CG Samachar
CG Samachar
Breaking News
सखी महिला समूह द्वारा सावन पर्व का उत्साहपूर्ण आयोजन  |   सावन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने देवघर व बासुकिनाथ में किया जलाभिषेक मांगी प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि  |   मितानिन कल्याण कोष योजना से 2300 परिवारों को बड़ी राहत, 6.69 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित लंबित 2300 दावा प्रकरणों का हुआ निराकरण, पात्र मितानिनों एवं उनके परिवारों के खातों में पहुंची सहायता राशि  |   युवा फ्रांसीसी फिल्म निर्माताओं ने एमआईएफएफ 2026 में नवीनतम वैश्विक परिदृश्य प्रस्तुत किए एमआईएफएफ युवा फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ा अवसर फ्रांसीसी निर्देशक फैज करीमपोर  |   मनेन्द्रगढ़ में जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन  |   नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रायपुर में एक्लेक्टिका 2026 का शुभारंभ  |   देशव्यापी अभियान में डीआरआई ने सोने की अवैध भट्टी का भंडाफोड़ Also 9 किलो तस्करी का सोना 42 किलो चांदी और 8.5 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा जब्त की  |   शानदार प्रदर्शन की बदौलत एमसीबी जिला प्रदेश में प्रथम, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) राष्ट्रीय लक्ष्य को किया प्राप्त एमसीबी जिले की स्वास्थ्य सेवाएं हुई है बेहतर  |   स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय गोदरीपारा में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत, छात्राओं को साइकिल व शैक्षणिक सामग्री वितरित; मंत्री ने दिलाई शत-प्रतिशत परिणाम की शपथ  |   नेपाल का ‘रक्त-चरित्र’: हथियारों से लैस प्रदर्शनकारी, जलते नेताओं के घर, बंद हुआ काठमांडू एयरपोर्ट, जानें ताज़ा अपडेट  |   जगद्गुरु के अपमान के विरोध में सनातनियों का फूटा आक्रोश, फूंका चरणदास महंत का पुतला चिरमिरी में श्रीराम कथा आयोजन समिति का जोरदार प्रदर्शन  |   मनेन्द्रगढ़ में अवैध शराब पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई105 पाव अंग्रेजी शराब के साथ युवक गिरफ्तार, बिना नंबर स्कूटी भी जब्त  |   मनरेगा कार्यों में तेजी: कलेक्टर ने 15 जून तक जल संरक्षण के कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश   |   पितृ पक्ष में भूलकर भी ना करें इन 6 चीज़ों का दान… वरना पितर हो जाएंगे नाराज़ और शुरू हो जाएंगी मुश्किलें!  |  

स्वास्थ

शानदार प्रदर्शन की बदौलत एमसीबी जिला प्रदेश में प्रथम, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) राष्ट्रीय लक्ष्य को किया प्राप्त एमसीबी जिले की स्वास्थ्य सेवाएं हुई है बेहतर

शानदार प्रदर्शन की बदौलत एमसीबी जिला प्रदेश में प्रथम, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) राष्ट्रीय लक्ष्य को किया प्राप्त एमसीबी जिले की स्वास्थ्य सेवाएं हुई है बेहतर

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ने रचा इतिहास: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने वाला छत्तीसगढ़ का पहला जिला बना एमसीबी*

एमसीबी, 07 अगस्त 2026
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अविनाश खरे के कुशल मार्गदर्शन में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के अंतर्गत संचालित एचआईवी कार्यक्रम में जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए निर्धारित राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त कर पूरे छत्तीसगढ़ राज्य का गौरव बढ़ाया है। उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर यह जिला राज्य का पहला ऐसा जिला बन गया है जिसने इस कठिन राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल किया है।

यह पूरा अभियान जिला नोडल अधिकारी डॉ. मो. वसीक अस्दक एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक  शिशिर जायसवाल के कुशल निर्देशन में मैदानी स्तर पर संचालित किया जा रहा है।

इस राष्ट्रीय लक्ष्य को जमीन पर उतारने और मरीजों की काउंसलिंग कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (ICTC) के काउंसलर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। इस पूरे अभियान के दौरान आईसीटीसी काउंसलर श्रीमती निशा सिंह एवं श्री विजेंद्र खटकर का विशेष सहयोग रहा है, जिनके निरंतर प्रयासों और समर्पण से जिले को यह विशिष्ट स्थान मिला है।
95-95-95 के राष्ट्रीय लक्ष्य में हासिल की शानदार उपलब्धि

वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर एचआईवी नियंत्रण के लिए '95-95-95' का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके बेहद करीब पहुंचकर एमसीबी जिले ने नया रिकॉर्ड बनाया है
प्रथम 95 (जांच) संभावित मरीजों की त्वरित पहचान और समय पर जांच में जिले ने पहला 95% का राष्ट्रीय लक्ष्य पूरा किया।

द्वितीय 95 (इलाज)* एचआईवी संक्रमित पाए गए व्यक्तियों को तुरंत एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) उपचार से जोड़ने में दूसरा 95% का लक्ष्य हासिल किया।
तृतीय 99 (वायरल लोड कम करना)* संक्रमित मरीजों के शरीर में वायरस की सक्रियता को न्यूनतम स्तर पर लाने के तीसरे चरण में, 99% के कड़े लक्ष्य के मुकाबले 98% की अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की गई है।
टीम वर्क और सामूहिक प्रयासों से मिली सफलतास्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व ने इस सफलता का पूरा श्रेय जमीनी स्तर पर काम करने वाली टीम को दिया है।
यह बड़ी कामयाबी जिला स्वास्थ्य विभाग, दिशा (DISHA) टीम, आईसीटीसी (ICTC), एआरटी (ART) केंद्र, सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों, लैब तकनीशियनों और अग्रिम पंक्ति के सभी स्वास्थ्य कर्मियों के कठिन परिश्रम और समर्पित प्रयासों का परिणाम है।गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के लिए जिला प्रशासन का संकल्प इस  गौरवपूर्ण उपलब्धि पर जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों, डॉक्टरों और कर्मचारियों को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।

जिला प्रशासन ने संकल्प व्यक्त किया है कि भविष्य में भी जिले के भीतर एचआईवी की प्रभावी रोकथाम, शत-प्रतिशत समय पर जांच, समय पर दवाइयों की उपलब्धता और मरीजों के लिए उच्च गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी रुकावट के निरंतर सुनिश्चित की जाती रहेंगी।
continue reading
चिरमिरी में पहली बार संभाग स्तरीय रैपिड शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन, 94 खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा

चिरमिरी में पहली बार संभाग स्तरीय रैपिड शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन, 94 खिलाड़ियों ने दिखाई प्रतिभा

चिरमिरी (एमसीबी)। एमसीबी जिले के चिरमिरी में पहली बार संभाग स्तरीय रैपिड शतरंज प्रतियोगिता-2026 का भव्य आयोजन हल्दीबाड़ी स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में किया गया। चिरमिरी शतरंज संघ के तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता में संभाग के विभिन्न जिलों से आए 94 खिलाड़ियों ने भाग लेकर अपनी रणनीतिक सोच, कौशल और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।



प्रतियोगिता का उद्देश्य क्षेत्र में शतरंज खेल को बढ़ावा देना और नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराना रहा। महिला, पुरुष एवं विभिन्न आयु वर्ग के खिलाड़ियों के बीच सात राउंड तक रोमांचक मुकाबले खेले गए। प्रतियोगिता में मोहम्मद हसनैन अली ने प्रथम, श्रेयांश मिश्रा ने द्वितीय तथा श्रीमती श्रेया शिल्पी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं राजेश कुमार मिश्रा चौथे और अरुण सिंह पांचवें स्थान पर रहे।
आयोजन समिति के अनुसार, चिरमिरी में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के अनुरूप विशेषज्ञ आर्बिटरों की देखरेख तथा छत्तीसगढ़ शतरंज संघ के मार्गदर्शन में इस स्तर की प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता को


खिलाड़ियों, अभिभावकों और खेल प्रेमियों का भरपूर सहयोग एवं सराहना मिली। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस सफल आयोजन से भविष्य में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं के आयोजन का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
प्रतियोगिता का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में प्रो. भागवत प्रसाद दुबे मुख्य अतिथि तथा क्षेत्रीय अस्पताल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ए.के. बिराजी ने अध्यक्षता की। समापन समारोह में चिरमिरी महापौर रामनरेश राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान छत्तीसगढ़ शतरंज संघ के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।
देर शाम आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। अतिथियों ने चिरमिरी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर सफल शतरंज प्रतियोगिता के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में बौद्धिक खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र से राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
continue reading
AIIMS रायपुर ने राष्ट्रीय क्रैनियोवर्टेब्रल जंक्शन सर्जरी कार्यशाला का आयोजन किया जिससे उन्नत न्यूरोसर्जिकल प्रशिक्षण को मजबूती मिली

AIIMS रायपुर ने राष्ट्रीय क्रैनियोवर्टेब्रल जंक्शन सर्जरी कार्यशाला का आयोजन किया जिससे उन्नत न्यूरोसर्जिकल प्रशिक्षण को मजबूती मिली

 अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान, रायपुर ने न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में राष्ट्रीय क्रैनियोवर्टेब्रल जंक्शन (सीवीजे) सर्जरी कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया, जो उन्नत न्यूरोसर्जिकल शिक्षा और कौशल विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च स्तरीय शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के एनाटॉमी विभाग में स्थित अत्याधुनिक कैडेवरिक प्रयोगशाला में आयोजित किया गया, जिसमें देश भर के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन, विशेषज्ञ, रेजिडेंट डॉक्टर और प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।

क्रेनियोवर्टेब्रल जंक्शन एक अत्यंत महत्वपूर्ण शारीरिक क्षेत्र है जहाँ मस्तिष्क रीढ़ की हड्डी के ऊपरी भाग से जुड़ता है। यह श्वसन, संतुलन, गति समन्वय और अन्य आवश्यक शारीरिक गतिविधियों सहित महत्वपूर्ण तंत्रिका संबंधी कार्यों को नियंत्रित करता है। इस क्षेत्र में विकार से गर्दन में लगातार दर्द, अंगों में कमजोरी, चलने-फिरने में कठिनाई, निगलने में परेशानी और कुछ मामलों में जानलेवा तंत्रिका संबंधी क्षति जैसी गंभीर नैदानिक ​​जटिलताएं हो सकती हैं।

 

