिक सचिव श्रीमती करुणा साहू द्वारा किया गया। अंत में कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में किया गया।
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जिले में 9 से 17 अगस्त तक चलेगा ‘हर घर तिरंगा अभियान’ तथा 15 अगस्त तक होंगे ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम

जिले में 9 से 17 अगस्त तक चलेगा ‘हर घर तिरंगा अभियान’ तथा 15 अगस्त तक होंगे ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम

कोरिया, 08 अगस्त 2026/* स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कोरिया जिले में 9 से 17 अगस्त 2026 तक ‘हर घर तिरंगा अभियान’ तथा 7 से 15 अगस्त 2026 तक ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर के निर्देशानुसार दोनों अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरिया को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

*झुमका बांध से शुरू होगा विशेष स्वच्छता अभियान*
9 अगस्त को प्रातः 8 से 10 बजे तक झुमका बांध पर्यटन स्थल में विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया जाएगा। श्रमदान के माध्यम से स्वच्छता कार्यक्रम के साथ स्वच्छता थीम पर तिरंगा प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर एवं जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण को सौंपी गई है।

*10 अगस्त को निकलेगी भव्य तिरंगा रैली*
10 अगस्त को प्रातः 8 से 10 बजे तक पुलिस लाइन बैकुण्ठपुर से रामानुज स्टेडियम तक भव्य तिरंगा रैली निकाली जाएगी। इसमें विद्यार्थियों सहित विभिन्न वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

*14 अगस्त को तिरंगा सद्भावना दौड़ और देशभक्ति कार्यक्रम*
14 अगस्त को प्रातः 8 से 10 बजे तक रामानुज स्टेडियम से कुमार चौक तक तिरंगा सद्भावना दौड़ आयोजित होगी। वहीं दोपहर 12 से शाम 3 बजे तक मानस भवन बैकुण्ठपुर में तिरंगा कैनवास, रंगोली, पोस्टर प्रतियोगिता और देशभक्ति आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

*गांव-गांव निकलेगी तिरंगा रैली, स्वच्छता अभियान में शामिल होंगे ग्रामीण*
9 से 15 अगस्त तक जिले के सभी विकासखंडों और ग्राम पंचायतों में स्व-सहायता समूह की महिलाओं एवं ग्रामीणों की सहभागिता से तिरंगा रैली और श्रमदान आधारित स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बिहान की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तिरंगा झंडों का निर्माण भी किया जाएगा।

*स्कूल-कॉलेजों में होंगे देशभक्ति कार्यक्रम*
7 से 15 अगस्त तक समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संस्थाओं, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों की सहभागिता से तिरंगा यात्रा, मशाल रैली, देशभक्ति गीत प्रतियोगिता, विचार गोष्ठी, संगोष्ठी और छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। स्कूलों के बैंड, एनसीसी, एनएसएस एवं स्काउट की भागीदारी से भी विभिन्न कार्यक्रम होंगे।

*वंदे मातरम की धुन पर अपनी आवाज में गीत रिकॉर्ड कर सकेंगे नागरिक*
सार्वजनिक-निजी भागीदारी से ‘वंदे मातरम ऑडियो/वीडियो बूथ’ स्थापित किए जाएंगे। यहां नागरिक रिकॉर्डेड धुन के साथ अपनी आवाज में वंदे मातरम गाकर उसे अपलोड कर सकेंगे।

*15 अगस्त को होगा सामूहिक वंदे मातरम गायन*
15 अगस्त को जिला मुख्यालय, विकासखंड मुख्यालय, ग्राम पंचायतों तथा सभी स्कूल-कॉलेजों और शासकीय कार्यालयों में ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्य समारोह स्थल सहित सभी कार्यालयों में राष्ट्रीय पर्व गरिमापूर्वक मनाया जाएगा।

*‘सेल्फी विद तिरंगा’ अभियान में भाग ले सकेंगे आम नागरिक*
16 अगस्त को विशेष ‘सेल्फी विद तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अधिकारी, कर्मचारी एवं आम नागरिक हर घर तिरंगा पोर्टल पर तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड कर अभियान में सहभागिता दर्ज करा सकेंगे।

जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों को निर्धारित कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां समय पर पूर्ण करने तथा शासन के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान का शुभारंभ

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान का शुभारंभ

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी, 06 अगस्त 2026। पुरानी बस्ती स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में "नशा मुक्ति प्रतिज्ञा महाअभियान" का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में *कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े (IAS) तथा पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह (IPS)* विशेष रूप से उपस्थित रहीं। यह अभियान 06 अगस्त से 20 अगस्त 2026 तक संचालित किया जाएगा।


कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अधिक से अधिक लोगों को नशा मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत देशभर में 10 करोड़ लोगों को नशा मुक्ति प्रतिज्ञा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं नागरिकों ने नशा मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेते हुए स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशा मुक्त बनाने की प्रतिज्ञा ली। ब्रह्माकुमारी संस्थान के पदाधिकारियों ने नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

*पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह (IPS)* ने कहा कि नशे के विरुद्ध जनजागरूकता ही सबसे प्रभावी उपाय है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से ही नशा मुक्त समाज का निर्माण संभव है। वहीं *कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े (IAS)* ने सभी नागरिकों से इस जनआंदोलन से जुड़कर युवाओं को नशे से दूर रखने की अपील की।

कार्यक्रम में एमसीबी पुलिस ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए नशे के दुष्प्रभावों, कानून संबंधी प्रावधानों एवं सामाजिक दुष्परिणामों के संबंध में उपस्थित लोगों को जागरूक किया तथा सभी को नशा मुक्ति की शपथ दिलाने के अभियान में सहयोग प्रदान किया।

