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विश्व पर्यावरण दिवस पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस बड़े उत्साह एवं संकल्प के साथ मनाया गया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए वृक्षारोपण एवं जागरूकता से जुड़े विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।
बिलासपुर स्थित नवीन अधिकारी विश्राम गृह के समीप "मधुवन उद्यान" में वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश ने किया। उन्होंने नीम का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण हेतु संकल्प व्यक्त किया। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक श्री राजमल खोईवाल, विभागाध्यक्षगण, अधिकारीगण तथा स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति में लगभग 1000 फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया।

कार्यक्रम में स्काउट एंड गाइड, नागरिक सुरक्षा संगठन, सेंट जॉन एम्बुलेंस, स्कूल के बच्चों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश ने इस अवसर पर कहा कि पर्यावरण संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कटौती, अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे टिकाऊ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने “प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करें” विषय पर आधारित इस वर्ष के पर्यावरण दिवस की थीम को महत्वपूर्ण बताया और प्लास्टिक से हो रहे नुकसान के प्रति सभी को सचेत किया।
विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 22 मई से 4 जून 2025 तक पर्यावरण संरक्षण पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान 12 कार्यशालाएं, 180 सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम और सोशल मीडिया अभियान चलाए गए। 8 प्लास्टिक संग्रहण ड्राइव के माध्यम से स्टेशनों पर स्थापित प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनों की स्थिति और रखरखाव की समीक्षा की गई।
स्टेशनों पर विशेष अभियान चलाकर केटरिंग स्टालों की जांच की गई एवं विक्रेताओं को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचने व पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने हेतु दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। यात्रियों को अपनी बोतलों का उपयोग करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए वाटर रीफिल पॉइंट्स की जांच की गई और उद्घोषणाएं की गईं।

“सतत रेलवे संचालन” विषय पर आधारित व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों के अंतर्गत बिलासपुर समेत सभी प्रमुख स्टेशनों पर स्वच्छता, ऊर्जा संरक्षण, जल बचत और पर्यावरण सुरक्षा पर बल दिया गया। स्टेशनों, कॉलोनियों, गार्डनों और ट्रैक के आसपास 180 सफाई अभियानों का संचालन कर सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित की गई।
“गीला कचरा-सूखा कचरा” विषय पर 22 नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से जनजागरूकता फैलाई गई। साथ ही, स्कूली बच्चों एवं रेलकर्मियों के लिए 17 ड्राइंग, निबंध एवं क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इसी प्रकार पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहलों को सुदृढ़ रूप से आगे बढ़ाता रहेगा।
एक सहानुभूतिशील सरकार गरीब कल्याण के लिए समर्पित प्रधानमंत्री
पिछले 11 वर्षों में हमारी सरकार का हर कदम सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के लिए समर्पित रहा है: प्रधानमंत्रीहमारी सरकार के सर्वांगीण विकास के प्रयासों से परिवर्तनकारी परिणाम सामने आए हैं और गरीबों तथा वंचित वर्ग लोगों को लाभ मिला है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब कल्याण के प्रति एनडीए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया, क्योंकि देश परिवर्तनकारी और समावेशी शासन के 11 वर्ष पूर्ण कर रहा है। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे और समावेश पर केंद्रित एक सहानुभूतिपूर्ण सरकार ने 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रधानमंत्री ने पीएम आवास योजना, पीएम उज्ज्वला योजना, जन धन योजना और आयुष्मान भारत जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं के प्रभाव पर भी उल्लेख किया, जिससे आवास, भोजन पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का विस्तार हुआ है। उन्होंने लाभों के पारदर्शी और कुशल वितरण को सुनिश्चित करने में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी), डिजिटल समावेशन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के महत्व को भी रेखांकित किया।
एक्स पर अपनी एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा;
"गरीब कल्याण के प्रति समर्पित एक सहानुभूतिपूर्ण सरकार!
पिछले एक दशक में, एनडीए सरकार ने कई लोगों को गरीबी की स्थिति से निकालने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे और समावेशन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। हमारी सभी प्रमुख योजनाओं ने गरीबों के जीवन को बदल दिया है। पीएम आवास योजना, पीएम उज्ज्वला योजना, जन धन योजना और आयुष्मान भारत जैसी पहलों ने आवास, स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच को बढ़ाया है। डीबीटी, डिजिटल समावेशन और ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर बल ने पारदर्शिता और अंतिम सिरे तक लाभों की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित की है।
इसी के कारण 25 करोड़ से अधिक लोगों ने गरीबी को मात दी है। एनडीए एक समावेशी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिले।
जैव प्रौद्योगिकी विभाग विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्वच्छता पखवाड़ा 2025 मनाया
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के रूप में नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय और अपने सभी स्वायत्त संस्थानों (एआई) तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में 1 मई से 15 मई 2025 तक स्वच्छता पखवाड़ा-2025 मनाया। यह पखवाड़ा केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी स्वच्छता पखवाड़ा-2025 के कैलेंडर के अनुसार आयोजित किया गया।
स्वच्छता पखवाड़ा 2025 की शुरुआत 1 मई 2025 को जैव प्रौद्योगिकी विभाग, सीजीओ कॉम्प्लेक्स नई दिल्ली में जैव प्रौद्योगिकी विभाग सचिव की अगुवाई में शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुई जिसमें विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों ने भाग लिया। सामूहिक शपथ ने स्वच्छता, अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की और पखवाड़े के दौरान होने वाली गतिविधियों के लिए माहौल तैयार किया। इस कार्यक्रम में उत्साही भागीदारी देखी गई और इसने पखवाड़े के लिए एक प्रेरक शुरुआत के रूप में कार्य किया। पखवाड़े के दौरान, विभिन्न स्वच्छता अभियान चलाए गए और जैव प्रौद्योगिकी विभाग और उसके एआई और पीएसयू द्वारा 188 गतिविधियों की योजना बनाई गई और उन्हें पूरा किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कार्य योजना में विभिन्न विशिष्ट विधियों को शामिल किया गया जैसे ई-कचरा बिन/सैनिटरी नैपकिन निपटान मशीन/उच्च क्षमता वाली अपशिष्ट श्रेडर मशीन आदि की स्थापना।


स्वास्थ्य जांच, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस), कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण सत्र, एकल प्लास्टिक उपयोग और तनाव प्रबंधन पर जागरूकता पर चर्चा, वृद्धाश्रम/नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड सेंटर दिल्ली में सफाई अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन शैली के लिए सामुदायिक दौड़, सैर, कार्यालय में महिला कक्ष का उद्घाटन भी किया गया। इसके अलावा, झुग्गी बस्तियों में पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाया गया, स्वच्छता के बारे में समुदाय को शिक्षित करने के लिए एआई के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया, पेंटिंग प्रतियोगिता, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
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जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पखवाड़े की निगरानी और मार्गदर्शन किया गया। स्वच्छता पखवाड़े के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने, प्रेरित करने और मार्गदर्शन देने के लिए समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। पुरस्कार के लिए तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कार्यालयों का चयन करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कार्यालयों को जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) द्वारा पुरस्कृत किया गया
जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्वच्छता पखवाड़ा-2025 मनाया
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के रूप में नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय और अपने सभी स्वायत्त संस्थानों (एआई) तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में 1 मई से 15 मई 2025 तक स्वच्छता पखवाड़ा-2025 मनाया। यह पखवाड़ा केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी स्वच्छता पखवाड़ा-2025 के कैलेंडर के अनुसार आयोजित किया गया।
स्वच्छता पखवाड़ा 2025 की शुरुआत 1 मई 2025 को जैव प्रौद्योगिकी विभाग, सीजीओ कॉम्प्लेक्स नई दिल्ली में जैव प्रौद्योगिकी विभाग सचिव की अगुवाई में शपथ ग्रहण समारोह के साथ हुई जिसमें विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों ने भाग लिया। सामूहिक शपथ ने स्वच्छता, अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि की और पखवाड़े के दौरान होने वाली गतिविधियों के लिए माहौल तैयार किया। इस कार्यक्रम में उत्साही भागीदारी देखी गई और इसने पखवाड़े के लिए एक प्रेरक शुरुआत के रूप में कार्य किया। पखवाड़े के दौरान, विभिन्न स्वच्छता अभियान चलाए गए और जैव प्रौद्योगिकी विभाग और उसके एआई और पीएसयू द्वारा 188 गतिविधियों की योजना बनाई गई और उन्हें पूरा किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कार्य योजना में विभिन्न विशिष्ट विधियों को शामिल किया गया जैसे ई-कचरा बिन/सैनिटरी नैपकिन निपटान मशीन/उच्च क्षमता वाली अपशिष्ट श्रेडर मशीन आदि की स्थापना।


