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उत्तर भारत में तबाही के बीच बड़ा फैसला… पीएम मोदी कर सकते हैं बस्तर और बाढ़ प्रभावित राज्यों का दौरा, करेंगे हालात की समीक्षा
बस्तर/दिल्ली। उत्तर भारत में बाढ़ और भूस्खलन से मचे कोहराम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही प्रभावित राज्यों का दौरा कर सकते हैं। यह दौरा ऐसे समय में होने वाला है जब भारी बारिश और आपदाओं ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है और हजारों परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है।
बाढ़-भूस्खलन से बढ़ा संकट
लगातार हो रही बारिश ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में भयावह स्थिति पैदा कर दी है।
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अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
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केवल हिमाचल प्रदेश में ही 360 से ज्यादा लोगों की जान गई है।
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यहां 1,087 सड़कें अवरुद्ध, 2,838 बिजली लाइनें ठप और 509 जल आपूर्ति योजनाएं बाधित हैं।
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राज्य में अब तक 3,979.52 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया है।
पंजाब में हालात भयावह
पंजाब के 23 जिलों के 1,900 से ज्यादा गांव जलमग्न हो चुके हैं। अब तक 43 लोगों की मौत और 1.71 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग की है।
जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में असर
जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी और अन्य जलाशयों का जलस्तर अब कम हो रहा है, जिससे थोड़ी राहत के संकेत मिले हैं। वहीं उत्तराखंड में भी भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ से संपत्ति और जानमाल का बड़ा नुकसान हुआ है।
पीएम मोदी का संभावित दौरा
प्रधानमंत्री मोदी इन राज्यों का दौरा कर हालात की समीक्षा करेंगे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर सकते हैं। फिलहाल राज्य और केंद्र की टीमें राहत-बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।
नक्सलवाद पर अब अंतिम प्रहार! 43 मोस्ट वांटेड की लिस्ट तैयार, हिड़मा समेत बड़े नेताओं को खत्म करने फोर्स को AI तकनीक से मिले निर्देश
रायपुर। देश में नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की तैयारी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद का खात्मा हर हाल में किया जाएगा। इसी कड़ी में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया गया है।
43 मोस्ट वांटेड की लिस्ट तैयार
इस अभियान में सुरक्षा एजेंसियों ने 43 मोस्ट वांटेड नक्सलियों की सूची तैयार कर ली है। इसमें कुख्यात नक्सली हिड़मा समेत कई बड़े नाम शामिल हैं।
AI तकनीक से ऑपरेशन
फोर्स को निर्देश दिया गया है कि इस ऑपरेशन में AI (Artificial Intelligence) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। राज्यों के अफसरों को आपसी समन्वय के साथ गुप्त सूचनाएं साझा करने और बॉर्डर इलाकों में नक्सलियों को घेरकर मार गिराने को कहा गया है।
केंद्रीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब बड़े नक्सली नेताओं को टारगेट कर खत्म करने की रणनीति पर काम होगा।
रायपुर में 3.5 घंटे मैराथन बैठक
इस रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए नया रायपुर के निजी रिसॉर्ट में शुक्रवार को साढ़े तीन घंटे तक अहम बैठक चली।
बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, आईबी चीफ तपन कुमार डेका, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के डीजीपी, CRPF, BSF, ITBP के शीर्ष अधिकारी, साथ ही IB, NIA और राज्यों के गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ बना फोकस
सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में फोर्स का अगला टारगेट हिड़मा और उसके गुर्गे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन पर निर्णायक कार्रवाई नक्सलवाद की कमर तोड़ देगी।
छत्तीसगढ़ में शोक की लहर… डॉ. रमन सिंह ने वरिष्ठ स्वयंसेवक शांताराम सर्राफ को दी श्रद्धांजलि, कहा- “उनका जीवन हम सबके लिए प्रेरणा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक और पूर्व प्रांत प्रचारक श्रद्धेय शांताराम सर्राफ के निधन से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने उनके अंतिम दर्शन कर पुष्पांजलि अर्पित की और गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा –
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रांत प्रचारक एवं वरिष्ठ स्वयंसेवक श्री शांताराम सर्राफ जी के अंतिम दर्शन कर उनकी दिवंगत देह पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। सर्राफ जी ने संघ को प्रदेश में सशक्त एवं मजबूत बनाने में अमूल्य योगदान दिया है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हम सभी उनके कार्य को आगे बढ़ाएं। मैं प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करता हूँ कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
समाज के लिए अमूल्य योगदान
शांताराम सर्राफ जी ने अपने जीवनकाल में संघ और समाज को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य किया। उनके निधन को संघ परिवार और छत्तीसगढ़ की जनता एक अपूरणीय क्षति मान रही है।
छत्तीसगढ़ शोक में डूबा… CM साय ने पूर्व प्रांत प्रचारक शांताराम जी को दी अंतिम विदाई, रमन सिंह बोले- “हमारे लिए पिता तुल्य थे”
रायपुर। राजधानी रायपुर के पंडरी स्थित जागृति मंडल में आज भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रांत प्रचारक श्रद्धेय शांताराम जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री साय ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर नमन किया और कहा – “श्रद्धेय शांताराम जी संघ के वरिष्ठ प्रचारक थे और उनका मेरे साथ आत्मीय संबंध रहा। वे सदैव अभिभावक समान स्नेह और मार्गदर्शन प्रदान करते रहे। उनका निधन मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।”
पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की भावुक श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने भी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “शांताराम जी हमारे लिए पिता तुल्य थे। उन्होंने मदकूदीप को पुनर्जीवित कर राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दिया। उनकी विनम्रता और जीवन मूल्य हमेशा सभी के लिए आदर्श रहेंगे।”
समाज और संघ परिवार के लिए अपूरणीय क्षति
संघ के वरिष्ठ प्रचारक के रूप में शांताराम जी ने छत्तीसगढ़ की जनता और स्वयंसेवकों को परिवार मानकर निरंतर मार्गदर्शन किया। उनके निधन से पूरा संघ परिवार और प्रदेश शोक में डूब गया है।
अंतिम दर्शन में उमड़ा जनसैलाब
श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और आमजन मौजूद रहे। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा, गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे, विधायक अनुज शर्मा और मोतीलाल साहू, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, कृषि कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर सहित कई जनप्रतिनिधि भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
गौतमबुद्ध नगर: यमुना का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की चपेट में 18 गांव, 3700 से ज्यादा लोग प्रभावित
गौतमबुद्ध नगर। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से गौतमबुद्ध नगर जिले में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। जिला प्रशासन ने हालात को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया है। जिलाधिकारी मेधा रूपम के नेतृत्व में राजस्व, सिंचाई, स्वास्थ्य, पूर्ति, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ समेत तमाम विभाग राहत और बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं।
