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दिल्ली पुलिस ने त्रिलोकपुरी इलाक़े में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में आज अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया
दिल्ली पुलिस ने त्रिलोकपुरी इलाक़े में एक बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में केस दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर आज अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
महिलाओं के विरूद्ध अपराधों के प्रति माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार की शून्य सहिष्णुता नीति का अनुसरण करते हुए तथा महिलाओं के विरूद्ध अपराधों में शीघ्र जांच एवं सज़ा दिलाने की प्रतिबद्धता तथा माननीय केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के निर्देश पर, कि इस मामले में जांच तेज़ी से पूरी की जाए और 30 दिनों के भीतर चार्जशीट दाख़िल की जाए ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके, गृह मंत्रालय ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा की थी जिसमें दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज होने के 30 दिनों के भीतर चार्जशीट दाख़िल करने को कहा था, जिसके बाद फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट मामले की सुनवाई करेगी।
11.8.21 की घटना के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एबी आर/डब्ल्यू sec 6 पोक्सो एक्ट व sec 3(2) (v) एससी/एसटी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था। इस मामले में आज पुलिस ने तीन सप्ताह के भीतर न्यायालय में आरोप पत्र दाख़िल किया। आरोपी को कुछ घंटों के भीतर ही गिरफ़्तार कर लिया गया था और फ़िलहाल वह न्यायिक हिरासत में है। नांगल दुष्कर्म और हत्या मामले में भी पुलिस ने 30 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाख़िल कर दिया था।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाख़ा द्वारा माननीय न्यायालय श्री हसन अंजार, एएसजे, विशेष न्यायालय (पोक्सो एक्ट), कड़कड़डूमा न्यायालय, दिल्ली के समक्ष 187 पृष्ठ का आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, उन्होंने आगे की कार्यवाही के लिए 10 सितंबर की तारीख़ निर्धारित की है।
दिनांक 14.8.21 को इस मामले को थाना मयूर विहार से दिल्ली पुलिस की अपराध शाख़ा को स्थानांतरित कर दिया गया था तथा श्री मनोज सी. उपायुक्त (अपराध) के नेतृत्व में त्वरित जांच के लिए सहायक आयुक्त पुलिस, अरविन्द कुमार को सौंपा गया। जांच के दौरान तकनीकी सहित सभी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया और उन्हें रिकॉर्ड में लाया गया। वरिष्ठ अधिकारी दिन-प्रतिदिन जांच की निगरानी करते थे।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी के विरूद्ध 21 दिनों के अंदर ही चार्जशीट दाख़िल कर दी गई, जो अब न्यायिक हिरासत में है।
विश्व के दूसरे सबसे बड़े नवीनीकृत जीन बैंक का केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया लोकार्पण हमारे किसान बिना डिग्री के भी कुशल मानव संसाधन- तोमर
राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (National Bureau of Plant Genetic Resources- NBPGR), पूसा, नई दिल्ली में विश्व के दूसरे सबसे बड़े नवीनीकृत-अत्याधुनिक राष्ट्रीय जीन बैंक का लोकार्पण केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र के समक्ष विद्यमान चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उन पर विजयी प्राप्त करने में भारत के किसान पूरी तरह सक्षम है, हमारे किसान बिना किसी बड़ी शैक्षणिक डिग्री के भी कुशल मानव संसाधन है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को किसानों की भलाई की लगातार चिंता रहती है और उनकी आय बढ़ाने के लिए अनेक योजनाओं के माध्यम से सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए गए हैं।
श्री तोमर ने प्रो. बी.पी. पाल, प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन और प्रो. हरभजन सिंह जैसे दूरदर्शी विशेषज्ञों की सेवाओं को सराहते हुए कहा कि इन्होंने देश में स्वदेशी फसलों की विविधता संरक्षण के लिए मजबूत नींव रखी थी। हमारा गौरवशाली अतीत रहा है, उसे पढ़कर देश की प्रगति के लिए सभी को भविष्य के प्रति जिम्मेदारी के भाव के साथ आगे बढ़ते रहना चाहिए। यह नवीनीकृत-अत्याधुनिक राष्ट्रीय जीन बैंक इसी दिशा में एक सशक्त हस्ताक्षर है। यहां काम करने वाले स्टाफ को निश्चित ही संतोष व प्रसन्नता का अनुभव होता होगा कि वे विरासत को सहेजते हुए किस तरह से कृषि क्षेत्र व देश की सेवा कर रहे हैं। आज बायोफोर्टिफाइड फसलों की किस्मों की आवश्यकता महसूस की जा रही है, कहीं ना कहीं असंतुलन है, जिसे दूर करने की कोशिशें सरकार किसानों को साथ लेकर कर रही है।
श्री तोमर ने कहा कि पुरातन काल में साधन-सुविधाओं का अभाव था, इतनी टेक्नालाजी भी नहीं थी, लेकिन प्रकृति का ताना-बाना मजबूत था, पूरा समन्वय रहता था, जिससे तब देश में न तो कुपोषण था, ना ही भूख के कारण मौतें होती थी। लेकिन जब यह ताना-बाना टूटा तो हमें मुश्किलें पेश आने लगी और विशेष प्रयत्न करने की जरूरत पड़ी। सरकार के किसानों व कृषि वैज्ञानिकों के साथ सफल प्रयत्नों के फलस्वरूप आज खाद्यान्न की उत्पादन व उत्पादकता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बीस-तीस साल पहले इतने प्रयत्न नहीं किए गए, खेती-किसानी के विकास पर जितना ध्यान दिया जाना चाहिए था, उसमें चूक हुई अन्यथा कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र को लेकर आज दुनिया, भारत पर अवलंबित होती
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कहा कि जर्मप्लाज्म के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं सहित नवीनीकृत जीन बैंक से कृषि-किसानों को काफी फायदा होगा। सरकार सकारात्मक सोच से काम कर रही है। प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का है, सरकार इस दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने स्वागत भाषण देते हुए ब्यूरो की गतिविधियां व प्रगति बताई। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने ब्यूरो के कुछ प्रकाशनों का विमोचन किया तथा पीजीआर मैप एप लांच किया। जीन बैंक के आधुनिकीकरण के लिए, ब्यूरो के हाल ही में सेवानिवृत निदेशक श्री कुलदीप सिंह की सेवाओं को सराहा गया। आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. तिलक राज शर्मा ने आभार माना। कार्यवाहक निदेशक श्री अशोक कुमार व वीना गुप्ता सहित अन्य स्टाफ भी मौजूद था
पादप आनुवंशिक संसाधनों (पीजीआर) के बीजों को भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करने हेतु वर्ष 1996 में स्थापित नेशनल जीन बैंक में बीज के रूप में लगभग 10 लाख जर्मप्लाज्म को संरक्षित करने की क्षमता है। वर्तमान में 4.52 लाख परिग्रहण का संरक्षण कर रहा है, जिसमें 2.7 लाख भारतीय जननद्रव्य है व शेष अन्य देशों से आयात किए हैं। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, दिल्ली मुख्यालय व देश में 10 क्षेत्रीय स्टेशनों के माध्यम से इन-सीटू और एक्स-सीटू जर्मप्लाज्म संरक्षण की आवश्यकता को पूरा कर रहा है।
आयुष मंत्रालय ने कोविड-19 के इलाज में एनआईसीई के निराधार दावे का जोरदार खंडन किया