संस्थान द्वारा बताया गया कि 06 से 20 अगस्त 2026 तक विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, प्रतिज्ञा अभियान एवं जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को इस जनआंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। एमसीबी पुलिस ने भी जिले में नशे के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान को निरंतर जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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एसईसीएल दीपका क्षेत्र में सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन

एसईसीएल दीपका क्षेत्र में सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन

एसईसीएल दीपका क्षेत्र के ऑफिसर्स क्लब में दिनांक 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुल 16 कर्मचारी/अधिकारी को उनकी दीर्घकालीन, समर्पित एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।


कार्यक्रम में क्षेत्रीय महाप्रबंधक श्री अशोक कुमार, महाप्रबंधक (संचालन) श्री राजेंद्र कुमार, महाप्रबंधक (खनन) श्री नागेंद्र कुमार साहू, अन्य महाप्रबंधकगण, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, विभिन्न विभागाध्यक्ष, अधिकारीगण, जेसीसी सदस्यगण, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधिगण, सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी एवं उनके परिजन उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी को उनकी वर्षों की निष्ठापूर्ण एवं उत्कृष्ट सेवाओं के सम्मानस्वरूप शॉल, श्रीफल, स्मृति-चिन्ह, कर्मचारी सेवा प्रमाण-पत्र एवं सीपीआरएमएस (CPRMS) मेडिकल कार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त कर्मचारी/अधिकारी ने अपने सेवा-काल के अनुभव साझा किए तथा क्षेत्रीय महाप्रबंधक महोदय ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उनके अमूल्य योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं समृद्ध भविष्य की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।

यह सम्मान समारोह एसईसीएल दीपका क्षेत्र द्वारा अपने कर्मचारी/अधिकारी के प्रति सम्मान, कृतज्ञता एवं उनके योगदान के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का भावपूर्ण प्रतीक रहा। वर्षों तक संगठन की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन कर्मयोगियों को भावभीनी विदाई देते हुए सभी ने उनके जीवन के नए अध्याय के लिए उज्ज्वल एवं मंगलमय भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
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भिलाई इस्पात संयंत्र ने दो गांवों में लगाए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर 90 ग्रामीणों को मिला उपचार एवं परामर्श

भिलाई इस्पात संयंत्र ने दो गांवों में लगाए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर 90 ग्रामीणों को मिला उपचार एवं परामर्श

 भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुदृढ़ करने की दिशा में दुर्ग जिला चिकित्सालय के सहयोग से दुर्ग जिले के गोढ़ी और खोपली गांवों में निःशुल्क चिकित्सा जांच एवं स्वास्थ्य परामर्श शिविर आयोजित किए। शिविरों में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया तथा आवश्यक दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया गया।

20 जुलाई 2026 को धमधा विकासखंड के ग्राम गोढ़ी में आयोजित शिविर में जिला चिकित्सालय, दुर्ग की चिकित्सा अधिकारी डॉ. गायत्री श्याम, फार्मासिस्ट जान्हवी, नर्सिंग स्टाफ तृप्ति कुमारी, पंजीयन सहयोगी राकेश कुमार तथा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर-सीएचओ) गुलेश्वरी साहू ने सेवाएं प्रदान कीं। शिविर में 40 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें 12 पुरुष और 28 महिलाएं शामिल थीं। सभी हितग्राहियों को आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श के साथ निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

इसी क्रम में 21 जुलाई 2026 को निकुम विकासखंड के ग्राम खोपली में आयोजित चिकित्सा शिविर में चिकित्सा अधिकारी डॉ. गायत्री श्याम, फार्मासिस्ट मनीष देशमुख, नर्सिंग स्टाफ रेणुका वर्मा तथा पंजीयन सहयोगी विवेक ध्रुव ने सेवाएं दीं। इस शिविर में 50 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें 28 पुरुष और 22 महिलाएं शामिल थीं। परीक्षण के उपरांत सभी ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श तथा निःशुल्क औषधियां वितरित की गईं।

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित इन दोनों चिकित्सा शिविरों का सफल संचालन दुर्ग जिला चिकित्सालय के सक्रिय सहयोग से किया गया। संयंत्र द्वारा निगमित सामाजिक दायित्व के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उनके गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रकार के जनहितकारी कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।

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भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों के बीच सुरक्षा जागरूकता सुदृढ़ करने हेतु लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन (एलजीआई) कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित

भिलाई इस्पात संयंत्र में कर्मचारियों के बीच सुरक्षा जागरूकता सुदृढ़ करने हेतु लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन (एलजीआई) कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित

 भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में औद्योगिक सुरक्षा संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों पर लगातार लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन (एलजीआई) कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई), सेफ्टी सर्किल, फायर सेफ्टी तथा पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन- पेसो) से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देकर सुरक्षित कार्य संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इसी क्रम में 15 जुलाई 2026 को मानव संसाधन विकास केंद्र में "सेफ्टी सर्किल" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी, सुरक्षित कार्य व्यवहार को बढ़ावा देने तथा व्यावसायिक सुरक्षा में सतत सुधार के लिए सेफ्टी सर्किल की अवधारणा और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। महाप्रबंधक (सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग) पुष्पा एम्ब्रोस तथा इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग के विजेंद्र सिंह ने प्रस्तुतियों और संवादात्मक सत्र के माध्यम से प्रभावी सुरक्षा उपायों की जानकारी साझा की।

इसके बाद 18 जुलाई 2026 को अधिकारियों के लिए "पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई)" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 17 अधिकारियों ने सहभागिता की। सहायक प्रबंधक (एसएमएस-2) सुमित कुमार ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों के सही चयन, उनके प्रभावी उपयोग तथा नियमित रखरखाव के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।