⚡ 18 गांव बाढ़ की चपेट में
अब तक जनपद के 18 गांव बाढ़ की जद में आ चुके हैं, जिनमें सदर तहसील के 12 और दादरी तहसील के 6 गांव शामिल हैं। लगभग 3700 लोगों की आबादी प्रभावित हुई है। इनमें से 3396 लोगों को सुरक्षित शरणालयों तक पहुंचाया जा चुका है। शरणालयों में भोजन, पानी और चिकित्सा की पूरी व्यवस्था की गई है।
⚡ रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
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एनडीआरएफ की टीम जेवर तहसील के मेहंदीपुर में तैनात
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एसडीआरएफ सेक्टर-135 (सदर तहसील) में सक्रिय
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पीएसी 44 बटालियन नॉलेज पार्क क्षेत्र में मौजूद
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फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की संयुक्त टीम सेक्टर-128 (दादरी) में तैनात
कुल मिलाकर 5 टीमें और 14 नावें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। इनके साथ आपदा मित्र और होमगार्ड भी सक्रिय हैं।
⚡ स्वास्थ्य और पशु सुरक्षा
स्वास्थ्य विभाग की 6 मेडिकल रेस्पॉन्स टीमें शरणालयों में रह रहे लोगों को दवाएं और एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध करा रही हैं। वहीं सेक्टर-135 ग्रीन बेल्ट पुश्ता रोड पर बनाए गए पशु शिविर में 1471 गौवंश को सुरक्षित रखा गया है।
⚡ राहत सामग्री और कंट्रोल रूम
अब तक दादरी क्षेत्र में 182 राहत किट और सदर क्षेत्र में 410 राहत किट वितरित की जा चुकी हैं। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों के लिए 24×7 कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। आपात स्थिति में लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं –
???? 0120-2978231, 2978232, 2978233
⚡ डीएम की अपील
डीएम मेधा रूपम ने जनता से अपील की है कि नदी-नालों के किनारे न जाएं, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। विस्थापित लोग शरणालयों में ही रहें और पशुपालक अपने मवेशियों को प्रशासन द्वारा बनाए गए शिविरों में भेजें।
कमल तोड़ने उतरे… उप कुलसचिव की तालाब में दर्दनाक मौत, नहीं बचा पाए डॉक्टर
दुर्ग। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई के उप-कुलसचिव प्रोफेसर भास्कर चंद्राकर की तालाब में डूबने से मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा ग्राम पतोरा (उतई) का है।
जानकारी के अनुसार, 4 सितंबर की शाम 5 बजे कार्यालयीन कार्य के बाद प्रोफेसर चंद्राकर मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) के साथ अपने उतई स्थित प्लॉट देखने गए थे। रायपुर लौटते समय वे ग्राम पतोरा के तालाब में कमल का फूल तोड़ने उतरे। इसी दौरान कमल की जड़ों और दलदल में फंस गए और बाहर नहीं निकल पाए।
सहकर्मी ने तत्काल गांव वालों की मदद से उन्हें तालाब से बाहर निकाला और CPR देकर नज़दीकी निजी अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बीएसपी सेक्टर-9 हॉस्पिटल रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर दुर्ग से रायपुर स्थित उनके निवास पचपेड़ी नाका, नवजीवन कॉलोनी ले जाया जाएगा। अंतिम संस्कार आज दोपहर 2 बजे किया जाएगा।
जशपुर में दरिंदगी की दो कहानियां: शादी का झांसा, बंधक बनाकर रेप… दोनों आरोपी अब सलाखों के पीछे
जशपुर। जिले से दुष्कर्म के दो चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। दोनों ही मामलों में आरोपियों ने शादी का झांसा देकर युवतियों का शोषण किया। पीड़िताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों दरिंदों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
◼ पहला मामला – चौकी दोकड़ा क्षेत्र
18 वर्षीय पीड़िता रक्षा बंधन के दिन अपनी बुआ के साथ रिश्तेदार के घर आई थी। रात को सोते समय उसी घर में रहने वाला शिवा चौहान उसके कमरे में घुस गया और जबरन दुष्कर्म करने लगा। आरोपी ने पीड़िता को दो दिनों तक बंधक बनाकर रखा। किसी तरह मौका पाकर युवती ने अपने परिजनों को फोन कर घटना की जानकारी दी।
परिजन मौके पर पहुंचे और बेटी को छुड़ाया। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिवा चौहान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
◼ दूसरा मामला – दुलदुला क्षेत्र
यहां की पीड़िता ने बताया कि साल 2021 में उसकी पहचान राम प्रसाद सिंह से हुई थी। आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ अलग-अलग जगहों पर दुष्कर्म किया। जब युवती गर्भवती हुई और बच्चे को जन्म दिया, तब आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। इससे व्यथित होकर पीड़िता ने दुलदुला थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने धारा 376 (द) के तहत अपराध दर्ज कर राम प्रसाद सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
दोनों मामलों में त्वरित कार्रवाई कर पुलिस ने पीड़िताओं को न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाया है।
14’ के फेर में साय सरकार! कांग्रेस की हाईकोर्ट में चुनौती, अब सोमवार को होगा बड़ा फैसला…
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार एक बार फिर से हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। इस बार कांग्रेस ने 11 से बढ़ाकर मंत्रियों की संख्या 14 किए जाने को लेकर याचिका दायर की है। इस पर आगामी सोमवार को सुनवाई होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लंबे इंतजार के बाद 20 अगस्त को कैबिनेट में विस्तार किया था। इसमें तीन नए चेहरों— गजेंद्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल— को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी। इसके बाद मंत्रियों की संख्या 11 से बढ़कर 14 हो गई।
इस विस्तार को लेकर कांग्रेस ने कड़ा एतराज जताया है। पार्टी के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। कांग्रेस का तर्क है कि:
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विधानसभा की कुल 90 सीटों के आधार पर मंत्रियों की संख्या 15% से अधिक नहीं हो सकती।
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इस हिसाब से मंत्रियों की अधिकतम संख्या 13.50 यानी 13 ही होनी चाहिए।
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वर्तमान में कैबिनेट में 14 मंत्री हैं, जो कि संविधान के अनुच्छेद 164 (1क) का उल्लंघन है।
इससे पहले भी इसी मुद्दे पर बसदेव चक्रवर्ती ने जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग, मुख्यमंत्री और सभी 14 मंत्रियों को पक्षकार बनाया गया था।
अब अदालत से आने वाले फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला साय सरकार के लिए बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा कर सकता है।
CM विष्णुदेव साय ने किया शिक्षकों का सम्मान: 64 गुरुओं को मिला राज्य स्तरीय पुरस्कार
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2025 में शिरकत की। यह समारोह राजभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेशभर से आए 64 शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
सीएम साय ने इस अवसर पर कहा कि यह पुरस्कार केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और समाज निर्माण में योगदान के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा—
"शिक्षक ही वह मार्गदर्शक शक्ति हैं, जिनकी मेहनत से आने वाली पीढ़ी का भविष्य तय होता है।"
इस सम्मान समारोह में राज्यपाल और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया और शिक्षकों को बधाई दी। पूरे आयोजन के दौरान माहौल सम्मान और गौरव से भरा हुआ नजर आया।
चक्रधर समारोह : नृत्यों ने कराया उत्तर-दक्षिण का संगम
कथक और भरतनाट्यम की प्रस्तुतियों से भक्ति रस में डूबे दर्शक
रायपुर- 04 सितंबर 2025