कोविड के इलाज के लिए कुछ भ्रामक दावे प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित नेटवर्क एनआईसीई (नेटवर्क ऑफ इन्फ्लुएंजा केयर एक्सपर्ट्स) द्वारा किए गए हैं। इस दावे को कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा बिना तथ्यों के सत्यापन के प्रकाशित किया गया है। एनआईसीई ने जो मुख्य दावा किया है वह है कोविड-19 के उपचार के लिए एक प्रोटोकॉल विकसित करने के संबंध में है जिसे आयुष मंत्रालय द्वारा स्वीकृत बताया है। हालांकि, सच्चाई यह है कि दावेदार ने अनैतिक और भ्रामक रूप से इसके लिए आयुष मंत्रालय की मंजूरी को जिम्मेदार ठहराया है। आयुष मंत्रालय ने इस गलत दावे को खंडन करते हुए कहा है कि वह एनआईसीई के ऐसे सभी दावों का पुरजोर खंडन करता है और संबंधित समाचारों के प्रकाशन को पूरी तरह से भ्रामक और निराधार मानता है।
आयुष मंत्रालय यह भी स्पष्ट करता है कि उक्त एजेंसी, एनआईसीई ने तथाकथित प्रोटोकॉल के लिए आयुष मंत्रालय को कोई आवेदन नहीं दिया था। अगर एनआईसीई द्वारा कोविड-19 उपचार/प्रबंधन से संबंधित कोई प्रस्ताव मंत्रालय को दिया जाता है, तो इसकी अंतःविषय तकनीकी समीक्षा समिति (आईटीआरसी) द्वारा पूरी तरह से जांच की जाएगी। इस तरह के सत्यापन के लिए समिति के पास एक सुव्यवस्थित और सख्त वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया है। इस समिति के अनुमोदन के बिना, कोई भी आयुष धारा से संबंधित एजेंसी प्रोटोकॉल विकसित करने का दावा नहीं कर सकती है। एनआईसीई ने कोविड-19 उपचार के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा अनुमोदित प्राकृतिक चिकित्सा-आधारित प्रोटोकॉल विकसित करने का दावा करते हुए एक बहुत ही अनैतिक, अवैध और निराधार काम किया है। मंत्रालय की स्पष्ट अनुमति के बिना मंत्रालय के नाम का उपयोग करने का उसका कार्य भी उतना ही गंभीर है।
एनआईसीई जैसे झूठे दावे गृह मंत्रालय के आदेश संख्या 40-3/2020-डीएम-2 (ए), दिनांक 24 मार्च 2020 और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के आदेश संख्या। 1-29/2020-पीपी (पं. II), दिनांक 24 मार्च, 2020 के अनुसार दंडनीय अपराध के अंतर्गत आते हैं। ये आदेश झूठे दावों को दंडनीय अपराध बनाते हैं ताकि देश में कोविड-19 के प्रसार को रोका जा सके। कुछ मीडिया संस्थानों ने आयुष मंत्रालय से तथ्यों की पुष्टि किए बिना एनआईसीई द्वारा किए गए झूठे दावे को प्रकाशित किया है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी (एनआईएन) पुणे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेटवर्क ऑफ इन्फ्लुएंजा केयर एक्सपर्ट (एनआईसीई) ने बड़ा और भ्रामक दावे किया है। दावा कोविड-19 के प्रबंधन/उपचार के संबंध में है और एनआईसीई ने गलत तरीके से आयुष मंत्रालय द्वारा अपने उक्त प्रोटोकॉल को मंजूरी मिलने का दावा किया है।
इस बात पर और जोर दिया जाता है कि आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में काम कर रहे एनआईएन, पुणे ने स्थानीय मीडिया में पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह कोविड के प्रबंधन, उपचार और रोकथाम के लिए न केवल गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करता है बल्कि आईईसी की जानकारी और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से इन दिशानिर्देशों को भी बढ़ावा देता है।
मीराबाई चानू के भारत लौटने पर उनका एक नायक की तरह स्वागत किया गया
मुख्य बिंदु:
चानू की सफलता दर्शाती है कि कैसे लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टीओपीएस) कार्यक्रम ने हमारे एथलीटों के विकास और भारत की पदक प्राप्त करने की उम्मीदों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है: खेल मंत्री
सरकार द्वारा मुझे दी गई हर प्रकार की मदद के लिए मैं आभारी हूं, जिसके बिना ओलंपिक पदक की यह यात्रा संभव नहीं होती: सुश्री मीराबाई चानू
टोक्यो ओलंपिक में भारत की प्रथम पदक विजेता साइखोम मीराबाई चानू और उनके कोच विजय शर्मा आज शाम स्वदेश वापस लौट आये हैं। उनकी भारत वापसी पर उनका अभूतपूर्व तरीके से स्वागत किया गया और केंद्रीय खेल मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने उनके आवास पर उनका अभिनंदन किया। केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय पर्यटन, संस्कृति और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय पोत, पत्तन परिवहन और जलमार्ग मंत्री और आयुष मंत्री, श्री सर्बानंद सोनोवाल और युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री, श्री निसिथ प्रमाणिक भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


यह पहली बार है, जब चानू ने महिलाओं की 49 किलोग्राम भार वर्ग की भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीता है। चानू, 1 मई को संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रसिद्ध चिकित्सक, शक्ति और कंडीशनिंग कोच डॉ. आरोन होर्चिग के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद हवाई जहाज से भारत आई थी। कोविड-19 रोगियों की संख्या में वृद्धि के कारण कुछ दिनों के भीतर भारत से आने वाले लोगों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में यात्रा प्रतिबंध के कारण भारत सरकार ने चानू के लिए बहुत ही कम समय के नोटिस पर विमान से यात्रा करने की व्यवस्था की थी।
जीत से उत्साहित चानू ने कहा यह मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है। मैं इस पल के लिए कई वर्षों से प्रशिक्षण ले रही थी और मुझे खुशी है कि यह सब मेरे लिए सबसे बड़े खेल आयोजन ओलंपिक में संभव हुआ।” चानू ने सरकार से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने खास तौर से दो यात्राओं, पिछले साल और हाल की संयुक्त राज्य अमेरिका यात्रा के लिए मिले सहयोग के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा "मेरे कंधे से संबंधित समस्याओं को दूर करने में पिछले साल की अमेरिका की यात्रा ने इस पदक को जीतने में अहम भूमिका निभाई है।”चानू ने कहा सरकार ने जिस तरह से कई वर्षों तक मुझे समय-समय पर सहयोग दिया है, उसी वजह से आज यह संभव हो पाया है। बिना उनके समर्थन के यह उपलब्धि हासिल करना संभव नहीं था। इसके लिए मैं उनकी आभारी हूं। उन्होंने यह भी कहा कि मैं खासतौर से यह कहना चाहूंगी कि 'लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टीओपीएस) ने मेरे करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और पदक की संभावनाओं को बढ़ाने में विशेष तौर पर मदद की है।”
श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने चानू को बधाई देते हुए कहा, “मीराबाई चानू की जीत 130 करोड़ भारतीयों की जीत है, जो टोक्यो में पदक समारोह में भारत का झंडा फहराने और राष्ट्रगान के बजने पर गर्व महसूस कर रहे थे। ओलंपिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय ने पहले ही दिन पदक जीता है। उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि कैसे टीओपीएस कार्यक्रम ने हमारे खिलाड़ियों के विकास व भारत की पदक उम्मीदों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मोदी सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने का काम करना जारी रखेगी और उन्हें उच्चतम स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए हर सुविधा प्रदान करेगी। उनके प्रदर्शन ने पूरे देश को आकांक्षाओं से भर दिया है। वे पूर्वोत्तर से और भी अधिक खिलाड़ियों की एक पीढ़ी को प्रेरित करेंगी।”
केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि टोक्यो रवाना होने से पहले जब हमने बात की, तो उन्होंने वादा किया था कि वह देश के लिए पदक लाएंगी और वे अपने शब्दों पर खरी उतरीं, उन्होंने अपना वादा पूरा किया। मंत्री ने आगे कहा, “प्रत्येक भारतीय की तरह मैं भी इस प्रतिष्ठित उपलब्धि से बहुत उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। वे भारत में जो गौरव और सम्मान लाई हैं, वह वर्षों की दृढ़ता, समर्पण और अत्यधिक मेहनत का परिणाम है और वे उस हर प्रशंसा की पात्र हैं, जो उन पर बरस रही हैं।”
केंद्रीय मंत्री श्री किशन रेड्डी ने कहा, “ये देखते हुए मेरा दिल गर्व से भर जाता है कि हमारी बेटियां मां भारती को गौरवान्वित कर रही हैं। गले में रजत पदक पहने, उस आसन पर खड़ी मीराबाई ने हर भारतीय का दिल जीत लिया है। सफलता की ओर उनकी ये यात्रा न केवल खेल समुदाय के लिए बल्कि हरेक उस युवा के लिए प्रेरणा है जिसके कुछ सपने और लक्ष्य हैं। मैं इस अवसर पर पूर्वोत्तर राज्यों में खेल और फिटनेस गतिविधियों के प्रति अपना उत्साह दर्ज करना चाहूंगा और मुझे खुशी है कि ये सक्रिय खेल संस्कृति भारत को गौरवान्वित कर रही है।
केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने मीराबाई को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी और कहा कि आपने हमारे पूरे देश को प्रेरित किया है और हम सभी को आप पर गर्व है।
श्री प्रमाणिक ने भी इस विजेता भारोत्तोलक की प्रशंसा करते हुए कहा, “ये पदक वर्षों की कड़ी मेहनत और तैयारी का परिणाम है। ये 135 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व की बात है क्योंकि उन्होंने आपको उस बड़े मंच पर वो भार उठाते हुए और पदक जीतते देखा। ये आपकी शानदार यात्रा में जुड़ा एक सुनहरा अध्याय है और मुझे पूरा यकीन है कि आप यहीं नहीं रुकेंगी। ये मेरा और पूरे देश का आपको आशीर्वाद है कि आप आने वाले वर्षों में और ज्यादा पदक जीतें
मध्य प्रदेश- छत्तीसगढ के कृषि विज्ञान केंद्रों की 28वीं क्षेत्रीय कार्यशाला का केंद्रीय कृषि मंत्री ने किया उद्घाटन
मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ स्थितकृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) की 28वीं क्षेत्रीय कार्यशाला का उद्घाटन सोमवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में भारत सरकार गांव-गरीब-किसान-किसानी की प्रगति के लिए प्राथमिकता के साथ काम कर रही है। इस दिशा में कई योजनाएं प्रारंभ की गई है। देशभर में गांव-गांव अधोसंरचना विकसित करने के लिए एक लाख करोड़ रूपए के कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड सहित आत्मनिर्भर भारत अभियान में कुल डेढ़ लाख करोड़ रूपए से अधिक के पैकेज शुरू किए गए हैं। हर सप्ताह मंत्रालय में इसकी प्रगति के लिए बैठकें होती है। इसी तरह, 6,850 करोड़ रू. के खर्च से 10 हजार नए एफपीओ के गठन की स्कीम तथा किसानों के सशक्तिकरण के लिए नए कृषि सुधार कानून जैसे ठोस कदम खेती को समृद्धता देने वाले हैं, ये कृषि विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। 86 प्रतिशत छोटे-मझौले किसान इनके माध्यम से और मजबूत होंगे, जिससे देश की भी ताकत बढ़ेगी।

मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने कहा कि कोरोना के संकटकाल में भी केवीके के वैज्ञानिक, सूचना-संचार तकनीकों एवं कृषि विभाग के साथ मिलकर किसानों को उचित तकनीकों द्वारा लाभ पहुंचा रहे है, जो सराहनीय है।पशु धन एवं मछली पालन के विकास के लिए भी हमारे केवीके पूरे जज्बे के साथ कार्य कर रहे हैं तथा कृषि व सभी सम्बद्ध क्षेत्रों की सतत प्रगति व किसानों की आय बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।वर्तमान में 723 केवीके, आईसीएआर की इकाइयों, गैर सरकारी संस्थानों व राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा चलाए जा रहे है, जिनसे किसानों को बहुत मदद मिल रही है। अटारी, जबलपुर के तहत म.प्र. व छग में 81 केवीके हैं। 81 में से 28 छग में हैं, जिनमें से 7 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में है।यहां तमाम चुनौतियों के बीच भी केवीके सुचारू काम कर रहे हैं, इसके लिए उन्होंने सभी वैज्ञानिकों व अन्य स्टाफ को बधाई-शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए ये सभी विंग बहुत जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। केवीके की टीमें जिलों व गांवों तक बखूबी काम कर रही है और कृषि संबंधी विभागों के साथ मिलकर विभिन्न कृषि कार्यक्रमों को लागू करने में तकनीकी समर्थन व सामयिक जानकारी उपलब्ध कराने के प्रमुख स्त्रोत के रूप में अहम भूमिका का निर्वाहन कर रही है।
श्री तोमर ने कहा कि देशभर के कुल उत्पादन में मध्य प्रदेश से मुख्य रूप से दलहन, गेहूं व सोयाबीन तथा छत्तीसगढ़ से धान की पैदावार का महत्वपूर्ण योगदान है। संतोष की बात है कि केवीके के माध्यम से क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन व सीड हब द्वारा दलहन की उत्पादकता में बढ़ोतरी की जा रही है। प्रदेश में सोयाबीन फसल के 60 लाख हेक्टेयर में से करीब 35 लाख हेक्टेयर पर ऊंची क्यारी (रेज्ड बेड) तकनीक का उपयोग करके जल संरक्षण द्वारा उत्पादकता बढ़ाई जा रही है, वहीं कड़कनाथ मुर्गी पालन केवीके के प्रयासों से 25 राज्यों में हो रहा है और विदेशों से भी मांग है। श्री तोमर ने कहा कि इन केंद्रों को अधिक उपयोगी व आधुनिक बनाने की दृष्टि से एकीकृत कृषि प्रणाली, उन्नत बीज उत्पादन एवं प्रसंस्करण, जल संचयन व सूक्ष्म सिंचाई जैसी महत्वपूर्ण इकाइयां स्थापित की गई है। उन्होंने इसमें राज्य सरकारों की ओर से पूर्ण सहयोग का आग्रह किया, जिससे आगे खेती के क्षेत्र में बड़ा फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि खेती-किसानी की प्रगति में मृदा स्वास्थ्य का अहम योगदान होता है और खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन अनुसार, केवीके द्वारा किसानों को मृदा परीक्षण के संबंध में कार्ड वितरित कर फसलों के अनुरूप पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह, प्रदर्शन व प्रशिक्षण द्वारा दी जा रही है, जिससे उन्हें लाभ हो रहा है। यह भी प्रसन्नता की बात है कि युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करते हुए अटारी, जबलपुर द्वारा नई परियोजना- 'आर्या' म.प्र.-छग के 12 केवीके में संचालित की जा रही है, जिसके तहत प्रसंस्करण, मशरूम व लाख उत्पादन, नर्सरी प्रबंधन आदि में 700 से ज्यादा युवाओं ने उद्यम स्थापित किए है। अटारी, जबलपुर में ’फार्मर फर्स्ट’ परियोजना तीन संस्थानों व चार विश्वविद्यालयों द्वारा चलाई जा रही है। इसके साथ-साथ 'मेरा गांव-मेरा गौरव' कार्यक्रम भी म.प्र.-छग के 5 विश्वविद्यालयों व 5 अन्य संस्थानों द्वारा संचालित किया जा रहा है। दलहनी फसलों के बीजों की उपलब्धता वृद्धि हेतु 15 जिलों में सीड हब कार्यक्रम का संचालन केवीके द्वारा किया जा रहा है।