इससे पूर्व 30 जून 2026 को गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के लिए "फायर सेफ्टी" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 31 कर्मचारियों ने भाग लिया। अतिरिक्त मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजय धवस तथा फायर ऑफिसर अभिषेक कुमार ने अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षित कार्य पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी देते हुए अग्नि जोखिमों को न्यूनतम करने के उपायों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।

इसी श्रृंखला के अंतर्गत 21 जुलाई 2026 को अधिकारियों के लिए "पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन- पेसो)" विषय पर लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर ए. नागेंद्र ने पेट्रोलियम उत्पादों एवं विस्फोटकों के सुरक्षित भंडारण, संचालन और उपयोग से संबंधित वैधानिक प्रावधानों, नियामकीय मानकों तथा औद्योगिक सुरक्षा की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों की विस्तृत जानकारी दी।

 

भिलाई इस्पात संयंत्र में इस प्रकार के लार्ज ग्रुप इंटरेक्शन कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिकारियों और कर्मचारियों को औद्योगिक सुरक्षा के विभिन्न आयामों से निरंतर अवगत कराया जा सके तथा संयंत्र में सुरक्षित, जागरूक और उत्तरदायी कार्य संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

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कोल इंडिया के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अभियान के तहत एसईसीएल ने बिलासपुर में एक ही दिन में 15 हजार पौधों का वृहद् वृक्षारोपण

कोल इंडिया के गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अभियान के तहत एसईसीएल ने बिलासपुर में एक ही दिन में 15 हजार पौधों का वृहद् वृक्षारोपण

Bilaspur - पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा 21 जुलाई 2026 को एक ही दिन में सर्वाधिक पौधारोपण कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित करने के राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने आज बिलासपुर के कोनी स्थित नवीन कमिश्नर कार्यालय के पीछे 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से 15,000 पौधों का वृहद् वृक्षारोपण किया।

यह परियोजना संभवतः बिलासपुर शहर की पहली मियावाकी वन परियोजना है, जिसे एसईसीएल द्वारा विकसित किया जा रहा है। मियावाकी तकनीक के माध्यम से विकसित होने वाला यह सघन शहरी वन आने वाले वर्षों में जैव विविधता के संवर्धन, हरित आवरण में वृद्धि तथा स्थानीय पर्यावरण को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वृक्षारोपण कार्यक्रम में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन, बिलासपुर संभाग के आयुक्त श्री सुनील कुमार जैन, एसईसीएल के निदेशक (एचआर) श्री बिरंची दास, निदेशक (वित्त) श्री डी. सुनील कुमार, सीवीओ श्री हिमांशु जैन, निदेशक तकनीकी (यो./परि.) श्री रमेश चन्द्र महापात्र, कोल इंडिया लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक श्री के. राजशेखर, महाप्रबंधक (पर्यावरण) श्री संजय सिन्हा, सहित कंपनी के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण तथा जनभागीदारी के महत्व का संदेश दिया।

इस अवसर पर एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने कहा, "पर्यावरण संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मियावाकी पद्धति से विकसित किए जा रहे ऐसे सघन वन न केवल हरित आवरण बढ़ाने में सहायक होंगे, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।"

कोल इंडिया के इस गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अभियान के अंतर्गत सभी अनुषंगी कंपनियों में वृहद स्तर पर पौधरोपन किया जा रहा है। इसी क्रम में एसईसीएल द्वारा अपने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में कुल 3,20,000 से अधिक पौधों का वृक्षारोपण किया जा रहा है। 

यह अभियान न केवल एक विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का प्रयास है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए अधिक स्वच्छ, हरित एवं संतुलित पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एसईसीएल का एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

जनसम्पर्क अधिकारी 
एसईसीएल बिलासपुर
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प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत भिलाई इस्पात संयंत्र में 40 प्रशिक्षुओं का औद्योगिक प्रशिक्षण शुरू

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत भिलाई इस्पात संयंत्र में 40 प्रशिक्षुओं का औद्योगिक प्रशिक्षण शुरू

 ओरिएंटेशन, संयंत्र भ्रमण और उत्पादन प्रक्रियाओं के व्यावहारिक प्रशिक्षण से उद्योग की कार्यप्रणाली से कराया गया परिचित

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के अंतर्गत चयनित 40 प्रशिक्षुओं के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा जुलाई माह में ओरिएंटेशन एवं औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को औद्योगिक कार्यप्रणाली, संगठनात्मक कार्य संस्कृति तथा इस्पात उद्योग की उत्पादन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दो दिवसीय ओरिएंटेशन सत्र से हुआ, जिसमें प्रशिक्षुओं को भिलाई इस्पात संयंत्र की कार्यप्रणाली, एकीकृत इस्पात संयंत्र की उत्पादन प्रक्रिया, औद्योगिक सुरक्षा मानकों, कार्यस्थल अनुशासन तथा संगठनात्मक संस्कृति की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद दो दिवसीय संयंत्र भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने प्रमुख उत्पादन इकाइयों का अवलोकन किया और आधुनिक इस्पात उत्पादन प्रणालियों तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं को निकट से समझा।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को औपचारिक शिक्षा के साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना, शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करना तथा उनकी रोजगार क्षमता को सुदृढ़ बनाना है। यह योजना युवाओं को भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष बनाकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महाप्रबंधक प्रभारी (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) संजीव कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के समन्वय में उप प्रबंधक (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) सुष्मिता पाटला, सेक्शन अधिकारी (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) स्वतंत्र कुमार तथा टेक्निकल एसोसिएट (मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास) मनीष कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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पर्यावरण संरक्षण एवं हरित पहल के लिए एसईसीएल को मिला ‘ग्रीन ट्रांज़िशन लीडरशिप अवॉर्ड’