स्वास्थ्य जांच, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस), कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण सत्र, एकल प्लास्टिक उपयोग और तनाव प्रबंधन पर जागरूकता पर चर्चा, वृद्धाश्रम/नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड सेंटर दिल्ली में सफाई अभियान, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन शैली के लिए सामुदायिक दौड़, सैर, कार्यालय में महिला कक्ष का उद्घाटन भी किया गया। इसके अलावा, झुग्गी बस्तियों में पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाया गया, स्वच्छता के बारे में समुदाय को शिक्षित करने के लिए एआई के छात्रों द्वारा नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया, पेंटिंग प्रतियोगिता, पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
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जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पखवाड़े की निगरानी और मार्गदर्शन किया गया। स्वच्छता पखवाड़े के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने, प्रेरित करने और मार्गदर्शन देने के लिए समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। पुरस्कार के लिए तीन सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कार्यालयों का चयन करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले कार्यालयों को जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) द्वारा पुरस्कृत किया गया।
भारत को मिली अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान की अध्यक्षता
भारत, प्रशासनिक सुधार विभाग के माध्यम से, 1998 से, अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान का सदस्य देश है। अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान, 31 सदस्य देशों, 20 नेशनल सेक्शंस और 15 शैक्षणिक अनुसंधान केंद्रों का एक संघ है जो लोक प्रशासन पर वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए संयुक्त रूप से सहयोग करता है। इसके प्रमुख सदस्य देश हैं - भारत, जापान, चीन, जर्मनी, इटली, कोरिया, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड, मैक्सिको, स्पेन, कतर, मोरक्को, इंडोनेशिया आदि ।
आईआईएएस, संयुक्त राष्ट्र के साथ घनिष्ठ कार्य संबंध बनाए रखता है, और संयुक्त राष्ट्र की लोक प्रशासन पर विशेषज्ञों की समिति (सीईपीए) और संयुक्त राष्ट्र लोक प्रशासन नेटवर्क (यूएनपीएएन) में भाग लेता है। जबकि आईआईएएस, संयुक्त राष्ट्र का औपचारिक रूप से संबद्ध निकाय नहीं है, यह लोक प्रशासन में संयुक्त राष्ट्र के कार्य से सक्रिय रूप से जुड़ा है।
आईआईएएस के 2025-2028 के अध्यक्ष पद के लिए, माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी ने नवंबर 2024 में सचिव डीएआरपीजी श्री वी. श्रीनिवास की भारतीय उम्मीदवारी को नामित किया। आईआईएएस अध्यक्ष पद के लिए सुनवाई फरवरी 2025 में हुई - भारत, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रिया और बहरीन ने आईआईएएस की प्रशासन परिषद के समक्ष सुनवाई में भाग लिया। सुनवाई के बाद, भारत, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रिया की उम्मीदवारी को अगले दौर के लिए आईआईएएस की आम सभा में भेज दिया गया। मई 2025 में दक्षिण अफ्रीका ने भारत के पक्ष में अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। 3 जून, 2025 को भारत और ऑस्ट्रिया के बीच चुनाव हुआ, जिसमें 141 वोट पड़े, जिनमें से भारत ने 87 वोट (61.7 प्रतिशत वोट) प्राप्त किए, और ऑस्ट्रिया ने 54 वोट प्राप्त किए(38.3.7 प्रतिशत वोट)
आईआईएएस की भारतीय अध्यक्षता, माननीय प्रधानमंत्री मोदी के "अधिकतम शासन - न्यूनतम सरकार" के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी, जिसमें नागरिकों के डिजिटल सशक्तिकरण और संस्थानों के डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करते हुए अगली पीढ़ी के प्रशासनिक सुधारों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। भारतीय अध्यक्षता एकता और समावेशिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्तर-दक्षिण विभाजन को पाटने का प्रयास करेगी।
कॉर्पोरेट प्रबंधन और विकास को बढ़ावा देते हुए आईआईसीए पूर्वोत्तर में पहला क्षेत्रीय परिसर खोलेगा
आईआईसीए शिलांग परिसर प्रमुख क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति सलाह के लिए क्षेत्रीय केंद्र के रूप में काम करेगा; इसमें प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर विकास पहल (पीएम-डेवआईएनई) के तहत निवेश होगा
समावेशी राष्ट्रीय विकास और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के तहत भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) ने अपने पहले क्षेत्रीय परिसर के लिए मेघालय के न्यू शिलांग टाउनशिप में औपचारिक रूप से पांच एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया। यह पहल पूर्वोत्तर में आईआईसीए के महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है, जो कॉर्पोरेट प्रबंधन उत्कृष्टता और सतत विकास के प्रति इसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।

भूमि हस्तांतरण समारोह की अध्यक्षता मेघालय सरकार के मुख्य सचिव श्री डोनाल्ड फिलिप्स वाहलांग और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव सुश्री दीप्ति गौर मुखर्जी ने की। आईआईसीए के महानिदेशक और सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह; कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री इंद्रदीप सिंह धारीवाल; योजना विभाग के आयुक्त और सचिव श्री सीवीडी डिएंगदोह; आईआईसीए के श्री (कर्नल) अमनदीप सिंह पुरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। भूमि हस्तांतरण और अधिग्रहण का कार्य मेघालय सरकार की ओर से योजना विभाग के संयुक्त सचिव श्री के. हिनीवता और भारत सरकार की ओर से उप सचिव श्री शेखर श्रीवास्तव ने किया।

इस विजन की सराहना करते हुए मुख्य सचिव ने ज्ञान आधारित विकास के लिए मेघालय की प्रतिबद्धता व्यक्त की और नॉलेज सिटी क्लस्टर के भीतर आईआईसीए परिसर के इस युक्तिपूर्ण स्थान के बारे में बताया। इस क्षेत्र में पहले से ही आईआईएम शिलांग, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी मेघालय और निफ्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं - जो समृद्ध शैक्षणिक और पेशेवर तालमेल वाला बेहतरीन स्थान है। उन्होंने यह भी बताया कि शिलांग में जल्द ही एक नये हवाई अड्डे का निर्माण किया जाएगा, जो क्षेत्रीय संपर्क को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा और पूरे भारत के पेशेवरों, शिक्षकों और छात्रों के लिए इस परिसर को आसानी से सुलभ बना देगा। यह बुनियादी ढांचागत विकास पूर्वोत्तर में एक प्रमुख शैक्षणिक और नीति केंद्र के रूप में शिलांग की उभरती स्थिति को और मजबूत करेगा।
आईआईसीए के महानिदेशक और सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने इस क्षण को ऐतिहासिक बताया और आईआईसीए के शिलांग परिसर को "दिल्ली के बाहर हमारा पहला बच्चा- विकेंद्रीकरण और सशक्तीकरण का प्रतीक" बताया। उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस , आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @ 2047 जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ तालमेल में उद्यमशीलता, क्षमता निर्माण और सुशासन का समर्थन करने में नए परिसर की भूमिका पर जोर दिया। राइजिंग नॉर्थ ईस्ट पहल के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए, महानिदेशक श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लगातार पूर्वोत्तर को "भारत की अष्टलक्ष्मी" के रूप में बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र विविधता, प्रतिभा और क्षमता से समृद्ध है। इस दृष्टिकोण के साथ उन्होंने कहा, "आईआईसीए को इस क्षेत्र को एक दूरस्थ परिधि से नए भारत के गतिशील विकास इंजन में बदलने का हिस्सा बनने पर गर्व है।"

आईआईसीए महानिदेशक ने यह भी कहा, "यह पहल हमारे प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के मंत्र से गहराई से जुड़ी है। शिलांग में हमारा परिसर आईआईसीए का महज एक विस्तार नहीं है - यह 'परिवहन से परिवर्तन' के लिए एक प्रतिबद्धता है। प्रधानमंत्री ने ऐसी कल्पना की थी, जहां बुनियादी ढांचा और ज्ञान संस्थान मिलकर शांति, समृद्धि और उद्देश्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।"
प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर विकास पहल (पीएम-डेवीन) के तहत 100.95 करोड़ रुपये के निवेश से शिलांग परिसर कॉर्पोरेट प्रबंधन, ईएसजी, सीएसआर, दिवाला और दिवालियापन, प्रतिस्पर्धा कानून जैसे प्रमुख क्षेत्रों और बोर्ड नेतृत्व में विशेष प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति सलाह के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में काम करेगा।
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव सुश्री दीप्ति गौर मुखर्जी ने अपने संबोधन में मेघालय सरकार के सक्रिय और उदार समर्थन की सराहना की और बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी सहकारी संघवाद की भावना और नए भारत के विकास इंजन के रूप में पूर्वोत्तर को सशक्त बनाने के केंद्र के दृष्टिकोण को दर्शाती है।

जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने के साथ इस परिसर में शैक्षणिक और सलाहकार कार्यक्रम चालू वित्त वर्ष में शुरू होने वाले हैं। आईआईसीए ने अपने पिछले प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पहले ही पूर्वोत्तर क्षेत्र की सेवा की है, जिससे 300 से अधिक पेशेवरों को लाभ मिला है और स्वतंत्र निदेशक डेटाबैंक का प्रबंधन जारी है, जिसमें सभी पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व शामिल है।
भविष्य में आईआईसीए ज्ञान नगरी में राज्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोगात्मक कार्यक्रमों को बढ़ावा देगा, ताकि क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अनुरूप प्रशिक्षण, नीति समर्थन और क्षमता निर्माण पहल प्रदान की जा सके।
यह विस्तार पूर्वोत्तर के हृदयस्थल से नैतिक उद्यमियों, कुशल पेशेवरों और जिम्मेदार नेताओं को आकार देने में दीर्घकालिक साझेदार के रूप में काम करने के आईआईसीए के संकल्प को दर्शाता है।
राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) का विस्तार होगा श्री संजय सेठ ने तीन लाख नए कैडेट जोड़ने की घोषणा की
रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने 03 जून, 2025 को भोपाल में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के विशेष संयुक्त राज्य प्रतिनिधियों और अतिरिक्त/उप महानिदेशकों (जेएस आरएंडए/डी) के सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने इस दौरान देश भर में तीन लाख कैडेटों को जोड़ने के साथ एनसीसी के योजनाबद्ध तरीके से विस्तार की भी घोषणा की, जिसके लिए कई राज्य पहले ही सहमति दे चुके हैं और प्रशिक्षण के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे में तीव्र गति से वृद्धि के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की समीक्षा बैठक आयोजित
मोदी सरकार की दूरदर्शी अन्न भंडारण योजना से PACS की आय और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि होगी PACS को ऋण सुविधा में विस्तार किया जाये और योजना में PACS की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो FCI, NCCF, NAFED और राज्य वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन PACS को अधिक से अधिक गोदामों के साथ जोड़ें संपूर्ण सहकारी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए अपने स्तर पर अधिक से अधिक PACS को शामिल करें सभी राज्य, स्तरीय मार्केटिंग फेडरेशनों को भी इससे जोड़ें अन्न भंडारण योजना का समन्वय के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन हो, यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की ओर महत्वपूर्ण कदम होगा
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली स्थित सहकारिता मंत्रालय में सहकारिता क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्णपाल गुर्जर एवं श्री मुरलीधर मोहोल के अलावा सहकारिता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, उपभोक्ता मंत्रालय, भारतीय खाद्य निगम (FCI), नाबार्ड, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) सहित अन्य संगठनों के अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “सहकार से समृद्धि” के विज़न को साकार करने की दिशा में विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में आर्थिक प्रगति को मापने के दो प्रमुख मापदंड हैं—सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और रोजगार सृजन। अन्न भंडारण योजना इन दोनों पहलुओं को सशक्त बनाने का माध्यम है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार के अवसरों को सृजित करना है। श्री शाह ने कृषि अवसंरचना निधि (AIF) के अंतर्गत ऋण अवधि के विस्तार से PACS की वित्तीय स्थिति में सुधार हेतु त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने अन्न भंडारण योजना में PACS की व्यापक भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि यह जरूरी है कि PACS को इस योजना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए ताकि PACS की वित्तीय व्यवहार्यता और सामाजिक प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने FCI, NCCF, NAFED और राज्य वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशनों को PACS को अधिक से अधिक गोदामों से जोड़ने के लिए ठोस दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्यों को अपने स्तर पर अधिक से अधिक PACS को इस योजना में शामिल करना चाहिए, और राज्य स्तरीय मार्केटिंग फेडरेशनों को भी इससे जोड़ा जाना चाहिए ताकि एक संपूर्ण सहकारी आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जा सके।
केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सभी उपस्थित संगठनों से समन्वय के साथ योजना को समयबद्ध और प्रभावशाली तरीके से लागू करने का आह्वान किया ताकि यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य की पूर्ति में मील का पत्थर सिद्ध हो।
तिरंगा रैली फिट Thanks संडे ऑन साइकिल के 25वें संस्करण में सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि दी गई विश्व साइकिल दिवस मनाया गया
डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली में राष्ट्रव्यापी रैली का नेतृत्व किया, कार्बन क्रेडिट ट्रैकर लॉन्च किया, अभिनेत्री शरवरी को यंग फिट इंडिया आइकन के रूप में सम्मानित किया
तिरंगा साइकिलिंग रैली के रूप में फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 25वें संस्करण का आज सुबह पूरे देश में सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इसमें देशभक्ति, फिटनेस और पर्यावरण जागरूकता की भावना के साथ 5000 से अधिक स्थानों से 15000 से अधिक साइकिल चालक भारत के सशस्त्र बलों को राष्ट्रव्यापी श्रद्धांजलि देने के लिए शामिल हुए।
माननीय केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने यहां मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में 1500 से अधिक साइकिल चालकों का नेतृत्व किया। उनके साथ सचिव (खेल) श्री हरि रंजन राव, खेल जगत की हस्तियां - ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त, क्रिकेटर सबा करीम, पहलवान सरिता मोर, बॉलीवुड अभिनेत्री शारवरी और भारतीय साइकिलिंग टीम भी थी।

रविवार की सुबह की एक मुख्य बात यह रही कि जम्मू और कश्मीर के कई क्षेत्रों- जम्मू, पुंछ, किश्तवाड़, कुलगाम, बांदीपोरा, शोपियां, बारामुल्ला, बडगाम, सांबा आदि से साइकिल चालकों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ये साइकिल अभियान कई खेलो इंडिया सेंटर (केआईसी), खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (केआईएससीई) और साई ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) द्वारा आयोजित किए गए थे।
सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि देते हुए, खास तौर पर हाल ही में सफल ऑपरेशन सिंदूर के मद्देनजर, डॉ. मांडविया ने इस संस्करण के गहन महत्व पर जोर दिया। माननीय मंत्री ने कहा, "यह तिरंगा रैली हमारे जवानों और उनके बलिदान को सलाम है। फिटनेस और देशभक्ति एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।"
इस ऐतिहासिक संस्करण में दो प्रमुख पहलों- फिट इंडिया न्यूज़लैटर और फिट इंडिया मोबाइल ऐप पर कार्बन क्रेडिट फ़ीचर की शुरुआत की गई। इसमें साइकिल चालक अब नियमित रूप से साइकिल चलाकर बचाए गए कार्बन क्रेडिट को ट्रैक कर सकते हैं। डॉ. मांडविया ने कहा, "ऐप का एक बार डाउनलोड करने पर आप फिट इंडिया अभियान का हिस्सा बन जाएंगे।" "आपकी गति - 7 से 34 किमी प्रति घंटे तक - और आपकी दूरी दर्ज की जाएगी, और आपके कार्बन क्रेडिट जोड़े जाएंगे।"

हाल ही में शुरू किया गया फिट इंडिया न्यूज़लेटर एक मासिक डाइजेस्ट होगा। इसमें प्रेरक समाचारों के साथ-साथ विभिन्न फिटनेस इन्फ्लूएंसर्स से अपडेट और प्रशिक्षण युक्तियां भी शामिल होंगी।
अभिनेत्री शरवरी को उभरती सुपरस्टार के रूप में जाना जाता है और उन्होंने मुंजिया और महाराजा जैसी फिल्मों में काम किया है। डॉ. मांडविया ने इस कार्यक्रम में अभिनेत्री शरवरी को 'यंग फिट इंडिया आइकन' की उपाधि से सम्मानित किया। उन्होंने कहा, "यह आंदोलन बहुत बड़ा है और फिट इंडिया आइकन बनना सम्मान की बात है। साइकिल चलाना मुझे स्कूल की गर्मियों की छुट्टियों की याद दिलाता है - हम सभी साइकिल किराए पर लेते थे और निकल पड़ते थे," उन्होंने आगे कहा, "यह साइकिल रैली मेरे लिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमारे बहादुर सैनिकों के लिए है। हम उनके कारण अपने घरों में शांति से सो सकते हैं और इस तिरंगा रैली के माध्यम से उनकी बहादुरी को श्रद्धांजलि देना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।"

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल पहल दिसंबर 2024 में 150 साइकिल चालकों के साथ शुरू हुई थी और छह महीने के अंतराल में इसमें भागीदारी का आंकड़ा कई गुना बढ़ गया है। इस बढती संख्या का श्रेय सीआईएसएफ, भारतीय चिकित्सा संघ, पत्रकार
संघों, शिक्षकों, कॉरपोरेट्स और कई अन्य क्षेत्रों के पेशेवरों जैसे भागीदारों को जाता है जिनके कारण यह संभव हुआ। इस संस्करण में, विशेष भागीदार साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, योगासन भारत, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज, बीवाईसीएस इंडिया, कल्टफिट और रेड एफएम थे।

