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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-CIFA, भुवनेश्वर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ (VKSA-2025)’ का शुभारंभ किया
मत्स्य पालन भारत की खाद्य सुरक्षा का अभिन्न अंग – श्री शिवराज सिंह चौहानतकनीकों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की आवश्यकता है – श्री शिवराज सिंह किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए मजबूत मत्स्य क्षेत्र विकसित होना चाहिए- श्री चौहान कार्यक्रम में 600 से अधिक किसान एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं
भारतीय कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भुवनेश्वर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय मीठाजल मत्स्य पालन संस्थान (ICAR-CIFA), काउसल्यागंगा में 'विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA-2025)' का विधिवत शुभारंभ किया। यह अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य कृषि एवं मत्स्य पालन क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर एक टिकाऊ और समृद्ध भारत का निर्माण करना है।


अपने उद्घाटन भाषण में श्री चौहान ने VKSA-2025 की दूरदर्शी सोच को रेखांकित करते हुए बताया कि यह अभियान देश के 1.5 करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल तकनीकी प्रचार-प्रसार और क्षमता निर्माण पर केंद्रित है, बल्कि किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें नवाचारों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा। श्री चौहान ने मत्स्य पालन को भारत की खाद्य सुरक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए ICAR-CIFA द्वारा विकसित सभी तकनीकों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो और एक मजबूत मत्स्य क्षेत्र विकसित हो सके।
इस अवसर पर ओडिशा सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि, किसान सशक्तिकरण व ऊर्जा मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव, मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री श्री गोकुलानंद मलिक, एकामरा विधायक श्री बाबू सिंह एवं पिपिली विधायक श्री अश्रित पटनायक उपस्थित रहे।
ICAR की ओर से महानिदेशक एवं सचिव (DARE) डॉ. एम. एल. जाट, उपमहानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डॉ. जे. के. जेना, उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह और ICAR-ATARI कोलकाता के निदेशक डॉ. प्रदीप डे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
डॉ. एम. एल. जाट ने VKSA-2025 को एक परिवर्तनकारी प्री-खरीफ अभियान करार देते हुए कहा कि यह पहल वैज्ञानिक शोध को किसानों की ज़मीनी ज़रूरतों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में 600 से अधिक किसान एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं और वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर कृषि व मत्स्य पालन से संबंधित उन्नत तकनीकों, सतत खेती के तरीकों और एकीकृत दृष्टिकोणों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान, मत्स्य पालन क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में ICAR-CIFA द्वारा विकसित “CIFA Argu VAX–I” नामक एक नवाचारात्मक मछली टीके का लोकार्पण माननीय कृषि मंत्री द्वारा किया गया। यह टीका मछलियों में परजीवी संक्रमण की रोकथाम कर मत्स्यपालकों की आर्थिक हानि को कम करने में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के दौरान एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), खोरधा और ICAR-CIFA द्वारा विकसित उत्पादों और नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन समुदाय की भागीदारी और जमीनी स्तर पर नवाचार की शक्ति को दर्शाता है।
कार्यक्रम का सफल समापन उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों को इस अभियान की शुरुआत को ऐतिहासिक और प्रभावशाली बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
यह अभियान 29 मई से 12 जून 2025 तक देशभर में चलाया जाएगा, जिसका उद्देश्य एक समावेशी, सशक्त और भविष्य-उन्मुख कृषि प्रणाली का निर्माण करना है।
विकसित भारत के लिए विकसित कृषि: पुरी से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया महाभियान का शुभारंभ
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज श्री जगन्नाथ, पुरी में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी व उप-मुख्यमंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव के साथ राष्ट्रव्यापी 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सभी किसान भाई-बहनों से इस ऐतिहासिक अभियान से जुड़ने की अपील की है। 12 जून तक चलने वाले महाभियान में वैज्ञानिकों की टीमों ने गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद शुरू कर दिया है। कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. एम.एल. जाट सहित गणमान्यजन मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह की पहल पर शुरू किए गए इस वृहद अभियान को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य सरकारों तथा कृषि से जुड़ी सभी संस्थाओं के सहयोग से संचालित कर रहा है, जिसमें देशभर के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) एवं कृषि विश्वविद्यालय भी सम्मिलित है। यह अभियान भारतीय कृषि की दिशा व दशा बदलने का मार्ग प्रशस्त करेगा, वहीं वैज्ञानिक नवाचार और जमीनी स्तर की भागीदारी के माध्यम से देश के खाद्य भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। 15 दिवसीय अभियान के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री चौहान लगभग 20 राज्यों की यात्रा करे किसानों व वैज्ञानिकों के साथ संवाद में शामिल होकर उत्साह बढ़ाएंगे।
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार आगे के कृषि अनुसंधान का मार्ग तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें इस मिशन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। श्री चौहान ने सभी राज्यों से अभियान को सफल बनाने की अपील की, साथ ही किसान भाइयों-बहनों से अपील करते हुए कहा कि 29 मई से 12 जून तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने में कोई कसर मत छोड़ना। उन्होंने किसानों से कहा कि वैज्ञानिक आपके गांव में आ रहे हैं, आप समय निकालिए और उनके साथ बैठिए, खेती में नए प्रयोग सीखिए और उत्पादन बढ़ाइए। 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' का मतलब है कि वैज्ञानिक लैब से निकलकर खेत में किसानों के बीच जाएं, गांव में आपके साथ बैठे।
