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पितृ पक्ष में भूलकर भी ना करें इन 6 चीज़ों का दान… वरना पितर हो जाएंगे नाराज़ और शुरू हो जाएंगी मुश्किलें!
पितृ पक्ष का समय हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद पाने के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस दौरान पितरों को प्रसन्न करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परिवार पर कभी भी पितृ दोष नहीं लगता।
लेकिन ज्योतिष शास्त्र में कुछ चीज़ों को लेकर चेतावनी दी गई है। अगर आप भूलकर भी इन 6 वस्तुओं का दान करते हैं तो पितर रुष्ट हो सकते हैं और परिवार पर संकट आ सकता है। आइए जानते हैं वे चीज़ें—
1️⃣ नमक – पितृ पक्ष में नमक का दान करने से आर्थिक नुकसान और कर्ज बढ़ने का खतरा रहता है।
2️⃣ टूटी-फूटी वस्तुएँ – पुराने या टूटे सामान का दान पितृ दोष का कारण बन सकता है। दान में हमेशा नई चीज़ें ही दें।
3️⃣ बासी व मांसाहारी भोजन – बासी खाना या मांसाहार दान करने से पितर नाराज़ हो सकते हैं।
4️⃣ लोहे के बर्तन – यह शनि देव से जुड़े होते हैं और इनका दान पितृ दोष को बढ़ा सकता है।
5️⃣ जूते-चप्पल – इनका दान शनि दोष और पितृ दोष दोनों को आमंत्रित करता है।
6️⃣ सरसों का तेल – इसे दान करने से पितरों की नाराज़गी झेलनी पड़ सकती है।
???? शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में नई व शुभ वस्तुएँ जैसे कपड़े, पीतल के बर्तन, अनाज और फल-फूल का दान सबसे उत्तम माना जाता है।
उपराष्ट्रपति चुनाव में सबसे पहले पीएम मोदी ने डाला वोट, शाम तक साफ हो जाएगा नया नाम… कौन बैठेगा देश के दूसरे बड़े पद पर?
नई दिल्ली:
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मंगलवार को मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है और सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोट डालकर इसकी शुरुआत की। इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन और विपक्षी प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है।
शुरुआती वोट डालने वालों में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, किरण रिजिजू, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, भाजपा सांसद कंगना रनौत और सपा नेता राम गोपाल यादव शामिल रहे। संसद के दोनों सदनों के सदस्य सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाल सकते हैं। इसके बाद शाम 6 बजे मतगणना शुरू होगी और देर रात तक परिणाम घोषित किए जाने की संभावना है।
???? कैसे होता है मतदान?
उपराष्ट्रपति चुनाव गुप्त मतदान प्रणाली के तहत होता है, यानी सांसदों पर पार्टी व्हिप लागू नहीं होता। कुल 781 सदस्य मतदान के पात्र हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 391 है। एनडीए खेमे के पास 425 सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्ष के पास 324 सांसद हैं।
???? दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से
दिलचस्प बात यह है कि इस बार दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से आते हैं। सी.पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वहीं, बी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना से हैं और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं।
???? किसका पलड़ा भारी?
आंकड़ों के लिहाज से राधाकृष्णन का पलड़ा भारी माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष ने इस चुनाव को “भारत की भावना” से जोड़कर वैचारिक लड़ाई करार दिया है। AIMIM ने रेड्डी का समर्थन किया है, जबकि बीजू जनता दल (BJD) और बीआरएस मतदान से दूर रहने वाले हैं।
अब सबकी निगाहें आज शाम पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि देश के अगले उपराष्ट्रपति की कुर्सी पर कौन बैठेगा।
वृंदावन में बाढ़ के बीच प्रेमानंद महाराज निकले कुटिया से बाहर, यमुना के रौद्र रूप को देख कही चौंकाने वाली बात!