रायगढ़ में चल रहे चक्रधर समारोह के आठवें दिन नृत्यों ने उत्तर-दक्षिण का संगम कराया। उत्तर भारत की संस्कृति को दर्शाने वाले कथक तो दक्षिण भारत की गौरवशाली पुरातन संस्कृति को प्रदर्शित करने वाले भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुतियों ने माहौल भक्तिमय कर दिया। समारोह में उपस्थित दर्शक दोनों नृत्यों की प्रस्तुतियों के दौरान भक्ति रस में डूबे रहे।

संगीता कापसे ने कथक में झलकाया कृष्ण लीला और भक्ति भाव
समारोह के आठवंे दिन कथक नृत्यांगना और गुरु संगीता कापसे और उनकी होनहार शिष्याओं की प्रस्तुति ने शास्त्रीय नृत्य को कृष्ण भक्ति की गहराई से जोड़ा। उन्होंने तीनताल और झपताल की संरचनाओं पर आधारित नृत्य में श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया।
संगीता कापसे और उनकी शिष्याओं ने मंच पर ‘कृष्ण सांवरिया‘ प्रसंग को जीवंत किया। आज चक्रधर समारोह में कृष्ण सांवरा की प्रस्तुति रही-कृष्ण के गोकुल आगमन पर खुशी और उल्लास का भाव, माखन चोरी करते समय यशोदा और कृष्ण की ममता का भाव, गोपियों को परेशान करना, फिर कालिया नाग से सारे गोकुल को मुक्त करना और अंत में गोपियों के साथ रास करके प्रेम का संदेश देना। इन सबको उन्होंने भाव और लय की सुंदरता से पिरोया। उनकी प्रस्तुति में कथक का सौंदर्य ही नहीं, बल्कि लोक और शास्त्र के संगम का भी अनुभव हुआ। कार्यक्रम में कला-प्रेमियों ने उनकी नृत्य साधना और कृष्ण भक्ति से ओतप्रोत इस प्रस्तुति को सराहा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया और दुबई तक अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी संगीता कापसे को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। छत्तीसगढ़ में पंजीकृत संगीता कला एकेडमी, रायपुर उनकी संस्था है, जो सामान्य बच्चों के साथ-साथ गरीब बच्चों को भी नृत्य का निरूशुल्क प्रशिक्षण दे रही है और उनकी शिक्षा का दायित्व उठा रही है।