श्री तोमर ने कहा कि नारी कार्यक्रम के जरिये पोषण संवेदन कृषि को बढ़ावा, क्षमता कार्यक्रम द्वारा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कृषि व उद्यमता विकास, वाटिका कार्यक्रम के माध्यम रोजगारोन्मुखी क्षेत्रीय उत्पादों का मूल्यसंवर्धन कर महिलाओं के सशक्तिकरण के दायित्व निर्वहन में केवीके की अहम भूमिका है। कोरोना के चलते हम सभी को डिजिटल प्लेटफार्म पर काम करना पड़ रहा है औरडिजिटललिटरेसी, मार्केटिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मैकेनाइजेशन लर्निंग आज की महती आवश्यकता है, इस दिशा में कृषि विज्ञान केंद्रों को सशक्त एवं आधुनिक बनाया जाएगा।केवीके की संरचनाओं को और सुदृढ़ करने व कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जाती है। समय की मांग को ध्यान में रखते हुए केवीके द्वारा जैविक वपरंपरागत खेती पर भी विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं ।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया तथा केवीके, गोविंद नगर, होशंगाबाद में सोयाबीन बीज हब भंडार गृह की आधारशिला रखी
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने पेंशनभोगियों को महंगाई राहत बढ़ाने के आदेश जारी कर दिए
कैबिनेट द्वारा 14 जुलाई, 2021 को लिए गए निर्णय पर अमल करते हुए पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों (सशस्त्र बलों, अखिल भारतीय सेवाओं और रेलवे के पेंशनभोगियों/पारिवारिक पेंशनभोगियों सहित) को दी जाने वाली महंगाई राहत को 01.07.2021 से बढ़ाकर मूल पेंशन/पारिवारिक पेंशन (अतिरिक्त पेंशन/पारिवारिक पेंशन सहित) का 28% करने के आदेश 22.07.2021 को जारी कर दिए हैं, जो 17% की मौजूदा दर में 11% की वृद्धि को दर्शाता है।
कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न अप्रत्याशित स्थिति को देखते हुए पेंशनभोगियों को दी जाने वाली महंगाई राहत की तीन अतिरिक्त किस्तों, जो 01.01.2020, 01.07.2020 और 01.01.2021 से देय थीं, पर रोक लगा दी गई थी।
अब सरकार ने पेंशनभोगियों/पारिवारिक पेंशनभोगियों को दी जाने वाली महंगाई राहत को 01.07.2021 से बढ़ाकर मूल पेंशन/पारिवारिक पेंशन का 28% करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस वृद्धि में 01.01.2020, 01.07.2020 और 01.01.2021 को देय अतिरिक्त किस्तों को समाहित या शामिल कर दिया गया है। 01.01.2020 से लेकर 30.06.2021 तक की अवधि के लिए महंगाई राहत की दर मूल पेंशन/पारिवारिक पेंशन के 17% पर यथावत रहेगी।
कैबिनेट ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में वृद्धि को मंजूरी दी
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट समिति ने आज केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों को दी जाने वाली महंगाई राहत को 01.07.2021 से बढ़ाकर 28% करने की मंजूरी दे दी, जो मूल वेतन/पेंशन के 17% की मौजूदा दर में 11% की वृद्धि को दर्शाता है।
कोविड-19 महामारी से उत्पन्न हुई अप्रत्याशित स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों को दी जाने वाली महंगाई राहत (डीआर) की तीन अतिरिक्त किस्तों, जो 01.01.2020, 01.07.2020 और 01.01.2021 से देय थीं, पर रोक (फ्रीज) लगा दी गई थी।
अब सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों को दी जाने वाली महंगाई राहत को 01.07.2021 से बढ़ाकर 28% करने का निर्णय लिया है, जो मूल वेतन/पेंशन के 17% की मौजूदा दर में 11% की वृद्धि को दर्शाता है। यह वृद्धि 01.01.2020, 01.07.2020 और 01.01.2021 को देय अतिरिक्त किस्तों को दर्शाती है। 01.01.2020 से लेकर 30.06.2021 तक की अवधि के लिए महंगाई भत्ता/महंगाई राहत की दर 17% पर ही यथावत रहेगी।
महान सिने अभिनेता दिलीप कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री ने शोक व्यक्त किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महान सिने अभिनेता दिलीप कुमार जी के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उनके दिवंगत हो जाने से हमारे सांस्कृतिक संसार को नुकसान पहुंचा है।
अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा है, “दिलीप कुमार जी को हमेशा सिने जगत के दिग्गज के रूप में याद किया जायेगा। उन्हें बेमिसाल प्रतिभा मिली थी, जिसने दर्शकों की कई पीढ़ियों को मंत्र-मुग्ध किया। उनके परिवार, मित्रों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनायें। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।”
पर्यावरण और जनजातीय कार्य मंत्रालयों द्वारा वन अधिकार अधिनियम के अधिक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर किए गए
वन प्रबंधन में अनुसूचित जनजातियों और वनवासियों की भागीदारी में सुधार करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वन अधिकार अधिनियम को अक्षरश: लागू किया जा रहा है: श्री अर्जुन मुंडा
संयुक्त पत्र, मंत्रालयों और विभागों द्वारा अलग-थलग होकर नहीं बल्कि आपस में समन्वय स्थापित करके काम करने पर आधारित मूलभूत बदलाव का संकेत देता है: श्री प्रकाश जावडेकर
केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर तथा जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा की उपस्थिति में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के सचिव श्री आर पी गुप्ता एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) के सचिव श्री अनिल कुमार झा ने आज नई दिल्ली में एक "संयुक्त पत्र" पर हस्ताक्षर किए।

राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी मुख्य सचिवों को संबोधित संयुक्त पत्र, वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के अधिक प्रभावी कार्यान्वयन और वन में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों (एफडीएसटी) और अन्य पारंपरिक वनों के निवासियों (ओटीएफडी) की आजीविका में सुधार की क्षमता का दोहन करने से संबंधित है।
इस अवसर पर जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आदिवासी और अन्य वनवासी जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र को बढ़ाने के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
अपने मुख्य भाषण में श्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज का संयुक्त पत्र वनवासियों के अधिकारों और कर्तव्यों पर आधारित है और वन प्रबंधन की प्रक्रिया में ऐसे समुदायों की भागीदारी में सुधार करना है।
जनजातीय कार्य मंत्री ने बैठक में उपस्थित लोगों को आगे बताया कि 10 अगस्त, 2020 को दोनों मंत्रियों के बीच एक बैठक हुई, जिसका उद्देश्य वन प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने के मुद्दों को हल करना था, और आज का संयुक्त पत्र उसके बाद किए गए परामर्शों की श्रृंखला की परिणति है।
पर्यावरण मंत्री श्री जावडेकर ने कहा कि यह संयुक्त पत्र विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा अलग-थलग होकर नहीं बल्कि आपस में समन्वय स्थापित करके काम करने पर आधारित मूलभूत बदलाव का संकेत देता है, जोकि एक बेहद सकारात्मक प्रगति है।
पर्यावरण मंत्री ने कहा, “भारत सरकार अनुसूचित जनजाति के लोगों और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। स्वीकृत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) की संख्या बढ़कर 620 हो गई है। इसी प्रकार, वन धन योजना का शुभारंभ और पिछले कुछ वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की श्रेणी में लघु वन उत्पादों (एमएफपी) की संख्या को 10 से बढ़ाकर 86 किये जाने के कदम से अनुसूचित जनजाति के लोगों को अपनी आय और आजीविका की संभावनाओं को बेहतर करने में काफी मदद मिली है।”