मथुरा/वृंदावन:
यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के कारण मथुरा और वृंदावन बाढ़ की चपेट में हैं। खेत-खलिहान, घर और कई प्राचीन मंदिर पानी में डूब चुके हैं। हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। यहां तक कि बांके बिहारी मंदिर का वीआईपी मार्ग भी 4 से 5 फीट पानी में डूब चुका है।
इसी कठिन घड़ी में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज अपनी कुटिया से बाहर निकलकर बाढ़ग्रस्त इलाकों का जायजा लेने पहुंचे। खास बात यह रही कि वे आमतौर पर अपनी कुटिया से बाहर नहीं निकलते, लेकिन इस बार वे स्टीमर पर सवार होकर लोगों तक पहुंचे।
???? “यह प्रभु की लीला है”
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रेमानंद महाराज यमुना के उफनते पानी को देखकर कहते दिखे— “यह सब प्रभु की लीला है। इसे ईश्वरीय प्रकोप न मानें, बल्कि प्रकृति का हिस्सा समझें। इस समय धैर्य और साहस से काम लें, प्रभु पर विश्वास रखें।”
???? भक्तों को दिलाया भरोसा
महाराज ने अपने भक्तों को भरोसा दिलाया कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन लीला में भक्तों की रक्षा की थी, वैसे ही इस संकट में भी प्रभु सबकी रक्षा करेंगे। उनके इस संदेश ने बाढ़ पीड़ितों के बीच उम्मीद और विश्वास की नई किरण जगा दी है।
???? प्रशासन सक्रिय
इस बीच प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत कार्यों में जुटा हुआ है। महाराज का यह कदम और उनका सुकून देने वाला संदेश स्थानीय लोगों और भक्तों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
क्या चाहोगे कि मैं इसके लिए एक शॉर्ट वायरल नोटिफिकेशन हेडलाइन भी बना दूँ, जो फेसबुक/यूट्यूब या न्यूज़ ऐप पर तुरंत क्लिक करवाए?
मथुरा में यमुना का जल प्रकोप! 26 गांव डूबे, वृंदावन का परिक्रमा मार्ग भी पानी में समाया
मथुरा। उत्तर प्रदेश इन दिनों भीषण बाढ़ की चपेट में है। मथुरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार खतरे के निशान को पार करता जा रहा है। निचले इलाकों में पानी घुस चुका है और हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं।
26 गांव जलमग्न
मथुरा जिले के करीब 26 गांव बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। घरों में पानी भर गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
परिक्रमा मार्ग और मंदिरों में पानी
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वृंदावन का आधा परिक्रमा मार्ग पानी में डूब गया है।
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गोकुल घाट और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव से हालात गंभीर हैं।
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बालाजी सरकार का मंदिर पूरी तरह पानी में डूबा नजर आ रहा है।
नाव संचालन बंद
बाढ़ की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ भी कम हो गई है। प्रशासन ने एहतियातन नाव संचालन पर रोक लगा दी है।
गांवों का संपर्क टूटा
महावन और छाता तहसील के यमुना किनारे बसे गांवों तक पानी पहुँच चुका है। खेत, सड़कें और लिंक रोड जलमग्न हो गए हैं। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और प्रशासन लगातार रेस्क्यू अभियान चला रहा है।
500 साल बाद ऐसा चंद्र ग्रहण! कौन सी 5 राशियाँ होंगी मालामाल और किन 4 पर टूटेगी आफ़त?
नई दिल्ली। 7 सितंबर 2025 को लगने वाला चंद्र ग्रहण सिर्फ खगोलीय घटना नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास है। कहा जा रहा है कि 500 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब मृत्यु पंचक के दौरान ग्रहण के साथ कई शुभ योग भी एक साथ पड़ेंगे। इस दौरान कुछ राशियों की किस्मत चमकेगी, तो वहीं कुछ राशियों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रहण का समय:
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शुरुआत: रात 9:57 बजे
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मोक्ष: तड़के 1:27 बजे
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पूरे भारत में दिखाई देगा
किन राशियों पर बरसेगी चांदी?