अजीत कुमारी कुजूर और उनकी टीम ने भरतनाट्यम से दिखाई दक्षिण भारत की झलक
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना अजीत कुमारी कुजूर और उनकी टीम ने भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति, सधे हुए पदचालन और नृत्य की बारीकियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अजीत कुमारी की प्रस्तुति में दक्षिण भारत की संस्कृति और परंपरा की झलक सजीव रूप में दिखाई दी। उन्होंने भरतनाट्यम के माध्यम से कहानी कहने और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए हाथों के हाव-भाव (मुद्रा), चेहरे के भाव (नवरस) और पैरों की तालबद्ध चाल का बेहतरीन उपयोग किया। यह प्रस्तुति न केवल भरतनाट्यम की शास्त्रीयता को दर्शाती थी, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत संगम भी प्रतीत हुई।
अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाने वाली अजीत कुमारी कुजूर ने जबलपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और योग में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वह जल संसाधन विभाग, रायपुर में उप अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ, उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी नृत्य कला से एक विशिष्ट पहचान बनाई है। कला प्रेमियों ने उनकी प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल भरतनाट्यम की उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि लगन और समर्पण से कोई भी व्यक्ति अपने पेशेवर जीवन के साथ-साथ अपनी कला साधना को भी नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। ज्ञात हो कि भरतनाट्यम तमिलनाडु, दक्षिण भारत का एक प्राचीन शास्त्रीय नृत्य है, जिसकी जड़ें मंदिरों में हैं और यह हिंदू धर्म की आध्यात्मिक विचारों और धार्मिक कहानियों को व्यक्त करता है।
चक्रधर समारोह 2025: सुर-ताल और घुंघरू की सतरंगी छटा, मल्लखंभ दल रहा आकर्षण का केंद्र
देश ही नहीं, पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित हो रहा है चक्रधर समारोह-केंद्रीय राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अठावले ने समारोह के आठवें दिन के कार्यक्रम का किया विधिवत शुभारंभ
रायपुर, 04 सितम्बर 2025
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह 2025 का आठवां दिन विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और लोक-शास्त्रीय कलाओं की अनूठी छटा से सराबोर रहा। रामलीला मैदान में आयोजित सुर, ताल, छंद और घुंघरू के आठवें दिन कलाकारों की सजीव प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और समारोह की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार श्री रामदास अठावले ने भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना, राजा चक्रधर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर तथा दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने कहा कि राजा चक्रधर सिंह केवल रायगढ़ के नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव हैं। वे एक महान शासक, समाजसेवी और संगीत साधक थे। गरीबों, किसानों, मजदूरों और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए उन्होंने कार्य किया और कथक को नया आयाम देकर ‘रायगढ़ घराने‘ की स्थापना की। आज उनका यह सांगीतिक धरोहर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सम्मान पा रहा है। इस मौके पर राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, नगर निगम रायगढ़ महापौर श्री जीवर्धन चौहान सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

चक्रधर समारोह में आठवें दिन का मुख्य आकर्षण अबूझमाड़ का प्रसिद्ध मल्लखंभ दल रहा। उनकी रोमांचक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उत्साहित कर तालियों से सभागार गूंजा दिया। इस अवसर पर रायपुर की आशिका सिंघल, संगीता कापसे संगीत कला अकादमी रायपुर, दुर्ग की देविका दीक्षित, बिलासपुर की श्रीमती वासंती वैष्णव एवं टीम, जबलपुर की श्रीमती निलांगी कालान्तरे और बेंगलुरु के डॉ.लक्ष्मी नारायण जेना ने कथक की विभिन्न शैलियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। रायपुर की श्रीमती अजीत कुमारी कुजूर ने भरतनाट्यम और मुंबई के श्री अर्नव चटर्जी ने मधुर गायन से समा बांध दिया। चक्रधर समारोह के अवसर पर पद्मश्री स्व. डॉ. सुरेन्द्र दुबे की स्मृति में विशेष काव्य संध्या का आयोजन हुआ। कवियों की प्रस्तुतियों में हास्य, वीर रस और व्यंग्य का सुंदर संगम देखने को मिला। दर्शक देर तक तालियों से कवियों का उत्साहवर्धन करते रहे।


अबूझमाड़ के विश्व प्रसिद्ध मल्लखंब दल ने दिखाया ताकत, संतुलन और लचीलेपन का अद्भुत संगम
चक्रधर समारोह में उस समय अविस्मरणीय बन गई, जब अबूझमाड़ से आए श्री मनोज प्रसाद के नेतृत्व में मल्लखंब दल ने मंच पर प्रवेश किया। परंपरा, अनुशासन और अद्भुत संतुलन के साथ खिलाडिय़ों ने ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा कार्यक्रम स्थल रोमांचित हो उठा। बस्तर और नारायणपुर के छोटे-छोटे गांवों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचे इंडियाज गॉट टैलेंट सीजन-10 के विजेता नरेंद्र गोटा और फुलसिंह सलाम ने अपने साथियों संग अद्भुत मल्लखंब कला की प्रस्तुति दी।


मंच पर कलाकारों ने खंभे पर कौशल, कला व जिम्नास्टिक की अद्भुत मुद्राओं का प्रदर्शन किया, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस प्रस्तुति ने साबित कर दिया कि सुदूर वनांचल की प्रतिभाएं अब विश्व मंच तक अपनी पहचान दर्ज करा रही हैं। समारोह में उपस्थित हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों से इन कलाकारों की सराहना की और उन्हें छत्तीसगढ़ का गौरव बताया। यह वही दल है जिसने 2023 में इंडियाज गॉट टैलेंट सीजन 10 जीतकर पूरे देश का दिल जीता था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी इन कलाकारों ने भारत का परचम लहराया है।


इन कलाकारों की सफलता के पीछे है अबूझमाड़ मल्लखंब अकादमी, जो 2018 से आदिवासी अंचलों के बच्चों को प्रशिक्षण देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रही है। अब तक इस अकादमी के 500 से अधिक राष्ट्रीय पदक विजेता तैयार हो चुके हैं और 50 से अधिक बच्चे यहाँ रहकर शिक्षा एवं मल्लखंब की विधिवत ट्रेनिंग ले रहे हैं। इनके प्रशिक्षक मनोज प्रसाद ने अपनी मेहनत, समर्पण और जुनून से इन बच्चों को विश्वस्तरीय मंच दिलाया है।
चक्रधर समारोह 2025 : आठवें दिन कथक की प्रस्तुतियों ने बाधा समां
सात वर्षीय कलाकार सहित दुर्ग, बेंगलुरू, रायगढ़ और जबलपुर के कलाकारोें ने दी प्रस्तुतियां
रायपुर, 04 सितंबर 2025


