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भूमि संसाधन विभाग ने पंजीकरण विधेयक 2025 के मसौदे पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने आधुनिक, ऑनलाइन, कागज रहित और नागरिक केंद्रित पंजीकरण प्रणाली के साथ इसे संरेखित करने के लिए ‘पंजीकरण विधेयक 2025’ का मसौदा तैयार किया है। अधिनियमित होने के बाद, यह विधेयक संविधान-पूर्व पंजीकरण अधिनियम, 1908 का स्थान लेगा।
पंजीकरण अधिनियम, 1908 ने एक सदी से भी अधिक समय से भारत में दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली की आधारशिला के रूप में कार्य किया है। यह अचल संपत्ति और अन्य लेन-देन को प्रभावित करने वाले दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए एक कानूनी आधार प्रदान करता है। समय के साथ, सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के लेन-देन में पंजीकृत दस्तावेजों की भूमिका काफी बढ़ गई है, जो अक्सर वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी निर्णय लेने का आधार बनते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि पंजीकरण की प्रक्रिया मजबूत, विश्वसनीय और विकसित सामाजिक और तकनीकी विकास के अनुकूल होने में सक्षम हो।
हाल के वर्षों में, प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग, सामाजिक-आर्थिक प्रथाओं के विकास और उचित परिश्रम, सेवा वितरण और कानूनी निर्णय के लिए पंजीकृत दस्तावेजों पर बढ़ती निर्भरता ने एक दूरदर्शी पंजीकरण ढांचा बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले से ही मौजूदा 1908 अधिनियम के तहत ऑनलाइन दस्तावेज़ जमा करने और डिजिटल पहचान सत्यापन जैसे नवाचारों की शुरुआत की है। इसके अलावा, पंजीकरण अधिकारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से चित्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि वे लागू कानून के अनुरूप पंजीकरण प्रक्रिया की अखंडता और विश्वसनीयता को बनाए रख सकें। इन प्रगति के आधार पर, अब पूरे देश में सुरक्षित, कुशल और नागरिक-केंद्रित पंजीकरण प्रथाओं का समर्थन करने के लिए एक सामंजस्यपूर्ण और सक्षम विधायी ढांचा प्रदान करने की आवश्यकता है। पंजीकरण विधेयक, 2025 को इस दृष्टि को साकार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
पूर्व-विधायी परामर्श प्रक्रिया के एक भाग के रूप में, ‘पंजीकरण विधेयक, 2025’ का मसौदा भूमि संसाधन विभाग की वेबसाइट पर https://dolr.gov.in/hi/ पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि 30 दिनों की अवधि के भीतर (दिनांक 25.06.2025 को या उससे पूर्व) निर्धारित प्रपत्र में जनता से सुझाव आमंत्रित किए जा सकें।
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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत आतंक के सामने नहीं झुकेगा और इस कायराना आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


श्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पहलगाम के आतंकी हमले में अपनों को खोने का दर्द हर भारतीय को है, इस दुःख को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले के घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों से घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की।


श्री शाह ने अस्पताल जाकर आतंकी हमले में घायल हुए लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया
दिन विशेष देश की रक्षा के लिए समर्पित है 15 जनवरी थल सेना दिवस
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थल सेना का इतिहास
भारतीय आर्मी का गठन ईस्ट इंडिया कंपनी ने साल 1776 में कोलकाता में किया था। इस सेना पर देश की आजादी से पहले ब्रिटिश कमांडर का अधिकार था। साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तब भी भारतीय सेना का अध्यक्ष ब्रिटिश मूल का ही होता था। 2 साल बाद यानी साल 1949 में आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर ने अपना पद छोड़ दिया। 1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना को नये बने राष्ट्र भारत और इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान की सेवा करने के लिये 2 भागों में बाँट दिया गया। अधिकतर इकाइयों को भारत के पास रखा गया। चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानांतरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया।
15 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं सेना दिवस
आधुनिक भारतीय सेना की शुरुआत 1 अप्रैल 1895 को हुई। उस वक्त इसे भारत को गुलाम बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्रेसिडेंसी आर्मी के रूप में खड़ा किया था। जिसे बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना के नाम से जाना गया। आखिरकार लंबे संघर्ष के बाद देश के आजाद होने के बाद यह भारतीय सेना कही जाने लगी। लेकिन 15 जनवरी 1949 तक इसके कमांडर ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल फ्रांसिस बुचर थे। आजादी के बाद 15 जनवरी 1949 को हमें पहले भारतीय सेना प्रमुख मिले. जिनका नाम फील्ड मार्शल केएम करियप्पा था। इसलिए 15 जनवरी को ही भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया।
