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फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 25वें संस्करण को विशेष तिरंगा रैली के रूप में मनाया जाएगा

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 25वें संस्करण को विशेष तिरंगा रैली के रूप में मनाया जाएगा

 केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया नई दिल्ली में 1200 साइकिल चालकों का नेतृत्व करेंगे; अभिनेत्री शरवरी, योगेश्वर दत्त, सबा करीम भी शामिल होंगे

 

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल पहल का 25वां संस्करण रविवार जून को तिरंगा रैली के रूप में  पूरे देश में मनाया जाएगा। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया राष्ट्रीय राजधानी में मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे।

जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाएगा इसलिए रविवार को होने वाला यह कार्यक्रम न केवल फिटनेस में साइकिल चलाने की बड़ी भूमिका के संदेश देगा बल्कि भारत के सशस्त्र बलों के प्रति सामूहिक श्रद्धांजलि भी होगा। राष्ट्रीय राजधानी में 1,200 से अधिक साइकिल चालकों के आने की उम्मीद है और साथ हीपूरे देश में 2,000 से अधिक स्थानों पर इस रविवार को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप मेंओडिशा के माननीय राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति भुवनेश्वर में तिरंगा रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। यह इस पहल के अखिल भारतीय महत्व को और भी अधिक दर्शाता है। डॉ. मनसुख मांडविया के साथ रैली के दिल्ली चरण में खेल और मनोरंजन जगत की प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी जिनमें ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्तअंतरराष्ट्रीय पहलवान सरिता मोरबॉलीवुड अभिनेत्री शरवरी और पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता सबा करीम शामिल हैं। डॉ. मांडविया की उपस्थिति में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है जिसमें कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन भी शामिल है।

तिरंगा रैली फिट इंडिया अभियान के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण बिंदु साबित होगी जिसके तहत फिटनेस को सुगमसमावेशी और देशभक्तिपूर्ण बनाया जाएगा। देश भर की सड़कें खुली साइकिलिंग ट्रैक बन रही हैं और परिवारछात्रप्रभावशाली लोग और वरिष्ठ नागरिक इसमें शामिल हो रहे हैं। यह पहल स्वास्थ्य संस्कृति का निर्माण कर रही है जो देश के विभिन्न जनसांख्यिकी और दर्शनीय स्थानों तक फैली हुई है।

दिसंबर 2024 में अपनी शुरुआत के बाद सेसंडे ऑन साइकिल पहल से लोगों का अभूतपूर्व जुड़ाव हुआ है। 5,500 से अधिक स्थानों पर इसका आयोजन हुआ और लाख से अधिक नागरिकों ने इसमें भाग लिया। इस अभियान को 3.44 बिलियन से अधिक लोगों का डिजिटल समर्थन भी प्राप्त हुआ है। इनमें सानिया मिर्ज़ामिलिंद सोमनइमरान हाशमीजॉन अब्राहमइम्तियाज़ अलीशंकर महादेवन और महान दारा सिंह जैसे दिग्गज शामिल हैं।

भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के कई केंद्रों के साथ-साथ खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) में समुदाय-केंद्रित फिटनेस कार्यक्रम जैसे जुम्बारस्सी कूदनिर्देशित योग सत्रतथा रविवार को साइकिल कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रीय खेल विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (एनसीएसएसआर) के विशेषज्ञों द्वारा मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

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गोवा बना पूर्ण कार्यात्मक साक्षर राज्य

गोवा बना पूर्ण कार्यात्मक साक्षर राज्य

 गोवा के मुख्यमंत्री डॉ। प्रमोद सावंत ने गोवा को औपचारिक रूप से उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) के तहत पूर्ण कार्यात्मक साक्षर राज्य घोषित किया। यह भारत को वर्ष 2030 तक पूर्ण साक्षर बनाने के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। गोवा देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए 95% साक्षरता मानक को पार किया है। यह घोषणा गोवा के 39वें राज्य स्थापना दिवस (30 मई 2025) पर पणजी स्थित दीनानाथ मंगेशकर कला मंदिर में आयोजित भव्य समारोह में की गई।

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इस अवसर पर गोवा के कैबिनेट मंत्रीराज्य के मुख्य सचिवशिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी राज्य के नागरिक और कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

पीएलएफएस रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार गोवा की साक्षरता दर 93।60% हैजो देश में सबसे अधिक दरों में से एक है और इसमें पुरुषों एवं महिलाओं दोनों का मजबूत प्रदर्शन शामिल है। हालाँकिगोवा के अपने सर्वेक्षण के अनुसारराज्य ने इस आंकड़े को पार कर लिया है और पूर्ण साक्षरता प्राप्त कर ली है।

इस लक्ष्य को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने के लिएगोवा सरकार ने इस प्रयास में संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण अपनायायानी सरकार के विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बिठाकर काम किया गया। इसमें पंचायत निदेशालयनगरपालिका प्रशासन निदेशालयसमाज कल्याण निदेशालययोजना और सांख्यिकी निदेशालय तथा महिला एवं बाल विकास निदेशालय जैसे विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन विभागों ने अपने-अपने क्षेत्रों में निरक्षरों की पहचान की।

इसके साथ ही स्वयंपूर्ण मित्रों को जागरूकता अभियानों में लगाया गयाजिन्होंने लोगों को साक्षरता प्रमाणपत्र दिलाने और शिक्षा मॉड्यूल से जोड़ने में मदद की। समाज कल्याण विभाग के फील्ड वर्कर्स ने भी निरक्षरों की पहचान में सक्रिय भूमिका निभाई।

गोवा की शिक्षा टीम जिसमें एससीईआरटीस्थानीय प्रशासनस्कूल प्रमुख और स्वयंसेवक शामिल हैंके प्रयासों की व्यापक रूप से सराहना की गई। यह सफलता दिखाती है कि जन-भागीदारी आधारित और स्वयंसेवकों द्वारा संचालित साक्षरता अभियानजब विभागीय सहयोग और समावेशी शैक्षणिक उपकरणों के साथ चलाए जाते हैंतो वे असाधारण परिणाम दे सकते हैं। यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल है कि कैसे वर्ष 2030 तक देश को पूर्ण साक्षर बनाया जा सकता है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उल्लास- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम देशभर में लागू किया जा रहा है और गोवा आज जन-जन साक्षर” की भावना को साकार करता हुआ प्रगति का प्रतीक बनकर उभरा है। उल्लास- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम एक केंद्र प्रायोजित योजना हैजिसे 2022 से 2027 तक लागू किया गया है। यह योजना नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और उन वयस्कों (15 वर्ष और उससे ऊपर) को लक्षित करती है जो स्कूल नहीं जा सके। इसमें पाँच घटक शामिल हैं: बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकताजीवनोपयोगी आवश्यक कौशलप्रारंभिक शिक्षाव्यावसायिक शिक्षा और सतत शिक्षा।

उल्लास योजना का उद्देश्य भारत को जन-जन साक्षर” बनाना है और यह कर्तव्यबोध की भावना पर आधारित हैजिसे स्वयंसेवा आधारित मॉडल पर लागू किया जा रहा है। अब तक इस योजना के तहत 1.77 शिक्षार्थी आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा (एफएलएनएटी) में शामिल हो चुके हैं। उल्लास मोबाइल ऐप पर 2.40 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 41 लाख स्वयंसेवी शिक्षक पंजीकृत हो चुके हैं।

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वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अनुकरणीय सेवा के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों की केंद्रीय संचार मंत्री के साथ बातचीत

वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अनुकरणीय सेवा के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों की केंद्रीय संचार मंत्री के साथ बातचीत

 डाक विभाग ने आज ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) के सराहनीय योगदान का जश्न मनाया और वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान उनकी असाधारण सेवा के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया। केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में प्रतिभागियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। बैठक के दौरान डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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इस कार्यक्रम का उद्देश्य जीडीएस के प्रयासों को मान्यता देना और उन्हें केंद्रीय मंत्री से व्यक्तिगत रूप से संवाद करने का अवसर प्रदान करना था। देश भर के सभी 23 डाक सर्किलों से कुल 33 जीडीएस ने इस कार्यक्रम में भाग लियाजो भारतीय डाक द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले विविध और विशाल ग्रामीण परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण डाक सेवकों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना कीजो ग्रामीण भारत में डाक नेटवर्क की रीढ़ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विभाग के लिए जीडीएस जमीनी स्तर पर काम करते हैंइसलिए देश भर में डाक और वित्तीय सेवाओं की डिलीवरी में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनकी प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि केवल जीडीएस ही है जिस पर गांव के सभी लोग पूरी तरह से भरोसा करते हैं और जीडीएस प्रत्येक परिवार के सदस्य को जानते हैं, साथ ही पूरे समुदाय के साथ गहरा संबंध बनाए रखते हैं। यह अनूठा संबंध जीडीएस को न केवल सेवा प्रदाता बनाता हैबल्कि ग्रामीण समुदाय का विश्वसनीय सदस्य भी बनाता है।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण डाक सेवकों ने अपने अनुभव और क्षेत्र से जुड़ी प्रेरक कहानियां साझा कीं। उन्हें डाक विभाग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने इस संबंध में एक भावनात्मक तुलना की। उन्होंने कहा, "जिस तरह एक गांव का चौकीदार न केवल सुरक्षा का संरक्षक होता हैबल्कि हर घर के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी रखता हैउसी तरह एक जीडीएस भी हर उस घर के साथ एक हार्दिक रिश्ता बनाता है जिसकी वह सेवा करता है।" उनके बेजोड़ योगदान पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा, "मेरे ग्रामीण डाक सेवकों के माध्यम से, 'डाक सेवाजन सेवाकी भावना जागृत हो रही है।" उन्होंने उनके समर्पण की प्रशंसा की और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को अतुलनीय बताया।