ओलंपियन और कुश्ती चैंपियन योगेश्वर दत्त ने इस पहल को 'एक ऐसा आंदोलन बताया जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ता है।' उन्होंने कहा, "अगर हम स्वस्थ रहेंगे तो देश स्वस्थ रहेगा। युवा बच्चे, बुजुर्ग, सभी इसमें भाग ले रहे हैं। यही इस अभियान की ताकत है।"
पूरे भारत के कई एथलीट भी संडे ऑन साइकिल के 25वें संस्करण को सफल बनाने के लिए शामिल हुए। ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता दीपा करमाकर ने एसएआई प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) अगरतला में रैली को हरी झंडी दिखाई जबकि एसएआई सोनीपत में दीपिका कुमारी (पद्म श्री पुरस्कार विजेता तीरंदाज), पूर्णिमा महतो (पद्म श्री तीरंदाजी प्रशिक्षक), अर्जुन पुरस्कार विजेता सुमित अंतिल, पैरालिंपिक डबल गोल्ड मेडलिस्ट और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता ज्योति सुरेखा, ओजस देवताले, अदिति गोपीचंद स्वामी, पैरालिंपियन सुंदर गुर्जर और पुष्पेंद्र ने भाग लिया। प्रसिद्ध भारतीय हॉकी खिलाड़ी एसके उथप्पा भी एसएआई बेंगलुरु में मौजूद थे। इस बीच, एसएआई रोहतक में अखिल भारतीय पुलिस बल ने इसमें बड़ी संख्या में भाग लिया।
उत्तराखंड की माननीया खेल मंत्री श्रीमती रेखा आर्य और उत्तर प्रदेश के माननीय खेल मंत्री श्री गिरीश यादव क्रमश: उत्तराखंड और वाराणसी में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। पूर्व क्रिकेटर और खेल प्रशासक सबा करीम ने इस पहल की समावेशिता की प्रशंसा की। "यह एसएआई का एक शानदार प्रयास है। साइकिल चलाने से हम स्वस्थ रहते हैं और हमारे आस-पास का वातावरण हरा-भरा रहता है। मैं खुद भी साइकिल से स्कूल जाता था। इसमें कोई रखरखाव नहीं है, कोई प्रदूषण नहीं है। स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए यह एक बेहतरीन माध्यम है।"
पहलवान सरिता मोर ने भी जोश से कहा: "मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस पहल का हिस्सा बनकर खुद को धन्य महसूस कर रही हूं। साइकिल चलाना पहले से ही मेरे प्रशिक्षण का हिस्सा है। आज, इस रैली के साथ, हम ऑपरेशन सिंदूर के अपने बहादुर सैनिकों को भी याद करते हैं। यह उनकी वजह से है कि हम आज सुरक्षित हैं।"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सच्चे शासन के सार पर देवी अहिल्याबाई के दृष्टिकोण को दोहराया, यह लोगों की सेवा करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में निहित है
संस्कृति मंत्रालय ने भोपाल में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती मनाई
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से 31 मई, 2025 को भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रतिष्ठित दूरदर्शी नेता और सांस्कृतिक सुधारक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती मनाई।

इस महत्वपूर्ण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत मां भारती और भारत की महिलाओं से आशीर्वाद के आह्वान के साथ की। यह भारत की 'नारी शक्ति' की ताकत और संभावना का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की भक्ति, सुशासन और सामाजिक सुधार के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की स्थायी विरासत को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रेरणा का अवसर है और राष्ट्र निर्माण के महान प्रयासों में योगदान देने का क्षण है। उन्होंने कहा, "माता अहिल्याबाई राष्ट्र निर्माण में हमारी नारी शक्ति के अमूल्य योगदान का प्रतीक है:"
उन्होंने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास, इसके प्रभाव और इसे सक्षम बनाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयास पर भी प्रकाश डाला।
- “आज, बड़ी संख्या में महिला वैज्ञानिक हमारे सभी प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों में काम कर रही हैं।” - प्रधानमंत्री
- "जब एक महिला अपना पैसा खुद कमाती है, तो घर में उसका आत्म-सम्मान बढ़ता है और परिवार के निर्णयों में उसकी भागीदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पिछले ग्यारह वर्षों में हमारी सरकार ने भारत की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम किया है"- प्रधानमंत्री
- "नागरिक देवो भव" - नागरिक ही ईश्वर है - हमारे शासन का मंत्र है। हमारी सरकार महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की परिकल्पना को विकास की धुरी बना रही है" – प्रधानमंत्री
- "आज देशभर में 10 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में लगी हुई हैं। सरकार इन महिलाओं को आय के नए स्रोत बनाने में सहायता कर रही है, तथा कई लाख रुपये की सहायता दे रही है।" -प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर दृढ़ विश्वास और दृढ़ संकल्प की शक्ति का प्रतीक हैं और कहा, “देवी अहिल्याबाई इस विचार की प्रतीक हैं कि इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के साथ, चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।”
उन्होंने ढाई सौ - तीन सौ वर्षों के बाद भी देवी अहिल्याबाई के विचारों और कार्यों की स्थायी विरासत, प्रभाव और निरंतर प्रासंगिकता के बारे में बात की। इसके बारे में आज भी पीढ़ियां चर्चा करती हैं। देवी अहिल्याबाई होल्कर को उद्धृत करते हुए, प्रधानमंत्री ने सच्चे शासन के सार पर उनके विचारों को दोहराया और कहा “अहिल्याबाई कहा करती थीं कि सच्चा शासन लोगों की सेवा करने और उनके जीवन को बेहतर बनाने में निहित है।” उन्होंने यह भी कहा कि “माता अहिल्याबाई ने शासन का एक अनुकरणीय मॉडल अपनाया जिसमें गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई” - प्रधानमंत्री
लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के जीवन और विरासत पर प्रदर्शनी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन और विरासत पर एक प्रदर्शनी थी। कलाकारों ने पेंटिंग के माध्यम से इतिहास और आख्यानों को प्रदर्शित किया और मध्य प्रदेश सरकार ने इसमें समन्वय किया एवं संस्कृति मंत्रालय के स्मरणोत्सव प्रभाग द्वारा इसका संयोजन किया गया था। प्रदर्शनी में 4 मुख्य खंड हैं:


- भाग 1: उनके प्रारंभिक वर्षों पर केंद्रित: इसमें देवी अहिल्याबाई की अपने भावी ससुर मल्हार राव के साथ मुलाकात, प्रशासन, राजकोष और लेखा, मार्शल आर्ट आदि जैसे बहु-विषयक क्षेत्रों में उनकी शिक्षा पर प्रकाश डाला गया है।
- भाग 2 - सुशासन और नेतृत्व की उनकी अवधारणा: यह उनके शासन को भगवान शिव को समर्पित करने और अपने लोगों की संरक्षक होने और उनकी सेवा करने के उनकी अपनी परिकल्पना पर केंद्रित है।
- भाग 3 - उनकी कल्याणकारी परियोजनाओं को दर्शाता है: इसमें मंदिरों के पुनरुद्धार और पुनर्निर्माण के कार्यों पर प्रकाश डाला गया है और अन्य बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को दर्शाया गया है।
- भाग 4 – वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में उनके काम को प्रदर्शित करता है: इसमें महेश्वर किले और आस-पास के मंदिरों के रूपांकनों से प्रेरित माहेश्वरी बुनाई दर्शाई गई है।
प्रधानमंत्री ने महेश्वरी साड़ियों की छठी पीढ़ी की बुनकर हेमलता जी से बातचीत की। संस्कृति मंत्रालय के सचिव ने उन्हें पूरी प्रदर्शनी के बारे में बताया।

स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करना
इस कार्यक्रम में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया।
भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में उनके अमूल्य योगदान का समारोह मनाया गया।

लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर पर फिल्म
इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के स्मरणोत्सव प्रभाग द्वारा बनाई गई एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। 'अहिल्याबाई होल्कर: संस्कृति की संरक्षिका, शासन की शिल्पकार' शीर्षक वाली यह फिल्म उनके असाधारण जीवन को सिनेमाई श्रद्धांजलि देते हुए उनके दृष्टिकोण, सुधारों और आध्यात्मिक समर्पण को दर्शाती है।
माननीय प्रधानमंत्री ने भोपाल में अनेक विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया जिनका उद्देश्य क्षेत्र में शहरी बुनियादी ढांचे, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देना है।
"आज इंदौर मेट्रो का उद्घाटन हुआ है और अब दतिया और सतना से भी हवाई सेवाएं शुरू हो गई हैं। इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश में जन सुविधाएं बढ़ेंगी, विकास में तेजी आएगी और रोजगार के अनेक नए अवसर पैदा होंगे।" - प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने जनजातीय, लोक और पारंपरिक कलाओं में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रतिष्ठित कलाकार डॉ. जयमती कश्यप को देवी अहिल्याबाई राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किया। यह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और महिला रचनाकारों को सशक्त बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह स्मरणीय कार्यक्रम भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत का समारोह मनाने तथा देश के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक विकास की नींव रखने वाले दूरदर्शी लोगों को सम्मानित करने के संस्कृति मंत्रालय के व्यापक मिशन का हिस्सा था।
नक्शा क्षमता निर्माण कार्यक्रम का दूसरा चरण 2 जून से पांच राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों में शुरू किया जाएगा
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय का भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) 2 जून 2025 से देश के पांच उत्कृष्टता केंद्रों (सीओई) में नक्शा (शहरी आवासों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम के तहत क्षमता निर्माण का दूसरा चरण आयोजित करने जा रहा है। नक्शा में भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 160 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का पहला चरण मई 2025 में पूरा हो चुका है।

भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी 2 जून, 2025 को सुबह 10:00 बजे प्रशिक्षण कार्यक्रम के इस चरण का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) से 304 यूएलबी-स्तर और जिला अधिकारियों को नामित किया गया है। इन अधिकारियों को प्रभावी शहरी संपत्ति सर्वेक्षणों के लिए आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का लाभ उठाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण 2 जून 2025 से शुरू होकर एक सप्ताह तक निम्नलिखित उत्कृष्टता संस्थानों के केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा :
- लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी, उत्तराखंड
- यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी (वाईएएसएचएडीए), पुणे, महाराष्ट्र
- पूर्वोत्तर क्षेत्र उत्कृष्टता केंद्र, गुवाहाटी, असम
- महात्मा गांधी राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एमजीएसआईपीए), चंडीगढ़, पंजाब
- प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (एटीआई), मैसूरू, कर्नाटक
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यूएलबी अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को नक्शा कार्यक्रम के तहत उच्च सटीकता वाले भूमि सर्वेक्षणों की देखरेख के लिए आवश्यक तकनीकी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। मॉड्यूल में कार्यक्रम की रूपरेखा, जीएनएसएस और ईटीएस-आधारित सर्वेक्षण, वेब-जीआईएस एप्लीकेशन, भूखंडों का मानचित्रण और भूमि सर्वेक्षण के कानूनी-प्रशासनिक पहलुओं को शामिल किया गया है।
नक्शा के बारे में
भारत की शहरी आबादी 2031 तक 600 मिलियन से अधिक होने की उम्मीद है इसलिए आधुनिक, सत्यापन योग्य और आसानी से सुलभ भूमि अभिलेखों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है। नक्शा कार्यक्रम इस चुनौती का समाधान एक साहसिक, प्रौद्योगिकी-संचालित दृष्टिकोण से करता है। नक्शा कार्यक्रम को भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) द्वारा भारतीय सर्वेक्षण विभाग, एनआईसीएसआई, एमपीएसईडीसी और पांच उत्कृष्टता केंद्रों के सहयोग से एक प्रायोगिक कार्यक्रम के रूप में लागू किया जा रहा है। नक्शा को 27 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 157 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में शुरू किया गया है
फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 25वें संस्करण को विशेष तिरंगा रैली के रूप में मनाया जाएगा
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया नई दिल्ली में 1200 साइकिल चालकों का नेतृत्व करेंगे; अभिनेत्री शरवरी, योगेश्वर दत्त, सबा करीम भी शामिल होंगे
फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल पहल का 25वां संस्करण रविवार 1 जून को तिरंगा रैली के रूप में पूरे देश में मनाया जाएगा। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया राष्ट्रीय राजधानी में मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे।
3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाएगा इसलिए रविवार को होने वाला यह कार्यक्रम न केवल फिटनेस में साइकिल चलाने की बड़ी भूमिका के संदेश देगा बल्कि भारत के सशस्त्र बलों के प्रति सामूहिक श्रद्धांजलि भी होगा। राष्ट्रीय राजधानी में 1,200 से अधिक साइकिल चालकों के आने की उम्मीद है और साथ ही, पूरे देश में 2,000 से अधिक स्थानों पर इस रविवार को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम के एक भाग के रूप में, ओडिशा के माननीय राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति भुवनेश्वर में तिरंगा रैली को हरी झंडी दिखाएंगे। यह इस पहल के अखिल भारतीय महत्व को और भी अधिक दर्शाता है। डॉ. मनसुख मांडविया के साथ रैली के दिल्ली चरण में खेल और मनोरंजन जगत की प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी जिनमें ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त, अंतरराष्ट्रीय पहलवान सरिता मोर, बॉलीवुड अभिनेत्री शरवरी और पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता सबा करीम शामिल हैं। डॉ. मांडविया की उपस्थिति में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है जिसमें कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन भी शामिल है।
तिरंगा रैली फिट इंडिया अभियान के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण बिंदु साबित होगी जिसके तहत फिटनेस को सुगम, समावेशी और देशभक्तिपूर्ण बनाया जाएगा। देश भर की सड़कें खुली साइकिलिंग ट्रैक बन रही हैं और परिवार, छात्र, प्रभावशाली लोग और वरिष्ठ नागरिक इसमें शामिल हो रहे हैं। यह पहल स्वास्थ्य संस्कृति का निर्माण कर रही है जो देश के विभिन्न जनसांख्यिकी और दर्शनीय स्थानों तक फैली हुई है।
दिसंबर 2024 में अपनी शुरुआत के बाद से, संडे ऑन साइकिल पहल से लोगों का अभूतपूर्व जुड़ाव हुआ है। 5,500 से अधिक स्थानों पर इसका आयोजन हुआ और 3 लाख से अधिक नागरिकों ने इसमें भाग लिया। इस अभियान को 3.44 बिलियन से अधिक लोगों का डिजिटल समर्थन भी प्राप्त हुआ है। इनमें सानिया मिर्ज़ा, मिलिंद सोमन, इमरान हाशमी, जॉन अब्राहम, इम्तियाज़ अली, शंकर महादेवन और महान दारा सिंह जैसे दिग्गज शामिल हैं।
भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के कई केंद्रों के साथ-साथ खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) में समुदाय-केंद्रित फिटनेस कार्यक्रम जैसे जुम्बा, रस्सी कूद, निर्देशित योग सत्र, तथा रविवार को साइकिल कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रीय खेल विज्ञान एवं अनुसंधान केंद्र (एनसीएसएसआर) के विशेषज्ञों द्वारा मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
गोवा बना पूर्ण कार्यात्मक साक्षर राज्य
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ। प्रमोद सावंत ने गोवा को औपचारिक रूप से उल्लास - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम) के तहत पूर्ण कार्यात्मक साक्षर राज्य घोषित किया। यह भारत को वर्ष 2030 तक पूर्ण साक्षर बनाने के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। गोवा देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने राष्ट्रीय स्तर पर तय किए गए 95% साक्षरता मानक को पार किया है। यह घोषणा गोवा के 39वें राज्य स्थापना दिवस (30 मई 2025) पर पणजी स्थित दीनानाथ मंगेशकर कला मंदिर में आयोजित भव्य समारोह में की गई।

इस अवसर पर गोवा के कैबिनेट मंत्री, राज्य के मुख्य सचिव, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी राज्य के नागरिक और कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पीएलएफएस रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार गोवा की साक्षरता दर 93।60% है, जो देश में सबसे अधिक दरों में से एक है और इसमें पुरुषों एवं महिलाओं दोनों का मजबूत प्रदर्शन शामिल है। हालाँकि, गोवा के अपने सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य ने इस आंकड़े को पार कर लिया है और पूर्ण साक्षरता प्राप्त कर ली है।
इस लक्ष्य को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने के लिए, गोवा सरकार ने इस प्रयास में संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण अपनाया, यानी सरकार के विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बिठाकर काम किया गया। इसमें पंचायत निदेशालय, नगरपालिका प्रशासन निदेशालय, समाज कल्याण निदेशालय, योजना और सांख्यिकी निदेशालय तथा महिला एवं बाल विकास निदेशालय जैसे विभागों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन विभागों ने अपने-अपने क्षेत्रों में निरक्षरों की पहचान की।
इसके साथ ही स्वयंपूर्ण मित्रों को जागरूकता अभियानों में लगाया गया, जिन्होंने लोगों को साक्षरता प्रमाणपत्र दिलाने और शिक्षा मॉड्यूल से जोड़ने में मदद की। समाज कल्याण विभाग के फील्ड वर्कर्स ने भी निरक्षरों की पहचान में सक्रिय भूमिका निभाई।
गोवा की शिक्षा टीम जिसमें एससीईआरटी, स्थानीय प्रशासन, स्कूल प्रमुख और स्वयंसेवक शामिल हैं, के प्रयासों की व्यापक रूप से सराहना की गई। यह सफलता दिखाती है कि जन-भागीदारी आधारित और स्वयंसेवकों द्वारा संचालित साक्षरता अभियान, जब विभागीय सहयोग और समावेशी शैक्षणिक उपकरणों के साथ चलाए जाते हैं, तो वे असाधारण परिणाम दे सकते हैं। यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल है कि कैसे वर्ष 2030 तक देश को पूर्ण साक्षर बनाया जा सकता है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उल्लास- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम देशभर में लागू किया जा रहा है और गोवा आज “जन-जन साक्षर” की भावना को साकार करता हुआ प्रगति का प्रतीक बनकर उभरा है। उल्लास- नव भारत साक्षरता कार्यक्रम एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे 2022 से 2027 तक लागू किया गया है। यह योजना नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और उन वयस्कों (15 वर्ष और उससे ऊपर) को लक्षित करती है जो स्कूल नहीं जा सके। इसमें पाँच घटक शामिल हैं: बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता, जीवनोपयोगी आवश्यक कौशल, प्रारंभिक शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और सतत शिक्षा।
उल्लास योजना का उद्देश्य भारत को “जन-जन साक्षर” बनाना है और यह कर्तव्यबोध की भावना पर आधारित है, जिसे स्वयंसेवा आधारित मॉडल पर लागू किया जा रहा है। अब तक इस योजना के तहत 1.77 शिक्षार्थी आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा (एफएलएनएटी) में शामिल हो चुके हैं। उल्लास मोबाइल ऐप पर 2.40 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 41 लाख स्वयंसेवी शिक्षक पंजीकृत हो चुके हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान अनुकरणीय सेवा के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले ग्रामीण डाक सेवकों की केंद्रीय संचार मंत्री के साथ बातचीत
डाक विभाग ने आज ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) के सराहनीय योगदान का जश्न मनाया और वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान उनकी असाधारण सेवा के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया। केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में प्रतिभागियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। बैठक के दौरान डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य जीडीएस के प्रयासों को मान्यता देना और उन्हें केंद्रीय मंत्री से व्यक्तिगत रूप से संवाद करने का अवसर प्रदान करना था। देश भर के सभी 23 डाक सर्किलों से कुल 33 जीडीएस ने इस कार्यक्रम में भाग लिया, जो भारतीय डाक द्वारा सेवा प्रदान किए जाने वाले विविध और विशाल ग्रामीण परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण डाक सेवकों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की, जो ग्रामीण भारत में डाक नेटवर्क की रीढ़ हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विभाग के लिए जीडीएस जमीनी स्तर पर काम करते हैं, इसलिए देश भर में डाक और वित्तीय सेवाओं की डिलीवरी में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनकी प्रतिबद्धता और समर्पण की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि केवल जीडीएस ही है जिस पर गांव के सभी लोग पूरी तरह से भरोसा करते हैं और जीडीएस प्रत्येक परिवार के सदस्य को जानते हैं, साथ ही पूरे समुदाय के साथ गहरा संबंध बनाए रखते हैं। यह अनूठा संबंध जीडीएस को न केवल सेवा प्रदाता बनाता है, बल्कि ग्रामीण समुदाय का विश्वसनीय सदस्य भी बनाता है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण डाक सेवकों ने अपने अनुभव और क्षेत्र से जुड़ी प्रेरक कहानियां साझा कीं। उन्हें डाक विभाग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने इस संबंध में एक भावनात्मक तुलना की। उन्होंने कहा, "जिस तरह एक गांव का चौकीदार न केवल सुरक्षा का संरक्षक होता है, बल्कि हर घर के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी रखता है, उसी तरह एक जीडीएस भी हर उस घर के साथ एक हार्दिक रिश्ता बनाता है जिसकी वह सेवा करता है।" उनके बेजोड़ योगदान पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा, "मेरे ग्रामीण डाक सेवकों के माध्यम से, 'डाक सेवा, जन सेवा' की भावना जागृत हो रही है।" उन्होंने उनके समर्पण की प्रशंसा की और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को अतुलनीय बताया।
प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए और सेवा वितरण तथा परिचालन दक्षता को और बेहतर बनाने के लिए बहुमूल्य सुझाव भी दिए। उनकी विचारों से अग्रिम मोर्चे को डाक कर्मियों के अनूठे दृष्टिकोण का पता चला और ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग की पहुंच के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला।