चक्रधर समारोह का आठवां दिन कथक नृत्य की प्रस्तुतियों से सराबोर रहा। रायगढ़ में आयोजित इस समारोह में आठवें दिन मंच पर सात वर्षीय कथक नृत्यांगना अंशिका सिंघल के साथ दुर्ग, बेंगलुरू, रायगढ़ घराने, जबलपुर के कथक कलाकरों ने अनुपम प्रस्तुतियां दी।

सात वर्षीय आशिका सिंघल की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन
चक्रधर समारोह के आठवें दिन का शुभारंभ नन्हीं बाल कलाकार आशिका सिंघल की कथक नृत्य प्रस्तुति से हुआ। केवल 7 वर्ष की आयु में ही आशिका ने अपनी सधी हुई ताल और भावपूर्ण अभिनय से उपस्थित दर्शकों का दिल जीत लिया। आशिका ने मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो जैसे भक्ति गीत पर कथक नृत्य प्रस्तुत कर मंच की गरिमा बढ़ाई। उनकी लय, ताल और भावाभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रायपुर की बाल कलाकार आशिका सिंघल विगत चार वर्षों से कथक की साधना कर रही हैं। उन्होंने विद्यालय एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कई उपलब्धियां हासिल की हैं।

दुर्ग की देविका दीक्षित ने कथक में परंपरा और नवाचार का अनूठा संगम प्रस्तुत किया
दुर्ग की कथक नृत्यांगना देविका दीक्षित ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। लगभग चौबीस वर्षों से कथक साधना में रमीं देविका ने परंपरा और नवीनता का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसमें भाव, लय और ताल की उत्कृष्टता स्पष्ट झलकी। उनकी प्रस्तुति में कथक की गहराई के साथ आधुनिक दृष्टि का समावेश दिखाई दिया। दर्शकों ने इस प्रतिभाशाली कलाकार के समर्पण और साधना से सजी प्रस्तुति को तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ सराहा।
देविका दीक्षित ने पाँच वर्ष की उम्र से ही नृत्य यात्रा की शुरुआत की और गुरु श्रीमती उपासना तिवारी एवं आचार्य पंडित कृष्ण मोहन मिश्र से प्रशिक्षण प्राप्त किया। कथक में ‘कोविद‘ और ‘विशारद‘ उपाधियाँ अर्जित करने के साथ उन्हें नेशनल नृत्य शिरोमणि पुरस्कार, श्रेष्ठ भारत सम्मान और गोपीकृष्ण नेशनल अवॉर्ड सहित कई राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। दिल्ली के कामानी ऑडिटोरियम से लेकर बनारस लिट फेस्ट तक उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन कर सराहना प्राप्त की है। नृत्य के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी देविका ने अपनी अलग पहचान बनाई है। लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज से अर्बन डिजाइन में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद वे वर्तमान में आईआईएम, रायपुर से एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं।


बेंगलुरु के डॉ.लक्ष्मीनारायण जेना और उनकी टीम की कथक प्रस्तुति ने रचा अद्भुत समा
बेंगलुरू के प्रख्यात कथक कलाकार डॉ. लक्ष्मीनारायण जेना और उनकी टीम ने कथक की ऐसी अनुपम प्रस्तुति दी कि दर्शक भावविभोर होकर तालियों की गडग़ड़ाहट से सभागार गूंजाते रहे। डॉ. जेना ने लखनऊ-जयपुर घराने की बारीकियों को अपने नृत्य में समाहित कर भारतीय परंपरा और संस्कृति का अद्भुत चित्रण प्रस्तुत किया। उनकी भाव-भंगिमाएं, पदचालन और ताल की सटीकता ने कथक की शास्त्रीयता को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रस्तुति में उनके साथ श्री मैसुर बी.नागराज, श्री अजय कुमार सिंह, श्री रघुपति झा और श्री विजय ने संगत कर समां और भी भव्य बना दिया। भाव, राग और ताल के इस अनूठे संगम ने समारोह में उपस्थित कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रायगढ़ घराने की कथक परंपरा को वासंती वैष्णव ने किया जीवंत
रायगढ़ घराने की विशिष्ट छाप छोड़ते हुए बिलासपुर की सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना श्रीमती वासंती वैष्णव, सुश्री ज्योतिश्री और उनकी टीम ने शास्त्रीय नृत्य की ऐसी मोहक प्रस्तुति दी, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश स्तुति से हुई, जिसके पश्चात तबले की उठान, शिव तांडव, तबला और घुंघरुओं की जुगलबंदी तथा वर्षा ऋतु की अद्भुत झलकियों को नृत्य में पिरोया गया। सुर, ताल और भाव की इस अनूठी संगति ने सभागार में ऐसा वातावरण निर्मित किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध होकर तालियों की गडग़ड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।
ज्ञात हो कि रायगढ़ घराने की स्थापना राजा चक्रधर सिंह द्वारा की गई थी। कला-संरक्षक के रूप में उनकी दूरदृष्टि और नृत्य-प्रेम के कारण विभिन्न घरानों के महान गुरुओं व कलाकारों ने रायगढ़ को अपना केंद्र बनाया। यहीं से मेघ पुष्प, चमक बिजली, ब्रह्म बीज और दाल-बादल परन जैसी अनुपम नृत्य बंदिशों की रचना हुई, जो आज भी रायगढ़ घराने की पहचान बनी हुई हैं। इस घराने की एक विशेषता यह भी है कि इसके कलाकार या तो अत्यंत धीमी या फिर अत्यंत तेज गति में अपनी प्रस्तुति देते हैं, जो कथक की गहराई और विविधता को दर्शाता है। श्रीमती वासंती वैष्णव ने रायगढ़ घराने की शिक्षा अपने पिता व सुप्रसिद्ध कलागुरु श्री फिरतूराम महाराज से प्राप्त की है। कठोर साधना और संगतिक अनुशासन के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें देश की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगनाओं की श्रेणी में स्थापित किया है। वे देश के प्रमुख कला मंचों पर अपनी अद्वितीय प्रस्तुतियों से रायगढ़ घराने की परंपरा को निरंतर आगे बढ़ा रही हैं।