सेना दिवस पर क्या होता है
भारतीय सेना दिवस के अवसर पर देश भर में विभिन्न समारोह आयोजित किए जाते हैं। जिनमें सैन्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सेना के जवानों को सम्मानित करने के कार्यक्रम शामिल हैं। सेना दिवस के मुख्य समारोह का आयोजन दिल्ली के छावनी के करिअप्पा परेड ग्राउंड में होता है, जहां भारतीय सेना के जवान अपनी बहादुरी और अनुशासन का प्रदर्शन करते हैं।
भारतीय सेना के बारे में कुछ रोचक तथ्य
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1.3 मिलियन भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सेना के लिए लड़ाई लड़ी थी, जिसमें से 74,000 से अधिक सैनिक शहीद हो गए। नई दिल्ली में स्थित इंडिया गेट इन बहादुर सैनिकों की याद में बनाया गया है।भारतीय सेना का इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध है, और इसमें कई महत्वपूर्ण घटनाएं और युद्ध शामिल हैं। भारतीय सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना है। जिसमें 12 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक और 9 लाख आरक्षित सैनिक शामिल हैं। भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर को नियंत्रित करती है। जो समुद्र तल से 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैप्यह गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर भी है। 61वीं कैवेलरी रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे बड़ी घुड़सवार इकाइयों में से एक है और दुनिया की आखिरी सक्रिय और गैर-यंत्रीकृत घुड़सवार इकाइयों में से भी एक है। अनुशासन और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध भारतीय सेना विश्व में चौथे स्थान पर आती है। जो केवल अमेरिका, रूस और चीन के बाद है, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है, और वर्तमान में 6,000 से अधिक भारतीय सैनिक विभिन्न मिशनों में तैनात हैं। 2013 में उत्तर भारत में आई भीषण बाढ़ के दौरान भारतीय सेना ने "ऑपरेशन राहत" में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस मिशन में भारतीय वायुसेना ने 19,600 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट किया। जबकि भारतीय सेना ने 10,500 से अधिक लोगों को सड़कों और हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाया। 1982 में, भारतीय सेना ने लद्दाख में विश्व का सबसे ऊंचा पुल दाबेली ब्रिज बनाया। यह पुल समुद्र तल से 18,739 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी लंबाई 98 फीट है।
भारतीय सेना के पास कुशल डॉग स्क्वॉड भी है, जिसमें जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और बेल्जियन मेलिनॉय जैसी नस्लें शामिल हैं। ये प्रशिक्षित कुत्ते विस्फोटक खोजने, ट्रैकिंग और बचाव कार्यों जैसे अभियानों में सेना की महत्वपूर्ण सहायता करते हैं। भारतीय सेना न केवल अपनी बहादुरी के लिए जानी जाती है, बल्कि उसके रोचक इतिहास और शानदार परंपराओं के लिए भी सम्मिलित है। गोरखा रेजीमेंट गोरखा सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित कई अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया है।
देश के लिए थल सेना का योगदान
भारतीय थल सेना ने देश की रक्षा के लिए कई युद्ध लड़े हैं और हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। सेना ने प्राकृतिक आपदाओं के समय भी लोगों की मदद की है। थल सेना दिवस एक ऐसा अवसर है। जब हम सभी एक साथ आकर अपने देश के वीर सैनिकों को धन्यवाद देते हैं।
सुरक्षा और रक्षा में योगदान
सीमा सुरक्षा थल सेना देश की सीमाओं की रक्षा करती है और विदेशी हमलों से बचाव करती है। आंतरिक सुरक्षा थल सेना आंतरिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जैसे कि आतंकवाद विरोधी अभियान और नक्सलवाद विरोधी अभियान। प्राकृतिक आपदा में सहायता: थल सेना प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, भूकंप और तूफान में राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान
राष्ट्र निर्माण थल सेना ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में मदद की। विकास कार्यों में सहायता: थल सेना विकास कार्यों में भी सहायता प्रदान करती है, जैसे कि सड़क निर्माण, पुल निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास में। सामाजिक कार्यों में सहायता थल सेना सामाजिक कार्यों में भी सहायता प्रदान करती है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम आदि।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतियोगियों के चयन हेतु समिति गठित