प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए और सेवा वितरण तथा परिचालन दक्षता को और बेहतर बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव भी दिए। उनकी विचारों से अग्रिम मोर्चे को डाक कर्मियों के अनूठे दृष्टिकोण का पता चला और ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग की पहुंच के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला।

जीडीएस के साथ बातचीत और अनुभव को विस्तार से इस वेबलिंक पर देखा जा सकता है:

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राष्ट्रपति ने 15 पुरस्कार Anything को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया

राष्ट्रपति ने 15 पुरस्कार Anything को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया

 राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में उत्कृष्ट नर्सिंग कर्मियों को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। इस वर्षविभिन्न क्षेत्रों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों की 15 नर्सों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने में उनकी अनुकरणीय सेवा और समुदाय के कल्याण को प्रोत्साहन देने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

श्री जे.पी. नड्डा ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुएकहा कि, "यह सुयोग्य सम्मान मानवता की सेवा के प्रति आपके समर्पण का उत्सव मनाता है और आपको सकारात्मक प्रभाव करने के लिए प्रेरित करेगा।" उन्होंने आगे कहा कि, "हमारी नर्सें भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का आधार हैंजो हर दिन अनगिनत लोगों का जीवन बचाती हैं।"

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कारनर्सिंग पेशे को परिभाषित करने वाले समर्पणकरुणा और दृढ़ता का सम्मान करता है। ये प्रतिष्ठित पुरस्कार पंजीकृत नर्सोंदाइयोंसहायक नर्स दाइयों और केंद्र और राज्य सरकारोंकेंद्र शासित प्रदेशों और स्वैच्छिक संगठनों में सेवारत महिला स्वास्थ्य आगंतुकों को प्रदान किए जाते हैं। प्रत्येक पुरस्कार में योग्यता प्रमाणपत्र, 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार और इन स्वास्थ्य योद्धाओं द्वारा प्रदान की गई अमूल्य सेवा के लिए राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक एक पदक सम्मिलित है।

आज सम्मानित की गई नर्सों का विवरण निम्नलिखित है:

क्रमांक

वर्ग

नाम

राज्य

1

एएनएम

श्रीमती रेबा रानी सरकार

अंडमान और निकोबार

2

एएनएम

श्रीमती वलिवेती सुभावती

आंध्र प्रदेश

3

एएनएम

श्रीमती सरोज फकीरभाई पटेल

दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव

4

एएनएम

श्रीमती रजिया बेगम पीबी

लक्षद्वीप

5

एएनएम

श्रीमती सुजाता अशोक बागुल

महाराष्ट्र

6

एलएचवी

श्रीमती बीना पाणि डेका

असम

7

नर्स

श्रीमती किजुम सोरा कारगा

अरुणाचल प्रदेश

8

नर्स

मिस डिपंल अरोड़ा

दिल्ली

9

नर्स

मेजर जनरल शीना पी.डी.

दिल्ली

10

नर्स

डॉ. बानू एमआर

कर्नाटक

11

नर्स

श्रीमती लेइमापोकपम रंजीता देवी

मणिपुर

12

नर्स

श्रीमती वी. लालहमंगईही

मिजोरम

13

नर्स

श्रीमती एल.एस. मणिमोझी

पुदुचेरी

14

नर्स

श्रीमती अलामेलु मंगयारकरसी के

तमिलनाडु

15

नर्स

श्रीमती डोली बिस्वास

पश्चिम बंगाल

 

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पूरे देश में नर्सिंग और मिडवाइफरी पेशे को सशक्त करने के लिए परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। हाल ही में राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग अधिनियम नर्सिंग शिक्षा और विनियामक ढांचे के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इसके अतिरिक्तमेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ 157 नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना एक कुशल और सक्षम नर्सिंग कार्यबल के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ये पहल सामूहिक रूप से एक सशक्त स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करती हैंजो एक अच्छी तरह से लैस और सशक्त नर्सिंग कार्यबल के माध्यम से सभी नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करती हैं।

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ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत का सीधा हमला है अगर पाकिस्तान कुछ भी गलत करने की कोशिश करता है तो उसे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता का सामना करना पड़ेगा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत का सीधा हमला है अगर पाकिस्तान कुछ भी गलत करने की कोशिश करता है तो उसे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता का सामना करना पड़ेगा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

 ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्‍त नहीं हुआ है; यह सिर्फ एक विराम है""हमारे शक्तिशाली कैरियर बैटल ग्रुप ने शांत रहते हुए भी, यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तानी नौसेना आगे न बढ़े अन्यथा उसे परिणाम भुगतने पड़ते"श्री राजनाथ सिंह ने कहा- भारत आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए कोई भी तरीका अपनाने से नहीं हिचकिचाएगा"यदि पाकिस्तान वार्ता के लिए गंभीर है, तो उसे हाफिज सईद और मसूद अजहर को भारत को सौंप देना चाहिए ताकि न्याय हो सके"नौसेना एक रणनीतिक शक्ति बन चुकी है, यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को मजबूत करती है, दुश्मन को चेतावनी देती है कि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं अपितु एक वैश्विक शक्ति बन रहा है"

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 30 मई, 2025 को गोवा तट पर भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर अधिकारियों और नौसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं हैबल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सीधा हमला है और अगर पाकिस्तान कुछ भी गलत या अनैतिक करता हैतो उसे इस बार भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और क्रोध का सामना करना पड़ेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की मौन सेवा की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि शक्तिशाली कैरियर बैटल ग्रुप ने यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तानी नौसेना बाहर  निकलेअन्यथा उसे परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि अगर उसने बुरी नजर डालने की कोशिश की तो भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई भारतीय नौसेना के हाथों होगी।

श्री राजनाथ सिंह ने बल देते हुए कहा कि पाकिस्तान को यह समझने की आवश्‍यकता है कि स्‍वतंत्रता के बाद से वह जो खतरनाक आतंकवाद का खेल खेल रहा है अब उसका समय खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ कोई आतंकी कार्रवाई करता हैतो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे और हार का सामना करना पड़ेगा। भारत इसमें संकोच नहीं करेगा। वह आतंकवाद के खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए हर तरीका अपनाएगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की धरती से खुलेआम भारत विरोधी गतिविधियां चल रही हैं और भारत, सीमा तथा समुद्र दोनों तरफ आतंकवादियों के खिलाफ हर तरह की कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आतंकवाद के खिलाफ अपने नागरिकों की रक्षा करने के भारत के अधिकार को स्वीकार कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर चल रहे आतंकवाद की नर्सरी को अपने हाथों से उखाड़ फेंकना चाहिए।

श्री राजनाथ सिंह ने हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को भारत को सौंपने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों न केवल भारत की 'मोस्ट वांटेड आतंकवादियोंकी सूची में हैंबल्कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी भी हैं। मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा को हाल ही में भारत लाया गया है। हाफिज सईद भी मुंबई हमलों का दोषी है और उसके अपराध के लिए न्याय होना चाहिए।

पाकिस्तान द्वारा बार-बार बातचीत की पेशकश पर रक्षा मंत्री ने फिर स्पष्ट किया कि अगर बातचीत होगी तो वह केवल आतंकवाद और पीओके पर होगी। अगर पाकिस्तान बातचीत के लिए गंभीर है तो उसे हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को भारत को सौंप देना चाहिए ताकि न्याय हो सके।