इस अवसर पर जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता ने खुशी व्यक्त की और संयुक्त पत्र को ऐतिहासिक बताया, जिससे सभी हितधारक एक मंच पर आएंगे। साथ ही उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि यह वनवासियों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
पर्यावरण राज्य मंत्री श्री बाबुल सुप्रियो ने सही मायने में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया। यह कदम न सिर्फ वन संरक्षण और जैव विविधता के हित में, बल्कि अनुसूचित जातियों और ओटीएफडी के कल्याण के लिए लंबा रास्ता तय करेगा।
इस कार्यक्रम में 300 से ज्यादा प्रतिभागियों के साथ ही वन, राजस्व, जनजातीय कार्य विभागों में प्रमुख सचिव/ सचिवों, प्रमुख वन संरक्षकों, जनजातीय कार्य विभागों के आयुक्त/ निदेशक जैसे राज्य सरकार के अधिकारियों, जनजातीय शोध संस्थानों (टीआरआई) के निदेशकों, एनजीओ और भागीदार संगठनों के सदस्यों ने भाग लिया।
भारत में ऑटोमोबाइल के लिए एशिया के सबसे लंबे और दुनिया के पांचवां सबसे लंबे हाई स्पीड ट्रैक का उद्घाटन
Delhi
भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज इंदौर में एनएटीआरएएक्स- हाई स्पीड ट्रैक (एचएसटी)का उद्घाटन किया,जो एशिया का सबसे लंबा ट्रैक है। एनएटीआरएएक्स को1000 एकड़ भूमि के क्षेत्र में विकसित किया गया है। जहां पर 2 पहिया वाहनों से लेकर भारी ट्रैक्टर ट्रेलरों तक के सभी प्रमुख श्रेणी वाले वाहनों के हाई स्पीड परीक्षण हो सकेंगे। जो कि वाहनों के लिए सभी प्रकार के हाई स्पीड परीक्षण का एक प्रमुख केंद्र होगा।
विश्व स्तरीय 11.3 किमी लंबे हाई स्पीड ट्रैक के ई-उद्घाटन पर बोलते हुए,श्री जावड़ेकर ने कहा कि भारत का ऑटोमोबाइल और स्पेयर पार्ट्स का मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनना तय है। मंत्री ने कहा, हम तेजी से 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर बढ़ रहे हैं और इस दिशा में चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, उनका मंत्रालय प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए के लिए प्रतिबद्ध है जिसकेतहत भारत ऑटो मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के विस्तार से नए रोजगार पैदा करने में भी सहयोग मिलेगा।
मंत्री ने कहा कि रेलवे, राजमार्ग और जलमार्ग क्षेत्र की कई परियोजनाएं वर्षों से लटकी हुई थीं जो आज मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण पूरी हो रही हैं।
इस अवसर पर भारी उद्योग एवंलोक उद्यम राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सरकार मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल उद्योग को बढ़ावा दे रही है क्योंकि इससे देश को बड़े पैमाने पर सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।
एनएटीआरएएक्स केंद्र में कई परीक्षण क्षमताएं हैं जैसे अधिकतम गति को आंकना, एक्सीलरेशन,तय गति परईंधन की खपत क्षमता, रियलरोड ड्राइविंग सिमुलेशन के माध्यम से उत्सर्जन परीक्षण, लेन बदलने के दौरान के दौरान वाहन की स्थिरता, उच्च गति की निरंतरता परखने की सुविधा है।इसके अलावा यह वाहनों के डायनेमिक्स काएक उत्कृष्टता केंद्र है।
एचएसटी का इस्तेमाल बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, ऑडी, फेरारी, लेम्बोर्गिनी, टेस्ला आदि जैसी हाई-एंड कारों की अधिकतम हाई स्पीड क्षमता को मापने के लिए किया जाता है। जिसे किसी अन्य भारतीय परीक्षण ट्रैक पर नहीं मापा जा सकता है। मध्य प्रदेश में स्थित होने के कारण, यह अधिकांश ओईएम के लिए सुलभ है। विदेशी ओईएम भी भारतीय परिस्थितियों के लिए प्रोटोटाइप कारों के विकास के लिए एनएटीआरएएक्स एचएसटी के इस्तेमाल पर विचार करेंगे। वर्तमान में, विदेशी ओईएम हाई स्पीड परीक्षण जरूरतों के लिए विदेश में उच्च गति वाले ट्रैक पर परीक्षण करते हैं।
यह सभी प्रकार के हाई स्पीड परीक्षणों के लिए एक प्रमुख स्थान है, जो दुनिया में सबसे बड़े ट्रैकों में से एक है। यह सभी तरह की श्रेणी वाले वाहनों की जरूरत को पूरा कर सकता है।दो पहिया वाहनों से लेकर सबसे भारी ट्रैक्टर ट्रेलरों तक के वाहनों का इस ट्रैक पर परीक्षण किया जा सकता है। ट्रैक के घुमावों पर वाहनोंकी स्टेयरिंग का नियंत्रण 375 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति पर भीकिया जा सकता है। इसके लिएट्रैक को कम अंडाकार बनाया गया है। जो इसे से वैश्विक स्तर पर सबसे सुरक्षित परीक्षण ट्रैक में से एक बनाता है
कोविड-19 के उपचार पर खर्च और कोविड-19 से हुई मौत पर मिली अनुग्रह राशि को कर से छूट देने की घोषणा की
सरकार ने आयकर अधिनियम के अंतर्गत अनुपालनों की समय-सीमा को एक बार फिर आगे बढ़ाने को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही कोविड-19 के उपचार पर हुए खर्च और कोविड-19 के चलते हुई मौत पर मिली अनुग्रह राशि पर कर छूट का भी ऐलान कर दिया है। विवरण इस प्रकार है :
- कर छूट
- कई करदाताओं को कोविड-19 के उपचार पर हुए खर्च की पूर्ति के लिए अपने नियोक्ताओं और शुभचिंतकों से सहायता के रूप में धनराशि मिली है। इस धनराशि पर आयकर की कोई देनदारी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए करदाता को वित्त वर्ष 2019-20 और उसके बाद के वर्षों में कोविड-19 के उपचार के लिए नियोक्ता या किसी भी व्यक्ति से इलाज के लिए मिली धनराशि पर आयकर से छूट उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है।
- दुर्भाग्य से, कोविड-19 के चलते कुछ करदाताओं की जान चली गई। नियोक्ताओं और शुभचिंतकों ने उनके परिजनों को वित्तीय सहायता दी थी, जिससे वे अपने परिवार के कमाने वाले सदस्य की अचानक मृत्यु से पैदा हुईं मुश्किलों से पार पा सकें। ऐसे करदाता के परिजनों को राहत उपलब्ध कराने के क्रम में, वित्त वर्ष 2019-20 और उसके बाद के वर्षों के दौरान कोविड-19 के चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु पर उसके परिजनों को उस व्यक्ति के नियोक्ता या किसी अन्य व्यक्ति से मिली अनुग्रह धनराशि पर आयकर से छूट उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। नियोक्ता से मिली रकम पर बिना किसी सीमा के और किसी अन्य व्यक्ति से मिली धनराशि के लिए कुल 10 लाख रुपये तक की धनराशि पर छूट की अनुमति होगी।
उक्त फैसलों के लिए जरूरी विधायी संशोधनों का जल्द ही प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
- समयसीमाओं का विस्तार
कोविड-19 महामारी के प्रभाव को देखते हुए, करदाताओं को कुछ कर अनुपालनों को पूरा करने और विभिन्न नोटिसों पर जवाब देने में भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस मुश्किल दौर में करदाताओं द्वारा किए जाने वाले अनुपालनों को आसान बनाने के क्रम में, अधिसूचना संख्या 74/2021 और 75/2021 दिनांक 25 जून, 2021, परिपत्र संख्या 12/2021 दिनांक 25 जून, 2021 के माध्यम से राहत उपलब्ध कराई गई हैं। ये राहत इस प्रकार हैं :
- आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 144 सी (इसे बाद में ‘अधिनियम’ के रूप में संदर्भित किया गया है) के तहत विवाद समाधान पैनल (डीआरपी) और निर्धारण अधिकारी की आपत्तियां, जिसके लिए इस धारा के तहत फाइलिंग की तारीख 1 जून, 2021 या उसके बाद है, इसे अब उस धारा में उपलब्ध कराए गए समय के भीतर या 31 अगस्त, 2021 तक, जो भी बाद में है, फाइल किया जा सकता है।