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल के माध्यम से करेंगे हितग्राहियों से संवाद अब 10 मार्च को महतारी वन्दन योजना से मिलेगी प्रथम क़िस्त की राशि
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को 300 रुपये की लक्षित सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी दी
10.27 करोड़ से अधिक पीएमयूवाई लाभार्थियों को सीधे उनके खातों में सब्सिडी मिलेगी
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल खर्च 12,000 करोड़ रुपये होगा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान एक साल में 12 रिफिल तक प्रदान की जाने वाली 300 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर (और 5 किलोग्राम सिलेंडर के लिए उचित अनुपात में प्रो रेटेड) की लक्षित सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी प्रदान की है। 1 मार्च, 2024 तक 10.27 करोड़ से अधिक पीएमयूवाई लाभार्थी हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल खर्च 12,000 करोड़ रुपये होगा। सब्सिडी सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है।
ग्रामीण और वंचित गरीब परिवारों को खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन-तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को जमा मुक्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के लिए मई 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की।
भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। पीएमयूवाई लाभार्थियों को एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव के प्रभाव से बचाने और पीएमयूवाई उपभोक्ताओं द्वारा एलपीजी का निरंतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी को और अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार ने पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए मई 2022 में एक साल में 12 रिफिल तक प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर (और 5 किलोग्राम के कनेक्शनों के लिए उचित अनुपात में प्रो रेटेड) के लिए 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की। अक्टूबर 2023 में, सरकार ने एक साल में 12 रिफिल तक प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर (और 5 किलोग्राम के कनेक्शनों के लिए उचित अनुपात में प्रो रेटेड) पर लक्षित सब्सिडी बढ़ाकर 300 रुपये कर दी। 01.02.2024 तक, पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी की प्रभावी कीमत 603 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर (दिल्ली) है।
पीएमयूवाई उपभोक्ताओं की औसत एलपीजी खपत 2019-20 में 3.01 रिफिल से 29 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 के लिए आनुपातिक रूप से 3.87 रिफिल (जनवरी 2024 तक) हो गई है। सभी पीएमयूवाई लाभार्थी इस लक्षित सब्सिडी के पात्र हैं
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय लोकसंपर्क कार्यक्रम में 'दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल' लॉन्च किया
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी द्वारा 28 नवंबर, 2023 को विज्ञान भवन में महिला एवं बाल विकास और आयुष राज्य मंत्री डॉ. मुंजपारा महेन्द्रभाई, महिला एवं बाल विकास सचिव श्री इंदीवर पांडे, डीईपीडब्ल्यूडी के सचिव श्री राजेश अग्रवाल और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार डॉ. के.के. त्रिपाठी की उपस्थिति में आयोजित एक राष्ट्रीय लोकसम्पर्क कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिव्यांग बच्चों के बेहतर कल्याण के लिए समग्र पहुंच को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए किया गया था।इस कार्यक्रम में देश भर से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) जैसे प्रमुख संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल को समर्थन देने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को धन्यवाद दिया। श्रीमती ईरानी ने कहा कि वर्तमान में 3 से 6 वर्ष की आयु के 4.37 करोड़ बच्चों को हर दिन पका हुआ गर्म भोजन और ईसीसीई की सहायता दी जा रही है, 0 से 3 वर्ष की आयु के 4.5 करोड़ बच्चों को घर ले जाने के लिए राशन और उनके घरों के दौरों तथा 0-6 वर्ष आयु वर्ग के 8 करोड़ से अधिक बच्चों को प्रारंभिक शिशु विकास को बढ़ाने के लिए वृद्धि निगरानी और स्वास्थ्य प्रणाली में रेफरल की सहायता प्रदान की जा रही है। श्रीमती ईरानी ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले 4 महीनों में बच्चों के लिए 16 करोड़ गृह दौरे किए गए हैं।