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मेष: धन लाभ, सफलता और उन्नति के बड़े मौके।
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वृषभ: आय में वृद्धि, विदेश से शुभ समाचार।
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कन्या: कर्ज से मुक्ति, निवेश से लाभ।
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वृश्चिक: रुके काम पूरे होंगे, निवेश से फायदा।
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धनु: करियर में उन्नति, व्यापार में बड़ा लाभ।
इन 4 राशियों को रहना होगा सावधान
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मिथुन: पारिवारिक तनाव और कामकाज में दबाव।
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सिंह: वैवाहिक जीवन और रिश्तों में कलह।
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तुला: खर्च बढ़ेंगे, भरोसे में धोखा मिल सकता है।
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कुंभ: शत्रुओं से सावधान, करियर में उतार-चढ़ाव।
खासियत क्या है?
इस चंद्र ग्रहण के साथ बुधादित्य राजयोग और दो समसप्तक योग जैसे शक्तिशाली योग बन रहे हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि अगर इस दौरान दान-पुण्य किया जाए तो इसका शुभ फल कई गुना बढ़कर मिलेगा।
Chandra Grahan 2025: गर्भवती महिलाओं के लिए अशुभ संकेत! जानिए कौन से काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए…
नई दिल्ली। साल 2025 का आखिरी चंद्र ग्रहण 7-8 सितंबर को लगने जा रहा है। हिंदू मान्यताओं में ग्रहण को अशुभ माना जाता है, और खासकर गर्भवती महिलाओं को इस दौरान कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ग्रहण की छाया माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकती है। यही कारण है कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष नियम बताए गए हैं।
???? चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
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बाहर न निकलें और ग्रहण न देखें – मान्यता है कि ग्रहण की छाया गर्भस्थ शिशु पर असर डालती है।
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ग्रहण लगने पर भोजन न करें – ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए।
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धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें – नुकीली या धारदार चीज़ों से नुकसान होने की आशंका मानी जाती है।
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न सोएं, बल्कि मंत्र जप करें – देवी-देवताओं के मंत्रों का जप करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
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ग्रहण खत्म होने पर स्नान करें – इसके बाद ईश्वर की पूजा और संतान के मंगल की कामना करनी चाहिए।
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घर में गंगाजल का छिड़काव करें – मान्यता है कि इससे दोष मिट जाते हैं।
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दान अवश्य करें – ग्रहण खत्म होने के बाद दान करने से अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
⚠️ महत्वपूर्ण नोट
ये सभी नियम और सावधानियां धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ऐसे में महिलाएं अपनी आस्था और स्वास्थ्य के अनुसार इन्हें अपनाएं।
आज का राशिफल: मेष, वृष और धनु के लिए आज लाभ के योग, जानें 2 सितंबर का दिन कैसा रहेगा, पढ़ें राशिफल
Aaj ka Rashifal, आज का राशिफल 2 सितंबर 2025: ग्रहों की स्थिति की बात करें तो आज गुरु मिथुन राशि में हैं, शुक्र कर्क राशि में। सूर्य, बुध और केतु सिंह राशि में। मंगल कन्या राशि में, चंद्रमा धनु राशि में।
Aaj ka Panchang: आज इस मुहूर्त में करें ज्येष्ठ गौरी विसर्जन, राहु काल जानने के लिए पढ़ें 2 सितंबर का पंचांग
Aaj ka Panchang 2 September 2025: बीते दिनों ज्येष्ठ गौरी पूजा की गई थी, जिस दिन घर में देवी गौरी की मूर्ति की स्थापना की जाती है। हालांकि, आज 2 सितंबर 2025 को ज्येष्ठ गौरी विसर्जन होगा।
Mangalwar Upay: हनुमान जी को प्रसन्न करने के 8 अचूक उपाय, मंगलवार को करें ये सरल टोटके, दूर होंगे संकट!
मंगलवार को किसी ऐसे मंदिर में जाएं जहां भगवान श्रीराम और हनुमान जी दोनों की ही प्रतिमा हो. वहीं जाने के बाद श्रीराम और हनुमान जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं. इसके बाद भगवान श्रीराम की मूर्ति के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें.