- कर कटौती का विवरण, वित्त वर्ष 2020-21 की अंतिम तिमाही के लिए, आयकर नियम, 1962 (जिसका बाद में “नियमों” के रूप में उल्लेख किया गया है) के नियम 31ए के अंतर्गत 31 मई, 2021 तक या उससे पहले जमा किया जाना था, इसे 2021 के परिपत्र संख्या 9 के माध्यम से 30 जून, 2021 तक बढ़ा दिया गया था, इसे अब 15 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
- प्रपत्र संख्या 16 में स्रोत पर कर कटौती प्रमाण पत्र, नियमों में शामिल नियम 31 के तहत इसे 15 जून, 2021 तक जमा करना था, 2021 के परिपत्र संख्या 9 के माध्यम से इसे 15 जुलाई, 2021 तक बढ़ा दिया गया था, इसे अब 31 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
- आयकर भुगतान या जमा का विवरण, जो एक निवेश फंड द्वारा पिछले वर्ष 2020-21 के लिए प्रपत्र संख्या 64डी में अपने यूनिट धारक को दिया गया, उसे नियमों में शामिल नियम 12सीबी के तहत 15 जून, 2021 को या उससे पहले जमा करना था, जिसे 2021 के परिपत्र संख्या 9 के माध्यम से 30 जून, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया था, इसे अब 15 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
- आयकर भुगतान या जमा का विवरण, जो एक निवेश फंड द्वारा पिछले वर्ष 2020-21 के लिए प्रपत्र संख्या 64सी में अपने यूनिट धारक को दिया गया, उसे नियमों में शामिल नियम 12सीबी के तहत 30 जून, 2021 को या उससे पहले जमा करना था, जिसे 2021 के परिपत्र संख्या 9 के माध्यम से 15 जुलाई, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया था, इसे अब 31 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
- अधिनियम की धारा 10(23सी), 12एबी, 35(1)(ii)/(iia)/(iii) और 80जी के तहत प्रपत्र संख्या 10ए/प्रपत्र संख्या 10एबी में आवेदन, ट्रस्टों/संस्थानों/अनुसंधान संगठनों के पंजीकरण/ अनंतिम पंजीकरण/ सूचना/ घोषणा/ स्वीकृति/अनंतिम स्वीकृति के लिए, 30 जून, 2021 से पहले किया जाना जरूरी था, जिसे बढ़ाकर 31 अगस्त 2021 को या उससे पहले किया जा सकता है।
- करदाताओं द्वारा निवेश, जमा, भुगतान, अधिग्रहण, खरीद, निर्माण या ऐसे किसी अन्य कार्य, जिस भी नाम पुकारा जाए, के लिए अधिनियम की धारा 54 से 54जीबी तक में उल्लिखित प्रावधानों के तहत किसी भी छूट के दावे के उद्देश्य के लिए किए जाने वाले अनुपालन, जिसके लिए अंतिम तिथि 1 अप्रैल, 2021 से 29 सितंबर, 2021 के बीच (दोनों दिनों को मिलाकर) पड़ती है, अब 30 सितंबर, 2021 को या उससे पहले किए जा सकते हैं।
- प्रपत्र संख्या-15सीसी में त्रैमासिक विवरण, जो 30 जून, 2021 को समाप्त तिमाही के लिए प्रेषित धन के संबंध में अधिकृत डीलर द्वारा जमा करना होता है, इसे नियमों में शामिल नियम 37 बीबी के तहत 15 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा करना था, अब इसे 31 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
- वित्त वर्ष 2020-21 के लिए प्रपत्र संख्या-1 में समानता शुल्क (इक्वलाइजेशन लेवी) विवरण, जो 30 जून, 2021 को या उससे पहले जमा करना था, इसे अब 31 जुलाई, 2021 को या उससे पहले जमा किया जा सकता है।
- अधिनियम की धारा 9ए की उपधारा (5) के तहत पात्र निवेश फंड द्वारा वित्त वर्ष 2020-21 के लिए प्रपत्र संख्या 3सीईके के माध्यम से वार्षिक विवरण जमा करना होता है, जिसे 29 जून, 2021 को या उससे पहले जमा करना था, इसे अब 31 जुलाई, 2021 को या उससे जमा किया जा सकता है।
- 30 जून, 2021 को समाप्त तिमाही के दौरान प्रपत्र संख्या 15जी/15 एच में प्राप्तकर्ताओं से मिली घोषणाओं को अपलोड करना, जो 15 जुलाई, 2021 को या उससे पहले अपलोड की जानी थीं, को 31 अगस्त, 2021 तक अपलोड किया जा सकता है।
- अधिनियम की धारा 245एम की उपधारा (1) के तहत प्रपत्र संख्या 34बीबी में लंबित आवेदन (पूर्व आयकर समाधान आयोग के सामने फाइल की गई थीं) को वापस लेने का विकल्प, जिसे 27 जून, 2021 को या उससे पहले प्रयोग करना था, को अब 31 जुलाई, 2021 को या उससे पहले प्रयोग किया जा सकता है।
- अधिनियम की धारा 139एए के तहत पैन के साथ आधार को जोड़ने की आखिरी तारीख, जो पहले 30 जून, 2021 तक बढ़ाई गई थी, को अब 30 सितंबर, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
- विवाद से विश्वास (बिना अतिरिक्त धनराशि) के तहत धनराशि के भुगतान की अंतिम तारीख, जो पहले 30 जून, 2021 तक के लिए बढ़ाई गई थी, को अब 31 अगस्त, 2021 तक बढ़ा दिया गया है।
- विवाद से विश्वास (अतिरिक्त धनराशि के साथ) के तहत धनराशि के भुगतान की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर, 2021 अधिसूचित कर दी गई है।
- निर्धारण आदेश पारित करने के लिए समय-सीमा, जो पहले 30 जून, 2021 तक बढ़ाई गई थी, इसे अब 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया है।
- पेनल्टी आदेश पारित करने के लिए समय-सीमा जो पहले 30 जून 2021 तक बढ़ाई गई थी, इसे अब 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया है।
- समानता (इक्वलाइजेशन) लेवी रिटर्न जारी करने की समयसीमा, जो पहले 30 जून, 2021 की गई थी, इसे अब 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया है
प्रधानमंत्री ने महान एथलीट श्री मिल्खा सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महान एथलीट श्री मिल्खा सिंह जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। श्री मोदी ने उन्हें एक चमत्कारी खिलाड़ी बताया जिसने राष्ट्र को सम्मोहित कर लिया था और अनगिनत भारतीयों के दिल में जगह बनाई थी।
प्रधानमंत्री ने कई ट्वीट करते हुए कहा ‘ श्री मिल्खा सिंह जी के निधन के साथ हमने एक ऐसा चमत्कारी खिलाड़ी खो दिया है जिसने राष्ट्र को सम्मोहित कर लिया था और अनगिनत भारतीयों के दिल में जगह बनाई थी। उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व ने उन्हें लाखों लोगों का प्रिय बना दिया था। उनके निधन से व्यथित हूं।
मैंने कुछ ही दिन पहले श्री मिल्खा सिंह जी से बात की थी। मुझे नहीं पता था कि यह हमारी अंतिम बातचीत होगी। कई उदीयमान एथलीट उनकी जीवन यात्रा से प्रेरणा ग्रहण करेंगे। उनके परिवारजनों तथा दुनिया भर में फैले उनके प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ‘
केबल टेलीविजन नेटवर्क के नियमों में संशोधन
केंद्र सरकार ने आज केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 में संशोधन करते हुए एक अधिसूचना जारी की, जिससे केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम, 1995 के प्रावधानों के अनुसार टेलीविजन चैनलों द्वारा प्रसारित सामग्री से संबंधित नागरिकों की आपत्तियों/शिकायतों के निवारण के लिए एक वैधानिक व्यवस्था करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