जबलपुर की कथक गुरु नीलांगी कालांतरे ने बिखेरी कला की छटा
कथक की प्रख्यात गुरु नीलांगी कालांतरे ने अपनी विलक्षण प्रस्तुति से ऐसा समां बाँधा कि पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूँज उठा। उनकी साधना, भाव-भंगिमा और मनमोहक नृत्य मुद्राओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुरु नीलांगी कालांतरे ने सात वर्ष की आयु से कथक की शिक्षा आरंभ की। उन्हें यह ज्ञान गुरु शरदिनी गोले जी और पंडित रोहिणी भाटे जैसे विख्यात गुरुओं से प्राप्त हुआ। लगभग तीन दशकों से अधिक समय से वे कथक की परंपरा को साधते हुए इसे नई ऊँचाइयों पर पहुँचा रही हैं। मंच पर उनकी उपस्थिति मात्र ने ही वातावरण को आध्यात्मिक और कलात्मक ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने पारंपरिक कथक की बारीकियों के साथ आधुनिक प्रयोगों का ऐसा सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को शास्त्रीय नृत्य की गहराई से अवगत कराया। भक्ति और लयात्मकता से ओतप्रोत उनकी प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि कला साधना केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
चक्रधर समारोह 2025: काव्य संध्या में गूंजा हास्य, वीर रस और व्यंग्य का संगम
रायपुर, 04 सितंबर 2025


अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह में आठवें दिन हास्य, वीर रस और व्यंग्य के साथ काव्य पाठ और मधुर गीत-गायन-संगीत की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह की आठवीं शाम छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि पद्मश्री स्व.डॉ.सुरेन्द्र दुबे की स्मृतियों को नमन करते हुए एक विशेष काव्य संध्या का आयोजन रायगढ़ के रामलीला मैदान में हुआ। पद्मश्री डॉ.दुबे, जिन्होंने हास्य और व्यंग्य को वैश्विक पहचान दिलाई, अनेक बार इस मंच पर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदा चुके थे। उनकी स्मृतियों को समर्पित इस संध्या में प्रदेश के ख्यात कवियों ने वीर रस, हास्य और व्यंग्य की रचनाओं से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।


समारोह में राजनांदगांव के पद्मलोचन मुंहफट ने हास्य, व्यंग्य और पैरोडी से हंसी की फुहारें बिखेरीं। भिलाई के किशोर तिवारी ने अपने मधुर गीतों से श्रोताओं के दिलों को छू लिया। मुंगेली के देवेन्द्र परिहार ने ओजस्वी वीर रस की कविताओं ने वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। रायपुर की शशि सुरेन्द्र दुबे ने गीत और व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया और सोचने पर विवश किया। रायगढ़ के नरेन्द्र गुप्ता ने वीर रस की कविताओं ने देशभक्ति और पराक्रम की भावना को जीवित किया।



बिलाईगढ़ के बंशीधर मिश्रा ने हास्य कविताओं की चुटीली पंक्तियों से माहौल को खुशनुमा बना दिया। कवर्धा के अभिषेक पांडे ने युवा ऊर्जा और समकालीन व्यंग्य से भरी हास्य कविताओं ने मंच को जीवंत किया। बता दे कि गत वर्ष आयोजित 39वें चक्रधर समारोह में डॉ.दुबे ने अपनी चिरपरिचित पैनी व चुटीली कविताओं से मंच को हँसी और व्यंग्य से गूंजा दिया था। अब वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी साहित्य साधना और कला अवदान अमर है। इस काव्य संध्या ने उनके योगदान को सच्ची श्रद्धांजलि दी।

कवियों का परिचय
शशि सुरेंद्र दुबे-छत्तीसगढ़ की जानीमानी कवयित्री और दिवंगत डॉ.सुरेंद्र दुबे की धर्मपत्नी हैं। उन्होंने ‘वाह वाह क्या बात है‘ जैसे कई टीवी कार्यक्रमों और दूरदर्शन पर काव्य पाठ किया है। उनका काव्य संग्रह ‘पट्टी खोलो गांधारी‘ प्रकाशित हो चुका है। किशोर तिवारी-मधुर गीतकार हैं, जो वाह वाह क्या बात है समेत विभिन्न राष्ट्रीय मंचों, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर काव्य पाठ कर चुके हैं। पद्मलोचन मुंहफट-पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे के शिष्य, पद्मलोचन हास्य-व्यंग्य और पैरोडी के लिए मशहूर हैं। उन्होंने देश के 16 राज्यों में काव्य पाठ कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। देवेन्द्र परिहार-वीर रस के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ज़ी न्यूज़ के कवि युद्ध सहित कई राष्ट्रीय और प्रादेशिक चौनलों पर काव्य पाठ किया है। नरेंद्र गुप्ता-रायगढ़ के मूल निवासी और वीर रस के कवि हैं। उन्हें अटल साहित्य सम्मान और दिनकर साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। बंशीधर मिश्रा-ख्यात हास्य कवि, जो देश के कई राज्यों में काव्य पाठ और मंच संचालन कर चुके हैं। वे वाह भाई वाह टीवी शो में भी 6 एपिसोड में शामिल हुए थे। उनकी हास्य संग्रह ‘भूतहा लोरी‘ प्रकाशित हो चुकी है और उन्हें धुरंधर हास्य सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया है। अभिषेक पांडे-युवा कवि, वक्ता और आयोजक हैं, जो अपनी वक्ता कला के लिए युवा पुरस्कार से सम्मानित हैं। वे दूरदर्शन सहित विभिन्न निजी चौनलों पर काव्य पाठ कर चुके हैं।


