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जिले वासियों के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि भरी खबर - जिले के आन बान और शान यातायात की पहचान प्रेम की प्रतिमूर्ति और कर्तव्यनिष्ठता की मिसाल ट्रैफिक मैन के नाम से मशहूर लांस नायक महेश मिश्रा को मिला सर्वोच्च सम्मान राष्ट्रपति पदक से नवाजे जाएंगे मिलेगा आउट ऑफ टर्न प्रमोशन अपने विभाग में छत्तीसगढ़ प्रदेश से अकेले हुए चयनित बढ़ाया जिले का मान और सम्मान
आप को बताते चले पिछले 18 साल से शासकीय ड्यूटी निभाने के साथ ही सेवा का पर्याय बन चुके लांस नायक महेश मिश्रा कोरिया जिले एवं छत्तीसगढ़ में ट्रैफिक मैन के नाम से प्रसिद्ध हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने गरीबों व जरूरतमंदों की खूब सेवा की। स्वयं के खर्चे पर 500 से अधिक ट्रैफिक जागरुकता कैंप (Traffic Camp) लगवाने के साथ ही वाहन चालकों को नि:शुल्क चश्मा वितरण, सड़क के गड्ढे भरने से लेकर कई प्रकार के काम कर वे सुर्खियां बटोर चुके हैं। वे 3 विषयों में गोल्ड मेडलिस्ट (Gold Medalist) भी हैं। इन्हीं सब सेवा भावों को देखते हुए लांस नायक महेश मिश्रा राष्ट्रपति पदक से नवाजे जाएंगे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का बड़ा बयान : भाजपा की आंतरिक व्यवस्था से अनारक्षित सीटों पर पिछड़ा वर्ग को मिलेगा ज्यादा प्रतिनिधित्व
छेरछेरा पर्व पर विशेष लेखरू छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर है छेरछेरारू महेन्द्र सिंह मरपच्ची
छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं में गहरी जड़ें जमाए हुए कई पर्व और उत्सव हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि समाज में सामूहिकता, भाईचारे और सामाजिक सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देते हैं। इनमें से एक प्रमुख और विशिष्ट पर्व छेरछेरा है, जो विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत करता है और किसानों के जीवन से जुड़ा हुआ है। छेरछेरा पर्व कृषि पर आधारित होने के कारण यह नए कृषि मौसम और फसल कटाई के बाद मनाया जाता है, जिसे हर साल पौष पूर्णिमा के दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
समाज में सामूहिकता और सहयोग का प्रतीक है छेरछेरा
छेरछेरा पर्व की शुरुआत में ग्राम देवताओं की पूजा होती है, जिसे ग्रामीण अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तथा कृषि की उन्नति की कामना से करते हैं। यह पर्व फसल के कटाई के बाद एक सामूहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो समाज के सभी वर्गों को एकजुट करता है। इस दिन विशेष रूप से छोटे बच्चे, युवक और युवतियां हाथ में टोकरी या बोरियां लेकर घर-घर छेरछेरा मांगने निकलते हैं। वे ष्छेर छेरता माई मोरगी मार दे, कोठे के धान ला हेर देष् जैसे पारंपरिक गीत गाते हुए घरों के सामने जाते हैं और वहां से नया चावल और नकद राशि प्राप्त करते हैं। यह सब एक सामूहिक खुशी का हिस्सा होता है, जो पूरे गांव को उत्साहित और सामूहिक रूप से एकजुट करता है।
जनजातीय समुदाय की धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं
समाज की एकता और सामूहिक सहयोग को दर्शाते हुए यह पर्व केवल एक पारंपरिक उत्सव ही नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन जाता है। छेरछेरा के दौरान लोगों द्वारा इकट्ठा किया गया चावल और धन गरीब और जरूरतमंद परिवारों में बांटा जाता है, जिससे ग्रामीणों के बीच सहकारिता और एकजुटता की भावना और मजबूत होती है। इस प्रक्रिया में पारंपरिक रूप से अनाज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने का काम किया जाता है, जिसे ग्रामीण बैंकिंग प्रणाली के रूप में देखा जा सकता है। यह प्रणाली सामाजिक सुरक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां ग्रामीण अपनी जरूरतों को साझा करते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।