प्रधानमंत्री 30 नवंबर को विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 30 नवंबर को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे। विकसित भारत संकल्प यात्रा पूरे देश में सरकार की प्रमुख योजनाओं की संपूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से सभी लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे।
महिलाओं के नेतृत्व में विकास सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री का निरंतर प्रयास रहा है। इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री महिला किसान ड्रोन केंद्र का शुभारंभ करेंगे। यह केन्द्र महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करेगा ताकि वे इस तकनीक का उपयोग आजीविका सहायता के लिए कर सकें। अगले तीन वर्षों के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराए जाएंगे। महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और उपयोग करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह पहल कृषि में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करेगी।
स्वास्थ्य देखभाल को किफायती और आसानी से सुलभ बनाना प्रधानमंत्री के स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण की आधारशिला रही है। इस दिशा में एक प्रमुख पहल किफायती कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र की स्थापना रही है। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री एम्स, देवघर में ऐतिहासिक 10,000वें जन औषधि केंद्र को समर्पित करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री देश में जन औषधि केंद्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने के कार्यक्रम की भी शुरुआत करेंगे।
महिला एसएचजी को ड्रोन उपलब्ध कराने और जन औषधि केंद्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने की इन दोनों पहलों की घोषणा प्रधानमंत्री ने इस साल की शुरुआत में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान की थी। 30 नवंबर का यह कार्यक्रम इन वादों को पूरा करने का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति 1 दिसंबर 2023 को केरल के तिरुवनंतपुरम का दौरा करेंगे
उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ 01 दिसंबर, 2023 को केरल के तिरुवनंतपुरम का दौरा करेंगे।
राज्य के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान श्री धनखड़ शहर में 5वें वैश्विक आयुर्वेद महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।
जल दिवाली - "महिलाओं के लिए पानी, पानी के लिए महिलाएं अभियान" शुरू किया गया
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय अपनी प्रमुख योजना - अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (एएमआरयूटी) के तहत एक प्रगतिशील पहल "महिलाओं के लिए पानी, पानी के लिए महिलाएं अभियान" को शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस योजना में मंत्रालय के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) की भी भागीदारी है। ओडिशा अर्बन एकेडमी इसकी ‘नॉलेज पार्टनर’ है। इस "जल दिवाली" अभियान का जश्न 7 नवंबर, 2023 से शुरू होकर 9 नवंबर, 2023 तक जारी रहेगा।इस अभियान का उद्देश्य जल शासन प्रणाली में महिलाओं को शामिल करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। उन्हें अपने-अपने शहरों में जल उपचार संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) के दौरे के माध्यम से जल उपचार प्रक्रियाओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान की जाएगी। संयंत्रों के दौरों से उन्हें घरों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने में प्रयुक्त महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी उपलब्ध होगी जो यह सुनिश्चित करती है कि नागरिकों को अपेक्षित गुणवत्ता का जल उपलब्ध हो। इस अभियान का व्यापक लक्ष्य जल बुनियादी ढांचे के प्रति महिलाओं में स्वामित्व और अपनेपन की भावना को विकसित करना है।
भारत में 3,000 से अधिक जल उपचार संयंत्र हैं, जिनकी निर्मित जल उपचार क्षमता 65,000 एमएलडी से अधिक और परिचालन क्षमता 55,000 एमएलडी से अधिक है। इस अभियान के दौरान, महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) 550 से अधिक जल उपचार संयंत्रों का दौरा करेंगे, जिनकी संयुक्त परिचालन क्षमता 20,000 एमएलडी (देश की कुल क्षमता की 35 प्रतिशत से अधिक) से अधिक है।
घरेलू जल प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती हैं। महिलाओं को जल उपचार और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी प्रदान करके महिलाओं को सशक्त बनाकर, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय का लक्ष्य उनके घरों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बारे में उनकी क्षमता को बढ़ाना है। इस अभियान का उद्देश्य पारंपरिक रूप से पुरुषों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में समावेशिता और विविधता को बढ़ावा देकर लैंगिक समानता के मुद्दों को हल करना है।