अपनी जटिलता को देखते हुए, क्रेनियोवर्टेब्रल जंक्शन क्षेत्र में सर्जरी को न्यूरोसर्जरी की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है, जिसके लिए उन्नत शारीरिक रचना की समझ, उच्च तकनीकी सटीकता, आधुनिक इमेजिंग सहायता और परिष्कृत सर्जिकल उपकरणों की आवश्यकता होती है। उन्नत इमेजिंग प्रौद्योगिकियों, सर्जिकल नेविगेशन प्रणालियों और न्यूनतम चीर-फाड़ तकनीकों के एकीकरण ने सर्जिकल परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया है, जिससे न्यूरोसर्जरी चिकित्सकों के लिए निरंतर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण आवश्यक हो गया है।

इस कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा दिए गए व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, केस स्टडी पर विचार-विमर्श और शव परीक्षण प्रदर्शन शामिल थे। प्रतिभागियों को आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों, पूर्व-ऑपरेशन योजना, उन्नत उपकरणों के उपयोग और जटिल क्रैनियोवर्टेब्रल जंक्शन विकारों के प्रबंधन रणनीतियों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उन्हें सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान का व्यापक मिश्रण प्राप्त हुआ।

 

कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एम्स रायपुर उन्नत न्यूरोसर्जिकल शिक्षा और प्रशिक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएँ और सतत चिकित्सा शिक्षा पहल मध्य भारत में विश्व स्तरीय न्यूरोसर्जिकल विशेषज्ञता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, साथ ही क्षेत्र के रोगियों को साक्ष्य-आधारित उन्नत उपचार तक पहुँच सुनिश्चित करती हैं।

 

आयोजन समिति के अध्यक्ष और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक शल्य चिकित्सा प्रशिक्षण के बीच के अंतर को कम करना था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्रेनियोवर्टेब्रल जंक्शन सर्जरी के लिए गहन शारीरिक रचना, सटीक योजना और उच्च स्तरीय तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है, और ऐसे प्रशिक्षण मंच युवा न्यूरोसर्जनों को इस क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

 

शरीर रचना विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. सौमित्र त्रिवेदी ने कहा कि कार्यशाला ने शवों पर आधारित प्रत्यक्ष प्रदर्शन प्रशिक्षण के माध्यम से एक अनूठा और अमूल्य शिक्षण अनुभव प्रदान किया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी.के. त्रिपाठी ने भी इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और नैदानिक ​​दक्षता बढ़ाने के लिए वर्तमान युग में ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम आवश्यक हैं।

 

इस कार्यशाला में लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर अरुण कुमार श्रीवास्तव और भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के प्रोफेसर आदेश श्रीवास्तव सहित कई प्रख्यात न्यूरोसर्जन और देश भर के अन्य प्रमुख विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। विशेषज्ञों ने जन्मजात विकृतियों, आघात, अपक्षयी विकारों, ट्यूमर, संवहनी विकारों और कपाल-रीढ़ की हड्डी के जोड़ की अस्थिरता के प्रबंधन में अपने नैदानिक ​​अनुभव साझा किए।

 

सत्रों में जटिल शल्य चिकित्सा मामलों में निर्णय लेने, ऑपरेशन के दौरान होने वाली जटिलताओं से बचने की रणनीतियों और साक्ष्य-आधारित नैदानिक ​​पद्धतियों के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यशाला उत्साहपूर्ण माहौल में समाप्त हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और जटिल शल्य चिकित्सा तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर की सराहना की, जिससे भारत में न्यूरोसर्जिकल शिक्षा को आगे बढ़ाने में इस तरह की शैक्षणिक पहलों के महत्व को और बल मिला।

continue reading
राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान 2026 का होगा आयोजन, 28 जून को पिलाई जाएगी पोलियो की दवा 34 हजार से अधिक बच्चों को दी जाएगी पोलियो की खुराक, 341 बूथों पर रहेंगी टीमें तैनात

राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान 2026 का होगा आयोजन, 28 जून को पिलाई जाएगी पोलियो की दवा 34 हजार से अधिक बच्चों को दी जाएगी पोलियो की खुराक, 341 बूथों पर रहेंगी टीमें तैनात

कोरिया, 24 जून 2026/* जिले में राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान 2026 का आयोजन 28 जून 2026 को किया जाएगा।अभियान के अंतर्गत 28 जून को बूथ स्तर पर तथा 29 एवं 30 जून 2026 को घर-घर जाकर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी।


मंगलवार को कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने स्वास्थ्य विभाग की जिला टास्क समिति की बैठक में 
28 जून को राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान 2026 के बारे में मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी को इसकी तैयारी करने तथा गांव-गांव में प्रचार करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी बच्चे दो बूंद खुराक से वंचित न रहे।

डॉ प्रशांत सिंह ने जानकारी दी  कि अभियान के तहत जिले के 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 34 हजार 129 बच्चों को पोलियो की खुराक देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए जिले में 341 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों को ‘दो बूंद जिंदगी की’ पिलाएंगी। इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, हाट-बाजार एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

विकासखंडवार लक्ष्य के अनुसार पटना विकासखंड में 20 हजार 872 बच्चों के लिए 157 बूथ, सोनहत विकासखंड में 7 हजार 36 बच्चों के लिए 100 बूथ तथा बचरापोड़ी विकासखंड में 6 हजार 221 बच्चों के लिए 84 बूथ बनाए गए हैं।

अभियान के लिए जिले को कुल 48 हजार डोज वैक्सीन प्राप्त हुई है, जिसमें से 44 हजार डोज का वितरण किया जा चुका है तथा 4 हजार डोज सुरक्षित रखी गई है।

*कलेक्टर ने कहा-एक भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे*
इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने जिले के सभी अभिभावकों एवं नागरिकों से अपील की है कि वे अपने शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को निकटतम पोलियो बूथ पर ले जाकर अनिवार्य रूप से पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं। उन्होंने कहा कि एक भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे, यही अभियान की वास्तविक सफलता है।

कलेक्टर ने नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित एवं पोलियो मुक्त भविष्य के निर्माण में सहयोग करने का आग्रह किया है।
continue reading
जिले में  आयोजित हुआ तीन दिवसीय KAYAKALP एवं NQAS प्रशिक्षण, 180 स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण

जिले में आयोजित हुआ तीन दिवसीय KAYAKALP एवं NQAS प्रशिक्षण, 180 स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण

मनेंद्रगढ़, 19 जून। बीते दिवस जिले के शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) एवं KAYAKALP के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, मनेंद्रगढ़ में एक दिवसीय प्रशिक्षण तीन सत्रों में आयोजित किया गया। जिले में पहली बार सभी स्वास्थ्य संस्थानों के विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए इस प्रकार का व्यापक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

 
प्रशिक्षण का मुख्य केंद्रबिंदु NQAS रहा। प्रतिभागियों को NQAS के अंतर्गत सेवा प्रदायगी, रोगी अधिकार, नैदानिक सेवाएं, सहायता सेवाएं, इनपुट प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंधन, दस्तावेजीकरण, रिकॉर्ड संधारण तथा सतत गुणवत्ता सुधार से संबंधित विभिन्न मानकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। साथ ही KAYAKALP कार्यक्रम के अंतर्गत स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन तथा रोगी-अनुकूल वातावरण निर्माण से जुड़े पहलुओं पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
 
प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों के आंतरिक एवं बाह्य मूल्यांकन, गैप एनालिसिस, साक्ष्य संधारण, दस्तावेजों की तैयारी, चेकलिस्ट आधारित मूल्यांकन एवं गुणवत्ता संकेतकों की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों एवं समूह चर्चाओं के माध्यम से यह समझाया गया कि NQAS केवल प्रमाणन प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं मरीज संतुष्टि में निरंतर सुधार की एक सतत प्रणाली है।
 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। NQAS एवं KAYAKALP जैसे कार्यक्रम स्वास्थ्य संस्थानों को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह एवं रोगी-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को गुणवत्ता सुधार की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए।
 
जिला नोडल अधिकारी डॉ. नम्रता चक्रवर्ती ने बताया कि जिले के स्वास्थ्य संस्थानों को आगामी NQAS एवं KAYAKALP आकलनों के लिए बेहतर रूप से तैयार करने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि जिले में पहली बार सभी प्रमुख संवर्गों के स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक साथ प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे गुणवत्ता संबंधी मानकों की समान समझ विकसित होगी तथा सभी संस्थानों में एकरूपता के साथ कार्य किया जा सकेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप जिले के स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता, दस्तावेजीकरण व्यवस्था, संक्रमण नियंत्रण उपायों तथा रोगी संतुष्टि के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा और आगामी गुणवत्ता आकलनों में बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
 
 
प्रशिक्षण यूनिसेफ राज्य सलाहकार आरएमएनसीएच व बाह्य मूल्यांकर्ता डॉ. अक्षय शक्ति तिवारी द्वारा किया गया। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से कुल 180 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की, जिनमें चिकित्सक, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (BPM), अस्पताल प्रबंधक, स्टाफ नर्स, ग्रामीण चिकित्सा सहायक (RMA), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन एवं ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी (RHO) शामिल रहे। यह प्रशिक्षण जिला नोडल अधिकारी डॉ. नम्रता चक्रवर्ती, सहायक जिला नोडल अधिकारी श्री अवनीश पाण्डेय एवं सुश्री लक्ष्मी रजक के समन्वय में आयोजित किया गया।
 
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों में NQAS एवं KAYAKALP के मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का संकल्प लिया।
continue reading
विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय चिरमिरी में रोगी सहायता समूह बैठक आयोजित, 11 बच्चों को वितरित किए गए यूडीआईडी कार्ड

विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय चिरमिरी में रोगी सहायता समूह बैठक आयोजित, 11 बच्चों को वितरित किए गए यूडीआईडी कार्ड

प्रतिवर्ष 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सिकल सेल रोग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच एवं उपचार को प्रोत्साहित करना तथा रोग से प्रभावित व्यक्तियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना है। इसी क्रम में 18 जून 2026 को जिला चिकित्सालय चिरमिरी में रोगी सहायता समूह (Patient Support Group) की प्रथम जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में खड़गवां एवं जनकपुर विकासखंड के 35 सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने सहभागिता की।


मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल रोग से प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों को रोग संबंधी जानकारी, उपचार, उपलब्ध शासकीय सुविधाओं तथा दिव्यांगजन हितग्राही योजनाओं से जोड़ना था। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों एवं उनके अभिभावकों को रोग प्रबंधन, नियमित फॉलो-अप तथा जीवनशैली संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।