जीडीएस के साथ बातचीत और अनुभव को विस्तार से इस वेबलिंक पर देखा जा सकता है:
राष्ट्रपति ने 15 पुरस्कार Anything को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में उत्कृष्ट नर्सिंग कर्मियों को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। इस वर्ष, विभिन्न क्षेत्रों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों की 15 नर्सों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने में उनकी अनुकरणीय सेवा और समुदाय के कल्याण को प्रोत्साहन देने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए सम्मानित किया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और श्रीमती अनुप्रिया पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

श्री जे.पी. नड्डा ने पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए, कहा कि, "यह सुयोग्य सम्मान मानवता की सेवा के प्रति आपके समर्पण का उत्सव मनाता है और आपको सकारात्मक प्रभाव करने के लिए प्रेरित करेगा।" उन्होंने आगे कहा कि, "हमारी नर्सें भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का आधार हैं, जो हर दिन अनगिनत लोगों का जीवन बचाती हैं।"
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्थापित राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार, नर्सिंग पेशे को परिभाषित करने वाले समर्पण, करुणा और दृढ़ता का सम्मान करता है। ये प्रतिष्ठित पुरस्कार पंजीकृत नर्सों, दाइयों, सहायक नर्स दाइयों और केंद्र और राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्वैच्छिक संगठनों में सेवारत महिला स्वास्थ्य आगंतुकों को प्रदान किए जाते हैं। प्रत्येक पुरस्कार में योग्यता प्रमाणपत्र, 1 लाख रुपए का नकद पुरस्कार और इन स्वास्थ्य योद्धाओं द्वारा प्रदान की गई अमूल्य सेवा के लिए राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक एक पदक सम्मिलित है।
आज सम्मानित की गई नर्सों का विवरण निम्नलिखित है:
|
क्रमांक |
वर्ग |
नाम |
राज्य |
|
1 |
एएनएम |
श्रीमती रेबा रानी सरकार |
अंडमान और निकोबार |
|
2 |
एएनएम |
श्रीमती वलिवेती सुभावती |
आंध्र प्रदेश |
|
3 |
एएनएम |
श्रीमती सरोज फकीरभाई पटेल |
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव |
|
4 |
एएनएम |
श्रीमती रजिया बेगम पीबी |
लक्षद्वीप |
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5 |
एएनएम |
श्रीमती सुजाता अशोक बागुल |
महाराष्ट्र |
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6 |
एलएचवी |
श्रीमती बीना पाणि डेका |
असम |
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7 |
नर्स |
श्रीमती किजुम सोरा कारगा |
अरुणाचल प्रदेश |
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8 |
नर्स |
मिस डिपंल अरोड़ा |
दिल्ली |
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9 |
नर्स |
मेजर जनरल शीना पी.डी. |
दिल्ली |
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10 |
नर्स |
डॉ. बानू एमआर |
कर्नाटक |
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11 |
नर्स |
श्रीमती लेइमापोकपम रंजीता देवी |
मणिपुर |
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12 |
नर्स |
श्रीमती वी. लालहमंगईही |
मिजोरम |
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13 |
नर्स |
श्रीमती एल.एस. मणिमोझी |
पुदुचेरी |
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14 |
नर्स |
श्रीमती अलामेलु मंगयारकरसी के |
तमिलनाडु |
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15 |
नर्स |
श्रीमती डोली बिस्वास |
पश्चिम बंगाल |


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने पूरे देश में नर्सिंग और मिडवाइफरी पेशे को सशक्त करने के लिए परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं। हाल ही में राष्ट्रीय नर्सिंग और मिडवाइफरी आयोग अधिनियम नर्सिंग शिक्षा और विनियामक ढांचे के आधुनिकीकरण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इसके अतिरिक्त, मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ 157 नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना एक कुशल और सक्षम नर्सिंग कार्यबल के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ये पहल सामूहिक रूप से एक सशक्त स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का मार्ग प्रशस्त करती हैं, जो एक अच्छी तरह से लैस और सशक्त नर्सिंग कार्यबल के माध्यम से सभी नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करती हैं।
ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत का सीधा हमला है अगर पाकिस्तान कुछ भी गलत करने की कोशिश करता है तो उसे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता का सामना करना पड़ेगा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है; यह सिर्फ एक विराम है""हमारे शक्तिशाली कैरियर बैटल ग्रुप ने शांत रहते हुए भी, यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तानी नौसेना आगे न बढ़े अन्यथा उसे परिणाम भुगतने पड़ते"श्री राजनाथ सिंह ने कहा- भारत आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए कोई भी तरीका अपनाने से नहीं हिचकिचाएगा"यदि पाकिस्तान वार्ता के लिए गंभीर है, तो उसे हाफिज सईद और मसूद अजहर को भारत को सौंप देना चाहिए ताकि न्याय हो सके"नौसेना एक रणनीतिक शक्ति बन चुकी है, यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को मजबूत करती है, दुश्मन को चेतावनी देती है कि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं अपितु एक वैश्विक शक्ति बन रहा है"
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 30 मई, 2025 को गोवा तट पर भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर अधिकारियों और नौसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सीधा हमला है और अगर पाकिस्तान कुछ भी गलत या अनैतिक करता है, तो उसे इस बार भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और क्रोध का सामना करना पड़ेगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की “मौन सेवा” की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि शक्तिशाली कैरियर बैटल ग्रुप ने यह सुनिश्चित किया कि पाकिस्तानी नौसेना बाहर न निकले, अन्यथा उसे परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि अगर उसने बुरी नजर डालने की कोशिश की तो भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई भारतीय नौसेना के हाथों होगी।