श्री शिवराज सिंह ने वैज्ञानिकों से कहा कि आप किसानों की सेवा करने जा रहे हैं, आपका सौभाग्य है कि गांवों में जाकर किसानों से बात करके उनकी फसल का उत्पादन बढ़ाने का मौका आपको मिल रहा है, इससे बड़ा कोई पुण्य हो नहीं सकता। श्री चौहान ने भगवान जगन्नाथ जी के चरणों में बारंबार प्रणाम करते हुए प्रार्थना की कि इस अभियान पर अपनी कृपा और आर्शीवाद की वर्षा करना।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि देश में अन्न के भंडार भरे रहें, किसानों की आय बढ़े, इसके लिए हम गांव-गांव निकल रहे हैं। वैज्ञानिक अब लैब में नहीं बैठेंगे, बल्कि लैंड तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। किसान जब खेत में बीज बोता है तो वो केवल बीज नहीं बोता, जीवन बोता है। श्री चौहान ने कहा कि 16 हजार वैज्ञानिकों की 2170 टीमें बनाई गई हैं, जो गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगी। हरेक टीम एक दिन में दो गांवों में जाएगी। 15 दिनों तक अभियान के दौरान क्षेत्र की जलवायु, पानी, मिट्टी के पोषक तत्वों व अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए किसानों को सिखाया जाएगा कि उन्हें कौन-सी फसल उगानी चाहिए, कौन-सी किस्म का उपयोग करना चाहिए, उर्वरकों का उपयोग कैसे करना चाहिए आदि। साथ ही, प्राकृतिक खेती और दलहन व तिलहन की खेती के बारे में किसानों से चर्चा की जाएगी। वैज्ञानिक सीधे संवाद के माध्यम से किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करेंगे।
श्री शिवराज सिंह ने कृषि उत्पादन में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि इस साल देश में 3539.59 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न हुआ है, जो पिछले साल से 216.61 लाख मीट्रिक टन ज्यादा है, लेकिन हमें रूकना नहीं है, बल्कि और खाद्यान्न पैदा करना है। भारत केवल भारत की जनता का पेट नहीं भरेगा, हमको दुनिया का फूड बॉस्केट बनना है। अगर उत्पादन बढ़ाना है तो सबसे आवश्यक है अच्छे बीज। श्री चौहान ने ICAR के वैज्ञानिकों को बधाई दी कि वे लैब में निरंतर प्रयोग करके नए बीज तैयार कर रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। कल ही केंद्रीय कैबिनेट ने 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि कृषि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और खेती लाभ का धंधा बनें। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय कृषि और किसान दोनों समृद्ध हुए हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने कहा कि 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' किसानों में आधुनिक तकनीकों व नई बीज किस्मों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भारत सरकार की एक अभूतपूर्व पहल है। इस अभियान के माध्यम से सरकार देश के 700 जिलों के लगभग 1.5 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी और उन्हें नई कृषि तकनीकों के अनुप्रयोग के बारे में जागरूक करेगी। श्री माझी ने कहा कि अभियान के जरिये प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प की दिशा में एक मजबूत अध्याय जोड़ने का प्रयास किया गया है।
श्री चौहान ने इस अवसर पर नए सम्मेलन सभागार का शुभारंभ किया, साथ ही ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ पुरी में 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित तिरंगा यात्रा में सहभागिता की। केवीके, पुरी में अभियान' के शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री तथा उप मुख्यमंत्री के साथ शिवराज सिंह ने पौधारोपण भी किया।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा में एआई पर आधारित कॉन्क्लेव पढ़ाई में समापन भाषण दिया अब वक्त आ गया है कि देश की मानवीय बुद्धिमत्ता एआई क्रांति का नेतृत्व करे श्री धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में सेंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस (सीपीआरजी) द्वारा आयोजित ‘पढ़ाई: शिक्षा में एआई पर सम्मेलन’ के समापन सत्र में समापन भाषण दिया। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष श्री चमू कृष्ण शास्त्री, सीपीआरजी के निदेशक डॉ. रामानंद और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महज़ एक तकनीक नहीं, बल्कि शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाला और नवाचार की प्रेरणा देने वाला कारक है। उन्होंने कहा कि यह सहानुभूति और तकनीक के बीच का एक सेतु है। श्री प्रधान ने ज़ोर देते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि देश की मानव बुद्धिमत्ता, मौजूदा वक्त में एआई क्रांति का नेतृत्व करे। श्री प्रधान ने एआई पर सरकार द्वारा की गई अहम पहलों का भी ज़िक्र किया, जिनमें एआई में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना और भारतीय भाषाओं में एआई का लाभ उठाने और कक्षाओं में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की घोषणा शामिल है, जोकि एक ऐसी पहल है जो चॉकबोर्ड से चिपसेट तक के सफर में तमाम बदलावों को लाने में मददगार साबित हो रही हैं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि स्कूली शिक्षा में एआई को एकीकृत करना अब विकल्प नहीं, बल्कि बेहद ज़रुरी हो गया है। उन्होंने शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों से इन विचारों पर मंथन करने और एआई पर नीतिगत सिफारिशें करने का आह्वान किया।
दो दिनों तक चले इस पढाई कॉन्क्लेव में भारतीय शिक्षा के भविष्य को आकार देने में एआई की भूमिका को लेकर विभिन्न विचार सामने आए। वक्ताओं ने चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह एआई कक्षाओं से परे, सीखने की विचारधारा का विस्तार कर रहा है, उच्च शिक्षा को बदल रहा है और मौजूदा संस्थानों में मुश्किलों को दूर कर रहा है।