क्या इस बार मां दुर्गा ला रही हैं 'विशेष संकेत'? शारदीय नवरात्रि 2025 में होंगे 10 दिन — जानिए क्यों!
शारदीय नवरात्रि 2025 इस बार कुछ बेहद खास होने जा रहा है — ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, नवरात्रि इस बार पारंपरिक 9 नहीं, पूरे 10 दिनों तक मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, तृतीया तिथि की वृद्धि के चलते यह पर्व 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगा। उसी दिन दशहरा भी मनाया जाएगा। यह योग कई वर्षों बाद बन रहा है और इससे पर्व की धार्मिक और ज्योतिषीय महत्ता और भी बढ़ जाती है।
???? तारीखें: 22 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025
???? खास बात: इस बार 9 नहीं, 10 दिन की नवरात्रि
???? मां दुर्गा का वाहन: हाथी — सुख, समृद्धि और भरपूर वर्षा का प्रतीक
???? घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (22 सितंबर):
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अमृत मुहूर्त: सुबह 6:19 से 7:49
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शुभ मुहूर्त: सुबह 9:14 से 10:49
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अभिजीत मुहूर्त: 11:55 से 12:43 तक
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नक्षत्र: हस्त
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योग: शुक्ल योग
???? मां दुर्गा का वाहन इस बार हाथी — क्यों है ये शुभ?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर पधारेंगी, जो दर्शाता है कि देश में अच्छी वर्षा, समृद्धि और शांति का आगमन होगा।
???? नवरात्रि की तिथियां और देवी स्वरूप:
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22 सित. (सोम): प्रतिपदा – शैलपुत्री
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23 सित. (मंगल): द्वितीया – ब्रह्मचारिणी
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24-25 सित.: तृतीया – चंद्रघंटा
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26 सित.: चतुर्थी – कूष्मांडा
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27 सित.: पंचमी – स्कंदमाता
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28 सित.: षष्ठी – कात्यायनी
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29 सित.: सप्तमी – कालरात्रि
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30 सित.: अष्टमी – महागौरी
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01 अक्टूबर: नवमी – सिद्धिदात्री
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02 अक्टूबर: दशहरा
???? नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व:
इन 10 दिनों को आत्मशुद्धि, साधना और देवी कृपा के लिए श्रेष्ठ समय माना जाता है। जो भक्त व्रत, पूजन और मां के नौ रूपों की आराधना करते हैं, उन्हें जीवन में मनचाही सिद्धि और मानसिक शक्ति प्राप्त होती है।
7 सितंबर से खुलेंगे पितरों के द्वार: पितृपक्ष में अगर की ये गलतियाँ, तो मिल सकती है पीढ़ियों तक की सजा!
हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष 2025 (Pitru Paksha 2025) इस बार 7 सितंबर से शुरू हो रहा है और 21 सितंबर को समाप्त होगा। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वजों की आत्माएं धरती पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण व श्राद्ध की अपेक्षा करती हैं। जो व्यक्ति श्रद्धा से उनका स्मरण करते हैं, उन्हें पितरों की कृपा प्राप्त होती है, लेकिन जो इस दौरान नियमों की अनदेखी करते हैं, उन्हें कठिन दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
आइए जानें, इस पावन काल में क्या करें और क्या नहीं – ताकि पितरों का आशीर्वाद बना रहे, और अनजाने में कोई भूल न हो।
पितृपक्ष में क्या करें?
✔️ प्रतिदिन स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख कर जल अर्पण करें
✔️ पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराना अत्यंत शुभ माना जाता है
✔️ तर्पण करते समय काले तिल, जौ और जल का प्रयोग करें
✔️ गायत्री मंत्र या पितृ मंत्र का जाप करें
✔️ यदि ब्राह्मण उपलब्ध न हों, तो जरूरतमंद या गौ सेवा करें
✔️ सात्विक भोजन का दान करें — बिना लहसुन-प्याज वाला
✔️ अन्न, वस्त्र, छाता, जूते आदि का दान अत्यंत पुण्यदायक होता है
पितृपक्ष में क्या न करें?
???? मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखें
???? विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया व्यवसाय न शुरू करें
???? बाल और नाखून न काटें – यह अपशकुन माना जाता है
???? नई वस्तुएं, कपड़े या गहने खरीदने से परहेज करें
???? लहसुन-प्याज का प्रयोग, लड़ाई-झगड़ा और गाली-गलौच से बचें
पितृपक्ष का महत्व क्यों है?
ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृलोक से आत्माएं पृथ्वी पर आती हैं। अगर उन्हें सम्मान और श्रद्धा से तर्पण नहीं दिया जाए, तो वे अप्रसन्न होकर वंशजों को पीड़ा दे सकती हैं। लेकिन यदि श्रद्धा से किया गया श्राद्ध उन्हें तृप्त कर दे, तो वे पुत्र-पौत्र, स्वास्थ्य, धन और सफलता का आशीर्वाद दे जाती हैं।
जन्माष्टमी पर पंचामृत — भगवान कृष्ण का प्रिय अभिषेक
पंचामृत का महत्व:
जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल का अभिषेक पंचामृत से किया जाता है। यह पांच पवित्र पदार्थों का मिश्रण होता है, जो भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय है। पंचामृत के बिना जन्माष्टमी अधूरी मानी जाती है।
पंचामृत बनाने की सामग्री:
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गाय का दूध — 1 कटोरी
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दही — आधा कटोरी
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शहद — 1 टीस्पून
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देसी घी — 1 टीस्पून
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चीनी — 1 टीस्पून
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तुलसी का पत्ता — 1 (आवश्यक)
बनाने की विधि:
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एक साफ बर्तन में दूध और दही डालकर अच्छे से मिलाएं।
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इसमें शहद, देसी घी और चीनी डालकर चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं ताकि चीनी घुल जाए।
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अंत में, पंचामृत में तुलसी का पत्ता डालें, जिससे इसका पूर्ण महत्व बनता है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
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पंचामृत बनाने और उपयोग करने से पहले हाथ और बर्तन पूरी तरह साफ रखें।
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इसे ताजा बनाएं और पूजा के तुरंत बाद वितरित करें।
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यदि पहले से बनाया हो तो फ्रिज में रखकर ठंडा करें, लेकिन अधिक समय तक न रखें क्योंकि स्वाद खराब हो सकता है।
अब आपका शुभ पंचामृत तैयार है, इसे भगवान श्रीकृष्ण के अभिषेक में प्रयोग करें और सभी भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटें।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं! ????✨
भगवान कृष्ण को बेहद प्रिय है धनिया पंजीरी, ऐसे मिनटों में बनाएं स्वादिष्ट प्रसाद
जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का विशेष महत्व:
जन्माष्टमी के व्रत में अन्न का सेवन वर्जित होता है, लेकिन धनिया पंजीरी व्रत में फलाहार की श्रेणी में आती है। इसे सात्त्विक, सुपाच्य और पौष्टिक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण को गुड़, धनिया, मिश्री, माखन और दूध के भोग अति प्रिय हैं, इसलिए धनिया पंजीरी का भोग इस त्योहार पर विशेष शुभ माना जाता है।
धनिया पंजीरी बनाने की सामग्री:
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सूखा धनिया पाउडर – 1 कप
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देसी घी – ½ कप
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बूरा / पिसी मिश्री – ¾ कप
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मखाना (भुना और कुटा हुआ) – ½ कप
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सूखे मेवे (बादाम, काजू, किसमिस, पिस्ता - कटे हुए)
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नारियल का बूरा – 2 बड़े चम्मच (वैकल्पिक)
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इलायची पाउडर – ½ छोटा चम्मच
बनाने की विधि:
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कढ़ाई में घी गरम करें।
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घी में मखाना डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें, ठंडा होने पर दरदरा तोड़ लें।
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अब उसी घी में सूखा धनिया पाउडर डालकर धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक सुगंध न आने लगे।
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इसमें कटे मेवे, नारियल बूरा और इलायची पाउडर डालकर मिलाएं।
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आंच से उतारकर ठंडा करें और फिर मिश्री या बूरा डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
अब आपकी स्वादिष्ट और पौष्टिक धनिया पंजीरी तैयार है!