कार्यक्रम के माध्यम से महापौर श्री रामनरेश राय ने सिकल सेल से प्रभावित बच्चों एवं उनके परिवारों को शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने, नियमित उपचार एवं फॉलो-अप बनाए रखने तथा समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र राय ने सिकल सेल रोग की प्रकृति, इसके लक्षणों, संभावित जटिलताओं तथा शासन द्वारा उपलब्ध विभिन्न स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक तिवारी ने सिकल सेल रोग के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए रोग से प्रभावित बच्चों एवं उनके अभिभावकों को दैनिक जीवन में बरती जाने वाली सावधानियों, क्या करें एवं क्या न करें, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव तथा समय पर स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में बताया। दोनों विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्चों एवं उनके अभिभावकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान भी किया।

कार्यक्रम में 11 सिकल सेल प्रभावित बच्चों के यूडीआईडी (UDID) दिव्यांगता कार्ड तैयार कर वितरित किए गए। इस उपलब्धि में जिला चिकित्सालय चिरमिरी की मेडिकल बोर्ड टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनके विशेष प्रयासों एवं समर्पण से बच्चों को दिव्यांगता प्रमाणन एवं यूडीआईडी कार्ड का लाभ प्राप्त हो सका।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में, सिविल सर्जन डॉ. राजेन्द्र राय ने कार्यक्रम में उपस्थित उन बच्चों की आवश्यक कन्फर्मेटरी जांच अस्पताल निधि से कराने की घोषणा की, जिनके यूडीआईडी कार्ड जांच लंबित होने के कारण नहीं बन पाए थे। उन्होंने कहा कि जांच पूर्ण होते ही पात्र बच्चों का दिव्यांगता प्रमाणन कर यूडीआईडी कार्ड बनवाया जाएगा, जिससे वे शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

कार्यक्रम में खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष सिंह के प्रभावी समन्वय, सक्रिय सहयोग एवं सतत अनुश्रवण के परिणामस्वरूप विकासखंड स्तर से चिन्हांकित पात्र हितग्राहियों की समयबद्ध सहभागिता सुनिश्चित हो सकी, जिससे कार्यक्रम का सफल आयोजन एवं संचालन संभव हो पाया। 

कार्यक्रम के आयोजन एवं तकनीकी मार्गदर्शन में यूनिसेफ का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। यूनिसेफ के डॉ. गजेन्द्र सिंह के निर्देशन में उनकी टीम तथा एकम फाउंडेशन द्वारा तकनीकी सहयोग एवं विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

कार्यक्रम का जिला स्तरीय समन्वय जिला नोडल अधिकारी डॉ. नम्रता चक्रवर्ती द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्री राजकुमार राजवाड़े तथा प्रभारी अस्पताल प्रबंधक श्री वीरेन्द्र साव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सिकल सेल प्रभावित बच्चों को कार्यक्रम में सहभागी बनाने एवं कार्यक्रम स्थल तक लाने में आरबीएसके जिला नोडल अधिकारी डॉ. अतीक सोनी, आरबीएसके टीम, मितानिन कार्यक्रम समन्वयकों एवं मितानिनों की विशेष एवं सराहनीय भूमिका रही। उनके प्रयासों से अधिक से अधिक बच्चों एवं अभिभावकों की सहभागिता सुनिश्चित हो सकी।

कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागी बच्चों एवं उनके अभिभावकों को सिकल सेल रोग संबंधी जानकारी, सावधानियों, उपचार एवं उपलब्ध शासकीय सुविधाओं की जानकारी देने हेतु सिकल सेल सूचना पुस्तिका (Information Brochure) का वितरण भी किया गया।

कार्यक्रम के अंत में सभी बच्चों एवं उनके अभिभावकों को नियमित फॉलो-अप, समय पर उपचार एवं शासन की उपलब्ध सुविधाओं का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया गया तथा सिकल सेल रोग के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया।
continue reading
एनएमसी ने बताई कमियां, जिसे दूर करने जुटी सरकार : डॉ. मिश्रा नए मेडिकल कॉलेज की मान्यता में कोई दिक्कत नहीं सभी पत्राचार केवल प्रक्रियाओं का एक हिस्सा मात्र

एनएमसी ने बताई कमियां, जिसे दूर करने जुटी सरकार : डॉ. मिश्रा नए मेडिकल कॉलेज की मान्यता में कोई दिक्कत नहीं सभी पत्राचार केवल प्रक्रियाओं का एक हिस्सा मात्र

रायपुर। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजय शंकर मिश्रा ने राज्य के पांच नए मेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर कांग्रेस द्वारा एनएमसी के रोक के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि एनएमसी ने पांच मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान दिसंबर माह में कुछ कमियां पाई थी, इसमें भवन और उपकरण शामिल है। राज्य शासन को पहले से यह मालूम था कि कमियां मिलेगी, इसलिए उन कमियों को अब दूर कर लिया गया है। यह संस्थागत प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि हर बार नए कॉलेज के निरीक्षण के दौरान इस तरह की कठिनाईयां आती है, जिसे समय रहते सरकार ने दूर कर लिया है,बुधवार को एनएमसी का जो पत्र आया है,उसमें केवल कमियां बताई गई है और उन कमियों को दूर

करने के लिए कहा गया है,ऐसे में यह कहना उचित नहीं है कि एनएमसी ने नए मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर रोक लगा दी है, जबकि अभी नीट का एक्जाम भी नहीं हुआ है और न ही नतीजे घोषित हुए है। डॉ. मिश्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को इस बात की खुशी हैं कि एनएमसी मान्यता पर रोक लगा रही है,जबकि भाजपा नए मेडिकल कॉलेज राज्य में खोलने के लिए लगातार काम कर रही है। अधूरी जानकारी में कांग्रेस के नेता बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, इसे प्रदेश की जनता भलीभांति समझती है।

 
 
continue reading
सेहत के मोर्चे पर छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, संस्थागत प्रसव में राष्ट्रीय औसत को पछाड़ा ​NFHS-6 की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

सेहत के मोर्चे पर छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग, संस्थागत प्रसव में राष्ट्रीय औसत को पछाड़ा ​NFHS-6 की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

एमसीबी, 03 जून 2026।छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य और पोषण के मोर्चे पर एक बड़ी और सुखद तस्वीर सामने आई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य ने स्वास्थ्य, पोषण और मातृ-शिशु कल्याण के कई महत्वपूर्ण पैमानों पर शानदार कामयाबी हासिल की है। सबसे बड़ी उपलब्धि संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) के क्षेत्र में मिली है, जहां छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, बस्तर और आदिवासी अंचलों में एनीमिया (खून की कमी) और बच्चों में स्टंटिंग जैसी पुरानी चुनौतियां अब भी सरकार के सामने एक कठिन परीक्षा की तरह खड़ी हैं।


​ *बदल रहा है छत्तीसगढ़*

​कभी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से पिछड़े माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के दावों पर अब देश की सबसे प्रामाणिक स्वास्थ्य रिपोर्ट (NFHS-6) ने मुहर लगा दी है। राज्य में अब 90.6 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं, जो देश के औसत (88.6%) से कहीं ज्यादा है। टीकाकरण से लेकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल तक, हर आंकड़े में सुधार दर्ज किया गया है। लेकिन इस चमक के पीछे एक स्याह पहलू भी है—निजी अस्पतालों में अनियंत्रित रूप से बढ़ रही सिजेरियन (ऑपरेशन से) डिलीवरी और आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की मार, जिस पर राज्य सरकार को अब 'मिशन मोड' में काम करना होगा।

*​सकारात्मक बदलाव: इन मोर्चों पर छत्तीसगढ़ ने मारी बाजी*
​अस्पतालों में किलकारियां (संस्थागत प्रसव): NFHS-5 में संस्थागत प्रसव की दर 85% थी, जो अब बढ़कर 90.6% हो चुकी है। इसका सीधा सकारात्मक असर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी के रूप में दिख रहा है।
​शत-प्रतिशत टीकाकरण की ओर बढ़ते कदम: 12 से 23 महीने के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87.1% हो गया है, जो एक बड़ी राहत की खबर है।
​गर्भवती महिलाओं को सहारा: गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली एंटीनेटल केयर (प्रसव पूर्व जांच और देखभाल) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
​घट रही है स्टंटिंग: उम्र के हिसाब से कम लंबाई (स्टंटिंग) की दर 35.5% से घटकर अब 29.3% पर आ गई है।
​नियंत्रण में आबादी: राज्य में टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) पूरी तरह नियंत्रण में है और गर्भनिरोधकों के उपयोग व महिला स्वास्थ्य बीमा कवरेज के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।

*​चिंता के घेरे में: ये 4 चुनौतियां अब भी दे रही हैं दस्तक*

​एनीमिया का बढ़ता ग्राफ: 15 से 49 वर्ष की महिलाओं और बच्चों में खून की कमी (एनीमिया) की दर अभी भी बहुत ऊंची बनी हुई है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में यह समस्या जस की तस है।
​शहरी बीमारियां और मोटापा: वयस्कों, विशेषकर महिलाओं में ओवरवेट (मोटापे) की समस्या बढ़ रही है। इसके साथ ही हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन (ब्लड प्रेशर) के मामलों में भी तेजी देखी गई है।
​सिजेरियन डिलीवरी का 'बाजार': रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा गैर-जरूरी सिजेरियन डिलीवरी को लेकर हुआ है। राज्य में 27.2% डिलीवरी ऑपरेशन से हो रही है, और यह चलन निजी (प्राइवेट) अस्पतालों में सबसे ज्यादा है।
​बस्तर और आदिवासी अंचल: बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच कम होने के कारण स्टंटिंग और एनीमिया की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
​NFHS-6 के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में हमारी सरकार की स्वास्थ्य नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। संस्थागत प्रसव में राष्ट्रीय औसत को पीछे छोड़ना हमारी स्वास्थ्य टीम की कड़ी मेहनत का नतीजा है। रही बात बस्तर और अन्य आदिवासी अंचलों की, तो वहां एनीमिया और स्टंटिंग को खत्म करने के लिए हम आयुष्मान भारत और नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के बजट को सीधे दूरस्थ क्षेत्रों में झोंक रहे हैं। निजी अस्पतालों में अनावश्यक सिजेरियन डिलीवरी की निगरानी के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ का हर नागरिक स्वस्थ रहे, यही साय सरकार का संकल्प है।