मुंबई के विख्यात संगीतकार एवं गायक अर्नव चटर्जी की सुमधुर तान की गूंज मधुर रागों से सजी प्रस्तुति, श्रोताओं के दिलों में उतरा संगीत का रस
सुप्रसिद्ध संगीतकार एवं गायक अर्नव चटर्जी ने अपनी अनूठी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्में और ऑल इंडिया रेडियो, मुंबई से प्रमाणित गायक अर्नव चटर्जी ने भजन, गज़ल और गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी मधुर आवाज़ और सुर-ताल की अद्भुत संगति ने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान अर्नव चटर्जी ने फिल्म, टीवी सीरियल, म्यूज़िक एल्बम और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के लिए किए गए अपने सृजनात्मक योगदान की झलक भी प्रस्तुत की। संगीत प्रेमियों ने उन्हें खड़े होकर तालियों से सम्मानित किया। चक्रधर समारोह की इस संध्या में उनकी प्रस्तुति ने न केवल भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया बल्कि अर्नव चटर्जी की संगीतमयी संध्या ने समारोह को अविस्मरणीय बना दिया।
नए मंत्री ने थामा संस्कृति और पर्यटन की कमान, जानिए राजेश अग्रवाल ने कामकाज संभालते ही क्या दिए संकेत…
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के नवनियुक्त पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज मंत्रालय महानदी भवन में विधिवत पूजा-अर्चना कर अपना पदभार संभाला।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, विधायक अनुज शर्मा, संपत अग्रवाल, प्रबोध मिंज, मती उद्धेश्वरी पैंकरा, सहित कई जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने मंत्री अग्रवाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएँ दीं।
???? पर्यटन और संस्कृति पर जोर
पदभार संभालने के बाद मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में तेज़ी से काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा – “छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति की अपार संभावनाएँ हैं। पर्यटन क्षेत्र के विकास से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।”
???? सड़क कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा
मंत्री अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की मदद से राज्य में सड़क कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हो रहा है, जिसका सीधा लाभ पर्यटन को मिलेगा। नई सड़कों की स्वीकृति के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया।
???? अधिकारी भी रहे मौजूद
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, संस्कृति विभाग के सचिव रोहित यादव, पर्यटन मंडल के जनरल मैनेजर वेदव्रत सिरमौर, माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव मती पुष्पा साहू समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
रायपुर का नाम रोशन: NIT-FIE को मिलेगा ‘नेशनल इन्क्यूबेटर अवॉर्ड’, जानिए किस काम से जीता देशभर का दिल…
रायपुर, 04 सितंबर 2025।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चमका है। एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (FIE) को राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार से नवाजा जाएगा। यह सम्मान 13 सितंबर को नई दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित चौथे भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा।
???? क्यों मिल रहा है पुरस्कार?
FIE को यह सम्मान छत्तीसगढ़ में 40 से अधिक स्टार्टअप्स को तकनीकी सहयोग, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सपोर्ट देने के लिए दिया जा रहा है। संस्था ने स्वास्थ्य, डीप-टेक, क्लीन टेक, एनालिटिक्स और ICT जैसे विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप्स को खड़ा करने में अहम योगदान दिया है।
✨ CM विष्णुदेव साय की बधाई
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर कहा – “एनआईटी रायपुर-FIE को मिला यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। यह न सिर्फ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा बल्कि राज्य को नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।”
???????? NIT रायपुर की बड़ी उपलब्धि
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मार्च 2021 में गैर-लाभकारी संस्था के रूप में हुई स्थापना।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) की राष्ट्रीय नवाचार विकास और दोहन पहल (निधि योजना) के तहत संचालन।
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अब तक 35+ स्टार्टअप्स को मिला सहयोग।
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गवर्नेंस और मेडिकल डिवाइस निर्माण से लेकर क्लीन टेक और डीप-टेक क्षेत्रों तक सक्रिय स्टार्टअप्स।
???? टीम और नेतृत्व
संस्थान का संचालन डॉ. एन. वी. रमना राव (निदेशक) और डॉ. समीर बाजपेयी (कैरियर डेवलपमेंट सेंटर प्रमुख) के नेतृत्व में हो रहा है। वहीं डॉ. अनुज कुमार शुक्ला, श्री पवन कटारिया और सीईओ श्रीमती मेधा सिंह मिलकर इस इन्क्यूबेटर को नई ऊंचाई दे रहे हैं।
???? युवाओं के लिए अवसर
एनआईटी रायपुर-FIE स्टार्टअप शुरू करने के इच्छुक युवाओं को कंपनी बनाने, टेक्नोलॉजी मार्गदर्शन और निवेश नेटवर्किंग तक हर तरह का सहयोग देता है।
CM साय की सख्त मॉनिटरिंग: बाढ़ पीड़ितों को राशन-इलाज के बाद अब ‘नये जीवन’ की दस्तावेजी मदद…
रायपुर, 04 सितम्बर 2025।
बस्तर संभाग में हाल ही में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। विदेश दौरे से लौटने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेवाड़ा में संभागीय बैठक कर जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए थे कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
उनके निर्देशों पर त्वरित अमल करते हुए प्रशासन अब पीड़ितों को राशन, इलाज, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरत की चीजों के साथ-साथ खोए हुए दस्तावेज बनाने का काम भी शुरू कर चुका है।
???? राहत से पुनर्वास तक – सरकार का संकल्प
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बाढ़ पीड़ितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और बैंक पासबुक उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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किसान किताब का वितरण शुरू हुआ है, जिससे प्रभावित किसान सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
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जिला प्रशासन की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और पात्र परिवारों के खाते में तुरंत राहत राशि ट्रांसफर कर रही हैं।