पर्यावरण संरक्षण एवं हरित पहल के लिए एसईसीएल को मिला ‘ग्रीन ट्रांज़िशन लीडरशिप अवॉर्ड’

नई दिल्ली में द टाइम्स इंटरनेट इकोप्रेन्योर्स अवॉर्ड्स 2026 में मिला राष्ट्रीय सम्मान*

*चालू वित्तीय वर्ष में 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार करने वाली कोल इंडिया लिमिटेड की पहली अनुषंगी कंपनी भी बनी एसईसीएल

साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) को सतत एवं हरित खनन के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल तथा पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के लिए द टाइम्स इंटरनेट इकोप्रेन्योर्स अवॉर्ड्स 2026 में प्रतिष्ठित ‘ग्रीन ट्रांज़िशन लीडरशिप अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान 17 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने प्राप्त किया।

यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण, सतत खनन, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने, वैज्ञानिक खान बंदी, भूमि पुनर्वास तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन के क्षेत्र में एसईसीएल द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण मान्यता है।

इसी क्रम में एसईसीएल ने परिचालन प्रदर्शन के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही एसईसीएल, चालू वित्तीय वर्ष में ऐसा करने वाली कोल इंडिया लिमिटेड की पहली अनुषंगी कंपनी बन गई है। कंपनी ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।

इस उपलब्धि में कोरबा स्थित एसईसीएल की मेगा परियोजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दीपका परियोजना ने 11.8 मिलियन टन, गेवरा परियोजना ने 11.7 मिलियन टन तथा कुसमुंडा परियोजना ने 9.7 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया। इसके अतिरिक्त सीआईसी कोलफील्ड्स ने 8.8 मिलियन टन, रायगढ़ क्षेत्र ने 5.9 मिलियन टन तथा कोरबा क्षेत्र ने 2.1 मिलियन टन उत्पादन कर कंपनी के समग्र प्रदर्शन में उल्लेखनीय योगदान दिया।

इस अवसर पर एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहान ने कहा, "ग्रीन ट्रांज़िशन लीडरशिप अवॉर्ड एसईसीएल की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का सम्मान है। पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा—दोनों हमारे विकास के समान रूप से महत्वपूर्ण आयाम हैं। एक ओर हम हरित एवं उत्तरदायी खनन को बढ़ावा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दक्ष, सुरक्षित एवं आधुनिक खनन के माध्यम से देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। 

एसईसीएल आधुनिक तकनीकों, उच्च परिचालन दक्षता तथा सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं उत्तरदायी खनन के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित कर रही है।

जनसम्पर्क अधिकारी
एसईसीएल बिलासपुर
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विलंबित मानसून धान किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान की वैज्ञानिक सलाह जारी

विलंबित मानसून धान किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान की वैज्ञानिक सलाह जारी

 पर्याप्त वर्षा मिलते ही रोपाई पूरी करें, अधिक देरी होने पर कम अवधि वाली धान किस्में एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह

 

दक्षिण-पश्चिम मानसून में विलंब तथा छत्तीसगढ़ के अनेक क्षेत्रों में वर्षा की अनिश्चितता के मद्देनजर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर ने प्रदेश के धान किसानों के लिए विशेष वैज्ञानिक कृषि परामर्श जारी किया है। संस्थान ने खरीफ मौसम में फसल की सफल स्थापना सुनिश्चित करने तथा संभावित उत्पादन हानि को न्यूनतम रखने के लिए किसानों से मौसम की स्थिति के अनुरूप समयबद्ध वैज्ञानिक एवं आकस्मिक कृषि प्रबंधन उपाय अपनाने का आग्रह किया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर के प्रक्षेत्र में धान की 'देवभोग' किस्म की पौध रोपाई के लिए तैयार


संस्थान के अनुसार, पर्याप्त वर्षा होने पर किसान 20 से 25 दिन पुराने स्वस्थ पौधों की अनुशंसित दूरी पर शीघ्र रोपाई पूरी करें। यदि रोपाई में अधिक विलंब हो, तो कम से मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों का चयन किया जाए। जिन क्षेत्रों में रोपाई संभव न हो, वहां अंकुरित बीजों का उपयोग करते हुए ड्रम सीडर अथवा छिड़काव विधि से धान की सीधी बुवाई की जा सकती है।


भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने कहा कि बदलती जलवायु और अनिश्चित वर्षा की परिस्थितियों में समय पर वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तथा आकस्मिक कृषि योजना अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि विज्ञान केंद्रों तथा कृषि विशेषज्ञों के नियमित संपर्क में रहकर वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की।


संस्थान ने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए फास्फोरस एवं पोटाश की अनुशंसित मात्रा आधार खाद के रूप में देने तथा नत्रजन उर्वरक का प्रयोग फसल की आवश्यकता के अनुसार विभाजित मात्रा में करने की सलाह दी है। साथ ही भारी वर्षा की संभावना से ठीक पहले यूरिया का प्रयोग नहीं करने की अनुशंसा की गई है, ताकि पोषक तत्वों के बहाव से होने वाली हानि को रोका जा सके।


किसानों को समय पर खरपतवार नियंत्रण, खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने तथा जलभराव की स्थिति में प्रभावी जल निकासी सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही तना छेदक, पत्ती लपेटक जैसे प्रमुख कीटों तथा ब्लास्ट एवं जीवाणुजनित पत्ती झुलसा जैसे रोगों की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यकता के अनुसार वैज्ञानिक अनुशंसाओं पर आधारित पौध संरक्षण उपाय अपनाने पर जोर दिया गया है।


संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि विलंबित मानसून की स्थिति में फसल की प्रारंभिक अवस्था सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। किसानों को खेत संबंधी कार्यों में अनावश्यक विलंब से बचते हुए संतुलित पोषण, प्रभावी खरपतवार नियंत्रण तथा कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।


संस्थान ने यह भी सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में लंबे समय तक वर्षा का अभाव बना रहने से धान की खेती प्रभावित होने की आशंका है, वहां स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप मक्का, अरहर, उड़द, मूंग, तिल तथा मोटे अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती पर विचार किया जा सकता है। संस्थान ने किसानों से मौसम आधारित कृषि परामर्श और वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन कर खरीफ फसलों को सुरक्षित एवं उत्पादक बनाने की अपील की है।

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भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप 3 में मशीनीकृत हाउसकीपिंग लागू सुरक्षा और कार्यकुशलता को नई मजबूती

भिलाई इस्पात संयंत्र के स्टील मेल्टिंग शॉप 3 में मशीनीकृत हाउसकीपिंग लागू सुरक्षा और कार्यकुशलता को नई मजबूती

 आधुनिक मशीनों से होगी सफाई, जनशक्ति व लागत में कमी के साथ कार्यस्थल की स्वच्छता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र ने कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वच्छता और परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्टील मेल्टिंग शॉप-3 (स्टील मेल्टिंग शॉप-3) में आधुनिक मशीनीकृत हाउसकीपिंग एवं सफाई व्यवस्था लागू की है। नई व्यवस्था के तहत अत्याधुनिक मशीनों और उन्नत सफाई उपकरणों के उपयोग से कार्यस्थल को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जा रहा है।

संयंत्र के अनुसार, स्टील मेल्टिंग शॉप-3 का विस्तृत कार्यक्षेत्र और चुनौतीपूर्ण औद्योगिक वातावरण हाउसकीपिंग कार्य को अत्यंत श्रम-प्रधान बनाता है। पूर्व व्यवस्था में अधिकांश सफाई कार्य मैन्युअल रूप से किए जाते थे तथा मशीनीकृत सफाई के लिए केवल एक बैकहो लोडर (जेसीबी) उपलब्ध था। सीमित संसाधनों के कारण अपेक्षित स्तर की स्वच्छता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण था। वहीं, कर्मचारियों को हॉट मेटल क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर कार्य करना पड़ता था, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बने रहते थे। इसके अलावा संयंत्र के परिधीय मार्ग, हॉट मेटल डीसल्फराइजेशन स्टेशन (हॉट मेटल डीसल्फराइजेशन स्टेशन-एचएमडीएस) क्षेत्र तथा कास्टर सीवी-2 के आसपास की सफाई पूर्व अनुबंध के कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं थी।

नई व्यवस्था के अंतर्गत व्यापक स्तर पर मशीनीकृत सफाई प्रणाली विकसित की गई है। इसके लिए डम्पर एवं ट्रक, बैकहो लोडर (जेसीबी), व्हील्ड स्किड स्टीयर लोडर (बॉबकैट), बैटरी संचालित राइड-ऑन स्वीपर, इलेक्ट्रिक एवं बैटरी संचालित स्क्रबर ड्रायर, ग्लास क्लीनिंग किट सहित अन्य आधुनिक उपकरणों की तैनाती की गई है। इन संसाधनों के उपयोग से सफाई कार्य अब अधिक तेज, प्रभावी और सुरक्षित ढंग से किए जा रहे हैं।

नई हाउसकीपिंग व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव संसाधन प्रबंधन पर भी दिखाई दिया है। हाउसकीपिंग कार्य के लिए आवश्यक कुल जनशक्ति 69 से घटकर 44 रह गई है, जबकि कार्य का दायरा और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अनुबंध की कुल लागत भी लगभग 6.37 करोड़ रुपये से घटकर 5.55 करोड़ रुपये हो गई है, जिससे संसाधनों के अधिक प्रभावी और किफायती उपयोग को बढ़ावा मिला है।

संयंत्र प्रबंधन के अनुसार मशीनीकृत सफाई व्यवस्था लागू होने से जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में मैन्युअल कार्य में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हुआ है। इसके साथ ही संयंत्र परिसर की स्वच्छता, औद्योगिक अपशिष्ट एवं मलबे का वैज्ञानिक निष्पादन, परिधीय क्षेत्रों और सड़कों का नियमित रखरखाव तथा समग्र औद्योगिक वातावरण में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह पहल सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक कार्यसंस्कृति विकसित करने की दिशा में भिलाई इस्पात संयंत्र का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 

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भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित होने वाली पहली कोल पीएसयू सीएसआर योजना बनी एसईसीएल के सुश्रुत

भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित होने वाली पहली कोल पीएसयू सीएसआर योजना बनी एसईसीएल के सुश्रुत

बिलासपुर /साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल 'एसईसीएल के सुश्रुत' ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के साथ यह भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है।

कोयला मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। यह व्यवस्था आधार (वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के अंतर्गत लागू की गई है। इससे योजना के लाभों का पारदर्शी, लक्षित एवं प्रौद्योगिकी आधारित वितरण सुनिश्चित होगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार प्रमाणीकरण का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान पत्रों के माध्यम से भी लाभ प्राप्त करने की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।
वर्ष 2023 में प्रारंभ की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है, जिसके अंतर्गत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) परीक्षा की निःशुल्क आवासीय कोचिंग प्रदान की जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।