— श्यामबिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़

​आगे की राह: दूरस्थ अंचलों पर फोकस जरूरी

​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य के मामले में देश का नंबर वन राज्य बनना है, तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल की जोड़ी को आयुष्मान भारत और नेशनल हेल्थ मिशन की योजनाओं का अधिकतम लाभ बस्तर के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचाना होगा। जब तक आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सहज नहीं होगी, तब तक एनीमिया और कुपोषण पर पूर्ण विजय पाना संभव नहीं होगा।
continue reading
जिला अस्पताल पहुंचकर कलेक्टर ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा अस्पताल जांच-उपचार के साथ-साथ लोगों की उम्मीद  डॉक्टर और स्टॉफ मरीजों के प्रति संवेदनशील रहें'- कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव

जिला अस्पताल पहुंचकर कलेक्टर ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा अस्पताल जांच-उपचार के साथ-साथ लोगों की उम्मीद डॉक्टर और स्टॉफ मरीजों के प्रति संवेदनशील रहें'- कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव

कोरिया, 28 मई 2026/* कोरिया कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नए मरीजों के पंजीयन कक्ष, विभिन्न वार्डों तथा बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल केंद्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से सीधे बातचीत कर उपचार एवं सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।


निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्रीमती यादव ने कहा कि अस्पताल जांच-उपचार के साथ -साथ लोगों की उम्मीद और विश्वास का केंद्र होता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को 'धरती का भगवान' कहा जाता है, क्योंकि वे न केवल मरीजों का जीवन बचाते हैं, बल्कि उनके परिवारों में खुशियां भी लौटाते हैं।

उन्होंने डॉक्टरों एवं अस्पताल स्टॉफ से कहा कि मरीजों और उनके परिजनों के साथ आत्मीय संवाद एवं मैत्रीपूर्ण व्यवहार करना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
कलेक्टर ने कहा 'कई बार संवेदनशील व्यवहार ही मरीज की आधी तकलीफ दूर कर देता है।

कलेक्टर ने वार्डों में भर्ती मरीजों से अस्पताल की व्यवस्थाओं, जांच एवं उपचार संबंधी सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल स्टॉफ को निर्देशित करते हुए कहा कि चाहे कार्य का कितना भी दबाव क्यों न हो, मरीजों के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन को निर्देश दिए कि डॉक्टर एवं स्टॉफ समय पर अस्पताल पहुंचें और नियमित रूप से मरीजों की जांच, उपचार व वार्डों का निरीक्षण करें। साथ ही अस्पताल में दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

कलेक्टर श्रीमती यादव ने दिन एवं रात में ड्यूटी करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों से कहा कि वे पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ कार्य करें तथा किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। उन्होंने मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा समय पर भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। वार्डों, शौचालय कक्ष, बेड की नियमित सफाई करने तथा शौचालय कक्ष में लाइट व पानी व्यवस्था रखने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां के स्टॉफ से विगत आठ माह में उपचार के लिए पहुंचे बुजुर्गों की संख्या तथा उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी प्राप्त की। साथ ही मरीजों से नियमित फीडबैक लेने के लिए रजिस्टर संधारित करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने कहा कि निर्माणाधीन नए जिला अस्पताल भवन में बुजुर्ग स्वास्थ्य देखभाल केंद्र को भी स्थान दिया जाए, ताकि सभी वर्गों के लोगों को एक ही परिसर में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

*स./मानिकपुरी*
continue reading
सुशासन तिहार में गांव-शहर पहुंच रहा प्रशासन नगर पंचायत पटना शिविर में बड़ी संख्या में जुटे नगरवासी, 207 आवेदन प्राप्त

सुशासन तिहार में गांव-शहर पहुंच रहा प्रशासन नगर पंचायत पटना शिविर में बड़ी संख्या में जुटे नगरवासी, 207 आवेदन प्राप्त

कोरिया, 20 मई 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार के अंतर्गत नगर पंचायत पटना में बुधवार को जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। नगर पंचायत पटना के मिनी ग्राउंड में आयोजित शिविर में सभी वार्डों के निवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए और शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर अपनी समस्याओं के निराकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत किए।


जनप्रतिनिधियों ने नगरवासियों से शासन की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने की अपील की तथा अधिकारियों को प्राप्त आवेदनों का त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

*अधिकारियों ने दी योजनाओं की जानकारी*
शिविर में समाज कल्याण विभाग द्वारा कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदाय योजना, विवाह प्रोत्साहन योजना, मोटराइज्ड ट्रायसायकल पंजीयन तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महतारी वंदन योजना, नोनी सुरक्षा योजना, नवाबिहान योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, पोषण अभियान, महिला स्व-सहायता समूह सशक्तिकरण, किशोरी बालिका योजनाएं एवं कुपोषण मुक्ति अभियान जैसी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को प्रदान की गई। अन्य विभागों के अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार करते हुए पात्र हितग्राहियों को लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

*10 आवेदनों का मौके पर निराकरण*
सुशासन तिहार के तहत आयोजित इस शिविर में कुल 207 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 10 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किया गया। शिविर में नागरिकों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं और विभागीय योजनाओं से संबंधित जानकारी भी प्राप्त की।

कार्यक्रम में नगर पंचायत पटना अध्यक्ष श्रीमती गायत्री सिंह, उपाध्यक्ष गौरव अग्रवाल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी प्रवीण उपाध्याय व बड़ी संख्या में पटनावासी उपस्थित रहे।
continue reading
मनेंद्रगढ़ 220 बिस्तर अस्पताल में तीन माह में 1500+ मरीजों का सफल उपचार, गंभीर मरीजों को मिली राहत, बढ़ा भरोसा

मनेंद्रगढ़ 220 बिस्तर अस्पताल में तीन माह में 1500+ मरीजों का सफल उपचार, गंभीर मरीजों को मिली राहत, बढ़ा भरोसा

मनेंद्रगढ़, एमसीबी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की दूरदर्शी सोच और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर निरंतर किए जा रहे प्रयासों ने एमसीबी जिले में चिकित्सा व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे तथा अस्पताल अधीक्षक डॉ स्वप्निल तिवारी के सतत मॉनिटरिंग, परिश्रम और प्रभावी नेतृत्व की बदौलत चिकित्सकों की टीम बेहतर परिणाम देने में सक्षम हुई है।
जो क्षेत्र कभी डॉक्टरों की कमी, सीमित संसाधनों और अपर्याप्त जांच सुविधाओं के कारण मरीजों के लिए चुनौती बना हुआ था, आज वही क्षेत्र आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित होकर चिकित्सा और शिक्षा हब की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
 
इसी क्रम में मनेंद्रगढ़ स्थित 220 बिस्तर अस्पताल के जनवरी से मार्च 2026 तक के आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। इस अवधि में अस्पताल में कुल 1559 मरीजों का सफल उपचार किया गया, जो क्षेत्रवासियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
आंकड़ों के अनुसार –
375 एएनसी (गर्भवती महिलाओं की जांच) की गई,
151 एनीमिया मरीजों का उपचार हुआ,
380 सोनोग्राफी (USG) जांचें की गईं,
50 सड़क दुर्घटना (RTA) के मामलों का सफल इलाज किया गया।
 
*प्रसव सेवाओं में भी उल्लेखनीय उपलब्धि रही –*
 
238 सामान्य प्रसव एवं
25 सिजेरियन डिलीवरी सफलतापूर्वक संपन्न हुईं।
इसके अतिरिक्त
60 जनरल सर्जरी,
18 ऑर्थो,
15 ईएनटी के मरीजों का उपचार किया गया।
 
अस्पताल में गंभीर  स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण मरीजों का सफल इलाज संभव हुआ और वे पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौटे। यह उपलब्धि स्वास्थ्य व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण है।
उपरोक्त जानकारी देते हुए डॉ. स्वप्निल तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री की पहल और सीएमएचओ डॉ. अविनाश खरे की सतत मॉनिटरिंग, कर्तव्यनिष्ठा और टीम वर्क के चलते अस्पताल में लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, आधुनिक उपकरण और बेहतर प्रबंधन के कारण जटिल मामलों का भी उपचार स्थानीय स्तर पर ही किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि पहले जहां मरीजों को छोटी-छोटी जांच और इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता था, वहीं अब यहां गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलने से लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा है।
एमसीबी जिला अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बनाते हुए तेजी से आगे बढ़ रहा है, जहां शासन की दूरदर्शी नीतियों और स्वास्थ्य विभाग की टीम वर्क से आमजन को बेहतर और सुलभ इलाज मिल रहा है।
continue reading
मनेंद्रगढ़ की बड़ी छलांग: स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने किया फिजियोथेरेपी कॉलेज का भूमिपूजन, बनेगा संभाग का 'मेडिकल हब'

मनेंद्रगढ़ की बड़ी छलांग: स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने किया फिजियोथेरेपी कॉलेज का भूमिपूजन, बनेगा संभाग का 'मेडिकल हब'

​मनेंद्रगढ़। ​छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मानचित्र पर मनेंद्रगढ़ अब एक चमकते सितारे के रूप में उभर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के विजनरी नेतृत्व में क्षेत्र को स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में दोहरी सौगात मिली है। शुक्रवार को आमाखेरवा ग्राउंड में आयोजित गरिमामय समारोह में 1393.71 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नवीन फिजियोथेरेपी कॉलेज भवन का भूमिपूजन संपन्न हुआ।
*​बदल रही है क्षेत्र की तस्वीर: अब घर के पास ही उच्च शिक्षा*
 
​दशकों से मनेंद्रगढ़ और आसपास के छात्रों को फिजियोथेरेपी की पढ़ाई के लिए राजधानी रायपुर या बाहरी राज्यों के चक्कर काटने पड़ते थे। लेकिन अब यह सपना साकार होने जा रहा है।
 
​50 सीटों पर प्रवेश: इसी सत्र से 50 सीटों के साथ फिजियोथेरेपी का स्नातक पाठ्यक्रम शुरू होगा।
 
​अस्थाई संचालन: मुख्य भवन के निर्माण तक इसका संचालन सिंधी कालरी एजुकेशन सोसाइटी, झगराखांड में वैकल्पिक रूप से किया जा रहा है, जिसके लिए SECL से एमओयू भी कर लिया गया है।
 
​रोजगार और रुझान: मेडिकल कॉलेज और फिजियोथेरेपी कॉलेज एक साथ होने से क्षेत्र के युवाओं का रुझान मेडिकल फील्ड की ओर तेजी से बढ़ेगा।
 