प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और जैव विविधता संरक्षण
सरगुजा में छेरछेरा पर्व का विशिष्ट रूप और यहां की परंपराएं विशेष महत्व रखती हैं। सरगुजा के गांवों में यह पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है, और यह स्थानीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यहां के बच्चे विशेष रूप से छेरछेरा के दिन हर घर के सामने पहुंचते हैं, और इस दिन उन्हें नया चावल और धन प्राप्त होता है। यह पर्व न केवल कृषि का उत्सव है, बल्कि यह लोकनृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी अपनी अहमियत बनाए रखता है। गांवों में छेरछेरा के दौरान नृत्य और गीत की विशेष भूमिका होती है। महिलाएं जहां सुगा गीत गाती हैं, वहीं पुरुष शैला गीत गाकर नृत्य करते हैं। साथ ही युवा वर्ग भी डंडा नृत्य करते हुए घर-घर पहुंचता है। यह नृत्य और गीत स्थानीय परंपराओं और संस्कृति का हिस्सा होते हैं, जो समाज की एकता और विविधता को बढ़ावा देते हैं।
इसके अलावा छेरछेरा के दौरान होने वाले कला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ग्रामीण अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। इसमें लोकनृत्य, संगीत, नाटक और अन्य प्रदर्शन शामिल होते हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना और संस्कृति को संजोना होता है।
प्रकृति और कुल देवी देवताओं का करते है सम्मान
छेरछेरा पर्व का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से सभी लोग अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलकर खुशी मनाते हैं और एक-दूसरे से सहयोग करते हैं। यह पर्व उन सभी परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, जो हमारे समाज में भाईचारे और प्यार की भावना को बढ़ावा देती हैं। छेरछेरा के दिन विभिन्न गांवों में खेलकूद, प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिनमें लोग अपनी कला और कौशल का प्रदर्शन करते हैं। ये कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का साधन होते हैं, बल्कि यह समाज में सामूहिकता और सामूहिक सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।
छेरछेरा पर्व में प्रकृति और देवताओं का सम्मान एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू है। इस पर्व के दौरान लोग न केवल अपने खेतों से काटे गए धान की पूजा करते हैं, बल्कि वे पेड़-पौधों, जल, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का भी सम्मान करते हैं। यह पर्व पर्यावरण के संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता फैलाने का एक बड़ा अवसर होता है। लोक पूजा के माध्यम से लोग यह संदेश देते हैं कि हम प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते और यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम पर्यावरण का संरक्षण करें।
जैव विविधता के संरक्षण में छेरछेरा पर्व का योगदान महत्वपूर्ण है। पर्व के दौरान प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान और संरक्षण किया जाता है, और यह संदेश फैलाया जाता है कि अगर हम प्रकृति का ध्यान नहीं रखेंगे तो हमारा अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। यह पर्व न केवल कृषि और पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सांस्कृतिक संरक्षण का भी आदर्श प्रस्तुत करता है, जिसमें लोकगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।