"महिलाओं के लिए जल, जल के लिए महिलाएं अभियान", ‘’जल दिवाली" के पहले चरण में राष्ट्रव्यापी रूप से 15,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह महिलाओं की अपेक्षित भागीदारी के साथ सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (आदर्श आचार संहिता के तहत 5 राज्यों को छोड़कर) की भागीदारी रहेगी। इस अभियान के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं :
स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली
बीते वर्षों में हमारे त्योहारों के साथ देश का एक नया संकल्प भी जुड़ा है। आप सब जानते हैं, ये ‘वोकल फॉर लोकल’ का संकल्प है। पॉलिथीन का हानिकारक कूड़ा स्वच्छता का पालन करने वाले हमारे त्योहारों की भावना के विपरीत है। इसलिए, हमें केवल स्थानीय रूप से निर्मित गैर-प्लास्टिक बैग का ही उपयोग करना चाहिए। हमारा कर्तव्य है कि हम त्योहारों के अवसर पर इन्हें बढ़ावा दें और स्वच्छता के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी ध्यान रखें।” – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
दिवाली का त्योहार अब बेहद नजदीक है और हर-घर इस पर्व की खुशियों से सराबोर हो रहा है। दीवाली से पहले ही लोग घरों में स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में व्यस्त हो जाते हैं, इसलिए स्वच्छता हर घर के केंद्र में आ जाती है। दिवाली के दौरान साफ-सफाई केवल घरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि सभी समुदाय यह सुनिश्चित करने के लिए एक साथ आगे आते हैं ताकि उत्सव का जश्न मनाने से पहले हमारी सड़कें, बाजार और पड़ोस साफ-सुथरे हो सकें। पुरानी और अप्रयुक्त वस्तुओं को नई वस्तुओं से बदलना भी इस त्योहार का एक पारंपरिक हिस्सा रहा है। ऐसे में जब पूरे देश में उत्सव का माहौल है, तो उसी के अनुरूप आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के तत्वावधान में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 ने 6 से 12 नवंबर 2023 तक स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छ भारत की यात्रा और पर्यावरण के लिए जीवनशैली (मिशन LiFE) के सिद्धांतों के साथ-साथ दिवाली के सांस्कृतिक महत्व को उजागर करना है।मिशन LiFE के मूल सिद्धांतों को दोहराते हुए, जिसका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण करना है, जीवनशैली में ‘प्रो-प्लैनेट’ व्यवहार परिवर्तन लाना है, स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली की अवधारणा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव के महत्व पर जोर देती है। इस पहल का उद्देश्य सभी लोगों को स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों का चुनाव करने, सिंगल-यूज प्लास्टिक से मुक्त दिवाली मनाने समेत दिवाली से पहले व बाद में स्वच्छता को प्राथमिकता देने के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रेरित करके पर्यावरण एवं समुदायों के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। ऐसा करके, यह अभियान त्योहार के प्रति स्थायी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता वाले दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की पहल है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह बुधवार, 08 नवंबर, 2023 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) द्वारा जैविक उत्पाद को बढ़ावा देने पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करेंगे
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह बुधवार, 08 नवंबर, 2023 को आईसीएआर कन्वेंशन सेंटर, पूसा, नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) द्वारा जैविक उत्पाद को बढ़ावा देने पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर श्री अमित शाह NCOL के logo, website और brochure का शुभारंभ और एनसीओएल सदस्यों को सदस्यता प्रमाण पत्र भी वितरित करेंगे। एक-दिवसीय संगोष्ठी के दौरान NCOL के उद्देश्यों, जैविक उत्पादों के महत्व के साथ-साथ छोटे और सीमांत किसानों के उत्थान में सहकारी समितियों की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "सहकार से समृद्धि" के विज़न के अनुरूप, भारत को जैविक उत्पादों में विश्व में अग्रणी बनाने के लिए NCOL की स्थापना एक राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए पिछले 27 महीनों में 54 महत्वपूर्ण पहल की हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, "मेक इन इंडिया", "आत्मनिर्भर भारत" और "लोकल से ग्लोबल" की दिशा में जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति की स्थापना एक महत्वपूर्ण क़दम है।