योजना ने आरंभ से ही उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं। प्रथम बैच (2023-24) में 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। इनमें 11 विद्यार्थियों ने एमबीबीएस, 2-2 विद्यार्थियों ने बीडीएस, बीएएमएस एवं बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी तथा 2 विद्यार्थियों ने वेटरनरी पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया।

द्वितीय बैच (2024-25) में भी 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की तथा एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस एवं बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश प्राप्त किया।
उल्लेखनीय है कि 'एसईसीएल के सुश्रुत' इससे पूर्व भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली एवं एकमात्र सीएसआर योजना है। 

भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचना के साथ इस योजना को अब और अधिक सुदृढ़ संस्थागत आधार प्राप्त हुआ है, जिससे लाभार्थियों तक पारदर्शी, जवाबदेह एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवा वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में इसे नई मजबूती मिलेगी।

जनसम्पर्क अधिकारी 
एसईसीएल बिलासपुर
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राम मंदिर चंदा घोटाले के विरोध में कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन

राम मंदिर चंदा घोटाले के विरोध में कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन

चिरमिरी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार जिला /ब्लॉक कांग्रेस कमेटी चिरमिरी के नेतृत्व में डोमन हिल बाजार में राम मंदिर निर्माण हेतु एकत्रित चंदे में कथित अनियमितताओं एवं घोटाले के विरोध में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्लॉक कांग्रेस कमेटी चिरमिरी के अध्यक्ष शिवांश जैन ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। यदि मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धापूर्वक दिए गए चंदे में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस पार्टी जनता के विश्वास और धार्मिक आस्था के साथ किसी भी प्रकार के खिलवाड़ को स्वीकार नहीं करेगी।

इस अवसर पर जिला अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ब्लॉक अध्यक्ष शिवांश जैन नेता प्रतिपक्ष गायत्री बिरहा मंडल अध्यक्ष राम प्यारे चौहान इंद्रजीत सिंह लाडो उदय सिंह क्रांति चौहान पार्षद राहुल भाई पटेल सनी चौराहा प्रताप चौहान अजय बघेल गगन सिंह रमेश दुबे बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे
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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत भिलाई में प्रमुख वृक्षारोपण अभियान शुरू किया

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के तहत भिलाई में प्रमुख वृक्षारोपण अभियान शुरू किया

 स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ), उप-क्षेत्रीय कार्यालय, दुर्ग ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को भिलाई में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया।

यह वृक्षारोपण कार्यक्रम भिलाई के सेक्टर-9 में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएआईएल) के भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के बागवानी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया था। यह पहल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने और एक हरित एवं स्वच्छ भारत के निर्माण में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है।


सभा को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक अभिषेक शुक्ला ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वृक्षारोपण को राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में बदलने के आह्वान के अनुरूप है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए वृक्षारोपण और उनका पालन-पोषण करना आवश्यक है।


मुख्य अतिथि, भिलाई स्टील प्लांट के महाप्रबंधक (बागवानी) एन.के. जैन ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा की गई पहल की सराहना करते हुए कहा कि सतत वृक्षारोपण अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को सुनिश्चित करने का आग्रह किया।


राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतर वृक्षारोपण प्रयासों से हरित आवरण बढ़ाने, जैव विविधता का संरक्षण करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री एन.के. जैन, महाप्रबंधक (बागवानी), भिलाई इस्पात संयंत्र, श्री विक्रांत सरन, उप महाप्रबंधक, श्री राजेश कुमार शर्मा और श्री शंकर अग्रवाल थे। कार्यक्रम के अतिथि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, उप-क्षेत्रीय कार्यालय, दुर्ग के सहायक निदेशक अभिषेक शुक्ला भी उपस्थित थे। गणमान्य व्यक्तियों ने पौध रोपण किया और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। यह वृक्षारोपण अभियान स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और संस्थागत सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।


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रामानुजगंज कांवरिया सेवा समिति ने शुरू की सावन की तैयारियां, 11 जुलाई को होगी योजना बैठक

रामानुजगंज कांवरिया सेवा समिति ने शुरू की सावन की तैयारियां, 11 जुलाई को होगी योजना बैठक

09-Jul-2026 36

एम सी बी / भगवान शिव की आराधना का पवित्र माह सावन इस वर्ष 29  से प्रारंभ हो रहा है। सावन माह के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इन श्रद्धालुओं की अनेक टोलियां प्रतिवर्ष बलरामपुर जिले के रामानुजगंज नगर से होकर गुजरती हैं।


हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कांवड़ियों की सेवा एवं स्वागत की व्यापक तैयारियों को लेकर कांवरिया सेवा समिति, रामानुजगंज द्वारा एक योजना बैठक का आयोजन किया गया है। यह बैठक 11 जुलाई शनिवार, शाम 5:00 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय मांगलिक भवन में आयोजित होगी, जिसमें सेवा कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

बैठक में कांवड़ियों के लिए भोजन, पेयजल, विश्राम, प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता, यातायात व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की विस्तृत योजना पर चर्चा की जाएगी। समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूर-दराज़ से आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को रामानुजगंज में सेवा, सहयोग और आत्मीयता का अनुभव हो।

रामानुजगंज नगर वर्षों से कांवड़ियों की सेवा के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। सावन के दौरान नगर के अनेक सामाजिक संगठन, व्यापारी, युवा, महिलाएं और श्रद्धालु मिलकर निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों में जुट जाते हैं। यहां भोजन, शीतल पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है, जिससे लंबी यात्रा कर रहे शिवभक्तों को राहत मिल सके।