जनजातीय समुदायों के लिए छेरछेरा पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आदिवासी लोग इसे न केवल एक कृषि पर्व के रूप में मानते हैं, बल्कि इसे अपने जीवन और संस्कृति के एक अभिन्न हिस्सा के रूप में देखते हैं। जनजातीय समुदायों में यह विश्वास है कि उनके देवता और प्रकृति की शक्तियां उनके जीवन के हर पहलू में मौजूद हैं, और छेरछेरा पर्व के माध्यम से वे इन शक्तियों का सम्मान करते हैं। जनजातीय समुदाय के लोग इस दिन विशेष रूप से प्रकृति पूजा करते हैं और अपने ग्राम देवताओं को धन्यवाद अर्पित करते हैं। उनका मानना है कि यह पर्व उन्हें उनके जीवन की कठिनाइयों से उबारने के लिए देवताओं का आशीर्वाद प्रदान करता है। साथ ही, इस दिन जनजातीय समुदाय के लोग नई फसल को देवताओं को समर्पित करते हैं, ताकि आगामी वर्ष में उनकी कृषि समृद्ध हो और परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ रहें। इस पर्व के दौरान जनजातीय समुदाय परंपरागत धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, जिसमें वे अपने देवताओं के सामने विशेष रूप से अनाज, फल और फूल चढ़ाते हैं, ताकि उन पर देवताओं की कृपा बनी रहे। वे इस दिन को एक तरह से धार्मिक आभार के रूप में मनाते हैं, जिसमें उनके समुदाय की समृद्धि, शांति और सौहार्द की कामना की जाती है।
छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व न केवल किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, बल्कि यह समाज में सामूहिकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर अपने सुख-दुख साझा करने चाहिए और प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करना चाहिए।
इस पर्व का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, और यह छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। चाहे वह नृत्य और संगीत हो, लोकगीत हो या फिर समाजिक सहयोग हो, छेरछेरा पर्व ने हमेशा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और भविष्य में भी यह इसी तरह से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संजोने का काम करेगा।
विश्वविख्यात पूरी जगन्नाथ मंदिर के अनुरूप ही दिखता है, यह मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला और अद्वितीय डिज़ाइन के लिए पहचाना जाता है
एमसीबी/07 जनवरी 2025/ छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के चिरमिरी विकासखंड में स्थित जगन्नाथ मंदिर एक अद्वितीय और आकर्षक स्थल है। यह मंदिर एक छोटे से पठार के ऊपर बनाया गया है और दिखने में विश्वविख्यात पूरी जगन्नाथ मंदिर के समान प्रतीत होता है। अपनी सुंदर वास्तुकला और अद्वितीय डिज़ाइन के कारण यह मंदिर दर्शकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर एक आसानी से पहुँच योग्य स्थान है।


बिलासपुर: पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के विरोध बिलासपुर प्रेस क्लब में आपात बैठक और मौन जुलूस सौंपा ज्ञापन न्याय की मांग और पत्रकार सुरक्षा पर जोर
बिलासपुर से गुलशेर अली की रिपोर्ट - छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या ने प्रदेशभर में गहरा आक्रोश फैला दिया है। इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।इसे लेकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने शनिवार की दोपहर १२ बजे आपात बैठक बुलाई, जिसमें घटना की कड़ी निंदा करते हुए न्याय की मांग की गई।

मोर बेटा विधायक हवे त काबर नहीं सुनही देखा तुमन होय गइस ना समस्या के निराकारण कौड़ीमार धान खरीदी केंद्र में मंत्री को अचानक देख बोला एक किसान

27 दिसम्बर को तरगवां में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन
कोरिया / जिला प्रशासन ने बैकुण्ठपुर तहसील के तरगवां (हायर सेकेण्डरी स्कूल) में 27 दिसम्बर 2024 को जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने जिला अधिकारियों से कहा है कि उक्त शिविर में पहुंचकर महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में आम लोगों को अवगत करांए। श्रीमती त्रिपाठी ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा है कि इस शिविर में बड़ी संख्या में आए और अपनी समस्याओं को दर्ज कराएं।
बता दें जनसमस्या निवारण शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना और जनहित के मुद्दों पर तत्परता से कार्यवाही करना है। इन शिविरों में जिला प्रशासन व विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। शिविर के दौरान नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकेंगे और तुरंत आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। प्रशासन ने आम जनता से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी समस्याएं प्रस्तुत करने का आग्रह किया है, ताकि समय पर उनका निवारण हो सकें।
9 दिसंबर को चिरमिरी आयेंगे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, करेंगे जिला अस्पताल सहित विभिन्न कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन अस्थाई जिला अस्पताल सहित कार्यक्रम स्थल का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अधिकारियों संग किया निरीक्षण


मिशन वात्सल्य के अंतर्गत चाइल्ड हेल्पलाइन के तहत राज्य स्तरीय जिला स्तरीय पदों पर कर्मचारियों की संविदा भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित
एमसीबी / महिला एवं बाल विकास विभाग अन्तर्गत संचालित मिशन वात्सल्य योजना के तहत् एवं चाईल्ड हेल्पलाइन संचालन हेतु जारी मानक संचालन प्रक्रिया अनुसार राज्य स्तर पर स्थापित नियंत्रण कक्ष एवं जिला स्तर पर चाईल्ड हेल्पलाइन यूनिट एवं रेल्वे स्टेशन पर चाईल्ड हेल्पलाइन डेस्क में विभिन्न पदों पर एकमुस्त संविदा वेतन पर भर्ती के लिए पात्र आवेदकों से आवेदन पंजीकृत डाक/स्पीड पोस्ट/कोरियर के माध्यम से 27 दिसम्बर 2024 सायं 5ः00 बजे तक आमंत्रित है। पदों हेतु आवेदन मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले के कार्यालय जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग को प्रेषित करना होगा। पदों की नियुक्ति एवं आवेदन प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी हेतु कार्यालय जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, प्रथम तल, कलेक्ट्रेट कैम्पस में कार्यालयीन समय में सम्पर्क कर सकते हैं। जिला चाईल्ड हेल्पलाईन युनिट मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर हेतु परियोजना समन्वय अनारक्षित 1 पद, एकमुश्त वेतन 35000, काउंसलर अनारक्षित 1 पद, एकमुश्त वेतन 25000, चाईल्ड हेल्पलाईन सुपरवाइजर अनारक्षित 1 पद, अनुसूचित जनजाति 1 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग 1 पद, एकमुश्त वेतन 22000, केस वर्कर अनारक्षित 1 पद, अनुसूचित जनजाति 1 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग 1 पद, एकमुश्त वेतन 16000 मिलेगा।
जिले में लिंग आधारित हिंसा और बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान सबकी भागीदारी से लिंग आधारित हिंसा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियां समाप्त होगी कलेक्टर
कोरिया । कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी के निर्देशानुसार और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह के मार्गदर्शन में, लिंग आधारित हिंसा समाप्ति और बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम आज मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का उद्देश्य