*​कैबिनेट मंत्री के प्रयास: पिछली सरकार की सुस्ती पर भारी 'जायसवाल मॉडल'*
​मनेंद्रगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब यहाँ के विधायक को प्रदेश में स्वास्थ्य जैसे अति-महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी मिली है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय सरगुजा संभाग से ही स्वास्थ्य मंत्री होने के बावजूद क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा को लेकर ऐसी सक्रियता नहीं दिखी थी। श्यामबिहारी जायसवाल के मंत्री बनते ही न केवल रिक्त पदों पर नियुक्तियां हुईं, बल्कि मेडिकल कॉलेज और फिजियोथेरेपी कॉलेज जैसी परियोजनाओं ने धरातल पर आकार लेना शुरू कर दिया है।
*​समारोह में दिग्गजों की मौजूदगी*
​इस ऐतिहासिक अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक रेणुका सिंह मौजूद रहीं। विशिष्ट अतिथियों में जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष चंपादेवी पावले, महापौर रामनरेश राय, सभापति संतोष सिंह,  जनपद पंचायत अध्यक्ष जानकी बाई और परसगढ़ी सरपंच बुद्धु सिंह शामिल हुए। ​प्रशासनिक स्तर पर एमसीबी कलेक्टर डी राहुल वेंकट और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे ने कार्यक्रम के सफल आयोजन और कॉलेज की आगामी रूपरेखा की जानकारी साझा की।
 
*​"मनेंद्रगढ़ को मेडिकल डेस्टिनेशन बनाना हमारा लक्ष्य" - स्वास्थ्य मंत्री*
 
​भूमिपूजन के दौरान जनता को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा:
​"हमारा लक्ष्य मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले को छत्तीसगढ़ का मेडिकल हब बनाना है। फिजियोथेरेपी कॉलेज केवल एक बिल्डिंग नहीं, बल्कि हमारे क्षेत्र के भविष्य का निर्माण केंद्र है। हमने 2 हेक्टेयर भूमि आवंटित कर प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। अब हमारे छात्रों को रायपुर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, उन्हें उनके घर के पास ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। मेडिकल कॉलेज की 50 सीटों पर भी इसी सत्र से पढ़ाई शुरू कर हम एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। मंत्री जायसवाल ने कहा कि,
स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में बेहतर कार्यों को करते हुए क्षेत्रवासियों और प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा दिलाना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। 
 
 
*​न्यूज कैप्सूल: प्रोजेक्ट की बड़ी बातें*
 
​कुल लागत: ₹1393.71 लाख (लगभग 14 करोड़ रुपये)।
 
​निर्माण एजेंसी: छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC)।
 
​सुविधा: ऑर्थोपेडिक्स, न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी में विशेषज्ञ फिजियोथेरेपी सेवाएं।
 स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के इन प्रयासों से न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं सुधरेंगी, बल्कि मनेंद्रगढ़ पूरे छत्तीसगढ़ में शिक्षा के केंद्र के रूप में अपनी धाक जमाएगा। स्थानीय स्तर पर इसे जिले की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
continue reading
रायपुर: लैब अटेंडेंट भर्ती के लिए काउंसलिंग 1 और 2 अप्रैल को, अभ्यर्थियों का इंतजार हुआ खत्म देखे सूची

रायपुर: लैब अटेंडेंट भर्ती के लिए काउंसलिंग 1 और 2 अप्रैल को, अभ्यर्थियों का इंतजार हुआ खत्म देखे सूची

28-Mar-2026 110

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा संचालनालय ने प्रयोगशाला परिचारक (लैब अटेंडेंट) के पदों पर सीधी भर्ती के लिए चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग की तिथि घोषित कर दी है।

लंबे समय से प्रतीक्षित इस प्रक्रिया के तहत मेरिट सूची में शामिल 430 अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए आमंत्रित किया गया है।

जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, काउंसलिंग प्रक्रिया 01 एवं 02 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। यह काउंसलिंग
 
नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन, ब्लॉक-3 में संपन्न होगी।
प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए काउंसलिंग को दो दिनों में कुल चार शिफ्टों में विभाजित किया गया है।
 
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि काउंसलिंग पूरी तरह से मेरिट और रोस्टर नियमों के आधार पर होगी। सभी चयनित अभ्यर्थियों को उनके निर्धारित रैंक के
 
अनुसार तय तिथि और समय पर उपस्थित होना अनिवार्य है।
काउंसलिंग के दौरान अभ्यर्थियों को उनके पदस्थापना स्थल (पोस्टिंग प्लेस) का चयन करने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा।
continue reading
100 दिवसीय “टीबी मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम का भव्य आयोजन

100 दिवसीय “टीबी मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम का भव्य आयोजन

एमसीबी जिले में राज्य स्तरीय टीबी (क्षय रोग) मुक्त अभियान कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जहां 100 दिवसीय “टीबी मुक्त भारत” अभियान की औपचारिक शुरुआत प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के द्वारा की गई। यह अभियान पूरे प्रदेश में टीबी उन्मूलन को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य समयबद्ध तरीके से मरीजों की पहचान कर उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि समय पर जांच और नियमित उपचार से इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर गांव और शहर तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाया जाए और किसी भी व्यक्ति को उपचार के अभाव में परेशानी न झेलनी पड़े। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अभियान को गंभीरता से लें और घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान सुनिश्चित करें।
इस अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि 100 दिनों तक विशेष रूप से टीबी मरीजों की खोज, जांच और उपचार पर फोकस किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य टीमों का गठन किया गया है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा टीबी मरीजों को निःशुल्क दवाएं, पोषण सहायता और नियमित फॉलोअप की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।
 
continue reading
दांतों एवं ओरल हेल्थ के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाना और लापरवाही बरतना गंभीर बीमारियों को न्योता देने सम्मान : डॉ.नवाज

दांतों एवं ओरल हेल्थ के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाना और लापरवाही बरतना गंभीर बीमारियों को न्योता देने सम्मान : डॉ.नवाज

आगामी 20 मार्च ओरल हेल्थ डे (मौखिक स्वास्थ्य दिवस) के उपलक्ष्य डॉ.एम.एस.नवाज ने बताया कि दांतों एवं मुंह के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाना लापरवाही बरतना हमारे दांत एवं मुंह के साथ साथ पूरे शरीर को भी नुकसान पहुंचा सकती है मौखिक स्वास्थ्य के प्रति असंवेदनशीलता दिखाना शरीर के लिए भी घातक साबित हो सकता है| क्यों जरूरी है ओरल हेल्थ!कैसे बनाए रखें ओरल!खराब ओरल हेल्थ हमारे शरीर को कैसे नुकसान पहुंचा सकती है एवं अन्य कौन कौन सी बीमारी हो सकती है एवं खराब ओरल हेल्थ हमारे सामान्य स्वास्थ्य पर कैसे प्रभाव डाल सकती है!क्यों मनाया जाता है ओरल हेल्थ डे! एवं क्यों जरूरी है अच्छी ओरल हेल्थ का होना!