एकीकृत अभियान में भारतीय नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान की धरती पर आतंकी ठिकानों को नष्ट कियातो अरब सागर में नौसेना की आक्रामक तैनातीइसकी बेजोड़ समुद्री क्षेत्र की जानकारी और वर्चस्व ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके अपने तटों तक सीमित कर दिया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के 96 घंटों के भीतर समुद्र में तैनात हमारे पश्चिमी बेड़े के पोतों ने पश्चिमी और पूर्वी तट पर सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और टॉरपीडो की सफल फायरिंग की। इसने हमारे प्लेटफॉर्मसिस्टम और चालक दल की युद्ध तत्परता और हमारे इरादे और तत्परता को प्रदर्शित कियाजिससे दुश्मन को रक्षात्मक मुद्रा में आने के लिए मजबूर होना पड़ा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि कैरियर बैटल ग्रुप के बल प्रक्षेपण ने भारत की मंशा और क्षमता को प्रभावी ढंग से दर्शाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की जबरदस्त शक्तिइसकी सैन्य कुशलता और विध्वंसक क्षमताओं ने दुश्मन के मनोबल को तोड़ दिया है। उन्होंने नौसेना से अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ने का आग्रह किया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट संदेश को दोहराया कि यदि भारतीय धरती पर कोई आतंकवादी हमला होता हैतो इसे 'युद्ध की कार्रवाईमाना जाएगा और उसी तरह से जवाब दिया जाएगा।

श्री राजनाथ सिंह ने दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ हैयह सिर्फ एक विराम हैएक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर से यही गलती की तो भारत की जवाबी कार्रवाई और भी कड़ी होगी।

 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों की गतिगहराई और स्पष्टता की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सटीक हमलों ने तीनों सेनाओं के बीच शानदार तालमेल और मंत्रालयों एवं सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को एक स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा और मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने कहा कि बहुत कम समय मेंहमने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को ध्‍वस्‍त और उसके इरादों को धूमिल कर दिया गया। हमारा जवाब इतना जोरदार था कि पाकिस्तान ने रुकने की गुहार लगाई। हमने अपनी शर्तों पर अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दी जबकि अभी तो हमारे सशस्‍त्र बलों ने अपना शौर्य दिखाना भी शुरू नहीं किया था।


 

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लोग साहित्य से प्रेरणा ले सकते हैं और अपने आदर्शों को साकार करने का प्रयास कर सकते हैं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु

लोग साहित्य से प्रेरणा ले सकते हैं और अपने आदर्शों को साकार करने का प्रयास कर सकते हैं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सांस्कृतिक पुनरुत्थान के युग से गुजर रहा है: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावतराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन किया राष्ट्रपति भवन ने साहित्य के परिवर्तित होते स्वरूप पर विचार सम्मेलन में साहित्य जगत के प्रमुख हस्तियों की मेजबानी कीनई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत साहित्य अकादमी ने राष्ट्रपति भवन के सहयोग से “कितना बदल चुका है साहित्य?” विषय पर एक साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश भर से प्रतिष्ठित लेखकों, कवियों और साहित्यिक विचारकों सम्मिलित हुए। सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने उद्घाटन भाषण में लेखकों के प्रति अपने आजीवन सम्मान और प्रशंसा को व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में लेखकों की मेजबानी करना उनकी एक प्रिय इच्छा थी। उन्होंने उत्कलमणि गोपबंधु दास की उड़िया में कही गई पंक्तियों का स्मरण किया, जिसका उन्होंने अर्थ बताया, "मैं इस देश की धरती पर जहाँ भी हूँ, मैं उतनी ही आभारी हूँ जितनी मैं जगन्नाथ पुरी यात्रा के परिसर में होती।" उन्होंने साहित्य से समानताएँ बताते हुए वाल्मीकि रामायण से सीता-राम की कहानी को समाज में एकता की शक्ति के रूप में उद्धृत किया। अपने व्यक्तिगत अनुभव पर विचार करते हुए उन्होंने साझा किया कि कैसे फकीर मोहन सेनापति की कहानी "रेवती" ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला, साहित्य के प्रभाव को उजागर किया। उनके अनुसार, आम लोग साहित्य से प्रेरणा ले सकते हैं और अपने आदर्शों को साकार करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभा रे के उपन्यास द्रौपदी को मानवीय संवेदनाओं में निहित एक उत्कृष्ट साहित्य का एक आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य समय के साथ परिवर्तित होता है लेकिन करुणा और संवेदनशीलता जैसे कुछ तत्व हैं,जिनमें परिवर्तन नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति के अनुभवों पर आधारित होने के कारण आज के साहित्य को उपदेशात्मक साहित्य नहीं कहा जा सकता।

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केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य कितना बदल गया है, यह पूछने के बजाय यह विचार करना अधिक उचित होगा कि समाज में कितना बदलाव आया है, क्योंकि साहित्य समाज की भावना होती है। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे हमेशा सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश सांस्कृतिक पुनरुत्थान के युग से गुजर रहा है। राष्ट्रपति के तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन देश में एक जाग्रत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।

संस्कृति मंत्रालय की विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार सुश्री रंजना चोपड़ा ने साहित्य अकादमी की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें नेताजी सुभाष बोस पर इसका कार्य और उन्मेषा जैसे अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन सम्मिलित हैं। उन्होंने तेजी से हो रहे तकनीकी और सामाजिक परिवर्तनों के बीच साहित्य के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया।


उद्घाटन समारोह के बाद एक कवि सम्मेलन “सीधे दिल से” का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं के कवियों ने भागीदारी की। साहित्य अकादमी के सचिव डॉ के श्रीनिवासराव ने कवियों को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया। इस सत्र के दौरान डॉ माधव कौशिक ने अतिथि के रूप में कुछ उर्दू दोहे और एक-दो ग़ज़लें सुनाईं। अपनी कविताएँ सुनाने वाले कवियों में श्री रणजीत दास (बंगाली), श्रीमती ममंग दाई (अंग्रेजी), श्री दिलीप झावेरी (गुजराती), श्री अरुण कमल (हिंदी), श्री महेश गर्ग (हिंदी), श्री शफी शौक (कश्मीरी), श्रीमती दमयंती बेशरा (संथाली) और श्री रवि सुब्रमण्यन (तमिल) सम्मिलित थे। अपनी नम भावनाओं से ओतप्रोत अपने शब्दों में सभी कवियों ने आनंद, शोक, प्रेम और उत्कंठा की अनछुई अभिव्यक्ति साझा की। सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात उर्दू कवि और विद्वान श्री शीन काफ़ निज़ाम ने कहा कि कविता सुनी नहीं जाती बल्कि महसूस की जाती है। उन्होंने अपनी कई लोकप्रिय उर्दू ग़ज़लें सुनाईं और सत्र का समापन किया। यह कार्यक्रम भारत की साहित्यिक विविधता का उत्सव था और इसकी चिरस्थायी विरासत और भविष्य की दिशा पर सार्थक चिंतन था।

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रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तीन डीपीएसयू को मिनीरत्न का दर्जा देने की मंजूरी दी

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तीन डीपीएसयू को मिनीरत्न का दर्जा देने की मंजूरी दी

 म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) और इंडिया ऑप्टल लिमिटेड (आईओएल) अब मिनीरत्न कंपनियांरक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल)आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) और इंडिया ऑप्टल लिमिटेड (आईओएल) को "मिनीरत्न" श्रेणी-का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। तीन साल की छोटी सी अवधि में सरकारी संगठन से लाभ कमाने वाली कॉर्पोरेट इकाई में तब्दील होने के लिए इन डीपीएसयू को बधाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कंपनी के कारोबार को बढ़ानेस्वदेशीकरण को अधिकतम करने और मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा देने के लिए अन्य प्रदर्शन मापदंडों को पूरा करने के लिए एमआईएलएवीएनएल और आईओएल के प्रबंधन द्वारा की गई पहलों पर संतोष व्यक्त किया।

म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) ने स्थापना के बाद से महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैंजिसमें 2021-22 (एच2) में 2571.6 करोड़ रुपये से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 में 8282 करोड़ रुपये (अनंतिम) तक की बिक्री में शानदार वृद्धि शामिल है। निर्यात के मोर्चे परएमआईएल ने वित्त वर्ष 2021-22 (एच2) में 22.55 करोड़ रुपये से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 (अनंतिम) में 3081 करोड़ रुपये तक की वृद्धि हासिल की है। एमआईएल के प्रमुख उत्पादों में छोटेमध्यम और उच्च कैलिबर के गोला-बारूदमोर्टाररॉकेटहैंड ग्रेनेड आदि शामिल हैंजिनमें आरंभिक रचनाएँप्रणोदक और उच्च विस्फोटकों का इन-हाउस निर्माण शामिल है।

आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड ने 2021-22 (एच2) में 2569.26 करोड़ रुपये से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 में 4986 करोड़ रुपये (अनंतिम) तक की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। एवीएनएल ने सभी प्लेटफॉर्म यानी टी-72, टी-90 और बीएमपी-II के लिए इंजनों का 100 प्रतिशत स्वदेशीकरण भी हासिल किया है। एवीएनएल के प्रमुख उत्पादों में आर्मर्ड/लड़ाकू वाहन (टी-90, एमबीटी अर्जुनइन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स 'बीएमपी-II सरथआदि)सहायक वाहन (एमपीवीएईआरवी आदि) और रक्षा गतिशीलता समाधान (स्टैलियनएलपीटीए आदि) शामिल हैं।