कांवरिया सेवा समिति, रामानुजगंज के संयोजक रमन अग्रवाल ने नगर के सभी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, युवाओं एवं शिवभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में बैठक में उपस्थित होकर सेवा कार्यों में सहभागिता निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की सेवा भगवान भोलेनाथ की सेवा के समान है और इस पुनीत कार्य में सभी का सहयोग अपेक्षित है।

समिति ने नगरवासियों से अनुरोध किया है कि वे इस सेवा अभियान से जुड़कर सावन माह में आने वाले शिवभक्तों का आत्मीय स्वागत करें तथा रामानुजगंज की सेवा एवं श्रद्धा की परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।
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रामानुजगंज कांवरिया सेवा समिति ने शुरू की सावन की तैयारियां, 11 जुलाई को होगी योजना बैठक

रामानुजगंज कांवरिया सेवा समिति ने शुरू की सावन की तैयारियां, 11 जुलाई को होगी योजना बैठक

09-Jul-2026 0

एम सी बी / भगवान शिव की आराधना का पवित्र माह सावन इस वर्ष 29  से प्रारंभ हो रहा है। सावन माह के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर में जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। इन श्रद्धालुओं की अनेक टोलियां प्रतिवर्ष बलरामपुर जिले के रामानुजगंज नगर से होकर गुजरती हैं।


हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कांवड़ियों की सेवा एवं स्वागत की व्यापक तैयारियों को लेकर कांवरिया सेवा समिति, रामानुजगंज द्वारा एक योजना बैठक का आयोजन किया गया है। यह बैठक 11 जुलाई शनिवार, शाम 5:00 बजे पंडित दीनदयाल उपाध्याय मांगलिक भवन में आयोजित होगी, जिसमें सेवा कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

बैठक में कांवड़ियों के लिए भोजन, पेयजल, विश्राम, प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता, यातायात व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की विस्तृत योजना पर चर्चा की जाएगी। समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूर-दराज़ से आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को रामानुजगंज में सेवा, सहयोग और आत्मीयता का अनुभव हो।

रामानुजगंज नगर वर्षों से कांवड़ियों की सेवा के लिए अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। सावन के दौरान नगर के अनेक सामाजिक संगठन, व्यापारी, युवा, महिलाएं और श्रद्धालु मिलकर निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों में जुट जाते हैं। यहां भोजन, शीतल पेयजल, विश्राम एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है, जिससे लंबी यात्रा कर रहे शिवभक्तों को राहत मिल सके।

कांवरिया सेवा समिति, रामानुजगंज के संयोजक रमन अग्रवाल ने नगर के सभी सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, युवाओं एवं शिवभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में बैठक में उपस्थित होकर सेवा कार्यों में सहभागिता निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की सेवा भगवान भोलेनाथ की सेवा के समान है और इस पुनीत कार्य में सभी का सहयोग अपेक्षित है।

समिति ने नगरवासियों से अनुरोध किया है कि वे इस सेवा अभियान से जुड़कर सावन माह में आने वाले शिवभक्तों का आत्मीय स्वागत करें तथा रामानुजगंज की सेवा एवं श्रद्धा की परंपरा को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।
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एसईसीएल की पाँच खदानों को मिला 5-स्टार दर्जा, उत्कृष्ट खनन का राष्ट्रीय सम्मान बंगवार, खैराहा, बेहराबांध, विजय वेस्ट एवं जगन्नाथपुर परियोजना को कोयला मंत्रालय की प्रतिष्ठित 5-स्टार रेटिंग

एसईसीएल की पाँच खदानों को मिला 5-स्टार दर्जा, उत्कृष्ट खनन का राष्ट्रीय सम्मान बंगवार, खैराहा, बेहराबांध, विजय वेस्ट एवं जगन्नाथपुर परियोजना को कोयला मंत्रालय की प्रतिष्ठित 5-स्टार रेटिंग

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने उत्कृष्ट एवं उत्तरदायी खनन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कोयला मंत्रालय की प्रतिष्ठित स्टार रेटिंग में अपनी पाँच खदानों को 5-स्टार रेटिंग प्राप्त की है। बंगवार भूमिगत खदान (सोहागपुर क्षेत्र), खैराहा भूमिगत खदान (सोहागपुर क्षेत्र), बेहराबांध भूमिगत खदान (जोहिला क्षेत्र), विजय वेस्ट भूमिगत खदान (हसदेव क्षेत्र) तथा जगन्नाथपुर ओपनकास्ट परियोजना (भटगांव क्षेत्र) को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। किसी एक मूल्यांकन वर्ष में एसईसीएल की पाँच खदानों को एक साथ 5-स्टार रेटिंग मिलना कंपनी के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।

कोयला मंत्रालय की स्टार रेटिंग प्रणाली देश की कोयला एवं लिग्नाइट खदानों के प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन करती है। इसके अंतर्गत सुरक्षित एवं वैज्ञानिक खनन, पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्वास, आधुनिक तकनीकों का उपयोग, श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण, वैधानिक अनुपालन, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा परिचालन दक्षता जैसे विभिन्न मानकों पर खदानों का आकलन किया जाता है। इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली खदानों को ही सर्वोच्च 5-स्टार रेटिंग प्रदान की जाती है।

इस वर्ष 5-स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाली एसईसीएल की बंगवार, खैराहा, बेहराबांध एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदानों ने सुरक्षित संचालन, वैज्ञानिक खनन, उत्पादन दक्षता, श्रमिक कल्याण तथा पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं जगन्नाथपुर ओपनकास्ट परियोजना, जो इस वर्ष 5-स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाली एसईसीएल की एकमात्र ओपनकास्ट परियोजना है, ने ओवरबर्डन प्रबंधन, हरित विकास, जल संरक्षण एवं सुरक्षित उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं।