इस अभियान का उद्देश्य बाल विवाह, घरेलू हिंसा और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना है। कार्यक्रम में महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पोक्सो एक्ट और लिंगानुपात से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई।
सबकी भागीदारी से यह सामाजिक कुरीतियां समाप्त होगी
कलेक्टर ने एक महत्वपूर्ण संदेश में कहा कि इस तरह कार्यक्रम से हम सबको संकल्प भी लेना होगा कि जिले में लिंग आधारित हिंसा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। महिला अधिकारों और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के अभियान बेहद आवश्यक है। इस तरह के कार्यक्रम लिंग समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होता है।
शपथ और जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों को "आओ बनाएं बाल विवाह मुक्त कोरिया" की शपथ दिलाई गई। साथ ही, 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चल रहे 16 दिवसीय जागरूकता अभियान की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी और संरक्षण अधिकारी ने विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बाल विवाह रोकने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के उपायों पर चर्चा की।
इस अवसर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक असरफ अंसारी, जिला प्रबंधक (प्रशिक्षण एवं एचआर) राकेश सिंह, डिप्टी एमआई सरोजिनी राय और बैकुंठपुर, पटना, सोनहत, पोड़ी ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे
छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस पर विशेष लेख छत्तीसगढ़ी भाखा के मान अऊ सम्मान के दिशा म एक नवा पहल छत्तीसगढ़ी भाखा ल संजोय म मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के महत्वपूर्ण योगदान महेन्द्र सिंह मरपच्ची
एमसीबी / जय जोहार जय छत्तीसगढ़ ! आप सब मन भलीभाती जानथव कि छत्तीसगढ़ी अपन समृद्ध भाखा, संस्कृति अउ परंपरा खातिर पूरा देश म अपन अलग पहिचान बना लिहिस हे। इहा के माटी, तिहार, लोककला अउ संस्कृति जीवन जिये के तरीका म एक अलग ही मिठास झलकथे। हमर छत्तीसगढ़ के आत्मा हर जम्मों छत्तीसगढ़ियां मन के बोली अउर भाखा में बसे हे। इ भाखा म केवल बात करे के साधन नइ हे, बल्के हमर छत्तीसगढ़ियां भाई बहिनि के परंपरा, रीति-रिवाज अउ हमर संस्कृति के अमूल्य धरोहर हर झलकत हे। छत्तीसगढ़ी भाखा के सम्मान अउ प्रचार-प्रसार के खातिर हमर तत्कालिन सरकार हर 28 नवंबर के दिन ल ष्छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवसष् बनाये के घोषणा करे रहिस। एही दिन हमर भाखा के महत्त्व ल पहिचान करे बर, अउ ओला संजोय बर, अउ नई पीढ़ी ला छत्तीसगढ़ के जम्मों इतिहास से जोड़य के अवसर आय हे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के शुरुआत हर 28 नवंबर 2007 के होइस, जब छत्तीसगढ़ी भाषा ल आधिकारिक रूप म राज्य के राजभाषा के दर्जा मिलिस। ये ऐतिहासिक फैसला ल डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व म पूर्ववर्ती सरकार हर अपनाये रहिस ये निर्णय हर केवल भाषा के प्रचार-प्रसार के माध्यम नइ बने रहिस, बल्कि ये छत्तीसगढ़वासियन के खातिर एक गौरव के विषय बन गईस। एकर बाद छत्तीसगढ़ी भाखा ल सरकारी दफ्तर, स्कूल अउ कॉलेज म भी बढ़ाये के काम ल शुरू करे गइस ।