पिछले तीन वर्षों में इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड ने अपनी बिक्री को 2021-22 (एच2) में 562.12 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2024-25 में 1541.38 करोड़ रुपये (अनंतिम) कर दिया है। आईओएल के मुख्य उत्पादों में ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विज़न उपकरण शामिल हैं जिनका उपयोग भूमि प्रणाली प्लेटफ़ॉर्म और युद्धक टैंक टी-90, टी-72, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल बीएमपी-II, आर्टिलरी गननेवल गन आदि जैसे हथियारों में किया जाता है।

एमआईएलएवीएनएल और आईओएल को मिनीरत्न का दर्जा दिए जाने से ये कंपनियां रक्षा उत्पादन और निर्यात में तीव्र विकास और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सक्षम होंगी।

कार्यात्मक स्वायत्ततादक्षता बढ़ाने और नई विकास क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिएपूर्ववर्ती आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) को 01.10.2021 से इन तीन डीपीएसयू सहित सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में परिवर्तित कर दिया गया। जबकि एमआईएल और एवीएनएल अनुसूची 'नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (डीपीएसयू) हैंआईओएल रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक अनुसूची 'बीडीपीएसयू है।

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने दिल्ली में भारत के सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी) 2025 का शुभारंभ किया

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने दिल्ली में भारत के सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी) 2025 का शुभारंभ किया

 स्वच्छता एक बार का लक्ष्य नहीं बल्कि सतत यात्रा है: केंद्रीय मंत्री एसएसजी निरंतर ओडीएफ प्लस मॉडल परिणामों तक पहुंच बनाएगा और उन्हें सुदृढ़ करेगा तथा स्वच्छता प्रगति पर ग्रामीण भारत को रैंक प्रदान करेगा एसएसजी 2025 के तहत 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 761 जिलों के 21,000 गांवों को शामिल किया जाएगा

 

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने आज दिल्ली में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वीसोमन्ना की उपस्थिति में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) द्वारा राष्ट्रव्यापी ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी2025 का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक केके मीनाअपर सचिव और मिशन निदेशकश्री कमल किशोर सोनराज्य सचिवों और मिशन निदेशकों सहित वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम मेंकेंद्रीय मंत्रीश्री सी आर पाटिल ने "प्रबंधन के लिए मापनेके महत्व को दोहराया। यह ऐसा सिद्धांत है जो प्रमुख कार्यक्रमों के प्रभाव की जानकारी प्रदान करता है। उन्होंने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अपने नवाचारों और सर्वोत्तम परिपाटियों को साझा करना जारी रखने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि स्वच्छता एक बार का लक्ष्य नहीं बल्कि सतत यात्रा है। जैसे-जैसे हम विकसित भारत की दिशा में काम कर रहे हैंस्वच्छता को सततलोगों के नेतृत्व वाला प्रयास बना रहना चाहिए जो सच्ची जनभागीदारी से संचालित हो।

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्रीराज्य मंत्रीसचिव-डीडीडब्ल्यूएसएएसएमडी-जेजेएम और एसबीएमजी और आर्थिक सलाहकार द्वारा स्वच्छता क्रॉनिकल्स वॉल्यूम III का शुभारंभ

 

जल शक्ति और रेल राज्य मंत्री श्री वीसोमन्ना ने कहा कि एसएसजी केवल एक सर्वेक्षण नहीं हैबल्कि राष्ट्रीय सत्यापन अभ्यास हैऔर राज्यों और जिलों को उनके ग्रामीण स्वच्छता प्रदर्शन पर रैंक करने का शक्तिशाली उपकरण है। उन्होंने सभी को याद दिलाया कि हमारे गाँव भारत की आत्मा हैं’ और उन्हें ओडीएफ प्लस मॉडल बनाना जीवंत और दृश्यमान वास्तविकता के रूप में देखा जाना चाहिए।

डीडीडब्ल्यूएस के सचिवश्री अशोक केके मीना ने बताया कि एसएसजी 2025 एसबीएम-जी चरण का हिस्सा है और इस बड़े प्रयास की सफलता सुनिश्चित करने के लिएराज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सटीक और समय पर आईएमआईएस रिपोर्टिंग सुनिश्चित करनी चाहिएक्षमता निर्माण के लिए जिला प्रशिक्षण प्रबंधन इकाइयों और स्वच्छाग्रहियों जैसे जमीनी स्तर के नेटवर्क को जुटाना चाहिए और सभी स्तरों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए।

एसएसजी 2025 का उद्देश्य ग्रामीण स्वच्छता की जमीनी स्थिति का गहन मूल्यांकन करना हैजिसमें एसबीएम-जी के तहत प्राप्त खुले में शौच मुक्त (ओडीएफप्लस मॉडल परिणामों को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। एसएसजी-2025 का व्यापक उद्देश्य एसबीएम-II के तहत पहचाने गए मात्रात्मक और गुणात्मक स्वच्छता मापदंडों के आधार पर भारत के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों की राष्ट्रीय रैंकिंग प्रदान करना है।

डीडीडब्ल्यूएस ने एक स्वतंत्र एजेंसी को नियुक्त किया है जो एसबीएम-जी चरण II दिशानिर्देशों के अनुरूप संरचित मूल्यांकन ढांचे का उपयोग करके सर्वेक्षण करेगी। एसएसजी-2025 नमूना गांव मूल्यांकन के माध्यम से एसबीएम-जी की प्रगति का पता लगाने में मदद करेगाप्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों (पीडब्लूएमयू)फेकल स्लज मैनेजमेंट (एफएसएमसंयंत्रोंगोबरधन संयंत्रनागरिक प्रतिक्रिया और स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग (एसजीएलआरसाइटों की कार्यक्षमता सहित विभिन्न स्वच्छता मापदंडों पर उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए गांवों में घरों (एचएचऔर सार्वजनिक स्थानों का सर्वेक्षण करेगा।

एसबीएम चरण-II के प्रमुख निष्पादन परिणामों के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए संरचित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा और उन्हें चार प्रमुख घटकों के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी:

 जिला स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और ओडीएफ प्लस मॉडल सत्यापित गांवों के डेस्कटॉप सत्यापन के आंकड़ों के आधार पर सेवा-स्तर की प्रगति (एसएलपी)

 नमूनाबद्ध गांवोंघरों और स्कूलोंसीएससी आदि सहित सार्वजनिक स्थानों में क्षेत्र-आधारित अवलोकन के माध्यम से गांवों की स्वच्छता स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन

 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयोंगोबरधन संयंत्रों और मल कीचड़ प्रबंधन प्रणालियों जैसे स्वच्छता बुनियादी ढांचे की कार्यक्षमता का प्रत्यक्ष अवलोकन

 एसएसजी 2025 नागरिक प्रतिक्रियामोबाइल एप्लिकेशन और क्षेत्र सर्वेक्षण के दौरान आमने-सामने बातचीत के माध्यम से एकत्र की गई

इन तत्वों को समग्र स्कोर प्राप्त करने के लिए उप-घटकों में समूहीकृत किया जाएगाजिससे पारदर्शीप्रौद्योगिकी-संचालित और समुदाय-नेतृत्व वाली मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित होगी। डेटा अखंडता को बनाए रखने के लिएसर्वेक्षण में जियो-फेंसिंग सुविधा शुरू की गई है और इसके अलावासार्वजनिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिएनागरिक प्रतिक्रिया एकत्र करने के लिए समर्पित मोबाइल ऐप बनाया गया है।

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 स्वच्छस्वस्थ और टिकाऊ ग्रामीण समुदायों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों मेंपंचायतोंस्थानीय नेताओंफ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और नागरिकों के सामूहिक प्रयास ग्रामीण भारत की स्वच्छता की कहानी को आकार देंगेजिससे राष्ट्र स्वच्छ भारत के लक्ष्य के करीब पहुँचेगा।

इस कार्यक्रम में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 के मूल्यांकन ढांचे और राज्य की सर्वोत्तम प्रथाओं के संकलनस्वच्छता क्रॉनिकल्स वॉल्यूम III का शुभारंभ किया गया।

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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-CIFA, भुवनेश्वर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ (VKSA-2025)’ का शुभारंभ किया

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR-CIFA, भुवनेश्वर में ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ (VKSA-2025)’ का शुभारंभ किया

 मत्स्य पालन भारत की खाद्य सुरक्षा का अभिन्न अंग – श्री शिवराज सिंह चौहानतकनीकों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की आवश्यकता है – श्री शिवराज सिंह किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए मजबूत मत्स्य क्षेत्र विकसित होना चाहिए- श्री चौहान कार्यक्रम में 600 से अधिक किसान एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं

भारतीय कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल के रूप मेंकेंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भुवनेश्वर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद  केंद्रीय मीठाजल मत्स्य पालन संस्थान (ICAR-CIFA), काउसल्यागंगा में 'विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA-2025)' का विधिवत शुभारंभ किया। यह अभियान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैजिसका उद्देश्य कृषि एवं मत्स्य पालन क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाकर एक टिकाऊ और समृद्ध भारत का निर्माण करना है।

अपने उद्घाटन भाषण में श्री चौहान ने VKSA-2025 की दूरदर्शी सोच को रेखांकित करते हुए बताया कि यह अभियान देश के 1.5 करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान न केवल तकनीकी प्रचार-प्रसार और क्षमता निर्माण पर केंद्रित हैबल्कि किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उन्हें नवाचारों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा। श्री चौहान ने मत्स्य पालन को भारत की खाद्य सुरक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए ICAR-CIFA द्वारा विकसित सभी तकनीकों को किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दियाताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो और एक मजबूत मत्स्य क्षेत्र विकसित हो सके।

इस अवसर पर ओडिशा सरकार के उपमुख्यमंत्री एवं कृषिकिसान सशक्तिकरण व ऊर्जा मंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देवमत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री श्री गोकुलानंद मलिकएकामरा विधायक श्री बाबू सिंह एवं पिपिली विधायक श्री अश्रित पटनायक उपस्थित रहे।

ICAR की ओर से महानिदेशक एवं सचिव (DARE) डॉ. एम. एल. जाटउपमहानिदेशक (मत्स्य विज्ञान) डॉ. जे. के. जेनाउपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह और ICAR-ATARI कोलकाता के निदेशक डॉ. प्रदीप डे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

डॉ. एम. एल. जाट ने VKSA-2025 को एक परिवर्तनकारी प्री-खरीफ अभियान करार देते हुए कहा कि यह पहल वैज्ञानिक शोध को किसानों की ज़मीनी ज़रूरतों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम में 600 से अधिक किसान एवं स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं शामिल हुईं और वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर कृषि व मत्स्य पालन से संबंधित उन्नत तकनीकोंसतत खेती के तरीकों और एकीकृत दृष्टिकोणों की जानकारी प्राप्त की। इस दौरानमत्स्य पालन क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में ICAR-CIFA द्वारा विकसित “CIFA Argu VAX–I” नामक एक नवाचारात्मक मछली टीके का लोकार्पण माननीय कृषि मंत्री द्वारा किया गया। यह टीका मछलियों में परजीवी संक्रमण की रोकथाम कर मत्स्यपालकों की आर्थिक हानि को कम करने में सहायक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम के दौरान एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गयाजिसमें स्वयं सहायता समूहों (SHGs), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), खोरधा और ICAR-CIFA द्वारा विकसित उत्पादों और नवाचारों को प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन समुदाय की भागीदारी और जमीनी स्तर पर नवाचार की शक्ति को दर्शाता है।

कार्यक्रम का सफल समापन उपमहानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआजिन्होंने सभी गणमान्य अतिथियोंप्रतिभागियों और सहयोगियों को इस अभियान की शुरुआत को ऐतिहासिक और प्रभावशाली बनाने के लिए धन्यवाद दिया।

यह अभियान 29 मई से 12 जून 2025 तक देशभर में चलाया जाएगाजिसका उद्देश्य एक समावेशीसशक्त और भविष्य-उन्मुख कृषि प्रणाली का निर्माण करना है।

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विकसित भारत के लिए विकसित कृषि: पुरी से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया महाभियान का शुभारंभ

विकसित भारत के लिए विकसित कृषि: पुरी से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया महाभियान का शुभारंभ

 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज श्री जगन्नाथपुरी में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी  उप-मुख्यमंत्री श्री कनक वर्धन सिंह देव के साथ राष्ट्रव्यापी 'विकसित कृषि संकल्प अभियानका शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सभी किसान भाई-बहनों से इस ऐतिहासिक अभियान से जुड़ने की अपील की है। 12 जून तक चलने वाले महाभियान में वैज्ञानिकों की टीमों ने गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद शुरू कर दिया है। कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डाएम.एलजाट सहित गणमान्यजन मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह की पहल पर शुरू किए गए इस वृहद अभियान को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य सरकारों तथा कृषि से जुड़ी सभी संस्थाओं के सहयोग से संचालित कर रहा हैजिसमें देशभर के सभी 731 कृषि विज्ञान केंद्र (केवीकेएवं कृषि विश्वविद्यालय भी सम्मिलित है। यह अभियान भारतीय कृषि की दिशा  दशा बदलने का मार्ग प्रशस्त करेगावहीं वैज्ञानिक नवाचार और जमीनी स्तर की भागीदारी के माध्यम से देश के खाद्य भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। 15 दिवसीय अभियान के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री चौहान लगभग 20 राज्यों की यात्रा करे किसानों  वैज्ञानिकों के साथ संवाद में शामिल होकर उत्साह बढ़ाएंगे।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार आगे के कृषि अनुसंधान का मार्ग तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें इस मिशन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। श्री चौहान ने सभी राज्यों से अभियान को सफल बनाने की अपील कीसाथ ही किसान भाइयों-बहनों से अपील करते हुए कहा कि 29 मई से 12 जून तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने में कोई कसर मत छोड़ना। उन्होंने किसानों से कहा कि वैज्ञानिक आपके गांव में  रहे हैंआप समय निकालिए और उनके साथ बैठिएखेती में नए प्रयोग सीखिए और उत्पादन बढ़ाइए। 'विकसित कृषि संकल्प अभियानका मतलब है कि वैज्ञानिक लैब से निकलकर खेत में किसानों के बीच जाएंगांव में आपके साथ बैठे।

श्री शिवराज सिंह ने वैज्ञानिकों से कहा कि आप किसानों की सेवा करने जा रहे हैंआपका सौभाग्य है कि गांवों में जाकर किसानों से बात करके उनकी फसल का उत्पादन बढ़ाने का मौका आपको मिल रहा हैइससे बड़ा कोई पुण्य हो नहीं सकता। श्री चौहान ने भगवान जगन्नाथ जी के चरणों में बारंबार प्रणाम करते हुए प्रार्थना की कि इस अभियान पर अपनी कृपा और आर्शीवाद की वर्षा करना।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि देश में अन्न के भंडार भरे रहेंकिसानों की आय बढ़ेइसके लिए हम गांव-गांव निकल रहे हैं। वैज्ञानिक अब लैब में नहीं बैठेंगेबल्कि लैंड तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। किसान जब खेत में बीज बोता है तो वो केवल बीज नहीं बोताजीवन बोता है। श्री चौहान ने कहा कि 16 हजार वैज्ञानिकों की 2170 टीमें बनाई गई हैंजो गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगी। हरेक टीम एक दिन में दो गांवों में जाएगी। 15 दिनों तक अभियान के दौरान क्षेत्र की जलवायुपानीमिट्टी के पोषक तत्वों  अन्य बातों को ध्यान में रखते हुए किसानों को सिखाया जाएगा कि उन्हें कौन-सी फसल उगानी चाहिएकौन-सी किस्म का उपयोग करना चाहिएउर्वरकों का उपयोग कैसे करना चाहिए आदि। साथ हीप्राकृतिक खेती और दलहन  तिलहन की खेती के बारे में किसानों से चर्चा की जाएगी। वैज्ञानिक सीधे संवाद के माध्यम से किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करेंगे।

श्री शिवराज सिंह ने कृषि उत्पादन में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि इस साल देश में 3539.59 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न हुआ हैजो पिछले साल से 216.61 लाख मीट्रिक टन ज्यादा हैलेकिन हमें रूकना नहीं हैबल्कि और खाद्यान्न पैदा करना है। भारत केवल भारत की जनता का पेट नहीं भरेगाहमको दुनिया का फूड बॉस्केट बनना है। अगर उत्पादन बढ़ाना है तो सबसे आवश्यक है अच्छे बीज। श्री चौहान ने ICAR के वैज्ञानिकों को बधाई दी कि वे लैब में निरंतर प्रयोग करके नए बीज तैयार कर रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। कल ही केंद्रीय कैबिनेट ने 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री जी चाहते हैं कि कृषि उत्पादन बढ़ेलागत घटे और खेती लाभ का धंधा बनें। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय कृषि और किसान दोनों समृद्ध हुए हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने कहा कि 'विकसित कृषि संकल्प अभियानकिसानों में आधुनिक तकनीकों  नई बीज किस्मों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भारत सरकार की एक अभूतपूर्व पहल है। इस अभियान के माध्यम से सरकार देश के 700 जिलों के लगभग 1.5 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी और उन्हें नई कृषि तकनीकों के अनुप्रयोग के बारे में जागरूक करेगी। श्री माझी ने कहा कि अभियान के जरिये प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प की दिशा में एक मजबूत अध्याय जोड़ने का प्रयास किया गया है।