- वर्तमान में नियमों के तहत कार्यक्रम/विज्ञापन संहिताओं के उल्लंघन से संबंधित नागरिकों की शिकायतों को दूर करने के लिए एक अंतर-मंत्रालय समिति के माध्यम से एक संस्थागत व्यवस्था है। इसी तरह विभिन्न प्रसारकों ने भी शिकायतों के समाधान के लिए अपने यहां आंतरिक स्व-नियामक व्यवस्था कर रखी है। हालांकि, शिकायत निवारण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए एक वैधानिक व्यवस्था बनाने की आवश्यकता महसूस की गई। कुछ प्रसारकों ने अपने संबंधित संघों/निकायों को कानूनी मान्यता देने का भी अनुरोध किया था। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ‘कॉमन कॉज बनाम भारत संघ और अन्य’ के मामले में 2000 की डब्ल्यूपी (सी) संख्या 387 में अपने आदेश में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित शिकायत निवारण की मौजूदा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए शिकायत निवारण व्यवस्था को औपचारिक रूप प्रदान करने के लिए उचित नियम बनाने की सलाह दी थी।
- उपर्युक्त पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए केबल टेलीविजन नेटवर्क के नियमों में संशोधन किया गया है, ताकि इस वैधानिक व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त हो सके जो पारदर्शी होगी और जिससे नागरिक लाभान्वित होंगे। इसके साथ ही प्रसारकों के स्व-नियामक निकायों को केंद्र सरकार में पंजीकृत किया जाएगा।
- वर्तमान में 900 से भी अधिक टेलीविजन चैनल हैं जिन्हें सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा अनुमति दी गई है, जिनमें से सभी के लिए केबल टेलीविजन नेटवर्क के नियमों के तहत निर्दिष्ट की गई कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता का पालन करना आवश्यक है। उपर्युक्त अधिसूचना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने प्रसारकों और उनके स्व-नियामक निकायों पर जवाबदेही एवं जिम्मेदारी डालते हुए शिकायतों के निवारण के लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। .
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 से संबंधित दस्तावेजों की वैधता 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ाई
एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने को ध्यान में रखते हुए, नागरिकों को परिवहन संबंधी सेवाओं का लाभ उठाने में मदद करने के लिए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 से संबंधित दस्तावेजों की वैधता को 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में 30 मार्च, 2020, 9 जून, 2020, 24 अगस्त, 2020, 27 दिसंबर, 2020 और 26 मार्च, 2021 को एडवाइजरी जारी की थी।
यह सलाह दी गई कि फिटनेस, परमिट (सभी प्रकार), लाइसेंस, पंजीकरण या किसी अन्य संबंधित दस्तावेज की वैधता को 30 जून, 2021 तक वैध माना जाए।
इसमें वे सभी दस्तावेज शामिल हैं जिनकी वैधता 1 फरवरी, 2020 से समाप्त हो गई है या 30 सितंबर, 2021 तक समाप्त हो जाएगी। प्रवर्तन अधिकारियों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे दस्तावेजों को 30 सितंबर, 2021 तक वैध मानें।
इससे नागरिकों को एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने में परिवहन संबंधी सेवाओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
कोरियादादर में गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण इस तरह किया लायंस क्लब दुर्ग प्लेटिनम व लायंस क्लब दिव्य ऊर्जा
समाज सेवा मे अग्रणी भूमिका निभाने वाले क्लब रायगढ दिव्य ऊर्जा तथा लायंस क्लब दुर्ग प्लेटिनम के संयुक्त तत्वावधान में गोदित गांव कोरियादादर मे ध्वजारोहण किया गया ।
लायन / लायनेस अध्यक्ष लॉ अनीता कपूर ने जानकारी दी कि लायसं क्लब दिव्य ऊर्जा की अधयक्ष उमा तोमर के सहयोग से इस महत्वपूर्ण कार्य को संपन्न कराया गया कार्यक्रम मे कोरियादादर की सरपंच हेमलता यादव जी की उपस्थिति मे झंङारोहण किया गया
26 जनवरी को गणतंत्र दिवस क्यो मनाते है उसका उद्देश्य अनीता कपूर द्वारा समझाया . गया।
लायनेस बंसती सरकार के द्वारा बच्चो व ग्राम वासियो मे सेव-बूँदी का प्रसाद व चाकलेट का वितरण किया गया ।
बच्चो व महिलाओं ने अपने गाँव मे क्लब द्वारा किये गये कार्यक्रम को देखकर बहुत खुशी प्रगट की।
कोरियादादर मे महिलाओ को आत्म निर्भर बनाने के लिए कुटीर उद्योग को बढावा देने हेतू महिलाओं से भी संपर्क किया गया ।जिसमे सरिता, सुनंदा , राजकुमार निषाद जी व अन्य समूह की महिलाओं से भी अगामी कार्यो के लिये चर्चा की गयी।
कार्यक्रम की सफलता के लिए क्लब के सदस्यो लायन लायनेस मीरा पासवान, सचिव आरती तिवारी, मिनी पटवाजी, सरिता, परदेसी जी ,का विशेष सहयोग रहा ।
देश मे पहली बार महिला अपराधी शबनम को मिलेगी फांसी तैयारी आरम्भ
सर्वोच्च न्यायालय से पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद अब हत्या के आरोप में बंद शबनम की फांसी की सजा को राष्ट्रपति ने भी बरकरार रखा है, ऐसे में अब उसका फांसी पर लटकना तय हो गया है। मथुरा जेल में महिला फांसीघर में शबनम की फांसी की तैयारी भी शुरू हो गई है। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी।
मथुरा जिला कारागार में जल्लाद पवन को तख्ता लीवर में कुछ कमी दिखी, जिसे प्रशासन ठीक करवा रहा है। शबनम को फांसी पर लटकाने के लिए बिहार के बक्सर से रस्सी मंगवाई जा रही है ताकि किसी तरह अड़चन पैदा न हो।
अपराध ऐसा कि रूह कांप जाए…
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के गांव बावनखेड़ी के शिक्षक शौकत अली की इकलौती बेटी शबनम के सलीम के साथ प्रेम संबंध थे। सूफी परिवार की शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में एमए किया था। उसके परिवार के पास काफी जमीन थी। वहीं सलीम पांचवीं फेल था और पेशे से एक मजदूर था। इसलिए दोनों के संबंधों को लेकर परिजन विरोध कर रहे थे। शबनम ने 14 अप्रैल, 2008 की रात अपने प्रेमी के साथ मिलकर ऐसा खूनी खेल खेला कि सुनकर पूरा देश हिल गया था। शबनम ने अपने माता-पिता और 10 माह के भतीजे समेत परिवार के सात लोगों को पहले बेहोश करने की दवा खिलाई। बाद कुल्हाड़ी से काटकर मार डाला था।
साजिश ऐसी कि पुलिस को भी दे दिया चकमा…
शबनम और सलीम पर ऐसे कसा शिकंजा
पुलिस ने लूट के एंगल से जांच की, लेकिन कोई सबूत हाथ नहीं लगा। इसके बाद पुलिस ने घटनास्थल पर ध्यान दिया, तो कई सवाल सामने आए। मरने वालों ने खुद को बचाने की कोशिश नहीं की? लूटपाट के कोई सबूत नहीं मिले? इस बीच पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों को मारने से पहले कोई दवा खिलाकर बेहोश किया गया था।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस के शक की सुई शबनम पर घूम गई। शबनम की कॉल डिटेल निकाली गई, जिससे पता चला कि हत्या की रात शबनम की एक ही नंबर पर कई बार बात हुई। बाद में पुलिस को शबनम के गर्भवती होने का पता चला। शबनम शादी-शुदा नहीं थी, इसलिए इस हत्याकांड में पुलिस को यह जानकारी बेहद अहम लगी। इसके बाद पुलिस ने शबनम से कड़ी पूछताछ शुरू की। आखिरकार शबनम टूट गई और उसने अपने गुनाह कबूल किया।
सलीम की निशानदेही पर बरामद की कुल्हाड़ी
इसके बाद, पुलिस ने सलीम को भी दबोच लिया और बाद में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। सलीम की निशानदेही पर कत्ल में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी पुलिस ने बरामद कर ली।
मोहब्बत करना गुनाह नहीं पर मोहब्बत के लिए जो गुनाह शबनम-सलीम कर बैठे वो दिल दहलाने वाला है। प्यार तो रुई सा कोमल होता है उसके लिए या उसके नाम पर ऐसा सख्त कदम कैसे उठाया जा सकता है, यही प्रश्न इस तरह की घटनाओं के बाद परेशान करता है।
फांसी की तैयारियों के बीच ये सवाल भी हमेशा गूंजता रहेगा कि ओस की बूंद सी नाजुक शबनम कैसे पत्थरदिल होकर अपने ही परिवार को यों खत्म कर बैठी?