NCOL का लक्ष्य जैविक उत्पादक किसानों और उत्पादक संगठनों को बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करते हुए उपज पर मुनाफा बढ़ाना है। एक मजबूत ब्रांड के तहत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलने से NCOL के सदस्यों को उनकी जैविक उपज के लिए बेहतर रिटर्न मिल सकेगा। NCOL 'Whole of Government Approach' के तहत, भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से देशभर में विभिन्न सहकारी समितियों और संबंधित संस्थानों द्वारा उत्पादित जैविक उत्पादों की संपूर्ण Supply Chain का प्रबंधन करके एक Umbrella संगठन के रूप में कार्य करेगा। यह सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित जैविक उत्पादों के collection, branding और marketing का कार्य और इन्हें बढ़ावा देगा। कोई भी सहकारी समिति या व्यक्तियों की संस्था जो केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित हो NCOL का सदस्य बन सकती है। अब तक लगभग 2000 सहकारी समितियाँ NCOL की सदस्य बन चुकी हैं या सदस्यता के लिए आवेदन कर चुकी हैं |
NCOL के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न गतिविधियों, जिनमें शोध एवं विकास (R&D) और एक ज्ञान संग्रह केंद्र स्थापित करना शामिल हैं, के तहत कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, NCOL जैविक उत्पादों के उत्पादन में शामिल सहकारी क्षेत्र और संबंधित संस्थाओं को सहायता भी प्रदान करेगा, जिसमें वित्तपोषण, क्षमता निर्माण, तकनीकी मार्गदर्शन, मार्केट इंटेलिजेंस सिस्टम की स्थापना और रखरखाव आदि शामिल हैं।
संगोष्ठी के दौरान जैविक उत्पादन - समय की आवश्यकता, जैविक उत्पादों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया और मानदंड, जैविक प्रमाणन प्रयोगशालाओं का महत्व आदि विषयों पर तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगे। संगोष्ठी में NCOL के सदस्यों, भारत सरकार/राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के अधिकारियों, बहु-राज्य सहकारी समितियाँ / वित्तीय संस्थाएं /सहकारी संघ/जिला सहकारी संघ/जैविक प्रमाणन निकाय और परीक्षण प्रयोगशालाएं, जैविक क्षेत्र के विशेषज्ञ और देश भर से अन्य जैविक उत्पादक हितधारक सहित 1000 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे और बड़ी संख्या में प्रतिभागी ऑनलाइन भी जुड़ेंगे|
उपराष्ट्रपति के आमंत्रण पर नया संसद भवन देखने दिल्ली पहुंचे सैनिक स्कूल, झुंझुनूं के छात्र
उपराष्ट्रपति ने आज संसद भवन देखने आये सैनिक स्कूल, झुंझुनूं के छात्रों से संसदीय सौध में संवाद किया। ज्ञात रहे कि 27 अगस्त को उपराष्ट्रपति राजस्थान के दौरे पर गए थे जहां उन्होंने सैनिक स्कूल झुंझुनू के छात्रों को संबोधित किया था। इस अवसर पर श्री धनखड़ ने छात्रों को संसद के नए भवन के भ्रमण के लिए आमंत्रित किया था।
उपराष्ट्रपति की इस पहल पर कल 5 नवंबर को सैनिक स्कूल, झुंझुनूं के बीस छात्रों का एक समूह तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचा। 5 से 7 नवंबर तक ये छात्र दिल्ली में रुकेंगे और राज्य सभा सचिवालय द्वारा उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है।
कल दिल्ली पहुचने पर इन छात्रों ने प्रधानमंत्री संग्रहालय देखा था, और आज उन्हें संसद के नए और पुराने दोनों भवनों का भ्रमण कराया गया। नयी संसद की भव्यता और सुंदरता देख कर युवा छात्र दल विस्मय से भर गया। कल सात नवंबर को इन छात्रों का इंडिया गेट, राष्ट्रीय समर स्मारक (वार मेमोरियल), महात्मा गांधी की समाधि राजघाट और राष्ट्रपति भवन के भ्रमण का भी कार्यक्रम है।
आज उपराष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान छात्रों ने अपने अनुभव साझा किये। उपराष्ट्रपति ने उनसे कहा कि आज भारत जिस गति के साथ आगे बढ़ रहा है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। एक समय था जब हमें दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं (fragile five) में गिना जाता था और आज हम दुनिया की पांचवी सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा इस विकास यात्रा के दौरान हमने बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ा है और अब हम जर्मनी और जापान को भी पीछे छोड़ने वाले हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत आज एक चमकता हुआ सितारा है।
"राष्ट्रीय प्रसारण नीति" के निर्माण के क्रम में इनपुट के लिए जारी ट्राई पूर्व-परामर्श पत्र पर टिप्पणियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि का विस्तार
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 21 सितंबर 2023 को "राष्ट्रीय प्रसारण नीति" के निर्माण के क्रम में इनपुट के लिए एक पूर्व-परामर्श पत्र जारी किया था। पूर्व-परामर्श पत्र में उठाए गए मुद्दों पर हितधारकों से टिप्पणियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि प्रारंभ में 10 अक्टूबर 2023 निर्धारित की गई थी।