कार्यक्रम में शामिल प्रख्यात वक्ताओं में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद, दिल्ली सरकार के गृह, बिजली, शहरी विकास, शिक्षा, उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद, भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी, इंडियाएआई मिशन के सीईओ श्री अभिषेक सिंह, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे, दिल्ली विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. योगेश सिंह, इन्फो एज के सह-संस्थापक श्री संजीव बिकचंदानी और दिल्ली के हिगाशी ऑटिज्म स्कूल की अध्यक्ष डॉ. रश्मि दास भी शामिल थे।
संघ लोक सेवा आयोग ने नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पेश किया
संघ लोक सेवा आयोग पंजीकरण और ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के लिए एक नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल शुरू कर रहा है। यूपीएससी ऑनलाइन आवेदन पोर्टल में चार भाग हैं, जिन्हें होम पेज पर 4 अलग-अलग कार्ड में व्यवस्थित किया गया है, जिनमें से तीन अर्थात् अकाउंट क्रिएशन ,यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन और कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म में ऐसी जानकारी है जो सभी परीक्षाओं के लिए सामान है और उम्मीदवारों द्वारा कभी भी भरी जा सकती है। चौथे भाग यानी एक्जामिनेशन में परीक्षा नोटिस, परीक्षा आवेदन और आवेदन की स्थिति शामिल है। उम्मीदवारों द्वारा किसी परीक्षा की अधिसूचना में दी गई समय अवधि के दौरान केवल परीक्षा से संबंधित जानकारी ही इस भाग में भरी जानी है।
इस व्यवस्था से अभ्यर्थियों को प्रथम तीन भागों को किसी भी समय भरने तथा किसी भी यूपीएससी परीक्षा में आवेदन करने के लिए तैयार रहने की सुविधा मिलेगी, जिससे समय की बचत होगी तथा अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सकेगा।
सभी आवेदकों को https://upsconline.nic.in वेबसाइट का उपयोग करके नए शुरू किए गए पोर्टल पर नए सिरे से आवेदन भरना और अपने दस्तावेज़ अपलोड करना आवश्यक है । पुराना वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) मॉड्यूल अब से लागू नहीं होगा।
आवेदन भरने और दस्तावेज अपलोड करने को अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु विस्तृत निर्देश होम पेज पर तथा सभी प्रोफाइल/मॉड्यूल पर उपलब्ध हैं।
आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे यूनिवर्सल एप्लीकेशन में पहचान दस्तावेज के रूप में अपने आधार कार्ड का उपयोग करें, ताकि पहचान पत्र और अन्य विवरणों का आसान, सरल और निर्बाध सत्यापन तथा प्रमाणीकरण हो सके, जिसके बाद यह सभी परीक्षाओं के लिए एक स्थायी और सामान्य रिकॉर्ड के रूप में कार्य करेगा।
नया आवेदन पोर्टल 28.05.2025 से लॉन्च किया जा रहा है। सीडीएस परीक्षा-II, 2025 और एनडीए और एनए-II, 2025 के लिए आवेदन, 28.05.2025 को अधिसूचित किए जाने वाले हैं। इन्हें नए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किया जाएगा।
सरकार ने किसानों के समर्थन को किया मजबूत संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) और केसीसी बनी कृषि ऋण की आधारशिला
देशभर के किसानों को समर्थन देने के उद्देश्य से, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तवर्ष 2025–26 के लिए संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) को जारी रखने की मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से ₹3 लाख तक के अल्पकालिक फसल ऋणों पर बैंकों को 1.5% वार्षिक ब्याज अनुदान मिलता रहेगा।
इस निर्णय से यह सुनिश्चित होता है कि समय पर पुनर्भुगतान करने वाले किसानों को 3% शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन (PRI) सहित सिर्फ 4% की प्रभावी ब्याज दर पर कृषि ऋण प्राप्त होता रहेगा।
किसानों के लिए क्या लाभ होंगे:
- सस्ता ऋण: किसान सिर्फ 4% वार्षिक ब्याज पर कार्यशील पूंजी प्राप्त कर सकेंगे — जो वैश्विक स्तर पर सबसे कम दरों में से एकहै।
- लचीला ऋण: केसीसी के माध्यम से 5 वर्षों तक रिवॉल्विंग क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध है।
- आपदा में राहत: प्राकृतिक आपदा की स्थिति में एक वर्ष तक ब्याज राहत और गंभीर आपदाओं में 5 वर्षों तक राहत मिलती है।
- छोटे और सीमांत किसानों को लाभ: अब 76% कृषि ऋण खाते छोटे किसानों के पास हैं — यह योजना भारतीय कृषि की रीढ़ को सशक्त बनाती है।
- बिना जमानत ऋण: ₹2 लाख तक के ऋण के लिए कोई जमानत आवश्यक नहीं।
- उत्पादकता में वृद्धि: सरल ऋण उपलब्धता से बेहतर बीज, उर्वरक और उपकरणों का उपयोग संभव, जिससे उपज और आय में वृद्धि होती है।
क्रेडिट वृद्धि दर्शाती है योजना की सफलता:
- KCC के माध्यम से ऋण वितरण ₹4.26 लाख करोड़ (2014) से बढ़कर ₹9.81 लाख करोड़ (2024) हो गया।
- कुल कृषि ऋण प्रवाह ₹7.3 लाख करोड़ से बढ़कर ₹25.49 लाख करोड़ हुआ है।
- संस्थागत ऋण का हिस्सा 75% से अधिक हो गया है, जिससे किसानों की साहूकारों पर निर्भरता घटी है।
- कृषि क्षेत्र के एनपीए 2019 में 8.9% से घटकर 2023 में 7.2% हो गए हैं, जबकि KCC के एनपीए 2021–22 में 12.66% से घटकर 2023–24 में 11.5% हो गए हैं — यह बेहतर ऋण प्रदर्शन और वसूली को दर्शाता है।
पारदर्शिता के लिए डिजिटल सुधार – किसान ऋण पोर्टल (KRP):
सरकार ने किसान ऋण पोर्टल (Kisan Rin Portal - KRP) शुरू किया है, जो ब्याज अनुदान दावों की डिजिटल ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है। इससे वितरण तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनता है, जिससे किसान और बैंक दोनों लाभान्वित होते हैं।
आगे की दिशा:
सरकार KCC की सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाने के अपने बजट 2025 के वादे पर प्रतिबद्ध है।यह प्रस्ताव सक्रिय विचाराधीन है। आज का मंत्रिमंडल निर्णय मौजूदा प्रावधानों के तहत किसानों को सतत सहायता सुनिश्चित करता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिक अलंकरण समारोह II में भाग लिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नागरिक अलंकरण समारोह-II में भाग लिया। इस समारोह में पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। श्री मोदी ने कहा, "पद्म पुरस्कार विजेताओं ने हमारे समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वालों की जीवन यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक है।"
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एम्स पर एक पोस्ट में लिखा:
"नागरिक अलंकरण समारोह-II में भाग लिया, जहां पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। पद्म पुरस्कार विजेताओं ने हमारे समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वालों की जीवन यात्रा अत्यंत प्रेरणा दायक है।"
देश में जनजातीय विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम
आर्थिक विकास के लिए समर्पित है। पिछले दशक (2014-2025) में, एनएसटीएफडीसी ने आदिवासी उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और छात्रों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान करके अपनी पहुंच और प्रभाव का काफी विस्तार किया है।
अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम (एफआरए) ने आदिवासी और वनवासी समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले अन्याय को दूर करने में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह अधिनियम 13 विभिन्न व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों को मान्यता देता है और ग्राम सभाओं को जैव विविधता का प्रबंधन और संरक्षण करने का अधिकार देता है, जिससे सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित होते हैं। पिछले दशक में, इसके कार्यान्वयन में पर्याप्त प्रगति हुई है, जिससे वन प्रशासन में आदिवासी समुदायों की भूमिका मजबूत हुई है।
जहां तक आदिवासी लोगों के स्वास्थ्य क्षेत्र का सवाल है, उनके मंत्रालय ने केंद्रीय बजट 2023-24 में सिकल सेल एनीमिया (एससीए) के कारण होने वाले स्वास्थ्य संकट को दूर करने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की घोषणा की है, खासकर भारत के आदिवासी क्षेत्रों में। यह मिशन वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के देश के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
• सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2023 को शहडोल, मध्य प्रदेश से शुभारंभ किया गया। सार्वभौमिक जांच अभियान के अंतर्गत 5 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की सिकल सेल एनीमिया के लिए जांच की गई।
• जागरूकता अभियान की मुख्य विशेषताएं: 19 जून से 3 जुलाई 2024 तक दो सप्ताह का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया गया। 1.60 लाख कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें शामिल हैं: 1 लाख स्वास्थ्य शिविर; 27 लाख जांच परीक्षण किए गए; 13.19 लाख जांच कार्ड वितरित किए गए
• धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत सक्षमता केंद्र (सीओसी): आदिवासी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 14 राज्यों में 15 सक्षमता केंद्र स्वीकृत किए गए।
भूमि संसाधन विभाग ने पंजीकरण विधेयक 2025 के मसौदे पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने आधुनिक, ऑनलाइन, कागज रहित और नागरिक केंद्रित पंजीकरण प्रणाली के साथ इसे संरेखित करने के लिए ‘पंजीकरण विधेयक 2025’ का मसौदा तैयार किया है। अधिनियमित होने के बाद, यह विधेयक संविधान-पूर्व पंजीकरण अधिनियम, 1908 का स्थान लेगा।
पंजीकरण अधिनियम, 1908 ने एक सदी से भी अधिक समय से भारत में दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली की आधारशिला के रूप में कार्य किया है। यह अचल संपत्ति और अन्य लेन-देन को प्रभावित करने वाले दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए एक कानूनी आधार प्रदान करता है। समय के साथ, सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के लेन-देन में पंजीकृत दस्तावेजों की भूमिका काफी बढ़ गई है, जो अक्सर वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी निर्णय लेने का आधार बनते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि पंजीकरण की प्रक्रिया मजबूत, विश्वसनीय और विकसित सामाजिक और तकनीकी विकास के अनुकूल होने में सक्षम हो।
हाल के वर्षों में, प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग, सामाजिक-आर्थिक प्रथाओं के विकास और उचित परिश्रम, सेवा वितरण और कानूनी निर्णय के लिए पंजीकृत दस्तावेजों पर बढ़ती निर्भरता ने एक दूरदर्शी पंजीकरण ढांचा बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले से ही मौजूदा 1908 अधिनियम के तहत ऑनलाइन दस्तावेज़ जमा करने और डिजिटल पहचान सत्यापन जैसे नवाचारों की शुरुआत की है। इसके अलावा, पंजीकरण अधिकारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से चित्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि वे लागू कानून के अनुरूप पंजीकरण प्रक्रिया की अखंडता और विश्वसनीयता को बनाए रख सकें। इन प्रगति के आधार पर, अब पूरे देश में सुरक्षित, कुशल और नागरिक-केंद्रित पंजीकरण प्रथाओं का समर्थन करने के लिए एक सामंजस्यपूर्ण और सक्षम विधायी ढांचा प्रदान करने की आवश्यकता है। पंजीकरण विधेयक, 2025 को इस दृष्टि को साकार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
पूर्व-विधायी परामर्श प्रक्रिया के एक भाग के रूप में, ‘पंजीकरण विधेयक, 2025’ का मसौदा भूमि संसाधन विभाग की वेबसाइट पर https://dolr.gov.in/hi/ पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि 30 दिनों की अवधि के भीतर (दिनांक 25.06.2025 को या उससे पूर्व) निर्धारित प्रपत्र में जनता से सुझाव आमंत्रित किए जा सकें।
सुझाव/टिप्पणियाँ/विचार भेजने के लिए प्रोफ़ॉर्मा
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मसौदा विधेयक पर सुझाव/टिप्पणियाँ निम्नलिखित ईमेल आईडी - sanand.b@gov.in पर एमएस वर्ड (या संगत प्रारूप) या मशीन-पठनीय पीडीएफ प्रारूप में साझा की जा सकती हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत आतंक के सामने नहीं झुकेगा और इस कायराना आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


श्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पहलगाम के आतंकी हमले में अपनों को खोने का दर्द हर भारतीय को है, इस दुःख को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले के घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों से घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की।


श्री शाह ने अस्पताल जाकर आतंकी हमले में घायल हुए लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया
दिन विशेष देश की रक्षा के लिए समर्पित है 15 जनवरी थल सेना दिवस
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थल सेना का इतिहास
भारतीय आर्मी का गठन ईस्ट इंडिया कंपनी ने साल 1776 में कोलकाता में किया था। इस सेना पर देश की आजादी से पहले ब्रिटिश कमांडर का अधिकार था। साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तब भी भारतीय सेना का अध्यक्ष ब्रिटिश मूल का ही होता था। 2 साल बाद यानी साल 1949 में आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर ने अपना पद छोड़ दिया। 1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना को नये बने राष्ट्र भारत और इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान की सेवा करने के लिये 2 भागों में बाँट दिया गया। अधिकतर इकाइयों को भारत के पास रखा गया। चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानांतरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया।
15 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं सेना दिवस
आधुनिक भारतीय सेना की शुरुआत 1 अप्रैल 1895 को हुई। उस वक्त इसे भारत को गुलाम बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्रेसिडेंसी आर्मी के रूप में खड़ा किया था। जिसे बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना के नाम से जाना गया। आखिरकार लंबे संघर्ष के बाद देश के आजाद होने के बाद यह भारतीय सेना कही जाने लगी। लेकिन 15 जनवरी 1949 तक इसके कमांडर ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल फ्रांसिस बुचर थे। आजादी के बाद 15 जनवरी 1949 को हमें पहले भारतीय सेना प्रमुख मिले. जिनका नाम फील्ड मार्शल केएम करियप्पा था। इसलिए 15 जनवरी को ही भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया।
सेना दिवस पर क्या होता है
भारतीय सेना दिवस के अवसर पर देश भर में विभिन्न समारोह आयोजित किए जाते हैं। जिनमें सैन्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सेना के जवानों को सम्मानित करने के कार्यक्रम शामिल हैं। सेना दिवस के मुख्य समारोह का आयोजन दिल्ली के छावनी के करिअप्पा परेड ग्राउंड में होता है, जहां भारतीय सेना के जवान अपनी बहादुरी और अनुशासन का प्रदर्शन करते हैं।
भारतीय सेना के बारे में कुछ रोचक तथ्य
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1.3 मिलियन भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सेना के लिए लड़ाई लड़ी थी, जिसमें से 74,000 से अधिक सैनिक शहीद हो गए। नई दिल्ली में स्थित इंडिया गेट इन बहादुर सैनिकों की याद में बनाया गया है।भारतीय सेना का इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध है, और इसमें कई महत्वपूर्ण घटनाएं और युद्ध शामिल हैं। भारतीय सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना है। जिसमें 12 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक और 9 लाख आरक्षित सैनिक शामिल हैं। भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर को नियंत्रित करती है। जो समुद्र तल से 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैप्यह गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर भी है। 61वीं कैवेलरी रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे बड़ी घुड़सवार इकाइयों में से एक है और दुनिया की आखिरी सक्रिय और गैर-यंत्रीकृत घुड़सवार इकाइयों में से भी एक है। अनुशासन और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध भारतीय सेना विश्व में चौथे स्थान पर आती है। जो केवल अमेरिका, रूस और चीन के बाद है, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है, और वर्तमान में 6,000 से अधिक भारतीय सैनिक विभिन्न मिशनों में तैनात हैं। 2013 में उत्तर भारत में आई भीषण बाढ़ के दौरान भारतीय सेना ने "ऑपरेशन राहत" में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस मिशन में भारतीय वायुसेना ने 19,600 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट किया। जबकि भारतीय सेना ने 10,500 से अधिक लोगों को सड़कों और हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाया। 1982 में, भारतीय सेना ने लद्दाख में विश्व का सबसे ऊंचा पुल दाबेली ब्रिज बनाया। यह पुल समुद्र तल से 18,739 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी लंबाई 98 फीट है।
भारतीय सेना के पास कुशल डॉग स्क्वॉड भी है, जिसमें जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और बेल्जियन मेलिनॉय जैसी नस्लें शामिल हैं। ये प्रशिक्षित कुत्ते विस्फोटक खोजने, ट्रैकिंग और बचाव कार्यों जैसे अभियानों में सेना की महत्वपूर्ण सहायता करते हैं। भारतीय सेना न केवल अपनी बहादुरी के लिए जानी जाती है, बल्कि उसके रोचक इतिहास और शानदार परंपराओं के लिए भी सम्मिलित है। गोरखा रेजीमेंट गोरखा सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित कई अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया है।
देश के लिए थल सेना का योगदान
भारतीय थल सेना ने देश की रक्षा के लिए कई युद्ध लड़े हैं और हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। सेना ने प्राकृतिक आपदाओं के समय भी लोगों की मदद की है। थल सेना दिवस एक ऐसा अवसर है। जब हम सभी एक साथ आकर अपने देश के वीर सैनिकों को धन्यवाद देते हैं।
सुरक्षा और रक्षा में योगदान
सीमा सुरक्षा थल सेना देश की सीमाओं की रक्षा करती है और विदेशी हमलों से बचाव करती है। आंतरिक सुरक्षा थल सेना आंतरिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जैसे कि आतंकवाद विरोधी अभियान और नक्सलवाद विरोधी अभियान। प्राकृतिक आपदा में सहायता: थल सेना प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, भूकंप और तूफान में राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान
राष्ट्र निर्माण थल सेना ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में मदद की। विकास कार्यों में सहायता: थल सेना विकास कार्यों में भी सहायता प्रदान करती है, जैसे कि सड़क निर्माण, पुल निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास में। सामाजिक कार्यों में सहायता थल सेना सामाजिक कार्यों में भी सहायता प्रदान करती है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम आदि।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतियोगियों के चयन हेतु समिति गठित