इसे भगवान कृष्ण को भोग लगाएं और परिवार तथा भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटें। यह पारंपरिक प्रसाद व्रत को पूर्णता प्रदान करता है और जन्माष्टमी की खुशी को और बढ़ाता है।
कृष्ण की भक्ति से रचे ये संदेश, जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें प्रेम और आशीर्वाद की सौगात!
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 इस साल 15 और 16 अगस्त को बड़े धूमधाम से देश-विदेश में मनाई जाएगी। मंदिरों से लेकर घरों तक कृष्ण भक्ति की मधुर स्वर लहरियां, दही हांडी की उत्सवधर्मी ऊर्जा, और भजनों की भक्तिपूर्ण गूंज वातावरण को रसमय बना देगी।
इस विशेष अवसर पर जब पूरा देश नंदलाल के जन्मोत्सव में लीन होगा, तब क्यों न अपने अपनों को भेजें कुछ भावपूर्ण और भक्ति से परिपूर्ण शुभकामनाएं, जो उनके चेहरे पर मुस्कान और दिल में सच्ची श्रद्धा भर दें।
Happy Janmashtami 2025 Wishes | जन्माष्टमी शुभकामना संदेश
???? "कृष्णा तेरी गलियों का जो आनंद है,
वो दुनिया के किसी कोने में नहीं।
जो मज़ा तेरी वृंदावन की रज में है,
मैंने पाया किसी बिछौने में नहीं।
शुभ जन्माष्टमी!"
???? "कण-कण में है उनका वास,
गोपियों संग जो रचाएं रास,
देवकी-यशोदा हैं जिनकी मइया,
वो हैं हमारे कृष्ण कन्हैया।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!"
???? "माखन का कटोरा, मिश्री की थाल,
प्यारे हैं हमारे नंदलाल।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं!"
????️ "राधा के संग खेलें फाग,
कान्हा संग हर दिन राग।
सुख-शांति घर में लाएं,
सब मिलकर जन्माष्टमी मनाएं!"
???? "कान्हा की बंसी की मधुर तान,
भर दे जीवन में खुशियों की जान।
जन्माष्टमी का पावन त्यौहार,
लाए आपके घर सुख-संसार।"
???? "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है,
करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है।
शुभ जन्माष्टमी!"
???? "गोकुल का राजा, माखन चोर,
राधा संग जिसने बांधी डोर।
आओ सब गुण उनके गाएं,
जन्माष्टमी उत्सव मनाएं!"
इन Messages को WhatsApp, Facebook, Instagram, SMS या Greeting Card में भेज सकते हैं।
???? इन शुभकामनाओं को आप डिजिटल आर्टवर्क, रील्स, या वीडियो स्टेटस के रूप में भी भेज सकते हैं। चाहे वो ऑफिस के सहकर्मी हों, परिवार के सदस्य हों, या कोई खास दोस्त – कान्हा के प्रेम की ये सौगात हर दिल को छू लेगी।
क्या आप भी रख रहे हैं जन्माष्टमी व्रत? जानिए किन लोगों के लिए हो सकता है ये नुकसानदायक!"
जन्माष्टमी 2025 इस साल 16 अगस्त को मनाई जाएगी, और इस दिन देशभर में कान्हा जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। व्रत, पूजन, रात्रि में भजन-कीर्तन और रासलीला जैसे आयोजनों से वातावरण कृष्णमय हो जाता है।
इस दिन भक्त सुबह से रात 12 बजे तक उपवास रखते हैं, क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अर्धरात्रि में माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर व्यक्ति के लिए जन्माष्टमी का व्रत अनिवार्य नहीं होता?