टिप्पणियां जमा करने का समय बढ़ाने के लिए हितधारकों से प्राप्त अनुरोधों के बाद, लिखित टिप्पणियां प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2023 तक बढ़ा दी गईं थी।
अब, उपर्युक्त पूर्व-परामर्श पत्र पर टिप्पणियां जमा करने के समय बढ़ाने के लिए हितधारकों से पुन: प्राप्त अनुरोधों के बाद टिप्पणियां प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को 7 नवंबर 2023 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। टिप्पणियां जमा करने के समय में और विस्तार के किसी भी अन्य अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।
टिप्पणियां: ईमेल आईडी advbcs-2[at]trai[dot]gov[dot]in और jtadvbcs-1[at]trai[dot]gov[dot]in पर इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजी जा सकती हैं। किसी भी स्पष्टीकरण/जानकारी के लिए, दूरभाष संख्या +91-11-23237922 पर श्री अनिल भारद्वाज, महानिदेशक ट्राई सीएसआर और सलाहकार (बी एंड सीएस) से संपर्क किया जा सकता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री मेरी माटी मेरा देश अभियान की अमृत कलश यात्रा के समापन कार्यक्रम में भाग लेंगे
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 31 अक्टूबर 2023 को शाम लगभग 5 बजे कर्तव्य पथ पर मेरी माटी मेरा देश अभियान की अमृत कलश यात्रा के समापन पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम आजादी का अमृत महोत्सव का समापन समारोह भी होगा।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री अमृत वाटिका और अमृत महोत्सव स्मारक का उद्घाटन करेंगे। वे देशभर से कार्यक्रम में शामिल होने वाले हजारों अमृत कलश यात्रियों को संबोधित करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री देश के युवाओं के लिए 'मेरा युवा भारत' (माय भारत) प्लेटफॉर्म का शुभारंभ भी करेंगे।
मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश अभियान उन वीरों और वीरांगनाओं को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। जन भागीदारी की भावना के साथ, इस अभियान में देश भर के पंचायत/गांव, प्रखंड, शहरी स्थानीय निकाय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कई गतिविधियां और समारोह शामिल थे। गतिविधियों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी बहादुर व्यक्तियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करने के लिए शिलाफलकम (स्मारक) का निर्माण; शिलाफलकम में लोगों द्वारा 'पंच प्राण' प्रतिज्ञा लेना; स्वदेशी प्रजातियों के पौधे लगाना और 'अमृत वाटिका' (वसुधा वंदन) विकसित करना तथा स्वतंत्रता सेनानियों और शहीद स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों (वीरों का वंदन) के सम्मान के लिए अभिनन्दन समारोह शामिल थे।
इस अभियान को भारी सफलता मिली; 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 2.3 लाख से अधिक शिलाफलकमों का निर्माण हुआ; लगभग 4 करोड़ पंच प्राण प्रतिज्ञा सेल्फी अपलोड की गईं; देशभर में 2 लाख से अधिक 'वीरों का वंदन' कार्यक्रमों का आयोजन हुआ; 2.36 करोड़ से अधिक स्वदेशी पौधे लगाए गए और देशभर में वसुधा वंदन थीम के तहत 2.63 लाख अमृत वाटिकाएं विकसित कीं गईं।
'मेरी माटी मेरा देश' अभियान में अमृत कलश यात्रा भी शामिल है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के 6 लाख से अधिक गांवों और शहरी क्षेत्रों के वार्डों से मिट्टी और चावल का संग्रह किया गया है। गांवों की मिट्टी को प्रखंड स्तर पर मिश्रित किया जाता है और फिर इसे राज्य की राजधानी तक पहुंचाया जाता है। हजारों अमृत कलश यात्रियों के साथ राज्य स्तर से मिट्टी राष्ट्रीय राजधानी भेजी जाएगी।
30 अक्टूबर, 2023 को, अमृत कलश यात्रा के अंतर्गत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रखंड और शहरी स्थानीय निकाय 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना के तहत अपने कलश से मिट्टी को एक विशाल अमृत कलश में मिश्रित करेंगे। 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री देशभर से कार्यक्रम में शामिल होने वाले हजारों अमृत कलश यात्रियों को संबोधित करेंगे।
अमृत वाटिका और अमृत महोत्सव स्मारक, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा, देश के प्रत्येक भाग से एकत्र की गई मिट्टी से कर्तव्य पथ पर विकसित व निर्मित किया गया है।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने 10 करोड़ टन कोयला डिस्पैच के लक्ष्य को हासिल किया
कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 100 मिलियन टन (एमटी) कोयला डिस्पैच के लक्ष्य को हासिल किया है। छत्तीसगढ़ स्थित कंपनी द्वारा अपनी स्थापना के बाद सबसे पहले 100 मीट्रिक टन कोयला डिस्पैच के लक्ष्य को हासिल किया है। पिछले साल, एसईसीएल ने इसी अवधि में लगभग 85 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच किया था और इस प्रकार इस वित्तीय वर्ष के दौरान कंपनी ने 17.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