श्री राजनाथ सिंह ने बल देते हुए कहा कि पाकिस्तान को यह समझने की आवश्यकता है कि स्वतंत्रता के बाद से वह जो खतरनाक आतंकवाद का खेल खेल रहा है अब उसका समय खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ कोई आतंकी कार्रवाई करता है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे और हार का सामना करना पड़ेगा। भारत इसमें संकोच नहीं करेगा। वह आतंकवाद के खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए हर तरीका अपनाएगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की धरती से खुलेआम भारत विरोधी गतिविधियां चल रही हैं और भारत, सीमा तथा समुद्र दोनों तरफ आतंकवादियों के खिलाफ हर तरह की कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया आतंकवाद के खिलाफ अपने नागरिकों की रक्षा करने के भारत के अधिकार को स्वीकार कर रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान को अपनी धरती पर चल रहे आतंकवाद की नर्सरी को अपने हाथों से उखाड़ फेंकना चाहिए।
श्री राजनाथ सिंह ने हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को भारत को सौंपने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों न केवल भारत की 'मोस्ट वांटेड आतंकवादियों' की सूची में हैं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी भी हैं। मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा को हाल ही में भारत लाया गया है। हाफिज सईद भी मुंबई हमलों का दोषी है और उसके अपराध के लिए न्याय होना चाहिए।
पाकिस्तान द्वारा बार-बार बातचीत की पेशकश पर रक्षा मंत्री ने फिर स्पष्ट किया कि अगर बातचीत होगी तो वह केवल आतंकवाद और पीओके पर होगी। अगर पाकिस्तान बातचीत के लिए गंभीर है तो उसे हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को भारत को सौंप देना चाहिए ताकि न्याय हो सके।
एकीकृत अभियान में भारतीय नौसेना की भूमिका की सराहना करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान की धरती पर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, तो अरब सागर में नौसेना की आक्रामक तैनाती, इसकी बेजोड़ समुद्री क्षेत्र की जानकारी और वर्चस्व ने पाकिस्तानी नौसेना को उसके अपने तटों तक सीमित कर दिया। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के 96 घंटों के भीतर समुद्र में तैनात हमारे पश्चिमी बेड़े के पोतों ने पश्चिमी और पूर्वी तट पर सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और टॉरपीडो की सफल फायरिंग की। इसने हमारे प्लेटफॉर्म, सिस्टम और चालक दल की युद्ध तत्परता और हमारे इरादे और तत्परता को प्रदर्शित किया, जिससे दुश्मन को रक्षात्मक मुद्रा में आने के लिए मजबूर होना पड़ा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि कैरियर बैटल ग्रुप के बल प्रक्षेपण ने भारत की मंशा और क्षमता को प्रभावी ढंग से दर्शाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की जबरदस्त शक्ति, इसकी सैन्य कुशलता और विध्वंसक क्षमताओं ने दुश्मन के मनोबल को तोड़ दिया है। उन्होंने नौसेना से अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ने का आग्रह किया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्पष्ट संदेश को दोहराया कि यदि भारतीय धरती पर कोई आतंकवादी हमला होता है, तो इसे 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा और उसी तरह से जवाब दिया जाएगा।
श्री राजनाथ सिंह ने दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है; यह सिर्फ एक विराम है, एक चेतावनी है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान ने फिर से यही गलती की तो भारत की जवाबी कार्रवाई और भी कड़ी होगी।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों की गति, गहराई और स्पष्टता की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सटीक हमलों ने तीनों सेनाओं के बीच शानदार तालमेल और मंत्रालयों एवं सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को एक स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब और बर्दाश्त नहीं करेगा और मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने कहा कि बहुत कम समय में, हमने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त और उसके इरादों को धूमिल कर दिया गया। हमारा जवाब इतना जोरदार था कि पाकिस्तान ने रुकने की गुहार लगाई। हमने अपनी शर्तों पर अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दी जबकि अभी तो हमारे सशस्त्र बलों ने अपना शौर्य दिखाना भी शुरू नहीं किया था।
लोग साहित्य से प्रेरणा ले सकते हैं और अपने आदर्शों को साकार करने का प्रयास कर सकते हैं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सांस्कृतिक पुनरुत्थान के युग से गुजर रहा है: श्री गजेन्द्र सिंह शेखावतराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन किया राष्ट्रपति भवन ने साहित्य के परिवर्तित होते स्वरूप पर विचार सम्मेलन में साहित्य जगत के प्रमुख हस्तियों की मेजबानी कीनई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक ऐतिहासिक कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत साहित्य अकादमी ने राष्ट्रपति भवन के सहयोग से “कितना बदल चुका है साहित्य?” विषय पर एक साहित्यिक सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश भर से प्रतिष्ठित लेखकों, कवियों और साहित्यिक विचारकों सम्मिलित हुए। सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया।
⁷राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने उद्घाटन भाषण में लेखकों के प्रति अपने आजीवन सम्मान और प्रशंसा को व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में लेखकों की मेजबानी करना उनकी एक प्रिय इच्छा थी। उन्होंने उत्कलमणि गोपबंधु दास की उड़िया में कही गई पंक्तियों का स्मरण किया, जिसका उन्होंने अर्थ बताया, "मैं इस देश की धरती पर जहाँ भी हूँ, मैं उतनी ही आभारी हूँ जितनी मैं जगन्नाथ पुरी यात्रा के परिसर में होती।" उन्होंने साहित्य से समानताएँ बताते हुए वाल्मीकि रामायण से सीता-राम की कहानी को समाज में एकता की शक्ति के रूप में उद्धृत किया। अपने व्यक्तिगत अनुभव पर विचार करते हुए उन्होंने साझा किया कि कैसे फकीर मोहन सेनापति की कहानी "रेवती" ने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला, साहित्य के प्रभाव को उजागर किया। उनके अनुसार, आम लोग साहित्य से प्रेरणा ले सकते हैं और अपने आदर्शों को साकार करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभा रे के उपन्यास द्रौपदी को मानवीय संवेदनाओं में निहित एक उत्कृष्ट साहित्य का एक आदर्श उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य समय के साथ परिवर्तित होता है लेकिन करुणा और संवेदनशीलता जैसे कुछ तत्व हैं,जिनमें परिवर्तन नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति के अनुभवों पर आधारित होने के कारण आज के साहित्य को उपदेशात्मक साहित्य नहीं कहा जा सकता।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य कितना बदल गया है, यह पूछने के बजाय यह विचार करना अधिक उचित होगा कि समाज में कितना बदलाव आया है, क्योंकि साहित्य समाज की भावना होती है। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे हमेशा सामाजिक बुराइयों पर प्रहार करते रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारा देश सांस्कृतिक पुनरुत्थान के युग से गुजर रहा है। राष्ट्रपति के तत्वावधान में इस कार्यक्रम का आयोजन देश में एक जाग्रत सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।
संस्कृति मंत्रालय की विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार सुश्री रंजना चोपड़ा ने साहित्य अकादमी की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें नेताजी सुभाष बोस पर इसका कार्य और उन्मेषा जैसे अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजन सम्मिलित हैं। उन्होंने तेजी से हो रहे तकनीकी और सामाजिक परिवर्तनों के बीच साहित्य के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया।