इस उपलब्धि पर एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरीश दुहन ने कहा,
"एसईसीएल की पाँच खदानों को एक साथ 5-स्टार रेटिंग मिलना पूरे एसईसीएल परिवार के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह उपलब्धि हमारे अधिकारियों, कर्मचारियों, व्यावसायिक सहयोगियों एवं सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति का परिणाम है। सुरक्षित, सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल खनन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। आधुनिक तकनीकों और श्रेष्ठ खनन पद्धतियों को अपनाते हुए हम परिचालन उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। यह सम्मान हमें भविष्य में भी जिम्मेदार एवं सतत खनन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।"

एसईसीएल की यह उपलब्धि न केवल कंपनी की परिचालन दक्षता और सुरक्षा संस्कृति को रेखांकित करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और उत्तरदायी खनन के प्रति उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है। कोल इंडिया लिमिटेड की अग्रणी अनुषंगी कंपनी के रूप में एसईसीएल आधुनिक तकनीक, नवाचार और श्रेष्ठ खनन प्रथाओं के माध्यम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने तथा सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है।

जनसम्पर्क अधिकारी
एसईसीएल बिलासपुर
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चिरमिरी के युवा कांग्रेस नेता राहुल मलिक संगठन में निभा रहे सक्रिय भूमिका चिरमिरी

चिरमिरी के युवा कांग्रेस नेता राहुल मलिक संगठन में निभा रहे सक्रिय भूमिका चिरमिरी

एमसीबी)। चिरमिरी के युवा कांग्रेस नेता राहुल मलिक संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका जन्म 3 जनवरी 1994 को चिरमिरी में हुआ। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक गतिविधियों एवं युवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं।

राहुल मलिक ने अपनी राजनीतिक यात्रा एनएसयूआई (NSUI) से शुरू की। संगठन में उन्होंने चिरमिरी ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद कांग्रेस संगठन में उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली।

वर्तमान में राहुल मलिक ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। संगठन से जुड़े लोगों के अनुसार, वे युवाओं को संगठन से जोड़ने और पार्टी की गतिविधियों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

राहुल मलिक का कहना है कि उनका उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं की समस्याओं को संगठन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना तथा सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाना है।

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भिलाई स्टील प्लांट ने उन्नत औद्योगिक हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया इंजीनियरों और रखरखाव कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने की पहल

भिलाई स्टील प्लांट ने उन्नत औद्योगिक हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया इंजीनियरों और रखरखाव कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने की पहल

 सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत संचालित एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग के सहयोग से तीन दिवसीय 'एडवांस्ड इंडस्ट्रियल हाइड्रॉलिक्स' प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संयंत्र के अभियंताओं एवं अनुरक्षण कार्मिकों की तकनीकी दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही, उन्हें आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों, अत्याधुनिक अनुरक्षण तकनीकों और प्रभावी समस्या-निवारण (ट्रबलशूटिंग) पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना भी इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों के संचालन, अनुरक्षण एवं समस्या-विश्लेषण से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक, दोनों प्रकार का गहन प्रशिक्षण दिया गया। कक्षा आधारित तकनीकी सत्रों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने का अमूल्य व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। यह अनूठा अनुभव उन्हें आधुनिक हाइड्रॉलिक अनुप्रयोगों की बेहतर समझ विकसित करने, कार्यस्थल पर त्वरित समस्या-समाधान क्षमता बढ़ाने तथा संयंत्र के उपकरणों की विश्वसनीयता एवं परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में औद्योगिक सुरक्षा, व्यवस्थित अनुरक्षण प्रणाली तथा तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों को अपनाने के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य व्यवहार, निवारक अनुरक्षण (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) तथा नवीनतम औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के सहयोग से नियमित रूप से ऐसे उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे संयंत्र के ज्ञानार्जन एवं विकास तंत्र को निरंतर सुदृढ़ और अद्यतन बनाने में मदद मिल रही है।

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भिलाई स्टील प्लांट ने उन्नत औद्योगिक हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया इंजीनियरों और रखरखाव कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने की पहल

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 सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत संचालित एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग के सहयोग से तीन दिवसीय 'एडवांस्ड इंडस्ट्रियल हाइड्रॉलिक्स' प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संयंत्र के अभियंताओं एवं अनुरक्षण कार्मिकों की तकनीकी दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही, उन्हें आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों, अत्याधुनिक अनुरक्षण तकनीकों और प्रभावी समस्या-निवारण (ट्रबलशूटिंग) पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना भी इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों के संचालन, अनुरक्षण एवं समस्या-विश्लेषण से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक, दोनों प्रकार का गहन प्रशिक्षण दिया गया। कक्षा आधारित तकनीकी सत्रों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने का अमूल्य व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। यह अनूठा अनुभव उन्हें आधुनिक हाइड्रॉलिक अनुप्रयोगों की बेहतर समझ विकसित करने, कार्यस्थल पर त्वरित समस्या-समाधान क्षमता बढ़ाने तथा संयंत्र के उपकरणों की विश्वसनीयता एवं परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में औद्योगिक सुरक्षा, व्यवस्थित अनुरक्षण प्रणाली तथा तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों को अपनाने के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य व्यवहार, निवारक अनुरक्षण (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) तथा नवीनतम औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के सहयोग से नियमित रूप से ऐसे उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे संयंत्र के ज्ञानार्जन एवं विकास तंत्र को निरंतर सुदृढ़ और अद्यतन बनाने में मदद मिल रही है।

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