 

श्री चौहान ने इस अवसर पर नए सम्मेलन सभागार का शुभारंभ कियासाथ ही ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ पुरी में 'विकसित कृषि संकल्प अभियानके अंतर्गत आयोजित तिरंगा यात्रा में सहभागिता की। केवीकेपुरी में अभियानके शुभारंभ से पहले मुख्यमंत्री तथा उप मुख्यमंत्री के साथ शिवराज सिंह ने पौधारोपण भी किया।

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा में एआई पर आधारित कॉन्क्लेव पढ़ाई में समापन भाषण दिया अब वक्त आ गया है कि देश की मानवीय बुद्धिमत्ता एआई क्रांति का नेतृत्व करे श्री धर्मेंद्र प्रधान

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा में एआई पर आधारित कॉन्क्लेव पढ़ाई में समापन भाषण दिया अब वक्त आ गया है कि देश की मानवीय बुद्धिमत्ता एआई क्रांति का नेतृत्व करे श्री धर्मेंद्र प्रधान

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में सेंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस (सीपीआरजीद्वारा आयोजित ‘पढ़ाई: शिक्षा में एआई पर सम्मेलन’ के समापन सत्र में समापन भाषण दिया। इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष श्री चमू कृष्ण शास्त्रीसीपीआरजी के निदेशक डॉ. रामानंद और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महज़ एक तकनीक नहींबल्कि शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाला और नवाचार की प्रेरणा देने वाला कारक है। उन्होंने कहा कि यह सहानुभूति और तकनीक के बीच का एक सेतु है। श्री प्रधान ने ज़ोर देते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि देश की मानव बुद्धिमत्ता, मौजूदा वक्त में एआई क्रांति का नेतृत्व करे। श्री प्रधान ने एआई पर सरकार द्वारा की गई अहम पहलों का भी ज़िक्र कियाजिनमें एआई में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना और भारतीय भाषाओं में एआई का लाभ उठाने और कक्षाओं में आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने की घोषणा शामिल है, जोकि एक ऐसी पहल है जो चॉकबोर्ड से चिपसेट तक के सफर में तमाम बदलावों को लाने में मददगार साबित हो रही हैं। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि स्कूली शिक्षा में एआई को एकीकृत करना अब विकल्प नहींबल्कि बेहद ज़रुरी हो गया है। उन्होंने शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों से इन विचारों पर मंथन करने और एआई पर नीतिगत सिफारिशें करने का आह्वान किया।

दो दिनों तक चले इस पढाई कॉन्क्लेव में भारतीय शिक्षा के भविष्य को आकार देने में एआई की भूमिका को लेकर विभिन्न विचार सामने आए। वक्ताओं ने चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह एआई कक्षाओं से परे, सीखने की विचारधारा का विस्तार कर रहा हैउच्च शिक्षा को बदल रहा है और मौजूदा संस्थानों में मुश्किलों को दूर कर रहा है।

कार्यक्रम में शामिल प्रख्यात वक्ताओं में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाददिल्ली सरकार के गृहबिजलीशहरी विकासशिक्षाउच्च शिक्षा और प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूदभारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशीइंडियाएआई मिशन के सीईओ श्री अभिषेक सिंहराष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ाराष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धेदिल्ली विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. योगेश सिंहइन्फो एज के सह-संस्थापक श्री संजीव बिकचंदानी और दिल्ली के हिगाशी ऑटिज्म स्कूल की अध्यक्ष डॉ. रश्मि दास भी शामिल थे।

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संघ लोक सेवा आयोग ने नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पेश किया

संघ लोक सेवा आयोग ने नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पेश किया

 संघ लोक सेवा आयोग पंजीकरण और ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के लिए एक नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल शुरू कर रहा है। यूपीएससी ऑनलाइन आवेदन पोर्टल में चार भाग हैंजिन्हें होम पेज पर अलग-अलग कार्ड में व्यवस्थित किया गया हैजिनमें से तीन अर्थात् अकाउंट क्रिएशन ,यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन और कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म में ऐसी जानकारी है जो सभी परीक्षाओं के लिए सामान है और उम्मीदवारों द्वारा कभी भी भरी जा सकती है। चौथे भाग यानी एक्जामिनेशन में परीक्षा नोटिसपरीक्षा आवेदन और आवेदन की स्थिति शामिल है। उम्मीदवारों द्वारा किसी परीक्षा की अधिसूचना में दी गई समय अवधि के दौरान केवल परीक्षा से संबंधित जानकारी ही इस भाग में भरी जानी है।

इस व्यवस्था से अभ्यर्थियों को प्रथम तीन भागों को किसी भी समय भरने तथा किसी भी यूपीएससी परीक्षा में आवेदन करने के लिए तैयार रहने की सुविधा मिलेगीजिससे समय की बचत होगी तथा अंतिम समय की भागदौड़ से बचा जा सकेगा।

सभी आवेदकों को https://upsconline.nic.in वेबसाइट का उपयोग करके नए शुरू किए गए पोर्टल पर नए सिरे से आवेदन भरना और अपने दस्तावेज़ अपलोड करना आवश्यक है । पुराना वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआरमॉड्यूल अब से लागू नहीं होगा।

आवेदन भरने और दस्तावेज अपलोड करने को अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन हेतु विस्तृत निर्देश होम पेज पर तथा सभी प्रोफाइल/मॉड्यूल पर उपलब्ध हैं।

आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे यूनिवर्सल एप्लीकेशन में पहचान दस्तावेज के रूप में अपने आधार कार्ड का उपयोग करेंताकि पहचान पत्र और अन्य विवरणों का आसानसरल और निर्बाध सत्यापन तथा प्रमाणीकरण हो सकेजिसके बाद यह सभी परीक्षाओं के लिए एक स्थायी और सामान्य रिकॉर्ड के रूप में कार्य करेगा।

नया आवेदन पोर्टल 28.05.2025 से लॉन्च किया जा रहा है। सीडीएस परीक्षा-II, 2025 और एनडीए और एनए-II, 2025 के लिए आवेदन,  28.05.2025 को अधिसूचित किए जाने वाले हैं। इन्हें नए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किया जाएगा।

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सरकार ने किसानों के समर्थन को किया मजबूत  संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) और केसीसी बनी कृषि ऋण की आधारशिला

सरकार ने किसानों के समर्थन को किया मजबूत संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) और केसीसी बनी कृषि ऋण की आधारशिला

 देशभर के किसानों को समर्थन देने के उद्देश्य सेकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तवर्ष 2025–26 के लिए संशोधित ब्याज अनुदान योजना (MISS) को जारी रखने की मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गतकिसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से ₹3 लाख तक के अल्पकालिक फसल ऋणों पर बैंकों को 1.5% वार्षिक ब्याज अनुदान मिलता रहेगा।

इस निर्णय से यह सुनिश्चित होता है कि समय पर पुनर्भुगतान करने वाले किसानों को 3%  शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन (PRI) सहित सिर्फ 4% की प्रभावी ब्याज दर पर कृषि ऋण प्राप्त होता रहेगा।

किसानों के लिए क्या लाभ होंगे:

  • सस्ता ऋणकिसान सिर्फ 4% वार्षिक ब्याज पर कार्यशील पूंजी प्राप्त कर सकेंगे — जो वैश्विक स्तर पर सबसे कम दरों में से एकहै।
  • लचीला ऋणकेसीसी के माध्यम से 5 वर्षों तक रिवॉल्विंग क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध है।
  • आपदा में राहतप्राकृतिक आपदा की स्थिति में एक वर्ष तक ब्याज राहत और गंभीर आपदाओं में 5 वर्षों तक राहत मिलती है।
  • छोटे और सीमांत किसानों को लाभअब 76% कृषि ऋण खाते छोटे किसानों के पास हैं — यह योजना भारतीय कृषि की रीढ़ को सशक्त बनाती है।
  • बिना जमानत ऋण: ₹2 लाख तक के ऋण के लिए कोई जमानत आवश्यक नहीं।
  • उत्पादकता में वृद्धिसरल ऋण उपलब्धता से बेहतर बीज,  उर्वरक और उपकरणों का उपयोग संभवजिससे उपज और आय में वृद्धि होती है।

क्रेडिट वृद्धि दर्शाती है योजना की सफलता:

  • KCC के माध्यम से ऋण वितरण ₹4.26 लाख करोड़ (2014) से बढ़कर ₹9.81 लाख करोड़ (2024) हो गया।
  • कुल कृषि ऋण प्रवाह ₹7.3 लाख करोड़ से बढ़कर ₹25.49 लाख करोड़ हुआ है।
  • संस्थागत ऋण का हिस्सा 75% से अधिक हो गया हैजिससे किसानों की साहूकारों पर निर्भरता घटी है।
  • कृषि क्षेत्र के एनपीए 2019 में 8.9% से घटकर 2023 में 7.2% हो गए हैंजबकि KCC के एनपीए 2021–22 में 12.66% से घटकर 2023–24 में 11.5% हो गए हैं — यह बेहतर ऋण प्रदर्शन और वसूली को दर्शाता है।

पारदर्शिता के लिए डिजिटल सुधार – किसान ऋण पोर्टल (KRP):

सरकार ने किसान ऋण पोर्टल (Kisan Rin Portal - KRPशुरू किया हैजो ब्याज अनुदान दावों की डिजिटल ट्रैकिंग को सक्षम बनाता है। इससे वितरण तेजपारदर्शी और उत्तरदायी बनता हैजिससे किसान और बैंक दोनों लाभान्वित होते हैं।

आगे की दिशा:

सरकार KCC की सीमा ₹5 लाख तक बढ़ाने के अपने बजट 2025 के वादे पर प्रतिबद्ध है।यह प्रस्ताव सक्रिय विचाराधीन है। आज का मंत्रिमंडल निर्णय मौजूदा प्रावधानों के तहत किसानों को सतत सहायता सुनिश्चित करता है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिक अलंकरण समारोह II में भाग लिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिक अलंकरण समारोह II में भाग लिया

 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नागरिक अलंकरण समारोह-II में भाग लिया। इस समारोह में पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। श्री मोदी ने कहा, "पद्म पुरस्कार विजेताओं ने हमारे समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वालों की जीवन यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक है।"

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया एम्स पर एक पोस्ट में लिखा:

"नागरिक अलंकरण समारोह-II में भाग लिया, जहां पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। पद्म पुरस्कार विजेताओं ने हमारे समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वालों की जीवन यात्रा अत्यंत प्रेरणा दायक है।"

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देश में जनजातीय विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम

देश में जनजातीय विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम

 आर्थिक विकास के लिए समर्पित है। पिछले दशक (2014-2025) में, एनएसटीएफडीसी ने आदिवासी उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और छात्रों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान करके अपनी पहुंच और प्रभाव का काफी विस्तार किया है।

अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम (एफआरए) ने आदिवासी और वनवासी समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले अन्याय को दूर करने में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह अधिनियम 13 विभिन्न व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों को मान्यता देता है और ग्राम सभाओं को जैव विविधता का प्रबंधन और संरक्षण करने का अधिकार देता है, जिससे सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित होते हैं। पिछले दशक में, इसके कार्यान्वयन में पर्याप्त प्रगति हुई है, जिससे वन प्रशासन में आदिवासी समुदायों की भूमिका मजबूत हुई है।

जहां तक ​​आदिवासी लोगों के स्वास्थ्य क्षेत्र का सवाल है, उनके मंत्रालय ने केंद्रीय बजट 2023-24 में सिकल सेल एनीमिया (एससीए) के कारण होने वाले स्वास्थ्य संकट को दूर करने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की घोषणा की है, खासकर भारत के आदिवासी क्षेत्रों में। यह मिशन वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के देश के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

• सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा 1 जुलाई 2023 को शहडोल, मध्य प्रदेश से शुभारंभ किया गया। सार्वभौमिक जांच अभियान के अंतर्गत 5 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की सिकल सेल एनीमिया के लिए जांच की गई।

• जागरूकता अभियान की मुख्य विशेषताएं: 19 जून से 3 जुलाई 2024 तक दो सप्ताह का राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया गया। 1.60 लाख कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें शामिल हैं: 1 लाख स्वास्थ्य शिविर; 27 लाख जांच परीक्षण किए गए; 13.19 लाख जांच कार्ड वितरित किए गए

• धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत सक्षमता केंद्र (सीओसी): आदिवासी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 14 राज्यों में 15 सक्षमता केंद्र स्वीकृत किए गए।

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भूमि संसाधन विभाग ने पंजीकरण विधेयक 2025 के मसौदे पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए

भूमि संसाधन विभाग ने पंजीकरण विधेयक 2025 के मसौदे पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए

 भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग ने आधुनिक, ऑनलाइन, कागज रहित और नागरिक केंद्रित पंजीकरण प्रणाली के साथ इसे संरेखित करने के लिए ‘पंजीकरण विधेयक 2025’ का मसौदा तैयार किया है। अधिनियमित होने के बाद, यह विधेयक संविधान-पूर्व पंजीकरण अधिनियम, 1908 का स्थान लेगा।

पंजीकरण अधिनियम, 1908 ने एक सदी से भी अधिक समय से भारत में दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली की आधारशिला के रूप में कार्य किया है। यह अचल संपत्ति और अन्य लेन-देन को प्रभावित करने वाले दस्तावेजों के पंजीकरण के लिए एक कानूनी आधार प्रदान करता है। समय के साथ, सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के लेन-देन में पंजीकृत दस्तावेजों की भूमिका काफी बढ़ गई है, जो अक्सर वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी निर्णय लेने का आधार बनते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि पंजीकरण की प्रक्रिया मजबूत, विश्वसनीय और विकसित सामाजिक और तकनीकी विकास के अनुकूल होने में सक्षम हो।

हाल के वर्षों में, प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग, सामाजिक-आर्थिक प्रथाओं के विकास और उचित परिश्रम, सेवा वितरण और कानूनी निर्णय के लिए पंजीकृत दस्तावेजों पर बढ़ती निर्भरता ने एक दूरदर्शी पंजीकरण ढांचा बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले से ही मौजूदा 1908 अधिनियम के तहत ऑनलाइन दस्तावेज़ जमा करने और डिजिटल पहचान सत्यापन जैसे नवाचारों की शुरुआत की है। इसके अलावा, पंजीकरण अधिकारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से चित्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि वे लागू कानून के अनुरूप पंजीकरण प्रक्रिया की अखंडता और विश्वसनीयता को बनाए रख सकें। इन प्रगति के आधार पर, अब पूरे देश में सुरक्षित, कुशल और नागरिक-केंद्रित पंजीकरण प्रथाओं का समर्थन करने के लिए एक सामंजस्यपूर्ण और सक्षम विधायी ढांचा प्रदान करने की आवश्यकता है। पंजीकरण विधेयक, 2025 को इस दृष्टि को साकार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

पूर्व-विधायी परामर्श प्रक्रिया के एक भाग के रूप में, ‘पंजीकरण विधेयक, 2025’ का मसौदा भूमि संसाधन विभाग की वेबसाइट पर https://dolr.gov.in/hi/ पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि 30 दिनों की अवधि के भीतर (दिनांक 25.06.2025 को या उससे पूर्व) निर्धारित प्रपत्र में जनता से सुझाव आमंत्रित किए जा सकें।

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क्रमांक

मसौदा विधेयक की धारा संख्या

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मसौदा विधेयक पर सुझाव/टिप्पणियाँ निम्नलिखित ईमेल आईडी - sanand.b@gov.in पर एमएस वर्ड (या संगत प्रारूप) या मशीन-पठनीय पीडीएफ प्रारूप में साझा की जा सकती हैं।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी

 केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में कल हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत आतंक के सामने नहीं झुकेगा और इस कायराना आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

श्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के परिजनों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पहलगाम के आतंकी हमले में अपनों को खोने का दर्द हर भारतीय को है, इस दुःख को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले के घटनास्थल का दौरा किया और अधिकारियों से घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की।

 

श्री शाह ने अस्पताल जाकर आतंकी हमले में घायल हुए लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया

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 दिन विशेष देश की रक्षा के लिए समर्पित है 15 जनवरी थल सेना दिवस

दिन विशेष देश की रक्षा के लिए समर्पित है 15 जनवरी थल सेना दिवस

एमसीबी /  जाता है। उन्होंने 15 जनवरी 1949 को भारतीय सेना की कमान संभाली थी। वह भारत के पहले सेना प्रमुख बने थे और उन्होंने देश की स्वतंत्रता के बाद सेना का नेतृत्व किया था। इस दिन का महत्व इस तथ्य में भी निहित है कि यह दिन भारतीय सेना की बहादुरी और बलिदान को याद दिलाता है। यह दिन उन सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। इस वर्ष 2025 में 77 वां भारतीय सेना दिवस पूरे देश में भव्य तरीके से मनाया जा रहा है। जिसमें सैन्य परेड और विभिन्न समारोह आयोजित किए जाएंगे। यह दिन भारतीय सेना की बहादुरी और समर्पण को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