छत्तीसगढ़ी भाखा के इतिहास, भाषा, संस्कृति अउ प्राकृत भाषा ले उभरिस हे। छत्तीसगढ़ी म लोकगीत, कहानी, कहावत अउ जनवला जइसन साहित्यिक धरोहर समेटे हावे। ये भाखा हर हमर लोकजीवन, परंपरा अउ रीति-रिवाज के सच्चा प्रतिबिंब आय। छत्तीसगढ़ी लोकगीत अउ कथा ये छत्तीसगढ़ी भाखा ल अउ जियादा सुघ्घर अउ जीवंत बनावत हे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस केवल तिहार नइ, बल्कि हमर भाखा अउ संस्कृति के जीवित रखे अउ ओकर नई ऊँचाई म पहुंचाय के संकल्प के प्रतीक आय। ये दिन पूरा छत्तीसगढ़ म अलग-अलग सांस्कृतिक अउ शैक्षणिक कार्यक्रम होथे। संगोष्ठी, निबंध लेखन, कविता पाठ, लोकगीत अउ नाटक के आयोजन घलो होथे। ये कार्यक्रम मन केवल भाषा अउ संस्कृति के प्रति जागरूकता नइ फैलाथे, बल्कि लोगन ल अपन जड़ से भी जोड़थे। आज के समय म छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति ल नई दिशा देहे में हमर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के बहुत बडे योगदान हे। ओकर मानना हे कि छत्तीसगढ़ी भाखा केवल संवाद के माध्यम नइ हे, बल्कि हमर छत्तीसगढ़ के आत्मा अउ पहचान आय। हमर मुख्यमंत्री के दूरदर्शी सोच अउ नीति के कारण छत्तीसगढ़ी भाषा अउ संस्कृति के संरक्षण अउ विकास के खातिर नवा जोश आइस हे।
शिक्षा म छत्तीसगढ़ी भाखा ल बढ़ावा देय बर स्कूल अउ कॉलेज के पाठ्यक्रम म छत्तीसगढ़ी साहित्य अउ संस्कृति ल सामिल करे गय हे। सरकारी दफ्तर म छत्तीसगढ़ी भाखा के उपयोग ल बढ़ाय खातिर भी जरूरी नीति लागू करे गय हे, ऐकर ले हमर राजभाषा हर छत्तीसगढ़ी म अउ मजबूत बने हे। हमर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व म छत्तीसगढ़ी साहित्य, लोकगीत अउ नाट्यकला के संरक्षण अउ विकास के खातिर विशेष योजना बनाये जाथ हे। हमर लोक कलाकार अउ साहित्यकार मन ल प्रोत्साहित देहे के खातिर कई ठन आर्थिक सहायता कार्यक्रम ल चलावत हे। छत्तीसगढ़ी साहित्य अकादमी के स्थापना, साहित्यिक मेला अउ डिजिटल प्लेटफॉर्म में छत्तीसगढ़ी भाखा के प्रोत्साहन, ल आगे बढ़ाये के प्रयास करत हे। राजभाषा दिवस के कार्यक्रम मन लोगन ल अपन भाषा अउ संस्कृति के महत्त्व ल समझावत हे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय मानथें कि हमर भाषा अउ संस्कृति हमर राज्य के एकता अउ पहचान ल मजबूत करथे। छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस हर हम सबला ये बात के याद दिलाथे कि भाषा अउ संस्कृति कोनो भी समाज के आत्मा होथे। जऊन समाज अपन भाखा अउ संस्कृति ल जिंदा रखथे, वही समाज हर अपन पहचान ल बनाय राखथे। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व म छत्तीसगढ़ी भाखा अउ संस्कृति ल नई ऊँचाई मे पहुंचाय के प्रयास हे छत्तीसगढ़िया बर गौरव के बात आय कि आज ये अवसर म हम सबला ये संकल्प लेना चाही कि अपन भाखा अउ संस्कृति ल केवल संरक्षित करबो, बल्कि हमर बोली भाखा ल अगली पीढ़ी तक पहुंचाय के जिम्मेदारी ला भी निभाबो। छत्तीसगढ़ी भाखा हमर राज्य के आत्मा अउ सांस्कृतिक गौरव के प्रतीक आय। ऐला सहेजे अउ सम्मान करे बर हमर हर छत्तीसगढ़ियां के जिम्मेदारी हर आय। हम सब मिलके अपन-अपन प्रयास से अपन धरोहर ल अउ मजबूत बनाय बर काम करबो।
प्रधानमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 6600 करोड़ की परियोजनाओं का किया लोकार्पण कोरिया में श्रीमती गोमती साय की उपस्थिति में हुआ जनजतीय गौरव दिवस का शुभारंभ

राज्योत्सव:छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य व गीत से कोरियावासी झूमे भोपाल कोसो दूर था, आवाज बहुत देर से पहुंच पाती थी- श्रीमती रेणुका सिंह


प्रकृति की गोद से लिखी जाएगी सरगुजा क्षेत्र के विकास की नई गाथा

ऐसा दिखेगा मयाली पर्यटकों के लिए मनमोहक है मयाली का मनोरम दृश्य, पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाता मयाली नेचर कैम्प, सरगुजा क्षेत्र प्राधिकरण की बैठक में लगेगी विकास की मुहर….