सरकार ने मकान क्षति, पशुधन, फसल और घरेलू सामग्री तक का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर मुआवजा देने की पारदर्शी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
✨ प्रभावितों ने जताया आभार
मांदर गाँव के एक किसान मुरहा पटेल ने कहा – “हमें लगा था बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की त्वरित मदद ने हमें जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है।”
???? संवेदनशील पहल
मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर चल रही इस मुहिम को लोग प्रशासन का “मानवीय दृष्टिकोण” मान रहे हैं। यह सिर्फ तत्काल राहत ही नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और पुनर्वास की दिशा में भी एक ठोस कदम है।
करमा तिहार के रंग में डूबा CM हाउस: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की पूजा-अर्चना, कही बड़ी बात संस्कृति और परंपरा पर…
रायपुर, 04 सितम्बर 2025।
राजधानी रायपुर के मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार को करमा तिहार 2025 का भव्य आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की और करमा दलों को सम्मानित किया।
✨ CM बोले – संस्कृति हमारी धरोहर
मुख्यमंत्री साय ने कहा – “हमारी संस्कृति और परंपरा हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इसे जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व समाज को एकजुट करते हैं और आपसी स्नेह व सौहार्द की भावना को मजबूत करते हैं।”
उन्होंने बताया कि आदिवासी संस्कृति में करमा तिहार कई रूपों में मनाया जाता है – एकादशी करमा, दशहरा करमा और जियुत पुत्रिका करमा। ये पर्व बेटियों के अच्छे वर, गृहस्थ जीवन और संतान के दीर्घायु जीवन की कामना के प्रतीक हैं।
???? आदिवासी संस्कृति पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का योगदान अमूल्य रहा है। छत्तीसगढ़ में अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। नया रायपुर में बनने जा रहे ट्राइबल म्यूजियम में इन्हें प्रदर्शित किया जाएगा, जिसका शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।
साय ने यह भी कहा कि आदिवासी सशक्तिकरण के लिए नई उद्योग नीति बनाई गई है, जिसमें बस्तर और सरगुजा क्षेत्र को विशेष रियायतें दी जा रही हैं। साथ ही आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए राज्य में ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की जा रही है।
???? “करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व”
वन मंत्री केदार कश्यप ने करमा पर्व को गौरवशाली परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बस्तर पांडुम ओलंपिक जैसे आयोजनों ने छत्तीसगढ़ की पहचान को नई ऊँचाई दी है।
अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति की संरक्षक मती कौशिल्या साय ने कहा – “आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है और इसके संरक्षण में महिलाओं की अहम भूमिका है।”
???? कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद रहे
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित कई मंत्री, विधायक और कंवर समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
CG Accident: सड़क पर अचानक मौत का मंजर… गाय को बचाने की कोशिश में पेड़ से भिड़ी कार, महिला की मौके पर मौत – पति जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हो गया। सकरी थाना क्षेत्र के भरनी के पास तेज रफ्तार कार अचानक सड़क पर आए मवेशी को बचाने के चक्कर में अनियंत्रित हो गई और सीधे पेड़ से जा टकराई।
हादसा इतना भयावह था कि कार में सवार महिला की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसका पति, बहू और एक मासूम बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गए। डॉक्टरों के अनुसार महिला के पति की हालत नाज़ुक है और उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
???? कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार भरनी की ओर जा रही थी। अचानक सड़क पर गाय आ गई। चालक ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन कार का संतुलन बिगड़ गया और वह जोरदार टक्कर के साथ सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। हादसे में कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।
???? ग्रामीणों की तत्परता
ग्रामीणों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को कार से बाहर निकाला और अस्पताल रवाना किया। महिला की बहू और बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
❗ हादसों की बड़ी वजह बने मवेशी
इस घटना ने एक बार फिर से सड़कों पर घूमते मवेशियों की समस्या को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि खुले में छोड़े गए पशु आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, लेकिन इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
करमा तिहार के रंग में रंगा सीएम हाउस: आदिवासी संस्कृति, पीएम मोदी का आगमन और नए संकल्पों का ऐलान
रायपुर। मुख्यमंत्री निवास नवा रायपुर में इस बार का करमा तिहार कुछ अलग ही नजारा पेश कर रहा था। छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत-2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद शामिल हुए और परंपरागत ढंग से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि “हमारी संस्कृति पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है, जिसे जीवंत रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने बताया कि करमा तिहार जैसे पर्व समाज को एकजुट करने और बेटियों की मंगलकामना के साथ-साथ सद्भाव और सौहार्द का संदेश भी देते हैं।
✨ आदिवासी गौरव और बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर 12 बड़ी आदिवासी क्रांतियाँ हुईं, जिनकी झलक अब जल्द ही नवा रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में देखने को मिलेगी। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 साल पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है, और उनके हाथों इस म्यूजियम का शुभारंभ होगा।
???? संस्कृति और सशक्तिकरण
साय ने आगे कहा कि आदिवासी समाज के सशक्तिकरण के लिए नई उद्योग नीति, शिक्षा संस्थानों की स्थापना, और पीएम जनमन योजना जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। युवाओं को स्वरोजगार और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।
???? नेताओं के विचार
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बस्तर पांडुम जैसे आयोजन ने पूरे देश में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है।
अखिल भारतीय कंवर समाज की संरक्षक कौशिल्या साय ने कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के पूरक हैं। करमा पर्व इसी प्रकृति प्रेम और परंपरा का प्रतीक है।