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल के माध्यम से करेंगे हितग्राहियों से संवाद अब 10 मार्च को महतारी वन्दन योजना से मिलेगी प्रथम क़िस्त की राशि
कैबिनेट ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को 300 रुपये की लक्षित सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी दी
10.27 करोड़ से अधिक पीएमयूवाई लाभार्थियों को सीधे उनके खातों में सब्सिडी मिलेगी
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल खर्च 12,000 करोड़ रुपये होगा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान एक साल में 12 रिफिल तक प्रदान की जाने वाली 300 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर (और 5 किलोग्राम सिलेंडर के लिए उचित अनुपात में प्रो रेटेड) की लक्षित सब्सिडी जारी रखने को मंजूरी प्रदान की है। 1 मार्च, 2024 तक 10.27 करोड़ से अधिक पीएमयूवाई लाभार्थी हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कुल खर्च 12,000 करोड़ रुपये होगा। सब्सिडी सीधे पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है।
ग्रामीण और वंचित गरीब परिवारों को खाना पकाने का स्वच्छ ईंधन-तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को जमा मुक्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने के लिए मई 2016 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू की।
भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। पीएमयूवाई लाभार्थियों को एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव के प्रभाव से बचाने और पीएमयूवाई उपभोक्ताओं द्वारा एलपीजी का निरंतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी को और अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार ने पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए मई 2022 में एक साल में 12 रिफिल तक प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर (और 5 किलोग्राम के कनेक्शनों के लिए उचित अनुपात में प्रो रेटेड) के लिए 200 रुपये की लक्षित सब्सिडी शुरू की। अक्टूबर 2023 में, सरकार ने एक साल में 12 रिफिल तक प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर (और 5 किलोग्राम के कनेक्शनों के लिए उचित अनुपात में प्रो रेटेड) पर लक्षित सब्सिडी बढ़ाकर 300 रुपये कर दी। 01.02.2024 तक, पीएमयूवाई उपभोक्ताओं के लिए घरेलू एलपीजी की प्रभावी कीमत 603 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर (दिल्ली) है।
पीएमयूवाई उपभोक्ताओं की औसत एलपीजी खपत 2019-20 में 3.01 रिफिल से 29 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 के लिए आनुपातिक रूप से 3.87 रिफिल (जनवरी 2024 तक) हो गई है। सभी पीएमयूवाई लाभार्थी इस लक्षित सब्सिडी के पात्र हैं
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय लोकसंपर्क कार्यक्रम में 'दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल' लॉन्च किया
केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी द्वारा 28 नवंबर, 2023 को विज्ञान भवन में महिला एवं बाल विकास और आयुष राज्य मंत्री डॉ. मुंजपारा महेन्द्रभाई, महिला एवं बाल विकास सचिव श्री इंदीवर पांडे, डीईपीडब्ल्यूडी के सचिव श्री राजेश अग्रवाल और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार डॉ. के.के. त्रिपाठी की उपस्थिति में आयोजित एक राष्ट्रीय लोकसम्पर्क कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों के लिए आंगनवाड़ी प्रोटोकॉल लॉन्च किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिव्यांग बच्चों के बेहतर कल्याण के लिए समग्र पहुंच को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए किया गया था।इस कार्यक्रम में देश भर से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारी, सीडीपीओ, महिला पर्यवेक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस) जैसे प्रमुख संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल को समर्थन देने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को धन्यवाद दिया। श्रीमती ईरानी ने कहा कि वर्तमान में 3 से 6 वर्ष की आयु के 4.37 करोड़ बच्चों को हर दिन पका हुआ गर्म भोजन और ईसीसीई की सहायता दी जा रही है, 0 से 3 वर्ष की आयु के 4.5 करोड़ बच्चों को घर ले जाने के लिए राशन और उनके घरों के दौरों तथा 0-6 वर्ष आयु वर्ग के 8 करोड़ से अधिक बच्चों को प्रारंभिक शिशु विकास को बढ़ाने के लिए वृद्धि निगरानी और स्वास्थ्य प्रणाली में रेफरल की सहायता प्रदान की जा रही है। श्रीमती ईरानी ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पिछले 4 महीनों में बच्चों के लिए 16 करोड़ गृह दौरे किए गए हैं।
प्रधानमंत्री 30 नवंबर को विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 30 नवंबर को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विकसित भारत संकल्प यात्रा के लाभार्थियों से बातचीत करेंगे। विकसित भारत संकल्प यात्रा पूरे देश में सरकार की प्रमुख योजनाओं की संपूर्ण पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से सभी लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे।
महिलाओं के नेतृत्व में विकास सुनिश्चित करना प्रधानमंत्री का निरंतर प्रयास रहा है। इस दिशा में एक और कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री महिला किसान ड्रोन केंद्र का शुभारंभ करेंगे। यह केन्द्र महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ड्रोन प्रदान करेगा ताकि वे इस तकनीक का उपयोग आजीविका सहायता के लिए कर सकें। अगले तीन वर्षों के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों को 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराए जाएंगे। महिलाओं को ड्रोन उड़ाने और उपयोग करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह पहल कृषि में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करेगी।