150 साल पहले बना था प्रदेश का इकलौता महिला फांसी घर
मथुरा के जिला कारागार में करीब 150 साल पहले फांसी घर बनाया गया था, लेकिन आजादी के बाद से अब तक देश में किसी भी महिला को फांसी नहीं दी गई है। यह उत्तर प्रदेश का इकलौता महिला फांसी घर है। हालांकि, अभी फांसी की तारीख तय नहीं हुई है। आभार-अमर उजाला
असम में कांग्रेस के लिए पूरा दमखम लगा रहे गुलाब कमरो ... ब्रह्मपुत्र नदी के डुबान क्षेत्र में पहुंचने वाले बने पहले विधायक.. डेढ़ दर्जन से अधिक विधानसभा में
कोरिया जिले के भरतपुर सोनहत के तेज तर्रार विधायक गुलाब कमरों को असम के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है यही वजह है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर गुलाब कमरों लगातार दूसरी बार असम में कांग्रेस के लिए पूरी दमखम के साथ डटे हुए हैं। गुलाब कमरों डेढ़ दर्जन से अधिक विधानसभा क्षेत्र में लगातार दौरा कर शिविर के माध्यम से वहां के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को चुनाव की तैयारी कराने के साथ ही लगातार जनसंपर्क में जुटे हुए हैं ।ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे डुबान क्षेत्र में जब गुलाब कमरों पहुंचे तो वहां के निवासी पहली बार किसी विधायक को अपने पास पाकर भावुक हो उठे उन्होंने बताया कि पहली बार हमारे पास कोई विधायक पहुंचा है। भरतपुर सोनहत क्षेत्र के विधायक गुलाब करो लगातार बैठकों के साथ कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में जनसंपर्क कर रहे हैं। गुलाब कमरो सन्तोली, महातोली बोको, बुकाजान, मरियायानी, महामोरा, खूमतई, तिताबोर, नजीरा, सरूपथार, बोकाखत, बिहपुरिया, गोलाघाट, टिंकखोंग, जोराहाट, डिगबोई विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में लगातार वोट मांग रहे हैं गुलाब कमरों ने कहां की असम में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बन चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि असम में कांग्रेस की सरकार बनेगी।
राष्ट्रीयकृत संस्थाओं, नवरत्न पब्लिक सेक्टर , वित्तीय संस्थाओं बैंक, बीमा के निजीकरण की नीति के खिलाफ ... आंदोलन का शंखनाद
राष्ट्रीयकृत संस्थाओं, नवरत्न पब्लिक सेक्टर , वित्तीय संस्थाओं बैंक, बीमा के निजीकरण की नीति का देश के अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों एवम ट्रेड यूनियनो ने कड़ा विरोध करते हुए इसे राष्ट्र हित के खिलाफ देश को पूंजीपतियों एवं कॉर्पोरेट्स घरानों के हाथों नीलाम करने तथा देश को आर्थिक गुलाम बनाने वाला देश विरोधी कदम बतलाया है। 15,16 मार्च को बैंकों ,17 मार्च को जनरल इंश्योरेंस तथा 18 मार्च 2021 को जीवन बीमा निगम में देश व्यापी हड़ताल की घोषणा की गई है।
केन्द्र सरकार द्वारा बजट में जीवन बीमा उद्योग में 74%एफ डी आई लाने और शेयर मार्केट में आई पी ओ जारी करने प्रस्ताव रखा है। तथा भारतीय जीवन बीमा निगम में 2017 से वेतन पुनर्निधारण देय है। ऐतिहासिक उपलब्धियों के बावजूद अन्यायपूर्ण विलंब किया जा रहा है। जिससे जीवन बीमा निगम के अधिकारियों एवम् कर्मचारियों में काफी आक्रोश व्याप्त है।
जीवन बीमा निगम के अधिकारियों एवम् कर्मचारियों का संयुक्त मंच ज्वाइंट फ्रंट ने बैंकों के निजीकरण का भी जबरदस्त विरोध करते हुए 15 मार्च को भोजन अवकाश पर कार्यालय मुख्यद्वार पर सभा व प्रर्दशन किया।
आज 15 मार्च 2021 को भारतीय जीवन बीमा निगम कार्यालय रायगढ़ के मुख्य द्वार पर ज्वाइंट फ्रंट के राष्ट्रीय आव्हान पर सभा एवम् जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया गया। सभा को क्लास वन ऑफिसर्स एसोसिएशन के मंडलीय अध्यक्ष आई पी चंद्राकर,विकास अधिकारी संघ के मंडलीय महासचिव प्रशांत सिंह ठाकुर, सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य एवं ट्रेड यूनियन कौंसिल के संयोजक गणेश कछवाहा एवम् बिलासपुर डिविजन इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन यूनिट रायगढ़ के सचिव प्रवीण तंबोली ने संबोधित किया।ज्वाइंट फ्रंट ने बैंक के निजीकरण का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार राष्ट्रीयकृत एवम सार्वजनिक उपक्रमों को कॉरपोरेट घरानों के हाथों कौड़ी के दाम बेचकर देश को आर्थिक गुलामी की ओर धकेल रही है। यह राष्ट्र हित के खिलाफ है।
सभा को संबोधित करते हुए साथियों ने मांग की कि लगातार एतिहासिक उपलब्धियों को हासिल करने के बावजूद वेतन पुनर्निधारण में विलंब करना अन्यायपूर्ण है अतिशीघ्र वेतन पुनर्निधारण किया जाना चाहिए। तथा केन्द्र सरकार द्वारा जीवन बीमा उद्योग में 74% एफ डी आई लाने तथा शेयर मार्केट में आई पी ओ जारी करना औचित्य हीन बताया और कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय जनहित में कदापि उचित नहीं है। इससे जहां हमारी छोटी बडी बचतों पर विदेशी पूंजी पतियों का कब्जा होगा तथा हमारे देश की अर्थ व्यवस्था कमजोर होगी। आर्थिक गुलामी के शिकंजे में कसने का खतरा बढ़ जाएगा। अतः जनहित एवं राष्ट्र हित में सरकार को उक्त प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए निजीकरण की नीति को तत्काल वापस लेना चाहिये।