कुल कोयले के डिस्पैच में से बिजली क्षेत्र को 80 प्रतिशत से अधिक डिस्पैच किया गया क्योंकि कंपनी ने देश के बिजली संयंत्रों को लगभग 81 मिलियन टन कोयला डिस्पैच किया। आगामी त्योहारों को ध्यान में रखते हुए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जब बिजली की मांग सबसे अधिक रहेगी।
कोरबा जिले में स्थित एसईसीएल की मेगा परियोजनाओं गेवरा, दीपका, और कुसमुंडा ने 100 मिलियन टन कोयले के कुल डिस्पैच में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश की सबसे बड़ी कोयला खदान गेवरा ने 30.3 मिलियन टन कोयले का योगदान किया है जबकि दीपका और कुसमुंडा ने क्रमश: 19.1 मिलियन टन और 25.1 मिलियन टन कोयले का योगदान किया है। कुल डिस्पैच में सभी तीन मेगा परियोजनाओं की कुल हिस्सेदारी 74 प्रतिशत से अधिक रही है।
इसके अलावा एसईसीएल के कोरिया रीवा कोलफील्ड, जहां अधिकांश पुरानी और भूमिगत खदानें स्थित हैं। इन्होंने भी पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत कोयला डिस्पैच में वृद्धि करके उल्लेखनीय योगदान दिया है।
एसईसीएल, कोल इंडिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक सहायक कंपनियों में से एक है। कंपनी ने 167 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया (जो उसके इतिहास में सबसे अधिक है) और वित्तीय वर्ष 22-23 में सीआईएल के कुल कोयला उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब एक-चौथाई रही। इस साल कंपनी ने 197 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
पुरस्कार समारोह - सरदार के एम पणिक्कर ‘एनआईबी’ निबंध प्रतियोगिता
नौसेना स्टाफ के प्रमुख (सीएनएस) एडमिरल आर हरि कुमार ने अपने कक्ष में एक संक्षिप्त पुरस्कार समारोह के दौरान कमांडर एम अरुण चक्रवर्ती को पहला ‘एनआईबी’ (नेवीज इंटेलेक्चुअल बीकन) पुरस्कार प्रदान किया। कमांडर एम अरुण चक्रवर्ती भारतीय नौसेना के सरदार के एम पणिक्कर ‘एनआईबी’ निबंध प्रतियोगिता के विजेता हैं। इस निबंध प्रतियोगिता को नौसेना समुदाय के बीच पढ़ने, लिखने और सोचने के कौशल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। इस अवसर पर कार्मिक प्रमुख वाईस एडमिरल के स्वामीनाथन और कमोडोर (नौसेना शिक्षा) कमोडोर जी रामबाबू भी उपस्थित थे।
यह पुरस्कार समुद्री रणनीतिक विचारक सरदार के एम पणिक्कर की स्मृति में शुरू किया गया है, जिन्होंने महासागरों और समुद्री मामलों के महत्व के बारे में भारत में समुद्री जागृति/चेतना लाई।
प्रधानमंत्री ने एशियाई पैरा खेलों में अनीता, नारायण कोंगनापल्ले को रजत पदक जीतने पर बधाई दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज हांगझोऊ में आयोजित एशियाई पैरा खेलों की रोइंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर अनीता और नारायण कोंगनापल्ले को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने उनके टीम वर्क और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि ने देश को गर्व से भर दिया है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
"अनीता और नारायण कोंगनापल्ले को रोइंग - पीआर3 मिक्स्ड डबल स्कल्स स्पर्धा में उनके असाधारण रजत पदक के लिए बधाई।
उन्होंने टीम वर्क और समर्पण का शानदार प्रदर्शन किया है! यह उपलब्धि देश को गर्व से भर देती है।”
प्रधानमंत्री ने एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 400 मीटर - टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर दिलीप को बधाई दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज हांगझोऊ में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में पुरुषों की 400 मीटर - टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने पर दिलीप को बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
“पुरुषों की 400 मीटर - टी47 स्पर्धा में शानदार स्वर्ण पदक जीतने पर दिलीप को हार्दिक बधाई!
इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।”
प्रधानमंत्री ने वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर राष्ट्र को शुभकामनाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सामाजिक समानता और सद्भावना से जुड़े महर्षि वाल्मिकी के विचार आज भी समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, अपने संदेशों के माध्यम से वे युगों-युगों तक हमारी सभ्यता और संस्कृति की अमूल्य धरोहर बने रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
“देशवासियों को वाल्मीकि जयंती की अनंत शुभकामनाएं। सामाजिक समानता और सद्भावना से जुड़े उनके अनमोल विचार आज भी भारतीय समाज को सिंचित कर रहे हैं। मानवता के अपने संदेशों के माध्यम से वे युगों-युगों तक हमारी सभ्यता और संस्कृति की अमूल्य धरोहर बने रहेंगे।