सेहत के मामले में सबसे कम ध्यान दिया जाता है वह ओरल हेल्थ (मौखिक स्वास्थ्य)है संपूर्ण शरीर के देखभाल हमारे मुंह के जरिए होता है शरीर का मुख्य दरवाजा कहा जाए तो गलत नहीं होगा एक सड़े हुए दांत अन्य दांतो को भी सड़ा सकते है एवं लंबे समय तक सड़े हुए दांत मुंह में रखा जाए,ध्यान नही दिया जाए तो हमारे शरीर में भी संक्रमण फैला सकते है जैसे बदबूदार सांस की समस्या,चेहरे में सूजन,गले एवं गर्दन में संक्रमण जिससे मवाद पस होना जो सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकती है,बुखार और सामान्य कमजोरी जब संक्रमण शरीर में फैलता है तो बुखार और थकान महसूस होना,साइनसाइटिस्
जबड़े के पीछे दांतों की जड़ों के पास साइनस होता है दांत का संक्रमण होने सीधे साइनस में पहुंच कर उसे संक्रमित कर सकता है,हृदय रोग मुंह के जीवाणु खून के रास्ते हार्ट तक पहुंच कर हृदय के वाल्व का संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है|
आइए जानते है वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे का महत्व!
लोगों को मुंह के स्वास्थ्य,दांतों को मजबूत बनाने और मसूड़ों को बीमारियों से दूर रखने एवं  मौखिक स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता देने और मुंह से जुड़े बीमारियों को रोकने के महत्व को उजागर करना है,मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रखने के लिए हर साल 20 मार्च को ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है।यह खास दिन न केवल ओरल हाइजिन के महत्व को बताता है बल्कि यह भी बताता है कि हमारा मुंह हमारे स्वास्थ्य के लिया क्यों जरूरी है खराब मौखिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है एक प्यारी सी मुस्कान व्यक्ति का आत्मसम्मान और आत्मविश्वास बढ़ा सकती है डॉ. मो.सबा नवाज ने बताया की हमारे एक स्वास्थ्य मुंह से स्वास्थ्य शरीर सुखी जीवन बनता है!अच्छे दांत होने से हमारे खूबसूरती में चार चांद लगाने के साथ शरीर को निरोगी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है मुंह के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हम सभी के लिए बहुत ही जरूरी है उन्होंने बताया की चिकित्सा विज्ञान के तेजी से विकास के बावजूद मौखिक स्वास्थ्य समग्र स्वास्थ्य के सबसे उपेक्षित अनदेखा की जाने वाली पहलू बनी हुईं है अधिकतम लोग दंत समस्या से पीड़ित है फिर भी उनमें से बहुत कम ही समय पे ईलाज करवा पाते है ज्यादातर लोग दंत चिकित्सक के पास तभी जाते जब दर्द असहनीय न हो अनदेखा करते रहते है दांतों की सड़न,मसूड़ों की बीमारी या दांतों की संवेदनशीलता को अक्सर मामूली समस्या समझ के नजरअंदाज किया जाता है लेकिन अगर इन्हें नजरअंदाज किया जाए तो ये गंभीर जटिलताओं का रूप ले सकती है जैसा की पहले बताया कि 
दांत के संक्रमण से शरीर के अन्य भागों में भी संक्रमण फैल सकती है जिसमें बदबूदार सांस उत्पन्न,हृदय रोग,मधुमेह,प्रेग्नेंसी में समय से पहले जन्म जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है 
स्वस्थ दांत कोई शौक नहीं ये एक जरूरत है आज दंत चिकित्सा की उपेक्षा करना सिर्फ कल को दांत खोना नहीं बल्कि यह किसी समग्र स्वास्थ्य आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को खतरे में डालने जैसा है!
*खराब मौखिक स्वक्षता से होने वाली अन्य बीमारियां!*
दिल को खतरा :मसूड़ों की समस्या से हृदय से जुड़ी समस्या का खतरा अधिक बढ़ जाता है!
हड्डियों के रोग:मसूड़ों के सूजन,बिल्डिंग और कमजोर मसूड़ों से दांत से जुड़ी हड्डियों पर प्रभाव पड़ता है जिससे दांत का सहयोग हड्डियों से कमजोर होता और दांत हिलने लगते है समय पर ध्यान नहीं देने से दांत निकालने परते है !
कैंसर:खराब ओरल हाइजिन एवं बुरी आदतें जैसे तम्बाकू सिगरेट,खैनी,शराब के सेवन से  माउथ कैंसर इत्यादि की संभावना अधिक बढ़ जाती है 
अल्जाइमर:जबड़ों से जुड़ी नस या सर्कुलेशन के जरिए से ओरल बैक्टीरिया मस्तिष्क तक पहुंच सकते है जिसमें अल्जाइमर का खतरा बढ़ता है जिससे भूलने की बीमारी होती है!डॉ नवाज ने बताया की ओरल हेल्थ को लेकर अभिभावकों में जागरूकता की कमी देखा जाता है
*ओरल हेल्थ एवं सामान्य स्वास्थ्य के लिए खास बातें*
• दांतों के ऊपर जीवन की लम्बाई टिकी टिकी हुई है
• दांतों का स्वास्थ्य तय करता है कि कोई व्यक्ति कितना लंबा जीने वाला है
• व्यक्ति के दांत कैसे है कितने है  ओरल हेल्थ कितने स्वास्थ्य है ये सारी चीजें जीवन की लम्बाई में अहम योगदान देती है 
•समय समय पर डेंटल चेकअप करवाते रहना चाहिए दांतों की रिपेयरिंग करवाने से भी लम्बे स्वास्थ्य का लाभ पाया जा सकता है स्वास्थ्य मुंह ही सेहत का आधार है
उन्होंने ने बताया की डायबिटीज(शुगर) के मरीजों को ओरल हेल्थ के प्रति खास ध्यान देने की जरूरत है डायबिटीज में दांत गिरने को आशंका दुगुनी हो जाती है डाइबिटीज का संबंध दांतों से भी है!मधुमेह रोगियों में दांतों के गिरने की आशंका अन्य की तुलना में अधिक होती है क्योंकि ब्लड में शुगर ज्यादा मात्रा में होने के कारण मसूड़ों तक पोषण तत्व नहीं पहुंच पाता जिससे पेरियोडोंटल डिजीज हो जाता है और दांत असमय टूटने लगते है इसीलिए डाइबिटीज से पीड़ित लोगों को ओरल हाइजिन का खास ध्यान देना चाहिए!क्योंकि ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने से मसूड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है ऐसे में डायबिटीज के कारण मसूड़ों में रक्त का संचार कम हो जाता है शुगर की मात्रा ज्यादा होने के कारण मुंह में लार बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है ऐसे में दांतों की बाहरी परत को मजबूत करने वाले जीवाणु से बचाव के लिए जरूरी लार नहीं बन पाते जिस कारण सांसों में  बदबू की तकलीफ एवं दांतों में पलक जमना की समस्या अधिक बढ़ जाती है दांत समय से पहले बहुत कम उम्र में ही अधिक कमजोर हो जाते है हिलने लगते है ध्यान नहीं दिया जाए तो दांत एक एक करके गिरने लगते है डॉ. नवाज ने बताया की दांतों की सड़न एक बहुत ही आम समस्या है परन्तु यह मुंह के अंदर होती है और  किसी को दिखती नहीं इसीलिए लोग इसे नजरअंदाज करते जाते है लोगों को लगता है ब्रश कर लेना ही ओरल हेल्थ एवं दांतों की देखभाल है पर ऐसा नहीं है!
 _दांतों की सड़न(कैविटी)चार मुख्य कारणों से होती है_
*दांतों की सफाई और दांतों की बनावट* 
दांतों को ठीक से सफाई नहीं करना सड़न को न्योता देने सम्मान है कुछ लोग के दांत की बनावट सही नहीं है दांत आड़े तिरछे उबर ख़ाबर है दांत एलाइन नहीं होते है उनके दांत जल्दी सड़ते है सफाई सही तरीके से नहीं हो पाती है ब्रश सभी हिस्सों में नहीं पहुंच पाता है 
*खान पान*
खाद्य पदार्थ जिसमें कार्बोहाइड्रेड और शक्कर की मात्रा अधिक हो उनके दांत सड़ने का खतरा अधिक होता है अगर खाद्य पदार्थ चिपचिपा हो जैसे चॉकलेट ट्रॉफी मिठाई आइस्क्रीम चिप्स इत्यादि के सेवन से दांत सड़ने का खतरा और भी बढ़ जाता है
*मुंह में मौजूद बैक्टीरिया* 
कोई कितना भी सफाई करले हर किसी के मुंह में बैक्टीरिया होते है मुंह में कुछ बैक्टीरिया फायदेमंद होते है जो हानिकारक बैक्टीरिया को रोकते है जबकि अन्य हानिकारक होते है जो दांतों की सड़न बदबूदार सांस मसूड़ों की बीमारी इत्यादि रोग का जन्म एवं बढ़ावा देते है परन्तु मुंह की सफाई कितनी अच्छी तरह से करते है यह तय करता है कि बैक्टीरिया की तादाद बढ़ेगी या घटेगी और अगर तादाद बढ़ेंगे तो क्या उनके लिए सड़न पैदा करने वाले कारक मौजूद है  कुछ भी खाने चबाना बंद करते ही बैक्टीरिया(जीवाणु) अपना काम शुरू कर देते है वो दांतों पर एक तरह की सफेद परत बनाते है जिसे है हम प्लाक कहते है यही प्लाक बैक्टीरिया का घर होता है!
*खराब मौखिक स्वक्षता*
दांतों एवं मुंह की सफाई अच्छे से नहीं करने से दांतों की सड़न कैविटी उत्पन्न होने की संभावना अधिक होती है!
*दांतों की सड़न का इलाज* 
अगर दांत में सड़न हो गया है तो सबसे पहले दंत चिकित्सक से मिलें उन्हें अपनी समस्या विस्तार से बताएं अगर सड़न छोटी है तो सड़न हटा कर फिलिंग कर दी जाएगी फिलिंग दांत के रंग की भी हो सकती है और मेटालिक चांदी के रंग की भी हो सकती है यह आपके चुनाव पर निर्भर करता है अगर सड़न के कारण दांत का बड़ा हिस्सा खराब हुआ है तो और दांत दर्द की शिकायत है तो डेंटिस्ट पहले दांत का एक्स रे करके देखेंगे फिर इलाज की सलाह देंगे ज्यादातर बहुत ज्यादा सड़े दांतों को रूट केनाल  थैरेपी(दांतों का नस का इलाज) द्वारा बचाया जाता है फिर उसपे कैप लगा दी जाती है!बहुत ही ज्यादा खराब हो चुके,पूरी तरह सड़ चुके दांतों को निकालने की सलाह दी जाती है दांत निकाल कर आजू बाजू के दांत के सहयोग सहयोग से फिक्स डेंटल ब्रिज लगा सकते है या एक ही स्क्रू के दांत डेंटल इंप्लांट लगाया जा सकता है!
हमेशा कहा जाता है कि रोकथाम इलाज से बेहतर है इसलिए अच्छा होगा कि हम अपने दांतों की सही देखभाल शुरू करना चाहिए ताकि इलाज की जरूरत अधिक नहीं पड़े एवं  अच्छा ओरल हेल्थ बना रहे समय समय पर दांतों की जांच एवं छोटे मोटे रिपेयरिंग साधारण फिलिंग एवं दांतों की सफाई स्केलिंग और छोटे बच्चों को डेंटिस्ट के पास से फ्लोराइड जेल लगवाने से कल को रूट कैनाल या दांत निकलवाने से बचा जा सकता है फ्लोराइड जेल से कैविटी की रोकथाम एवं  दांत को मजबूत बनाती है और सेंसिटिविटी (संवेदनशीलता) कम करती है!दांतों को मजबूत बनाने में ये प्रक्रिया आसान होती है इलाज की तुलना में रोकथाम न केवल बेहतर है बल्कि इलाज से कही ज्यादा सस्ती भी है समग्र स्वास्थ्य के अभिन्न अंग के रूप में दंत स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देना चाहिए!डॉ.मो.सबा नवाज ने बताया की छोटे बच्चों या कम उम्र के बच्चे जिनके परमानेंट दांत की जड़ अभी तैयार नहीं हुई है और दांतों में कैविटी गहरी हो गई है दर्द है तो सफाई करके संक्रमित पल्प को हटा कर यानी (पल्पोटॉमी)करके MTA नामक मटेरियल एवं अन्य औषधियां दवा के रूप में डाल कर सीमेंट डाल दिया जाता है!जिन बच्चों के दूध के दांत सड़ गए है दर्द या सूजन है तो पूरी तरह साफ करके यानी (पल्पेक्टॉमी) करके ऊपरी हिस्सा क्राउन और जड़ का पूरा हिस्से को भर दिया जाता है और फिर कैप कर दी जाती है!जिसका उद्देश्य दांत दर्द को ठीक करना एवं स्थाई परमानेंट दांत के आने तक दूध के दांत को अपने जगह पे बनाए रखना है एवं स्थाई दांत सही दिशा में आएं!
*दांतों का स्वास्थ्य क्यों जरूरी है*
• दांतों की बीमारी दिल डायबिटीज और पाचन से जुड़ी होती है|
• ख़राब,एवं दांत संक्रमण से दांत दर्द सर दर्द कान दर्द का कारण बनते है|
• स्वास्थ्य दांत आत्मविश्वास और अच्छी सेहत का आधार है
खाने में समस्या कुछ स्थिति में बात करने बोलने में तकलीफ होना कैंसर हृदय रोग और डाइबिटीज का खतरा घटना है 
• ओरल हेल्थ का खास ध्यान रखें अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ दांत का होना आवश्यक है!
*इस तरह रखें अपने दांतों की ख्याल*
• नियमित रूप से दो बार ब्रश करें
• पोषक तत्व से भरपूर आहार का सेवन करें 
• मुंह को स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए मीठे खाद्य पदार्थ से बचें 
• अपने जीभ को भी साफ करें
• विटामिन सी युक्त फल और सब्जी का सेवन करें
• अपने डाइट में दूध दही और पनीर हरे सब्जी को शामिल करें
 • साल में एक बार दांतों की नियमित जांच कराएं 
• प्रभावी तरीके से ब्रश करें ज्यादा देर तक एवं कम देर तक भी नहीं तीन से चार मिनट तक करें!
• तीन महीने मे ब्रश को बदलें
• कोई भी बोतल या किसी भी चीज को खोलने में दांतों का इस्तेमाल न करें
• ध्रूमपान एवं तम्बाकू का सेवन से परहेज करें
continue reading
संकल्प पर आधारित होंगी राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं, इस प्रदेश का हर जन स्वस्थ रहे, यही है सरकार का उद्देश्य: स्वास्थ्य मंत्री