स्वास्थ्य देखभाल को किफायती और आसानी से सुलभ बनाना प्रधानमंत्री के स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण की आधारशिला रही है। इस दिशा में एक प्रमुख पहल किफायती कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जन औषधि केंद्र की स्थापना रही है। कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री एम्स, देवघर में ऐतिहासिक 10,000वें जन औषधि केंद्र को समर्पित करेंगे। इसके अलावा, प्रधानमंत्री देश में जन औषधि केंद्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने के कार्यक्रम की भी शुरुआत करेंगे।
महिला एसएचजी को ड्रोन उपलब्ध कराने और जन औषधि केंद्रों की संख्या 10,000 से बढ़ाकर 25,000 करने की इन दोनों पहलों की घोषणा प्रधानमंत्री ने इस साल की शुरुआत में अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान की थी। 30 नवंबर का यह कार्यक्रम इन वादों को पूरा करने का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति 1 दिसंबर 2023 को केरल के तिरुवनंतपुरम का दौरा करेंगे
उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ 01 दिसंबर, 2023 को केरल के तिरुवनंतपुरम का दौरा करेंगे।
राज्य के अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान श्री धनखड़ शहर में 5वें वैश्विक आयुर्वेद महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।
जल दिवाली - "महिलाओं के लिए पानी, पानी के लिए महिलाएं अभियान" शुरू किया गया
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय अपनी प्रमुख योजना - अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (एएमआरयूटी) के तहत एक प्रगतिशील पहल "महिलाओं के लिए पानी, पानी के लिए महिलाएं अभियान" को शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस योजना में मंत्रालय के राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) की भी भागीदारी है। ओडिशा अर्बन एकेडमी इसकी ‘नॉलेज पार्टनर’ है। इस "जल दिवाली" अभियान का जश्न 7 नवंबर, 2023 से शुरू होकर 9 नवंबर, 2023 तक जारी रहेगा।इस अभियान का उद्देश्य जल शासन प्रणाली में महिलाओं को शामिल करने के लिए एक मंच प्रदान करना है। उन्हें अपने-अपने शहरों में जल उपचार संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) के दौरे के माध्यम से जल उपचार प्रक्रियाओं के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्रदान की जाएगी। संयंत्रों के दौरों से उन्हें घरों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने में प्रयुक्त महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी उपलब्ध होगी जो यह सुनिश्चित करती है कि नागरिकों को अपेक्षित गुणवत्ता का जल उपलब्ध हो। इस अभियान का व्यापक लक्ष्य जल बुनियादी ढांचे के प्रति महिलाओं में स्वामित्व और अपनेपन की भावना को विकसित करना है।
भारत में 3,000 से अधिक जल उपचार संयंत्र हैं, जिनकी निर्मित जल उपचार क्षमता 65,000 एमएलडी से अधिक और परिचालन क्षमता 55,000 एमएलडी से अधिक है। इस अभियान के दौरान, महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) 550 से अधिक जल उपचार संयंत्रों का दौरा करेंगे, जिनकी संयुक्त परिचालन क्षमता 20,000 एमएलडी (देश की कुल क्षमता की 35 प्रतिशत से अधिक) से अधिक है।
घरेलू जल प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती हैं। महिलाओं को जल उपचार और बुनियादी ढांचे के बारे में जानकारी प्रदान करके महिलाओं को सशक्त बनाकर, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय का लक्ष्य उनके घरों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बारे में उनकी क्षमता को बढ़ाना है। इस अभियान का उद्देश्य पारंपरिक रूप से पुरुषों के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में समावेशिता और विविधता को बढ़ावा देकर लैंगिक समानता के मुद्दों को हल करना है।
"महिलाओं के लिए जल, जल के लिए महिलाएं अभियान", ‘’जल दिवाली" के पहले चरण में राष्ट्रव्यापी रूप से 15,000 से अधिक स्वयं सहायता समूह महिलाओं की अपेक्षित भागीदारी के साथ सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (आदर्श आचार संहिता के तहत 5 राज्यों को छोड़कर) की भागीदारी रहेगी। इस अभियान के प्रमुख क्षेत्र इस प्रकार हैं :
स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली
बीते वर्षों में हमारे त्योहारों के साथ देश का एक नया संकल्प भी जुड़ा है। आप सब जानते हैं, ये ‘वोकल फॉर लोकल’ का संकल्प है। पॉलिथीन का हानिकारक कूड़ा स्वच्छता का पालन करने वाले हमारे त्योहारों की भावना के विपरीत है। इसलिए, हमें केवल स्थानीय रूप से निर्मित गैर-प्लास्टिक बैग का ही उपयोग करना चाहिए। हमारा कर्तव्य है कि हम त्योहारों के अवसर पर इन्हें बढ़ावा दें और स्वच्छता के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी ध्यान रखें।” – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
दिवाली का त्योहार अब बेहद नजदीक है और हर-घर इस पर्व की खुशियों से सराबोर हो रहा है। दीवाली से पहले ही लोग घरों में स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में व्यस्त हो जाते हैं, इसलिए स्वच्छता हर घर के केंद्र में आ जाती है। दिवाली के दौरान साफ-सफाई केवल घरों तक ही सीमित नहीं है बल्कि सभी समुदाय यह सुनिश्चित करने के लिए एक साथ आगे आते हैं ताकि उत्सव का जश्न मनाने से पहले हमारी सड़कें, बाजार और पड़ोस साफ-सुथरे हो सकें। पुरानी और अप्रयुक्त वस्तुओं को नई वस्तुओं से बदलना भी इस त्योहार का एक पारंपरिक हिस्सा रहा है। ऐसे में जब पूरे देश में उत्सव का माहौल है, तो उसी के अनुरूप आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के तत्वावधान में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 ने 6 से 12 नवंबर 2023 तक स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य स्वच्छ भारत की यात्रा और पर्यावरण के लिए जीवनशैली (मिशन LiFE) के सिद्धांतों के साथ-साथ दिवाली के सांस्कृतिक महत्व को उजागर करना है।मिशन LiFE के मूल सिद्धांतों को दोहराते हुए, जिसका उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण करना है, जीवनशैली में ‘प्रो-प्लैनेट’ व्यवहार परिवर्तन लाना है, स्वच्छ दिवाली शुभ दिवाली की अवधारणा स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव के महत्व पर जोर देती है। इस पहल का उद्देश्य सभी लोगों को स्थानीय रूप से निर्मित उत्पादों का चुनाव करने, सिंगल-यूज प्लास्टिक से मुक्त दिवाली मनाने समेत दिवाली से पहले व बाद में स्वच्छता को प्राथमिकता देने के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रेरित करके पर्यावरण एवं समुदायों के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। ऐसा करके, यह अभियान त्योहार के प्रति स्थायी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता वाले दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की पहल है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह बुधवार, 08 नवंबर, 2023 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) द्वारा जैविक उत्पाद को बढ़ावा देने पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करेंगे