भगवान राम गुप्ता की रिपोर्ट - आज नैसर्गिक सुंदरताओं को समेटे जशपुर की खूबसूरती को भला कौन निहारना नहीं चाहेगा। सिन्दूरी सुबह और गुलाबी ठण्ड के दस्तक के बीच नीले आकाश, पक्षियों के चहचहाहट, कलरव के साथ हरे-भरे वातावरण और स्वच्छ पानी में पहाड़ों के प्रतिबिम्ब के बीच मयाली की पहचान एक खूबसूरत पर्यटन स्थल होने लगी है। मयाली जशपुर जिला मुख्यालय से तकरीबन 30 किलोमीटर दूर कुनकुरी विकासखण्ड के अंतर्गत स्थित है। मयाली में एक ओर खूबसूरत पहाड़ियों की वादी और इसकी तलहटी में अथाह जल राशि समेटे मयाली बांध और इसके चारो ओर हरियाली, ऊंचे-ऊंचे पेड़ मयाली को मनमोहक बनाते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप मयाली में पर्यटकों की सुविधा और विकास के कार्य भी कराए जा रहे हैं।

सूरजपुर घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बड़ा बयान
रायपुर- सूरजपुर घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बड़ा बयान*

उराँव समाज का ऐतिहासिक करमा महोत्सव 14 अक्टूबर को लैलूंगा में आदिवासियों के मसीहा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय होंगे सम्मिलित
लैलूंगा :- छ्त्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के विकास खण्ड लैलूंगा में दिनांक 14 अक्टूबर दिन सोमवार को क्षेत्रीय उराँव समाज के तत्वावधान में ऐतिहासिक करमा महोत्सव का आयोजन किया गया है । गौरतलब हो कि यह करमा महोत्सव विगत बारह वर्षों से लगातार उराँव समाज के द्वारा आयोजन किया जाता रहा है । सर्व विदित है कि आदिवासी उराँव समाज का यह करमा यानी करम सेनी को आस्था और विश्वास के साथ ईस्टदेव महादेव पार्वती का प्रतीक मानकर उराँव समाज के द्वारा पारंपरिक तथा विधी विधान के अनुसार रीति रिवाज संस्कृती से पूजा अर्चना कर उराँव समाज के लोगों के द्वारा प्रति वर्ष प्रमुख त्यौहार के रूप में पूर्वजों से मनाते आ रहे हैं। इसी तारतम्य में दिनांक 14 अक्टुबर दिन सोमवार को इंद्रप्रस्थ मिनी स्टेडियम लैलूंगा में क्षेत्रीय उराँव समाज का वार्षिक सम्मेलन सह करमा महोत्सव के रूप में मानाया जायेगा । जिसे अपरान्ह 04 बजे करम सेनी का पूजन एवं शायं 07 बजे करम सेनी सेवा तथा कथा वाचन एवं ऐतिहासिक व पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम के तौर पर मांदर की थाप पर नाच गान करते हुए रात्रीकालीन जागरण किया जायेगा । जिसके मुख्य अतिथि के रूप में छ्तीसगढ़़ प्रान्त के प्रथम आदिवासी मुख्यमंत्री माननीय विष्णुदेव साय ( छ.ग.शासन ) पधार रहे हैं । जहाँ कार्यक्रम कि अध्यक्षता करेंगे पनत राम भगत उपसभापति 18 गढ़ उराँव समाज ( छ.ग.) एवं उड़ीसा हिमगिर क्षेत्र, वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के कद्दावर आदिवासी नेता रामविचार नेताम आजाक एवं कृषी मंत्री ( छ.ग. शासन ) रायगढ़ जिला प्रभारी मंत्री, ओपी चौधरी “विधायक” रायगढ़ द्वय वित्त मंत्री ( छ.ग. शासन ) , राधेश्याम राठिया “सांसद” लोक सभा क्षेत्र रायगढ़, देवेन्द्र प्रताप सिंह “सांसद राज्य सभा” श्रीमती गोमती साय “विधायक” विधान सभा क्षेत्र पत्थलगाँव एवं उपाध्यक्ष सरगुजा विकास प्रधिकरण ( छ.ग. शासन ) श्रीमती विद्यावती कुंज बिहारी सिदार “विधायक” विधान सभा क्षेत्र लैलूंगा, रामकुमार टोप्पो “विधायक” विधान सभा क्षेत्र सीतापुर, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव प्रदेश मंत्री भाजपा, सत्यानन्द राठिया ( लैलूंगा ) के पूर्व विधायक एवं मंत्री (छ.ग. शासन ), हृदय राम राठिया पूर्व विधायक लैलूंगा, श्रीमती सुनीति सत्यानन्द राठिया पूर्व विधायक सह संसदीय सचिव ( छ.ग. शासन ), चक्रधर सिंह सिदार पूर्व विधायक लैलूंगा, श्रीमती यशोमती सिंह सिदार जिला पंचायत सदस्य सह सभापति महिला एवं बाल विकास विभाग जिला पंचयात रायगढ़, श्रीमती किरण पैंकरा जनपद अध्यक्ष ज. पं. लैलूंगा, लखनलाल सारथी उपाध्यक्ष ज.