वास्तव में कुछ विशेष परिस्थितियों में व्रत रखने की मनाही होती है, और उन लोगों को केवल पूजा-पाठ कर श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेने की अनुमति दी जाती है।
जिन लोगों को जन्माष्टमी व्रत नहीं रखना चाहिए:
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं:
इन अवस्थाओं में अधिक समय तक उपवास करना माँ और बच्चे दोनों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है। ऐसे में केवल कथा, पूजन और भजन के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति:
जिन्हें डायबिटीज, हाई/लो ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, किडनी या लिवर संबंधी समस्याएं हैं, या फिर जो बुखार या अन्य बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें व्रत नहीं रखना चाहिए।
बुजुर्गों के लिए भी व्रत की अनिवार्यता नहीं होती।
छोटे बच्चे:
बहुत छोटे बच्चों के लिए भी उपवास शारीरिक रूप से उचित नहीं होता। उन्हें केवल कृष्ण भक्ति और पूजन में भाग लेने की सलाह दी जाती है।
मासिक धर्म में महिलाएं:
परंपराओं के अनुसार, ऐसी महिलाएं व्रत और पूजन दोनों से दूर रहती हैं। हालांकि, भक्ति भाव से मन में भगवान का स्मरण किया जा सकता है।
क्या करें अगर व्रत नहीं रख सकते?
यदि आप उपवास नहीं कर पा रहे हैं, तो भी पूजा, श्रीकृष्ण की आरती, झूला झुलाना, भजन-कीर्तन, और 56 भोग अर्पण जैसे कार्यों से आप जन्माष्टमी की पूर्ण भक्ति कर सकते हैं।
ध्यान रखें, भगवान भाव के भूखे हैं, भूख के नहीं। इसलिए शरीर की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही व्रत करने का निर्णय लें।
कृष्ण जन्माष्टमी 2025 के चमत्कारी उपाय
जन्माष्टमी की तिथि
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15 अगस्त 2025: पारंपरिक जन्माष्टमी (गृहस्थ जीवन वाले लोगों के लिए)
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16 अगस्त 2025: ISKCON और गौड़ीय परंपरा अनुसार जन्मोत्सव
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1. पैसों की तंगी से छुटकारा पाने का उपाय
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लड्डू गोपाल की पूजा करें।
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7 छोटी कन्याओं को अपने हाथों से खीर खिलाएं (खीर में चावल जरूर हो)।
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मान्यता: इससे लक्ष्मी कृपा प्राप्त होती है और आमदनी में वृद्धि होती है।
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2. घर में सुख-शांति लाने का उपाय
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राधा-कृष्ण की संयुक्त पूजा करें।
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पीले फूल, फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं।
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परिणाम: परिवार में झगड़े कम होंगे, शांति और प्रेम बढ़ेगा।
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3. नजर दोष और बुरी ऊर्जा से बचाव
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श्रीकृष्ण को चंदन का तिलक लगाएं।
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वही चंदन अपने माथे पर भी लगाएं।
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यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष को दूर करता है।
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4. पाप और ग्रह दोष से मुक्ति
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मंदिर के पास केले का पौधा लगाएं।
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केले का दान करें किसी जरूरतमंद को।
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लाभ: पापों का क्षय और ग्रह दोषों में राहत मिलती है।
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5. विवाह में देरी या रुकावट दूर करने का उपाय
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राधा-कृष्ण को बांसुरी भेंट करें।
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उन्हें खीर का भोग लगाएं।
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मान्यता: विवाह के योग बनने लगते हैं, उचित रिश्ता मिलने लगता है।
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6. बच्चों के स्वास्थ्य व उन्नति के लिए
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रात 12 बजे लड्डू गोपाल को झूला झुलाएं।
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अपने बच्चों के नाम से भोग अर्पित करें।
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इससे बच्चों की रक्षा होती है और उनका भविष्य उज्जवल बनता है।
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महत्वपूर्ण टिप्स
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व्रत रखें और रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म का उत्सव मनाएं।
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"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का स्त्रोत है। इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से जीवन में चमत्कारी परिवर्तन आ सकते हैं — चाहे वो धन संबंधी समस्या हो, विवाह में अड़चन हो, या नकारात्मक ऊर्जा से बचाव।
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14 अगस्त को है हल षष्ठी व्रत: संतान की सलामती के लिए न करें ये 6 गलतियाँ, वरना व्रत हो सकता है निष्फल!