उद्घाटन समारोह के बाद एक कवि सम्मेलन “सीधे दिल से” का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न भारतीय भाषाओं के कवियों ने भागीदारी की। साहित्य अकादमी के सचिव डॉ के श्रीनिवासराव ने कवियों को अंगवस्त्रम से सम्मानित किया। इस सत्र के दौरान डॉ माधव कौशिक ने अतिथि के रूप में कुछ उर्दू दोहे और एक-दो ग़ज़लें सुनाईं। अपनी कविताएँ सुनाने वाले कवियों में श्री रणजीत दास (बंगाली), श्रीमती ममंग दाई (अंग्रेजी), श्री दिलीप झावेरी (गुजराती), श्री अरुण कमल (हिंदी), श्री महेश गर्ग (हिंदी), श्री शफी शौक (कश्मीरी), श्रीमती दमयंती बेशरा (संथाली) और श्री रवि सुब्रमण्यन (तमिल) सम्मिलित थे। अपनी नम भावनाओं से ओतप्रोत अपने शब्दों में सभी कवियों ने आनंद, शोक, प्रेम और उत्कंठा की अनछुई अभिव्यक्ति साझा की। सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात उर्दू कवि और विद्वान श्री शीन काफ़ निज़ाम ने कहा कि कविता सुनी नहीं जाती बल्कि महसूस की जाती है। उन्होंने अपनी कई लोकप्रिय उर्दू ग़ज़लें सुनाईं और सत्र का समापन किया। यह कार्यक्रम भारत की साहित्यिक विविधता का उत्सव था और इसकी चिरस्थायी विरासत और भविष्य की दिशा पर सार्थक चिंतन था।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने तीन डीपीएसयू को मिनीरत्न का दर्जा देने की मंजूरी दी
म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) और इंडिया ऑप्टल लिमिटेड (आईओएल) अब मिनीरत्न कंपनियांरक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एवीएनएल) और इंडिया ऑप्टल लिमिटेड (आईओएल) को "मिनीरत्न" श्रेणी-I का दर्जा देने की मंजूरी दे दी है। तीन साल की छोटी सी अवधि में सरकारी संगठन से लाभ कमाने वाली कॉर्पोरेट इकाई में तब्दील होने के लिए इन डीपीएसयू को बधाई देते हुए रक्षा मंत्री ने कंपनी के कारोबार को बढ़ाने, स्वदेशीकरण को अधिकतम करने और मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा देने के लिए अन्य प्रदर्शन मापदंडों को पूरा करने के लिए एमआईएल, एवीएनएल और आईओएल के प्रबंधन द्वारा की गई पहलों पर संतोष व्यक्त किया।
म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) ने स्थापना के बाद से महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसमें 2021-22 (एच2) में 2571.6 करोड़ रुपये से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 में 8282 करोड़ रुपये (अनंतिम) तक की बिक्री में शानदार वृद्धि शामिल है। निर्यात के मोर्चे पर, एमआईएल ने वित्त वर्ष 2021-22 (एच2) में 22.55 करोड़ रुपये से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 (अनंतिम) में 3081 करोड़ रुपये तक की वृद्धि हासिल की है। एमआईएल के प्रमुख उत्पादों में छोटे, मध्यम और उच्च कैलिबर के गोला-बारूद, मोर्टार, रॉकेट, हैंड ग्रेनेड आदि शामिल हैं, जिनमें आरंभिक रचनाएँ, प्रणोदक और उच्च विस्फोटकों का इन-हाउस निर्माण शामिल है।
आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड ने 2021-22 (एच2) में 2569.26 करोड़ रुपये से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 में 4986 करोड़ रुपये (अनंतिम) तक की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। एवीएनएल ने सभी 3 प्लेटफॉर्म यानी टी-72, टी-90 और बीएमपी-II के लिए इंजनों का 100 प्रतिशत स्वदेशीकरण भी हासिल किया है। एवीएनएल के प्रमुख उत्पादों में आर्मर्ड/लड़ाकू वाहन (टी-90, एमबीटी अर्जुन, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स 'बीएमपी-II सरथ' आदि), सहायक वाहन (एमपीवी, एईआरवी आदि) और रक्षा गतिशीलता समाधान (स्टैलियन, एलपीटीए आदि) शामिल हैं।
पिछले तीन वर्षों में इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड ने अपनी बिक्री को 2021-22 (एच2) में 562.12 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2024-25 में 1541.38 करोड़ रुपये (अनंतिम) कर दिया है। आईओएल के मुख्य उत्पादों में ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विज़न उपकरण शामिल हैं जिनका उपयोग भूमि प्रणाली प्लेटफ़ॉर्म और युद्धक टैंक टी-90, टी-72, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल बीएमपी-II, आर्टिलरी गन, नेवल गन आदि जैसे हथियारों में किया जाता है।
एमआईएल, एवीएनएल और आईओएल को मिनीरत्न का दर्जा दिए जाने से ये कंपनियां रक्षा उत्पादन और निर्यात में तीव्र विकास और नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में सक्षम होंगी।
कार्यात्मक स्वायत्तता, दक्षता बढ़ाने और नई विकास क्षमता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए, पूर्ववर्ती आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) को 01.10.2021 से इन तीन डीपीएसयू सहित सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में परिवर्तित कर दिया गया। जबकि एमआईएल और एवीएनएल अनुसूची 'ए' नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (डीपीएसयू) हैं, आईओएल रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक अनुसूची 'बी' डीपीएसयू है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने दिल्ली में भारत के सबसे बड़े स्वच्छता सर्वेक्षण स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी) 2025 का शुभारंभ किया
स्वच्छता एक बार का लक्ष्य नहीं बल्कि सतत यात्रा है: केंद्रीय मंत्री एसएसजी निरंतर ओडीएफ प्लस मॉडल परिणामों तक पहुंच बनाएगा और उन्हें सुदृढ़ करेगा तथा स्वच्छता प्रगति पर ग्रामीण भारत को रैंक प्रदान करेगा एसएसजी 2025 के तहत 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 761 जिलों के 21,000 गांवों को शामिल किया जाएगा

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने आज दिल्ली में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना की उपस्थिति में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) द्वारा राष्ट्रव्यापी ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (एसएसजी) 2025 का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक केके मीना, अपर सचिव और मिशन निदेशक, श्री कमल किशोर सोन, राज्य सचिवों और मिशन निदेशकों सहित वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
इस कार्यक्रम में, केंद्रीय मंत्री, श्री सी आर पाटिल ने "प्रबंधन के लिए मापने" के महत्व को दोहराया। यह ऐसा सिद्धांत है जो प्रमुख कार्यक्रमों के प्रभाव की जानकारी प्रदान करता है। उन्होंने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अपने नवाचारों और सर्वोत्तम परिपाटियों को साझा करना जारी रखने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि स्वच्छता एक बार का लक्ष्य नहीं बल्कि सतत यात्रा है। जैसे-जैसे हम विकसित भारत की दिशा में काम कर रहे हैं, स्वच्छता को सतत, लोगों के नेतृत्व वाला प्रयास बना रहना चाहिए जो सच्ची जनभागीदारी से संचालित हो।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, राज्य मंत्री, सचिव-डीडीडब्ल्यूएस, एएसएमडी-जेजेएम और एसबीएमजी और आर्थिक सलाहकार द्वारा स्वच्छता क्रॉनिकल्स वॉल्यूम III का शुभारंभ
जल शक्ति और रेल राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने कहा कि एसएसजी केवल एक सर्वेक्षण नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सत्यापन अभ्यास है, और राज्यों और जिलों को उनके ग्रामीण स्वच्छता प्रदर्शन पर रैंक करने का शक्तिशाली उपकरण है। उन्होंने सभी को याद दिलाया कि ‘हमारे गाँव भारत की आत्मा हैं’ और उन्हें ओडीएफ प्लस मॉडल बनाना जीवंत और दृश्यमान वास्तविकता के रूप में देखा जाना चाहिए।
डीडीडब्ल्यूएस के सचिव, श्री अशोक केके मीना ने बताया कि एसएसजी 2025 एसबीएम-जी चरण 2 का हिस्सा है और इस बड़े प्रयास की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सटीक और समय पर आईएमआईएस रिपोर्टिंग सुनिश्चित करनी चाहिए, क्षमता निर्माण के लिए जिला प्रशिक्षण प्रबंधन इकाइयों और स्वच्छाग्रहियों जैसे जमीनी स्तर के नेटवर्क को जुटाना चाहिए और सभी स्तरों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए।
एसएसजी 2025 का उद्देश्य ग्रामीण स्वच्छता की जमीनी स्थिति का गहन मूल्यांकन करना है, जिसमें एसबीएम-जी के तहत प्राप्त खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) प्लस मॉडल परिणामों को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। एसएसजी-2025 का व्यापक उद्देश्य एसबीएम-II के तहत पहचाने गए मात्रात्मक और गुणात्मक स्वच्छता मापदंडों के आधार पर भारत के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों की राष्ट्रीय रैंकिंग प्रदान करना है।
डीडीडब्ल्यूएस ने एक स्वतंत्र एजेंसी को नियुक्त किया है जो एसबीएम-जी चरण II दिशानिर्देशों के अनुरूप संरचित मूल्यांकन ढांचे का उपयोग करके सर्वेक्षण करेगी। एसएसजी-2025 नमूना गांव मूल्यांकन के माध्यम से एसबीएम-जी की प्रगति का पता लगाने में मदद करेगा, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों (पीडब्लूएमयू), फेकल स्लज मैनेजमेंट (एफएसएम) संयंत्रों, गोबरधन संयंत्र, नागरिक प्रतिक्रिया और स्वच्छता ग्रीन लीफ रेटिंग (एसजीएलआर) साइटों की कार्यक्षमता सहित विभिन्न स्वच्छता मापदंडों पर उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए गांवों में घरों (एचएच) और सार्वजनिक स्थानों का सर्वेक्षण करेगा।
एसबीएम चरण-II के प्रमुख निष्पादन परिणामों के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए संरचित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा और उन्हें चार प्रमुख घटकों के आधार पर रैंकिंग दी जाएगी:
० जिला स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट और ओडीएफ प्लस मॉडल सत्यापित गांवों के डेस्कटॉप सत्यापन के आंकड़ों के आधार पर सेवा-स्तर की प्रगति (एसएलपी)
० नमूनाबद्ध गांवों, घरों और स्कूलों, सीएससी आदि सहित सार्वजनिक स्थानों में क्षेत्र-आधारित अवलोकन के माध्यम से गांवों की स्वच्छता स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन
० प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों, गोबरधन संयंत्रों और मल कीचड़ प्रबंधन प्रणालियों जैसे स्वच्छता बुनियादी ढांचे की कार्यक्षमता का प्रत्यक्ष अवलोकन
० एसएसजी 2025 नागरिक प्रतिक्रिया, मोबाइल एप्लिकेशन और क्षेत्र सर्वेक्षण के दौरान आमने-सामने बातचीत के माध्यम से एकत्र की गई
इन तत्वों को समग्र स्कोर प्राप्त करने के लिए उप-घटकों में समूहीकृत किया जाएगा, जिससे पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित और समुदाय-नेतृत्व वाली मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित होगी। डेटा अखंडता को बनाए रखने के लिए, सर्वेक्षण में जियो-फेंसिंग सुविधा शुरू की गई है और इसके अलावा, सार्वजनिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए, नागरिक प्रतिक्रिया एकत्र करने के लिए समर्पित मोबाइल ऐप बनाया गया है।
स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ ग्रामीण समुदायों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में, पंचायतों, स्थानीय नेताओं, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और नागरिकों के सामूहिक प्रयास ग्रामीण भारत की स्वच्छता की कहानी को आकार देंगे, जिससे राष्ट्र स्वच्छ भारत के लक्ष्य के करीब पहुँचेगा।
इस कार्यक्रम में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 के मूल्यांकन ढांचे और राज्य की सर्वोत्तम प्रथाओं के संकलन, स्वच्छता क्रॉनिकल्स वॉल्यूम III का शुभारंभ किया गया।
