पं. लैलूंगा, श्रीमती सुरभी कोसरिया कार्यवाहक अध्यक्ष नगर पंचायत लैलूंगा, रविन्द्रपाल धुर्वे उपाध्यक्ष नगर पंचायत लैलूंगा कि गरिमामयी उपस्थिती में संपन्न होगी । जहाँ लैलूंगा उराँव समाज के अध्यक्ष – नोहर साय भगत, उपाध्यक्ष – श्रीमती शकुंतला भगत, बालक राम भगत, दासीलाल भगत, सचिव – अर्जुन भगत, सह सचिव – भागीरथी भगत, कोषाध्यक्ष – लालसाय भगत, सह कोषाध्यक्ष – नम्बर साय भगत, पूर्वी क्षेत्रीय सरपंच दुखसिंह भगत, पश्चिमी क्षेत्रीय सरपंच भक्तुराम भगत, जिला मंत्री आदिवासी मोर्चा रायगढ़ – दक्षिणी क्षेत्रीय सरपंच सियाराम भगत, पूर्व प्राचार्य सह विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी लैलूंगा पी. एस भगत , प्रदेशाध्यक्ष – रवि भगत भाजयुमो छत्तीसगढ़ के कर कमलों में संपन्न होगा । जहाँ विभिन्न क्षेत्रों से उराँव समाज के भाई बहिन एवं बंधु बांधव बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे ।
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राज्य स्तरीय 8 दिवसीय हाथकरघा प्रदर्शनी शुरू
बिलासपुर / ग्रामोद्योग हाथकरघा विभाग द्वारा तीजा-पोला के अवसर में कोसा एवं कॉटन ऑफ छत्तीसगढ़ हाथकरघा वस्त्र प्रदर्शनी आयोजन आज से राघवेन्द्र राव सभा भवन में शुरू हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शिल्पि संघ रायपुर के अध्यक्ष श्री विशालराम देवांगन नेे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के छायाचित्र पर माल्यार्पण करते हुये दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का शुभांरभ किया गया। मुख्य अतिथि ने प्रत्येक स्टाल पर छत्तीसगढ़ प्रदेश के हाथकरघा, हस्तशिल्प एवं खादी की कलाकृति का अवलोकन किया। उनके द्वारा प्रदर्शनी में प्रदर्शित उक्त कलाकृति की सराहना की गयी।
प्रदर्शनी के आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हाथकरघा बुनकरों, हस्तशिल्प कारीगर एवं खादी उत्पाद को विपणन हेतु उचित माध्यम उपलब्ध कराना, बुनकरों के बुनाई एवं हस्तशिल्प कला को आम नागरिक तक सीधे पहुचाना है तथा उपभोक्ता के माध्यम से नित नवीन डिजाईनों के विकास हेतु सुझाव प्राप्त करना। प्रदर्शनी के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय हाथकरघा वस्त्र उत्पाद, हस्तशिल्प कलाकृति तथा खादी वस्त्र को एक ही छत के नीचे आम उपभोक्ता तक सीधे पहुचना, बुनकरों, हस्तकला के कारीगीर, खादी वस्त्र उत्पादक के लिए नियमित रोजगार के अवसर में वृद्धि करना। छत्तीसगढ़ में हाथकरघा पर वस्त्र उत्पादन महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। और कई हूरनमंद महिलाये बुनकरी के माध्यम से अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो रही है।

उक्त प्रदर्शनी में कोसा एवं सूती उत्पादक क्षेत्र जैसे रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, चन्द्रपुर, छुरी, सिवनी, रामाटोला, लोफन्दी, भिलाईगढ़ एवं सोमाझिटिया के 28 बुनकर समिति के 30 प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ बिलासा हैण्डलूम रायपुर, 04 हस्तशिल्प के प्रतिनिधि एवं खादी ग्रामोद्योग द्वारा भाग लिया गया है। उनके द्वारा आकर्षक कोसा एवं कॉटन वस्त्र जैसे उत्कृष्ट कलात्मक कोसा साडियॉ, कोसा मलमल, कोसा ड्रेस मटेरियल, कोसा सलवार सूट, कोसा बाफ्ता, सूती साडियॉ, कॉटन शुटिंग, शर्टिग, दुपट्टा, बेड-शीट, बेड-कव्हर, पिलो-कव्हर, टॉवेल, नेपकीन, गमछा आदि का प्रदर्शन किया गया है। शुभारंभ के अवसर पर उपस्थित प्रदर्शनी के नोडल अधिकरी, उपसंचालक हाथरकघा श्री डोमूदास धकाते द्वारा अवगत कराया गया की उक्त प्रदर्शनी दिनांक 29 अगस्त से 05 सितम्बर 2024 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 10 बजे तक खूली रहेगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि प्रदर्शनी में उपस्थित होकर छत्तीसगढ़ प्रदेश की बुनाई कला, हस्तशिल्प एवं खादी वस्त्र उत्पाद का अवलोकन कर प्रोत्साहित करें