थल सेना का इतिहास
भारतीय आर्मी का गठन ईस्ट इंडिया कंपनी ने साल 1776 में कोलकाता में किया था। इस सेना पर देश की आजादी से पहले ब्रिटिश कमांडर का अधिकार था। साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तब भी भारतीय सेना का अध्यक्ष ब्रिटिश मूल का ही होता था। 2 साल बाद यानी साल 1949 में आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर ने अपना पद छोड़ दिया। 1947 में स्वतन्त्रता मिलने के बाद ब्रिटिश भारतीय सेना को नये बने राष्ट्र भारत और इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान की सेवा करने के लिये 2 भागों में बाँट दिया गया। अधिकतर इकाइयों को भारत के पास रखा गया। चार गोरखा सैन्य दलों को ब्रिटिश सेना में स्थानांतरित किया गया जबकि शेष को भारत के लिए भेजा गया।
15 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं सेना दिवस
आधुनिक भारतीय सेना की शुरुआत 1 अप्रैल 1895 को हुई। उस वक्त इसे भारत को गुलाम बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्रेसिडेंसी आर्मी के रूप में खड़ा किया था। जिसे बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना के नाम से जाना गया। आखिरकार लंबे संघर्ष के बाद देश के आजाद होने के बाद यह भारतीय सेना कही जाने लगी। लेकिन 15 जनवरी 1949 तक इसके कमांडर ब्रिटिश सैन्य अधिकारी जनरल फ्रांसिस बुचर थे। आजादी के बाद 15 जनवरी 1949 को हमें पहले भारतीय सेना प्रमुख मिले. जिनका नाम फील्ड मार्शल केएम करियप्पा था। इसलिए 15 जनवरी को ही भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया।
सेना दिवस पर क्या होता है
भारतीय सेना दिवस के अवसर पर देश भर में विभिन्न समारोह आयोजित किए जाते हैं। जिनमें सैन्य परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सेना के जवानों को सम्मानित करने के कार्यक्रम शामिल हैं। सेना दिवस के मुख्य समारोह का आयोजन दिल्ली के छावनी के करिअप्पा परेड ग्राउंड में होता है, जहां भारतीय सेना के जवान अपनी बहादुरी और अनुशासन का प्रदर्शन करते हैं।
भारतीय सेना के बारे में कुछ रोचक तथ्य
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1.3 मिलियन भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सेना के लिए लड़ाई लड़ी थी, जिसमें से 74,000 से अधिक सैनिक शहीद हो गए। नई दिल्ली में स्थित इंडिया गेट इन बहादुर सैनिकों की याद में बनाया गया है।भारतीय सेना का इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध है, और इसमें कई महत्वपूर्ण घटनाएं और युद्ध शामिल हैं। भारतीय सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना है। जिसमें 12 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक और 9 लाख आरक्षित सैनिक शामिल हैं। भारतीय सेना दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र, सियाचिन ग्लेशियर को नियंत्रित करती है। जो समुद्र तल से 20,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैप्यह गैर-ध्रुवीय क्षेत्रों में दूसरा सबसे लंबा ग्लेशियर भी है। 61वीं कैवेलरी रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे बड़ी घुड़सवार इकाइयों में से एक है और दुनिया की आखिरी सक्रिय और गैर-यंत्रीकृत घुड़सवार इकाइयों में से भी एक है। अनुशासन और युद्ध कौशल के लिए प्रसिद्ध भारतीय सेना विश्व में चौथे स्थान पर आती है। जो केवल अमेरिका, रूस और चीन के बाद है, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है, और वर्तमान में 6,000 से अधिक भारतीय सैनिक विभिन्न मिशनों में तैनात हैं। 2013 में उत्तर भारत में आई भीषण बाढ़ के दौरान भारतीय सेना ने "ऑपरेशन राहत" में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस मिशन में भारतीय वायुसेना ने 19,600 से अधिक लोगों को एयरलिफ्ट किया। जबकि भारतीय सेना ने 10,500 से अधिक लोगों को सड़कों और हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाया। 1982 में, भारतीय सेना ने लद्दाख में विश्व का सबसे ऊंचा पुल दाबेली ब्रिज बनाया। यह पुल समुद्र तल से 18,739 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी लंबाई 98 फीट है।
भारतीय सेना के पास कुशल डॉग स्क्वॉड भी है, जिसमें जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और बेल्जियन मेलिनॉय जैसी नस्लें शामिल हैं। ये प्रशिक्षित कुत्ते विस्फोटक खोजने, ट्रैकिंग और बचाव कार्यों जैसे अभियानों में सेना की महत्वपूर्ण सहायता करते हैं। भारतीय सेना न केवल अपनी बहादुरी के लिए जानी जाती है, बल्कि उसके रोचक इतिहास और शानदार परंपराओं के लिए भी सम्मिलित है। गोरखा रेजीमेंट गोरखा सैनिकों ने कारगिल युद्ध सहित कई अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया है।
देश के लिए थल सेना का योगदान
भारतीय थल सेना ने देश की रक्षा के लिए कई युद्ध लड़े हैं और हमेशा देश की सीमाओं की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। सेना ने प्राकृतिक आपदाओं के समय भी लोगों की मदद की है। थल सेना दिवस एक ऐसा अवसर है। जब हम सभी एक साथ आकर अपने देश के वीर सैनिकों को धन्यवाद देते हैं।
सुरक्षा और रक्षा में योगदान
सीमा सुरक्षा थल सेना देश की सीमाओं की रक्षा करती है और विदेशी हमलों से बचाव करती है। आंतरिक सुरक्षा थल सेना आंतरिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जैसे कि आतंकवाद विरोधी अभियान और नक्सलवाद विरोधी अभियान। प्राकृतिक आपदा में सहायता: थल सेना प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि बाढ़, भूकंप और तूफान में राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान
राष्ट्र निर्माण थल सेना ने देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में मदद की। विकास कार्यों में सहायता: थल सेना विकास कार्यों में भी सहायता प्रदान करती है, जैसे कि सड़क निर्माण, पुल निर्माण और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास में। सामाजिक कार्यों में सहायता थल सेना सामाजिक कार्यों में भी सहायता प्रदान करती है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम आदि।

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 सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतियोगियों के चयन हेतु समिति गठित

सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतियोगियों के चयन हेतु समिति गठित

एमसीबी / छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर के पत्र के परिपालन में 15 अगस्त 2024 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन किया जाना है। अतएवः उक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतियोगियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान का चयन करने हेतु समिति का गठन किया गया है। जिसमें परियोना निदेशक श्री नितेश उपाध्याय को अध्यक्ष, डिप्टी कलेक्टर श्री प्रितेश सिंह राजपूत को सदस्य तथा जिला शिक्षा अधिकारी श्री अजय कुमार मिश्रा को सदस्य नियुक्त किया गया है।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल के माध्यम से करेंगे हितग्राहियों से संवाद अब 10 मार्च को महतारी वन्दन योजना से मिलेगी प्रथम क़िस्त की राशि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल के माध्यम से करेंगे हितग्राहियों से संवाद अब 10 मार्च को महतारी वन्दन योजना से मिलेगी प्रथम क़िस्त की राशि

कोरिया 8 मार्च 2024। राज्य सरकार की बहुप्रतीक्षित महतारी वंदन योजना की पहली किस्त की राशि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च को दोपहर 2 बजे  वर्चुअल कार्यक्रम के तहत वितरण करेंगे। 
महतारी वंदन योजना का आयोजन बैकुंठपुर विकासखण्ड एवं सोनहत विकासखण्ड के अलावा नगरीय निकाय में भी किया जाएगा। बता दें यह आयोजन प्रदेश के सभी 146 विकासखंडों एवं नगरीय निकायों में होने जा रहा। राज्यस्तर कार्यक्रम रायपुर के विज्ञान महाविद्यालय, मैदान में आयोजित है। 

*जिले के 60 हजार 21 विवाहित महिलाओं को मिलेगा लाभ*

कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखण्ड के तहत 45 हजार 916 तथा सोनहत विकासखण्ड से 14 हजार 105 इस तरह 60 हजार 21 विवाहित महिला हितग्राहियों को एक हजार रुपए के मान से उनके खाते में प्रथम क़िस्त राशि डाले जाएंगेl

*प्रदेश के 70 लाख विवाहित महिलाओं को मिलेगा लाभ*

प्रदेश के 70 लाख विवाहित महिलाओं के खाते में योजना की प्रथम क़िस्त की राशि 700 करोड़ रुपए डाले जांएगे।

*महिलाओं के जीवन में एक नया उजियारा*
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के लाखो महिलाओं के जीवन में एक नया उजियारा लाने का प्रयास किया है। महतारी वन्दन योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होगी वहीं इस राशि से स्वास्थ्य, घरेलू खर्च, बच्चों के शिक्षा जैसे कार्यों में भी उपयोग कर सकेंगी।
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