Hal Shashthi Vrat 2025: मां की ममता और धार्मिक आस्था का पर्व
तारीख: 14 अगस्त 2025, गुरुवार
तिथि: भाद्रपद कृष्ण षष्ठी
योग: सर्वार्थ सिद्धि योग (पूरे दिन)
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से 12:52 तक
धार्मिक मान्यता: इस दिन व्रती महिलाएं भगवान बलराम, गणेश जी, माता पार्वती और छठ मैया की पूजा कर अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। यह व्रत विशेष रूप से मातृत्व प्रेम और बलराम जी के प्रतीक हल से जुड़ा हुआ है, जिसे ग्रामीण भारत में गहरी आस्था से मनाया जाता है।
हल षष्ठी में भूलकर भी न करें ये 6 कार्य:
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हल से जोतकर उगाई गई चीजों का सेवन न करें — जैसे गेहूं, चावल, आलू आदि।
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गाय के दूध, दही या घी का प्रयोग न करें।
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महुआ की दातुन से ही दांत साफ करें — कोई और दातुन न लें।
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हल से जोती गई जमीन पर पैर न रखें।
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तामसिक चीजें जैसे लहसुन, प्याज, मांस आदि न खाएं।
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संतान को किसी भी प्रकार का दुःख या कठोर वचन न दें — क्योंकि यह व्रत उन्हीं की भलाई के लिए रखा गया है।
व्रत में क्या खाएं?
सिंघाड़े या महुआ के आटे से बने पकवान
तिन्नी के चावल
भैंस का दूध, दही, घी
फल, कंदमूल, मिठाई (हल रहित)
पूजन विधि:
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सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें
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चौकी पर गणेश जी, बलराम जी और छठ मैया की प्रतिमा रखें
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रोली, अक्षत, महुआ, दूर्वा, जल से पूजन करें
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बच्चों के सुख और दीर्घायु के लिए संकल्प लें
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व्रत की कथा सुनें और फलाहार करें
आज का राशिफल....
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)आज के दिन आपकी जमा पूंजी में कमी आने के संकेत है। व्यवसाय से भी आज कुछ विशेष लाभ नहीं उठा पाएंगे आवश्यक कार्य अधूरे रहेंगे। प्रातः काल से खर्च का सिलसिला आरंभ होकर संध्या तक लगा रहेगा धन लाभ खर्च के अनुपात मे कम रहने से आर्थिक संतुलन बिगड़ेगा। विरोधी गुप्त षड्यंत्र रचेंगे जिसका दुष्परिणाम आने वाले समय में देखने को मिलेगा अपनी तरफ से आज कोई भी गलती ना करें। सामाजिक छवि अवश्य निखरेगी। स्त्री संताने आज्ञा का पालन करेंगी पर बीच-बीच में क्रोध के प्रसंग भी बनाएंगी। परिवार के बुजुर्गो की सेहत नरम रहेगी। आज किसी की भी अमर्यादित हरकतों को अनदेखा करें।
आज का राशिफल, 10 नवंबर 2022
मेष राशि- वाणी में सौम्यता रहेगी। मन में नकारात्मकता का प्रभाव हो सकता है। वस्त्रों के प्रति रुझान बढ़ सकता है। नौकरी में यात्रा पर जा सकते हैं। संगीत में रुचि हो सकती है। खर्च अधिक रहेंगे। माता से धन प्राप्ति हो सकती है। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। कार्यक्षेत्र में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। मित्रों के साथ किसी नए कारोबार को शुरू कर सकते हैं।