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह बुधवार, 08 नवंबर, 2023 को आईसीएआर कन्वेंशन सेंटर, पूसा, नई दिल्ली में राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) द्वारा जैविक उत्पाद को बढ़ावा देने पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर श्री अमित शाह NCOL के logo, website और brochure का शुभारंभ और एनसीओएल सदस्यों को सदस्यता प्रमाण पत्र भी वितरित करेंगे। एक-दिवसीय संगोष्ठी के दौरान NCOL के उद्देश्यों, जैविक उत्पादों के महत्व के साथ-साथ छोटे और सीमांत किसानों के उत्थान में सहकारी समितियों की भूमिका पर भी चर्चा की जाएगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के "सहकार से समृद्धि" के विज़न के अनुरूप, भारत को जैविक उत्पादों में विश्व में अग्रणी बनाने के लिए NCOL की स्थापना एक राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समिति के रूप में की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय ने देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए पिछले 27 महीनों में 54 महत्वपूर्ण पहल की हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था, "मेक इन इंडिया", "आत्मनिर्भर भारत" और "लोकल से ग्लोबल" की दिशा में जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति की स्थापना एक महत्वपूर्ण क़दम है।
NCOL का लक्ष्य जैविक उत्पादक किसानों और उत्पादक संगठनों को बाजार तक सीधी पहुंच प्रदान करते हुए उपज पर मुनाफा बढ़ाना है। एक मजबूत ब्रांड के तहत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिलने से NCOL के सदस्यों को उनकी जैविक उपज के लिए बेहतर रिटर्न मिल सकेगा। NCOL 'Whole of Government Approach' के तहत, भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से देशभर में विभिन्न सहकारी समितियों और संबंधित संस्थानों द्वारा उत्पादित जैविक उत्पादों की संपूर्ण Supply Chain का प्रबंधन करके एक Umbrella संगठन के रूप में कार्य करेगा। यह सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित जैविक उत्पादों के collection, branding और marketing का कार्य और इन्हें बढ़ावा देगा। कोई भी सहकारी समिति या व्यक्तियों की संस्था जो केन्द्रीय रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित हो NCOL का सदस्य बन सकती है। अब तक लगभग 2000 सहकारी समितियाँ NCOL की सदस्य बन चुकी हैं या सदस्यता के लिए आवेदन कर चुकी हैं |
NCOL के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न गतिविधियों, जिनमें शोध एवं विकास (R&D) और एक ज्ञान संग्रह केंद्र स्थापित करना शामिल हैं, के तहत कार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, NCOL जैविक उत्पादों के उत्पादन में शामिल सहकारी क्षेत्र और संबंधित संस्थाओं को सहायता भी प्रदान करेगा, जिसमें वित्तपोषण, क्षमता निर्माण, तकनीकी मार्गदर्शन, मार्केट इंटेलिजेंस सिस्टम की स्थापना और रखरखाव आदि शामिल हैं।
संगोष्ठी के दौरान जैविक उत्पादन - समय की आवश्यकता, जैविक उत्पादों के लिए प्रमाणन प्रक्रिया और मानदंड, जैविक प्रमाणन प्रयोगशालाओं का महत्व आदि विषयों पर तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगे। संगोष्ठी में NCOL के सदस्यों, भारत सरकार/राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के अधिकारियों, बहु-राज्य सहकारी समितियाँ / वित्तीय संस्थाएं /सहकारी संघ/जिला सहकारी संघ/जैविक प्रमाणन निकाय और परीक्षण प्रयोगशालाएं, जैविक क्षेत्र के विशेषज्ञ और देश भर से अन्य जैविक उत्पादक हितधारक सहित 1000 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे और बड़ी संख्या में प्रतिभागी ऑनलाइन भी जुड़ेंगे|
उपराष्ट्रपति के आमंत्रण पर नया संसद भवन देखने दिल्ली पहुंचे सैनिक स्कूल, झुंझुनूं के छात्र
उपराष्ट्रपति ने आज संसद भवन देखने आये सैनिक स्कूल, झुंझुनूं के छात्रों से संसदीय सौध में संवाद किया। ज्ञात रहे कि 27 अगस्त को उपराष्ट्रपति राजस्थान के दौरे पर गए थे जहां उन्होंने सैनिक स्कूल झुंझुनू के छात्रों को संबोधित किया था। इस अवसर पर श्री धनखड़ ने छात्रों को संसद के नए भवन के भ्रमण के लिए आमंत्रित किया था।
उपराष्ट्रपति की इस पहल पर कल 5 नवंबर को सैनिक स्कूल, झुंझुनूं के बीस छात्रों का एक समूह तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचा। 5 से 7 नवंबर तक ये छात्र दिल्ली में रुकेंगे और राज्य सभा सचिवालय द्वारा उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है।
कल दिल्ली पहुचने पर इन छात्रों ने प्रधानमंत्री संग्रहालय देखा था, और आज उन्हें संसद के नए और पुराने दोनों भवनों का भ्रमण कराया गया। नयी संसद की भव्यता और सुंदरता देख कर युवा छात्र दल विस्मय से भर गया। कल सात नवंबर को इन छात्रों का इंडिया गेट, राष्ट्रीय समर स्मारक (वार मेमोरियल), महात्मा गांधी की समाधि राजघाट और राष्ट्रपति भवन के भ्रमण का भी कार्यक्रम है।
आज उपराष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान छात्रों ने अपने अनुभव साझा किये। उपराष्ट्रपति ने उनसे कहा कि आज भारत जिस गति के साथ आगे बढ़ रहा है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। एक समय था जब हमें दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं (fragile five) में गिना जाता था और आज हम दुनिया की पांचवी सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा इस विकास यात्रा के दौरान हमने बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ा है और अब हम जर्मनी और जापान को भी पीछे छोड़ने वाले हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत आज एक चमकता हुआ सितारा है।