संकल्प पर आधारित होंगी राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं, इस प्रदेश का हर जन स्वस्थ रहे, यही है सरकार का उद्देश्य: स्वास्थ्य मंत्री

रायपुर, 12 मार्च 2026/  छत्तीसगढ़ विधानसभा में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा तथा अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 6976 करोड़ 54 लाख रुपये से अधिक की अनुदान मांगें पारित हो गई है। 
 
      अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए विभागीय मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं SANKALP पर आधारित होंगीं। इसमें S-Strengthened Institutions (सशक्त संस्थान), A-Academic Excellence   (उत्कृष्ट अकादमिक गुणवत्ता), N-Next Generation Research  (नवोन्मेषी अनुसंधान), K-Knowledge & Clinical Competency  (कौशल एवं क्लीनिकल दक्षता), A-Advance Medical Facilities (आधुनिक चिकित्सा सुविधा), L-Life Saving Infrasturcture (जीवन रक्षक अधोसंरचना) तथा P-Professional & Transparent Governance (पारदर्शी प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी) शामिल हैं। 
 
            स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के सभी शासकीय अधिकारियोें- कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की योजना शुरू करने की बात कही। इसके लिए बजट में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 
 
      मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि इस प्रदेश का हर जन स्वस्थ रहे। प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें। उन्होंने बताया कि गंभीर बीमारियों के उपचार को सुलभ बनाने के लिए प्रदेश में 25 नए डायलिसिस केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही आम नागरिकों को सस्ती दवाईयां उपलब्ध कराने के लिए 50 जन औषधि केंद्रों का विस्तार किया जाएगा।
 
         मंत्री ने बताया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रायपुर में प्रदेश का पहला होम्योपैथी कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा बिलासपुर में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी, जिससे कैंसर मरीजों को अत्याधुनिक उपचार सुविधा प्रदेश में ही उपलब्ध हो सकेगी।
 
         मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि रायपुर में मध्य भारत का अत्याधुनिक कार्डियक इंस्टीट्यूट स्थापित करने की योजना है। यह संस्थान प्रदेश के नागरिकों को उच्च स्तरीय हृदय उपचार की सुविधा प्रदान करेेगा। वहीं सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में अधोसंरचना विकास के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे बाल हृदय उपचार सेवाओं को और अधिक मजबूत एवं व्यापक बनाया जा सकेगा। 
 
    स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अंबिकापुर और धमतरी में जिला अस्पतालों के नए भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा रायपुर के कालीबाड़ी क्षेत्र में 200 बिस्तरों वाला मातृ एवं शिशु चिकित्सालय तथा चिरमिरी में नया जिला अस्पताल बनाया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मानव संसाधन को मजबूत करने के उद्देश्य से दुर्ग, कोंडागांव, जशपुर और रायपुर में जीएनएम प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
 
           मंत्री ने बताया कि रायपुर में मध्य भारत के सबसे आधुनिक इंटीग्रेटेड खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला के लिए 95 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रयोगशाला के शुरू होने से राज्य को दिल्ली जैसे महानगरों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी एवं छत्तीसगढ़ के साथ अन्य सीमावर्ती राज्यों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं मिल सकेेंगी। 
 
          चर्चा के दौरान श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य में शीघ्र ही एम्बुलेंस की कमी दूर होगी। राज्य के सभी जिलों के लिए 300 नए एम्बुलेंस के लिए टेण्डर प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त वेंटीलेटर युक्त 70 अत्याधुनिक एम्बुलेंस तथा नवजात शिशुओं के लिए सर्वसुविधाजनक 10 अन्य एम्बुलेंस क्रय करने की प्रक्रिया भी शीघ्र ही पूर्ण कर ली जाएगी। 
 
*चिकित्सा शिक्षा विभाग*
 
         चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए संचालनालय चिकित्सा शिक्षा हेतु 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है। नवीन पांच शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों (दंतेवाड़ा, मनेन्द्रगढ़, जशपुर, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम) के लिए 1,240 पद तथा संबंधित चिकित्सालयों के लिए 500 पदों का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर के ट्रामा सेंटर भवन निर्माण केे लिए भी बजट का प्रावधान किया गया है। चिकित्सा महाविद्यालयों और संबद्ध अस्पतालों में उपकरणों की खरीदी के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान रखा गया है।
 
       स्वास्थ्य मंत्री ने चर्चा में कहा कि राज्य के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास निर्माण के लिए बजट में 83 करोड़ रूपए से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, अम्बिकापुर तथा जगदलपुर शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। 
 
*आयुष विभाग*
 
           मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आयुष विभाग के तहत 544 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। औषधियों के लिए 25.73 करोड़ रुपये तथा उपकरणों के लिए 4.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
 
        जनभागीदारी के माध्यम से 7 आयुर्वेद चिकित्सालय, 13 आयुष पॉलीक्लिनिक और 692 आयुष औषधालयों के उन्नयन के लिए भी बजट रखा गया है। रायपुर स्थित शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय परिसर में छात्रावास और सेमीनार हॉल का निर्माण किया जाएगा।
 
*अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग*
 
         मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस विभाग के अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के लिए मांग संख्या 66 के तहत कुल 251 करोड़ 68 लाख 38 हजार रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। 
 
        चर्चा का जवाब देते हुए श्री जायसवाल ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना शुरू करने की बात कही। इस योजना के अंतर्गत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को निःशुल्क शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाएं मिलेंगी। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बिलासपुर में 500 सीटर कन्या प्रयास आवासीय विद्यालय, रायपुर में 200 सीटर पोेस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, रायगढ़ में 100 सीटर पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास, मनेन्द्रगढ़ में 100 सीटर पोेस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास एवं जशपुर में 50 सीटर प्री-मैट्रिक बालक एवं बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए बजट में 20 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। 
 
           चर्चा के दौरान श्री जायसवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देने के लिए सीजी असिस्टेंस फॉर कम्पेटेटिव एक्जामिनेशन (CG-ACE) योजना के अंतर्गत उड़ान, शिखर तथा मंजिल योजना की शुरूआत की जाएगी। बजट में इसके लिए 9 करोड़ 63 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। 
 
      बजट चर्चा में नेता प्रतिपक्ष 
डॉ. चरण दास महंत,विधायक सर्वश्री धर्मजीत सिंह, दलेश्वर साहू, ईश्वर साहू, प्रणव मरपच्ची, आशाराम नेताम, प्रमोद मिंज, अनुज शर्मा, पुन्नूलाल मोहले, राघवेन्द्र कुमार सिंह, कुंवर सिंह निषाद, लखेश्वर बघेल, भोलाराम साहू, दिपेश साहू, प्रेमचंद पटेल, विनायक गोयल, रोहित साहू, रामकुमार यादव, व्यास कश्यप, सुशांत शुक्ला,  श्रीमती संगीता सिन्हा, श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा, श्रीमती सावित्री मंडावी, श्रीमती उत्तरी जांगड़े, श्रीमती अंबिका मरकाम सहित श्रीमती यशोदा वर्मा शामिल रहे।
continue reading
मनेन्द्रगढ़ का ‘मेडिकल पुनर्जागरण’ दशकों के संघर्ष को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दी विकास की उड़ान, मेडिकल कॉलेज बनने का कार्य जारी

मनेन्द्रगढ़ का ‘मेडिकल पुनर्जागरण’ दशकों के संघर्ष को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने दी विकास की उड़ान, मेडिकल कॉलेज बनने का कार्य जारी

एमसीबी,मनेन्द्रगढ़। वर्षों की प्रतीक्षा, अनगिनत उम्मीदें और लंबा जन-संघर्ष—अब साकार होने जा रहा है। मनेन्द्रगढ़ की धरती पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना केवल एक शासकीय घोषणा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय उपेक्षा के खिलाफ जीत की ऐतिहासिक गाथा है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल की पहल से यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतर चुकी है। यह मेडिकल कॉलेज न केवल इलाज का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिहाज से पूरे कोयलांचल अंचल की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा।

 
*पृष्ठभूमि: उपेक्षा से उम्मीद तक*
 
मनेन्द्रगढ़ और आसपास का हसदेव-कोयलांचल क्षेत्र दशकों तक ‘रेफरल सेंटर’ की पहचान से जूझता रहा है। गंभीर मरीजों को 200 से 400 किलोमीटर दूर बिलासपुर या नागपुर रेफर करना मजबूरी थी। कई बार रास्ते में ही दम तोड़ देने वाले मरीजों की घटनाओं ने बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की मांग को जन्म दिया।
 
*संघर्ष के प्रमुख चरण*
बॉक्स में -
 
1.
अविभाजित मध्य प्रदेश और प्रारंभिक छत्तीसगढ़ काल में स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग तेज।
 
2.
2000 से 2020 तक जन-आंदोलन – धरना-प्रदर्शन, पदयात्राएं, ज्ञापन; लेकिन बजट और तकनीकी कारणों से फाइलें ठंडे बस्ते में।
 
3.
2022 में नया जिला गठन – मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला (एमसीबी) बनने के बाद मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता अनिवार्य हुई।
 
4.
2023-24: निर्णायक पहल – स्वास्थ्य मंत्री पद संभालते ही जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा।
 
 *परियोजना की प्रगति:*
 *कागज से जमीन तक,* 
*मेडिकल कॉलेज हेतु भूमि चिन्हांकन पूर्ण,* 
*शासन स्तर पर करोड़ों की राशि स्वीकृत*
*अस्पताल विस्तार और मास्टर प्लान तैयार*
*नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित*
 
*स्वास्थ्य मंत्री का स्पष्ट कथन —*
“यह मेरा नहीं, मनेन्द्रगढ़ की जनता के विश्वास का प्रतिफल है। इलाज के अभाव में अपनों को खोने की पीड़ा अब इतिहास बनेगी।”
 
*विकास का मल्टीप्लायर इफेक्ट*
बॉक्स में - 
 
1️⃣ स्वास्थ्य क्रांति
जटिल सर्जरी और गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर,
कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की तैयारी।
‘रेफरल सेंटर’ की पहचान से मुक्ति
2️⃣ शिक्षा का नया केंद्र
आदिवासी और ग्रामीण छात्रों को घर के पास MBBS की सुविधा,
चिकित्सा शिक्षा का नया हब।
3️⃣ रोजगार और अर्थव्यवस्था - 
डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल में प्रत्यक्ष रोजगार।
होटल, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल स्टोर, रियल एस्टेट में अप्रत्यक्ष अवसर तथा 
शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
 
*क्या होगी भविष्य की तस्वीर?*
 
मनेन्द्रगढ़ की पहचान अब पिछड़े अंचल के रूप में नहीं, बल्कि हेल्थ और एजुकेशन हब के रूप में स्थापित होगी। यह परियोजना सरगुजा संभाग के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में से एक के रूप में उभरेगी और आने वाले दशकों में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी।
continue reading
संकल्प बजट 2026-27: एमसीबी जिले को बहुआयामी सौगात स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बोले — यह बजट विकास का रोडमैप

संकल्प बजट 2026-27: एमसीबी जिले को बहुआयामी सौगात स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बोले — यह बजट विकास का रोडमैप

चिरमिरी। खड़गवां।*मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रस्तुत संकल्प बजट 2026-27 ने मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले को ऐतिहासिक सौगात दी है। बजट प्रस्तुतीकरण के बाद सामने आए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि यह केवल बजटीय घोषणा नहीं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास का ठोस खाका है। उन्होंने कहा कि नगरीय सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रावधान किए गए हैं। जिससे ना सिर्फ एमसीबी जिले का समग्र विकास निहित होगा बल्कि जनअपेक्षाओं के अनुरूप विधानसभा मनेंद्रगढ़ विकास के नए सोपान का स्वाद भी चखेगा, यह पूरा बजट 2047 के अनुरूप विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़, विकसित विधानसभा को लेकर है। श्री जायसवाल ने मनेंद्रगढ़, खड़गवां और चिरमिरी को लेकर आंकड़ेवार जानकारी दी, उन्होंने बताया कि बजट में चिरमिरी, मनेंद्रगढ़, खड़गवां समेत एमसीबी जिले को क्या क्या मिला है?

 
*नगर निगम चिरमिरी को क्या मिला?*
       *अग्निशमन सशक्तिकरण*
अग्निशमन मशीन एवं उपकरण खरीदी – ₹500 लाख तथा नवीन फायर वाहन, वॉटर टेंडर, मिस्ट वाहन, वॉटर बाउजर के लिए ₹950 लाख रुपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है।
 
         *स्वास्थ्य*
जिला चिकित्सालय चिरमिरी को 200 बिस्तरीय अस्पताल के रूप में  (129 पद) की स्वीकृति मिली है।
      *नगरीय विकास*
वार्ड 20 में ऑडिटोरियम – ₹550 लाख, गौरव पथ निर्माण (अटल परिसर से लोको पुलिया) – ₹280 लाख, वार्ड 16 गौरव पथ – ₹790 लाख से
विभिन्न सड़क सुदृढ़ीकरण कार्य जिससे चिरमिरी में नगरीय सुरक्षा और शहरी अधोसंरचना को आधुनिक रूप मिलेगा।
 
       *मनेंद्रगढ़ को मिला*
 
       *सड़क एवं अधोसंरचना*
मनेंद्रगढ़-केल्हारी-जनकपुर राज्य मार्ग चौड़ीकरण – ₹6000 लाख, केवई नदी–हसदेव नदी लिंक परियोजना – ₹4300 लाख, हसदेव बैराज निर्माण – ₹3000 लाख, बेलबहरा-फिशफार्म मार्ग – ₹400 लाख, एनएच-43 से एकलव्य आश्रम मार्ग – ₹200 लाख रुपए स्वीकृत।
 
       *स्वास्थ्य के क्षेत्र में*
नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज में 100 पद, अतिरिक्त 248 पदों की स्वीकृति, नवीन नर्सिंग कॉलेज में 42 पद, नर्सिंग कॉलेज भवन – ₹900 लाख, भरतपुर CHC का 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में उन्नयन – ₹1900 लाख रुपए है।
 
*शिक्षा व प्रशासन*
 
250 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी (नालंदा परिसर) – ₹441.49 लाख, संयुक्त संभागीय कार्यालय भवन – ₹70 लाख, न्यायिक अधिकारियों के आवास – ₹715.96 लाख।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सिटी कोतवाली, अग्निशमन भवन जो कि
 मनेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय के रूप में स्वास्थ्य और प्रशासनिक ढांचे का व्यापक विस्तार होगा।
 
 *क्या मिला खड़गवां को......?*
            *सड़क एवं पुल*
पेंड्री-बेलकामार मार्ग – ₹800 लाख
देवाड़ांड-मंगौरा मार्ग – ₹800 लाख
रतनपुर-कोटिया मार्ग – ₹800 लाख
चैनपुर-आमाखेरवा मार्ग – ₹800 लाख
बेलबहरा-फुनगा मार्ग – ₹480 लाख
उच्च स्तरीय पुल निर्माण (विभिन्न स्थानों पर) – ₹800 लाख, ₹450 लाख।
 
*सिंचाई एवं जल संसाधन*
 
देवाड़ांड में हसदेव नदी पर बैराज – ₹3000 लाख
कोरजा डायवर्जन योजना – ₹400 लाख
उधनापुर नाला व्यपवर्तन – ₹400 लाख
साजा पहाड़ व्यपवर्तन – ₹500 लाख।
 
???? *शिक्षा*
 
देवाड़ांड में नवीन महाविद्यालय की स्थापना और खड़गवां क्षेत्र में सिंचाई क्षमता वृद्धि और ग्रामीण संपर्क सुदृढ़ होगा, साथ ही उच्च शिक्षा का नया केंद्र स्थापित होगा।
        *मंत्री का बयान*
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा:
“यह बजट एमसीबी जिले को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ मंत्र के अनुरूप हम विकास को जनकल्याण से जोड़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा और इसके लिए कुल स्वीकृत राशि लगभग ₹388.73 करोड 28 हजार रुपए है।
continue reading
क्षेत्र की शैक्षणिक प्रगति एवं स्वास्थ्य सेवा मे उन्नति के लिए भाटापारा मे मेडिकल कॉलेज की मांग उठ रही

क्षेत्र की शैक्षणिक प्रगति एवं स्वास्थ्य सेवा मे उन्नति के लिए भाटापारा मे मेडिकल कॉलेज की मांग उठ रही

क्षेत्र की शैक्षणिक प्रगति एवं स्वास्थ्य सेवा मे उन्नति के लिए भाटापारा मे मेडिकल कॉलेज की मांग उठ रही है तथा विभिन्न अभियानों के माध्यम से सरयू साहित्य परिषद एवं नगर के सुधिजनों द्वारा इस दिशा मे शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने का क्रम जारी है इसी कड़ी मे एक पत्र मुख्यमंत्री के नाम अभियान के तहत जनमानस द्वारा मुख्यमंत्री को आग्रह पत्र लिखा जा रहा है
एवं भाटापारा मे मेडिकल कॉलेज की मांग की जा रही है, इसी के तहत देवरी हाईस्कूल के सैकड़ों विद्यार्थियों  एवं शाला परिवार द्वारा मुख्यमंत्री को आग्रह पत्र लिखा गया एवं भाटापारा मे मेडिकल कॉलेज स्थापना की मांग की गयी,इस अवसर पर सरयू साहित्य परिषद के अध्यक्ष गौरीशंकर शर्मा,मुकेश शर्मा,हरिहर शर्मा गिरधर गोपाल शर्मा सहित संस्था प्रमुख दिनेश कुमार शर्मा एवं शाला परिवार के सदस्य  प्रीती शाह,  रेणू शर्मा, शुभा शर्मा, मृणालिनी शुक्ला, हुलसी वर्मा,सुनील कुमार दीवान, हेमलाल साहू,अनुप कुमार खरे,गजेन्द्र कुमार साहू,राकेश कुमार वर्मा,संदीप ठाकुर, आदि प्रमुख रुप से उपस्थित थे।
continue reading
राज्यभर में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभराज्यभर में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभ

राज्यभर में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभराज्यभर में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभ

Madhu diwan 11-Feb-2026 84
एमसीबी/10 फरवरी 2026/* राज्य में हाथीपाँव (फाइलेरियासिस) रोग के उन्मूलन के उद्देश्य से राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत फरवरी 2026 में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान का व्यापक स्तर पर संचालन किया जा रहा है। यह अभियान राज्य के 18 जिलों के 65 विकास खंडों में संचालित होगा, जिसके अंतर्गत लगभग 1.58 करोड़ लाभार्थियों को दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के तहत 15 जिलों के 58 विकास खंडों में  IDA     
( Ivermectin + DEC + Albendazole ) तथा 3 जिलों के 7 विकास खंडों में  DA  ( DEC + Albendazole ) दवाओं का वितरण किया जाएगा। यह कार्यक्रम 10 से 25 फरवरी 2026 तक चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा। 10 से 12 फरवरी तक आंगनबाड़ी, स्कूल, कॉलेज एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में बूथ लगाकर दवा सेवन कराया जाएगा। 13 से 22 फरवरी तक ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा घर-घर भ्रमण कर समुदाय स्तर पर दवा सेवन सुनिश्चित किया जाएगा। 23 से 25 फरवरी तक छूटे हुए लाभार्थियों के लिए मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा। साथ ही 10 से 25 फरवरी तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष  MDA  कॉर्नर संचालित किए जाएंगे। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए राज्य में 54,612 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर, 5,461 सुपरवाइज़र एवं 2,279 प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ( CHO ) की तैनाती की गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु जिला एवं विकासखंड स्तर पर  Rapid Response Team  का
 
गठन किया गया है। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्मिकों का प्रशिक्षण, राज्य स्तरीय समन्वय बैठक,  ToT  तथा मीडिया वर्कशॉप पहले ही पूर्ण की जा चुकी हैं। समुदाय सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु बिहान  CLF, सरपंचों, स्व-सहायता समूहों, विद्यार्थियों एवं अन्य हितधारकों को अभियान से जोड़ा गया है। लाभार्थियों को  SMS के माध्यम से पूर्व सूचना भी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, प्रशिक्षित मानव संसाधन, पर्याप्त दवा उपलब्धता एवं व्यापक जन सहभागिता के माध्यम से 100 प्रतिशत दवा सेवन कवरेज सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान राज्य को हाथीपाँव (फाइलेरियासिस) मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।
 
 
continue reading
Previous123456789...1213Next
dpboss